aaurved.

+12 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 121 शेयर
umesh bhardwaj Jan 22, 2021

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 10 शेयर

हरड़ के स्वास्थ्य लाभ 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं। इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं। इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है। आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं। वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं। ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं, यह अति उपयोगी है। हरड़ के लाभ 🔹🔹🔹🔹 १- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है। २- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं, इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं। ३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें, रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है। ४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें। एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं। ५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है। ६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है। ७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 24 शेयर

बुद्धिवर्धक देसी जड़ी बूटी शंखपुष्पी 🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷 आयुर्वेद में हर तरह के रोगों व विकारों का रामबाण इलाज यथासंभव है यह ऐलोपैथिक डॉक्टरों ने भी माना है। आयुर्वेद में वर्णित महत्वपूर्ण औषधि शंखपुष्पी वानस्पतिक नाम स्मरणशक्ति को बढ़ाकर मानसिक रोगों व मानसिक दौर्बल्यता को नष्ट करती है। इसके फूलों की आकृति शंख की भांति होने के कारण इसे शंखपुष्पी कहा गया है। इसे लैटिन में प्लेडेरा डेकूसेटा के नाम से जाना जाता है। शंखपुष्पी को स्मृतिसुधा भी कहते हैं यह एक तरह की घास होती है जो गर्मियों में अधिक फैलती है। शंखपुष्पी का पौधा हिन्दुस्तान के जंगलों में पथरीली जमीन पर पाया जाता है। शंखपुष्पी का पौधा लगभग 1 फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 4 सेंटीमीटर लम्बी, 3 शिराओं वाली होती है, जिसको मलने पर मूली के पत्तों जैसी गंध निकलती है। शंखपुष्पी की शाखाएं और तना पतली, सफेद रोमों से युक्त होती है। पुष्पभेद से शंखपुष्पी की 3 जातियां लाल, सफेद और नीले रंग के फूलों वाली पाई जाती है। लेकिन सफेद फूल वाली शंखपुष्पी ही औषधि प्रयोग के लिए उत्तम मानी जाती है। इसमें कनेर के फूलों से मिलती-जुलती खुशबू वाले 1-2 फूल सफेद या हल्के गुलाबी रंग के लगते हैं। फल छोटे, गोल, चिकने, चमकदार भूरे रंग के लगते हैं, जिनमें भूरे या काले रंग के बीज निकलते हैं। जड़ उंगलीजैसी मोटी, चौड़ी और संकरी लगभग 1 इंच होती है। शंखपुष्पी को संस्कृत में क्षीरपुष्पी, मांगल्य कुसुमा, शंखपुष्पी, हिंदी में शंखाहुली, मराठी में शंखावड़ी, बंगाली में डाकुनी या शंखाहुली गुजराती में शंखावली और लैटिन में प्लेडेरा डेकूसेटा कहते है। देसी जड़ी बूटी शंखपुष्पी गुण : 🍃🍃 यह एक तरह की घास होती है जो गर्मियों में अधिक फैलती है। शंखपुष्पी की जड़ को अच्छी तरह से धोकर, पत्ते, डंठल, फूल, सबको पीसकर, पानी में घोलकर, मिश्री मिलाकर, छानकर पीने से दिमाग में ताजगी और स्फूर्ति आती है। शंखपुष्पी का पौधा हिन्दुस्तान के जंगलों में पथरीली जमीन पर पाया जाता है। शंखपुष्पी का पौधा लगभग 1 फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 4 सेंटीमीटर लम्बी, 3 शिराओं वाली होती है, जिसको मलने पर मूली के पत्तों जैसी गंध निकलती है। शंखपुष्पी की शाखाएं और तना पतली, सफेद रोमों से युक्त होती है। पुष्पभेद से शंखपुष्पी की 3 जातियां लाल, सफेद और नीले रंग के फूलों वाली पाई जाती है। लेकिन सफेद फूल वाली शंखपुष्पी ही औषधि प्रयोग के लिए उत्तम मानी जाती है। गुण : आयुर्वेद के अनुसार : शंखपुष्पी तीखी रसवाली, चिकनी, विपाक में मीठी, स्वभाव में ठंडी, वात, पित और कफ को नाश करती है, यह चेहरे की चमक, बुद्धि, शक्तिवर्धक, याददाश्त को शक्ति बढ़ाने वाली, तेजवर्द्धक, मस्तिष्क के दोष खत्म करने वाली होती है। यह हिस्टीरिया, नींद नही आना, याददाश्त की कमी, पागलपन, मिर्गी, दस्तावर, पेट के कीड़े को खत्म करता है। शंखपुष्पी कुष्ठ रोग, विषहर, मानसिक रोग, शुक्रमेह, हाई बल्डप्रेशर, बिस्तर पर पेशाब करने की आदत में गुणकारी है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में- शंखपुष्पी का रस बलवान होता है। नाड़ियों को ताकत देने, याददाश्त बढ़ाने, मस्तिष्क की क्रियाशीलता बढ़ाने, पागलपन, मिर्गी, शंका और नींद दूर करने की यह एक अच्छी औषधि है। आयुर्वेद के अनुसार : शंखपुष्पी तीखी रसवाली, चिकनी, विपाक में मीठी, स्वभाव में ठंडी, वात, पित और कफ को नाश करती है, यह चेहरे की चमक, बुद्धि, शक्तिवर्धक, याददाश्त को शक्ति बढ़ाने वाली, तेजवर्द्धक, मस्तिष्क के दोष खत्म करने वाली होती है। यह हिस्टीरिया , नींद नही आना ,याददाश्त की कमी, पागलपन, मिर्गी , दस्तावर, पेट के कीड़े को खत्म करता है। शंखपुष्पी कुष्ठ रोग , विषहर, मानसिक रोग , शुक्रमेह, हाई बल्डप्रेशर , बिस्तर पर पेशाब करने की आदत में गुणकारी है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में- शंखपुष्पी का रस बलवान माना गया है। यह नाड़ियों को ताकत देने, याददाश्त बढ़ाने, मस्तिष्क की क्रियाशीलता बढ़ाने, पागलपन, मिर्गी, शंका और नींद दूर करने की यह एक अच्छी औषधि है। वैज्ञानिकों के अनुसार : शंखपुष्पी की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसका सक्रिय तत्त्व एक स्फटिकीय एल्केलाइड शंखपुष्पी होता है। इसके अतिरिक्त इसमें एक एशेंसियल ऑइल भी पाया जाता है। दिमागी शक्ति को बढ़ाने वाले उत्तम रसायनों में शंखपुष्पी को उत्तम माना जाता है। दिमागी काम करने वालों के लिए यह एक उत्तम टानिक है। मानसिक उत्तेजनाओं, तनावों को शांत करने में यह मददगार साबित हुई है। शुद्धता की पहचान करना 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 श्वेत, रक्त एवं नील तीनों प्रकार के पौधों की ही मिलावट होती है । शंखपुष्पी नाम से श्वेत, पुष्प ही ग्रहण किए जाने चाहिए । नील पुष्पी नामक (कन्वांल्व्यूलस एल्सिनाइड्स) क्षुपों को भी शंखपुष्पी नाम से ग्रहणकिया जाता है जो कि त्रुटिपूर्ण है । इसके क्षुप छोटे क्रीपिंग होते हैं । मूल के ऊपर से 4 से 15 इंच लंबी अनेकों शाखाएँ निकली फैली रहती हैं । पुष्प नीले होते हैं तथा दो या तीन की संख्या में पुष्प दण्डों पर स्थित होते हैं । इसी प्रकार शंखाहुली, कालमेध (कैसकोरा डेकुसेटा) से भी इसे अलग पहचाना जाना चाहिए । अक्सर पंसारियों के पास इसकी मिलावट वाली शंखपुष्पी बहुत मिलती है । फूल तो इसके भी सफेद होते हैं पर पौधे की ऊँचाई, फैलने का क्रम, पत्तियों की व्यवस्था अलग होतीत है । नीचे पत्तियाँ लम्बी व ऊपर की छोटी होती हैं । गुण धर्म की दृष्टि से यह कुछ तो शंखपुष्पी से मिलती है पर सभी गुण इसमें नहीं होते । प्रभावी सामर्थ्य भी क्षीण अल्पकालीन होती है। संग्रह तथा संरक्षण एवं कालावधि 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 छाया में सुखाए गए पंचांग को मुखंबद डिब्बों में सूखे शीतल स्थानों में रखते हैं । यह सूखी औषधि चूर्ण रूप में या ताजे स्वरस कल्क के रूप में प्रयुक्त हो सकती है । यदि संभाल कर रखी जाए तो 1 साल तक खराब नहीं होती। शंखपुष्पी से विभिन्न रोगों में उपचार उच्च रक्तचाप : शंखपुष्पी के पंचांग का काढ़ा 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करते रहने से कुछ ही दिनों में उच्चरक्तचाप में लाभ मिलता है। थायराइड-ग्रंथि के स्राव से उत्पन्न दुष्प्रभाव : शंखपुष्पी के पंचांग का चूर्ण बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से धड़कन बढ़ने, कंपन, घबराहट, अनिंद्रा (नींद ना आना) में लाभ होगा। गला बैठने पर : शंखपुष्पी के पत्तों को चबाकर उसका रस चूसने से बैठा हुआ गला ठीक होकर आवाज साफ निकलती है। बवासीर : 1 चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण प्रतिदिन 3 बार पानी के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से बवासीर का रोग ठीक हो जाता है। केशवर्द्धन हेतु : शंखपुष्पी को पकाकर तेल बनाकर प्रतिदिन बालों मे लगाने से बाल बढ़ जाते हैं। हिस्टीरिया : 100 ग्राम शंखपुष्पी, 50 ग्राम वच और 50 ग्राम ब्राह्मी को मिलाकर पीस लें। इसे 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ रोज 3 बार कुछ हफ्ते तक लेने से हिस्टीरिया रोग में लाभ होता है। कब्ज के लिए : 10 से 20 मिलीलीटर शंखपुष्पी के रस को लेने से शौच साफ आती हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम को 3 से 6 ग्राम शंखपुष्पी की जड़ का सेवन करने से कब्ज (पेट की गैस) दूर हो जाती है। कमजोरी : 10 से 20 मिलीलीटर शंखपुष्पी का रस सुबह-शाम सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। पागलपन : ताजा शंखपुष्पी के 20 मिलीलीटर पंचांग का रस 4 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से पागलपन का रोग बहुत कम हो जाता है। बुखार में बड़बड़ाना :शंखपुष्पी के पंचांग का चूर्ण और मिश्री को मिलाकर पीस लें। इसे 1-1 चम्मच की मात्रा में पानी से प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से तेज बुखार के कारण बिगड़ा मानसिक संतुलन ठीक हो जाता है। बिस्तर में पेशाब करने की आदत : शहद में शंखपुष्पी के पंचांग का आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर आधे कप दूध से सुबह-शाम प्रतिदिन 6 से 8 सप्ताह तक बच्चों को पिलाने से बच्चों की बिस्तर पर पेशाब करने की आदत छूट जाती है। मिर्गी में :ताजा शंखपुष्पी के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ते) का रस 4 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करने से कुछ महीनों में मिर्गी का रोग दूर हो जाता है। शुक्रमेह में : आधा चम्मच काली मिर्च और शंखपुष्पी का पंचांग का 1 चम्मच चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ कुछ सप्ताह सेवन करने से शुक्रमेह का रोग खत्म हो जाता है। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए : 200 ग्राम शंखपुष्पी के पंचांग के चूर्ण में इतनी ही मात्रा में मिश्री और 30 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम प्रतिदिन 1 कप दूध के साथ सेवन करते रहने से स्मरण शक्ति (दिमागी ताकत) बढ़ जाती है। शंखपुष्पी का शर्बत घर पर कैसे बनाए सर्वप्रथम 250 ग्राम सुखी साबुत या पीसी हुई शंखपुष्पी ले और जिन्हें कब्ज हो वह 150 ग्राम शंखपुष्पी +100 ग्राम भृंगराज ले सकते है। रात्रि में 1.5 लीटर (डेढ़ लीटर) पानी मे डाल दे और सुबह धीमी आग पर पकाए। यदि मिट्टी के बर्तन सुलभ हो तो उसमे पकाना अधिक गुणकारी है। इसे इतना पकाए कि पानी 1/3 भाग रह जाए। बचे हुए पानी को साफ़ कपड़े से छान ले । ठंडा होने पर कपड़े मे दबा कर बाकी पानी निकाल ले और बचे हुए को किसी पेड़ के नीचे डाल दे। खाद का काम करेगा। इसके बाद प्राप्त शंखपुष्पी के काढ़े मे 1 ग्राम सोडियम बेंजोएट मिला दे, यह केमिस्ट के पास मिलेगा। अब इस काढ़े को रात भर रख दे ताकि मिट्टी जैसा अंश नीचे बैठ जाएगा और अगले दिन इसमे 1 किलो खांड या मिश्री व 10 ग्राम छोटी इलायची मिलाकर धीमी आग पर पकाए। जब मीठा घुल जाए तब इसेउतार ले। ठंडा होने पर काँच या प्लास्टिक कि बोतल मे भर ले। 2 चम्मच से 4 चम्मच दूध मे मिलाकर पियें या पिलाए। 🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹

+17 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 26 शेयर
prakash patel Jan 23, 2021

💎 जौ के फायदे.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/420769662596550/ प्राचीन काल से जौ का उपयोग होता चला आ रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का आहार मुख्यतः जौ थे। वेदों ने भी यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकार किया है। गुणवत्ता की दृष्टि से गेहूँ की अपेक्षा जौ हलका धान्य है। उत्तर प्रदेश में गर्मी की ऋतु में भूख-प्यास शांत करने के लिए सत्तू का उपयोग अधिक होता है। जौ को भूनकर, पीसकर, उसके आटे में थोड़ा सेंधा नमक और पानी मिलाकर सत्तू बनाया जाता है। कई लोग नमक की जगह गुड़ भी डालते हैं। सत्तू में घी और चीनी मिलाकर भी खाया जाता है। जौ का सत्तू ठंडा, अग्निप्रदीपक, हलका, कब्ज दूर करने वाला, कफ एवं पित्त को हरने वाला, रूक्षता और मल को दूर करने वाला है। गर्मी से तपे हुए एवं कसरत से थके हुए लोगों के लिए सत्तू पीना हितकर है। मधुमेह के रोगी को जौ का आटा अधिक अनुकूल रहता है। इसके सेवन से शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ती नहीं है। जिसकी चरबी बढ़ गयी हो वह अगर गेहूँ और चावल छोड़कर जौ की रोटी एवं बथुए की या मेथी की भाजी तथा साथ में छाछ का सेवन करे तो धीरे-धीरे चरबी की मात्रा कम हो जाती है। जौ मूत्रल (मूत्र लाने वाला पदार्थ) हैं अतः इन्हें खाने से मूत्र खुलकर आता है। जौ को कूटकर, ऊपर के मोटे छिलके निकालकर उसको चार गुने पानी में उबालकर तीन चार उफान आने के बाद उतार लो। एक घंटे तक ढककर रख दो। फिर पानी छानकर अलग करो। इसको बार्ली वाटर कहते हैं। बार्ली वाटर पीने से प्यास, उलटी, अतिसार, मूत्रकृच्छ, पेशाब का न आना या रुक-रुककर आना, मूत्रदाह, वृक्कशूल, मूत्राशयशूल आदि में लाभ होता है। औषधि-प्रयोगः धातुपुष्टिः एक सेर जौ का आटा, एक सेर ताजा घी और एक सेर मिश्री को कूटकर कलईयुक्त बर्तन में गर्म करके, उसमें 10-12 ग्राम काली मिर्च एवं 25 ग्राम इलायची के दानों का चूर्ण मिलाकर पूर्णिमा की रात्रि में छत पर ओस में रख दो। उसमें से हररोज सुबह 60-60 ग्राम लेकर खाने से धातुपुष्टि होती है। गर्भपातः जौ के आटे को एवं मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुकता है। https://play.google.com/store/apps/details?id=com.ayurvedik.paudhe.jadee_bootiyaan ====🌹=ॐ=🌹=== 💎 દરેક ગંભીર રોગોની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે ગંભીર રોગ છે તે રોગના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ શરીર ઉપર કયા કયા આવેલા છે? આ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ કઈ દિશામાં દબાણ આપીને કેટલી સેકન્ડ-મિનિટ લેવા જોઈએ? તેની એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ ની માહિતી માટે સંપર્ક કરો 👉 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ✅ No Medicine ✅No Surgery ✅ No Strict Diet ✅ No Hard Exercise 🏥 Aum Health Care में ट्रीटमेंट लेते हर दर्दी अपने फोर्म मे सहीके साथ नोंध करते है। आप चाहे तो रेकोर्ड चेक कर शकते हो। 🌞 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 स्वस्थ & स्लीम होने की दुनियामें आपका स्वागत है। 🏥 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 🏥 નજીવા મુલ્યે, મૂલ્યવાન માહિતી, જે તમને અપાવશે રોગો માંથી મુક્તિ.! 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE ====🌹=ॐ=🌹===

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर

बाई करवट लेटने के लाभ 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ शरीर के लिए सोना बेहद जरूरी होता है। अच्छी सेहत के लिए शरीर को आराम देना कई तरह की बीमारियों से बचाता है। सोते समय हम कई बार करवट बदलकर सोते हैं जिसका हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। किसी भी इंसान के लिए एक तरफ करवट लेकर सोए रहना नामुमकिन है। लेकिन क्या आपको पता है बांए ओर करवट लेने से आपको कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। बांए ओर करवट लेकर सोने के फायदे आयुर्वेद में शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए बाएं ओर करवट लेकर सोने के बारे में बताया गया है। जिसे आज के वैज्ञानिकों ने शोध के आधार पर इसे माना है। शोध के अनुसार बाएं ओर करवट बदलकर सोने से पेट फूलने की समस्या, दिल के रोग, पेट की खराबी और थकान जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यदि आप बाएं की जगह दाएं तरफ करवट लेकर सोते हैं तो इससे शरीर से टाक्सिन सही तरह से निकल नहीं पाते हैं और दिल पर जोर ज्यादा पड़ता है साथ ही पेट की बीमारी भी लगने लगती हैं। कई बार तो हार्ट रेट भी बढ़ सकता है। सीधे लेटे रहने से भी इंसान को ठीक तरह से सांस लेने में परेशानी होती है। ज्यादातर वे लोग जिन्हें दमा या अस्थमा और स्लीप एपनिा की दिक्कत हो। उनको रात में सीधा नहीं लेटना चाहिए। इसलिए बांए ओर करवट लेकर सोने की आदत डालनी चाहिए। किडनियां और लीवर के लिए बाएं ओर करवट बदलकर सोने से लीवर और किडनियां ठीक तरह से काम करती हैं। शरीर से गंदगी को साफ करने में लीवर और किड़नी बेहद अहम भूमिका निभाती हैं इसलिए इन पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। पाचन में सुधार शरीर तभी ठीक रहता है जब आपका पाचन तंत्र ठीक हो। एैसे में बाएं तरफ करवट लेने से आपके पाचन तंत्र को फायदा मिलता है। और खाया हुआ खाना भी आसानी से पेट तक पहुंचता है जो ठीक से हजम भी हो जाता है। इसके अलावा एक ओर फायादा यह है कि बदहजमी की दिक्कत भी दूर हो जाती है। खतरनाक बीमारियों से बचाव बाएं ओर करवट लेने से शरीर पर जमा हुआ टाक्सिन धीरे-धीरे निकलने लगता है और इस वजह से शरीर को लगने वाली खतरनाक बीमारियां नहीं होती हैं। एसिडिटी में फायदा सीने में जलन और एसिडिटी की समस्या को दूर करता है बायीं ओर करवट लेकर सोना। क्योंकि इस तरीके से पेट में मौजूद एसिड उपर की जगह से नीचे आने लगता है जिस वजह से सीने की जलन और एसिडिटी की परेशानी में फायदा मिलता है। पेट को आराम बांए ओर सोने से पेट को आराम मिलता है। क्योंकि इस पोजिशन में सोने से भोजन छोटी आंत से बड़ी आंत तक आसानी से पहुंच जाता है जिस वजह से सुबह आपका पेट खुलकर साफ होता है। दिल की परेशानी में बाएं ओर करवट बदलकर सोने से दिल से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं क्योंकि इस अवस्था में सोने से दिल तक खून की पूर्ती बेहद अच्छे तरह से होती है जिसकी वजह से आक्सीजन और खून की सप्लाई आराम से दिमाग और शरीर तक पहुंचती है जो इंसान को दिल की बीमारी यानि कि हार्ट अटैक जैसे गंभीर रोग से बचा सकती है। गलत तरीकों से सोना कई बीमारियों जैसे सिर दर्द, पीठदर्द, माइग्रेन, थकान व दर्द को न्योता देता है । अच्छी स्लीपिंग पोजीशन इंसान को स्मार्ट और सेहतमन्द बनाती है इसलिए अपने सोने के तरीके को बदलें और हमेशा स्वस्थ रहें। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

+18 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 59 शेयर
prakash patel Jan 23, 2021

💘 હાર્ટએટેક અને પાણી :💘 https://m.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/420808972592619/ 👉🏻હાર્ટએટેક અને પાણી – ક્યારેય આ જાણકારી ન હતી ! માહીતી રસપ્રદ છે. 👉🏻બીજી પણ એવી વાત જે ખબર નહોતી અને ડોક્ટરને પુછ્યું કે કેટલાક લોકોને કેમ રાત્રે પેશાબ કરવા માટે વારંવાર ઉઠવું પડે છે? -> ‘હૃદયરોગ’ ડૉક્ટરે જવાબ આપ્યો: જયારે તમે ઉભેલા હો ત્યારે ગુરુત્વાકર્ષણના કારણે પાણી તમારા શરીરના નીચેના ભાગમાં જમા થાય છે (પગે સોજા આવવા) પણ જયારે તમે સુઈ જાવ છો ત્યારે તમારા પગ કીડનીના સમાંતરે હોય છે અને ત્યારે કીડની તે પાણીને બહાર ફેંકે છે. એ ખબર હતી કે તમારે શરીરના ઝેરી કચરાને બહાર ફેંકવા માટે પાણીની આવશ્યકતા હોય છે પણ આ માહિતી નવી જ હતી. 👉🏻પાણી પીવા માટેનો યોગ્ય સમય, એક હૃદયરોગ ડૉક્ટરે આપેલી ખુબજ અગત્યની માહીતી આપી અને યોગ્ય સમયે પીવામાં આવેલું પાણી શરીરમાં તેની અસરકારકતા વધારી દે છે. ➡️ સવારે ઉઠ્યા પછી ૨ ગ્લાસ હૂંફાળું પાણી પીવાથી આંતરીક અંગો સક્રીય થાય છે. ➡️ જમવાના અડધા કલાક પહેલાં ૧ ગ્લાસ પાણી પીવાથી પાચનક્રીયા સક્રીય થાય છે. ➡️ સ્નાન કરતાં પહેલાં ૧ ગ્લાસ પાણી બ્લડપ્રેશરને નીચું રાખે છે. ➡️ રાત્રે સુતાં પહેલાં ૧ ગ્લાસ પાણી પીવાથી સ્ટ્રોક અને હાર્ટએટેકનું જોખમ ઘટે છે. ➡️ રાત્રે પાણી પીને સુવાથી પગના સ્નાયુઓ જકડાઈ (સાદી રીતે કહીએ તો નસ ચઢી જવી) જતા નથી. સ્નાયુઓને પાણીની જરૂરત હોય છે અને જો પાણી ના મળે તો સ્નાયુઓ જકડાઈ જાય અને તમે ચીસ પાડીને બેઠા થઈ જાઓ. ૨૦૦૮ ના અમેરીકન કોલેજ ઓફ કાર્ડીઓલોજીના જર્નલના અંકમાં પ્રસીદ્ધ થયેલ માહીતી પ્રમાણે ➡️ હાર્ટએટેક સામાન્ય રીતે સવારના ૬ થી બપોર સુધીમાં વધારે આવે છે. જો રાત્રીના સમયે હાર્ટએટેક આવે તો તે વ્યક્તીની સાથે કંઇક અસામાન્ય બનાવ બન્યો હોય એમ પણ સંભવ છે. ➡️ જો તમે એસ્પીરીન જેવી કોઈ દવા લેતા હો તો એ દવા રાતના સમયે લેવી જોઈએ કારણકે એસ્પીરીનની અસર ૨૪ કલાક માટે રહેતી હોય છે એટલે સવારના સમયે તેની તીવ્રતમ અસર હોય છે. ➡️ એસ્પીરીન તમારા દવાના ડબ્બામાં ઘણાં વર્ષો સુધી રહી શકે છે અને જયારે તે જુની થાય છે ત્યારે એમાંથી વિનેગર(સરકો) જેવી વાસ આવે છે. ➡️ બીજી વાત જે દરેકને મદદરૂપ થશે – બેયર કંપની ક્રીસ્ટલ જેવી એસ્પીરીન બનાવે છે જે જીભ ઉપર મુકતાં જ ઓગળી જાય છે. તે સામાન્ય ગોળી કરતાં ઝડપથી કામ કરે છે. માટે એસ્પીરીન કાયમ તમારી સાથે રાખો. ➡️ હાર્ટએટેકનાં સર્વમાન્ય લક્ષણો ડાબા હાથ અને છાતીમાં દુખાવા ઉપરાંત પણ કેટલાંક લક્ષણો છે જેની માહીતી પણ જરૂરી છે જેમ કે દાઢીમાં ખુબજ દુખાવો થવો, ઉલટી ઉબકા જેવો અનુભવ થવો, ખુબજ પરસેવો થવો. પણ આ લક્ષણો ક્યારેક જ દેખાય છે. નોંધ – હાર્ટએટેકમાં ક્યારેક છાતીમાં દુખાવો ના પણ થાય. મોટાભાગના (લગભગ ૬૦%) લોકોને જયારે ઉંઘમાં હાર્ટએટેક આવે છે ત્યારે તેઓ જાગ્યા હોતા નથી, પરંતુ જો તમને છાતીમાં જોરદાર દુખાવો ઉપડે તો તેનાથી તમે ગાઢ નિંદ્રામાંથી પણ જાગી જાઓ છો. તમે કેટલા એવા લોકોને જાણો છો જે રાત્રે સુતાં પહેલાં પાણી પીવાનું ટાળે છે કારણકે તેમને રાત્રે ઉઠવું પડશે. ====🌹=ॐ=🌹=== 💎 દરેક ગંભીર રોગોની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે ગંભીર રોગ છે તે રોગના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ શરીર ઉપર કયા કયા આવેલા છે? આ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ કઈ દિશામાં દબાણ આપીને કેટલી સેકન્ડ-મિનિટ લેવા જોઈએ? તેની એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ ની માહિતી માટે સંપર્ક કરો 👉 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ✅ No Medicine ✅No Surgery ✅ No Strict Diet ✅ No Hard Exercise 🏥 Aum Health Care में ट्रीटमेंट लेते हर दर्दी अपने फोर्म मे सहीके साथ नोंध करते है। आप चाहे तो रेकोर्ड चेक कर शकते हो। 🌞 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 स्वस्थ & स्लीम होने की दुनियामें आपका स्वागत है। 🏥 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 🏥 નજીવા મુલ્યે, મૂલ્યવાન માહિતી, જે તમને અપાવશે રોગો માંથી મુક્તિ.! 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE ====🌹=ॐ=🌹===

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Shyam Yadav Jan 22, 2021

*🔥स्वास्थ्य संजीवनी🔥* *💫तन-मन से निरोग-स्वस्थ व तेजस्वी संतान-प्राप्ति के नियम💫* *गृहस्थ जीवन की सफलता उत्तम संतान की प्राप्ति में मानी जाती है किन्तु मनुष्य यह नहीं जानता कि कुछ नियमों का पालन उसे दिव्य, तेजस्वी एवं ओजस्वी संतान प्रदान करने में सहायक होता है। अगर निम्नांकित नियमों को जानकर उसका पालन किया जाये तो उत्तम, स्वस्थ संतान की प्राप्ति हो सकती है।* *ऋतुकाल की चौथी, छठी, आठवीं और बारहवीं रात्रि में स्त्रीसंग करके पुरुष दीर्घायुवाला पुत्र उत्पन्न करता है। पुत्र की इच्छा रखनेवाली स्त्री को इस रात्रि में लक्ष्मणा (हनुमान बेल) की जड़ को दूध में घिसकर उसकी दो तीन बूँदे दायें नथुने में डालनी चाहिए।* *ऋतुकाल की पाँचवी, नवमी और ग्यारहवीं रात्रि में स्त्रीसंग करके गुणवान कन्या उत्पन्न करता है किन्तु सातवीं रात्रि में स्त्रीसंग करने से दुर्भांगी कन्या उत्पन्न होती है।* *ऋतुकाल की तीन रात्रियों में, प्रदोष काल में, अमावस्या, पूर्णिमा, ग्यारस अथवा ग्रहण के दिनों में एवं श्राद्ध तथा पर्व दिनों में संयम न रखने वाले गृहस्थों के यहाँ कम आयुवाले, रोगी, दुःख देने वाले एवं विकृत अंगवाले बच्चों का जन्म होता है। अतः इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।* *तेजस्वी पुत्र की इच्छा रखनेवाले स्त्री-पुरुष दोनों को उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर शैया पर निम्नलिखित वेदमंत्र पढ़ना चाहिए।* *अहिरसि, आयुरसि, सर्वतः प्रतिष्ठासि धाता।* *त्वा दधातु विधाता त्वा दधातु ब्रह्मवर्चसा भवेदिति।।* *ब्रह्मा बृहस्पतिर्विष्णुः सोमः सूर्यस्तथाऽश्विनौ।* *भगोऽथ मित्रावरु्णौ वीरं दधतु मे सुतम्।।* *गर्भवती स्त्री द्वारा रखने योग्य सावधानी* *उकड़ू बैठना, ऊँचे नीचे स्थान एवं कठिन आसन में बैठना, वायु, मल-मूत्र का वेग रोकना, शरीर जिसके लिए अभ्यस्त न हो ऐसा कठिन व्यायाम करना, तीखे, गरम, खट्टे, दही एवं मावे की मिठाइयों जैसे पदार्थों का अति सेवन करना, गहरी खाई अथवा ऊँचे जलप्रपात हों ऐसे स्थलों पर जाना, शरीर अत्यंत हिले-डुले ऐसे वाहनों में मुसाफिरी करना, हमेशा चित्त सोना-ये सब कार्य और व्यवहार गर्भ को नष्ट करने वाले हैं अतः गर्भिणी को इनसे बचना चाहिए।* *जिनका गर्भ गिर जाता हो वे माताएँ गर्भरक्षक मंत्र (जो कि मंत्र की इच्छुक माताओं को ध्यान योग शिविर में दिया जाता है।) पढ़ते हुए एक काले धागे पर 21 गाँठे लगायें व 21 बार गर्भरक्षक मंत्र पढ़कर पेट पर बाँधें। इससे गर्भ की रक्षा होती है।* *जो गर्भिणी स्त्री खुले प्रदेश में, एकांत में अथवा हाथ-पैर को खूब फैलाकर सोने के स्वभाव वाली हो अथवा रात्रि के समय में बाहर घूमने के स्वभाववाली हो तो वह स्त्री उन्मत्त-पागल संतान को जन्म देती है।* *लड़ाई-झगड़े, हाथापाई एवं कलह करने के स्वभाववाली स्त्री अपस्मार या मिर्गी के रोगवाली संतान को जन्म देती है।* *यदि गर्भावस्था में मैथुन का सेवन किया जाये तो खराब देहवाली, लज्जारहित, स्त्रीलंपट संतान उत्पन्न होती है। गर्भावस्था में शोक, क्रोध एवं दुष्ट कर्मों का त्याग करना चाहिए।* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🎥

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
prakash patel Jan 23, 2021

💎 बाल झड़ने से रोकने के लिए घरेलू उपाय 💎 https://www.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/420395279300655/ बाल झड़ने से रोकने के लिए 6 आसान घरेलू उपाय -  1. दही और नींबू :  दही और नींबू का मेल आपके बालों का झड़ना रोक एक प्राकृतिक मॉश्चराइज़र के तौर पर काम करता है। यह सिर की त्वचा के रुखेपन को दूर करता है और डैंड्रफ को भी कम करता है। इसे तैयार करने के लिए दही में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर बालों पर लगाएं। थोड़ी देर सूखने के बाद इसे धो लें।  2. गर्म तेल से मालिश :  बालों की चमक और मजबूती के लिए गर्म तेल से मालिश करें। यह बालों को पोषण देता है और सर्दियों की ठंडी, रूखी हवाओं से सिर की त्वचा की रक्षा करता है।  3. तेल और कपूर :  अपने सिर और बालों को ठंडा रखने के लिए थोड़ी मात्रा में कपूर और तेल मिलाएं। फिर इसे बालों पर लगाएं। यह डैंड्रफ और खुजली को दूर करने में मदद करता है।  4. भाप :  यह प्राकृतिक नमी को लौटाने और बालों को मजबूत बनाने में मददगार है। यह स्कैल्प में मौजूद छेदों को खोलता है, ताकि वे ज्यादा नमी सोख सकें। इसके साथ ही भाप लेने से बालों का झड़ना रुकता है, बाल स्वस्थ होकर बढ़ते हैं और उनकी चमक भी बढ़ती है।  5. नीम और नारियल का तेल :  यह सिर की त्वचा में खुजली और लालिमा पैदा करने वाली फफूंद (फंगस) के खिलाफ एंटी-फंगल तेल के तौर पर काम करता है। नीम और नारियल का तेल साथ मिलकर डैंड्रफ और सिर की त्वचा की खुजली के खिलाफ एक एंटीसेप्टिक का काम करता है।  6. नीम का पेस्ट और दही :  नीम की पत्तियों के पेस्ट को दही के साथ मिलाकर सिर की त्वचा पर लगाने से बालों का झड़ना कम होता है। इसके अलावा इससे सफेद बालों की समस्या भी कम होती है और बाल लंबे और खूबसूरत होते हैं।* ====🌹=ॐ=🌹=== 💎 દરેક ગંભીર રોગોની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે ગંભીર રોગ છે તે રોગના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ શરીર ઉપર કયા કયા આવેલા છે? આ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ કઈ દિશામાં દબાણ આપીને કેટલી સેકન્ડ-મિનિટ લેવા જોઈએ? તેની એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ ની માહિતી માટે સંપર્ક કરો 👉 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ✅ No Medicine ✅No Surgery ✅ No Strict Diet ✅ No Hard Exercise 🏥 Aum Health Care में ट्रीटमेंट लेते हर दर्दी अपने फोर्म मे सहीके साथ नोंध करते है। आप चाहे तो रेकोर्ड चेक कर शकते हो। 🌞 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 स्वस्थ & स्लीम होने की दुनियामें आपका स्वागत है। 🏥 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 🏥 નજીવા મુલ્યે, મૂલ્યવાન માહિતી, જે તમને અપાવશે રોગો માંથી મુક્તિ.! 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE ====🌹=ॐ=🌹===

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
prakash patel Jan 23, 2021

🏥 Acupressure Planet Post @ 74 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=172319758014279&id=101139925132263 💎 વધારે વજન (ચરબી) ને કહો હવે અલવિદા .. એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટથી.. ▶️ એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટથી.. વધારે વજન (ચરબી) થી છુટકારો મળશે અને તે પણ... ✅ No Medicine ✅No Surgery ✅ No Strict Diet ✅ No Hard Exercise 👉 કયા કયા Acupressure પોઈન્ટ લેવા જોઈએ.? તેની સંપૂર્ણ માહિતી અમારી પાસેથી મેળવો 👉 Acupressure પોઈન્ટ લેવાથી પિટ્યુટરી ગ્રંથિ તેમજ થાઇરોઇડ ગ્રંથિ આપણી જૈવીક એનર્જી પ્રમાણે ઈન્સ્યુલીન ઉત્પન્ન કરે છે જેથી ચરબીમાં વધારો થતો નથી અને વધારાની ચરબી એક રસ બનીને શરીરની બહાર નીકળી જાય છે સાથે સાથે હળવો ડાયટ ( ભૂખ કરતા ઓછું એટલે કે ૭૦ % જમવું) કરવામાં આવે તો વજન જલ્દી ઘટે છે. 👉 વધારે વજન આપણા શરીરને રોગોનું કારણ બનાવે તે પહેલા એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટ થી વજન ઓછું કરીએ, તેમજ વજન કંટ્રોલમાં પણ રાખી શકીએ છીએ. 👉 કયા કયા એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ લેવા જોઈએ.? ▶️ Sp 06 ▶️ LL 11 ▶️ G 26 ▶️ St 36 ▶️ B 43-44 ▶️ K 16-17-18 🏥 વજન ઓછું કરવા ના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ શરીર ઉપર કયા કયા આવેલા છે? આ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ કઈ દિશામાં દબાણ આપીને કેટલી સેકન્ડ-મિનિટ લેવા જોઈએ? તેની સંપૂર્ણ સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો છો. 👉 Acupressure Treatment ની માહિતી માટે સંપર્ક કરો ====🌹=ॐ=🌹=== ✅દવા વગર લોકોનુ વજન ઓછું કરવુ, રોગ મુક્ત કરવા એ જ અમારો ઘ્યેય છે. 👉 દરેક ગંભીર રોગોની તકલીફ માટે અલગ-અલગ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ હોય છે. તમને જે ગંભીર રોગ છે તે રોગના એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ શરીર ઉપર કયા કયા આવેલા છે? આ એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ કઈ દિશામાં દબાણ આપીને કેટલી સેકન્ડ-મિનિટ લેવા જોઈએ? તેની એક્યુપ્રેશર ટ્રીટમેન્ટ ની વિસ્તારથી સમજૂતી આપવામાં આવશે જેથી તમે એક્યુપ્રેશર પોઈન્ટ ટ્રીટમેન્ટ જાતે લઈ ને સ્વસ્થ બની શકો. માહિતી માટે અમારો સંપર્ક કરો... 👉 🏥 AUM HEALTH CARE 🏥 (Acupressure Clinic) 📞👉આ નંબર ઉપર જ ફોન કરવો +91 9974592157 👉 આ નંબર ઉપર ફક્ત મેસેજ કરવા +91 7016609049 🏥 ऐक्युप्रेशर थेरापी स्वस्थ & स्लीम बनने में बेहद कारगर हैं.. एवम् पूरी तरह से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। ✅ No Medicine ✅No Surgery ✅ No Strict Diet ✅ No Hard Exercise 🏥 Aum Health Care में ट्रीटमेंट लेते हर दर्दी अपने फोर्म मे सहीके साथ नोंध करते है। आप चाहे तो रेकोर्ड चेक कर शकते हो। 🌞 हर गंभीर बिमारी ऐक्युप्रेशर थेरापीसे मिटाये। 🏥 स्वस्थ & स्लीम होने की दुनियामें आपका स्वागत है। 🏥 👉 તમારો એક મેસેજ તમને રોગ મુક્ત બનાવી શકે છે.. .. 🏥 નજીવા મુલ્યે, મૂલ્યવાન માહિતી, જે તમને અપાવશે રોગો માંથી મુક્તિ.! 🌸 Face Book group 🌸 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર.. https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ 🌸 Face Book Page 🌸 એક્યુપ્રેશર પ્લેનેટ https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ 🌸 you tube 🌸 https://youtu.be/kHGftI3VsTE ====🌹=ॐ=🌹===

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB