आज का संस्कृत शब्द।

आज का संस्कृत शब्द।

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Raj vir singh Nov 27, 2020

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🍃🍃🌹जय श्री कृष्ण🌹🍃🍃 "निस्वार्थ प्रेम" मैं मीरा हूँ मोहन की, मैं जोगन हूँ कान्हाँ की, मैं नहीं राधा जिसे कृष्ण के नाम से जुड़ने का मान मिला,🙏 मैं नहीं रुक्मिणी जिसे अर्धांगिनी का स्थान मिला, मैं वही मीरा हूँ जिसका प्रेम पागलपन कहलाया था, भगवान से तुम्हें प्रेम कैसा यह सवाल दुनिया ने मुझसे किया था, मुझे कोई आस नहीं थी मोहन को पाने की, चाहत थी बस मोहन को अपने दिल मे बसाने की, विष का प्याला पीकर मैं अपने मोहन की कहलाई हूँ, नहीं आ सके मोहन मेरे पास तो क्या, विष प्राशन कर मैं अपने मोहन से मिल पाई हूँ, त्याग, समर्पण और भक्ति का अलग रूप मैने बतलाया निःस्वार्थ प्रेम का मतलब मैने ही तो दुनिया को सिखलाया है..!! है एक पगली कृष्ण प्रेम में दीवानी भक्ति काल की कवयित्री मरुधर मीराबाई मंदाकिनी बाल्यकाल में श्री कृष्ण को हदय में बसा लिया आँयुओ के जल से सींच कर पल्लवित-पुष्पित किया ब्याही किसी ओर से गई मन में श्याम का वास था पैरो में घुँघरू बाँधे तो कहा राजकुल की परम्परा का नाश किया राणा ने विष भेजा तो कभी शूलों की सय्या सजाई कृष्ण प्रेम में तन्मय मीरा ने सब खुशी से अपनाई बाल भी बांका न हो पाया मीरा का तभी तो कृष्ण भक्तो में सर्वोपरि महिषी कहलाई बस अपने गिरधर के दर्शन को तरस गई; विरहिणी मीरा प्रेम के तत्व को समझ गई मीरा की लगन अनूठी और अनन्य थी अलौक्कि प्रेम से वो श्री कृष्ण में बस गई 🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🍈🥝🥝🍈

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sivani rajput Nov 27, 2020

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Meenakshi Goyal Nov 27, 2020

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Krishna Mishra Nov 27, 2020

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