🌹🌹🌹🌹🌹जय माता दी🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹

🌹🌹🌹🌹🌹जय माता दी🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

Radhe Krishna Mar 5, 2021
जय माता दी🙏🙏 शुभ प्रभात वंदन🌹🌹

sita Mar 5, 2021
J🍀🌷👏ay Mata Di👏🌷🍀 Dadaji Mata Rani aapki Har manokamna Puri Karen aapko Hamesha Swasth rakhte🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🍫🍫👌👌👌

Ravi Kumar Taneja Mar 5, 2021
🌹🌹🌹सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🌹🌹🌹 आप पर माता रानी की कृपादृष्टि बनी रहे जी 🙏🌼🙏 🙏🌸🙏 जय माता दी 🙏🌸🙏

Vanita kale Mar 5, 2021
🙏🚩!!जय माता दी!! 🚩🙏🙏🍁माताराणी की कृपा बरसाती रहे.!! हर दम..सुख शांति समृद्धि मिले. ...जीवन में ना आऐ.. काेई गम 🙏मेरे आदरणीय आप का दिन और मंगलमय हाे...!!

Renu Singh Mar 5, 2021
Jai Mata Di 🚩🙏 Shubh Prabhat Vandan Bhai Ji 🙏🌹 Mata Rani ki Anant kripa Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bni rhe Aàpka Din Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Mar 5, 2021
जय मां लक्ष्मी जी सुप्रभात वंदन मेरे प्यारे आदरणीय भाई जी 🙏🌷🙏मां लक्ष्मी जी सदा आप के घर में निवास करती रहे धन धान्य सुख सम्पत्ति से आपके भण्डार भरे रखे आप हमेशा सुखी और स्वस्थ रहे सुरक्षित रहे आप का सदा मगंल हो मेरे प्यारे भाई जी 🙏🙌🥥💰🥥💰🥥💰🥥💰🥥💰🥥💰🥥

Mamta Chauhan Mar 5, 2021
Jai mata di🌷🙏Shubh prabhat vandan mere bade bhaiya ji aapka har pal khushion bhra ho aapki sbhi manokamna puri ho 🌷🌷🙏🙏

Malti Singh Mar 5, 2021
जय मां लक्ष्मी जी 🙏 शुभ दोपहर वंदन भाई जी 🙏🌿🌸🌿🌸🌿🌸🌿

Malti Singh Mar 5, 2021
जय माता दी 🙏 शुभ संध्या वंदन भाई जी 🙏🌿🌸🌿🌸🌿🌸🌿

Neha Sharma, Haryana Mar 5, 2021
🙏जय माता की🙏शुभ संध्या नमन🙏 🚩🙏माता रानी की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी। आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भाईजी🙏🌸 🙏🌸जय-जय श्री राधेकृष्णा🌸🙏

Jai Mata Di Apr 11, 2021

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।। नाग स्तोत्रम् ।। ब्रह्म लोके च ये सर्पाः शेषनागाः पुरोगमाः । नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥१॥ विष्णु लोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाचये । नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥२॥ रुद्र लोके च ये सर्पाः तक्षकः प्रमुखास्तथा। नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥३॥ खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गन्च ये च समाश्रिताः। नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥४ ॥ सर्प सत्र च ये सर्पाः अस्थिकेनाभि रक्षिताः। नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥५॥ प्रलये चैव ये स्पाः काक्कोट प्रमुखाश्षये नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥६॥ धर्म लोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः । नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥७॥ ये सर्पाः पर्वत येषु धारि सन्धिषु संस्थिताः नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥८॥ ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति च नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥९॥ पृथिव्याम् चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिल संस्थिताः। नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥१०॥ रसातले च ये सर्पाः अनन्तादि महाबलाः। नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥११॥ ।। इति नाग स्तोत्रम् ।।

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