Sarju Gupta
Sarju Gupta Sep 16, 2017

मन की खुशी कहाँ ?

(((( मन की ख़ुशी कहाँ ? ))))
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एक बार की बात है। एक गाँव में एक महान संत रहते थे।
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वे अपना स्वयं का आश्रम बनाना चाहते थे जिसके लिए वे कई लोगो से मुलाकात करते थे। और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह यात्रा के लिए जाना पड़ता था।
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इसी यात्रा के दौरान एक दिन उनकी मुलाकात एक साधारण सी कन्या विदुषी से हुई।
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विदुषी ने उनका बड़े हर्ष से स्वागत किया और संत से कुछ समय कुटिया में रुक कर विश्राम करने की याचना की।
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संत उसके व्यवहार से प्रसन्न हुए और उन्होंने उसका आग्रह स्वीकार किया।
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विदुषी ने संत को अपने हाथो से स्वादिष्ट भोज कराया। और उनके विश्राम के लिए खटिया पर एक दरी बिछा दी। और खुद धरती पर टाट बिछा कर सो गई।
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विदुषी को सोते ही नींद आ गई। उसके चेहरे के भाव से पता चल रहा था कि विदुषी चैन की सुखद नींद ले रही हैं।
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उधर संत को खटिया पर नींद नहीं आ रही थी। उन्हें मोटे नरम गद्दे की आदत थी जो उन्हें दान में मिला था।
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वो रात भर चैन की नींद नहीं सो सके और विदुषी के बारे में ही सोचते रहे.. सोच रहे थे कि वो कैसे इस कठोर जमीन पर इतने चैन से सो सकती हैं।
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दूसरे दिन सवेरा होते ही संत ने विदुषी से पूछा कि – तुम कैसे इस कठोर जमीन पर इतने चैन से सो रही थी।
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तब विदुषी ने बड़ी ही सरलता से उत्तर दिया – हे गुरु देव ! मेरे लिए मेरी ये छोटी सी कुटिया एक महल के समान ही भव्य हैं| इसमें मेरे श्रम की महक हैं।
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अगर मुझे एक समय भी भोजन मिलता हैं तो मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूँ।
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जब दिन भर के कार्यों के बाद मैं इस धरा पर सोती हूँ तो मुझे माँ की गोद का आत्मीय अहसास होता हैं।
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मैं दिन भर के अपने सत्कर्मो का विचार करते हुए चैन की नींद सो जाती हूँ। मुझे अहसास भी नहीं होता कि मैं इस कठोर धरा पर हूँ।
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यह सब सुनकर संत जाने लगे। तब विदुषी ने पूछा– हे गुरुवर ! क्या मैं भी आपके साथ आश्रम के लिए धन एकत्र करने चल सकती हूँ ?
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तब संत ने विनम्रता से उत्तर दिया– बालिका ! तुमने जो मुझे आज ज्ञान दिया हैं उससे मुझे पता चला कि मन का सच्चा सुख कहाँ हैं।
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अब मुझे किसी आश्रम की इच्छा नहीं रह गई।
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यह कहकर संत वापस अपने गाँव लौट गये और एकत्र किया धन उन्होंने गरीबो में बाँट दिया और स्वयं एक कुटिया बनाकर रहने लगे।
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जिसके मन में संतोष नहीं है सब्र नहीं हैं वह लाखों करोड़ों की दौलत होते हुए भी खुश नहीं रह सकता।
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बड़े बड़े महलों, बंगलों में मखमल के गद्दों पर भी उसे चैन की नींद नहीं आ सकती। उसे हमेशा और ज्यादा पाने का मोह लगा रहता है।
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इसके विपरीत जो अपने पास जितना है उसी में संतुष्ट है, जिसे और ज्यादा पाने का मोह नहीं है वह कम संसाधनों में भी ख़ुशी से रह सकता है।

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((((((( जय जय श्री राधे )))))))
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कामेंट्स

Bittu singh Sep 17, 2017
आप का sms बुहत अच्छा है चाचा जी

Jagdish Prasad.Delhi Aug 19, 2018

अपने डॉक्टर खुद बने
〰️〰️🔸〰️🔸〰️〰️
1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें।थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर केवल तिल, सरसों, मूंगफली, नारिय...

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विद्यार्थी सेवकः पान्थः क्षुधार्तो भयकातरः।
भाण्डारी च प्रतिहारी सप्तसुप्तान् प्रबोधयेत॥

भावार्थ:

१)विद्यार्थी,
२)सेवक,
३)पथिक,
४)भूख से दुःखी,
५)भयभीत,
६)भण्डारी,
७)द्वारपाल
इन सातों को सोते हुए से जगा देना चाहिए ।...

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सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्व
शलाकधूर्त्त च चिकित्सकं च।
अरिं च मित्रं च कुशीलवं च
नैतान्साक्ष्ये त्वधिकुर्वीतसप्त॥

भावार्थ:

हस्तरेखा व शरीर के लक्षणों के जानकार को ,
चोर व चोरी से व्यापारी बने व्यक्ति को,
जुआरी को,
चिकित्सक को ,
मित्र को तथा
सेवक ...

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मैं रोज़ चमत्कार देखता हूँ और आप?

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हम मनुष्य चमत्कार को नमस्कार करते हैं। जो भी अनोखी चीजें दिखती हैं उसके आगे नतमस्तक हो जाते हैं। चमत्कार करके दिखाने वाले के हम अनुयायी, भक्त या बंदे बन जाते हैं। बाबा, फ़क़ीर, जादूगरों, कलाबाजों...

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👉 डेंगू बुखार फैल रहा है। अपने घुटनों से पैर के पंजे तक नारियल का तेल (coconut oil) लगायें। यह एक एंटीबायोटिक परत की तरह सुबह से शाम तक काम करता है। 👍🏻डेंगू का मच्छर घुटनों तक की ऊँचाई से ज्यादा नही उड़ सकता है।

किसी को dengu हुआ हो तो हरी ईलाय...

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Sindoor Dhoop Belpatra +17 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 19 शेयर

अपराध या उपकार

एक होते हैं वास्तविक सन्त, एक होते
हैं सन्त वेश धारी। ये वेशधारी एक
सन्त नहीं होते हैं, ये सन्त की ड्रैस
पहनकर वेश बनाते हैं । ठीक वैसे
जैसे एक सामान्य व्यक्ति पुलिस की
वर्दी पहन ले।

यह कहने की
आवश्यकता नहीं कि पुलिस न होते
ह...

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Hasmukhjadav Aug 18, 2018

🥀🌿🌹🌹🍂🌹🌹🌿🥀
अंधे को मंदिर आया देखकर
लोग हंसकर बोले की,
मंदिर में दर्शन के लिए आये तो हो
पर क्या भगवान् को देख पाओगे ?
अंधे ने मुस्कुरा के कहा की,
क्या फर्क पड़ता है, मेरा भगवान्
तो मुझे देख लेगा. 🍂
🌷🌹🌺शुभ रात्रि🌷🌹🌺

Shubh Ratarey....

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Prabhakar soni Aug 18, 2018

विज्ञान हमें कहाँ ले आया

*पहले :-* वो कुँए का मैला कुचला पानी पीकर भी 100 वर्ष जी लेते थे
*अब :-* RO का शुद्ध पानी पीकर 40 वर्ष में बुढ़े हो रहे हैं

*पहले :-* वो घाणी का मैला सा तेल खाके बुढ़ापे में भी मेहनत कर लेते थे।
*अब :-* हम डबल-ट्रिपल फ़िल्...

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Prakash Preetam Aug 18, 2018

*गुस्सा*
बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया।

घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया।

अब की ब...

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Pranam Like +4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 37 शेयर

सौजन्य: ईशा योग सेंटर, सद्गुरु जी।

Pranam Bell Tulsi +925 प्रतिक्रिया 79 कॉमेंट्स • 1601 शेयर

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