. "जीवन की ठक-ठक" एक आदमी घोड़े पर कहीं जा रहा था, घोड़े को जोर की प्यास लगी थी। कुछ दूर कुएँ पर एक किसान बैलों से "रहट" चलाकर खेतों में पानी लगा रहा था। मुसाफिर कुएँ पर आया और घोड़े को "रहट" में से पानी पिलाने लगा। पर जैसे ही घोड़ा झुककर पानी पीने की कोशिश करता, "रहट" की ठक-ठक की आवाज से डर कर पीछे हट जाता। फिर आगे बढ़कर पानी पीने की कोशिश करता और फिर "रहट" की ठक-ठक से डरकर हट जाता। मुसाफिर कुछ क्षण तो यह देखता रहा, फिर उसने किसान से कहा कि थोड़ी देर के लिए अपने बैलों को रोक ले ताकि रहट की ठक-ठक बन्द हो और घोड़ा पानी पी सके। किसान ने कहा कि जैसे ही बैल रूकेंगे कुएँ में से पानी आना बन्द हो जायेगा, इसलिए पानी तो इसे ठक-ठक में ही पीना पड़ेगा। ठीक ऐसे ही यदि हम सोचें कि जीवन की ठक-ठक (हलचल) बन्द हो तभी हम भजन, सन्ध्या, वन्दना आदि करेंगे तो यह हमारी भूल है। हमें भी जीवन की इस ठक-ठक (हलचल) में से ही समय निकालना होगा, तभी हम अपने मन की तृप्ति कर सकेंगे, वरना उस घोड़े की तरह हमेशा प्यासा ही रहना होगा। सब काम करते हुए, सब दायित्व निभाते हुए प्रभु सुमिरन में भी लगे रहना होगा, जीवन में ठक-ठक तो चलती ही रहेगी। ----------:::×:::--------- "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

.                         "जीवन की ठक-ठक"

            एक आदमी घोड़े पर कहीं जा रहा था, घोड़े को जोर की प्यास लगी थी। कुछ दूर कुएँ पर एक किसान बैलों से "रहट" चलाकर खेतों में पानी लगा रहा था। मुसाफिर कुएँ पर आया और घोड़े को "रहट" में से पानी पिलाने लगा। पर जैसे ही घोड़ा झुककर पानी पीने की कोशिश करता, "रहट" की ठक-ठक की आवाज से डर कर पीछे हट जाता। फिर आगे बढ़कर पानी पीने की कोशिश करता और फिर "रहट" की ठक-ठक से डरकर हट जाता। 
           मुसाफिर कुछ क्षण तो यह देखता रहा, फिर उसने किसान से कहा कि थोड़ी देर के लिए अपने बैलों को रोक ले ताकि रहट की ठक-ठक बन्द हो और घोड़ा पानी पी सके। किसान ने कहा कि जैसे ही बैल रूकेंगे कुएँ में से पानी आना बन्द हो जायेगा, इसलिए पानी तो इसे ठक-ठक में ही पीना पड़ेगा।  
           ठीक ऐसे ही यदि हम सोचें कि जीवन की ठक-ठक (हलचल) बन्द हो तभी हम भजन, सन्ध्या, वन्दना आदि करेंगे तो यह हमारी भूल है। हमें भी जीवन की इस ठक-ठक (हलचल) में से ही समय निकालना होगा, तभी हम अपने मन की तृप्ति कर सकेंगे, वरना उस घोड़े की तरह हमेशा प्यासा ही रहना होगा। 
           सब काम करते हुए, सब दायित्व निभाते हुए प्रभु सुमिरन में भी लगे रहना होगा, जीवन में ठक-ठक तो चलती ही रहेगी।
                          ----------:::×:::---------

                             "जय जय श्री राधे"
                        " कुमार रौनक कश्यप "
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sukhadev awari May 10, 2021

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sukhadev awari May 10, 2021

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🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 ॐ हं हनुमते नमः ।। ॐ मंगलाय नमः,ॐ भूमि पुत्राय नमः ॐ ऋण हर्त्रे नमः,ॐ धन प्रदाय नमः, ॐ स्थिर आसनाय नमः, ॐ महा कायाय नमः, ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः, ॐ लोहिताय नमः, ॐ लोहिताक्षाय नमः, ॐ साम गानाम कृपा करे नमः, ॐ धरात्मजाय नमः,ॐ भुजाय नमः ॐ भौमाय नमः,ॐ भुमिजाय नमः ॐ भूमि नन्दनाय नमः ॐ अंगारकाय नमः,ॐ यमाय नमः ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः ॐ वृष्टि कर्ते नमः,ॐ वृष्टि हराते नमः ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः। सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 11-05-2021 मंगलवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड 134007 🙏°•🙏•°🙏°•🙏•°🙏 🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀°•🌹 ----°•- •°-•°°•- समाप्तिकाल ----°•-•°-- 📒 तिथि अमावस्या 24:31:16 ☄️ नक्षत्र भरणी 23:31:28 🏵️ करण : 🏵️ चतुष्पाद 11:13:43 🏵️ नाग 24:31:16 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग सौभाग्य 22:40:44 🗝️ वार मंगलवार 🌄 सूर्योदय 05:31:52 🌙 चन्द्र राशि मेष 🦌 🌌 सूर्यास्त 19:07:00 🌑 चन्द्रास्त 18:47:00 💥 ऋतु ग्रीष्म 🏵️ शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 13:35:07 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत वैशाख 📯 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:52:16 - 12:46:36 🕳️ दुष्टमुहूर्त 08:14:54 - 09:09:14 🕳️ कंटक 06:26:13 - 07:20:33 🕳️ यमघण्ट 10:03:35 - 10:57:55 😈 राहु काल 15:43:13 - 17:25:06 🕳️ कुलिक 13:40:57 - 14:35:17 🕳️ कालवेला 08:14:54 - 09:09:14 🕳️ यमगण्ड 08:55:39 - 10:37:33 🕳️ गुलिक 12:19:26 - 14:01:19 🏵️ दिशा शूल उत्तर ☘️☘️होरा 🏵️मंगल 05:31:52 - 06:39:48 🏵️सूर्य 06:39:48 - 07:47:44 🏵️शुक्र 07:47:44 - 08:55:39 🏵️बुध 08:55:39 - 10:03:35 🏵️चन्द्रमा 10:03:35 - 11:11:30 🏵️शनि 11:11:30 - 12:19:26 🏵️बृहस्पति 12:19:26 - 13:27:22 🏵️मंगल 13:27:22 - 14:35:17 🏵️सूर्य 14:35:17 - 15:43:13 🏵️शुक्र 15:43:13 - 16:51:08 🏵️बुध 16:51:08 - 17:59:04 🏵️चन्द्रमा 17:59:04 - 19:07:00 🏵️शनि 19:07:00 - 19:59:00 🏵️बृहस्पति 19:59:00 - 20:51:01 🏵️मंगल 20:51:01 - 21:43:02 🚩🚩 चोघडिया ☘️रोग 05:31:52 - 07:13:46 🕳️उद्वेग 07:13:46 - 08:55:39 🛑चल 08:55:39 - 10:37:33 ⛩️लाभ 10:37:33 - 12:19:26 ⛩️अमृत 12:19:26 - 14:01:19 🕳️काल 14:01:19 - 15:43:13 😈शुभ 15:43:13 - 17:25:06 ☘️रोग 17:25:06 - 19:07:00 🕳️काल 19:07:00 - 20:25:01 ⛩️लाभ 20:25:01 - 21:43:02 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 💥 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - मेष 🦌 🌑 मंगल - मिथुन 👬🏼 🌑 बुध - वृष 🐂 🌑 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🌑 शुक्र - वृष 🐂 🌑 शनि - मकर 🐊 🌑 राहु - वृष 🐂 🌑 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- व्रत-त्यौहार 14 मई तक 🎊🎊🎊🎊🎊🎊 🛑 11 मई- मंगल- वैशाख (भौमवती) अमावस तर्पण आदि हेतु पितृ कार्यों के लिए स्नान आदि का विशेष माहात्म्य होगा। मेला हरिद्वार प्रयागराज आदि तीर्थ स्नान का विशेष महत्व में होगा। 🥀सूर्य 💥कृतिका में 12: 33, मेला हरिद्वार प्रयागराज , तीर्थ स्थान -माहात्म्य कुंभ पर्व, मेला पिंजौर हरियाणा। 🛑 12 मई-बुधवार - वैशाख शुक्ल 🔓पक्ष प्रारंभ, शुक्र रोहिणी में 16:31 🏵️ 13 मई -गुरु -चंद्र दर्शन, मु. 45 श्रीशिवाजी जयंती। 🏵️ 14 मई - शुक्र - अक्षय तृतीया व्रत और श्री परशुराम जयंती मनाई जाएगी। यह तिथि तीर्थ स्नान,जप -तप, दान, देव पितृ तर्पण आदि कृत्यों के लिए विशेष पुण्य फल वाली होगी। इस दिन जब पाठ, दान होम आदि कर्मों का फल अनंत गुना होता है। सभी कर्म अक्षय हो जाते हैं। इस तिथि की गणना युग आदि तिथियों में होती है। इस स्थिति को नर- नारायण परशुराम एवं हयग्रीव अवतार हुए थे तथा इसी दिन त्रेतायुग का भी आरंभ हुआ था। अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है और सुख सौभाग्य देने वाली तिथि मानी जाती है। इसी दिन कुंभ महापर्व हरिद्वार में मुख्य स्नान भी होगा। स्नान कुंभ महापर्व (हरिद्वार) भगवान परशुराम जयंती, केदार - बद्री यात्रा प्रारंभ, 🏵️ 14 मई - शुक्रवार-🥀💥सूर्य 🐂वृष में 23 :24, ज्येष्ठ सक्रांति - शुक्रवार वैशाख शुक्ल द्वितीया मृगशिरा नक्षत्र कालीन रात्रि 11:14 पर धनु 🏹लग्न में प्रवेश करेगी ।30 मुहूर्ति इस सक्रांति का पुण्य काल तारीख 14 को मध्याह्न बाद से अगले दिन प्रातः 6:00 बजे तक होगा। वार अनुसार मिश्रा तथा नक्षत्र अनुसार मंदाकिनी नामक यह सक्रांति राजनेताओं एवम् पशुओं के लिए सुख कर रहेगी । लोक भविष्य- मंगल -शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है । राजनीतिक वातावरण अशांत और असमंजस पूर्ण रहेगा। सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव व खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना चांदी आदि धातुओं सरसों क्रूड -आयल में विशेष तेजी बनेगी। 11 मई को वैशाख अमावस मंगलवासरी होने से इस दिन गंगा आदि तीर्थ पर स्नान दान आदि करने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। हरिद्वार में कुंभ महापर्व की विशेष स्नान तिथि भी रहेगी । इस कारण भी इस तिथि पर स्नान दान आदि का माहात्म्य विशेष रूपेण रहेगा । राजनीतिक पक्ष से मंगलवारी अमावस का पल शुभ नहीं माना गया । राजनेताओं में विग्रह, किसी प्रमुख नेता के अपदस्थ कहीं छत्र भंग (सत्ता परिवर्तन) उपद्रव जन- धन संपदा की क्षति हो। अल्प वृष्टि अग्निकांड आदि प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। सक्रांति राशिफल- यह सक्रांति मेष 🦌 मिथुन👬🏼 सिंह🦁 कन्या 👩🏻‍🦱तुला ⚖️धनु 🏹मकर 🐊कुंभ ⚱️मीन🐬 राशि वालों को शुभ रहेगी। बाजार 📉मंदा तेजी 📈 14मई तक 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🛑 11 मई को सूर्य 🌞कृतिका नक्षत्र ☄️में आएगा । घी रूई सोना चांदी अलसी एरण्ड गेहूं चना मूंग मोठ चावल राई सरसों खांड में तेजी बनेगी। 🛑 12 मई को शुक्र रोहिणी नक्षत्र ☄️में आकर बुध एवं राहु के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। अकेला शुक्र यद्यपि यहां मंदी📉 करता है परंतु बुध राहु के योग से यहां तेजी📈 मालूम होती है। सोना चांदी आदि धातुओं अल्सी सरसों तेल गुड़ खाण्ड दाग छुहारा सुपारी नारियल ऊन में पहले मंदी 📉बन फिर तेजी 📈का रुख बन जाएगा। 🛑13 मई को गुरुवार के दिन चंद्र🌃 दर्शन होने से रुई तथा सूती रेशमी ऊनी वस्त्र सरसों तेल घी में तेजी 📈बनेगी। सोना चांदी खाण्ड में कुछ मंदीे 📉रहे। 🛑 14 मई को सूर्य 🌞वृष राशि 🐂में आकर बुध शुक्र और राहु के साथ मेल करेगा। सोना चांदी गुड़ खांड शक्कर कपास रूई सूत बादाम सुपारी नारियल तिल तेल सरसों आदि में विशेष तेजी बनेगी। जौं चना गेहूं मटर अरहर मूंग चावल आदि कुछ वस्तुओं में मंदी 📉बनेगी। 🚩 दैनिक राशिफल 🚩 🦌मेष नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामजिक कार्य करने की इच्छा जागृत होगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। सुख के साधन जुटेंगे। नौकरी में वर्चस्व स्थापित होगा। आय के स्रोत बढ़ सकते हैं। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। घर-बाहर सहयोग व प्रसन्नता में वृद्धि होगी। 🐂वृष यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बगैर मांगे किसी को सलाह न दें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। धनार्जन होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। अज्ञात भय व चिंता रहेंगे। 👫मिथुन अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। व्यवस्था नहीं होने से परेशानी रहेगी। व्यवसाय में कमी होगी। नौकरी में नोकझोंक हो सकती है। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। थकान महसूस होगी। अपेक्षित कार्यों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। 🦀कर्क जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। जुए, सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें। निवेश शुभ रहेगा। प्रमाद न करें। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। 🦁सिंह पूजा-पाठ व सत्संग में मन लगेगा। आत्मशांति रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। मातहतों का सहयोग मिलेगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। दूसरे के काम में दखल न दें। 👩🏻‍🦱कन्या स्थायी संपत्ति की खरीद-फरोख्त से बड़ा लाभ हो सकता है। प्रतिद्वंद्विता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग समय पर मिलने से प्रसन्नता रहेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। व्यवसाय ठीक-ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। चोट व रोग से बाधा संभव है। दूसरों के काम में दखलंदाजी न करें। ⚖️तुला मन की चंचलता पर नियंत्रण रखें। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल रहेगी। जीवनसाथी पर आपसी मेहरबानी रहेगी। जल्दबाजी में धनहानि हो सकती है। व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में सुकून रहेगा। निवेश लाभप्रद रहेगा। कार्य बनेंगे। घर-बाहर सुख-शांति बने रहेंगे। 🦂वृश्चिक क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। पुराना रोग बाधा का कारण रहेगा। स्वास्थ्य पर खर्च होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। छोटी सी गलती से समस्या बढ़ सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। मित्र व संबंधी सहायता करेंगे। आय बनी रहेगी। जोखिम न लें। 🏹धनु पार्टी व पिकनिक की योजना बनेगी। मित्रों के साथ समय अच्‍छा व्यतीत होगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। 🐊मकर घर-बाहर अशांति रहेगी। कार्य में रुकावट होगी। आय में कमी तथा नौकरी में कार्यभार रहेगा। बेवजह लोगों से कहासुनी हो सकती है। दु:खद समाचार मिलने से नकारात्मकता बढ़ेगी। व्यवसाय से संतुष्टि नहीं रहेगी। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाज न करें। ⚱️कुंभ दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। व्यवसाय में जल्दबाजी से काम न करें। चोट व दुर्घटना से बचें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर स्थिति मनोनुकूल रहेगी। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। वस्तुएं संभालकर रखें। 🐟मीन प्रयास सफल रहेंगे। किसी बड़े कार्य की समस्याएं दूर होंगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। कर्ज में कमी होगी। संतुष्टि रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। अपना प्रभाव बढ़ा पाएंगे। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य न करें। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. 🏵️आपका दिन मंगलमय हो🏵️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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Meena Dubey May 10, 2021

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🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 जय श्री महाकालेश्वर विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय गङ्गाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नम:शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः । ॐ श्रां श्रीं श्रीं सः चन्द्राय नमः । सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 10-05-2021 सोमवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड- 134 007 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ शिवाय नम:,ॐ सर्वात्मने नम: ॐ त्रिनेत्राय नम:,ॐ हराय नम: ॐ इन्द्र्मुखाय नम:ॐ श्रीकंठाय नम: ॐ स द्योजाताय नम:,ॐ वामदेवाय नम: ॐ अघोरह्र्द्याय नम:,ॐ तत्पुरुषाय नम: ॐ ईशानाय नम:,ॐ अनंतधर्माय नम: ॐ ज्ञानभूताय नम:, ॐ अनंतवैराग्यसिंघायनम:, ॐ प्रधानाय नम: ॐ व्योमात्मने नम:, ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: ॐ महेश्वराए नमः, ॐ शूलपानायाय नमः, ॐ पिनाकपनाये नमः, ॐ पशुपति नमः । 🙏🙏🙏🙏🙏 🍁🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀 --------------समाप्तिकाल----------------- 📒 तिथि चतुर्दशी 21:57:39 ☄️ नक्षत्र अश्विनी 20:25:55 🏵️ करण : 🏵️विष्टि 08:43:48 🏵️शकुन 21:57:39 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग आयुष्मान 21:38:01 🗝️ वार सोमवार 🌄 सूर्योदय 05:32:36 🌃चन्द्रोदय 29:17:00 🌙 चन्द्र राशि 🦌मेष 🌌 सूर्यास्त 19:06:20 🌑 चन्द्रास्त 17:52:59 💥 ऋतु ग्रीष्म 🏵️शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 13:33:43 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत वैशाख 📯 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:52:21 - 12:46:36 🕳️ दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 12:46:36 - 13:40:51 🕳️ 15:29:21 - 16:23:36 🕳️ कंटक 08:15:21 - 09:09:36 🕳️ यमघण्ट 11:52:21 - 12:46:36 😈 राहु काल 07:14:20 - 08:56:02 🕳️ कुलिक 15:29:21 - 16:23:36 🕳️ कालवेला 10:03:51 - 10:58:06 🕳️ यमगण्ड 10:37:45 - 12:19:28 🕳️ गुलिक 14:01:11 - 15:42:54 🏵️दिशा शूल पूर्व 🚩🚩 होरा 🏵️चन्द्रमा 05:32:36 - 06:40:25 🏵️शनि 06:40:25 - 07:48:14 🏵️बृहस्पति 07:48:14 - 08:56:02 🏵️मंगल 08:56:02 - 10:03:51 🏵️सूर्य 10:03:51 - 11:11:40 🏵️शुक्र 11:11:40 - 12:19:29 🏵️बुध 12:19:29 - 13:27:17 🏵️चन्द्रमा 13:27:17 - 14:35:06 🏵️शनि 14:35:06 - 15:42:55 🏵️बृहस्पति 15:42:55 - 16:50:43 🏵️मंगल 16:50:43 - 17:58:32 🏵️सूर्य 17:58:32 - 19:06:20 🏵️शुक्र 19:06:20 - 19:58:28 🏵️बुध 19:58:28 - 20:50:36 🏵️चन्द्रमा 20:50:36 - 21:42:43 ☘️☘️चोघड़िया ⛩️अमृत 05:32:36 - 07:14:20 😈काल 07:14:20 - 08:56:02 ⛩️शुभ 08:56:02 - 10:37:45 ☘️रोग 10:37:45 - 12:19:28 🕳️उद्वेग 12:19:28 - 14:01:11 🛑चल 14:01:11 - 15:42:54 ⛩️लाभ 15:42:54 - 17:24:37 ⛩️अमृत 17:24:37 - 19:06:20 🛑चल 19:06:20 - 20:24:32 ☘️रोग 20:24:32 - 21:42:43 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - मेष 🦌 🌑 मंगल - मिथुन 👬🏼 🌑 बुध - वृष 🐂 🌑 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🌑 शुक्र - वृष 🐂 🌑 शनि - मकर 🐊 🌑 राहु - वृष 🐂 🌑 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- व्रत-त्यौहार 14 मई तक 🎊🎊🎊🎊🎊🎊 🛑10 मई -चंद्र -भद्रा 8:44 तक गण्डमूल 20 :25 तक। 🛑 11 मई- मंगल- वैशाख (भौमवती) अमावस तर्पण आदि हेतु पितृ कार्यों के लिए स्नान आदि का विशेष माहात्म्य होगा। मेला हरिद्वार प्रयागराज आदि तीर्थ स्नान का विशेष महत्व में होगा। 🥀सूर्य 💥कृतिका में 12: 33, मेला हरिद्वार प्रयागराज , तीर्थ स्थान -माहात्म्य कुंभ पर्व, मेला पिंजौर हरियाणा। 🛑 12 मई-बुधवार - वैशाख शुक्ल 🔓पक्ष प्रारंभ, शुक्र रोहिणी में 16:31 🏵️ 13 मई -गुरु -चंद्र दर्शन, मु. 45 श्रीशिवाजी जयंती। 🏵️ 14 मई - शुक्र - अक्षय तृतीया व्रत और श्री परशुराम जयंती मनाई जाएगी। यह तिथि तीर्थ स्नान,जप -तप, दान, देव पितृ तर्पण आदि कृत्यों के लिए विशेष पुण्य फल वाली होगी। इस दिन जब पाठ, दान होम आदि कर्मों का फल अनंत गुना होता है। सभी कर्म अक्षय हो जाते हैं। इस तिथि की गणना युग आदि तिथियों में होती है। इस स्थिति को नर- नारायण परशुराम एवं हयग्रीव अवतार हुए थे तथा इसी दिन त्रेतायुग का भी आरंभ हुआ था। अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है और सुख सौभाग्य देने वाली तिथि मानी जाती है। इसी दिन कुंभ महापर्व हरिद्वार में मुख्य स्नान भी होगा। स्नान कुंभ महापर्व (हरिद्वार) भगवान परशुराम जयंती, केदार - बद्री यात्रा प्रारंभ, 🏵️ 14 मई - शुक्रवार-🥀💥सूर्य 🐂वृष में 23 :24, ज्येष्ठ सक्रांति - शुक्रवार वैशाख शुक्ल द्वितीया मृगशिरा नक्षत्र कालीन रात्रि 11:14 पर धनु 🏹लग्न में प्रवेश करेगी ।30 मुहूर्ति इस सक्रांति का पुण्य काल तारीख 14 को मध्याह्न बाद से अगले दिन प्रातः 6:00 बजे तक होगा। वार अनुसार मिश्रा तथा नक्षत्र अनुसार मंदाकिनी नामक यह सक्रांति राजनेताओं एवम् पशुओं के लिए सुख कर रहेगी । लोक भविष्य- मंगल -शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है । राजनीतिक वातावरण अशांत और असमंजस पूर्ण रहेगा। सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव व खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना चांदी आदि धातुओं सरसों क्रूड -आयल में विशेष तेजी बनेगी। 11 मई को वैशाख अमावस मंगलवासरी होने से इस दिन गंगा आदि तीर्थ पर स्नान दान आदि करने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। हरिद्वार में कुंभ महापर्व की विशेष स्नान तिथि भी रहेगी । इस कारण भी इस तिथि पर स्नान दान आदि का माहात्म्य विशेष रूपेण रहेगा । राजनीतिक पक्ष से मंगलवारी अमावस का पल शुभ नहीं माना गया । राजनेताओं में विग्रह, किसी प्रमुख नेता के अपदस्थ कहीं छत्र भंग (सत्ता परिवर्तन) उपद्रव जन- धन संपदा की क्षति हो। अल्प वृष्टि अग्निकांड आदि प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। सक्रांति राशिफल- यह सक्रांति मेष 🦌 मिथुन👬🏼 सिंह🦁 कन्या 👩🏻‍🦱तुला ⚖️धनु 🏹मकर 🐊कुंभ ⚱️मीन🐬 राशि वालों को शुभ रहेगी। बाजार 📉मंदा तेजी 📈 14मई तक 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🛑 11 मई को सूर्य 🌞कृतिका नक्षत्र ☄️में आएगा । घी रूई सोना चांदी अलसी एरण्ड गेहूं चना मूंग मोठ चावल राई सरसों खांड में तेजी बनेगी। 🛑 12 मई को शुक्र रोहिणी नक्षत्र ☄️में आकर बुध एवं राहु के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। अकेला शुक्र यद्यपि यहां मंदी📉 करता है परंतु बुध राहु के योग से यहां तेजी📈 मालूम होती है। सोना चांदी आदि धातुओं अल्सी सरसों तेल गुड़ खाण्ड दाग छुहारा सुपारी नारियल ऊन में पहले मंदी 📉बन फिर तेजी 📈का रुख बन जाएगा। 🛑13 मई को गुरुवार के दिन चंद्र🌃 दर्शन होने से रुई तथा सूती रेशमी ऊनी वस्त्र सरसों तेल घी में तेजी 📈बनेगी। सोना चांदी खाण्ड में कुछ मंदीे 📉रहे। 🛑 14 मई को सूर्य 🌞वृष राशि 🐂में आकर बुध शुक्र और राहु के साथ मेल करेगा। सोना चांदी गुड़ खांड शक्कर कपास रूई सूत बादाम सुपारी नारियल तिल तेल सरसों आदि में विशेष तेजी बनेगी। जौं चना गेहूं मटर अरहर मूंग चावल आदि कुछ वस्तुओं में मंदी 📉बनेगी। 🏵️🚩 दैनिक राशिफल 🚩🏵️ 🦌मेष धनार्जन सुगम होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता अर्जित करेगा। पठन-पाठन में मन लगेगा। दूर यात्रा की योजना बन सकती है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। बेचैनी रहेगी। 🐂वृष वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के व्यवहार से क्लेश हो सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। पारिवारिक चिंता में वृद्धि होगी। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलेगी। तनाव रहेगा। 👫मिथुन शत्रु नतमस्तक होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बाधा संभव है। फालतू खर्च होगा। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 🦀कर्क लेन-देन में सावधानी रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। परिवार में तनाव रह सकता है। शुभ समाचार मिलेंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार के साथ मनोरंजन का कार्यक्रम बन सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। 🦁सिंह रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कोई बड़ी समस्या से छुटकारा मिल सकता है। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। 👩🏻‍🦱कन्या अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी विवाद में उलझ सकते हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जोखिम न उठाएं। घर-बाहर असहयोग मिलेगा। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। आय में कमी हो सकती है। ⚖️तुला बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। बेचैनी रहेगी। थकान महसूस होगी। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। 🦂वृश्चिक नई आर्थिक नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। कारोबारी अनुबंधों में वृद्धि हो सकती है। समय का लाभ लें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। कानूनी बाधा आ सकती है। विवाद न करें। 🏹धनु बेचैनी रहेगी। चोट व रोग से बचें। काम का विरोध होगा। तनाव रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल होंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। सुख के साधनों पर व्यय हो सकता है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। प्रमाद न करें। 🐊मकर स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवाद से क्लेश संभव है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। अपेक्षित कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ सकती है। तनाव रहेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। राज्य के प्रतिनिधि सहयोग करेंगे। ⚱️कुंभ कष्ट, भय, चिता व बेचैनी का वातावरण बन सकता है। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। मातहतों से संबंध सुधरेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जल्दबाजी न करें। कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। 🐟मीन धन प्राप्ति सुगम होगी। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च हो सकता है। भूमि, भवन, दुकान व फैक्टरी आदि के खरीदने की योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। अपरिचितों पर अतिविश्वास न करें। प्रमाद न करें। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP. ASTROLOGER. 🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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. "मीरा चरित" (पोस्ट-015) मेड़ता से गये पुरोहित जी के साथ चित्तौड़ के राजपुरोहित और उनकी पत्नी मीरा को देखने आये। राजमहल में उनका आतिथ्य सत्कार हो रहा है। पर मीरा को तो जैसे वह सब दीखकर भी दिखाई नहीं दे रहा है। उसे न तो कोई रूचि है न ही कोई आकर्षण। दूसरे दिन माँ सुन्दर वस्त्राभूषण लेकर एक दासी के साथ मीरा के पास आई। आग्रह से स्थिति समझाते हुये मीरा को सब पहनने को कहा। मीरा ने बेमन से कहा, "आज जी ठीक नहीं है, भाबू ! रहने दीजिये, किसी और दिन पहन लूँगी।" माँ खिन्न हो कर उठकर चली गईं। तो मीरा ने उदास मन से तानपुरा उठाया और गाने लगी - राम नाम मेरे मन बसियो रसियो राम रिझाऊँ ए माय। मीरा के प्रभु गिरधर नागर रज चरणन की पाऊँ ए माय॥ भजन विश्राम कर वह उठी ही थी कि माँ और काकीसा के साथ चित्तौड़ के राजपुरोहित जी की पत्नी ने श्याम कुन्ज में प्रवेश किया। मीरा उनको यथायोग्य प्रणाम कर बड़े संकोच के साथ एक ओर हटकर ठाकुर जी को निहारती हुईं खड़ी हो गई। पुरोहितानी जी ने तो ऐसे रूप की कल्पना भी न की थी। वह, लज्जा से सकुचाई मीरा के सौंदर्य से विमोहित सी हो गई और उनसे प्रणाम का उत्तर, आशीर्वाद भी स्पष्ट रूप से देते न बना। वे कुछ देर मीरा को एकटक निहारते ही बैठी रही। दासियों ने आगे बढ़िया चरणामृत प्रसाद दिया। कुछ समय और यूँ ही मन्त्रमुग्ध बैठी फिर काकीसा के साथ चली गई। माँ ने सबके जाने के बाद फिर मीरा से कहा, "तेरा क्या होगा, यह आशंका ही मुझे मारे डालती है। अरे विनोद में कहे हुये भगवान से विवाह करने की बात से क्या जगत का व्यवहार चलेगा ? साधु-संग ने तो मेरी कोमलांगी बेटी को बैरागन ही बना दिया है। मैं अब किससे जा कर बेटी के सुख की भिक्षा माँगू ?" "माँ आप क्यों दु:खी होती हैं ? सब अपने भाग्य का लिखा ही पाते हैं। यदि मेरे भाग्य में दु:ख लिखा है तो क्या आप रो-रो कर उसे सुख में पलट सकती हैं ? तब जो हो रहा है उसी में संतोष मानिये। मुझे एक बात समझ में नहीं आती भाबू ! जो जन्मा है वह मरेगा ही, यह बात तो आप अच्छी तरह जानती हैं। फिर जब आपकी पुत्री को अविनाशी पति मिला है तो आप क्यों दु:ख मना रही हैं ? आपकी बेटी जैसी भाग्यशालिनी और कौन है, जिसका सुहाग अमर है।" वीरकुवंरी जी एक बार फिर मीरा के तर्क के आगे चुप हो चली गई। मीरा श्याम कुन्ज में अकेली रह गई। आजकल दासियों को भी कामों की शिक्षा दी जा रही है क्योंकि उन्हें भी मीरा के साथ चितौड़ जाना है। मीरा ने एकान्त पा फिर आर्त मन से प्रार्थना आरम्भ की............ तुम सुनो दयाल म्हाँरी अरजी। भवसागर में बही जात हूँ काढ़ो तो थाँरी मरजी। या संसार सगो नहीं कोई साँचा सगा रघुबर जी॥ मात पिता अर कुटुम कबीलो सब मतलब के गरजी। मीरा की प्रभु अरजी सुण लो, चरण लगावो थाँरी मरजी॥ मीरा श्याम कुन्ज में एकान्त में गिरधर के समक्ष बैठी है। आजकल दो ही भाव उस पर प्रबल होते है - या तो ठाकुर जी की करूणा का स्मरण कर उनसे वह कृपा की याचना करती है और या फिर अपने ही भाव-राज्य में खो अपने श्यामसुन्दर से बैठे बातें करती रहती है। इस समय दूसरा भाव अधिक प्रबल है। मीरा गोपाल से बैठे निहोरा कर रही है - थाँने काँई काँई कह समझाऊँ, म्हाँरा सांवरा गिरधारी। पूरब जनम की प्रीति म्हाँरी, अब नहीं जात निवारी॥ सुन्दर बदन जोवताँ सजनी, प्रीति भई छे भारी। म्हाँरे घराँ पधारो गिरधर, मंगल गावें नारी॥ मोती चौक पूराऊँ व्हाला, तन मन तो पर वारी। म्हाँरो सगपण तो सूँ साँवरिया, जग सूँ नहीं विचारी॥ मीरा कहे गोपिन को व्हालो, हम सूँ भयो ब्रह्मचारी। चरण शरण है दासी थाँरी, पलक न कीजे न्यारी॥ मीरा गाते-गाते अपने भाव जगत में खो गई। वह सिर पर छोटी सी कलशी लिए यमुना जल लेकर लौट रही है। उसके तृषित नेत्र इधर-उधर निहार कर अपना धन खोज रहे हैं। वो यहीं कहीं होंगे, आयेंगे, नहीं आयेंगे, बस इसी ऊहापोह में धीरे-धीरे चल रही थी कि पीछे से किसी ने मटकी उठा ली। उसने अचकचाकर ऊपर देखा तो - कदम्ब पर एक हाथ से डाल पकड़े और एक हाथ में कलशी लटकाये मनमोहन बैठे हँस रहे है। लाज के मारे उसकी दृष्टि ठहर नहीं रही। लज्जा नीचे और प्रेम उत्सुकता ऊपर देखने को विवश कर रही है। वे एकदम वृक्ष से उसके सम्मुख कूद पड़े। वह चौंककर चीख पड़ी, और साथ ही उन्हें देख लजा गई। "डर गई न ?" उन्होंने हँसते हुए पूछा और हाथ पकड़ कर कहा -"चल आ, थोड़ी देर बैठकर बातें करें।" सघन वृक्ष तले एक शिला पर दोनों बैठ गये। मुस्कुरा कर बोले, "तुझे क्या लगा - कोई वानर कूद पड़ा है क्या ? अभी पानी भरने का समय है क्या ? दोपहर में पता नहीं घाट नितान्त सूने रहते हैं। जो कोई सचमुच वानर आ जाता तो ?" "तुम हो न।" उसके मुख से निकला। "मैं क्या यहाँ ही बैठा ही रहता हूँ ? गईयाँ नहीं चरानी मुझे ?" "एक बात कहूँ ?" मैने सिर नीचा किए हुये कहा। "एक नहीं सौ कह, पर माथा तो ऊँचा कर ! तेरो मुख ही नाय दिख रहो मोकू।" उन्होंने मुख ऊँचा किया तो फिर लाज ने आ घेरा। "अच्छो-अच्छो मुख नीचो ही रहने दे। कह, का बात है ?" "तुम्हें कैसे प्रसन्न किया जा सकता है ?" बहुत कठिनाई से मैंने कहा। "तो सखी ! तोहे मैं अप्रसन्न दीख रहयो हूँ।" "नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था। सुना है तुम प्रेम से वश में होते हो।" "मोको वश में करके क्या करेगी सखी ! नाथ डालेगी कि पगहा बाँधेगी ? मेरे वश हुये बिना तेरो कहा काज अटक्यो है भला ?" "सो नहीं श्यामसुन्दर !" "तो फिर क्या ? कब से पूछ रहो हूँ। तेरो मोहढों (मुख) तो पूरो खुले हु नाय। एकहु बात पूरी नाय निकसै। अब मैं भोरो-भारो कैसे समझूँगो ?" "सुनो श्यामसुन्दर ! 'मैंने आँख मूँदकर पूरा ज़ोर लगाकर कह दिया' "मुझे तुम्हारे चरणों में अनुराग चाहिए।" "सो कहा होय सखी ?" उन्होंने अन्जान बनते हुये पूछा। अपनी विवशता पर मेरी आँखों में आँसू भर आये। घुटनों में सिर दे मैं रो पड़ी। "सखी, रोवै मति।" उन्होंने मेरे आँसू पौंछते हुये पूछा -"और ऐसो अनुराग कैसो होवे री ?" "सब कहते हैं, उसमें अपने सुख की आशा-इच्छा नहीं होती।" "तो और कहा होय ?" श्यामसुन्दर ने पूछा। "बस तुम्हारे सुख की इच्छा।" "और कहा अब तू मोकू दु:ख दे रही है ?" ऐसा कह हँसते हुये मेरी मटकी लौटाते हुये बोले, "ले अपनी कलशी ! बावरी कहीं की !" और वह वन की ओर दौड़ गये। मैं वहीं सिर पर मटकी ठगी सी बैठी रही। - पुस्तक- "मीरा चरित" लेखिका:- आदरणीय सौभाग्य कुँवरी राणावत ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप" *************************************************

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. "तीन प्रश्न" एक बार एक राजा था। एक दिन वह बड़ा प्रसन्न मुद्रा में था सो अपने मन्त्री के पास गया और कहा कि तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी इच्छा क्या है ? मन्त्री शरमा गया और आँखें नीचे करके बैठ गया। राजा ने कहा तुम घबराओ मत तुम अपनी सबसे बड़ी इच्छा बताओ। मन्त्री ने राजा से कहा सरकार आप इतनी बड़ी राज्य के मालिक हैं और जब भी मैं यह देखता हूँ तो मेरे दिल में ये चाह जाग्रत होती हैं कि काश मेरे पास इस राज्य का यदि दसवां हिस्सा होता तो मैं इस दुनिया का बड़ा खुशनसीब इंसान होता। ये कह कर मन्त्री खामोश हो गया। राजा ने कहा कि यदि मैं तुम्हें अपना आधा राज्य दे दूँ तो। मन्त्री घबरा गया और आँखें ऊपर करके राजा से कहा कि सरकार ये कैसे सम्भव है ? मैं इतना खुशनसीब इंसान कैसे हो सकता हूँ। राजा ने दरबार में आधे राज्य के कागज तैयार करने की घोषणा की और साथ के साथ मन्त्री की गर्दन धड़ से अलग करने का ऐलान भी करवाया। ये सुनकर मन्त्री बहुत घबरा गया। राजा ने मन्त्री की आँखों में आँखे डालकर कहा - "तुम्हारे पास तीस दिन हैं, इन तीस दिनों में तुम्हें मेरे तीन प्रश्नों का उत्तर देना है। यदि तुम सफल हो जाओगे तो मेरा आधा राज्य तुम्हारा हो जायेगा और यदि तुम मेरे तीन प्रश्नों के उत्तर तीस दिन के भीतर न दे पाये तो मेरे सिपाही तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर देंगे।" मन्त्री और ज्यादा परेशान हो गया। राजा ने कहा - "मेरे तीनों प्रश्न लिख लो", मन्त्री ने लिखना शुरु किया। राजा ने कहा - 1. इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई क्या है ? 2. इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा क्या है ? 3. इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है ? राजा ने तीनों प्रश्न समाप्त करके कहा तुम्हारा समय अब शुरु होता हैं। मन्त्री अपने तीनों प्रश्नों वाला कागज लेकर दरबार से रवाना हुआ और हर संतो-महात्माओं-साधुओं के पास जाकर उन प्रश्नों के उत्तर पूछने लगा। मगर किसी के भी उत्तरों से वह संतुष्ट न हुआ। धीरे-धीरे दिन गुजरते हुए जा रहे थे। अब उसके दिन-रात उन तीन प्रश्नों को लिए हुए ही गुजर रहे थे। हर एक-एक गाँवों में जाने से उसके पहने लिबास फट चुके थे और जूते के तलवे भी फटने के कारण उसके पैर में छाले पड़ गये थे। अंत में शर्त का एक दिन शेष रहा, मन्त्री हार चुका था तथा वह जानता था कि कल दरबार में उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जायेगा और ये सोचता-सोचता वह एक छोटे से गांव में जा पहुँचा। वहाँ एक छोटी सी कुटिया में एक साधु अपनी मौज में बैठा हुआ था और उसका एक कुत्ता दूध के प्याले में रखा दूध बड़े ही चाव से जीभ से जोर-जोर से आवाज़ करके पी रहा था। मन्त्री ने झोपड़ी के अंदर झाँका तो देखा कि साधु अपनी मौज में बैठकर सुखी रोटी पानी में भिगोकर खा रहा था। जब साधु की नजर मन्त्री की फटी हालत पर पड़ी तो मन्त्री से कहा कि - "आप सही जगह पहुँच गये हैं और मैं आपके तीनों प्रश्नों के उत्तर भी दे सकता हूँ।" मन्त्री हैरान होकर पूछने लगा - "आपने कैसे अंदाजा लगाया कि मैं कौन हूँ और क्या हैं मेरे तीन प्रश्न ?" साधु ने सूखी रोटी कटोरे में रखी और अपना बिस्तरा उठा कर खड़ा हुआ और मन्त्री से कहा - "अब आप समझ जायेंगे।" मन्त्री ने झुक कर देखा कि उसके वस्त्र वैसा ही थे जैसा राजा उस मन्त्री को भेंट दिया करता था। साधु ने मन्त्री से कहा मैं भी उस राज्य का मन्त्री हुआ करता था और राजा से शर्त लगा कर गलती कर बैठा। अब इसका नतीजा तुम्हारे सामने हैं। साधु फिर से बैठा और सूखी रोटी पानी में डूबो कर खाने लगा। मन्त्री निराश मन से साधु से पूछने लगा क्या आप भी राजा के प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाये थे। साधु ने कहा कि नहीं, मैने राजा के प्रश्नों के उत्तर भी दिये और आधे राज्य के कागज को वहीं फाड़कर इस कुटिया में मेरे कुत्ते के साथ रहने लगा। मन्त्री और ज्यादा हैरान हो गया और पूछा क्या तुम मेरे प्रश्न के उत्तर दे सकते हो ? साधु ने हाँ में सिर हिलाया और कहा मैं आपके दो प्रश्नों के उत्तर मुफ्त में दूँगा मगर तीसरे प्रश्न के उत्तर में आपको उसकी कीमत अदा करनी पड़ेगी। अब मन्त्री ने सोचा यदि राजा के प्रश्नों के उत्तर न दिये तो राजा मेरे सिर को धड़ से अलग करा देगा इसलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे साधु की शर्त मान ली। साधु ने कहा तुम्हारे पहले प्रश्न का उत्तर है, "मौत"। इंसान के जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई मौत हैं। मौत अटल हैं और ये अमीर-गरीब, राजा-साधु किसी को नहीं देखती है। मौत निश्चित है। अब तुम्हारे दूसरे प्रश्न का उत्तर है, "जिंदगी"। इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा हैं जिंदगी। इंसान जिंदगी में झूठ-फरेब और बुरे कर्मं करके इसके धोखे में आ जाता है। अब आगे साधु चुप हो गया। मन्त्री ने साधु से वचन के अनुसार शर्त पूछी, तो साधु ने मन्त्री से कहा कि तुम्हें मेरे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीना होगा। मन्त्री असमंजस में पड़ गया और कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीने से इंकार कर दिया। मगर फिर राजा द्वारा रखी शर्त के अनुसार सिर धड़ से अलग करने का सोचकर बिना कुछ सोचे समझे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध बिना रुके एक ही सांस में पी गया। साधु ने उत्तर दिया कि यही तुम्हारे तीसरे प्रश्न का उत्तर हैं। "मजबूरी" इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी है "मजबूरी"। मजबूरी इंसान को न चाहते हुए भी वह काम कराती है जो इंसान कभी नहीं करना चाहता है। जैसे तुम ! तुम भी अपनी मौत से बचने के लिए और तीसरे प्रश्न का उत्तर जानने के लिए एक कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पी गये। मजबूरी इंसान से सब कुछ करा देती हैं। मगर अब मन्त्री बहुत प्रसन्न था क्योंकि उसके तीनों प्रश्नों के उत्तर उसे मिल गये थे। मन्त्री ने साधु को धन्यवाद किया और महल की ओर चल पड़ा। उसके मन के भय के साथ-साथ उसकी राज्य पाने की लालसा भी समाप्त हो चुकी थी। महल पहुँचकर उसने राजा के सभी प्रश्नों का सविस्तार उत्तर देकर राजा की शर्त को पूर्ण किया तथा जब राजा ने उसके आगे आधे राज्य के कागजात रखे तो उन्हें वह भी उसी साधु की भाँति फाड़कर राजा से बोला - "महाराज अब मुझमें राज्य को पाने की लालसा नहीं रही है अतः आप अपना राज्य स्वयं ही संभालिये तथा मुझे इस पदभार से मुक्त कर दीजिये।" राजा ने मन्त्री पर प्रसन्न होकर उसे उसके पदभार से मुक्त कर दिया। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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"कर्ज में डूबे भगवान" "तिरुपति बालाजी" एक बार भृगु ऋषि ने जानना चाहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कौन सबसे श्रेष्ठ है ? वह बारी-बारी से सबके पास गये। ब्रह्मा और महेश ने भृगु को पहचाना तक नही, न ही आदर किया। इसके बाद भृगु विष्णु के यहाँँ गये। विष्णु भगवान विश्राम कर रहे थे और माता लक्ष्मी उनके पैर दबा रही थी। भृगु ने पहुँचते ही न कुछ कहा, न सुना और भगवान विष्णु की छाती पर पैर से प्रहार कर दिया। लक्ष्मी जी यह सब देखकर चकित रह गयी किन्तु विष्णु भगवान ने भृगु का पैर पकडकर विनीत भाव से कहा ”मुनिवर ! आपके कोमल पैर में चोट लगी होगी। इसके लिए क्षमा करें।“ लक्ष्मी जी को भगवान विष्णु की इस विन्रमता पर बड़ा क्रोध आया। वह भगवान विष्णु से नाराज होकर भू-लोक में आ गयीं तथा कोल्हापुर में रहने लगीं। लक्ष्मी जी के चले जाने से विष्णु भगवान को लगा कि उनका श्री और वैभव ही नष्ट हो गया और उनका मन बड़ा अशान्त रहने लगा। लक्ष्मी जी को ढूँढ़ने के लिए वह श्रीनिवास के नाम से भू-लोक आये। घूमते घुमाते वेंकटचल पर्वत क्षेत्र में बकुलामाई के आश्रम में पहुँचे। बकुलामाई ने उनकी बड़ी आवाभगत की। उन्हें आश्रम में ही रहने को कहा। एक दिन जंगल में एक मतवाला हाथी आ गया। आश्रमवासी डरकर इधर उधर भागने लगे। श्री निवास ने यह देखा तो धनुष बाण लेकर हाथी का पीछा किया। हाथी डरकर भागा और घने जंगल में अदृश्य हो गया। श्री निवास उसका पीछा करते-करते थक गये थे। वह एक सरोवर के किनारे वृक्ष की छाया में लेट गये और उन्हें हल्की सी झपकी आ गयी। थोड़ी देर में शोर सुनकर वह जागे तो देखा कि चार-छ युवतियाँ उन्हें घेरे खडी है। श्रीनिवास को जागा हुआ देखकर वे डपटकर बोली, “यह हमारी राजकुमारी पद्मावती का सुरक्षित उपवन है और यहाँँ पुरुषों का आना मना है। तुम यहाँ कैसे और क्यों आये हो ?” श्रीनिवास कुछ जवाब दे इससे पहले ही उनकी दृष्टि वृक्ष की ओट से झांकती राजकुमारी की ओर गयी। श्रीनिवास पद्मावती को एकटक देखते रह गये। थोडा संयत होकर कहा, “देवियों ! मुझे पता नही था, मैं शिकार का पीछा करता हुआ यहाँँ आया था। थक जाने पर मुझे नींद आ गयी इसलिए क्षमा करें।“ श्रीनिवास आश्रम में तो लौट आये किन्तु बड़े उदास रहने लगे। एक दिन बकुलामाई ने बड़े प्यार से उनकी उदासी का कारण पूछा तो श्रीनिवास ने पद्मावती से भेंट होने की सारी कहानी कह सुनाई फिर कहा, “उसके बिना मै नही रह सकता।“ बकुलामाई बोली, “ऐसा सपना मत देखो। कहाँ वह प्रतापी चोल नरेश आकाशराज की बेटी और कहाँ तुम आश्रम में पलने वाले एक कुल गोत्रहीन युवक।” श्रीनिवास बोले, “माँ ! एक उपाय है तुम मेरा साथ दो तो सब सम्भव है।“ बकुलामाई ने श्रीनिवास का सच्चा प्यार देखकर हाँ कर दी। श्रीनिवास ज्योतिष जानने वाली औरत का वेश बनाकर राजा आकाश की राजधानी नारायणपुर पहुँचे। उसकी चर्चा सुन पद्मावती ने भी उस औरत को महल बुलाकर अपना हाथ दिखाया। राजकुमारी के हस्त रेखा देखकर वह बोली, “राजकुमारी ! कुछ दिन पहले तुम्हारी भेंट तुम्हारे सुरक्षित उद्यान में किसी युवक से हुयी थी। तुम दोनों की दृष्टि मिली थी। उसी युवक से तुम्हारी शादी का योग बनता है।” पद्मावती की माँ धरणा देवी ने पूछा, “यह कैसे हो सकता है ?” ज्योतिषी औरत बोली, “ऐसा ही योग है। ग्रह कहते है कोई औरत अपने बेटे के लिए आपकी बेटी माँगने स्वयं आयेगी।” दो दिन बाद सचमुच ही बकुलामाई एक तपस्विनी के वेश में राजमहल आयी। उसने अपने युवा बेटे के साथ पद्मावती के विवाह की चर्चा की। राजा आकाश में बकुलामाई को पहचान लिया। उन्होंने पूछा “वह युवक है कौन ?” बकुलामाई बोली, “उसका नाम श्री निवास है। वह चन्द्र वंश में पैदा हुआ है। मेरे आश्रम में रह रहा है। मुझे माँ की तरह मानता है।” राजा आकाश ने कुछ सोचकर उत्तर देने के लिए कहा। बकुलामाई के चले जाने पर आकाश ने राज पुरोहित को बुलाकर सारी बात बताई। राज पुरोहित ने गणना की। फिर सहमति देते हुए कहा, ”महाराज ! श्रीनिवास में विष्णु जैसा देवगुण है लक्ष्मी जैसी आपकी बेटी के लिए यह बड़ा सुयोग्य है।” राजा आकाश ने तुरन्त बकुलामाई के यहाँ अपनी स्वीकृति के साथ विवाह की लग्न पत्रिका भेज दी। बकुलामाई ने सुना तो वह चिंतित हो उठी। श्री निवास से बोली, “बेटा ! अब तक तो विवाह की ही चिंता थी। अब पैसे न होने की चिंता है। मैं वराहस्वामी के पास जाती हूँ। उनसे पूछती हूँ कि क्या किया जाए ?” बकुलामाई श्रीनिवास को लेकर वराहस्वामी के पास गयी और श्रीनिवास के विवाह के लिए धन की समस्या बताई तो वराह स्वामी ने आठों दिग्पालों, इन्द्र, कुबेर, ब्रह्मा, शंकर आदि देवताओ को अपने आश्रम में बुलवाया और फिर श्रीनिवास को बुलाकर कहा, “तुम स्वयं इन्हें अपनी समस्या बताओ।” श्रीनिवास ने देवताओ से कहा, “मैं चोल नरेश राजा आकाश की बेटी पद्मावती से विवाह करना चाहता हूँ। मेरी हैसियत राजा के अनुरूप नही है मेरे पास धन नही है, मै क्या करूँ ?” इन्द्र ने कुबेर से कहा, “कुबेर ! इस काम के लिए तुम श्रीनिवासन को ऋण दे दो।” कुबेर ने कहा, “ऋण तो दे दूँगा पर उसे यह वापस कब और कैसे करेंगे, इसका निर्णय होना चाहिये ?” श्रीनिवास बोले, “इसकी चिन्ता मत कीजिये। कलियुग के अन्त तक मैं सब ऋण चुका दूँगा।” कुबेर ने स्वीकार कर लिया। सब देवताओं की साक्षी में श्रीनिवास के ऋण पत्र लिख दिया। उस धन से श्री निवास और पद्मावती का विवाह बड़ी धूमधाम से हुआ। तभी नारद ने कोल्हापुर जाकर लक्ष्मी को बताया, “विष्णु ने श्रीनिवास के रूप में पद्मावती से विवाह कर लिया है। दोनों वेंकटाचलम् पर्वत पर रह रहे हैं।” यह सुनकर लक्ष्मी जी को बड़ा दुःख हुआ। वह सीधे वेंकटाचलम पहुँची। विष्णु जी की सेवा में लगी पद्मावती को भला बुरा कहने लगी, “श्रीनिवास ! विष्णु रूप मेरे पति हैं। तूने इनके साथ विवाह क्यों किया ?” दोनों ने वाक् युद्ध होने लगा तो श्री निवास को बड़ा दुःख हुआ। वे पीछे हटे और पत्थर की मूर्ति के रूप में बदल गये। जब दोनों देवियों ने यह देखा तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ कि श्रीनिवास तो अब किसी के न रहे। इतने में शिला विग्रह से आवाज आयी, “देवियों मै इस स्थान पर वेंकटेश्वर स्वामी के नाम से, अपने भक्तों का अभीष्ट पूरा करता रहूँगा। उनसे प्राप्त चढावे के धन द्वारा कुबेर के कर्ज का ब्याज चुकाता रहूँगा इसलिए तुम दोनों मेरे लिए आपस में झगड़ा मत करो।” यह वाणी सुनते ही लक्ष्मी जी और पद्मावती दोनों ने सिर झुका लिया। लक्ष्मी कोल्हापुर आकर महालक्ष्मी के रूप में प्रतिष्टित हो गयी और पद्मावती तिरुनाचुर में शिला विग्रह हो गयी। आज भी तिरुपति क्षेत्र में तिरुमला पहाडी पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन हेतु भक्तगणों से इसी भाव से शुल्क लिया जाता है। उनकी पूजा पुष्प मिष्टान आदि से न होकर धन द्रव्य से होती है। इसी धन से भगवान श्री कृष्ण वेंकटेश्वर स्वामी कुबेर का कर्ज चुका रहे है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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💖💞💕💐*कर्म पीछा नहीं छोड़ते *💐💕💞💖 एक सेठ जी ने अपने मैनेजर को इतना डाटा--- की मैनेजर को बहुत गुस्सा आया पर सेठ जी को कुछ बोल ना सका-- - वह अपना गुस्सा किस पर निकाले-- हो गया सीधा अपने कंपनी स्टाफ के पास और सारा गुस्सा कर्मचारियों पर निकाल दिया। - अब कर्मचारी किस पर अपना गुस्सा निकाले--? तो जाते-जाते अपने गेट वॉचमैन पर उतारते गए- - अब वॉचमैन किस पर निकाला अपना गुस्सा-? - तो वह घर गया और अपनी बीवी को डांटने लगा बिना किसी बात पर। - अभी वो भी उठी और अपने बच्चे की पीठ पर 2 धमाक धमाक लगा दिया-- -- सारा दिन tv देखता रहता है काम कुछ करता नहीं है-- - अब बच्चा घर से गुस्से से निकला, और सड़क पर सो रहे कुत्ते को पत्थर दे मारा, -- कुत्ता हड़बड़ाकर भागा और सोचने लगा कि इसका मैंने क्या बिगाड़ा-? - और गुस्से में उस कुत्ते ने एक आदमी को काट खाया- -- और कुत्ते ने जिसे काटा वह आदमी कौन था-? -- वही सेठ जी थे, जिन्होंने अपने मैनेजर को डांटा था। - सेठ जी जब तक जिए तब तक यही सोचते रहे कि उस कुत्ते ने आखिर मुझे क्यों काटा-? - --*लेकिन बीज किसने बोया* ? -- आया कुछ समझ में-- *कर्म के फलपीछा नहीं छोड़ते बाबा*-- जाने अनजाने में कितने लोग हमारे व्यवहार से त्रस्त होते हैं, परेशान होते हैं और कितने का तो नुकसान भी होता है। -- पर हमें तो उसका अंदाजा भी नहीं होता, क्योंकि हम तो अपनी मस्ती में ही मस्त है। *पर प्रकृति सब देखती है और उसका फल फिर किसी और के निमित्त से हमें मिलता है, और हमें लगता है कि लोग हमें बेवजह ही परेशान कर रहे हैं* 💖´ *•.¸♥¸.•**जय जय श्री राधे**•.¸♥¸.•*´💖 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

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