मायमंदिर फ़्री कुंडली
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💐💐 आज का स्पेशल 💐💐 💐🙏निर्जला एकादशी की शुभकामनाएँ🙏💐 🙏🙏 एकादशी और गुरुवार का संयोग है 💐भगवान विष्णु💐 को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अवसर।🙏🙏 स्वयं भी लाभ उठाइये और इष्ट-मित्र, परिजनों को भेजकर उनका भी दिन शुभ बनाइये। 🙏💐💐💐💐 🙏

💐💐 आज का स्पेशल 💐💐
💐🙏निर्जला एकादशी की शुभकामनाएँ🙏💐
🙏🙏 एकादशी और गुरुवार का संयोग है 💐भगवान विष्णु💐 को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अवसर।🙏🙏 स्वयं भी लाभ उठाइये और इष्ट-मित्र, परिजनों को भेजकर उनका भी दिन शुभ बनाइये। 🙏💐💐💐💐 🙏

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कामेंट्स

Vinod Agrawal Jun 12, 2019
🙏Nirjala Ekadashi Ki Hardik Subhkamnaye🙏 🌷Om Shree Laxmi Narayan Namo Namah Om Namo Bhagavate Vasudevay🌷

Queen Jun 12, 2019
Om namo Bhagwate Vasudevay namah

Gour.... Jun 13, 2019
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। भगवान् श्री हरि विष्णु जी आपकी मनोकामना पूर्ण करें जी।

Rajendra Prajapati Jun 13, 2019
manoj sahu bemetara naam se user hai uski post check kare aap log usne filmi song hi post kar rakhi hai aap log aise users par dhyan diya kare yeh ek Dharmik App hai koi iski garima ke sath khilwad kare yeh theek nahi hai isliye kripa karke us user ko check kare aur usko block kar mandir ki garima banaye rakhne ka sarthak prayas kare Aapki bahut Meharbani hogi Om Namoh Bhagwate Vasudevay

Pradhan Dhaker Jun 13, 2019
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः

Pradhan Dhaker Jun 13, 2019
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः

S. K. Jethwa Jul 16, 2019

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Prince Trivedi Jul 15, 2019

*🙏गुरु पूर्णिमा विशेष : घर में कैसे मनाएं यह पर्व, जब कोई गुरु नहीं हो*🌹🌞 *🙏जीवन में हर कार्य किसी न किसी के द्वारा सिखाया जाता है। वह 'गुरु' कहलाता है। साधार‍णतया गुरु का महत्व अध्यात्म में सर्वोपरि माना गया है जिसमें दीक्षा किसी न किसी रूप में दी जाकर शिष्य की देखरेख उसके कल्याण की भावना से की जाती है।* *सभी धर्मों में गुरु का अपनी-अपनी तरह से महत्व है। कुंडलिनी जागरण के लिए सर्वोपरि सहस्रार चक्र में गुरुदेव का वास बतलाया गया है, जो सबके आखिर में सिद्ध होता है।* *वे लोग बड़े सौभाग्यशाली होते हैं जिन्हें किसी सद्गुरु से दीक्षा मिली हो। वे लोग जिन्हें गुरु उपलब्ध नहीं है और साधना करना चाहते हैं उनका प्रतिशत समाज में अधिक है। अत: वे इस प्रयोग से लाभान्वित हो सकते हैं।* *🙏कैसे करें पूजन🙏* *🌞सर्वप्रथम एक श्वेत वस्त्र पर चावल की ढेरी लगाकर उस पर कलश-नारियल रख दें।* *🌞उत्तराभिमुख होकर सामने शिवजी का चित्र रख दें।* *🌞शिवजी को गुरु मानकर निम्न मंत्र पढ़कर श्रीगुरुदेव का आवाहन करें-* - 'ॐ वेदादि गुरुदेवाय विद्महे, परम गुरुवे धीमहि, तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।।' *🙏हे गुरुदेव! मैं आपका आह्वान करता हूं।🙏* *🌞फिर यथाशक्ति पूजन करें, नैवेद्यादि आरती करें तथा 'ॐ गुं गुरुभ्यो नम: मंत्र' की 11, 21, 51 या 108 माला करें।* *👍यदि किसी विशेष साधना को करना चाहते हैं, तो उनकी आज्ञा गुरु से मानसिक रूप से लेकर की जा सकती है।* *🚩🚩विशेष- 16 जुलाई को आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा तथा चंद्र ग्रहण है। अत: ग्रहण के दौरान मंत्रों का जप किया जा सकता है तथा विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है।*🌺🌺 *JAI SHREE MAHAKAAL*

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Avneesh Kumar Jul 15, 2019

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प्रश्नोत्तर : श्लोक संख्या १५.१५ . प्रश्न १ : भगवान् किसलिए वैदिक ज्ञान प्रस्तुत करते हैं ? . उत्तर १ : "इसलिए कि जीव को कृष्ण को समझने की आवश्यकता है | इसकी पुष्टि वैदिक साहित्य से होती है –योऽसौ सर्वैर्वेदैगीयते| चारों वेदों, वेदान्त सूत्र तथा उपनिषदों एवं पुराणों समेत सारे वैदिक साहित्य में परमेश्र्वर की कीर्ति का गान है | उन्हें वैदिक अनुष्ठानों द्वारा, वैदिक दर्शन की व्याख्या द्वारा तथा भगवान् की भक्तिमय पूजा द्वारा प्राप्त किया जा सकता है | अतएव वेदों का उद्देश्य कृष्ण को समझना है | वेद हमें निर्देश देते हैं, जिससे कृष्ण को जाना जा सकता है और उनकी अनुभूति की जा सकती है | भगवान् ही चरम लक्ष्य है | वेदान्तसूत्र (१.१.४) में इसकी पुष्टि इन शब्दों में हुई है - तत्तु समन्वयात् | मनुष्य तीन अवस्थाओं में सिद्धि प्राप्त करता है | वैदिक साहित्य के ज्ञान से भगवान् के साथ अपने सम्बन्ध को समझा जा सकता है, विभिन्न विधियों को सम्पन्न करके उन तक पहुँचा जा सकता है और अन्त में उस परम लक्ष्य श्रीभगवान् की प्राप्ति की जा सकती है | इस श्लोक में वेदों के प्रयोजन, वेदों के ज्ञान तथा वेदों के लक्ष्य को स्पष्टतः परिभाषित किया गया है |" . :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: प्रश्न २ : भगवान् बद्ध जीवों के उद्धार हेतु किस-किस प्रकार सहायता करते हैं . उत्तर २ : "परमेश्र्वर परमात्मा रूप में प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित हैं और उन्हीं के कारण सारे कर्म प्रेरित होते हैं | जीव अपने विगत जीवन की सारी बातें भूल जाता है, लेकिन उसे परमेश्र्वर के निर्देशानुसार कार्य करना होता है, जो उसके सारे कर्मों के साक्षी है | अतएव वह अपने विगत कर्मों के अनुसार कार्य करना प्रारम्भ करता है | इसके लिए आवश्यक ज्ञान तथा स्मृति उसे प्रदान की जाती है | लेकिन वह विगत जीवन के विषय में भूलता रहता है | इस प्रकार भगवान् न केवल सर्वव्यापी हैं, अपितु वे प्रत्येक हृदय में अन्तर्यामी भी हैं | वे विभिन्न कर्मफल प्रदान करने वाले हैं | वे न केवल निराकार ब्रह्म तथा अन्तर्यामी परमात्मा के रूप में पूजनीय हैं, अपितु वे वेदों के अवतार के रूप में भी पूजनीय हैं | वेद लोगों को सही दिशा बताते हैं, जिससे वे समुचित ढंग से अपना जीवन ढाल सकें और भगवान् के धाम को वापस जा सकें | वेद भगवान् कृष्ण विषयक ज्ञान प्रदान करते हैं और अपने अवतार व्यासदेव के रूप में कृष्ण ही वेदान्तसूत्र के संकलनकर्ता हैं | व्यासदेव द्वारा श्रीमद्भागवत के रूप में किया गया वेदान्तसूत्र का भाष्य वेदान्तसूत्र की वास्तविक सूचना प्रदान करता है | भगवान् इतने पूर्ण हैं कि बद्धजीवों के उद्धार हेतु वे उसके अन्न के प्रदाता एवं पाचक हैं, उसके कार्यकलापों के साक्षी हैं तथा वेदों के रूप में ज्ञान के प्रदाता हैं | वे भगवान् श्रीकृष्ण के रूप में भगवद्गीता के शिक्षक हैं | वे बद्धजीव द्वारा पूज्य हैं | इस प्रकार ईश्र्वर सर्वकल्याणप्रद तथा सर्वदयामय हैं |" . संदर्भ : श्रीमद्भगवद्गीता १५.१५, तात्पर्य, श्रील प्रभुपाद

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sanjay snehi Jul 15, 2019

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jpshrivastava Jul 16, 2019

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MAHESH MALHOTRA Jul 14, 2019

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