🚩🚩🚩जय माता दी🚩🚩 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 जीवन मे कैसा भी दुख और कष्ट आये पर भक्ति मत छोडिए क्या कष्ट आता है तो आप भोजन करना छोड देते है ? क्या बीमारी आती है तो आप सांस लेना छोड देते है ? नही ना ! फिर जरा – सी तकलीफ़ आने पर आप भक्ति करना क्यों छोड़ देते हो ? कभी भी दो चीज मत छोडिए – भजन और भोजन ! भोजन छोड. दोगे तो ज़िंदा नही रहोगे ! भजन छोड. दोगे तो कही के नही रहोगे 🙏 🌹Jai Mata Di🌹🙏 🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟 🌟🌺जय माता दी जय माता दी🌺🌟 🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟 सपनों की मंजिल पास नहीं होती। जिन्दगी हर पल उदास नहीं होती। मां पर यकीन रखना 🚩🚩 कभी-कभी वो भी मिल जाता है जिसकी आस नहीं होती।। 🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟 🌟🌺जय माता दी जय माता दी🌺🌟 🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟

🚩🚩🚩जय माता दी🚩🚩
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
जीवन मे कैसा भी दुख और
कष्ट आये पर भक्ति मत छोडिए
क्या कष्ट आता है तो आप भोजन करना छोड देते है ?
क्या बीमारी आती है तो आप सांस लेना छोड देते है ?
नही ना !
फिर जरा – सी तकलीफ़ आने पर आप भक्ति करना क्यों छोड़ देते हो ?
कभी भी दो चीज मत छोडिए –
भजन और भोजन !
भोजन छोड. दोगे तो ज़िंदा नही रहोगे !
भजन छोड. दोगे तो कही के नही रहोगे
🙏 🌹Jai Mata Di🌹🙏
🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟
🌟🌺जय माता दी जय माता दी🌺🌟
🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟
सपनों की मंजिल पास नहीं होती।
जिन्दगी हर पल उदास नहीं होती।
मां पर यकीन रखना 🚩🚩
कभी-कभी वो भी मिल जाता है
जिसकी आस नहीं होती।।
🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟
🌟🌺जय माता दी जय माता दी🌺🌟
🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟

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कामेंट्स

Rakesh Kumar Chandel Nov 29, 2019
Om Sai Ram Good night rest with sweet dream.How are u.God bless u nd your family.Be happy nd healthy. Om Sai Ram

Rajesh Lakhani Nov 29, 2019
JAI SHREE KRISHNA RADHE RADHE SHUBH RATRI BEHENA AAP OR AAP KA PARIVAR THAKOR JI KE AASIRVAD SE HAMESA KHUS RAHE SWASTH RAHE SUKHI RAHE AAP KA AANE WALA HAR PAL SHUBH OR MANGALMAYE HO BEHENA PRANAM

sujatha Nov 29, 2019
जय श्री राधे कृष्ण जी * शुभ रात्रि जी 🙏🏻🙏🏻 stay blessed dear * keep smiling 🌹🌹🌹🌹

Queen Nov 29, 2019
🌷🍁Radhe Radhe Jai Shree krishna Good Night my Dear Sister Ji 🍁🌷

Anju Mishra Nov 29, 2019
जय मां लक्ष्मी की 🙏 शुभ रात्रि बहना

Renu Singh Nov 29, 2019
Shubh Ratri Vandan Dear Sister Ji 🙏🌹 Mata Rani ki kripa Aap aur Aàpke Pariwar pr hamesha Bni rhe Ji 🙏 🌹

suraj rajpal Nov 29, 2019
जय श्री कृष्ण🌹 शुभ रात्रि जी दी.🌷 🌿जय माता दी💐🌿 जय श्री राधे राधे🌿🍁🌿 जय श्री राधेकृष्ण🙏🌹🌹

sonu pathak Nov 29, 2019
Good night my dear Sweet sister 🌷🌷 🙏🌹 Jai shri krishna ji🌹🙏 Radhe Radhe 🌷 🙏🌺🌺 Jai mata di

rakesh dubey Nov 29, 2019
जय माता दी🚩🚩 जय श्री राधे कृष्णा जी🍂🌸 शुभ रात्रि जी 💐

Mamta Chauhan Nov 29, 2019
Jai mata di shubh ratri vandan sister ji mata rani aapki sabhi mnokamna puri kre ji 🙏🌷🙏🌷

subodh kumar Nov 29, 2019
radhe radhe ji. good night ji stay blessed for ever

Laxmi Thapa Dec 3, 2019
जय।शकी।मा।दूगगा।जयर

anju Jan 25, 2020

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champalal m kadela Jan 26, 2020

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Deepak Chaudhary Jan 26, 2020

+28 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 70 शेयर
Neha Sharma, Haryana Jan 24, 2020

जय माता दी शुभ प्रभात वंदन संकल्प या नियम क्यों आवश्यक है? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ इसमें कोई संदेह नहीं की आज तक जितने भी कार्य सिद्ध हुए हैं, उनमे व्यक्ति की साधना और संकल्प शक्ति का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा हैं, संकल्पवान व्यक्ति ही किसी भी प्रकार की हकदार है और अपने लछ्य को पाने की योग्यिता रखता है, वह जिस कार्य को हाथ में लेता है, उसे पूरे मन और बुद्धि से पूर्ण करने के लिए अडिग व् एकनिष्ठ होता हैं। संकल्प वह लो जो बहुत छोटा हो और जिसे पूर्ण करने में किसी प्रकार की अलग से शक्ति ना लगानी पडे, बिना संकल्प के भजन आगे नही बढता, अगर भगवत भजन में आगे बढना है तो नियम चाहिये, संकल्प चाहिये, संकल्प से सोई हुई शक्तियाँ उठती हैं, जागती है। जनम कोटि लगि रगर हमारी। बरहु संभु न त रहहुँ कुआँरी।। संकल्प से भीतर की शक्तियाँ जगती है, हम संसार के भोगों को प्राप्त करने के लिये संकल्प लेते हैं, परमात्मा को सुविधा से प्राप्त करना चाहते हैं, संसार के भोगों के लिये हम जीवन को जोखिम में डालते है परन्तु परमात्मा को केवल सोफे पर बैठकर प्राप्त करना चाहते हैं। मीराबाई ने कहा है मेरा ठाकुर सरल तो है पर सस्ता नहीं, सज्जनों! सुविधा से नहर चलती है संकल्प से नदियाँ दौड़ा करती हैं, नहर बनने के लिये पूरी योजना बनेगी, नक्शा बनेगा लेकिन दस-पंद्रह किलोमीटर जाकर समाप्त हो जाती है, पर संकल्प से नदी चलती है, उसका संकल्प है महासागर से मिलना, वो नहीं जानती सागर किधर है? कोई मानचित्र लेकर नहीं बैठा, कोई मार्ग दर्शक नहीं, अन्धकार में चल दी सागर की ओर दौड़ी जा रही है, बड़ी बड़ी चट्टानों से टकराती, शिखरों को ढहाती, बड़ी-बड़ी गहरी खाइयों को पाटती जा रही है, संकल्प के साथ एक दिन नदी सागर से जाकर मिल जाती है। अगर सागर के मार्ग में पहाड के शिखर ना आये, रेगिस्तान के टीले ना आयें तो नदी भी शायद खो जाये, ये बाधायें नदी के मार्ग को अवरुद्ध नहीं करते अपितु और इससे ऊर्जा मिलती है, साधक के जीवन में जो कुछ कठिनाईयाँ आती हैं वो साधना को खंडित नहीं करती बल्कि साधना और तीक्ष्ण व पैनी हो जाया करती है। जिनको साधना के मार्ग पर चलना है उनको पहले संकल्प चाहिये, संकल्प को पूरा करने के लिये सातत्य यानी निरंतरता चाहिये, ऐसा नही है कि एक दो दिन माला जप ली और फिर चालीस दिन कहीं खो गये, साधना शुरू करने के बाद अगर एक दिन भी खंडित हो गयी तो फिर प्रारम्भ से शुरूआत करनी पडेगी, यह साधना का नियम है, इसलिये सतत-सतत-सतत। ऐसा नियम बनाइये जिसको पालन कर सके, कई लोग कहते है भजन में मन नहीं लगता, क्या इसके लिये आपने कोई संकल्प किया है कि मन लगे, इसकी कोई पीडा, दर्द या बेचैनी है आपके अन्दर, कभी ऐसा किया है आपने कि आज भजन नहीं किया तो फिर आज भोजन भी नहीं करेंगे, मौन रखेंगे, आज भजन छूट गया आज सोयेंगे नहीं। कभी ऐसी पीडा पैदा की है क्या? संकल्प बना रहे इसकी सुरक्षा चाहिये, छोटे पौधे लगाते हैं उनकी रक्षा के लिये बाड बनाते हैं, देखभाल करते हैं, वैसे ही भजन के पौधे की सुरक्षा करनी चाहिये कहीं कोई ताप न जला दे, कहीं वासना की बकरी उसे कुतर ना दे, जिनको भजन के मार्ग पर चलना हो सिर्फ, इस पर चलें। दो नावों पर पैर न रखें, इससे जीवन डूब जाता है, अन्धकार में पूरे डूबे या फिर प्रकाश की ओर चलना है तो सिर्फ प्रकाश की ओर चलो, ऐसा नहीं हो सकता कि भोग भी भोगें और भगवान् भी प्राप्त हो जायें, हमारी दशा ऐसी है घर में रोज बुहारी लगा रहे है कूड़ा बाहर डालते हैं, दरवाजे खुले रखे, हवा का झोंका आया कूड़ा सारा अन्दर आ गया, फिर बुहारी, फिर कूड़ा बाहर, फिर कूड़ा अन्दर, बस यही चलता रहता है हमारी जिन्दगी में, सारा जीवन चला जाता है, एक हाथ में बुहारी और एक हाथ में कूड़ा। सीढ़ी पर या तो ऊपर की ओर चढ़ो या नीचे की ओर, दोनो ओर नहीं चल सकते, घसीटन हो जायेगी, दोस्तों! हमारा अनुभव कहता है कि हमारा जीवन भजन के नाम पर घसीटन है, भजन की सुरक्षा चाहिये, ऐसा नही हो सकता कि प्रातः काल शिवालय हो आये और सायं काल मदिरालय, सुबह गीता पढी और शाम को मनोहर कहानियाँ, ये नहीं हो सकता। तो आत्म निरीक्षण किया करों कि मेरा नियम नहीं टूटे, मैं प्रारम्भ से कह रहा हूँ कि इसकी पूरी एक आचार संहिता है, कोई न कोई नियम बनाओ, नियम से निष्ठा पैदा होती है, निष्ठा से रूचि बढती है, रूचि से भजन में आसक्ति होने लगती है आसक्ति से फिर राग हो जाता है, राग से अनुराग होता है और अनुराग से भाव, ये भाव ही परमात्मा के प्रेम में परिवर्तित हो जाता हैं। ये पूरी की पूरी सीढ़ी है, नियम से प्रारम्भ करिये और प्रेम के शिखर तक पहुँच जाइये, किसी को कोई दोष मत दिजिये कि मेरा नियम क्यों टूटा, आत्म निरीक्षण किजिये कि मेरा नियम क्यों टूटा? नियम कहे नहीं जाते, घोषित नहीं होते, भजन को जितना छुपाओगे उतना सफल रहोगे,इसलिए नियम बनाइयें और ख्याल रखें कि नियम कभी खंडित ना हो। - डॉ0 विजय शंकर मिश्र 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ अंतिम सांस गिन रहे जटायु ने कहा कि मुझे पता था कि मैं रावण से नही जीत सकता लेकिन तो भी मैं लड़ा..यदि मैं नही लड़ता तो आने वाली पीढियां मुझे कायर कहती 🙏जब रावण ने जटायु के दोनों पंख काट डाले... तो काल आया और जैसे ही काल आया ... तो गीधराज जटायु ने मौत को ललकार कहा, -- "खबरदार ! ऐ मृत्यु ! आगे बढ़ने की कोशिश मत करना... मैं मृत्यु को स्वीकार तो करूँगा... लेकिन तू मुझे तब तक नहीं छू सकता... जब तक मैं सीता जी की सुधि प्रभु "श्रीराम" को नहीं सुना देता...! मौत उन्हें छू नहीं पा रही है... काँप रही है खड़ी हो कर... मौत तब तक खड़ी रही, काँपती रही... यही इच्छा मृत्यु का वरदान जटायु को मिला। किन्तु महाभारत के भीष्म पितामह छह महीने तक बाणों की शय्या पर लेट करके मौत का इंतजार करते रहे... आँखों में आँसू हैं ... रो रहे हैं... भगवान मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं...! कितना अलौकिक है यह दृश्य ... रामायण मे जटायु भगवान की गोद रूपी शय्या पर लेटे हैं... प्रभु "श्रीराम" रो रहे हैं और जटायु हँस रहे हैं... वहाँ महाभारत में भीष्म पितामह रो रहे हैं और भगवान "श्रीकृष्ण" हँस रहे हैं... भिन्नता प्रतीत हो रही है कि नहीं... ? अंत समय में जटायु को प्रभु "श्रीराम" की गोद की शय्या मिली... लेकिन भीष्म पितामह को मरते समय बाण की शय्या मिली....! जटायु अपने कर्म के बल पर अंत समय में भगवान की गोद रूपी शय्या में प्राण त्याग रहा है.... प्रभु "श्रीराम" की शरण में..... और बाणों पर लेटे लेटे भीष्म पितामह रो रहे हैं.... ऐसा अंतर क्यों?... ऐसा अंतर इसलिए है कि भरे दरबार में भीष्म पितामह ने द्रौपदी की इज्जत को लुटते हुए देखा था...विरोध नहीं कर पाये थे ...! दुःशासन को ललकार देते... दुर्योधन को ललकार देते... लेकिन द्रौपदी रोती रही... बिलखती रही... चीखती रही... चिल्लाती रही... लेकिन भीष्म पितामह सिर झुकाये बैठे रहे... नारी की रक्षा नहीं कर पाये...! उसका परिणाम यह निकला कि इच्छा मृत्यु का वरदान पाने पर भी बाणों की शय्या मिली और .... जटायु ने नारी का सम्मान किया... अपने प्राणों की आहुति दे दी... तो मरते समय भगवान "श्रीराम" की गोद की शय्या मिली...! जो दूसरों के साथ गलत होते देखकर भी आंखें मूंद लेते हैं ... उनकी गति भीष्म जैसी होती है ... जो अपना परिणाम जानते हुए भी...औरों के लिए संघर्ष करते है, उसका माहात्म्य जटायु जैसा कीर्तिवान होता है। 🙏 तो , गलत का विरोध जरूर करना चाहिए। "सत्य परेशान जरूर होता है, पर पराजित नही"। 🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Deepak Chaudhary Jan 26, 2020

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