*🌷॥ॐ॥🌷* *जय श्री राधे...👏* 🚩॥जय हिन्द🇮🇳जय नमो॥👏 ************************** *🚩॥ॐ श्री दुर्गाय नमः॥👏* ************************** *नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं...* 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप* ************************** *हे माँ हम सबका हर पल मंगलमय करें और अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें🙏* 🌺🌺🌺🙏🙏🌺🌺🌺 माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप —————————————— सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता। नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है। भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। *👉देवी स्कंदमाता का स्वरूप* स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। ये दाहिनी तरफकी ऊपरवाली भुजासे भगवान स्कन्दको (कुमार कार्तिकेय को) गोदमें पकड़े हुए हैं। तथा दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजामें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में (भक्तों को आशीर्वाद देते हुए है) तथा नीचे वाली भुजामें भी कमल पुष्प हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है। *👉माँ स्कंदमाता की उपासना* पांचवें दिन की नवरात्री पूजा में साधक अपने मन को विशुद्ध चक्र में स्थित करते हैं। इस चक्र में स्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। साधकका मन भौतिक विकारों से (काम, क्रोध, मोह आदि विकारों से) मुक्त हो जाता है। साधक का मन समस्त लौकिक और सांसारिक बंधनों से विमुक्त होकर माँ स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है। इस समय साधक को पूर्ण सावधानी के साथ उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। उसे अपनी समस्त ध्यान-वृत्तियों को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। *👉माँ स्कंदमाता की महिमा* माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार सुलभ हो जाता है। स्कंदमाता की उपासना से स्कंद भगवान (कार्तिकेय भगवान) की उपासना भी हो जाती है। यह विशेषता केवल स्कंदमाता को प्राप्त है, इसलिए साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। सूर्यमंडल की देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है। एक अलौकिक प्रभामंडल अदृश्य भाव से सदैव साधकके चतुर्दिक् (चारो ओर) परिव्याप्त रहता है। हमें एकाग्रभाव से मन को पवित्र रखकर माँ की शरण में आने का प्रयत्न करना चाहिए। इस घोर भवसागर के दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ बनाने का इससे उत्तम उपाय दूसरा नहीं है। *👉माँ स्कंदमाता का मंत्र* या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ, सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है (मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ)। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें। सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ *👉माँ स्कंदमाता की स्तुति* नवरात्रि की पांचवी स्कन्दमाता महारानी। इसका ममता रूप है ध्याए ग्यानी ध्यानी॥ कार्तिक्ये को गोद ले करती अनोखा प्यार। अपनी शक्ति दी उसे करे रक्त संचार॥ भूरे सिंह पे बैठ कर, मंद मंद मुस्काए। कमल का आसन साथ में, उसपर लिया सजाए॥ आशीर्वाद दे हाथ से, मन में भरे उमंग। कीर्तन करता आपका, चढ़े नाम का रंग॥ जैसे रूठे बालक की, सुनती आप पुकार। मुझको भी वो प्यार दो, मत करना इनकार॥ नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ। नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ॥ जय माँ स्कन्द माता। जय माँ स्कन्द माता॥ नवरात्रि की पांचवी स्कन्दमाता महारानी। इसका ममता रूप है ध्याए ग्यानी ध्यानी॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। हे माँ…, हे माँ…, हे माँ… तू ओढ़े लाल चुनरिया, गहनों से करे श्रृंगार। शेरों पर करे सवारी, तू शक्ति का अवतार। तेरे तेज़ भरे दो नैना, तेरे अधरों पर मुस्कान। तेरे द्वारे शीश झुकाए, क्या निर्बल क्या बलवान॥ हे माँ.. शेरांवालिये… पहाडा वालिए… हे माँ… हे माँ… तेरे ही नाम का माता, जगत में डंका बाजे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योति दिन रैना जागे॥ ऊँचा है मंदिर तेरा, ऊँचा तेरा स्थान। दानी क्या कोई दूजा, माँ होगा तेरे समान। जो आये श्रद्धा लेके, वो ले जाये वरदान। हे माता तू भक्तों के, सुख दुःख का रखे ध्यान। ओ लाटा वालिए…. शेरां वालिए.. पहाडा वालिए… मेहरा वालिये माँ… हे माँ.. तेरे चरणों में आके, भाग्य कैसे न जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ मात अंग चोला साजे, हर एक रंग चोला साजे। मात की महिमा देखो, ज्योत दिन रैना जागे॥ 🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷 🔱🙏🌺👏🌺🙏🔱

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माँ स्कंदमाता – माँ दुर्गा का पांचवां रूप
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सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता।

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।

भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है।

भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।

*👉देवी स्कंदमाता का स्वरूप*
स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। ये दाहिनी तरफकी ऊपरवाली भुजासे भगवान स्कन्दको (कुमार कार्तिकेय को) गोदमें पकड़े हुए हैं। तथा दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजामें कमल पुष्प है।

बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में (भक्तों को आशीर्वाद देते हुए है) तथा नीचे वाली भुजामें भी कमल पुष्प हैं।

इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।

*👉माँ स्कंदमाता की उपासना*
पांचवें दिन की नवरात्री पूजा में साधक अपने मन को विशुद्ध चक्र में स्थित करते हैं।

इस चक्र में स्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। साधकका मन भौतिक विकारों से (काम, क्रोध, मोह आदि विकारों से) मुक्त हो जाता है।

साधक का मन समस्त लौकिक और सांसारिक बंधनों से विमुक्त होकर माँ स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है।

इस समय साधक को पूर्ण सावधानी के साथ उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। उसे अपनी समस्त ध्यान-वृत्तियों को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

*👉माँ स्कंदमाता की महिमा*
माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार सुलभ हो जाता है।

स्कंदमाता की उपासना से स्कंद भगवान (कार्तिकेय भगवान) की उपासना भी हो जाती है। यह विशेषता केवल स्कंदमाता को प्राप्त है, इसलिए साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सूर्यमंडल की देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है। एक अलौकिक प्रभामंडल अदृश्य भाव से सदैव साधकके चतुर्दिक् (चारो ओर) परिव्याप्त रहता है।

हमें एकाग्रभाव से मन को पवित्र रखकर माँ की शरण में आने का प्रयत्न करना चाहिए। इस घोर भवसागर के दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ बनाने का इससे उत्तम उपाय दूसरा नहीं है।

*👉माँ स्कंदमाता का मंत्र*
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ, सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है (मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ)। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

*👉माँ स्कंदमाता की स्तुति*
नवरात्रि की पांचवी
स्कन्दमाता महारानी।
इसका ममता रूप है
ध्याए ग्यानी ध्यानी॥

कार्तिक्ये को गोद ले
करती अनोखा प्यार।
अपनी शक्ति दी उसे
करे रक्त संचार॥

भूरे सिंह पे बैठ कर,
मंद मंद मुस्काए।
कमल का आसन साथ में,
उसपर लिया सजाए॥

आशीर्वाद दे हाथ से,
मन में भरे उमंग।
कीर्तन करता आपका,
चढ़े नाम का रंग॥

जैसे रूठे बालक की,
सुनती आप पुकार।
मुझको भी वो प्यार दो,
मत करना इनकार॥

नवरात्रों की माँ
कृपा कर दो माँ।
नवरात्रों की माँ
कृपा कर दो माँ॥

जय माँ स्कन्द माता।
जय माँ स्कन्द माता॥

नवरात्रि की पांचवी
स्कन्दमाता महारानी।
इसका ममता रूप है
ध्याए ग्यानी ध्यानी॥
🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷
मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।

हे माँ…, हे माँ…, हे माँ…

तू ओढ़े लाल चुनरिया,
गहनों से करे श्रृंगार।
शेरों पर करे सवारी,
तू शक्ति का अवतार।

तेरे तेज़ भरे दो नैना,
तेरे अधरों पर मुस्कान।
तेरे द्वारे शीश झुकाए,
क्या निर्बल क्या बलवान॥

हे माँ.. शेरांवालिये… पहाडा वालिए…
हे माँ… हे माँ…

तेरे ही नाम का माता,
जगत में डंका बाजे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योति दिन रैना जागे॥

ऊँचा है मंदिर तेरा,
ऊँचा तेरा स्थान।
दानी क्या कोई दूजा,
माँ होगा तेरे समान।

जो आये श्रद्धा लेके,
वो ले जाये वरदान।
हे माता तू भक्तों के,
सुख दुःख का रखे ध्यान।

ओ लाटा वालिए…. शेरां वालिए..
पहाडा वालिए… मेहरा वालिये माँ… हे माँ..

तेरे चरणों में आके,
भाग्य कैसे न जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥

मात अंग चोला साजे,
हर एक रंग चोला साजे।
मात की महिमा देखो,
ज्योत दिन रैना जागे॥
🌷🌷🌷🌺🌺🌷🌷🌷
    🔱🙏🌺👏🌺🙏🔱

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कामेंट्स

आमोद कुमार Oct 22, 2020
जय श्री राधे...👏 🚩॥जय हिन्द🇮🇳जय नमो॥👏 ************************** 🔱🚩॥ॐ॥👏 ॥ॐ श्री दुर्गाय नमः॥🙏 नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं.. 🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁 “कोशिश करें कि जिंदगी का हर लम्हा अपनी तरफ से हर किसी के साथ अच्छे से गुजरे।" क्योंकि, जिन्दगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं.. 🌷आपका हर पल मंगलमय हो🌷 🚩माँ स्कंद दुर्गा की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे। धन्यवाद 🙏 🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁 😊 सदा मुस्कुराते रहिये 😊

JP. AGARWAL Apr 15, 2021

*🔯🙏‼️🕉️🚩🕉️‼️🚩ॐ श्री गणेशाय नमो नमः🚩‼️🕉️🚩🕉️‼️🙏🔯🙏‼️🕉️🔱🕉️‼️🚩ॐ श्री जमवाय देव्यै नमो नमःॐ🚩‼️🕉️‼️🔱🕉️‼️🙏‼️🕉️🔱🕉️‼️🔥ॐ श्री कुलदेव्यै नमो नमःॐ🔥‼️🕉️🔱🕉️‼️🙏🔯🙏‼️🕉️🔱🕉️‼️🚩ॐ श्री नवदुर्गा देव्यै नमो नमःॐ🚩‼️🕉️🔱🕉️‼️🙏🔯🙏‼️ओ🕉️🔱🕉️‼️🔥ॐ श्री आदिशक्ति देव्यै नमो नमःॐ🔥‼️🕉️🔱🕉️‼️🙏🔯🙏ॐ श्री नवरात्रि पर्व की एवँ नये वर्ष विक्रमी सम्वत 2078 की हार्दिक बधाई व शुभ-कामनायें ॐ‼️ॐ श्री आदिशक्तिजी श्री जगतजननीजी भवानीजी के श्री चरणों में मेरा सपरिवार कोटि-कोटि सादर-प्रणाम व चरण-स्पर्श ॐ‼️ॐजय श्री माताजी कीॐ‼️ॐ श्री धामाणा धाम वाली श्री मात भवानीजी की जय ॐ‼️👏‼️🕉️🔱ॐ श्री जमवाय माताजी की जय हो ॐ *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *सिंह की सवार बनकर* *रंगों की फुहार बनकर* *पुष्पों की बहार बनकर* *सुहागन का श्रृंगार बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *खुशियाँ अपार बनकर* *रिश्तों में प्यार बनकर* *बच्चों का दुलार बनकर* *समाज में संस्कार बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *रसोई में प्रसाद बनकर* *व्यापार में लाभ बनकर* *घर में आशीर्वाद बनकर* *मुँह मांगी मुराद बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *संसार में उजाला बनकर* *अमृत रस का प्याला बनकर* *पारिजात की माला बनकर* *भूखों का निवाला बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी बनकर* *चंद्रघंटा, कूष्माण्डा बनकर* *स्कंदमाता, कात्यायनी बनकर* *कालरात्रि, महागौरी बनकर* *माता सिद्धिदात्री बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* *तुम्हारे आने से नव-निधियां* *स्वयं ही चली आएंगी* *तुम्हारी दास बनकर* *तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ* 🚩🐅🚩🐅🚩🐅🚩 *सभी पर माँ की कृपा रहे* *👏‼️🕉️🚩🔱जय श्री माताजी की🔱🚩🕉️‼️👏*

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नवरात्रि के तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा की उपासना विधि एवं फल 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।। माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन माँ के चंद्रघंटा विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं। माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सद्यः फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है। माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं। माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं। माता चंद्रघंटा की कथा 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला. असुरों का स्‍वामी महिषासुर था और देवाताओं के इंद्र. महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्‍त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्‍वर्गलोक पर राज करने लगा। इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्‍या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्र‍िदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के पास गए। देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्‍य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्‍हें बंधक बनाकर स्‍वयं स्‍वर्गलोक का राजा बन गया है। देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्‍याचार के कारण अब देवता पृथ्‍वी पर विचरण कर रहे हैं और स्‍वर्ग में उनके लिए स्‍थान नहीं है। यह सुनकर ब्रह्मा, विष्‍णु और भगवान शंकर को अत्‍यधिक क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई. देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई. यह दसों दिशाओं में व्‍याप्‍त होने लगी। तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ. भगवान शंकर ने देवी को त्र‍िशूल और भगवान विष्‍णु ने चक्र प्रदान किया. इसी प्रकार अन्‍य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्‍त्र शस्‍त्र सजा दिए. इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया. सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया। देवी अब महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं. उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर यह समझ गया कि अब उसका काल आ गया है. महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा. अन्‍य देत्‍य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े। देवी ने एक ही झटके में ही दानवों का संहार कर दिया. इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्‍य बड़े दानवों और राक्षसों का संहार मां ने कर दिया. इस तरह मां ने सभी देवताओं को असुरों से अभयदान दिलाया। उपासना मन्त्र एवं विधि 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें। हमें चाहिए कि अपने मन, वचन, कर्म एवं काया को विहित विधि-विधान के अनुसार पूर्णतः परिशुद्ध एवं पवित्र करके माँ चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना में तत्पर हों। उनकी उपासना से हम समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं। हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में तृतीय दिन इसका जाप करना चाहिए। इस दिन सांवली रंग की ऐसी विवाहित महिला जिसके चेहरे पर तेज हो, को बुलाकर उनका पूजन करना चाहिए। भोजन में दही और हलवा खिलाएँ। भेंट में कलश और मंदिर की घंटी भेंट करना चाहिए। माँ चंद्रघंटा ध्यान मन्त्र 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥ मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥ प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्। कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ माँ चंद्रघंटा स्तोत्र पाठ 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्। अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥ चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्। धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥ नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥ माँ चंद्रघंटा कवच 〰️〰️🌼〰️〰️ रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने। श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥ बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं। स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥ कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥ कर्ज से मुक्ति के उपाय 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ कर्जें से मुक्ति के लिए क्या उपाय करें। संपूर्ण प्रयासों के बावजूद भी ऋण से पीछा नहीं छुट रहा हो तो 108 गुलाब के पुष्प ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चं फट् स्वाहा मंत्र बोलते हुए भगवती चंद्रघंटा के श्री चरणों में अर्पित करें। सवा किलो साबुत मसूर लाल कपड़ें में बांधकर अपने सामने रख दें। घी का दीपक जलाकर ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चंद्रघण्टे हुं फट् स्वाहा। इस मंत्र का जाप 108 बार करें। मसूर को अपने ऊपर से 7 बार उसार कर सफाई कर्मचारी को दान में दे दें। कर्जें से छुटकारा मिलने की संभावना बढ़ेगी। माँ चंद्रघंटा की आरती 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥ चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥ क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली॥ मन की मालक मन भाती हो। चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥ सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥ हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥ मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। शीश झुका कहे मन की बाता॥ पूर्ण आस करो जगत दाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥ कर्नाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू महारानी॥ भक्त की रक्षा करो भवानी। माँ दुर्गा की आरती 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । >मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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Dipa das Apr 15, 2021

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Aaradhya Goswami Apr 13, 2021

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