PDJOSHI
PDJOSHI Feb 25, 2021

मूल श्लोकः ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते। श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः।।12.20।। Hindi Translation By Swami Tejomayananda ।।12.20।। जो भक्त श्रद्धावान् तथा मुझे ही परम लक्ष्य समझने वाले हैं और इस यथोक्त धर्ममय अमृत का अर्थात् धर्ममय जीवन का पालन करते हैं, वे मुझे अतिशय प्रिय हैं।।

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Vandana Singh Apr 12, 2021

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pandey ji Apr 12, 2021

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pandey ji Apr 12, 2021

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RamniwasSoni Apr 11, 2021

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