ଶୁଭ ଗୁରୁବାର ର ସାଇସନ୍ଧ୍ୟା ।

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Ansouya Ansouya May 25, 2020

🕉🙏जय भोले नाथ 🕉🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏हमारा मन मननशील है 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏वह निरन्तर चिंतन-मनन करता ही रहता है 🙏🙏🙏इसी मनन से ही मन का अस्तिव है। 🌷सारा चिंतन मनन शब्दातमक होता है ।🌷🌷🌷हम शब्द के अभाव में चिंतन नहीं कर सकते । 🌷🙏चिन्तन विषयातमक होता है ।इसी प्रकार मन और विषय के बिच शब्द के माध्यम से एक संबंध बन जाता है ।मन को निर्विषय बनाने के लिए जरूरी है कि वह शब्द जगत से उपर ऊठे ।इस नाम रूप जगत से उपर उठने के लिए प्रारम्भ मे हमे नाम और रूप का भी सहारा लेना पड़ता है । 👌🙏विष का औषध विष ही होता है । वहां अमृत काम नहीं आता ।वहां विष ही अमृत बन जाता है ।⚘ऐसे ही मन को अनाम तक ले जाने के लिए पहले अनाम का ही आलम्बन लेना पहता है। 🙏नाम सुमिरन वह खिड़की है जिसके द्वारा अनाम के आकाश में छलांग लगाई जा सकती है । 🙏⚘एक डाकू रत्नाकर के मन का मरा मरा नाम से संबंध था इसलिए उसके मन ने राम नाम का सूमिरन स्वीकार नहीं किया और मरा नाम से सिमरन किया ।⚘🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹⚘🙏उसी नाम सिमरन से अनाम के आकाश में छलांग लगाकर डाकू रत्नाकर परम पूजनीय महर्षि वाल्मीकि बन गये और हजारों साल पहले ही रामायण की रचना कर डाली ।⚘🌹🌹🌹⚘⚘🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹⚘⚘🌹नाम शब्दातमक होता है और शब्द अक्षरात्मक 🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹⚘⚘🌹मंगलमय संध्या वनदन सभी को जी 🌹🌹🌹⚘⚘⚘⚘⚘⚘🙏🙏🙏🙏🙏🙏⚘🙏🌹जय श्री राधे कृष्ण 🌹🙏🙏🙏🌹🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏

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prabha tewari May 25, 2020

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Daksh chauhan May 25, 2020

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Abhimanyu Pandey May 25, 2020

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Manubhai Suthar May 25, 2020

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