सफला एकादशी 22 दिसंबर विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पद्मपुराणमें पौषमास के कृष्णपक्ष की एकादशी के विषय में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले-बडे-बडे यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। इसलिए एकादशी-व्रत अवश्य करना चाहिए। पौषमास के कृष्णपक्ष में सफला नाम की एकादशी होती है। इस दिन भगवान नारायण की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। यह एकादशी कल्याण करने वाली है। एकादशी समस्त व्रतों में श्रेष्ठ है। व्रत विधि 〰️〰️〰️ सफलाएकादशी के दिन श्रीहरिके विभिन्न नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए फलों के द्वारा उनका पूजन करें। धूप-दीप से देवदेवेश्वरश्रीहरिकी अर्चना करें। सफला एकादशी के दिन दीप-दान जरूर करें। रात को वैष्णवों के साथ नाम-संकीर्तन करते हुए जगना चाहिए। एकादशी का रात्रि में जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता। व्रत विधान के विषय में जैसा कि श्री कृष्ण कहते हैं दशमी की तिथि को शुद्ध और सात्विक आहार एक समय लेना चाहिए. इस दिन आचरण भी सात्विक होना चाहिए. व्रत करने वाले को भोग विलास एवं काम की भावना को त्याग कर नारायण की छवि मन में बसाने हेतु प्रयत्न करना चाहिए. एकादशी तिथि के दिन प्रात: स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर माथे पर श्रीखंड चंदन अथवा गोपी चंदन लगाकर कमल अथवा वैजयन्ती फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत, धूप, दीप, सहित लक्ष्मी नारायण की पूजा एवं आरती करें. संध्या काल में अगर चाहें तो दीप दान के पश्चात फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन भगवान की पूजा के पश्चात कर्मकाण्डी ब्राह्मण को भोजन करवा कर जनेऊ एवं दक्षिणा देकर विदा करने के पश्चात भोजन करें। जो भक्त इस प्रकार सफला एकादशी का व्रत रखते हैं व रात्रि में जागरण एवं भजन कीर्तन करते हैं उन्हें श्रेष्ठ यज्ञों से जो पुण्य मिलता उससे कहीं बढ़कर फल की प्राप्ति होती है। व्रत कथा 〰️〰️〰️ एक थे राजा महिष्मति उनके पांच पुत्रों में सबसे बड़ा पुत्र बहुत ही अधर्मी था. वह सदा नीच कर्म करता था. शास्त्रों में जो भी पाप कर्म बताये गये हैं वह उन सभी मे लिप्त रहता था. धर्मात्मा राजा अपने पुत्र के स्वभाव एवं व्यवहार से अत्यंत दुखी था. पुत्र के इस नीच कर्म को देखकर राजा ने उसका नाम लुम्भक रख दिया और उसे उत्तराधिकार से वंचित कर देश त्यागने का आदेश दिया. पिता द्वारा अधिकार से वंचित किये जाने एवं देश से बाहर निकाल दिए जाने पर लुम्भक धनहीन हो गया. जीवन की रक्षा के लिए तब लुम्भक ने राज्य में चोरी करना शुरू कर दिया. एक दिन कोतवालों ने उसे चोरी करते पकड़ लिया और राजा के समक्ष ले जाने लगे तब उसने अपने आपको राजकुमार बताया जिससे सैनिकों ने लुम्भक को मुक्त कर दिया. अब लुम्भक जंगल में कंद मूल, फल एवं पशु पक्षियों के मांस पर आश्रित रहने लगा. सभाग्य से माघ महीने की कृष्ण पक्ष में दशमी तिथि को उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला और वह यूं ही सो गया लेकिन भूख के कारण उसे नींद भी नहीं आ रही थी Šৠपर से सर्दी का मसम था उसका शरीर ठंढ से अकड़ गया और वह अचेत हो गया. अगले दिन जब उसकी नींद खुली तब दिन के दो-पहर गुजर चुके थे. वह जल्दी जल्दी कंद मूल इकट्ठा करने निकल चला क्योंकि उसे लग रहा था कि अगर आज रात भी भूखा रहना पड़ा तो मृत्यु निश्चित है. कंद मूल एवं फल इकट्ठा करते हुए कैसे सांझ ढल गयी लुम्भक को पता भी नहीं चला. जब वह अपने आश्रयदाता पीपल वृक्ष के पास पहुंचा तब काफी रात हो गयी थी और वह काफी थक भी गया था. इस स्थिति में उसने इकट्ठज्ञ किये गये फलादि को पीपल की जड़ में रख कर विष्णु का नाम लेकर सो गया लेकिन ठंढ़ ने उसे इस रात भी सोने नहीं दिया. सुबह आकाशवाणी हुई कि तुमने अनजाने ही सफला एकादशी का व्रत कर लिया जिसके पुण्य से तुम राजा बनोगे और पुत्र सुख प्राप्त करोगे. इस घटना के पश्चात, जंगल के जीवन से जब लुम्भक दुर्बल होता जा रहा था तो उसके मन में आया कि क्यों न फिर से चोरी किया जाय सो वह शहर की ओर चल पड़ा. संयोग कि बात है कि वह जिस घर में प्रवेश किया उसमें एक साधु रहता था. साधु के घर में उसे कुछ भी नहीं मिला लेकिन उसकी आहट से साधु की नींद खुल गयी और उसने उसे भोजन कराया और प्यार से बातें की. साधु की बातों एवं व्यवहार से प्रभावित होकर लुम्भक साधु के साथ ही रहने लगा. साधु की संगत और संस्कार ने उसके विचार एवं व्यवहार को बदल दिया और वह सदाचारी बन गया. राजकुमार का स्वभाव जब परिवर्तित हो गया तब उस साधु ने बताया कि वह साधु और कोई नहीं उसका पिता राजा महिष्मति है. महिष्मति ने अब लुम्भक को अपना उत्तराधिकारी बनाया और वह कई वर्षो तक धर्मानुसार शासन करता हुआ एक दिन अपने पुत्र को राज्य संप कर सन्यास ग्रहण कर श्री हरि की भक्ति में लीन हो गया और मृत्यु पश्चात मोक्ष को प्राप्त हुआ। भगवान् नारायण आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ \ जय .. जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका। सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ \ जय .. मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ \ जय .. तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ \ जय .. तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ \ जय .. तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमती॥ \ जय .. दीनबन्धु, दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पडा तेरे॥ \ जय .. विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढाओ, संतन की सेवा॥ \ जय .. जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे। मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥ जय.. आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी। अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशि॥ जय.. अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी। सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥ जय.. विधि-हरि-शंकर-गणपति-सूर्य-शक्तिरूपा। विश्व चराचर तुम ही, तुम ही विश्वभूपा॥ जय.. माता-पिता-पितामह-स्वामि-सुहृद्-भर्ता। विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥ जय.. साक्षी, शरण, सखा, प्रिय प्रियतम, पूर्ण प्रभो। केवल-काल कलानिधि, कालातीत, विभो॥ जय.. राम-कृष्ण करुणामय, प्रेमामृत-सागर। मन-मोहन मुरलीधर नित-नव नटनागर॥ जय.. सब विधि-हीन, मलिन-मति, हम अति पातकि-जन। प्रभुपद-विमुख अभागी, कलि-कलुषित तन मन॥ जय.. आश्रय-दान दयार्णव! हम सबको दीजै। पाप-ताप हर हरि! सब, निज-जन कर लीजै॥ जय.. 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

सफला एकादशी 22 दिसंबर विशेष
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पद्मपुराणमें पौषमास के कृष्णपक्ष की एकादशी के विषय में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले-बडे-बडे यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। इसलिए एकादशी-व्रत अवश्य करना चाहिए। पौषमास के कृष्णपक्ष में सफला नाम की एकादशी होती है। इस दिन भगवान नारायण की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। यह एकादशी कल्याण करने वाली है। एकादशी समस्त व्रतों में श्रेष्ठ है।

व्रत विधि
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सफलाएकादशी के दिन श्रीहरिके विभिन्न नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए फलों के द्वारा उनका पूजन करें। धूप-दीप से देवदेवेश्वरश्रीहरिकी अर्चना करें। सफला एकादशी के दिन दीप-दान जरूर करें। रात को वैष्णवों के साथ नाम-संकीर्तन करते हुए जगना चाहिए। एकादशी का रात्रि में जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता।

व्रत विधान के विषय में जैसा कि श्री कृष्ण कहते हैं दशमी की तिथि को शुद्ध और सात्विक आहार एक समय लेना चाहिए. इस दिन आचरण भी सात्विक होना चाहिए. व्रत करने वाले को भोग विलास एवं काम की भावना को त्याग कर नारायण की छवि मन में बसाने हेतु प्रयत्न करना चाहिए. एकादशी तिथि के दिन प्रात: स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर माथे पर श्रीखंड चंदन अथवा गोपी चंदन लगाकर कमल अथवा वैजयन्ती फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत, धूप, दीप, सहित लक्ष्मी नारायण की पूजा एवं आरती करें. संध्या काल में अगर चाहें तो दीप दान के पश्चात फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन भगवान की पूजा के पश्चात कर्मकाण्डी ब्राह्मण को भोजन करवा कर जनेऊ एवं दक्षिणा देकर विदा करने के पश्चात भोजन करें।
जो भक्त इस प्रकार सफला एकादशी का व्रत रखते हैं व रात्रि में जागरण एवं भजन कीर्तन करते हैं उन्हें श्रेष्ठ यज्ञों से जो पुण्य मिलता उससे कहीं बढ़कर फल की प्राप्ति होती है।

व्रत कथा
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एक थे राजा महिष्मति उनके पांच पुत्रों में सबसे बड़ा पुत्र बहुत ही अधर्मी था. वह सदा नीच कर्म करता था. शास्त्रों में जो भी पाप कर्म बताये गये हैं वह उन सभी मे लिप्त रहता था. धर्मात्मा राजा अपने पुत्र के स्वभाव एवं व्यवहार से अत्यंत दुखी था. पुत्र के इस नीच कर्म को देखकर राजा ने उसका नाम लुम्भक रख दिया और उसे उत्तराधिकार से वंचित कर देश त्यागने का आदेश दिया.

पिता द्वारा अधिकार से वंचित किये जाने एवं देश से बाहर निकाल दिए जाने पर लुम्भक धनहीन हो गया. जीवन की रक्षा के लिए तब लुम्भक ने राज्य में चोरी करना शुरू कर दिया. एक दिन कोतवालों ने उसे चोरी करते पकड़ लिया और राजा के समक्ष ले जाने लगे तब उसने अपने आपको राजकुमार बताया जिससे सैनिकों ने लुम्भक को मुक्त कर दिया. अब लुम्भक जंगल में कंद मूल, फल एवं पशु पक्षियों के मांस पर आश्रित रहने लगा.

सभाग्य से माघ महीने की कृष्ण पक्ष में दशमी तिथि को उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला और वह यूं ही सो गया लेकिन भूख के कारण उसे नींद भी नहीं आ रही थी Šৠपर से सर्दी का मसम था उसका शरीर ठंढ से अकड़ गया और वह अचेत हो गया. अगले दिन जब उसकी नींद खुली तब दिन के दो-पहर गुजर चुके थे. वह जल्दी जल्दी कंद मूल इकट्ठा करने निकल चला क्योंकि उसे लग रहा था कि अगर आज रात भी भूखा रहना पड़ा तो मृत्यु निश्चित है.

कंद मूल एवं फल इकट्ठा करते हुए कैसे सांझ ढल गयी लुम्भक को पता भी नहीं चला. जब वह अपने आश्रयदाता पीपल वृक्ष के पास पहुंचा तब काफी रात हो गयी थी और वह काफी थक भी गया था. इस स्थिति में उसने इकट्ठज्ञ किये गये फलादि को पीपल की जड़ में रख कर विष्णु का नाम लेकर सो गया लेकिन ठंढ़ ने उसे इस रात भी सोने नहीं दिया. सुबह आकाशवाणी हुई कि तुमने अनजाने ही सफला एकादशी का व्रत कर लिया जिसके पुण्य से तुम राजा बनोगे और पुत्र सुख प्राप्त करोगे.

इस घटना के पश्चात, जंगल के जीवन से जब लुम्भक दुर्बल होता जा रहा था तो उसके मन में आया कि क्यों न फिर से चोरी किया जाय सो वह शहर की ओर चल पड़ा. संयोग कि बात है कि वह जिस घर में प्रवेश किया उसमें एक साधु रहता था. साधु के घर में उसे कुछ भी नहीं मिला लेकिन उसकी आहट से साधु की नींद खुल गयी और उसने उसे भोजन कराया और प्यार से बातें की.

साधु की बातों एवं व्यवहार से प्रभावित होकर लुम्भक साधु के साथ ही रहने लगा. साधु की संगत और संस्कार ने उसके विचार एवं व्यवहार को बदल दिया और वह सदाचारी बन गया. राजकुमार का स्वभाव जब परिवर्तित हो गया तब उस साधु ने बताया कि वह साधु और कोई नहीं उसका पिता राजा महिष्मति है.

महिष्मति ने अब लुम्भक को अपना उत्तराधिकारी बनाया और वह कई वर्षो तक धर्मानुसार शासन करता हुआ एक दिन अपने पुत्र को राज्य संप कर सन्यास ग्रहण कर श्री हरि की भक्ति में लीन हो गया और मृत्यु पश्चात मोक्ष को प्राप्त हुआ।

भगवान् नारायण आरती
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ \ जय ..
जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका।
सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ \ जय ..
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ \ जय ..
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ \ जय ..
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ \ जय ..
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमती॥ \ जय ..
दीनबन्धु, दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पडा तेरे॥ \ जय ..
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढाओ, संतन की सेवा॥ \ जय ..
जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥ जय..
आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशि॥ जय..
अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी।
सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥ जय..
विधि-हरि-शंकर-गणपति-सूर्य-शक्तिरूपा।
विश्व चराचर तुम ही, तुम ही विश्वभूपा॥ जय..
माता-पिता-पितामह-स्वामि-सुहृद्-भर्ता।
विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥ जय.. 
साक्षी, शरण, सखा, प्रिय प्रियतम, पूर्ण प्रभो।
केवल-काल कलानिधि, कालातीत, विभो॥ जय..
राम-कृष्ण करुणामय, प्रेमामृत-सागर।
मन-मोहन मुरलीधर नित-नव नटनागर॥ जय..
सब विधि-हीन, मलिन-मति, हम अति पातकि-जन।
प्रभुपद-विमुख अभागी, कलि-कलुषित तन मन॥ जय..
आश्रय-दान दयार्णव! हम सबको दीजै।
पाप-ताप हर हरि! सब, निज-जन कर लीजै॥ जय..
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कामेंट्स

omprakash Shah Dec 22, 2019
jai siree hari jai siree hari jai siree Krishna jai maa good morning

Jitendra Dybey Dec 22, 2019
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः सुप्रभात जी जय श्री सीताराम जी🙏🙏🙏

KAPIL DEV Dec 22, 2019
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः

matalalratod Dec 22, 2019
ओम सूर्याय नमः जय माता दी जय श्री कृष्णा राधे राधे सुप्रभात गुड मॉर्निंग

🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *🚩🅿Jai Shree Ganesh🅿🚩* 🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺 🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏 *********ll जय श्री राधे ll********* 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 26/01/2020,रविवार* द्वितीया, शुक्ल पक्ष माघ """"""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि --------द्वितीया 30:14:58 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र ---------धनिष्ठा 30:47:42 योग --------व्यतापता 26:23:19 करण ----------बालव 17:19:50 करण ---------कौलव 30:14:58 वार -------------------------रविवार माह ---------------------------- माघ चन्द्र राशि -----मकर 17:38:17 चन्द्र राशि --------------------कुम्भ सूर्य राशि --------------------- मकर रितु --------------------------शिशिर आयन --------------------उत्तरायण संवत्सर -------------------- विकारी संवत्सर (उत्तर) ----------परिधावी विक्रम संवत ----------------2076 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत -----------------1941 वृन्दावन सूर्योदय -----------------07:10:00 सूर्यास्त -----------------17:53:31 दिन काल ---------------10:43:30 रात्री काल -------------13:16:07 चंद्रास्त -----------------19:15:55 चंद्रोदय -----------------31:29:12 लग्न ----मकर 11°25' , 281°25' सूर्य नक्षत्र -------------------श्रवण चन्द्र नक्षत्र ------------------धनिष्ठा नक्षत्र पाया ---------------------ताम्र *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* गा ----धनिष्ठा 11:05:41 गी ----धनिष्ठा 17:38:17 गु ----धनिष्ठा 24:12:18 गे ----धनिष्ठा 30:47:42 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================= सूर्य=मकर 11°22 ' श्रवण, 1 खी चन्द्र =मकर 24°23 ' धनिष्ठा' 1 गा बुध = मकर 21°10 ' श्रवण' 4 खो शुक्र= कुम्भ 20°55, पू o भा o ' 1 से मंगल=वृश्चिक 21°30' ज्येष्ठा ' 2 या गुरु=धनु 18°50 ' पू oषाo , 2 धा शनि=धनु 26°43' उ oषा o ' 1 भे राहू=मिथुन 12 °52 ' आर्द्रा , 2 घ केतु=धनु 12 ° 52 ' मूल , 4 भी *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 16:33 - 17:54 अशुभ यम घंटा 12:32 - 13:52 अशुभ गुली काल 15:13 - 16:33 अशुभ अभिजित 12:10 -12:53 शुभ दूर मुहूर्त 16:28 - 17:11 अशुभ 🚩पंचक 17:38 - अहोरात्र अशुभ 💮चोघडिया, दिन उद्वेग 07:10 - 08:30 अशुभ चर 08:30 - 09:51 शुभ लाभ 09:51 - 11:11 शुभ अमृत 11:11 - 12:32 शुभ काल 12:32 - 13:52 अशुभ शुभ 13:52 - 15:13 शुभ रोग 15:13 - 16:33 अशुभ उद्वेग 16:33 - 17:54 अशुभ 🚩चोघडिया, रात शुभ 17:54 - 19:33 शुभ अमृत 19:33 - 21:13 शुभ चर 21:13 - 22:52 शुभ रोग 22:52 - 24:32* अशुभ काल 24:32* - 26:11* अशुभ लाभ 26:11* - 27:51* शुभ उद्वेग 27:51* - 29:30* अशुभ शुभ 29:30* - 31:10* शुभ 💮होरा, दिन सूर्य 07:10 - 08:04 शुक्र 08:04 - 08:57 बुध 08:57 - 09:51 चन्द्र 09:51 - 10:45 शनि 10:45 - 11:38 बृहस्पति 11:38 - 12:32 मंगल 12:32 - 13:25 सूर्य 13:25 - 14:19 शुक्र 14:19 - 15:13 बुध 15:13 - 16:06 चन्द्र 16:06 - 16:59 शनि 16:59 - 17:54 🚩होरा, रात बृहस्पति 17:54 - 18:59 मंगल 18:59 - 20:06 सूर्य 20:06 - 21:13 शुक्र 21:13 - 22:19 बुध 22:19 - 23:25 चन्द्र 23:25 - 24:32 शनि 24:32* - 25:38 बृहस्पति 25:38* - 26:44 मंगल 26:44* - 27:51 सूर्य 27:51* - 28:57 शुक्र 28:57* - 30:03 बुध 30:03* - 31:10 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पश्चिम* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 2 + 1 + 1 = 4 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष गौरि सन्निधौ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * मोहन का भोग ,टोपा,दुशाला धारण राधाबल्लभ जी वृन्दावन * 71 वॉ गणतंत्र दिवस *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* अहो वत ! विचित्राणि चरितानि महात्मनाम् । लक्ष्मी तृणाय मन्यन्ते तद्भारेण नमन्ति च ।। ।चा o नी o।। देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: श्रद्धात्रयविभागयोग अo-17 तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपः क्रियाः।, प्रवर्तन्ते विधानोक्तः सततं ब्रह्मवादिनाम्‌॥, इसलिए वेद-मन्त्रों का उच्चारण करने वाले श्रेष्ठ पुरुषों की शास्त्र विधि से नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ॐ' इस परमात्मा के नाम को उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं॥,24॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार फायदेमंद रहेगा। घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। किसी के व्यवहार से हृदय को ठेस पहुंच सकती है। ऐश्वर्य के साधन प्राप्त होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🐂वृष बनते कामों में अवरोध उत्पन्न होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। आय बनी रहेगी। दूसरों पर भरोसा न करें। जोखिम न उठाएं। 👫मिथुन व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने की योजना बनेगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। लेनदारी वसूल करने के प्रयास सफल रहेंगे। घर-परिवार की चिंता रहेगी। भाग्य का भरपूर साथ प्राप्त होगा। आय बनी रहेगी। विवाद से बचें। 🦀कर्क किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा काम करने का मन बन सकता है। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। थकान महसूस होगी। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। 🐅सिंह चोट व रोग से बाधा संभव है। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। समाज में मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। सुख के साधन प्राप्त होंगे। लभा के अवसर हाथ आएंगे। लेन-देन में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🙎कन्या तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। अध्यात्म में रुचि बढ़ेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। विरोध होगा। स्वास्थ्य पर खर्च हो सकता है। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। वस्तुएं संभालकर रखें। ⚖तुला रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। परिवार तथा नजदीकी लोगों के साथ मनोरंजन का समय मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। जल्दबाजी से बचें। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आलस्य हावी रहेगा। 🦂वृश्चिक विवाद से क्लेश संभव है। बुरी खबर मिल सकती है। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आय में कमी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अपेक्षित कार्य समय पर न होने से तनाव रहेगा। खर्च की अधिकता रहेगी। आर्थिक नुकसान हो सकता है। 🏹धनु मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्र व संबंधियों का सहयोग मिलेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी बड़ी बाधा का निवारण होगा। काम समय पर पूर्ण होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। 🐊मकर शोक समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। पारिवारिक उलझनें बढ़ सकती हैं। किसी अपने का व्यवहार दिल को ठेस पहुंचा सकता है। दौड़धूप अधिक रहेगी। किसी बड़े निर्णय को लेने में जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। धैर्य रखें। लाभ होगा। 🍯कुंभ सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मेहनत का फल मिलेगा। पार्टनरों से सहयोग प्राप्त होगा। कार्यसिद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। कोई बड़ा काम करने की हिम्मत जुटा पाएंगे। बाहर जाने की योजना बनेगी। व्यवसाय में लाभ होगा। जल्दबाजी से बचें। 🐟मीन व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर में मेहमानों का आगमन होगा। उन पर स्वागत-सत्कार में व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। कार्यवृद्धि की योजना बनेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। पार्टनरों में मतभेद हो सकता है। संयम बनाए रखें। *🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏* 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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vishal Patel Jan 26, 2020

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