पिल्लैयारपठ्ठी कर्पग विनायक मंदिर ।

पिल्लैयारपठ्ठी कर्पग विनायक मंदिर ।
पिल्लैयारपठ्ठी कर्पग विनायक मंदिर ।

#गणेशजी #मंदिर
कर्पग विनायक मंदिर ।
Karpaka Vinayakar Temple

Pillaiyar patti Pillaiyar temple (पिल्लैयारपठ्ठी पिल्लैयार) is an ancient rock-cut cave shrine dedicated to Ganesha, built in 4th century, located at Thiruppatthur (1 km from Thiruppatthur), Sivaganga district in the state of Tamil Nadu, India.

In the cave temple, there are rock cut images of Siva and other gods as well as several shrines. The Āgama texts found on stones in the temple help date the temple between the years 1091 and 1238. A unique Tamil image of Pillaiyar found in the temple helps to verify this dating. The presiding deity of the temple is Karpaka Vinayakar.   

Pillaiyarpatti is located near Thiruppathur, Sivagangai District of Tamil Nadu. It is situated between Kundrakkudi and Tiruppatthur. Pilliyarpatti is 12 Kilometers away from Thiruppatthur and 3 kilometers from Kundrakkudi. Pillaiyarpatti Karpaga Vinayagar is carved out in a cave of Pillaiyarpatti Hillocks. Lord Vinayagar is carved out from the rock of the cave. Lord Thiruveesar is also carved in the rock of this cave. The temple was built under patronisation of Pandyas. The age of the cave temple is 2500 years or more. There are 14 stone Sculptures in the cave ( dated from 500 BC to 1284 AD ). These stone sculptures state the ancient names of Pillaiyarpatti such as Ekkattoor, Thiruveenkaikkudi, Maruthangudi, and Rajanarayanapuram.

The temple opens at 6 in the morning and stays open till 1 PM. The shrine is again opened at 4PM and is open till 8.30 PM. The Vinayagar sannidhi (Sanctom Sanctorum) is a cave where the 6 feet of Karpaga Vinayagar has been carved inside. As this is a cave formation, there is no provision to go around for the pradakshina.

It was built after viewing a hillock by the early Pandya kings. The image of Pillaiyarpatti Pillaiyar and that of a Siva Lingam were carved out of a stone by a sculptor named Ekkattur Koon Peruparanan who put his signature on a stone inscription, in Tamil Language used between the 2nd and 5th century , found even today in the sanctum. It is believed that the icon of Pillaiyarpatti Pillaiyar must have been carved around the 4th century AD.

This temple is the only one in Tamil Nadu which contains a 6 feet rock-cut Pillaiyar deity. The Thumbikai (Trunk) of Lord Pillaiyar is curled towards his right side and so the God is also known as Valampuri Pillaiyar. The chettiyar community (Nagarathar - This temple is one of the nine important temples for Nagarathars) has kept the temple clean. Chettiars are the only community now whose subcastes are divided based on Sivan Temples. e.g. subcastes like Pillayarpatti, Elayatrankudi.

Vinayagar’s trunk is curved at the right side (Valampuri Vinayagar) which is also a unique feature. Lord Karpaga Vinayagar is seated facing northern side. There are deities in this temple such as goddess Karthiyayini (who arrange marriages), Nagalingam (who gifts offspring), Pasupatheeswarar (who showers all wealth). Vinayagar Chathurthi is this temple's most important festival. It is 10 days long. Kappaukkattutual and hoisting temple flag begin before 9 days. On the 9th day car festival and much celebrated decoration of sandal covering ( Santha-na-kkappu) to Pillaiyar takes place.

As of today, the Pillayarpatti Nagarathar worshipers are involved in conducting daily worship services in the temple, as well as maintaining it. People from all over the state come to the temple for the worship of Pillayar, the Lord of Wisdom. It is one of the 9 temples of the Nagarathar Chettiar community of Chettinad, Tamilnadu.

The Ganesh Chaturthi / Vinayaka Chaturthi festival, is celebrated for 10 days in a grand manner every year during the months of August and September. During that time, a large of pilgrims gather and participate in the Car Festival. Like all Shaivite temples, Pillayarpatti temple also has Lord Shiva as its presiding deity. The lord's name is Arjunapureeswarar. This temple is most famous for the rock cut Vinayagar (Ganesha) sitting majestically inside a cave.

In 1st May 2017, Kumbhabhishekham was performed for this temple.

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कामेंट्स

S.B. Yadav Aug 18, 2017
OM GAM GANPATYE NAMAH JAI SHRI GANESH JI

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🙏R.S.RANA 🙏 Mar 25, 2020

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🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🔮🔮🔮 !! माता जी !! 🔮🔮🔮 🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 🌷🔱🌷 माँ शक्ति उपासना करनेवाला पर्व चैत्र नवरात्रि का आप सभी आदरणीयो को जय माता दी 🌷🔱🌷 🔴💥🔴 माता नवदुर्गा जी की कृपा और                     आशीर्वाद आप और आपके परिवार                                 पर सदैव बना रहें 🔴💥🔴 💥🌸💥 आपका दिन भक्ति पूर्ण और मंगलमय रहें 💥🌸💥 🍁💐🍁 आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो 🍁💐🍁        💙💙💙 जय शैलपुत्री माता जी 💙💙💙          ---••○○ 🔮🔮⚜⚜⚜⚜❤❤⚜⚜⚜⚜🔮🔮 ○○••-- शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है। देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ⚜✍...देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं।ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है। मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां हासिल होती हैं। बताया जाता है कि नवरात्रों में मां दुर्गा अपने असल रुप में पृथ्‍वी पर ही रहती है। इन नौ दिनों में पूजा कर हर व्यक्ति माता दुर्गा को प्रसन्न करना चाहता है। जिसके लिए वह मां के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना और व्रत रखता है। जिससे मां की कृपा उन पर हमेशा बनी रहें। मां अपने बच्चों पर हमेशा कृपा बनाए रखती हैं क्योंकि मां अपने किसी भी बच्चे को परेशान नहीं देख सकती हैं। ⚜✍... मां शैलपुत्री व्रत कथा- एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।’ शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया। सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। 🔱✍... मां शैलपुत्री स्रोत पाठ- ...✍🔱 ⚜✍... प्रथम दुर्गा भवसागर: तारणीम। धन ऐश्वर्य दायिनीशैलपुत्री प्रणामाभ्यम। त्रिलोजननी त्वहिं परमांनद प्रदीयमान। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणामाभ्यम। चराचरेश्सवरी त्वंहि महामोह: विनाशिन। मुक्ति मुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमननाम्यहम। 💙💙💙 शुभ मंगल कामनाओ के साथ चैत्री नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनायें 💙💙💙

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JYOTI BANSAL Mar 27, 2020

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