🌹bk preeti 🌹
🌹bk preeti 🌹 Mar 1, 2021

शुभकामनाएं आप सभी को।। हर हर महादेव 🙏🙏🙏🌹🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿✍️🙏 कभी किसी महात्मा से यह मत पूछो कि तुम्हारी जाति क्या है, क्योंकि भगवान् के दरबार में जाति का बन्धन नहीं रह जाता । *भगवान को भेंट* पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था । सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था l जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था। वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था । . 🔸 एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा भाई मैं तो हूं संसारी आदमी हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता । 🔹 तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना । भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया.. . 🔸 कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा । मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत , भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं । 🔹 सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है । जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल गूंज रहा है । संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था । भक्त भी वहीं रुक कर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा । . 🔸 फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजन इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे भी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचा क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ। . 🔹 उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े । . 🔸 उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दो रुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा l जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए । सेठ यह तौ नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए । सेठ पूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि , पैसे चढ़ा दिए । झूठ भी नहीं होगा और काम भी हो जाएगा । . 🔹 भक्त ने श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथ जी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया । अंत में उसने सेठ के दो रुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए । और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं । . 🔸 उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्री जगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोले सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकर श्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए । . 🔹 सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है , पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा । . 🔸 काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे जगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थै ? भक्त बोला हां मैंने पैसे चढ़ा दिए । . 🔹 सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काम में प्रयोग किए । तब भक्त ने सारी बात बताई की उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था । और ठाकुर जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे । . 🔸 सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य हो आपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथ जी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो गए l सन्तमत विचार- भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं है । भगवान को वह 98 रुपए स्वीकार है जो जीव मात्र की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए l आज का दिन शुभ एवम मंगलमय हो l श्री राम कृपा हम सभी पर सदा बनी रहे l 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

शुभकामनाएं आप सभी को।। हर हर महादेव 🙏🙏🙏🌹🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿✍️🙏
कभी किसी महात्मा से यह मत पूछो कि तुम्हारी जाति क्या है, क्योंकि भगवान् के दरबार में जाति का बन्धन नहीं रह जाता ।
*भगवान को भेंट*
पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था ।
सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था l
जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था।
वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l
वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का
लाभ लेता रहता था ।
.
🔸 एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी
मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए
कहा भाई मैं तो हूं संसारी आदमी
हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण
कभी तीर्थ गमन का लाभ
नहीं ले पाता ।
🔹 तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100
रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के
चरणों में समर्पित कर देना । भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर
श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया.. .
🔸 कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह
श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा ।
मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा
कि बहुत सारे संत , भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम
संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर
रहे हैं ।
🔹 सभी की आंखों से अश्रु धारा बह
रही है । जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल
गूंज रहा है । संकीर्तन में बहुत आनंद आ
रहा था । भक्त भी वहीं रुक कर
हरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा ।
.
🔸 फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजन
इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण
उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे
भी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचा
क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ।
.
🔹 उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन
की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में
उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े ।
.
🔸 उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दो
रुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा l
जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए । सेठ
यह तौ नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए । सेठ
पूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि , पैसे चढ़ा दिए ।
झूठ भी नहीं होगा और काम
भी हो जाएगा ।
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🔹 भक्त ने श्री जगन्नाथ जी के
दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथ
जी की छवि को निहारते हुए
अपने हृदय में उनको विराजमान कराया ।
अंत में उसने सेठ के दो
रुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए ।
और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं ।
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🔸 उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्री
जगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोले
सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकर
श्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए ।
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🔹 सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है ,
पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए
भगवान को कम चढ़ाए? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ?
उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ?
ऐसा विचार सेठ करता रहा ।
.
🔸 काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस
आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे
जगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थै ? भक्त बोला हां मैंने
पैसे चढ़ा दिए ।
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🔹 सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काम
में प्रयोग किए । तब भक्त ने सारी बात बताई
की उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था । और
ठाकुर जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे ।
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🔸 सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा
भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य हो
आपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथ
जी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो
गए l
सन्तमत विचार-
भगवान को आपके धन की कोई
आवश्यकता नहीं है । भगवान को वह 98
रुपए स्वीकार है जो जीव मात्र
की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई
महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए l
आज का दिन शुभ एवम मंगलमय हो l
श्री राम कृपा हम सभी पर सदा बनी रहे l
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कामेंट्स

Naresh Rawat Mar 1, 2021
🙏🔱🚩ओम नमो शिवाय हर हर महादेव जय श्री महाकालेश्वर महाराज 🙏🚩राधे राधे जी जय श्रीकृष्ण 🙏🌷 शुभ सोमवार शुभ प्रभात स्नेह स्नेह सिस्टर जी🙏🌞आप का हर पल हर दिन शुभ मंगलमय हो🙏 भगवान भोलेनाथ महाराज जी की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे सिस्टर जी🙏🌷सदा स्वस्थ और खुश रहो 🙂देवो के देव हर हर महादेव 🙏🚩

Nitin Sharma Mar 1, 2021
सारे संसार का प्यार सिर्फ #मां और #महादेव ही दे सकते हैं 🙏🏻हर हर महादेव 🙏🏻❤🌹 सुप्रभात

Bhaskar Datta Tiwari Mar 1, 2021
ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव जी शुभ प्रभात वंदन जी आपका हर पल मंगलमय हो 🙏🌷🙏

Hemant Kasta Mar 1, 2021
Shree Mahakaleshwar Mahadev Namah, Shree Shiv Shakti Parivar Namah, Om Namah Shivay, Har Har Mahadev, Beautiful Post, Anmol Massage, Gyanvarsha Mahiti, Dhanywad Vandaniy Gyani Bahena Ji Pranam, Salute, Subahka Ram Ram, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Aap Sadaiv Hanste Muskurate Rahiye, Vandan Sister Ji, Jai Shree Radhe Krishna Ji, Suprabhat.

Manoj Bhati Mar 1, 2021
जय श्री महाकाल हर हर महादेव ओम नमः शिवाय 🙏🙏🌹🌹🙏🙏

Harpal bhanot Mar 1, 2021
Om Namah Shivay ji 🌷🌷🌷 Beautiful good morning ji my Sweet Sister have a happy monday ji Sister 🌻🙏🙏

🇮🇳🇮🇳GEETA DEVI🇮🇳🇮🇳 Mar 1, 2021
🌿HAR HAR MAHADEV 🌿 BEAUTIFUL GOOD MORNING MY LOVELY SISTER JI... 🍎🍎🎉 🌷🌷GOD BLESS U AND UR ALL FAMILY ALWAYS BE HAPPY AND HEALTHY LONG LIFE 🌷🌷 HAVE A GREAT DAY 🍫🍫🍧🍧🍹🍹🤗🤗👌👌🎈🎈🎉🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

r h Bhatt Mar 1, 2021
Har mahadav Har har mahadav om namah shivaya Shubh dophar ji Vandana ji

Sunil Kumar Saini Mar 1, 2021
Good afternoon ji 🌺 Isvar sada Aapka mangal kre Aapka har pal subh ho 🌺 Radhe radhe ji.. 👏 🌹 🌹

Poonam Aggarwal Mar 1, 2021
🕉️ नमः शिवाय हर हर महादेव 🕉️🙏🔱 शिवशक्ति का आशीर्वाद आप और आपकी फैमिली पर हमेशा बना रहे आप सभी खुश और स्वस्थ रहे शुभ दोपहर वंदन प्यारी सखी 👸🍫 RADHE RADHE JI 🌹🙏

A mishra ji Mar 1, 2021
Om namah shivaya good afternoon ji Jay shree भोलेनाथ जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे भोलेनाथ ji 🙏 sneh NAMSTE ji Jay shree krishna

Ramesh Soni.33 Mar 1, 2021
Om Namo bhagwate vasudevay Namah 🚩🚩🚩🌹Jay Shri Ram Jay🚩🚩 🌹🌹Bajrangbali ki Jay 🚩🚩🌹Jay Shri Radhe Krishna🚩🚩🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹

🙏🐅SOM DUTT SHARMA🐅🙏 Mar 1, 2021
🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 Om namah shivaya 🙏g very very sweet good evening g nice 👍🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

Dr gopal Tanwar Mar 1, 2021
ओम हर हर महादेव ओम नमः शिवाय

🌹bk preeti 🌹 Mar 1, 2021
@drgstanwar om namah shivay shiv ji ka Kirpa sada aap aur aap ke family pe bani rahe aap ka har pal Shubh aur mangalmay Ho shubh ratri vandan ji dear sweet sister ji ✍️🙋‍♀️🙋‍♀️🙏🌹🌹

Ashwinrchauhan Mar 1, 2021
ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव भगवान भोलेनाथ की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान शिव और माता पार्वती आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे गुड नाईट जय जिनेन्द जय महावीर जय श्री कृष्ण

🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

ओम शांति।। *यदि "महाभारत" को पढ़ने का समय न हो तो भी इसके नौ सार- सूत्र हमारे जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकते है....!!* *1.संतानों की गलत माँग और हठ पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो अंत में आप असहाय हो जायेंगे-* *कौरव* *2.आप भले ही कितने बलवान हो लेकिन अधर्म के साथ हो तो, आपकी विद्या, अस्त्र-शस्त्र शक्ति और वरदान सब निष्फल हो जायेगा -* *कर्ण* *3.संतानों को इतना महत्वाकांक्षी मत बना दो कि विद्या का दुरुपयोग कर स्वयंनाश कर सर्वनाश को आमंत्रित करे-* *अश्वत्थामा* *4.कभी किसी को ऐसा वचन मत दो कि आपको अधर्मियों के आगे समर्पण करना पड़े -* *भीष्म पितामह* *5.संपत्ति, शक्ति व सत्ता का दुरुपयोग और दुराचारियों का साथ अंत में स्वयंनाश का दर्शन कराता है -* *दुर्योधन* *6.अंध व्यक्ति- अर्थात मुद्रा, मदिरा, अज्ञान, मोह और काम ( मृदुला) अंध व्यक्ति के हाथ में सत्ता भी विनाश की ओर ले जाती है -* *धृतराष्ट्र* *7.यदि व्यक्ति के पास विद्या, विवेक से बँधी हो तो विजय अवश्य मिलती है -* *अर्जुन* *8.हर कार्य में छल, कपट, व प्रपंच रच कर आप हमेशा सफल नहीं हो सकते -* *शकुनि* *9.यदि आप नीति, धर्म, व कर्म का सफलता पूर्वक पालन करेंगे, तो विश्व की कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर सकती -* *युधिष्ठिर* *यदि इन नौ सूत्रों से सबक लेना सम्भव नहीं होता है तो जीवन मे महाभारत संभव हो जाता है।* नित याद करो मन से शिव को 🙏

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🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

Har har mahadev j🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌹🌹🙏🙏🙏✍️ श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं। इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा-नारद- बालक तुम कौन हो ?बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ?बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ ।तब नारद ने ध्यान धर देखा।नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी।बालक- मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?नारद- तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।बालक- मेरे ऊपर आयी विपत्ति का कारण क्या था ?नारद- शनिदेव की महादशा। इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर जीने वाले बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।नारद के जाने के बाद बालक पिप्पलाद ने नारद के बताए अनुसार ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी ने जब बालक पिप्पलाद से वर मांगने को कहा तो पिप्पलाद ने अपनी दृष्टि मात्र से किसी भी वस्तु को जलाने की शक्ति माँगी।ब्रह्मा जी से वरदान मिलने पर सर्वप्रथम पिप्पलाद ने शनि देव का आह्वाहन कर अपने सम्मुख प्रस्तुत किया और सामने पाकर आँखे खोलकर भष्म करना शुरू कर दिया।शनिदेव सशरीर जलने लगे। ब्रह्मांड में कोलाहल मच गया। सूर्यपुत्र शनि की रक्षा में सारे देव विफल हो गए। सूर्य भी अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र को जलता हुआ देखकर ब्रह्मा जी से बचाने हेतु विनय करने लगे।अन्ततः ब्रह्मा जी स्वयम् पिप्पलाद के सम्मुख पधारे और शनिदेव को छोड़ने की बात कही किन्तु पिप्पलाद तैयार नहीं हुए।ब्रह्मा जी ने एक के बदले दो वरदान माँगने की बात कही। तब पिप्पलाद ने खुश होकर निम्नवत दो वरदान मांगे-1- जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक की कुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा।जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।2- मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है। अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएगा उसपर शनि की महादशा का असर नहीं होगा। ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि को अपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों पर आघात करके उन्हें मुक्त कर दिया । जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए और वे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे।अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:" अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलाये और शनि आग में जलने के कारण काली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए।सम्प्रति शनि की काली मूर्ति और पीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है।आगे चलकर पिप्पलाद ने प्रश्न उपनिषद की रचना की,जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है !! !!! 🙏🙏 !!! संकलित

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🌹bk preeti 🌹 Apr 11, 2021

🌹प्रभू की दुकान 🌹 एक दिन में सड़क से जा रहा था । रास्ते में एक जगह बोर्ड लगा था 🙏🏻ईश्वरीय किरायाने की ⚖️दुकान मेरी जिज्ञासा बढ़ गई क्यों ना इस दुकान पर जाकर देखो इसमें बिकता क्या है? जैसे ही यह ख्याल आया🪟 दरवाजा अपने आप खुल गया । मैंने खुद को दुकान के अंदर पाया। जरा सी जिज्ञासा रखते हैं द्वार अपने आप खुल जाते हैं। खोलने नहीं पड़ते। मैंने दुकान के अंदर देखा जगह-जगह देवदूत खड़े थे एक देवदूत ने । मुझे टोकरी देते हुए कहा ,मेरे बच्चे ध्यान से खरीदारी करो वहा वह सब कुछ था जो एक इंसान को चाहिए होता है। देवदूत ने कहा एक बार में टोकरी भर कर ना ले जा सको, तो दोबारा आ जाना फिर दोबारा टोकरी भर लेना। अब मैंने सारी चीजें देखी ।सबसे पहले धीरज खरीदा फिर प्रेम भी ले लिया, फिर समझ भी ले ली। फिर एक दो डिब्बे विवेक भी ले लिया। आगे जाकर विश्वास के दो तीन डिब्बे उठा लिए ।मेरी टोकरी भरती गई । आगे गया पवित्रता मिली सोचा इसको कैसे छोड़ सकता हूं , फिर शक्ति का बोर्ड आया शक्ति भी ले ली। हिम्मतभी ले ली सोचा हिम्मत के बिना तो जीवन में काम ही नहीं चलता। आगे सहनशीलता ली फिर मुक्ति का डिब्बा भी ले लिया । मैंने वह सब चीजें खरीद ली जो मेरे मालिक खुदा को पसंद है। फिर जिज्ञासु की नजर प्रार्थना पर पड़ी मैंने उसका भी एक डिब्बा उठा लिया। कि सब गुण होते हुए भी अगर मुझसे कभी कोई भूल हो जाए तो मैं प्रभु 🙏🏻से प्रार्थना कर लूंगा कि मुझे भगवान माफ 🙏🏻कर देना आनंद शांति गीतों से मैंने basket 🛒को भर लिया। फिर मैं काउंटर🚶🏻‍♂️ पर गया और देवदूत से पूछा सर -मुझे इन सब समान का कितना बिल चुकाना है देवदूत बोला मेरे बच्चे यहां के bill को चुकाने का ढंग भी ईश्ववरीय है। अब तुम जहां भी जाना इन चीजों को भरपूर बांटना और लुटाना। इन चीजों का बिल इसी तरह चुकाया जाता है । कोई- कोई विरला इस दुकान पर प्रवेश करता है। जो प्रवेश कर लेता है वह मालो- माल हो जाता है। वह इन गुणों को खूब भोगता भी है ,और लुटाता भी है। प्रभू की यह दुकान शिव सतगुरु के सत्संग की दुकान है। शिव सतगुरु की शरण🧘🏻‍♂️ में आकर, उसके वचनों से प्रीत करते हैं तो सब गुणों के खजाने हमको मिल जाते हैं फिर कभी खाली हो भी जाए फिर सत्संग में आ कर बास्केट भर लेना 🙏🙏🙏 🌹तू ही तू 🌹

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🌹bk preeti 🌹 Apr 10, 2021

**( भगवान् क्यो आते हैं )** .ram ram ji ✍️✍️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏 . एक बार अकबर ने बीरबल से पूछाः तुम्हारे भगवान और हमारे खुदा में बहुत फर्क है। . हमारा खुदा तो अपना पैगम्बर भेजता है जबकि तुम्हारा भगवान बार- बार आता है। यह क्या बात है ? . बीरबलः जहाँपनाह ! इस बात का कभी व्यवहारिक तौर पर अनुभव करवा दूँगा। आप जरा थोड़े दिनों की मोहलत दीजिए। . चार-पाँच दिन बीत गये। बीरबल ने एक आयोजन किया। . अकबर को यमुनाजी में नौका विहार कराने ले गये। कुछ नावों की व्यवस्था पहले से ही करवा दी थी। . उस समय यमुनाजी छिछली न थीं। उनमें अथाह जल था। . बीरबल ने एक युक्ति की कि जिस नाव में अकबर बैठा था, उसी नाव में एक दासी को अकबर के नवजात शिशु के साथ बैठा दिया गया। . सचमुच में वह नवजात शिशु नहीं था। मोम का बालक पुतला बनाकर उसे राजसी वस्त्र पहनाये गये थे ताकि वह अकबर का बेटा लगे। . दासी को सब कुछ सिखा दिया गया था। नाव जब बीच मझधार में पहुँची और हिलने लगी तब 'अरे.... रे... रे.... ओ.... ओ.....' कहकर दासी ने स्त्री चरित्र करके बच्चे को पानी में गिरा दिया और रोने बिलखने लगी। . अपने बालक को बचाने-खोजने के लिए अकबर धड़ाम से यमुना में कूद पड़ा। . खूब इधर-उधर गोते मारकर, बड़ी मुश्किल से उसने बच्चे को पानी में से निकाला। . वह बच्चा तो क्या था मोम का पुतला था। . अकबर कहने लगाः बीरबल ! यह सारी शरारत तुम्हारी है। तुमने मेरी बेइज्जती करवाने के लिए ही ऐसा किया। . बीरबलः जहाँपनाह ! आपकी बेइज्जती के लिए नहीं, बल्कि आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए ऐसा ही किया गया था। . आप इसे अपना शिशु समझकर नदी में कूद पड़े। उस समय आपको पता तो था ही इन सब नावों में कई तैराक बैठे थे, नाविक भी बैठे थे और हम भी तो थे ! . आपने हमको आदेश क्यों नहीं दिया ? हम कूदकर आपके बेटे की रक्षा करते ! . अकबरः बीरबल ! यदि अपना बेटा डूबता हो तो अपने मंत्रियों को या तैराकों को कहने की फुरसत कहाँ रहती है ? . खुद ही कूदा जाता है। . बीरबलः जैसे अपने बेटे की रक्षा के लिए आप खुद कूद पड़े, ऐसे ही हमारे भगवान जब अपने बालकों को संसार एवं संसार की मुसीबतों में डूबता हुआ देखते हैं तो वे पैगम्बर-वैगम्बर को नहीं भेजते, वरन् खुद ही प्रगट होते हैं। . वे अपने बेटों की रक्षा के लिए आप ही अवतार ग्रहण करते है और संसार को आनंद तथा प्रेम के प्रसाद से धन्य करते हैं।

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Neeta Trivedi Apr 12, 2021

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