*🌷॥ॐ॥🌷* *जय श्री राधे...👏* 🚩॥जय हिन्द🇮🇳जय नमो॥👏 ************************** *🚩॥ॐ श्री दुर्गाय नमः॥👏* ************************** *नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं...* 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप* ************************** *हे माँ हम सबका हर पल मंगलमय करें और अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें🙏* 🌺🌺🌺🙏🙏🌺🌺🌺 माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप —————————————— सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता। नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है। भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। *👉देवी स्कंदमाता का स्वरूप* स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। ये दाहिनी तरफकी ऊपरवाली भुजासे भगवान स्कन्दको (कुमार कार्तिकेय को) गोदमें पकड़े हुए हैं। तथा दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजामें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में (भक्तों को आशीर्वाद देते हुए है) तथा नीचे वाली भुजामें भी कमल पुष्प हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है। *👉माँ स्कंदमाता की उपासना* पांचवें दिन की नवरात्री पूजा में साधक अपने मन को विशुद्ध चक्र में स्थित करते हैं। इस चक्र में स्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। साधकका मन भौतिक विकारों से (काम, क्रोध, मोह आदि विकारों से) मुक्त हो जाता है। साधक का मन समस्त लौकिक और सांसारिक बंधनों से विमुक्त होकर माँ स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है। इस समय साधक को पूर्ण सावधानी के साथ उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। उसे अपनी समस्त ध्यान-वृत्तियों को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। *👉माँ स्कंदमाता की महिमा* माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार सुलभ हो जाता है। स्कंदमाता की उपासना से स्कंद भगवान (कार्तिकेय भगवान) की उपासना भी हो जाती है। यह विशेषता केवल स्कंदमाता को प्राप्त है, इसलिए साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। सूर्यमंडल की देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है। एक अलौकिक प्रभामंडल अदृश्य भाव से सदैव साधकके चतुर्दिक् (चारो ओर) परिव्याप्त रहता है। हमें एकाग्रभाव से मन को पवित्र रखकर माँ की शरण में आने का प्रयत्न करना चाहिए। इस घोर भवसागर के दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ बनाने का इससे उत्तम उपाय दूसरा नहीं है। *👉माँ स्कंदमाता का मंत्र* या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ, सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है (मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ)। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें। सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ *👉माँ स्कंदमाता की स्तुति* नवरात्रि की पांचवी स्कन्दमाता महारानी। इसका ममता रूप है ध्याए ग्यानी ध्यानी॥ कार्तिक्ये को गोद ले करती अनोखा प्यार। अपनी शक्ति दी उसे करे रक्त संचार॥ भूरे सिंह पे बैठ कर, मंद मंद मुस्काए। कमल का आसन साथ में, उसपर लिया सजाए॥ आशीर्वाद दे हाथ से, मन में भरे उमंग। कीर्तन करता आपका, चढ़े नाम का रंग॥ जैसे रूठे बालक की, सुनती आप पुकार। मुझको भी वो प्यार दो, मत करना इनकार॥ नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ। नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ॥ जय माँ स्कन्द माता। जय माँ स्कन्द माता॥ नवरात्रि की पांचवी स्कन्दमाता महारानी। इसका ममता रूप है ध्याए ग्यानी ध्यानी॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। हे माँ…, हे माँ…, हे माँ… तू ओढ़े लाल चुनरिया, गहनों से करे श्रृंगार। शेरों पर करे सवारी, तू शक्ति का अवतार। तेरे तेज़ भरे दो नैना, तेरे अधरों पर मुस्कान। तेरे द्वारे शीश झुकाए, क्या निर्बल क्या बलवान॥ हे माँ.. शेरांवालिये… पहाडा वालिए… हे माँ… हे माँ… तेरे ही नाम का माता, जगत में डंका बाजे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योति दिन रैना जागे॥ ऊँचा है मंदिर तेरा, ऊँचा तेरा स्थान। दानी क्या कोई दूजा, माँ होगा तेरे समान। जो आये श्रद्धा लेके, वो ले जाये वरदान। हे माता तू भक्तों के, सुख दुःख का रखे ध्यान। ओ लाटा वालिए…. शेरां वालिए.. पहाडा वालिए… मेहरा वालिये माँ… हे माँ.. तेरे चरणों में आके, भाग्य कैसे न जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 🔱🙏🌺👏🌺🙏🔱

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माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप
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सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता।

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।

भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है।

भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।

*👉देवी स्कंदमाता का स्वरूप*
स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। ये दाहिनी तरफकी ऊपरवाली भुजासे भगवान स्कन्दको (कुमार कार्तिकेय को) गोदमें पकड़े हुए हैं। तथा दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजामें कमल पुष्प है।

बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में (भक्तों को आशीर्वाद देते हुए है) तथा नीचे वाली भुजामें भी कमल पुष्प हैं।

इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।

*👉माँ स्कंदमाता की उपासना*
पांचवें दिन की नवरात्री पूजा में साधक अपने मन को विशुद्ध चक्र में स्थित करते हैं।

इस चक्र में स्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। साधकका मन भौतिक विकारों से (काम, क्रोध, मोह आदि विकारों से) मुक्त हो जाता है।

साधक का मन समस्त लौकिक और सांसारिक बंधनों से विमुक्त होकर माँ स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है।

इस समय साधक को पूर्ण सावधानी के साथ उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। उसे अपनी समस्त ध्यान-वृत्तियों को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

*👉माँ स्कंदमाता की महिमा*
माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार सुलभ हो जाता है।

स्कंदमाता की उपासना से स्कंद भगवान (कार्तिकेय भगवान) की उपासना भी हो जाती है। यह विशेषता केवल स्कंदमाता को प्राप्त है, इसलिए साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सूर्यमंडल की देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है। एक अलौकिक प्रभामंडल अदृश्य भाव से सदैव साधकके चतुर्दिक् (चारो ओर) परिव्याप्त रहता है।

हमें एकाग्रभाव से मन को पवित्र रखकर माँ की शरण में आने का प्रयत्न करना चाहिए। इस घोर भवसागर के दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ बनाने का इससे उत्तम उपाय दूसरा नहीं है।

*👉माँ स्कंदमाता का मंत्र*
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ, सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है (मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ)। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

*👉माँ स्कंदमाता की स्तुति*
नवरात्रि की पांचवी
स्कन्दमाता महारानी।
इसका ममता रूप है
ध्याए ग्यानी ध्यानी॥

कार्तिक्ये को गोद ले
करती अनोखा प्यार।
अपनी शक्ति दी उसे
करे रक्त संचार॥

भूरे सिंह पे बैठ कर,
मंद मंद मुस्काए।
कमल का आसन साथ में,
उसपर लिया सजाए॥

आशीर्वाद दे हाथ से,
मन में भरे उमंग।
कीर्तन करता आपका,
चढ़े नाम का रंग॥

जैसे रूठे बालक की,
सुनती आप पुकार।
मुझको भी वो प्यार दो,
मत करना इनकार॥

नवरात्रों की माँ
कृपा कर दो माँ।
नवरात्रों की माँ
कृपा कर दो माँ॥

जय माँ स्कन्द माता।
जय माँ स्कन्द माता॥

नवरात्रि की पांचवी
स्कन्दमाता महारानी।
इसका ममता रूप है
ध्याए ग्यानी ध्यानी॥
🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷
मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।

हे माँ…, हे माँ…, हे माँ…

तू ओढ़े लाल चुनरिया,
गहनों से करे श्रृंगार।
शेरों पर करे सवारी,
तू शक्ति का अवतार।

तेरे तेज़ भरे दो नैना,
तेरे अधरों पर मुस्कान।
तेरे द्वारे शीश झुकाए,
क्या निर्बल क्या बलवान॥

हे माँ.. शेरांवालिये… पहाडा वालिए…
हे माँ… हे माँ…

तेरे ही नाम का माता,
जगत में डंका बाजे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योति दिन रैना जागे॥

ऊँचा है मंदिर तेरा,
ऊँचा तेरा स्थान।
दानी क्या कोई दूजा,
माँ होगा तेरे समान।

जो आये श्रद्धा लेके,
वो ले जाये वरदान।
हे माता तू भक्तों के,
सुख दुःख का रखे ध्यान।

ओ लाटा वालिए…. शेरां वालिए..
पहाडा वालिए… मेहरा वालिये माँ… हे माँ..

तेरे चरणों में आके,
भाग्य कैसे न जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥
🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷
    🔱🙏🌺👏🌺🙏🔱

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कामेंट्स

आमोद कुमार Oct 22, 2020
जय श्री राधे...👏 🚩॥जय हिन्द🇮🇳जय नमो॥👏 ************************** 🔱🚩॥ॐ॥👏 ॥ॐ श्री दुर्गाय नमः॥🙏 नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं.. 🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁 “कोशिश करें कि जिंदगी का हर लम्हा अपनी तरफ से हर किसी के साथ अच्छे से गुजरे।" क्योंकि, जिन्दगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं.. 🌷आपका हर पल मंगलमय हो🌷 🚩माँ स्कंद दुर्गा की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे। धन्यवाद 🙏 🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁 😊 सदा मुस्कुराते रहिये 😊

Lucky Sharma May 7, 2021

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