Shuchi Singhal
Shuchi Singhal Dec 18, 2020

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Shuchi Singhal Dec 18, 2020
@renusingh15 Jai Shri Krishna Radhe Radhe Good Afternoon my dear sister ji Aap sda khus rhe pyari Bhena ji🙏🌹🙏🌹🙏🌹

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🌺*एक राजा था। उसे पक्षी पालने का बड़ा शौक था। उसने एक सुंदर चकोर पक्षी को पाला। एक बार की बात है, राजा वन में शिकार के लिए गया। वहां राजा रास्ता भटक गया। उसे बहुत प्यास लगी। राजा को दूर चट्टान से पानी रिसता दिखाई दिया। राजा ने उस रिसते हुए पानी के नीचे एक प्याला रख दिया। चकोर पक्षी भी राजा के साथ था। जब प्याला पानी से भरने वाला था, चकोर पक्षी ने अपने पंखों से उस प्याले को गिरा दिया। राजा को गुस्सा आया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। राजा ने फिर से प्याले को चट्टान से रिसते पानी के नीचे रखा। इस बार भी जब पहले बार की तरह प्याला भरने वाला था। चकोर पक्षी ने पंख से प्याला गिरा दिया। राजा ने उस सुंदर चकोर पक्षी को पकड़कर गुस्से में उसकी गरदन मरोड़ दी। चकोर स्वर्ग चला गया। राजा प्यासा था। राजा ने इस बार थोड़ी ऊंचाई पर प्याला पानी भरने के लिए रखने वाली ही था कि राजा ने देखा एक मरा हुआ सांप चट्टान पर पड़ा है। जहरीले सांप के मुंह से रिसता पानी नीचे आ रहा था जिससे वह अपने प्याला भर रहा था। सुंदर चकोर पक्षी को यह बात मालूम थी इसलिए उसने राजा को वह पानी नहीं पीने दिया। राजा को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ।🌺 🙏🙏#शिक्षा - क्रोध अग्नि की तरह होता है। उसका फल मनुष्य को भुगतना पड़ता है। अतः क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए मनुष्य को सही स्थिति का आकलन करना चाहिए। ताकि बाद मे पछताना न पड़े !!🙏🙏 🙏🙏जय श्री कृष्णा *🙏🙏 💠☘💠☘💠☘💠☘💠☘ 🌑💕🐾🌑💕🐾🌑💕🐾🌑 🌑💕🐾🌑💕🐾🌑💕🐾🌑 “`🌹🌻꧁🙏 Զเधॆ Զเधॆ🙏꧂༻```🌻🌹“` 💠☘💠☘💠☘💠☘💠☘ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Neeta Trivedi Apr 10, 2021

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kamlesh Goyal Apr 12, 2021

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प्रेम से बड़ कर कुछ नहीं _*एक दिन एक औरत अपने घर के बाहर आई और उसने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा* –_ _*“कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”*_ _*संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”*_ _*औरत ने कहा – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”*_ _*संत बोले – “हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।”*_ _*शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।*_ _*औरत के पति ने कहा –*_ _*“जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”*_ _*औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के लिए कहा।*_ _*संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।”*_ _*“पर क्यों?” – औरत ने पूछा।*_ _*उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है” फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम*_ _*सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”*_ _*औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब बताया। उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और बोला –*_ “ _*यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित करना चाहिए। हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।”*_ _*लेकिन उसकी पत्नी ने कहा – “मुझे लगता है कि हमें सफलता को आमंत्रित करना चाहिए।”*_ _*उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी। वह उनके पास आई और बोली –*_ “ _*मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”*_ _*“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम को ही बुलाना चाहिए” –*_ _*उसके माता-पिता ने कहा।*_ _*औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा*_ – _*“आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”*_ _*प्रेम घर की ओर बढ़ चले। बाकी के दो संत भी उनके पीछे चलने लगे।*_ _*औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा – “मैंने तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग भीतर क्यों जा रहे हैं?”*_ *उनमें से एक ने कहा _– “यदि आपने धन और सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता तो केवल वही*_ _*भीतर जाता। आपने प्रेम को आमंत्रित किया है। प्रेम कभी अकेला नहीं जाता। प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता उसके पीछे जाते हैं।*_ 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 जय श्री कृष्णा जय जगन्नाथ

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*तपोधन : -* एक सेठ के एक इकलौता पुत्र था पर छोटी सी उम्र मे ही गलत संगत के कारण राह भटक गया! परेशान सेठ को कुछ नही सूझ रहा था तो वो ईश्वर के मन्दिर मे गया और ईश दर्शन के बाद पुजारी जी को अपनी समस्या बताई ! पुजारी जी ने कहा की आप कुछ दिन उसे मन्दिर मे भेजना। कोशिश पुरी करेंगे की आपकी समस्या का समाधान हो। आगे जैसी सद्गुरु देव और श्री हरि की ईच्छा ! सेठ ने पुत्र से कहा की तुम्हे कुछ दिनो तक मन्दिर जाना है नही तो तुम्हे सम्पति से बेदखल कर दिया जायेगा। घर से मन्दिर की दूरी ज्यादा थी और सेठ उसे किराये के गिनती के पैसे देते थे। अब वो एक तरह से बंदिश मे आ गया। मंदिर के वहाँ एक वृद्ध बैठा रहता था और एक अजीब सा दर्द उसके चेहरे पर था और रोज वो बालक उस वृद्ध को देखता और एक दिन मन्दिर के वहाँ बैठे उस वृद्ध को देखा तो उसे मस्ती सूझी और वो वृद्ध के पास जाकर हँसने लगा और उसने वृद्ध से पुछा *"हॆ वृद्ध पुरुष तुम यहाँ ऐसे क्यों बैठे रहते हो लगता है बहुत दर्द भरी दास्तान है तुम्हारी और व्यंग्यात्मक तरीके से कहा शायद बड़ी भूलें की है जिंदगी मे?"* उस वृद्ध ने जो कहा उसके बाद उस बालक का पूरा जीवन बदल गया। उस वृद्ध ने कहा *"हाँ बेटा हँस लो आज तुम्हारा समय है पर याद रखना की जब समय बदलेगा तो एक दिन कोई ऐसे ही तुम पर हँसेगा। सुनो बेटा मैं भी खुब दौड़ा मेरे चार चार बेटे है और उन्हे जिंदगी मे इस लायक बनाया की आज वो बहुत ऊँचाई पर है और इतनी ऊँचाई पर है वो की आज मैं उन्हे दिखाई नही देता हुं। और मेरी सबसे बड़ी भुल ये रही की मैंने अपने बारे मे कुछ भी न सोचा। अपने इन अंतिम दिनो के लिये कुछ धन अपने लिये बचाकर न रखा इसलिये आज मैं एक पराधीनता का जीवन जी रहा हुं! पर मुझे तो अब इस मुरलीधर ने सम्भाल लिया की यहाँ तो पराधीन हुआ हुं कही आगे जाकर पराधीन न हो जाऊँ।"* बालक को उन शब्दो ने झकझोर कर रख दिया! बालक - *"मैंने जो अपराध किया है उसके लिये मुझे क्षमा करना हॆ देव! पर हॆ देव आपने कहा की आगे जाकर पराधीन न रहूँ ये मेरी कुछ समझ मे न आया?"* वृद्ध - *"हॆ वत्स यदि तुम्हारी जानने की ईच्छा है तो बिल्कुल सावधान होकर सुनना अनन्त यात्रा का एक पड़ाव मात्र है ये मानवदेह और पराधीनता से बड़ा कोई अभिशाप नही है और आत्मनिर्भरता से बड़ा कोई वरदान नही है! अभिशाप की जिन्दगी से मुप्ति पाने के लिये कुछ न कुछ जरूर करते रहना चाहिए। धन शरीर के लिये तो तपोधन आत्मा के लिये बहुत जरूरी है।"* *"नियमित साधना से तपोधन जोडिये। आगे की यात्रा मे बड़ा काम आयेगा। क्योंकि जब तुम्हारा अंतिम समय आयेगा यदि देह का अंतिम समय है तो धन बड़ा सहायक होगा और देह समाप्त हो जायेगी तो फिर आगे की यात्रा शुरू हो जायेगी और वहाँ तपोधन बड़ा काम आयेगा।"* *"और हाँ एक बात अच्छी तरह से याद रखना की धन तो केवल यहाँ काम आयेगा पर तपोधन यहाँ भी काम आयेगा और वहाँ भी काम आयेगा।"*

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ritu saini Apr 10, 2021

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