Hari Kumar
Hari Kumar Jan 22, 2020

जिन्दगी चलती है चलते रहिए* *वक्त के साथ बदलते रहिए* *राह मुश्किल सही वो भी निकल जायेगी* *ठोकरें खा के भी संभलते रहिए* *ये अंधेरा है जो जुगनू से भी घबराता है* *सूर्य ना हो तो चरागों सा जलते रहिए* *उम्र भर कोई यहाँ साथ नहीं देता* *हों अकेले भी तो हँसते रहिए* *कोई खुश्बू नहीं एैसी है जो ताउम्र रहे* *जिन्दगी फूल है थोड़ा महकते रहिए।

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Anita Jha Jan 26, 2020

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😴 😴 👉 *रात्रि कहानि* 👈 😴 😴 🙏 *असली साधू* 🙏 ✍ एक साधु 🎅देश में यात्रा के लिए पैदल निकला हुआ था। एक बार रात 🌚हो जाने पर वह एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका। आनंद🧑🏻 ने साधू की खूब सेवा की। दूसरे दिन आनंद ने बहुत सारे उपहार देकर साधू🎅 को विदा किया। साधू ने आनंद के लिए प्रार्थना की - "भगवान करे, तू दिनों दिन बढ़ता ही रहे। साधू की बात सुनकर आनंद हँस 😄पड़ा और बोला - "अरे, महात्मा जी! जो है यह भी नहीं रहने वाला।" साधू🎅 आनंद की ओर देखता रह गया और वहाँ से चला गया। दो ✌वर्ष बाद साधू फिर आनंद के घर गया और देखा कि सारा वैभव समाप्त हो गया है। पता चला कि आनंद🧑🏻 अब बगल के गाँव में एक जमींदार के यहाँ नौकरी करता है। साधू 🎅आनंद से मिलने गया। आनंद ने अभाव में भी साधू का स्वागत किया। झोंपड़ी 🏕में फटी चटाई पर बिठाया। खाने के लिए सूखी रोटी दी। दूसरे दिन जाते समय साधू 🎅की आँखों में आँसू😢 थे। साधू कहने लगा - "हे भगवान् ! ये तूने क्या किया ?" आनंद पुन: हँस 😃पड़ा और बोला - "महाराज आप क्यों दु:खी😓 हो रहे है ? महापुरुषों ने कहा है कि भगवान् इन्सान को जिस हाल में रखे, इन्सान को उसका धन्यवाद करके खुश😊 रहना चाहिए। समय सदा बदलता रहता है और सुनो ! यह भी नहीं रहने वाला।" साधू🎅 मन ही मन सोचने लगा - "मैं तो केवल भेष से साधू हूँ। सच्चा साधू तो तू ही है, आनंद।" कुछ वर्ष बाद साधू फिर यात्रा पर निकला और आनंद से मिला तो देखकर हैरान 😲रह गया, कि आनंद तो अब जमींदारों का जमींदार बन गया है। मालूम हुआ कि जिस जमींदार के यहाँ आनंद🧑🏻 नौकरी करता था, वह सन्तान विहीन था, मरते समय अपनी सारी जायदाद आनंद को दे गया। साधू 🎅ने आनंद से कहा - "अच्छा हुआ, वो जमाना गुजर गया। भगवान्☝🏻 करे अब तू ऐसा ही बना रहे।" यह सुनकर आनंद फिर हँस😃 पड़ा और कहने लगा - "महाराज! अभी भी आपकी नादानी बनी हुई है।" साधू 🎅ने पूछा - "क्या यह भी नहीं रहने वाला ?" आनंद🧑🏻 उत्तर दिया - "हाँ! या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा। कुछ भी रहने वाला नहीं है और अगर शाश्वत कुछ है, तो वह है परमात्मा☝🏻 और उस परमात्मा की अंश आत्मा।" आनंद🧑🏻 की बात को साधू ने गौर से सुना और चला गया। साधू🎅 कई साल बाद फिर लौटता है, तो देखता है कि आनंद का महल 🏢तो है, किन्तु कबूतर 🕊उसमें गुटरगूं कर रहे हैं और आनंद का देहांत हो गया है। बेटियाँ अपने-अपने घर चली गयीं, बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है। साधू🎅 कहता है - "अरे इन्सान! तू किस बात का अभिमान करता है ? क्यों इतराता है ? यहाँ कुछ भी टिकने वाला नहीं है, दु:ख😢 या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता। तू सोचता है: पड़ोसी मुसीबत में है और मैं मौज😂 में हूँ । लेकिन सुन, न मौज रहेगी और न ही मुसीबत। सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा। सच्चे इन्सान वे हैं, जो हर हाल में खुश रहते हैं। मिल गया माल तो उस माल में खुश😊 रहते हैं और हो गये बेहाल तो उस हाल में खुश रहते हैं।" साधू 🎅कहने लगा - "धन्य है आनंद! तेरा सत्संग और धन्य हैं तुम्हारे सतगुरु! मैं तो झूठा साधू हूँ, असली फकीरी तो तेरी जिन्दगी है। अब मैं तेरी तस्वीर देखना चाहता हूँ, कुछ फूल🌸 चढ़ाकर दुआ तो मांग लूं।" साधू दूसरे कमरे में जाता है तो देखता है कि आनंद ने अपनी तस्वीर पर लिखवा रखा है - "आखिर में यह भी नहीं रहेगा।" 👉 *रहेगी तो हमारी अच्छाईयां या बुराइयां, लेकिन बहुत दिनों तक ये भी नहीं रहेगी। कुछ चंद लोगों को छोड़कर जो इतिहास और किताबो मे होगें, लेकिन अगर दुनिया ही खत्म हो गई तो ये भी नहीं रहेगा।* ✍ *शिक्षा- हर परिस्थिति में खुश रहना सीखें।* 🙏 *परमात्मा शिव कहते हैं-* बच्चे ड्रामा का हर सीन करेक्ट है। हमारे कर्मों के अनुसार ही दुःख😭 सुख आते हैं। अतः हर परिस्थिति में खुश😊 रहना सिखो। 😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴

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💯💯एक गिलास दूध🤔🤔 एक गरीब लड़का घर-घर जाकर सामान बेचता था ताकि वह अपनी पढ़ाई कर सके और स्कूल की फीस भर सके| एक दिन उसके पास सिर्फ एक रूपया ही बचा, उसे बहुत भूख लग रही थी| वह एक घर के करीब पहुंचने वाला था उसने सोचा कि इस घर पर जाकर खाने के लिए कुछ मांगू। एक औरत ने दरवाजा खोला| जब औरत ने उस लड़के की तरफ देखा तो वह समझ गयी कि यह बहुत भूखा है| फिर उसने एक दूध का गिलास लाकर दिया, उस लडके ने दूध पीने के बाद कहा कितने पैसे हुए? औरत ने कहा, तुम यह खरीद नहीं सकते, मुझे मेरी माँ ने सिखाया है कि कभी गरीब इंसानो से पैसे नहीं लेना चाहिए| लड़का बोला, फिर तो मैं आपको दिल से धन्यवाद देता हूँ, और कहा अब मैं शारीरिक रूप से ही स्वस्थ नहीं हूँ बल्कि मेरी परमात्मा में भी आस्था बढ़ी है| उस लडके का नाम Howard Kelly था | बहुत साल बीत गए, एक दिन उस औरत की तबियत बिगड़ गयी| स्थानीय डॉक्टर भी उसकी मदद नहीं कर पाये | इसलिए उन्होंने उसे बाहर शहर में भेज दिया ताकि उसकी बीमारी का सही ढंग से इलाज हो सके | उस हॉस्पिटल में इलाज के लिए Dr Howard Kelly को बुलाया गया था | जब वह उस औरत के कक्ष में गए तो उस लड़के ने झट से उस औरत को पहचान लिया, जिसने उस पर दया की थी, जब वह गरीब था और घर-घर सामान बेचने जाता था | उस लडके ने औरत को बीमारी से उबरने में मदद करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने की ठान ली थी| उनका परिश्रम लम्बा चला लेकिन उन्होंने अंत में बिमारी पर विजय पा ली, कुछ देर बाद उस औरत को हॉस्पिटल का बिल भरने को कहा गया | वह औरत चिंतित हुई क्यूंकि उसके पास बिल चुकाने के लिए इतने पैसे नहीं थे, उसकी पूरी जिंदगी की कमाई भी इस इलाज के लिए कम थी | अंत में जब महिला ने बिल को ठीक से देखा तो उसने कुछ शब्दों को पढ़ा जो कि बिल के एक तरफ लिखे थे| वहां लिखा था : एक गिलास दूध का पूरा भुगतान कर दिया | दोस्तों जहाँ लोगों में दया की भावना होती है वहाँ ईश्वर का वास होता है। अगर आप आज किसी की मदद करेंगे तो यकीन मानिये कल जब आपको मदद जरुरत होगी तो ईश्वर आपकी मदद जरूर करेंगे। दूसरों की मदद करके आप असल में खुद की ही मदद कर रहे होते हैं। 😊😊🌹💐

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Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*ओम् नमः शिवाय*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 भगवान शिव ने मातापार्वती को बताए थे जीवन के ये पांच रहस्य भगवान शिव ने देवी पार्वती को समय-समय पर कई ज्ञान की बातें बताई हैं। जिनमें मनुष्य के सामाजिक जीवन से लेकर पारिवारिक और वैवाहिक जीवन की बातें शामिल हैं। भगवान शिव ने देवी पार्वती को 5 ऐसी बातें बताई थीं जो हर मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें जानकर उनका पालन हर किसी को करना ही चाहिए- 1. क्या है सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा पाप देवी पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उन्हें मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा धर्म और अधर्म मानी जाने वाली बात के बारे में बताया है। भगवान शंकर कहते है- श्लोक- नास्ति सत्यात् परो नानृतात् पातकं परम्।। अर्थात- मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना या सत्य का साथ देना और सबसे बड़ा अधर्म है असत्य बोलना या उसका साथ देना। इसलिए हर किसी को अपने मन, अपनी बातें और अपने कामों से हमेशा उन्हीं को शामिल करना चाहिए, जिनमें सच्चाई हो, क्योंकि इससे बड़ा कोई धर्म है ही नहीं। असत्य कहना या किसी भी तरह से झूठ का साथ देना मनुष्य की बर्बादी का कारण बन सकता है। 2. काम करने के साथ इस एक और बात का रखें ध्यान श्लोक- आत्मसाक्षी भवेन्नित्यमात्मनुस्तु शुभाशुभे। अर्थात- मनुष्य को अपने हर काम का साक्षी यानी गवाह खुद ही बनना चाहिए, चाहे फिर वह अच्छा काम करे या बुरा। उसे कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए कि उसके कर्मों को कोई नहीं देख रहा है। कई लोगों के मन में गलत काम करते समय यही भाव मन में होता है कि उन्हें कोई नहीं देख रहा और इसी वजह से वे बिना किसी भी डर के पाप कर्म करते जाते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। मनुष्य अपने सभी कर्मों का साक्षी खुद ही होता है। अगर मनुष्य हमेशा यह एक भाव मन में रखेगा तो वह कोई भी पाप कर्म करने से खुद ही खुद को रोक लेगा। 3. कभी न करें ये तीन काम करने की इच्छा श्लोक-मनसा कर्मणा वाचा न च काड्क्षेत पातकम्। अर्थात- आगे भगवान शिव कहते है कि- किसी भी मनुष्य को मन, वाणी और कर्मों से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य जैसा काम करता है, उसे वैसा फल भोगना ही पड़ता है। यानि मनुष्य को अपने मन में ऐसी कोई बात नहीं आने देना चाहिए, जो धर्म-ग्रंथों के अनुसार पाप मानी जाए। न अपने मुंह से कोई ऐसी बात निकालनी चाहिए और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए, जिससे दूसरों को कोई परेशानी या दुख पहुंचे। पाप कर्म करने से मनुष्य को न सिर्फ जीवित होते हुए इसके परिणाम भोगना पड़ते हैं बल्कि मारने के बाद नरक में भी यातनाएं झेलना पड़ती हैं। 4. सफल होने के लिए ध्यान रखें ये एक बात संसार में हर मनुष्य को किसी न किसी मनुष्य, वस्तु या परिस्थित से आसक्ति यानि लगाव होता ही है। लगाव और मोह का ऐसा जाल होता है, जिससे छूट पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इससे छुटकारा पाए बिना मनुष्य की सफलता मुमकिन नहीं होती, इसलिए भगवान शिव ने इससे बचने का एक उपाय बताया है। श्लोक-दोषदर्शी भवेत्तत्र यत्र स्नेहः प्रवर्तते। अनिष्टेनान्वितं पश्चेद् यथा क्षिप्रं विरज्यते।। अर्थात- भगवान शिव कहते हैं कि- मनुष्य को जिस भी व्यक्ति या परिस्थित से लगाव हो रहा हो, जो कि उसकी सफलता में रुकावट बन रही हो, मनुष्य को उसमें दोष ढूंढ़ना शुरू कर देना चाहिए। सोचना चाहिए कि यह कुछ पल का लगाव हमारी सफलता का बाधक बन रहा है। ऐसा करने से धीरे-धीरे मनुष्य लगाव और मोह के जाल से छूट जाएगा और अपने सभी कामों में सफलता पाने लगेगा। 5. यह एक बात समझ लेंगे तो नहीं करना पड़ेगा दुखों का सामना श्लोक-नास्ति तृष्णासमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्। सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते।। अर्थात- आगे भगवान शिव मनुष्यो को एक चेतावनी देते हुए कहते हैं कि- मनुष्य की तृष्णा यानि इच्छाओं से बड़ा कोई दुःख नहीं होता और इन्हें छोड़ देने से बड़ा कोई सुख नहीं है। मनुष्य का अपने मन पर वश नहीं होता। हर किसी के मन में कई अनावश्यक इच्छाएं होती हैं और यही इच्छाएं मनुष्य के दुःखों का कारण बनती हैं। जरुरी है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझे और फिर अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करके शांत मन से जीवन बिताएं। *🌻कान दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय* *🌻लहसुन की 10-12 कलियों को छीलकर रख लें। इन कलियों को अच्छी तरह पीस या कूट लें। पीसते या कूटते समय इसमें 10-12 बूंद पानी मिला लें। अब इसे किसी कपड़े या महीन छन्नी से छान या निचोड़ लें। दर्द बाली कान में उस रस के 2 बून्द रस कान में डालने से दर्द से राहत मिलता है ।* *🌻लहसुन की कलियों को 2 चम्‍मच तिल के तेल में तब तक गरम करें जब तक कि वह काला ना हो जाए। फिर इसे तेल की 2-3 बूंदे कानों में टपका लें।* *🌻जैतून के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।* *🌻तुलसी के पत्तों का रस गुनगुना कर दो-दो बूंद सुबह-शाम डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।* *🌻प्याज का रस निकाल लें,अब रुई के फाये या किसी वूलेन कपडे के टुकडे को इस रस में डुबायें अब इसे कान के ऊपर निचोड़ दें ,इससे कान में उत्पन्न सूजन,दर्द ,लालिमा एवं संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है।* *🌻कान में दर्द हो रहा है तो अदरक का रस निकालकर दो बूंद कान में टपका देने से भी दर्द और सूजन में काफी आराम मिलता है।*

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स्नेहिल वन्दन... राम राम जी...जयश्रीकृष्णा.... भगवान सभी को सुख और संमृद्धि दे l एक बार रास्ते में एक अमीर आदमी की कार ख़राब होने पर वह दूर एक पेड़ के नीचे खड़े एक रिक्शा वाले के पास जाता है। वहाँ जाकर देखता है कि रिक्शा वाले ने अपने पैर हैंडल के ऊपर रखे होते है। पीठ उसकी अपनी सीट पर और सिर जहा सवारी बैठती है उस सीट पर होती है । और वो मज़े से लेट कर गाना गुन-गुना रहा होता है। वो अमीर व्यक्ति रिक्शा वाले को ऐसे बैठे हुए देख कर बहुत हैरान होता है कि एक व्यक्ति ऐसे बेआराम जगह में कैसे रह सकता है, कैसे खुश रह सकता है। कैसे गुन-गुना सकता है। वो उसको 20 रुपए में चलने के लिए बोलता है। रास्ते में वो रिक्शा वाला वही गाना गुन-गुनाते हुए मज़े से रिक्शा खींचता है। वो अमीर व्यक्ति एक बार फिर हैरान कि एक व्यक्ति 20 रूपए लेकर इतना खुश कैसे हो सकता है। इतने मज़े से कैसे गुन-गुना सकता है। वो थोडा इर्ष्यापूर्ण हो जाता है और रिक्शा वाले को समझने के लिए उसको अपने बंगले में रात को खाने के लिए बुला लेता है। रिक्शा वाला उसके बुलावे को स्वीकार कर देता है। वो अपने हर नौकर को बोल देता है कि इस रिक्शा वाले को सबसे अच्छे खाने की सुविधा दी जाए। अलग अलग तरह के खाने की सेवा हो जाती है। सूप्स, आइस क्रीम, गुलाब जामुन सब्जियां यानि हर चीज वहाँ मौजूद थी। वो रिक्शा वाला खाना शुरू कर देता है, कोई प्रतिक्रिया, कोई घबराहट बयान नहीं करता। बस वही गाना गुन-गुनाते हुए मजे से वो खाना खाता है। सभी लोगो को ऐसे लगता है जैसे रिक्शा वाला ऐसा खाना पहली बार नहीं खा रहा है। पहले भी कई बार खा चुका है। वो अमीर आदमी एक बार फिर हैरान, एक बार फिर इर्ष्यापूर्ण कि कोई आम आदमी इतने ज्यादा तरह के व्यंजन देख के भी कोई हैरानी वाली प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता और वैसे कैसे गुन-गुना रहा है जैसे रिक्शे में गुन-गुना रहा था। यह सब कुछ देखकर अमीर आदमी की इर्ष्या और बढती है। अब वह रिक्शे वाले को अपने बंगले में कुछ दिन रुकने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला हाँ कर देता है। उसको बहुत ज्यादा इज्जत दी जाती है। कोई उसको जूते पहना रहा होता है, तो कोई कोट । एक बेल बजाने से तीन-तीन नौकर सामने आ जाते है। एक बड़ी साइज़ की टेलीविज़न स्क्रीन पर उसको प्रोग्राम दिखाए जाते है। और एयर-कंडीशन कमरे में सोने के लिए बोला जाता है। अमीर आदमी नोट करता है कि वो रिक्शा वाला इतना कुछ देख कर भी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। वो वैसे ही साधारण चल रहा है। जैसे वो रिक्शा में था वैसे ही है । वैसे ही गाना गुन-गुना रहा है जैसे वो रिक्शा में गुन-गुना रहा था। अमीर आदमी के इर्ष्या बढ़ती चली जाती है और वह सोचता है कि अब तो हद ही हो गई । इसको तो कोई हैरानी नहीं हो रही, इसको कोई फरक ही नहीं पढ़ रहा। ये वैसे ही खुश है, कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दे रहा। अब अमीर आदमी पूछता है: आप खुश हैं ना? वो रिक्शा वाला कहते है: जी साहेब बिलकुल खुश हूँ । अमीर आदमी फिर पूछता है: आप आराम में हैं ना ? रिक्शा वाला कहता है: जी बिलकुल आरामदायक हूँ । अब अमीर आदमी तय करता है कि इसको उसी रिक्शा पर वापस छोड़ दिया जाये । वहाँ जाकर ही इसको इन बेहतरीन चीजो का एहसास होगा। क्योंकि वहाँ जाकर ये इन सब बेहतरीन चीजो को याद करेगा। अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी को बोलता है कि इसको कह दो कि आपने दिखावे के लिए कह दिया कि... आप खुश हो, आप आरामदायक हो। लेकिन साहब समझ गये है कि आप खुश नहीं हो आराम में नहीं हो। इसलिए आपको उसी रिक्शा के पास छोड़ दिया जाएगा।” सेक्रेटरी के ऐसा कहने पर रिक्शा वाला कहता है: ठीक है सर, जैसे आप चाहे, जब आप चाहे। उसे वापस उसी जगह पर छोड़ दिया जाता है जहाँ पर उसका रिक्शा था। अब वो अमीर आदमी अपने गाड़ी के काले शीशे ऊँचे करके उसे देखता है। रिक्शे वाले ने अपनी सीट उठाई बैग में से काला सा, गन्दा सा, मेला सा कपड़ा निकाला, रिक्शा को साफ़ किया, मज़े में बैठ गया और वही गाना गुन-गुनाने लगा। अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी से पूछता है: “कि चक्कर क्या है। इसको कोई फरक ही नहीं पड रहा इतनी आरामदायक वाली, इतनी बेहतरीन जिंदगी को ठुकरा के वापस इस कठिन जिंदगी में आना और फिर वैसे ही खुश होना, वैसे ही गुन-गुनाना।” फिर वो सेक्रेटरी उस अमीर आदमी को कहता है: “सर यह एक कामियाब इन्सान की पहचान है । एक कामियाब इन्सान वर्तमान में जीता है, उसको मनोरंजन (Enjoy) करता है और बढ़िया जिंदगी की उम्मीद में अपना वर्तमान खराब नहीं करता । अगर उससे भी बढ़िया जिंदगी मिल गई तो उसे भी वेलकम करता है उसको भी मनोरंजन (enjoy) करता है उसे भी भोगता है और उस वर्तमान को भी ख़राब नहीं करता । और अगर जिंदगी में दुबारा कोई बुरा दिन देखना पड़े तो वो भी उस वर्तमान को उतने ही ख़ुशी से, उतने ही आनंद से, उतने ही मज़े से, भोगता है मनोरंजन करता है और उसी में आनंद लेता है” बहनो ं और भाइयों, कामयाबी हमारीे ही ख़ुशी में छुपी है, और अच्छे भविष्य की उम्मीद में अपने वर्तमान को ख़राब नहीं करें। और न ही कम अच्छे दिनों में ज्यादा अच्छे दिनों को याद करके अपने वर्तमान को ख़राब करना है 🌹🌹🌹🙏☺️

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#रविवार_26_जनवरी_2020 सूर्योदय: ०७:१२ सूर्यास्त: १७:५५ हिन्दु सूर्योदय: ०७:१७ हिन्दु सूर्यास्त: १७:५१ चन्द्रोदय: ०८:१५ चन्द्रास्त: १९:१६ सूर्य राशि: मकर चन्द्र राशि: मकर - १७:४० तक सूर्य नक्षत्र: श्रवण द्रिक अयन: उत्तरायण द्रिक ऋतु: शिशिर वैदिक अयन: उत्तरायण वैदिक ऋतु: शिशिर शक सम्वत: १९४१ विकारी चन्द्रमास: माघ - अमान्त विक्रम सम्वत: २०७६ परिधावी माघ - पूर्णिमान्त गुजराती सम्वत: २०७६ पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: द्वितीया - ३०:१५ तक नक्षत्र, योग तथा करण नक्षत्र: धनिष्ठा - ३०:४९ तक योग: व्यतीपात - २६:२६ तक प्रथम करण: बालव - १७:२० तक द्वितीय करण: कौलव - ३०:१५ तक अशुभ समय दुर्मुहूर्त: १६:२६ - १७:०९ वर्ज्य: ०८:५८ - १०:४३ राहुकाल: १६:३२ - १७:५१ गुलिक काल: १५:१२ - १६:३२ यमगण्ड: १२:३४ - १३:५३ शुभ समय अभिजित मुहूर्त: १२:१३ - १२:५५ अमृत काल: १९:२७ - २१:१२ दैनिक उपवास और त्यौहार चन्द्र दर्शन गणतन्त्र दिवस सुनील गर्ग 9811332914 9911020152 7982311549

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#रविवार_26_जनवरी_2020 सूर्योदय: ०७:१२ सूर्यास्त: १७:५५ हिन्दु सूर्योदय: ०७:१७ हिन्दु सूर्यास्त: १७:५१ चन्द्रोदय: ०८:१५ चन्द्रास्त: १९:१६ सूर्य राशि: मकर चन्द्र राशि: मकर - १७:४० तक सूर्य नक्षत्र: श्रवण द्रिक अयन: उत्तरायण द्रिक ऋतु: शिशिर वैदिक अयन: उत्तरायण वैदिक ऋतु: शिशिर शक सम्वत: १९४१ विकारी चन्द्रमास: माघ - अमान्त विक्रम सम्वत: २०७६ परिधावी माघ - पूर्णिमान्त गुजराती सम्वत: २०७६ पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: द्वितीया - ३०:१५ तक नक्षत्र, योग तथा करण नक्षत्र: धनिष्ठा - ३०:४९ तक योग: व्यतीपात - २६:२६ तक प्रथम करण: बालव - १७:२० तक द्वितीय करण: कौलव - ३०:१५ तक अशुभ समय दुर्मुहूर्त: १६:२६ - १७:०९ वर्ज्य: ०८:५८ - १०:४३ राहुकाल: १६:३२ - १७:५१ गुलिक काल: १५:१२ - १६:३२ यमगण्ड: १२:३४ - १३:५३ शुभ समय अभिजित मुहूर्त: १२:१३ - १२:५५ अमृत काल: १९:२७ - २१:१२ दैनिक उपवास और त्यौहार चन्द्र दर्शन गणतन्त्र दिवस सुनील गर्ग 9811332914 9911020152 7982311549

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अरिष्ट शनि शांति में पीपल पूजा का महत्त्व 〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️ जब किसी इंसान पर शनिदेव की महादशा चल रही होती है तो उसे पीपल की पूजा का उपाय जरूर बताया जाता है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि ब्रम्‍हांड के सबसे शक्तिशाली और क्रूर ग्रह शनि का क्रोध मात्र पीपल वृक्ष की पूजा करने से कैसे शान्‍त हो जाता है।? आज हम आपको बताने जा रहे हैं शनि और पीपल से सम्‍बंधित वह पौराणिक कथा जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना हो। पुराणों की माने तो एक बार त्रेता युग मे अकाल पड़ गया था । उसी युग मे एक कौशिक मुनि अपने बच्चो के साथ रहते थे । बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि अपने बच्चो को लेकर दूसरे राज्य मे रोज़ी रोटी के लिए जा रहे थे । रास्ते मे बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि ने एक बच्चे को रास्ते मे ही छोड़ दिया था । बच्चा रोते रोते रात को एक पीपल के पेड़ के नीचे सो गया था तथा पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा था। तथा पीपल के पेड़ के फल खा कर बड़ा होने लगा था। तथा कठिन तपस्या करने लगा था । एक दिन ऋषि नारद वहाँ से जा रहे थे । नारद जी को उस बच्चे पर दया आ गयी तथा नारद जी ने उस बच्चे को पूरी शिक्षा दी थी तथा विष्णु भगवान की पूजा का विधान बता दिया था। अब बालक भगवान विष्णु की तपस्या करने लगा था । एक दिन भगवान विष्णु ने आकर बालक को दर्शन दिये तथा विष्णु भगवान ने कहा कि हे बालक मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूँ । आप कोई वरदान मांग लो। बालक ने विष्णु भगवान से सिर्फ भक्ति और योग मांग लिया था । अब बालक उस वरदान को पाकर पीपल के पेड़ के नीचे ही बहुत बड़ा तपस्वी और योगी हो गया था। एक दिन बालक ने नारद जी से पूछा कि हे प्रभु हमारे परिवार की यह हालत क्यो हुई है । मेरे पिता ने मुझे भूख के कारण छोड़ दिया था और आजकल वो कहा है। नारद जी ने कहा बेटा आपका यह हाल शानिमहाराज ने किया है । देखो आकाश मे यह शनैश्चर दिखाई दे रहा है । बालक ने शनैश्चर को उग्र दृष्टि से देखा और क्रोध से उस शनैश्चर को नीचे गिरा दिया । उसके कारण शनैश्चर का पैर टूट गया । और शनि असहाय हो गया था। शनि का यह हाल देखकर नारद जी बहुत प्रसन्न हुए । नारद जी ने सभी देवताओ को शनि का यह हाल दिखाया था । शनि का यह हाल देखकर ब्रह्मा जी भी वहाँ आ गए थे । और बालक से कहा कि मैं ब्रह्मा हूँ आपने बहुत कठिन तप किया है। आपके परिवार की यह दुर्दशा शनि ने ही की है । आपने शनि को जीत लिया है । आपने पीपल के फल खाकर जीवंन जीया है । इसलिए आज से आपका नाम पिपलाद ऋषि के नाम जाना जाएगा।और आज से जो आपको याद करेगा उसके सात जन्म के पाप नष्ट हो जाएँगे। तथा पीपल की पूजा करने से आज के बाद शनि कभी कष्ट नहीं देगा । ब्रह्मा जी ने पिपलाद बालक को कहा कि अब आप इस शनि को आकाश मे स्थापित कर दो । बालक ने शनि को ब्रह्माण्ड मे स्थापित कर दिया । तथा पिपलाद ऋषि ने शनि से यह वायदा लिया कि जो पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा उसको आप कभी कष्ट नहीं दोगे । शनैश्चर ने ब्रह्मा जी के सामने यह वायदा ऋषि पिपलाद को दिया था। उस दिन से यह परंपरा है जो ऋषि पिपलाद को याद करके शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करता है उसको शनि की साढ़े साती , शनि की ढैया और शनि महादशा कष्ट कारी नहीं होती है । शनि की पूजा और व्रत एक वर्ष तक लगातार करनी चाहिए । शनि कों तिल और सरसो का तेल बहुत पसंद है इसलिए तेल का दान भी शनिवार को करना चाहिए । पूजा करने से तो दुष्ट मनुष्य भी प्रसन्न हो जाता है। तो फिर शनि क्यो नहीं प्रसन्न होगा ? इसलिए शनि की पूजा का विधान तो भगवान ब्रह्मा ने दिया है। जय महादेव

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