suresh Chandra yadav
suresh Chandra yadav Mar 27, 2020

+10 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 33 शेयर

कामेंट्स

kedarnath patle Mar 28, 2020
जय माता कूष्माण्डा देवी 🔱🚩

🙏🚩 जय श्री महाकाल🚩🙏 🔥 अपने शौर्य, पराक्रम और बहादुरी के लिए पहचाने जाने वाले अमर बलिदानी राजा महाराणा प्रताप मेवाड़ के राजा (King of Mewar) महाराणा प्रताप एक ऐसा नाम है, जिनकी कहानियों से इतिहास के पन्ने भरे हुए हैं। उन पर बहुत सी फिल्में बनीं, शोध हुए और कई भाषाओं में किताबें भी लिखी गईं। बावजूद आज भी लोग महाराणा प्रताप के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं। आज भी देशवासी महाराणा प्रताप का नाम गर्व से लेते हैं और उनका नाम लेते ही रगों में देशभक्ति और बहादुरी अपने आप दौड़ पड़ती है। उनकी जयंती की पूर्व संध्या पर आपको महाराणा प्रताप के 10 वचन और उनसे जुड़ी 10 दिलचस्प कहानियों के बारे में बता रहा हूँ । साथ ही आपको हल्दी घाटी (Battle of Haldighati) में लड़े गए उनके युद्ध और उनके युद्ध के हथियारों से संबंधित रोचक जानकारी से भी अवगत करवा रहा हूँ। 🔥 महाराणा प्रताप, मेवाड़ के 13वें राजपूत राजा थे। उनका जन्म मेवाड़ के शाही राजपूत परिवार, 09 मई 1540 को हुआ था। राजस्थान के कुंभलगढ़ में जन्में महाराणा प्रताप, महाराणा उदयसिंह और महारानी जयवंती की संतान थे। महाराणा प्रताप को जितना उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है, उतनी ही उनकी दरियादिली और प्रजा व राज्य से उनका प्रेम जगजाहिर है। हल्दी घाटी में मुगल शासक अकबर के खिलाफ लड़ा गया उनका युद्ध इतिहास के सबसे चर्चित युद्ध में से है। इस युद्ध में अपनी छोटी सी सेना के साथ, उन्होंने मुगलों की विशाल सेना को नाकों चने चबवा दिए। जंगल में रहकर घास की रोटी खाने का महाराणा प्रताप का किस्सा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। 🔥 महाराणा प्रताप के युद्ध हथियार 1. महाराणा प्रताप युद्ध के वक्त हमेशा एक भाला अपने साथ रखते थे, जिसका वजन 81 किलो था। वह इस भाले को एक हाथ से नजाते हुए दुश्मन पर टूट पड़ते थे। 2. युद्ध के वक्त महाराणा प्रताप 72 किलो का कवच पहनते थे। 3. इतिहासकारों के अनुसार महाराणा प्रताप के भाले, कवच, ढाल और दो तलवारों का वजन कुल मिलाकर 208 किलोग्राम होता था। 4. महाराणा प्रताप के हथियार इतिहास के सबसे भारी युद्ध हथियारों में शामिल हैं। 🔥 महाराणा प्रतापः परिचय व परिवार 1. महाराणा प्रताप का जन्म 09 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ में हुआ था। 2. महाराणा प्रताप ने राजनैतिक वजहों से कुल 11 शादियां की थीं। 3. महाराणा प्रताप के कुल 17 बेटे और 05 बेटियां थीं। 4. महारानी अजाब्दे से पैदा हुए पुत्र अमर सिंह को महाराणा प्रताप का उत्तराधिकारी बनाया गया था। 5. अमर सिंह भी अपने पिता महाराणा प्रताप की तरह काफी बहादुर और पारक्रमी थे। 6. इतिहासकारों के अनुसार हल्दी घाटी युद्ध के वक्त अमर सिंह की आयु 17 वर्ष थी। 7. मेवाड़ की रक्षा करते हुए महाराणा प्रताप की 19 जनवरी 1597 को मृत्यु हुई थी। 8. बताया जाता है कि महाराणा प्रताप की मौत पर मुगल शासक अकबर भी बहुत दुखी हुआ था। 9. अकबर दिल से महाराणा प्रताप के गुणों, उनकी बहादुरी और चरित्र का बहुद बड़ा प्रशंसक था। 🔥 महाराणा प्रताप के 10 वाक्य 1. समय इतना ताकतवर होता है कि एक राजा को भी घास की रोटी खिला सकता है। 2. मनुष्य का गौरव व आत्म सम्मान उसकी सबसे बड़ी कमाई होती है। इसलिए इनकी सदैव रक्षा करनी चाहिए। 3. अपने व अपने परिवार के साथ जो अपने राष्ट्र के बारे में भी सोचते हैं, वही सच्चे नागरिक होते हैं। 4. तब तक परिश्रम करो, जब तक तुम्हे तुम्हारी मंजिल न मिल जाए। 5. अन्याय व अधर्म आदि का विनाश करना पूरी मानव जाति का कर्तव्य है। 6. जो अत्यंत विकट परिस्थिति में भी हार नहीं मानते हैं, वो हार कर भी जीत जाते हैं। 7. जो सुख में अतिप्रसन्न और विपत्ति में डर कर झुक जाते हैं, उन्हें न तो सफलता मिलती है और न ही इतिहास उन्हें याद रखता है। 8. अगर सांप से प्रेम करोगे तो भी वह अपने स्वभाव अनुरूप कभी न कभी डसेगा ही। 9. शासक का पहला कर्तव्य अपने राज्य का गौरव और सम्मान बचाए रखना होता है। 10. अपना गौरव, मान-मर्यादा और आत्म सम्मान के आगे जीवन की भी कोई कीमत नहीं है। 🔥 महाराणा प्रताप के 10 रोचक किस्से 1. महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय घोड़े का नाम चेतक था। महाराणा प्रताप की तरह उनका घोड़ा भी बहुत बहादुर और समझदार था। 2. महाराणा प्रताप को बचपन में प्यार से कीका कहकर बुलाया जाता था। 3. महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर के बीच हल्दी घाटी का विनाशकारी युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। इतिहास में हल्दी घाटी के युद्ध की तुलना महाभारत के युद्ध से की गई है। 4. इतिहासकारों के अनुसार हल्दी घाटी के युद्ध में न तो अकबर की जीत हुई थी और न ही महाराणा प्रताप हारे थे। इसकी वजह महाराणा प्रताप के मन में राज्य की सुरक्षा का अटूट जज्बा था। 5. हल्दी घाटी के युद्ध को टालने के लिए अकबर ने छह बार महाराणा प्रताप के पास अपने शांति दूत भेजे, लेकिन राजपूत राजा ने हर बार अकबर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 6. हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने मात्र 20 हजार सैनिकों के साथ मुगल बादशाह अकबर के 80 हजार सैनिकों का डटकर सामना किया था। बावजूद अकबर महाराणा प्रताप को झुका नहीं सका था। 7. महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और वफादार घोड़े ने भी दुश्मनों के सामने अद्भुत वीरता का परिचय दिया था। हालांकि इसी युद्ध में घायल होने से उसकी मौत हुई थी। 8. चित्तौड़ की हल्दी घाटी में आज भी महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक की समाधि मौजूद है। 9. चेतक ने अंतिम दम तक महाराणा प्रताप का साथ दिया। युद्ध में मुगल सेना से घिरने पर चेतक महाराणा प्रताप को बैठाकर कई फील लंबा नाला फांद गया था। 10. महाराणा प्रताप जितने बहादुर थे, उतने ही दरियादिल और न्याय प्रिय भी। एक बार उनके बेटे अमर सिंह ने अकबर के सेनापति रहीम खानखाना और उसके परिवार को बंदी बना लिया था। महाराणा ने उन्हें छुड़वाया था। 🌐http://www.vkjpandey.in 🙏🚩 हर हर महादेव🚩🙏

+126 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 152 शेयर

*🚩🙏बुरा समय आपके जीवन के उन सत्यों से सामना करवाता है ,* *जिनकी आपने अच्छे समय में कभी कल्पना भी नहीं की होती ...* *आप के अच्छे समय मे आप के हितैसी बहुत होंगे, लेकिन जब भी तकलीफ का समय आएगा तब कुछ चुनिंदा ही दिखेंगे, जो आप को हिम्मत देगे,आगे बढ़ने का हौसला देगे,* *ईश्वर ने सब की समस्या का समाधान भी दिया है, बस आप को अपने धैर्य से विवेक से परिस्थितियों को सुलझाना है, अक्सर हम दोष देने लग जाते है, लेकिन असल मे हमे अपनी कमियों को समझना चाहिए,* *विपत्तियां कैसी भी हो कष्टदायक होती है,आज आप किसी की तकलीफ में साथ है, तो निश्चित ही आपकी मदद के लिए भी कोई साथ आएगा।एक ईश्वर पर दृढ़ता,सदैव रखे।* 🚩🙏🌹💐🌱👏

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

🌷 सौभाग्य-रक्षा और सुख-शांति व समृद्धि बढ़ाने हेतु 🌷 👩🏻 माताएँ-बहनें रोज स्नान के बाद पार्वती माता का स्मरण करते-करते उत्तर दिशा की ओर मुख करके तिलक करें और पार्वती माता को इस मंत्र से वंदन करें : 🌷 “ॐ ह्रीं गौर्यै नम:।” 👩🏻 इससे माताओं –बहनों के सौभाग्य की रक्षा होगी तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ेगी। 🌷 ज्येष्ठ मास 🌷 🙏🏻 महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।।” जो एक समय ही भोजन करके ज्येष्ठ मास को बिताता है वह स्त्री हो या पुरुष, अनुपम श्रेष्ठ एश्‍वर्य को प्राप्त होता है। 🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार ज्येष्ठ में तिल का दान बलवर्धक और मृत्युनिवारक होता है। 🙏🏻 ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन मूल नक्षत्र होने पर मथुरा में स्नान करके विधिवत् व्रत-उपवास करके भगवान कृष्ण की पूजा उपासना करते हुए श्री नारद पुराण का श्रवण करें तो भक्ति जन्म-जन्मान्तरों के पाप से मुक्त हो जाता है। माया के जाल से मुक्त होकर निरंजन हो जाता है। भगवान् विष्णु के चरणों में वृत्ति रखने वाला संसार के प्रति अनासक्त होकर फलस्वरूप जीव मुक्ति को प्राप्त करता हुआ वैकुंठ वासी हो जाता है। 🙏🏻 धर्मसिन्धु के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को तिलों के दान से अश्वमेध यज्ञ का फल होता है। 🙏🏻 ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी का व्रत किया जाता है। 🙏🏻 ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार शनि देव जी का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रात के समय हुआ था। 🙏🏻 ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है। 🙏🏻 ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। 🙏🏻 महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 109 के अनुसार ज्येष्ठ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके जो भगवान त्रिविक्रम की पूजा करता है, वह गोमेध यज्ञ का फल पाता और अप्सराओं के साथ आनन्द भोगता है। 🌷 विष्णुपुराण के अनुसार यमुनासलिले स्त्रातः पुरुषो मुनिसत्तम! ज्येष्ठामूलेऽमले पक्षे द्रादश्यामुपवासकृत्।। ६-८-३३।। तमभ्यर्च्च्याच्युतं संम्यङू मथुरायां समाहितः। अश्वमेधस्य यज्ञस्य प्राप्तोत्यविकलं फलम्।। ६-८-३४।। 🙏🏻 ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी को मथुरापुरी में उपवास करते हुए यमुना स्नान करके समाहितचित से श्रीअच्युत का भलीप्रकार पूजन करने से मनुष्य को अश्वमेध-यज्ञ का सम्पूर्ण फल मिलता है। 🌐http://www.vkjpandey.in 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻

+60 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 77 शेयर
sita May 8, 2020

❇️🌹👏 जय माता दी👏🌹❇️🙌 चरण में रखना शरण में रखना हरदम अपनी लग्न में रखना👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️🌹 माता रानी आप सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करें👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️ 🌹👏❇️पधारो मात पूजा में हृदय मंदिर सजाया है तुम्हारे वास्ते आसन विमल मन का लगाया है👏🌹❇️ लिए श्रद्धांजलि नैनों में खड़े पद कंज धोने को पहन लो प्रेम का गजरा बड़ा सुंदर बनाया है पधारो माता पूजा में हृदय मंदिर सजाया है👏🌹❇️ सजाई आरती हमने अमित अनुराग की मैया नया नैवेध तो हमने बड़ा रुचकर बनाया है👏🌹❇️ नहीं है वस्त्र आभूषण करूं क्या भेंट में मैया नहीं है भाव और भक्ति करु पूजा कैसे मैया👏🌹❇️🌷 यही पद भेंट है तेरी जिसे गाकर सुनाया है पधारो मात पूजा में हृदय मंदिर सजाया है👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹❇️👏🌹

+193 प्रतिक्रिया 32 कॉमेंट्स • 3 शेयर
b singh May 9, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 17 शेयर
jatan kurveti May 8, 2020

+11 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर
b singh May 9, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर
b singh May 8, 2020

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB