🌼k l tiwari🌼
🌼k l tiwari🌼 May 16, 2019

🏵️🙏💜एक डोली चली🌼 एक अर्थी चली❤️🙏🌹 💮🙏🌹आँख बंद कीजिये और मन शाँत करके इस गीत को ध्यान से सुनिये क्या है इस गीत में🌸🙏🏵️

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Geeta Sharma May 16, 2019
radhe radhe ji... shubh dophar ji... prabhu kanha ji ka aashirwad aap pr hamesha bna rhe bhaiya ji... prabhu banke bihari aapko khuss rkhe bhaiya ji

Sushil Kumar Sharma May 16, 2019
Very Nice Video Prabhu Kanha ji Ka Aashirwad AAP Or Hamesha Bna The Good Afternoon Thanks Bhai ji

RAMA May 16, 2019
जय श्री राधे कृष्णा ॐ साईं राम जी🌷

veehan Chawla May 22, 2019

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Shri Radhe Krishna May 21, 2019

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Vikash Srivastava May 21, 2019

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aditi sharma May 21, 2019

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*सुख-दुःख का रहस्य* 〰️〰️🔸〰️🔸〰️〰️ एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा - प्रभु, मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही दुःखी है उसे ही और अधिक दुःख प्राप्त होता है और जो सुख में है उसे दुःख नहीं प्राप्त होता। महादेव ने इस बात को समझाने के लिए माता पार्वती को धरती पर चलने के लिए कहा और दोनों ने मनुष्य-रूप में पति-पत्नी का रूप लिया और एक गाँव के पास डेरा जमाया। शाम के समय उन्होंने माता पार्वती से कहा - हम मनुष्य रूप में यहाँ आए हैं इसलिए यहाँ के नियमों का पालन करते हुए हमें यहाँ भोजन करना होगा। इसलिए मैं भोजन-सामग्री का प्रबंध करता हूँ, तुम भोजन बनाओ। उनके जाते ही माता पार्वती रसोई में चूल्हे को बनाने के लिए बाहर से ईंटें लेने गईं और गाँव में कुछ जर्जर हो चुके मकानों से ईंटें लाकर, चूल्हा तैयार कर दिया। चूल्हा तैयार होते ही शिवजी वहाँ पर बिना कुछ लाए ही प्रकट हो गए। माता पार्वती ने उनसे कहा - आप तो कुछ लेकर नहीं आए, भोजन कैसे बनेगा? शिवजी बोले - पार्वती! अब तुम्हें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। महादेव ने माता पार्वती से पूछा - तुम चूल्हा बनाने के लिए इन ईटों कहाँ से लेकर आईं? माता पार्वती ने कहा - प्रभु, इस गाँव में बहुत से ऐसे घर भी हैं जिनका रखरखाव सही ढंग से नहीं हो रहा है। उनकी जर्जर हो चुकी दीवारों से मैं ईंटें निकालकर ले आई। महादेव ने फिर कहा - जो घर पहले से ख़राब थे तुमने उन्हें और खराब कर दिया। तुम ईंटें उन सही घरों की दीवार से भी तो ला सकती थीं!! माता पार्वती बोली - प्रभु, उन घरों में रहनेवाले लोगों ने उनका रखरखाव अच्छी तरह से किया है और वो घर सुंदर भी लग रहे हैं। ऐसे में उनकी सुंदरता को बिगाड़ना उचित नहीं होता। महादेब बोले - पार्वती, यही तुम्हारे द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर है। जिन लोगों ने अपने घर का रखरखाव अच्छी तरह से किया है यानि सही कर्मों से अपने जीवन को सुंदर बना रखा है उन लोगों को दुःख कैसे हो सकता है? *मनुष्य के जीवन में जो भी सुखी है वो अपने कर्मों के द्वारा सुखी है, और जो दु:खी है वो अपने कर्मों के द्वारा दु:खी है।* इसलिए हर एक मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे ही कर्म करने चाहिए जिनसे इतने सुदृढ़ और सुंदर भवन का निर्माण हो कि कोई उसकी एक ईंट भी निकालने न पाए। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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ramkumar verma May 22, 2019

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🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 *###########################* *बौध कथा :=* *=============* *अच्छा इंसान* *==============* एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक से उसे लगा कि, उसकी बहन पीछे रह गयी है। वह रुका, पीछे मुड़कर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है। लडका पीछे आता है और बहन से पूछता है, "कुछ चाहिये तुम्हें?" लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी। दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का प्रगल्भ व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ। अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, "सर, कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?" दुकानदार एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने जीवन के कई उतार देखे थे, उन्होने बड़े प्यार और अपनत्व से बच्चे से पूछा, "बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो ?" बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है, जो उसने थोड़ी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर बीनी थी! दुकानदार वो सब लेकर यूँ गिनता है जैसे कोई पैसे गिन रहा हो।सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,"सर कुछ कम हैं क्या?" दुकानदार : "नहीं - नहीं, ये तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा है, ज्यादा मैं वापस देता हूँ" यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी। बच्चा बड़ी खुशी से वो सीपें जेब मे रखकर बहन को साथ लेकर चला गया। यह सब उस दुकान का कामगार देख रहा था, उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा, "मालिक ! इतनी महंगी गुड़िया आपने केवल 4 सीपों के बदले मे दे दी?" दुकानदार एक स्मित संतुष्टि वाला हास्य करते हुये बोला, "हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6 साल के बच्चे के लिये अतिशय मूल्यवान है और अब इस उम्र में वो नहीं जानता, कि पैसे क्या होते हैं? पर जब वह बडा होगा ना.. और जब उसे याद आयेगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुड़िया खरीदकर दी थी। तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, और फिर वह सोचेगा कि, *"यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भी भरा हुआ है।"* *###########################* *यही बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण बढाने में मदद करेगी और वो भी एक अच्छा इंन्सान बनेगा।* 🏵जय श्री राधेकृष्णा🏵 🙏🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 *###########################*

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Anuradha Tiwari May 21, 2019

भगवान से हर पल शिकायत क्यों 🏸🏸🏸🏸🏸 एक छोटी लड़की जो गरीब परिवार से थी मंदिर में रोज प्रार्थना करने जाती थी। उसके जुते कपडे के बने थे जो थोडे फटे हुए थे। एक दिन एक धनी आदमी मंदिर प्रार्थना करने आया, उसके पास सोने की करचोटी वाले जूते थे। छोटी लड़की ने पूछा:- आप कब- कब मंदिर आते हैं। तो उसने जवाब दिया- साल में एक बार। इस पर छोटी लड़की दुःखी हुई और भगवान से शिकायत करते हुए बोली:- हे ईश्वर, रोज मंदिर मे प्रार्थना करने वाले को फटे कपड़े और जूते, और साल में जो एक बार करता है उसके पास इतने नए कपड़े और सोने के जूते। यह कैसा इंसाफ हैं आपका? वो छोटी लड़की भगवान से शिकायत कर ही रही थी की इतने में एक बिना पैर वाला आदमी घिसटता हुआ आया और भगवान प्रार्थना करने लगा। उसे देखकर छोटी लड़की का विचार बदल गया, उसने शिकायत के स्थान पर भगवान को धन्यवाद दिया और कहा:- मुझे पैर मिले हुए हैं यही क्या कम है? मित्रों इसी तरह सम्पन्न व्यक्ति से अपनी तुलना करने पर मनुष्य दुःखी होता है, किन्तु जब दुखीयों से तुलना करता है तो प्रतीत होता है कि जो मिलता है, वह भी कम नहीं हैं। एक सेठ प्रतिदिन साधु संतों को भोजन कराता था। एक बार एक नवयुवक संन्यासी उसके यहाँ भिक्षा के लिए आया। सेठ का वैभव-विलास देखकर वह खूब प्रभावित हुआ और विचारने लगाः- संत तो कहते हैं कि संसार दुःखालय है, परन्तु यहाँ इस सेठ के पास कितने सारे सोने-चाँदी के बर्तन हैं, सुख के सभी साधन हैं, यह बहुत सुखी लगता है। ऐसा मानकर उसने सेठ से पूछाः'- सेठजी आप तो बहुत सुखी लगते हैं, मैं मानता हूँ कि आपको कोई दुःख नहीं होगा। सेठजी की आँखों में से टप-टप आँसू टपकने लगे, सेठ ने जवाब दियाः- मेरे पास धन-दौलत तो बहुत है परन्तु मुझे एक भी सन्तान नहीं है, इस बात का दुःख है। संसार में गरीब हो या अमीर, प्रत्येक को कुछ न कुछ दुःख अथवा मुसीबत होती है। किसी को पत्नी से दुःख होता है तो किसी की पत्नी नहीं है इसलिए दुःख होता है। किसी को सन्तान से दुःख होता है तो किसी की सन्तान नहीं होती है इस बात का दुःख होता है। किसी को नौकरी से दुःख होता है तो किसी को नौकरी नहीं है इस बात का दुःख होता है। कोई कुटुम्ब से दुःखी होता है तो किसी का कुटुम्ब नहीं है इस बात का दुःख होता है। किसी को धन से दुःख होता है तो किसी को धन नहीं है इस बात का दुःख होता है। इस प्रकार किसी न किसी कारण से सभी दुःखी होते हैं। जो व्यक्ति इस जन्म में ज्यादा सुखी और संपन्न है तो इसका मतलब उसने पिछले जन्म मे अच्छे कर्म किए है इसलिए संपन्न है। जैसे स्कूलो मे बच्चे जैसी पढ़ाई करते है, भविष्य में परीक्षा मे वैसा रिजल्ट मिलता है। इसलिए कर्म अच्छे करो और मन को Positive करो, किसी दूसरो को नही देखो कि वह क्या करता और सोचता है। आप अपने आप को ऐसा बनाओ की दूसरे लोग आपको देखकर प्रेरणा प्राप्त करे। जय जिनेन्द्र, जय श्री राम ,🌹🌿जयति जय श्री सियाराम जी🌿🌹🙏🏻 🙏 राम राम राम राम राम राम राम राम🙏 🔱🔱🔱🔱जय श्री हनुमानजी🔱🔱🔱🔱

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