Shrikrishna Cholkar
Shrikrishna Cholkar Apr 19, 2019

नमस्कार मित्रों.

नमस्कार  मित्रों.

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Rohan Bhardwaj May 21, 2019

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Rajesh Kumar Pareek May 21, 2019

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Shrikrishna Cholkar May 20, 2019

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Purvin kumar May 19, 2019

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Shrikrishna Cholkar May 19, 2019

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श्री गौमतैश्वर महादैव मंन्दिर संस्था धर्म ध्वंनि प्रकल्प पारमार्थिक न्यास गाधींनगर इन्दौर से ।। श्री सुर्य सुवन सुखधाम आपकी उपमा न्यारी है सत् सत् बार प्रणाम आपकी महीमा प्यारी है श्री विधी का नेक विधान, कभी टाले नही टलता है रोज सुबह को उगता सुरज रोज शाम को ढलता है विदना बाई ने लिखे छटी रात के अंक । राई धटे ना तिल बडे रे रे जीव निसक ।। हमेशा समय रहा बलवान यहा बस किसका चलता है । रोज सुबह को उगता सुरज रोज शाम को ढलता है, अंतर कोन जनम का था इस जनम हुवा ये मेल । ब्याव सदी हम समज रहे यह कुदरत का खेल ।। खेल नही ये है नव निर्मान ये जग इसी से चलता है । रोज सुबह को उगता सुरज रोज शाम को ढलता है जनक सुता दसरथ सुत के मेल मिलाये विदना ने । अवधपुरी ओर मिथला के मेल मिलान की रचना ।। दुष्ट सँहार जगत कल्याण चक्र ये समय का चलता हें । रोज सुबह को उगता सुरज रोज शाम को ढलता है पाँच तत्व संग्रह किये छाले फोडे तीन । ब्रह्मा ,विष्णु ओर सदाशिव आदि शक्ति सुत तीन ।। नेक श्रष्टि का नवनिर्माण नेक जग में फलता है । रोज सुबह को उगता सुरज रोज शाम को ढलता है

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