🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय🙏🙏🌹🌹🌹🌹

🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय🙏🙏🌹🌹🌹🌹

+91 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 69 शेयर

कामेंट्स

Mamta Chauhan Mar 1, 2021
Har har mahadev ji🌷🙏Shubh ratri vandan mere bade bhaiya ji aapka har pal khushion bhra ho aapki sbhi manokamna puri ho 🌷🌷🙏🙏

🙋🅰NJALI 😊ⓂISHRA 🙏 Mar 1, 2021
*ॐ नमः शिवाय*🙏राम-राम जी मेरे आदरणीय चाचा जी शुभ रात्रि वंदन🙏आपका हर पल शुभ हो👌भगवान👣👁️🔱 👁️शिवशक्ति की कृपा दृष्टि सदा आप पर बनी रहें *श्री महाकाल *जी आपको एवं आपके समस्त परिवार को सदा सुखी एवं स्वास्थ्य रखें 🙌🙏💐🙏🌿☆ हर हर महादेव☆🌿🙏🚩🌿🌿🌿🌿🌿🌿

Deepa Binu Mar 1, 2021
HARE KRISHNA 🙏 Good Night JI 🌹 Sweet Dreams 🌹

HAZARI LAL JAISWAL Mar 1, 2021
ऊं नमः शिवाय हर हर महादेव शुभ रात्रि जी

Dr. SEEMA SONI Mar 1, 2021
Om Namah Shivay Good Night My Dear Dadaji 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Archana Singh Mar 1, 2021
🙏🌹शुभ रात्रि वंदन भाई जी 🌹🙏मोर मुकुट बंसी वाले की जय हो 🙏🌹राधे गोविंद जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें भाई जी🙏🙏🌹🌹

R C GARG Mar 1, 2021
जय श्री कृष्णा !! शुभ रात्रि✨ 🌚⏰ वंदन जी !! 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏

Ramesh Soni.33 Mar 1, 2021
Om Namo bhagwate vasudevay Namah 🚩🚩🚩🌹Jay Shri Ram Jay🚩🚩 🌹🌹Bajrangbali ki Jay 🚩🚩🌹Jay Shri Radhe Krishna🚩🚩🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹

Ramesh Soni.33 Mar 1, 2021
Om Namo bhagwate vasudevay Namah 🚩🚩🚩🌹Jay Shri Ram Jay🚩🚩 🌹🌹Bajrangbali ki Jay 🚩🚩🌹Jay Shri Radhe Krishna🚩🚩🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹

madan pal 🌷🙏🏼 Mar 1, 2021
ओम् नमः शिवाय जी शूभ रात्रि वंदन ज़ी भोले नाथ जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहें ज़ी 🌷🕉️🙏🏼🌹🌹🌹🌹🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Ravi Kumar Taneja Mar 1, 2021
🌹🌹🌹श्रीराम भक्त हनुमानजी की कृपा दृष्टि सपरिवार आप पर बनी रहे 🌹🌹🌹 सियाराम जी का आशीर्वाद आप को सपरिवार मिले 🌹🙏🌹 🌷🌷🌷आपकी दिल की हर एक इच्छा पवनसुत पूरी करे 🌷🌷🌷 🙏जय जय जय बजरंगबली 🙏 सुप्रभात वंदना जी 🙏🥀🙏 प्रभु कृपा आप पर हमेशा बनी रहे🕉🦋🙏🌺🙏🌺🙏🦋🕉

+21 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Mamta Chauhan Apr 16, 2021

+237 प्रतिक्रिया 76 कॉमेंट्स • 350 शेयर
Archana Singh Apr 16, 2021

+179 प्रतिक्रिया 44 कॉमेंट्स • 132 शेयर

+284 प्रतिक्रिया 73 कॉमेंट्स • 179 शेयर
Jai Mata Di Apr 16, 2021

+116 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 88 शेयर
Archana Singh Apr 16, 2021

+183 प्रतिक्रिया 48 कॉमेंट्स • 91 शेयर
Sarita Choudhary Apr 16, 2021

+144 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 84 शेयर
Shanti Pathak Apr 16, 2021

*जय माता दी* *शुभरात्रि वंदन*. एक गरीब विधवा के पुत्र ने एक बार अपने राजा को देखा। राजा को देख कर उसने अपनी माँ से पूछा- माँ! क्या कभी मैं राजा से बात कर पाऊँगा? माँ हंसी और चुप रह गई। पर वह लड़का तो निश्चय कर चुका था। उन्हीं दिनों गाँव में एक संत आए हुए थे। तो युवक ने उनके चरणों में अपनी इच्छा रखी। संत ने कहा- अमुक स्थान पर राजा का महल बन रहा है, तुम वहाँ चले जाओ और मजदूरी करो। पर ध्यान रखना, वेतन न लेना। अर्थात् बदले में कुछ माँगना मत। निष्काम रहना। वह लड़का गया। वह मेहनत दोगुनी करता पर वेतन न लेता। एक दिन राजा निरीक्षण करने आया। उसने लड़के की लगन देखी। प्रबंधक से पूछा- यह लड़का कौन है, जो इतनी तन्मयता से काम में लगा है? इसे आज अधिक मजदूरी देना। प्रबंधक ने विनय की- महराज! इसका अजीब हाल है, दो महीने से इसी उत्साह से काम कर रहा है। पर हैरानी यह है कि यह मजदूरी नहीं लेता। कहता है मेरे घर का काम है। घर के काम की क्या मजदूरी लेनी? राजा ने उसे बुला कर कहा- बेटा! तूं मजदूरी क्यों नहीं लेता? बता तूं क्या चाहता है? लड़का राजा के पैरों में गिर पड़ा और बोला- महाराज! आपके दर्शन हो गए, आपकी कृपा दृष्टि मिल गई, मुझे मेरी मजदूरी मिल गई। अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए। राजा उसे मंत्री बना कर अपने साथ ले गया। और कुछ समय बाद अपनी इकलौती पुत्री का विवाह भी उसके साथ कर दिया। राजा का कोई पुत्र था नहीं, तो कालांतर में उसे ही राज्य भी सौंप दिया। लोकेशानन्द कहता है कि भगवान ही राजा हैं। हम सभी भगवान के मजदूर हैं। भगवान का भजन करना ही मजदूरी करना है। संत ही मंत्री है। भक्ति ही राजपुत्री है। मोक्ष ही वह राज्य है। हम भगवान के भजन के बदले में कुछ भी न माँगें तो वे भगवान स्वयं दर्शन देकर, पहले संत बना देते हैं और अपनी भक्ति प्रदान कर, कालांतर में मोक्ष ही दे देते हैं। वह लड़का सकाम कर्म करता, तो मजदूरी ही पाता, निष्काम कर्म किया तो राजा बन बैठा। यही सकाम और निष्काम कर्म के फल में भेद है। "तुलसी विलम्ब न कीजिए, निश्चित भजिए राम। जगत मजूरी देत है, क्यों राखे भगवान॥" भक्त कैसा होता है.....? रसिकाचार्य कृपा-पूर्वक बता रहे थे कि यदि कोई संत प्रसन्न होकर कहे कि बोलो - "क्या चाहते हो? श्रीहरि का दर्शन अथवा श्रीहरि का विरह? सोचोगे, क्या पूछ बैठे? बड़ी सरल सी बात है कि श्रीहरि का दर्शन ! जब अभी दुर्लभ-दर्शन सुलभ है तो अब चिंतन को बचा क्या? किन्तु जो सच्चा भक्त होगा, जो वास्तव में ही बाबरा होगा, वही कह सकेगा कि विरह ! क्यों? अभी क्षुधा/भूख लगी ही नहीं तो देव-दुर्लभ भोग-पदार्थों में रस कैसे मिलेगा? तृप्ति कैसे होगी? पहले भूख तो लगे तब पदार्थ में रस आवेगा, तृप्ति होवेगी सो कृपया आप मुझे श्रीहरि का विरह दे दीजिये जो प्रतिक्षण बढ़ता ही रहे। एक दिन ऐसा आ जाये कि मैं उनकी प्रतिक्षण स्मृति के बिना जीवित ही न रह सकूँ। विरह और मिलन ! नदी हजारों किलोमीटर का रास्ता दौड़ते-भागते, बाधाओं से टकराते हुए करती है; यही विरह है ! एक ही धुन ! एक ही लक्ष्य ! हम बड़े चतुर हैं; श्रीहरि से मिलन तो चाहते हैं किन्तु बड़ी ही सावधानी बरतते हैं कि कही ऐसा न हो जावे कि हम खो जावें। दो नावों पर सवार को श्रीहरि-कृपा का दर्शन तो हो सकता है किन्तु प्राप्ति न हो सकेगी। हमें भौतिक संपदा और कुटुंबीजनों में आसक्ति अधिक है, श्रीहरि में कम। सब कुछ बना रहे और श्रीहरि भी मिल जावें तो सोने में सुहागा। सब चला जावे और वे मिल जावें तो क्या लाभ? यही कारण है कि प्रवचन करना, सुनना सरल है किन्तु उसे आचरण में लाना कठिन और जब तक आचरण में ही न उतरी तो कथा-सत्संग का कैसा लाभ? यही कहते हैं कि उन्होंने प्रवचन में बड़ी सुंदर बात कही। अरे बात सुंदर होती तो कहना न पड़ता; वह तो आचरण में उतरनी चाहिये। भक्ति सरल है, सरल के लिये किन्तु सरल होना बड़ा कठिन है ! प्राण-प्रियतम के अतिरिक्त अब किसी की सुधि नहीं; जगत में जो भी है, वह उन्हीं का। जब वे ही कर रहे हैं, वे ही कह रहे हैं तो मान-अपमान कैसा और किसका? खेल तो खेल है ! इसीलिये कहते हैं कि भक्ति करे कोई सूरमा, जाति-बरन-कुल खोय। अपने पास श्रीहरी की कृपा से जो कुछ है वह और स्वयं को जो श्रीहरि के श्रीचरणारविन्द में सहर्ष न्यौछावर करने को प्रस्तुत है, यह मार्ग उनके लिये है। इस मार्ग पर कोई भौतिक-संपदा प्राप्त होगी, इस भ्रम में मत रहना। यह तो जान-बूझकर लुटने वालों की गली है; यहाँ वे ही आवें जिन्हें सर्वस्व लुटाने/लुटने में परमानन्द आता हो ! सांकरी-खोर से कोई बिना लुटे चला जावे; असंभव! मैं तो छाया हूँ घनश्याम की न मैं राधा,न मैं मीरा,न गोपी ब्रजधाम की। न मैं भक्तिनि,न मैं दासी,न शोभा हूँ बाम की। रहूँ संग मैं,सँग-सँग राँचू ,संगिनि प्रात: शाम की। श्याम करे जो वही करूँ मैं,प्रति हूँ उसके काम की। मैं हूँ उसके आगे-पीछे चाह नहीं विश्राम की। रहूँ सदा उसके चरणों में, स्थिति यही प्रणाम की। जीव यही है मुक्ति जगत से,लीला यह हरि नाम की। जय जय श्यमाश्याम!

+177 प्रतिक्रिया 34 कॉमेंट्स • 61 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB