🌹।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।।🌹 ============================= 👉पूजा -पाठ फलित नहीं होगा यदि यह बाधाएं हैं तो -.> ------------------------------------------------------------ 👉जब भी किसी समस्या की बात आती है तो अंत में यही पूछा जाता है की इसका क्या उपाय है ,क्या निवारण है और निवारण ,उपाय लिखा भी जाता है 👉|सभी लोग जो भी किसी समस्या से परेशान होते हैं वह कोई न कोई उपाय करते हैं ,कुछ लोग बहुत से उपाय करते हैं किन्तु अधिकतर लोग अंत में यही कहते हैं की उपाय काम नहीं किये या उपाय काम नहीं करते | 👉बहुत कम प्रतिशत लोगों के उपाय सफल होते हैं जबकि अधिकतर की समस्या या तो जस की तस रहती है या बढ़ ही जाती है | 👉कुछ लोग उपाय करते -करते इतने थक जाते हैं की अंत में यही कहते हैं और मान लेते हैं की भाग्य ही अंतिम है, उसे कोई नहीं बदल सकता ,जो भाग्य में लिखा है वही होगा |यहाँ तक की उनका विश्वास ईश्वर और पूजा -पाठ पर से भी उठने लगता है | 👉कुछ लोग समस्या को भी भाग्य ही मान लेते हैं भले वह ठीक हो सकता हो अथवा भाग्य में न हो या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुआ हो |कारण की उनके उपाय काम नहीं करते | 👉आखिर करें तो क्या इसलिए कष्ट को ही भाग्य मान संतोष कर लिया | टोने -टोटको के उपाय कुछ हद तक काम करते हैं किन्तु बड़े उपाय अधिकतर के लिए अक्सर काम नहीं करते |टोने -टोटकों में किसी उच्च शक्ति या देवी -देवता का उपयोग न होकर वस्तुगत उरा और मानसिक ऊर्जा का प्रक्षेपण होता है इसलिए यह कुछ काम कर जाते हैं यदि कोई छोटी -मोटी समस्या हुई तो ,किन्तु बड़ी समस्या के उपाय काम नहीं कर पाते क्योंकि बड़ी शक्तियों का प्रयोग असफल हो जाता है 👉|कालसर्प ,पित्र दोष ,अकाल मृत्यु भय ,गंभीर रोग ,मारक -कष्टकारक ग्रह के प्रभाव ,ब्रह्म -जिन्न -प्रेत बाधा के प्रभाव ,ईष्ट रुष्टता ,गंभीर आभिचारिक प्रयोग जैसे समस्या के उपाय अधिकतर के लिए असफल होते हैं क्योंकि यहाँ उच्च शक्तियों की आवश्यकता होती है | 👉ज्योतिष हो या तंत्र सबमे उपाय की अवधारणा है और यह किसी न किसी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं ,किसी न किसी देवता का प्रतिनिधित्व करते हैं |उस देवता को प्रसन्न कर अथवा शन्ति कर ही समस्या निवारण होता है | 👉जब उपाय किया ज्जाता है तो आशा की जाती है की वह देवता या शक्ति प्रसन्न होगा या शांत होगा और व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति मिलेगी |इसके लिए उपाय की ऊर्जा उस देवता तक पहुंचनी चाहिए अर्थात उपाय की पूजा देवता को मिलनी चाहिए ज्जिससे वह प्रसन्न हो या शांत हो 👉|अधिकतर मामलों में उपाय की उरा देवता तक नहीं पहुँचती या पूजा उसे नहीं मिलती |व्यक्ति अथवा पंडित पूरी तन्मयता से उपाय करता है किन्तु फिर भी लाभ नहीं होता क्योंकि जहाँ पूजा की ऊर्जा जानी चाहिए वहां नहीं जाती ,वह बीच में या तो किसी और द्वारा ले ली जाती है या बिखर जाती है |व्यक्ति सोच लेता है उपाय कर दिए समस्या हल होनी चाहिए ,किन्तु समस्या हल नहीं होती |कभी -कभी तो बढ़ भी जाती है |पंडित ने अपना कर्म कर दिया की अमुक पूजा करा दिया ,अपना दक्षिणा लिया और काम समाप्त मान लिया |उन्हें भी नहीं पता की पूजा जा कहाँ रही या काम करेगी या नहीं | 👉शास्त्र में लिखा है यह करने से यह समस्या हल होगी ,उसने बताई और पूजा कर दी | 👉ज्योतिषी ने किसी को अकाल मृत्यु भय से बचने को महामृत्युंजय जप बताया ,व्यक्ति ने ज्योतिषी के माध्यम से ही अथवा पंडित से जप करवा भी दिया किन्तु फिर भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हुई और उसकी मृत्यु हो गयी |अब वह महामृत्युंजय का जप गया कहाँ |उसका लाभ क्यों नहीं मिला |न पंडित जानता है न ज्योतिषी |व्यक्ति से सम्बन्धित लोग खुद मान लेते हैं की इतना बड़ा संकट था की महामृत्युंजय भी नहीं बचा सका या उन्हें कहा जाता है की समस्या बहुत गंभीर थी इसलिए जप बचा नहीं सका |यहाँ समस्या यह थी की महामृत्युंजय जप महादेव तक पहुंचा ही नहीं तो जान बचेगी कहाँ से | 👉आश्चर्यचकित मत होइए और यह मत सोचिये की अब महादेव से भी बड़ा कोई हो गया क्या जो उन तक जप नहीं पहुंचा और कहीं और चला गया या महामृत्युंजय का जप भी कोई रोक सकता है क्या |ऐसा होता है और जप वातावरण में बिखर जाता है ,महादेव तक नहीं पहुँचता 👉|कारण की महादेव ने ही वह तंत्र बनाया है जिससे उन तक जप पहुंचे |वह तंत्र बीच से टूटा हुआ है तो जप महादेव तक नहीं पहुंचेगा |महादेव भी अपने ही बनाए तंत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकते |जो नियम और तंत्र महादेव और शक्ति ने मिलकर बनाया है उससे वह खुद बंधे हुए हैं |यदि वह किसी व्यक्ति के लिए तोड़ते हैं तो विक्षोभ हो जाएगा ,इसलिए वे उस तंत्र के अनुसार ही फल देते हैं |उन्होंने सभी के लिए एक विशिष्ट नियम और ऊर्जा संरचना बनाई है जिसके अनुसार ही ऊर्जा स्थानान्तरण होता है |उन तक पहुंचता है और उनसे व्यक्ति तक पहुंचता है |बीच में कुछ विशिष्ट कड़ियाँ हैं जो ऊर्जा रूपांतरण करती हैं |यह कड़ियाँ यदि टूट जाएँ या न हो तो महादेव तक ऊर्जा नहीं पहुंचेगी और उनकी ऊर्जा व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी |यह नियम सभी प्रकार के पूजा पाठ में ,उपाय में लागू होता है |व्यक्ति यदि सीधे उनतक पहुँच सकता तो फिर व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |यह बीच की कड़ियाँ ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल और मुख्य रूप से कुलदेवता /देवी होते हैं जो पृथ्वी के व्यक्ति और महादेव या देवताओं के बीच की कड़ी होते हैं |यह महादेव और शक्ति के ही अंश हैं किन्तु यह उनकी पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील ऊर्जा रूप हैं और बीच की कड़ी हैं |जितने भी भूत -प्रेत -ब्रह्म आदि हैं वह भी महादेव के ही अंतर्गत आते हैं अतः इनके द्वारा उत्पन्न व्यवधान में भी महादेव सीधे हस्तक्षेप नहीं करते |अब हम बताते हैं की क्यों पूजा महादेव या किसी देवता तक नहीं पहुंचती या उपाय असफल क्यों हो जाते हैं | 👉उपाय तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक वह कहीं स्वीकार न हों |उपाय एक ऊर्जा प्रक्षेपण है |उपाय से ऊर्जा उत्पन्न कर एक निश्चित दिशा में भेजी जाती है |यह ऊर्जा जब तक कहीं स्वीकार न की जाए अंतरिक्ष में निरुद्देश्य विलीन हो जाती है और कोई लाभ नहीं मिलता अथवा यह ऊर्जा अपने गंतव्य तक न पहुंचे ,किसी और द्वारा ले ली जाए तो भी असफल हो जाती है ,अथवा उत्पन्न ऊर्जा का परिवर्तन प्राप्तकर्ता के योग्य ऊर्जा में न हो पाए तो भी अपने उद्देश्य में ऊर्जा सफल नहीं होती | लोगों के कष्टों के हजारों उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं ,इनमे ज्योतिषीय ,कर्मकांडीय अर्थात वैदिक पूजन प्रधान और तांत्रिक उपाय होते हैं | 👉इन उपायों में छोटे टोटकों से लेकर बड़े -बड़े अनुष्ठान तक होते हैं |इन शास्त्रों में यह कहीं नहीं लिखा की कैसे यह उपाय काम करते हैं |किस सूत्र पर कार्य करते हैं ,कैसे पितरों-देवताओं तक ऊर्जा पहुँचती है ,कैसे यहाँ के पदार्थों का पित्र लोक -देवलोक के पदार्थों में परिवर्तन होता है ,कौन यह ऊर्जा स्थानान्तरण करता है ,कब यह क्रिया अवरुद्ध हो जाती है ,कौन इस कड़ी को प्रभावित कर सकता है ,कैसे उपायों से कितनी ऊर्जा किस प्रकार उत्पन्न होती है |कहीं कोई सूत्र नहीं दिए गए ,क्योंकि जब यह उपाय बनाए गए तब के लोग इन सूत्रों को समझते थे |उन्हें इसकी क्रियाप्रणाली पता थी | 👉उस समय के ऋषियों को यह अनुमान ही नहीं था की आधुनिक युग जैसी समस्या आज के मानव उत्पन्न कर सकते हैं ,अतः उन्होंने इन्हें नहीं लिखा |उन्होंने जो संस्कार बनाए उसे यह मानकर बनाए की यह लगातार माने जायेंगे |इन्ही संस्कारों में उपायों की क्रिया के सूत्र थे अतः लिखने की जरूरत नहीं समझी |जब संकार छूटे तो सूत्र टूट गए |लोगों की समझ में अब नहीं आता की हो क्या गया |लोग अपनी इच्छाओं से चलने लगे तथा व्यतिक्रम उत्पन्न हो गया ऊर्जा संचरण में और सबकुछ बिगड़ गया | 👉कुछ सूत्रों को पितरों के सम्बन्ध में गरुण पुराण में दिया गया है किन्तु पूरी तकनिकी वहां नहीं है क्योंकि बीच की कड़ी सामान्य जीवन से सम्बन्धित है |गरुण पुराण बताता है की विश्वेदेवा पदार्थ को बदलकर पित्र की योनी अनुसार उन्हें पदार्थ उपलब्ध कराते हैं ,किन्तु विश्वदेव तक ही कुछ न पहुंचे तो क्या करें 👉|विश्वदेव ही नाराज हो जाएँ तो क्या करें |आचार्य करपात्री जी ने विश्वेदेवा की कार्यप्रणाली को बहुत अच्छे उदाहरण से बताया है किन्तु समस्या उत्पन्न उर्जा के वहां तक ही पहुँचने में होती है |उनके द्वारा स्वीकार करने और परिवर्तित कर पितरों को प्रदान करने में ही होती है |यही हाल सभी पूजा पाठ का होता है | 👉लोग कहते हैं की यहाँ कुछ भी चढ़ाया भगवान् नहीं खाता या नहीं लेता ,किन्तु ऐसा नहीं है भगवान् को यहाँ का भोग उसके स्वीकार करने योग्य ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है और वह वहां पहुंचता है किसी अन्य रूप में |तभी तो प्रसाद आदि को परम पवित्र माना जाता है और चढ़ाए पुष्प आदि को जलाया नहीं जा सकता |उसे स्वयं विघटित होने दिया जाता है |भगवान् को प्रदान की आ रही पूया की ऊर्जा का रूपांतरण उनके स्तर तथा लोक के अनुसार कुलदेवता और विश्वदेव करते हैं | उपाय ,पूजा -पाठ ,ऊर्जा रूपांतरण के सूत्र हमारे पूर्वज ऋषियों को ज्ञात थे और तदनुसार सभी प्रक्रिया ब्रह्माण्ड की ऊर्जा संरचना की क्रियाप्रणाली के आधार पर हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा बनाई गयी थी जो की आधुनिक वैज्ञानिकों से लाखों गुना श्रेष्ठ वैज्ञानिक थे |इस प्रणाली में एक त्रुटी पूरे तंत्र को बिगाड़ देती है |चूंकि यह प्रणाली प्रकृति की ऊर्जा संरचना पर आधारित है अतः यहाँ देवी -देवता भी हस्तक्षेप नहीं करते ,क्योंकि वह भी उन्ही सूत्रों पर चलते हैं |उनकी उत्पत्ति भी उन्ही सूत्रों पर आधारित है ,उन्हें भी उन्ही सूत्रों पर ऊर्जा दी जाती है ,उन्ही सूत्रों पर उन तक भी पूजा पहुँचती है |इस प्रकार ईष्ट चाहे कितना भी बड़ा हो ,देवी -देवता चाहे कितना ही शक्तिशाली हो कड़ियाँ टूटने पर कड़ियाँ नहीं बना सकता |सीधे कहीं हस्तक्षेप नहीं कर सकता |विरल स्थितियों में व्यक्ति विशेष के लिए इनके हस्तक्षेप होते हैं किन्तु यह हस्तक्षेप पित्र संतुष्टि अथवा देवताओं को पूजा मिलने को लेकर नहीं रहे हैं |पूजाओं की सबसे मूल कड़ी व्यक्ति के खानदान के मूल पूर्वज ऋषि के देवता या देवी होते हैं जिन्हें बाद में कुलदेवता /देवी कहा जाने लगा |इनका सीधा सम्बन्ध विश्वदेवा स्वरुप से होता है ,जो की पूजन स्थानान्तरण के लिए उत्तरदाई होते हैं |कुल देवता /देवी ब्रह्माण्ड की उच्च शक्तियों जिन्हें देवी /देवता कहा जाता है और मनुष्य के बीच की कड़ी हैं और यह पृथ्वी की ऊर्जा तथा ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच सामंजस्य बनाते हैं |यह कड़ी जहाँ टूटी सबकुछ टूट जाता है और फिर चाहे कितनी भी पूजा - शान्ति कराई जाए देवताओं तक दी जा रही पूजा नहीं पहुँचती और वह असंतुष्ट ही रह जाते हैं या प्रसन्न नहीं होते | 👉कुलदेवता प्रत्येक वंश के उत्पत्ति कर्ता ऋषि के वह आराध्य हैं जिनकी आराधना उन्होंने अपने वंश की वृद्धि और रक्षा के लिए अपने वंश के लिए उपलब्ध सामग्रियों के साथ अपने लिए उपयुक्त समय में की थी |जिस ऋषि और वंश की जैसी प्रकृति ,कर्म और गुण थे वैसे उन्होंने अपने कुलदेवता और देवी चुने किन्तु यह ध्यान रखा की सभी शिव परिवार से ही हों |कारण की शिव परिवार ही उत्पत्ति और संहार दोनों करता है |इनके बीच के कर्म ही अन्य देवताओं के अंतर्गत आते हैं |दूसरा कि शिव परिवार ही ऊर्जा का वह माध्यम है जो ब्रह्माण्ड से लेकर पृथ्वी तक समान रूप से व्याप्त है 👉|तीसरा कि शिव परिवार की ऊर्जा ही पृथ्वी की सतह पर सर्वत्र व्याप्त है जो सतह पर पृथ्वी की ऊर्जा से मिलकर अलग स्वरुप ग्रहण करता है |चौथा पृथ्वी की समस्त सतही शक्तियाँ जैसे भूत ,प्रेत ,पिशाच ,ब्रह्म ,जिन्न ,डाकिनी ,शाकिनी ,श्मशानिक भैरव -भैरवी ,क्षेत्रपाल आदि सभी शिव के अधीन होते हैं | 👉इन कारणों से सभी कुलदेवता शिव परिवार से माने गए |कुलदेवता /देवी वह सेतु हैं जो व्यक्ति /वंश और ब्रह्माण्ड की ऊर्जा में समन्वय का काम करते हैं साथ ही यहाँ की स्थानिक शक्तियों से सुरक्षा भी करते हैं 👉|यह वह बैंक हैं जो मुद्रा विनिमय जैसी क्रिया कर आपके द्वारा प्रदत्त मुद्रा अर्थात पूजन -भोज्य -अर्पित पदार्थ को बदलकर आपके पितरों तक ,आपके ईष्ट तक पहुंचाते हैं |यह वह चौकीदार हैं जो आपके वंश की ,परिवार की ,व्यक्ति की सुरक्षा २४ घंटे और १२ महीने करते हैं ताकि आपको किसी नकारात्मक ऊर्जा से कष्ट न हो | 👉इनकी ठीक से पूजा न होने पर ,इन्हें भूल जाने पर यह असंतुष्ट या रुष्ट हो जाते हैं और पूजा ईष्ट तक नहीं जाने देते या नहीं भेजते |इसलिए उपाय काम नहीं करते |महामृत्युंजय कराइए किन्तु कुलदेवता यदि रुष्ट हैं तो महादेव तक जप नहीं जाएगा |महादेव का ही नियम है तो वह सीधे पूजा नहीं ले सकते |लाभ नहीं होगा | 👉आपके घर में किसी बड़ी नकारात्मक या आसुरी शक्ति का वास हो या कोई ब्रह्म -प्रेत -जिन्न -वीर -सहीद -सती -साईं आप द्वारा पूजा जाता हो तो यह धीरे -धीरे आपकी पूजा खुद लेने लगता है और अपनी शक्ति बढाता है जिससे कुलदेवता की पूजा बाधित होती है |कुछ समय बाद यह कुलदेवता का स्थान ले लेता है और कुलदेवता रुष्ट हो जाते हैं |अब सभी पूजा यह ले लेगा और आपके ईष्ट तक कोई पूजा नहीं पहुंचेगी |आप कोई उपाय करें ,कोई अनुष्ठान कराएं सफल नहीं होगा ,कोई पूजा करें देवता को नहीं मिलेगा |आप मात्र खुद को संतुष्टि देंगे यह मानकर की आप पूजा कर रहे या करा रहे पर परिणाम नहीं मिलेगा |अब यह भी शिव के ही गण हैं |इन्हें भी शिव ने ही बनाया है |कुलदेवता भी शिव के ही अंश हैं तो शिव सीधे कैसे हस्तक्षेप करें |कुलदेवता की ठीक से पूजा न हो रही हो और कोई आसुरी शक्ति का प्रवेश हो जाय तो कुछ समय बाद वह सभी पूजा लेने लगता है कुलदेवता स्थान छोड़ देते हैं |फिर वह शक्ति उनका स्थान ले लेता है ,जब उसकी पूजा बंद ,खानदान की समाप्ति शुरू | 👉कुलदेवता की अनुपस्थिति में पूजा ईष्ट तक नहीं जा रही और सभी उपाय असफल |एक तो कष्ट की समस्या दुसरे उपाय भी काम नहीं कर रहे | पितरों की असंतुष्टि भी कुलदेवता /देवी को रुष्ट कर देती है क्योंकि इन पितरों द्वारा वह पूजित हुए होते हैं |पितरों का सीधा सम्बन्ध कुलदेवता से होता है |कुलदेवता /देवी रुष्ट तो वह सहायक नहीं होते और तब कोई पूजा -पाठ फलित नहीं होता |उपायों की असफलता का एक कारण किसी देवी -देवता का क्रोध भी हो सकता है |यदि कभी किसी संकल्पित अनुष्ठान या पूजा में कोई गलती हो गयी हो अथवा आपने या आपके पूर्वजों ने किसी देवी -देवता की मनौती आदि मानी हो और पूर्ण न की हो तो कोई देवी -देवता रुष्ट और क्रोधित हो सकता है |आज्ज आपको पता नहीं ,याद नहीं किन्तु इसका परिणाम आप भुगतते हैं |उपाय या पूया -पाठ किये जाने पर यह उसमे व्यवधान उत्पन्न करते हैं साथ ही उत्पन्न उर्जा का कुछ अंश भी खींच लेते हैं जिससे उपाय की शक्ति कम हो जाती है और लक्ष्य की दिशा में पर्याप्त शक्ति न लग पाने से उपाय असफल हो जाता है |यह स्थिति होने पर कुछ संकेत भी मिलते हैं और बार -बार एक ही प्रकार के स्वप्न अथवा घटनाएं आती हैं | आप ध्यान दीजिये ,जब आप किसी पूजा -पाठ -अनुष्ठान का संकल्प लेते हैं तो उसमे शब्द आते हैं ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता तब ईष्ट देवता |अब आप सोचिये स्थान देवता की जगह कोई स्थानीय नकारात्मक शक्ति प्रभावी है ,ग्राम देवता को आप नहीं जानते या ठीक से पूज नहीं रहे |क्षेत्रपाल को आप नहीं जानते |आपके कुलदेवता /देवी रुष्ट हैं या कोई अन्य शक्ति आपके घर में प्रभावी है जो पूज्जा ले रही या आप अपनी गलतियों से किसी ऐसी शक्ति को पूज रहे अपने स्वार्थ में जो नैसर्गिक देवता की श्रेणी में नहीं आता ,तो आपके कुलदेवता आपका साथ छोड़ चुके हैं |ऐसे में अब कड़ी तो टूट गयी |आपकी पूजा वातावरण में बिखर जायेगी |अब आपके पूर्वज ऋषि मूर्ख तो थे नहीं जो उन्होंने पूजा -अनुष्ठान के संकल्प में इन लोगों का आह्वान किया था हमेशा |वह जानते थे की यह एक श्रृंखला है जो पूजा की ऊर्जा को ईष्ट तक पहुंचाती है ,तभी उन्होंने इसे सभी पूजा से जोड़ा था |आधुनिक लोग मन से भगवान् को मानने को ही मुख्य मान लिए और नियमों की अनदेखी की जिससे निष्काम पूजन तो ठीक ,किन्तु सकाम पूजन असफल होने लगे |सकाम पूजन के अपने नियम होते हैं और उन्हें उसी रूप में करना होता है यदि कोई विशिष्ट उद्देश्य है तो |उपाय इसी श्रेणी में आते हैं अतः यह असफल हो जाते हैं कड़ी टूटने पर ,फिर चाहे कितनी भी अधिक पूजा -जप किया जाए या किसी भी शक्ति को पूजा जाए | 👉उपायों की असफलता का एक कारण यह भी होता है की जितनी ऊर्जा की आवश्यकता किसी कार्य की सफलता के लिए चाहिए होती है यदि उतनी ऊर्जा उपाय से न उत्पन्न हो तो वह कार्य सफल नहीं होता और उपाय की ऊर्जा व्यर्थ चली जाती है |किसी ग्रह की शान्ति के लिए शास्त्र में ६००० जप लिखा है तो कलयुग में इसका फल पाने के लिए आपको २४ हजार जप करना होगा |खुद जप करना होगा तभी ६००० का फल मिलेगा |आप किसी और से जप कराते है तो आपको उसका छठा हिस्सा ही मिलता है जबकि छठा हिस्सा जप करने वाले के हिस्से चला जाता है भले वह सम्पूर्ण जप का फल संकल्प से आपको दे दे |चार हिस्से विभिन्न शक्तियों के लिए चले जाते हैं |इस प्रकार २४ हजार जप कराने पर आपको मात्र ४००० जप का परिणाम मिला |पूरे २४ हजार जप का फल पाने के लिए आपको १४४००० जप कराने होंगे |तब जाकर आपका उद्देश्य पूरा होगा नियमतः |अब यहाँ एक समस्या और है की यदि किन्ही कारणों से यह जप से उत्पन्न ऊर्जा किसी शक्ति द्वारा कुछ हद तक भी रोक दी जाए या ले ली जाए या इसमें कमी कर दी जाए तो आपको लाभ नहीं होगा क्योंकि आपकी जरूरत १४४००० की है |१४३००० पर आपका कार्य असफल हो आएगा और पूजा आपके लिए व्यर्थ हो जायेगी उद्देश्य विशेष के लिए |इसे रोकने या बीच में लेने का कार्य घर या स्थान पर सक्रीय नकारात्मक शक्तियाँ करती हैं जो नहीं चाहती की व्यक्ति उनके प्रभाव से मुक्त हो सुखी हो | 👉उपाय आदि एक तकनिकी कार्य है |यहाँ मात्र भावनाओं का कोई महत्त्व नहीं होता ,क्योंकि आप एक ऊर्जा को पूजा या क्रिया से उत्पन्न कर अपने उद्देश्य के लिए किसी अन्य जगह भेज रहे |साथ में आप कह रहे की आपका अमुक कार्य हो अर्थात आप एक लक्ष्य को इंगित कर रहे |ऐसे में मात्र एक शब्द की त्रुटी आपका काम भी बिगाड़ सकती है और आपका अहित भी कर सकती है |एक गलत आचरण आपकी हानि कर सकती है ,क्योंकि उतन्न ऊर्जा कहीं तो लगनी है या बिखरनी है |उर्जा या शक्ति अनियंत्रित हुई तो हानि करेगी |शब्द ,क्रिया ,पदार्थ ,आचरण ,कर्म सबकुछ इस अवधि में सही होने चाहिए |उपायों में विशिष्ट प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है जो आपके लक्ष्य के अनुसार ही विशिष्ट कार्य करती है ,इसलिए यह पूरी दक्षता से होनी चाहिए |इसमें त्रुटी का कोई स्थान नहीं होता |अक्सर उग्र शक्ति की पूजा करते हुए लोग एक उद्देश्य भी रखते हैं और साथ ही यह भी मानकर चलते हैं की यह माँ है या पिता है जो गलती को क्षमा करेगा |उद्देश्य विशेष की पूजा में क्षमा नहीं होता क्योंकि आप निःस्वार्थ प्रेम या स्मरण नहीं कर रहे |आप तो स्वार्थ में पूज रहे और उसकी शक्ति को किसी उद्देश्य में लगाना चाह रहे |ऐसे में कोई गलती वह क्षमा नहीं करता और आपको गलती के अनुसार सजा भी मिलती है | 👉कभी -कभी उपाय करने पर समस्या और बढ़ जाती है |कारण यह होता है की उपाय करते समय गलती हो जाती है और ऊर्जा अनियंत्रित हो खुद का ही अहित कर जाती है |कभी -कभी ऐसा भी होता है की घर में उपस्थित किसी शक्ति को आपके उपाय और पूजा पाठ से कष्ट होता है और वह उपद्रव शुरू कर देता है ,ताकि आप उपाय या पूजा पाठ बंद कर दें |उपाय से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जबकि यह शक्तियाँ नकारात्मक गुण की होती है ,इसलिए इन्हें कष्ट होता है और यह उपद्रव करती हैं |आप सोचते हैं की उपायों से हानि हो रही और आप उपाय बंद कर देते हैं |स्थिति यथावत बनी रहती है और समस्या जस की तस |जब -जब पूजा -पाठ होता है घर में समस्याएं और बढ़ जाती हैं |कभी -कभी ढेर सारे उपाय करने पर ,बड़े -बड़े अनुष्ठान करने पर भी परिणाम नहीं मिलता |समझ नहीं आता की आखिर यह हो क्या रहा और पूजा जा कहाँ रही |यह भी इन नकारात्मक शक्तियों के कारण होता है जो पूजा खुद लेते हुए अपनी शक्ति बढाते हैं और खुद को देवता की तरह व्यक्त करते हैं | 👉अंत में समाधान की बात |कोई पंडित ,कोई ज्योतिषी ,कोई तांत्रिक आपके कुलदेवता /देवी को संतुष्ट नहीं कर सकता ,उन्हें वापस नहीं ला सकता |वह मात्र उपाय कर सकता है ,उपाय बता सकता है किन्तु वह तभी सफल होगा जब उपरोक्त स्थितियां न हों |कुलदेवता /देवी की संतुष्टि आपको करनी होगी ,उनकी रुष्टता आप ही दूर कर सकते हैं ,अगर वह खानदान छोड़ चुके हैं तो उन्हें आप ही ला सकते हैं या उनकी अन्य रूप में स्थापना आप ही कर सकते हैं |आपको ही यह करना होगा ,दूसरा इनमे कुछ नहीं कर सकता |अगर आपके घर में किसी अन्य शक्ति का वास है अथवा आपके घर में किसी अन्य शक्ति को जैसा उपर लिखा गया है ,को पूजा जा रहा है तो आपको ही उसका समाधान निकालना होगा कुछ इस तरह की सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे |आप स्वयं कभी किसी प्रेतिक ,पैशाचिक ,श्मशानिक शक्ति को घर में स्थान न दें न तो तात्कालिक लाभ के लिए कोई वचनबद्ध पूजा करें |यदि आप उपरोक्त परिस्थिति में हैं तो अपने घर में ऐसी शक्ति की स्थापना करें जो कुलदेवता /देवी और पितरों को प्रसन्न /संतुष्ट करे ,उन तक तालमेल उत्पन्न करे ,प्रेतिक या श्मशानिक या पैशाचिक या अन्य शक्ति के प्रभाव को कम करते हुए समाप्त करे |यह शक्ति पितरों को भी संतुष्ट करे और उनकी मुक्ति में भी सहायक हो यह देखना भी अति आवश्यक है | यहाँ मूल चरण यह होगा की ऐसी शक्ति की स्थापना हो जो कुलदेवता /देवी की भी कमी पूरी करते हुए उनका रिक्त स्थान पूर्ण करें |यह शक्ति ऐसी हो की घर में या व्यक्ति पर प्रभावी किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति के प्रभाव को रोकने की क्षमता रखे और उन्हें हटा सके ,साथ ही उस नकारात्मक शक्ति को भी घर में इनकी स्थापना स्वीकार्य हो |उन्हें यह न लगे की किसी प्रकार का व्यवधान उनके लिए उत्पन्न किया जा रहा ,हालांकि व्यवधान होगा ही उनके लिए किन्तु धीरे -धीरे |यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की घर में या व्यक्ति द्वारा भूल वश या स्वार्थ वश या पूर्वज्जों की गलती वश किसी भी कारण पूजी जा रही किसी शक्ति को भी हटाने की क्षमता रखे |इसके बाद अपने कुलदेवता /देवी को स्थान दे ,नियमानुसार उनकी पूजा करें |यदि उनका पता आपको नहीं चलता कि कौन आपके कुलदेवता /देवी हैं या थे तो उपर कही गयी शक्ति की स्थापना करें जो इनकी कमी पूरी कर दे और वही रूप ले ले जो कल के कुलदेवता /देवी की थी |तब जाकर आपके उपाय भी सफल होंगे और आपकी पूजा भी आपके ईष्ट तक पहुंचेगी | 👉यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की यह स्वयं में पूर्ण हो और मोक्ष भी दे सके इतने उच्च स्तर की हो |यह बीच की टूटी सभी कड़ियों को खुद में समाहित रखते हुए मात्र नाम से दी जा रही पूजा को भी पूर्ण कर सके अर्थात इसी शक्ति में अन्य देवताओं जैसे स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता /देवी सबका आह्वान हो सके |इसका एक आधार हो और नियमित पूजा हो तो उपाय भी काम करेंगे ,नकारात्मक शक्तियाँ भी हटेंगी ,पित्र भी संतुष्ट होंगे और ईष्ट प्रसन्नता भी हो जायेगी

🌹।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।।🌹
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 👉पूजा -पाठ फलित नहीं होगा यदि यह बाधाएं हैं तो -.>
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  👉जब भी किसी समस्या की बात आती है तो अंत में यही पूछा जाता है की इसका क्या उपाय है ,क्या निवारण है और निवारण ,उपाय लिखा भी जाता है 

 👉|सभी लोग जो भी किसी समस्या से परेशान होते हैं वह कोई न कोई उपाय करते हैं ,कुछ लोग बहुत से उपाय करते हैं किन्तु अधिकतर लोग अंत में यही कहते हैं की उपाय काम नहीं किये या उपाय काम नहीं करते |

 👉बहुत कम प्रतिशत लोगों के उपाय सफल होते हैं जबकि अधिकतर की समस्या या तो जस की तस रहती है या बढ़ ही जाती है |

 👉कुछ लोग उपाय करते -करते इतने थक जाते हैं की अंत में यही कहते हैं और मान लेते हैं की भाग्य ही अंतिम है, उसे कोई नहीं बदल सकता ,जो भाग्य में लिखा है वही होगा |यहाँ तक की उनका विश्वास ईश्वर और पूजा -पाठ पर से भी उठने लगता है |

 👉कुछ लोग समस्या को भी भाग्य ही मान लेते हैं भले वह ठीक हो सकता हो अथवा भाग्य में न हो या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुआ हो |कारण की उनके उपाय काम नहीं करते |

 👉आखिर करें तो क्या इसलिए कष्ट को ही भाग्य मान संतोष कर लिया | टोने -टोटको के उपाय कुछ हद तक काम करते हैं किन्तु बड़े उपाय अधिकतर के लिए अक्सर काम नहीं करते |टोने -टोटकों में किसी उच्च शक्ति या देवी -देवता का उपयोग न होकर वस्तुगत उरा और मानसिक ऊर्जा का प्रक्षेपण होता है इसलिए यह कुछ काम कर जाते हैं यदि कोई छोटी -मोटी समस्या हुई तो ,किन्तु बड़ी समस्या के उपाय काम नहीं कर पाते क्योंकि बड़ी शक्तियों का प्रयोग असफल हो जाता है 

 👉|कालसर्प ,पित्र दोष ,अकाल मृत्यु भय ,गंभीर रोग ,मारक -कष्टकारक ग्रह के प्रभाव ,ब्रह्म -जिन्न -प्रेत बाधा के प्रभाव ,ईष्ट रुष्टता ,गंभीर आभिचारिक प्रयोग जैसे समस्या के उपाय अधिकतर के लिए असफल होते हैं क्योंकि यहाँ उच्च शक्तियों की आवश्यकता होती है |

  👉ज्योतिष हो या तंत्र सबमे उपाय की अवधारणा है और यह किसी न किसी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं ,किसी न किसी देवता का प्रतिनिधित्व करते हैं |उस देवता को प्रसन्न कर अथवा शन्ति कर ही समस्या निवारण होता है |

 👉जब उपाय किया ज्जाता है तो आशा की जाती है की वह देवता या शक्ति प्रसन्न होगा या शांत होगा और व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति मिलेगी |इसके लिए उपाय की ऊर्जा उस देवता तक पहुंचनी चाहिए अर्थात उपाय की पूजा देवता को मिलनी चाहिए ज्जिससे वह प्रसन्न हो या शांत हो 

 👉|अधिकतर मामलों में उपाय की उरा देवता तक नहीं पहुँचती या पूजा उसे नहीं मिलती |व्यक्ति अथवा पंडित पूरी तन्मयता से उपाय करता है किन्तु फिर भी लाभ नहीं होता क्योंकि जहाँ पूजा की ऊर्जा जानी चाहिए वहां नहीं जाती ,वह बीच में या तो किसी और द्वारा ले ली जाती है या बिखर जाती है |व्यक्ति सोच लेता है उपाय कर दिए समस्या हल होनी चाहिए ,किन्तु समस्या हल नहीं होती |कभी -कभी तो बढ़ भी जाती है |पंडित ने अपना कर्म कर दिया की अमुक पूजा करा दिया ,अपना दक्षिणा लिया और काम समाप्त मान लिया |उन्हें भी नहीं पता की पूजा जा कहाँ रही या काम करेगी या नहीं |

 👉शास्त्र में लिखा है यह करने से यह समस्या हल होगी ,उसने बताई और पूजा कर दी |

 👉ज्योतिषी ने किसी को अकाल मृत्यु भय से बचने को महामृत्युंजय जप बताया ,व्यक्ति ने ज्योतिषी के माध्यम से ही अथवा पंडित से जप करवा भी दिया किन्तु फिर भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हुई और उसकी मृत्यु हो गयी |अब वह महामृत्युंजय का जप गया कहाँ |उसका लाभ क्यों नहीं मिला |न पंडित जानता है न ज्योतिषी |व्यक्ति से सम्बन्धित लोग खुद मान लेते हैं की इतना बड़ा संकट था की महामृत्युंजय भी नहीं बचा सका या उन्हें कहा जाता है की समस्या बहुत गंभीर थी इसलिए जप बचा नहीं सका |यहाँ समस्या यह थी की महामृत्युंजय जप महादेव तक पहुंचा ही नहीं तो जान बचेगी कहाँ से |

  👉आश्चर्यचकित मत होइए और यह मत सोचिये की अब महादेव से भी बड़ा कोई हो गया क्या जो उन तक जप नहीं पहुंचा और कहीं और चला गया या महामृत्युंजय का जप भी कोई रोक सकता है क्या |ऐसा होता है और जप वातावरण में बिखर जाता है ,महादेव तक नहीं पहुँचता 

 👉|कारण की महादेव ने ही वह तंत्र बनाया है जिससे उन तक जप पहुंचे |वह तंत्र बीच से टूटा हुआ है तो जप महादेव तक नहीं पहुंचेगा |महादेव भी अपने ही बनाए तंत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकते |जो नियम और तंत्र महादेव और शक्ति ने मिलकर बनाया है उससे वह खुद बंधे हुए हैं |यदि वह किसी व्यक्ति के लिए तोड़ते हैं तो विक्षोभ हो जाएगा ,इसलिए वे उस तंत्र के अनुसार ही फल देते हैं |उन्होंने सभी के लिए एक विशिष्ट नियम और ऊर्जा संरचना बनाई है जिसके अनुसार ही ऊर्जा स्थानान्तरण होता है |उन तक पहुंचता है और उनसे व्यक्ति तक पहुंचता है |बीच में कुछ विशिष्ट कड़ियाँ हैं जो ऊर्जा रूपांतरण करती हैं |यह कड़ियाँ यदि टूट जाएँ या न हो तो महादेव तक ऊर्जा नहीं पहुंचेगी और उनकी ऊर्जा व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी |यह नियम सभी प्रकार के पूजा पाठ में ,उपाय में लागू होता है |व्यक्ति यदि सीधे उनतक पहुँच सकता तो फिर व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |यह बीच की कड़ियाँ ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल और मुख्य रूप से कुलदेवता /देवी होते हैं जो पृथ्वी के व्यक्ति और महादेव या देवताओं के बीच की कड़ी होते हैं |यह महादेव और शक्ति के ही अंश हैं किन्तु यह उनकी पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील ऊर्जा रूप हैं और बीच की कड़ी हैं |जितने भी भूत -प्रेत -ब्रह्म आदि हैं वह भी महादेव के ही अंतर्गत आते हैं अतः इनके द्वारा उत्पन्न व्यवधान में भी महादेव सीधे हस्तक्षेप नहीं करते |अब हम बताते हैं की क्यों पूजा महादेव या किसी देवता तक नहीं पहुंचती या उपाय असफल क्यों हो जाते हैं |
  👉उपाय तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक वह कहीं स्वीकार न हों |उपाय एक ऊर्जा प्रक्षेपण है |उपाय से ऊर्जा उत्पन्न कर एक निश्चित दिशा में भेजी जाती है |यह ऊर्जा जब तक कहीं स्वीकार न की जाए अंतरिक्ष में निरुद्देश्य विलीन हो जाती है और कोई लाभ नहीं मिलता अथवा यह ऊर्जा अपने गंतव्य तक न पहुंचे ,किसी और द्वारा ले ली जाए तो भी असफल हो जाती है ,अथवा उत्पन्न ऊर्जा का परिवर्तन प्राप्तकर्ता के योग्य ऊर्जा में न हो पाए तो भी अपने उद्देश्य में ऊर्जा सफल नहीं होती | लोगों के कष्टों के हजारों उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं ,इनमे ज्योतिषीय ,कर्मकांडीय अर्थात वैदिक पूजन प्रधान और तांत्रिक उपाय होते हैं |

 👉इन उपायों में छोटे टोटकों से लेकर बड़े -बड़े अनुष्ठान तक होते हैं |इन शास्त्रों में यह कहीं नहीं लिखा की कैसे यह उपाय काम करते हैं |किस सूत्र पर कार्य करते हैं ,कैसे पितरों-देवताओं तक ऊर्जा पहुँचती है ,कैसे यहाँ के पदार्थों का पित्र लोक -देवलोक के पदार्थों में परिवर्तन होता है ,कौन यह ऊर्जा स्थानान्तरण करता है ,कब यह क्रिया अवरुद्ध हो जाती है ,कौन इस कड़ी को प्रभावित कर सकता है ,कैसे उपायों से कितनी ऊर्जा किस प्रकार उत्पन्न होती है |कहीं कोई सूत्र नहीं दिए गए ,क्योंकि जब यह उपाय बनाए गए तब के लोग इन सूत्रों को समझते थे |उन्हें इसकी क्रियाप्रणाली पता थी |

 👉उस समय के ऋषियों को यह अनुमान ही नहीं था की आधुनिक युग जैसी समस्या आज के मानव उत्पन्न कर सकते हैं ,अतः उन्होंने इन्हें नहीं लिखा |उन्होंने जो संस्कार बनाए उसे यह मानकर बनाए की यह लगातार माने जायेंगे |इन्ही संस्कारों में उपायों की क्रिया के सूत्र थे अतः लिखने की जरूरत नहीं समझी |जब संकार छूटे तो सूत्र टूट गए |लोगों की समझ में अब नहीं आता की हो क्या गया |लोग अपनी इच्छाओं से चलने लगे तथा व्यतिक्रम उत्पन्न हो गया ऊर्जा संचरण में और सबकुछ बिगड़ गया |
 👉कुछ सूत्रों को पितरों के सम्बन्ध में गरुण पुराण में दिया गया है किन्तु पूरी तकनिकी वहां नहीं है क्योंकि बीच की कड़ी सामान्य जीवन से सम्बन्धित है |गरुण पुराण बताता है की विश्वेदेवा पदार्थ को बदलकर पित्र की योनी अनुसार उन्हें पदार्थ उपलब्ध कराते हैं ,किन्तु विश्वदेव तक ही कुछ न पहुंचे तो क्या करें 

 👉|विश्वदेव ही नाराज हो जाएँ तो क्या करें |आचार्य करपात्री जी ने विश्वेदेवा की कार्यप्रणाली को बहुत अच्छे उदाहरण से बताया है किन्तु समस्या उत्पन्न उर्जा के वहां तक ही पहुँचने में होती है |उनके द्वारा स्वीकार करने और परिवर्तित कर पितरों को प्रदान करने में ही होती है |यही हाल सभी पूजा पाठ का होता है |

 👉लोग कहते हैं की यहाँ कुछ भी चढ़ाया भगवान् नहीं खाता या नहीं लेता ,किन्तु ऐसा नहीं है भगवान् को यहाँ का भोग उसके स्वीकार करने योग्य ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है और वह वहां पहुंचता है किसी अन्य रूप में |तभी तो प्रसाद आदि को परम पवित्र माना जाता है और चढ़ाए पुष्प आदि को जलाया नहीं जा सकता |उसे स्वयं विघटित होने दिया जाता है |भगवान् को प्रदान की आ रही पूया की ऊर्जा का रूपांतरण उनके स्तर तथा लोक के अनुसार कुलदेवता और विश्वदेव करते हैं |
उपाय ,पूजा -पाठ ,ऊर्जा रूपांतरण के सूत्र हमारे पूर्वज ऋषियों को ज्ञात थे और तदनुसार सभी प्रक्रिया ब्रह्माण्ड की ऊर्जा संरचना की क्रियाप्रणाली के आधार पर हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा बनाई गयी थी जो की आधुनिक वैज्ञानिकों से लाखों गुना श्रेष्ठ वैज्ञानिक थे |इस प्रणाली में एक त्रुटी पूरे तंत्र को बिगाड़ देती है |चूंकि यह प्रणाली प्रकृति की ऊर्जा संरचना पर आधारित है अतः यहाँ देवी -देवता भी हस्तक्षेप नहीं करते ,क्योंकि वह भी उन्ही सूत्रों पर चलते हैं |उनकी उत्पत्ति भी उन्ही सूत्रों पर आधारित है ,उन्हें भी उन्ही सूत्रों पर ऊर्जा दी जाती है ,उन्ही सूत्रों पर उन तक भी पूजा पहुँचती है |इस प्रकार ईष्ट चाहे कितना भी बड़ा हो ,देवी -देवता चाहे कितना ही शक्तिशाली हो कड़ियाँ टूटने पर कड़ियाँ नहीं बना सकता |सीधे कहीं हस्तक्षेप नहीं कर सकता |विरल स्थितियों में व्यक्ति विशेष के लिए इनके हस्तक्षेप होते हैं किन्तु यह हस्तक्षेप पित्र संतुष्टि अथवा देवताओं को पूजा मिलने को लेकर नहीं रहे हैं |पूजाओं की सबसे मूल कड़ी व्यक्ति के खानदान के मूल पूर्वज ऋषि के देवता या देवी होते हैं जिन्हें बाद में कुलदेवता /देवी कहा जाने लगा |इनका सीधा सम्बन्ध विश्वदेवा स्वरुप से होता है ,जो की पूजन स्थानान्तरण के लिए उत्तरदाई होते हैं |कुल देवता /देवी ब्रह्माण्ड की उच्च शक्तियों जिन्हें देवी /देवता कहा जाता है और मनुष्य के बीच की कड़ी हैं और यह पृथ्वी की ऊर्जा तथा ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच सामंजस्य बनाते हैं |यह कड़ी जहाँ टूटी सबकुछ टूट जाता है और फिर चाहे कितनी भी पूजा - शान्ति कराई जाए देवताओं तक दी जा रही पूजा नहीं पहुँचती और वह असंतुष्ट ही रह जाते हैं या प्रसन्न नहीं होते |
  👉कुलदेवता प्रत्येक वंश के उत्पत्ति कर्ता ऋषि के वह आराध्य हैं जिनकी आराधना उन्होंने अपने वंश की वृद्धि और रक्षा के लिए अपने वंश के लिए उपलब्ध सामग्रियों के साथ अपने लिए उपयुक्त समय में की थी |जिस ऋषि और वंश की जैसी प्रकृति ,कर्म और गुण थे वैसे उन्होंने अपने कुलदेवता और देवी चुने किन्तु यह ध्यान रखा की सभी शिव परिवार से ही हों |कारण की शिव परिवार ही उत्पत्ति और संहार दोनों करता है |इनके बीच के कर्म ही अन्य देवताओं के अंतर्गत आते हैं |दूसरा कि शिव परिवार ही ऊर्जा का वह माध्यम है जो ब्रह्माण्ड से लेकर पृथ्वी तक समान रूप से व्याप्त है 

 👉|तीसरा कि शिव परिवार की ऊर्जा ही पृथ्वी की सतह पर सर्वत्र व्याप्त है जो सतह पर पृथ्वी की ऊर्जा से मिलकर अलग स्वरुप ग्रहण करता है |चौथा पृथ्वी की समस्त सतही शक्तियाँ जैसे भूत ,प्रेत ,पिशाच ,ब्रह्म ,जिन्न ,डाकिनी ,शाकिनी ,श्मशानिक भैरव -भैरवी ,क्षेत्रपाल आदि सभी शिव के अधीन होते हैं |

 👉इन कारणों से सभी कुलदेवता शिव परिवार से माने गए |कुलदेवता /देवी वह सेतु हैं जो व्यक्ति /वंश और ब्रह्माण्ड की ऊर्जा में समन्वय का काम करते हैं साथ ही यहाँ की स्थानिक शक्तियों से सुरक्षा भी करते हैं 

 👉|यह वह बैंक हैं जो मुद्रा विनिमय जैसी क्रिया कर आपके द्वारा प्रदत्त मुद्रा अर्थात पूजन -भोज्य -अर्पित पदार्थ को बदलकर आपके पितरों तक ,आपके ईष्ट तक पहुंचाते हैं |यह वह चौकीदार हैं जो आपके वंश की ,परिवार की ,व्यक्ति की सुरक्षा २४ घंटे और १२ महीने करते हैं ताकि आपको किसी नकारात्मक ऊर्जा से कष्ट न हो |
 👉इनकी ठीक से पूजा न होने पर ,इन्हें भूल जाने पर यह असंतुष्ट या रुष्ट हो जाते हैं और पूजा ईष्ट तक नहीं जाने देते या नहीं भेजते |इसलिए उपाय काम नहीं करते |महामृत्युंजय कराइए किन्तु कुलदेवता यदि रुष्ट हैं तो महादेव तक जप नहीं जाएगा |महादेव का ही नियम है तो वह सीधे पूजा नहीं ले सकते |लाभ नहीं होगा |

 👉आपके घर में किसी बड़ी नकारात्मक या आसुरी शक्ति का वास हो या कोई ब्रह्म -प्रेत -जिन्न -वीर -सहीद -सती -साईं आप द्वारा पूजा जाता हो तो यह धीरे -धीरे आपकी पूजा खुद लेने लगता है और अपनी शक्ति बढाता है जिससे कुलदेवता की पूजा बाधित होती है |कुछ समय बाद यह कुलदेवता का स्थान ले लेता है और कुलदेवता रुष्ट हो जाते हैं |अब सभी पूजा यह ले लेगा और आपके ईष्ट तक कोई पूजा नहीं पहुंचेगी |आप कोई उपाय करें ,कोई अनुष्ठान कराएं सफल नहीं होगा ,कोई पूजा करें देवता को नहीं मिलेगा |आप मात्र खुद को संतुष्टि देंगे यह मानकर की आप पूजा कर रहे या करा रहे पर परिणाम नहीं मिलेगा |अब यह भी शिव के ही गण हैं |इन्हें भी शिव ने ही बनाया है |कुलदेवता भी शिव के ही अंश हैं तो शिव सीधे कैसे हस्तक्षेप करें |कुलदेवता की ठीक से पूजा न हो रही हो और कोई आसुरी शक्ति का प्रवेश हो जाय तो कुछ समय बाद वह सभी पूजा लेने लगता है कुलदेवता स्थान छोड़ देते हैं |फिर वह शक्ति उनका स्थान ले लेता है ,जब उसकी पूजा बंद ,खानदान की समाप्ति शुरू |

 👉कुलदेवता की अनुपस्थिति में पूजा ईष्ट तक नहीं जा रही और सभी उपाय असफल |एक तो कष्ट की समस्या दुसरे उपाय भी काम नहीं कर रहे |
पितरों की असंतुष्टि भी कुलदेवता /देवी को रुष्ट कर देती है क्योंकि इन पितरों द्वारा वह पूजित हुए होते हैं |पितरों का सीधा सम्बन्ध कुलदेवता से होता है |कुलदेवता /देवी रुष्ट तो वह सहायक नहीं होते और तब कोई पूजा -पाठ फलित नहीं होता |उपायों की असफलता का एक कारण किसी देवी -देवता का क्रोध भी हो सकता है |यदि कभी किसी संकल्पित अनुष्ठान या पूजा में कोई गलती हो गयी हो अथवा आपने या आपके पूर्वजों ने किसी देवी -देवता की मनौती आदि मानी हो और पूर्ण न की हो तो कोई देवी -देवता रुष्ट और क्रोधित हो सकता है |आज्ज आपको पता नहीं ,याद नहीं किन्तु इसका परिणाम आप भुगतते हैं |उपाय या पूया -पाठ किये जाने पर यह उसमे व्यवधान उत्पन्न करते हैं साथ ही उत्पन्न उर्जा का कुछ अंश भी खींच लेते हैं जिससे उपाय की शक्ति कम हो जाती है और लक्ष्य की दिशा में पर्याप्त शक्ति न लग पाने से उपाय असफल हो जाता है |यह स्थिति होने पर कुछ संकेत भी मिलते हैं और बार -बार एक ही प्रकार के स्वप्न अथवा घटनाएं आती हैं |
आप ध्यान दीजिये ,जब आप किसी पूजा -पाठ -अनुष्ठान का संकल्प लेते हैं तो उसमे शब्द आते हैं ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता तब ईष्ट देवता |अब आप सोचिये स्थान देवता की जगह कोई स्थानीय नकारात्मक शक्ति प्रभावी है ,ग्राम देवता को आप नहीं जानते या ठीक से पूज नहीं रहे |क्षेत्रपाल को आप नहीं जानते |आपके कुलदेवता /देवी रुष्ट हैं या कोई अन्य शक्ति आपके घर में प्रभावी है जो पूज्जा ले रही या आप अपनी गलतियों से किसी ऐसी शक्ति को पूज रहे अपने स्वार्थ में जो नैसर्गिक देवता की श्रेणी में नहीं आता ,तो आपके कुलदेवता आपका साथ छोड़ चुके हैं |ऐसे में अब कड़ी तो टूट गयी |आपकी पूजा वातावरण में बिखर जायेगी |अब आपके पूर्वज ऋषि मूर्ख तो थे नहीं जो उन्होंने पूजा -अनुष्ठान के संकल्प में इन लोगों का आह्वान किया था हमेशा |वह जानते थे की यह एक श्रृंखला है जो पूजा की ऊर्जा को ईष्ट तक पहुंचाती है ,तभी उन्होंने इसे सभी पूजा से जोड़ा था |आधुनिक लोग मन से भगवान् को मानने को ही मुख्य मान लिए और नियमों की अनदेखी की जिससे निष्काम पूजन तो ठीक ,किन्तु सकाम पूजन असफल होने लगे |सकाम पूजन के अपने नियम होते हैं और उन्हें उसी रूप में करना होता है यदि कोई विशिष्ट उद्देश्य है तो |उपाय इसी श्रेणी में आते हैं अतः यह असफल हो जाते हैं कड़ी टूटने पर ,फिर चाहे कितनी भी अधिक पूजा -जप किया जाए या किसी भी शक्ति को पूजा जाए |

 👉उपायों की असफलता का एक कारण यह भी होता है की जितनी ऊर्जा की आवश्यकता किसी कार्य की सफलता के लिए चाहिए होती है यदि उतनी ऊर्जा उपाय से न उत्पन्न हो तो वह कार्य सफल नहीं होता और उपाय की ऊर्जा व्यर्थ चली जाती है |किसी ग्रह की शान्ति के लिए शास्त्र में ६००० जप लिखा है तो कलयुग में इसका फल पाने के लिए आपको २४ हजार जप करना होगा |खुद जप करना होगा तभी ६००० का फल मिलेगा |आप किसी और से जप कराते है तो आपको उसका छठा हिस्सा ही मिलता है जबकि छठा हिस्सा जप करने वाले के हिस्से चला जाता है भले वह सम्पूर्ण जप का फल संकल्प से आपको दे दे |चार हिस्से विभिन्न शक्तियों के लिए चले जाते हैं |इस प्रकार २४ हजार जप कराने पर आपको मात्र ४००० जप का परिणाम मिला |पूरे २४ हजार जप का फल पाने के लिए आपको १४४००० जप कराने होंगे |तब जाकर आपका उद्देश्य पूरा होगा नियमतः |अब यहाँ एक समस्या और है की यदि किन्ही कारणों से यह जप से उत्पन्न ऊर्जा किसी शक्ति द्वारा कुछ हद तक भी रोक दी जाए या ले ली जाए या इसमें कमी कर दी जाए तो आपको लाभ नहीं होगा क्योंकि आपकी जरूरत १४४००० की है |१४३००० पर आपका कार्य असफल हो आएगा और पूजा आपके लिए व्यर्थ हो जायेगी उद्देश्य विशेष के लिए |इसे रोकने या बीच में लेने का कार्य घर या स्थान पर सक्रीय नकारात्मक शक्तियाँ करती हैं जो नहीं चाहती की व्यक्ति उनके प्रभाव से मुक्त हो सुखी हो |

 👉उपाय आदि एक तकनिकी कार्य है |यहाँ मात्र भावनाओं का कोई महत्त्व नहीं होता ,क्योंकि आप एक ऊर्जा को पूजा या क्रिया से उत्पन्न कर अपने उद्देश्य के लिए किसी अन्य जगह भेज रहे |साथ में आप कह रहे की आपका अमुक कार्य हो अर्थात आप एक लक्ष्य को इंगित कर रहे |ऐसे में मात्र एक शब्द की त्रुटी आपका काम भी बिगाड़ सकती है और आपका अहित भी कर सकती है |एक गलत आचरण आपकी हानि कर सकती है ,क्योंकि उतन्न ऊर्जा कहीं तो लगनी है या बिखरनी है |उर्जा या शक्ति अनियंत्रित हुई तो हानि करेगी |शब्द ,क्रिया ,पदार्थ ,आचरण ,कर्म सबकुछ इस अवधि में सही होने चाहिए |उपायों में विशिष्ट प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है जो आपके लक्ष्य के अनुसार ही विशिष्ट कार्य करती है ,इसलिए यह पूरी दक्षता से होनी चाहिए |इसमें त्रुटी का कोई स्थान नहीं होता |अक्सर उग्र शक्ति की पूजा करते हुए लोग एक उद्देश्य भी रखते हैं और साथ ही यह भी मानकर चलते हैं की यह माँ है या पिता है जो गलती को क्षमा करेगा |उद्देश्य विशेष की पूजा में क्षमा नहीं होता क्योंकि आप निःस्वार्थ प्रेम या स्मरण नहीं कर रहे |आप तो स्वार्थ में पूज रहे और उसकी शक्ति को किसी उद्देश्य में लगाना चाह रहे |ऐसे में कोई गलती वह क्षमा नहीं करता और आपको गलती के अनुसार सजा भी मिलती है |

 👉कभी -कभी उपाय करने पर समस्या और बढ़ जाती है |कारण यह होता है की उपाय करते समय गलती हो जाती है और ऊर्जा अनियंत्रित हो खुद का ही अहित कर जाती है |कभी -कभी ऐसा भी होता है की घर में उपस्थित किसी शक्ति को आपके उपाय और पूजा पाठ से कष्ट होता है और वह उपद्रव शुरू कर देता है ,ताकि आप उपाय या पूजा पाठ बंद कर दें |उपाय से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जबकि यह शक्तियाँ नकारात्मक गुण की होती है ,इसलिए इन्हें कष्ट होता है और यह उपद्रव करती हैं |आप सोचते हैं की उपायों से हानि हो रही और आप उपाय बंद कर देते हैं |स्थिति यथावत बनी रहती है और समस्या जस की तस |जब -जब पूजा -पाठ होता है घर में समस्याएं और बढ़ जाती हैं |कभी -कभी ढेर सारे उपाय करने पर ,बड़े -बड़े अनुष्ठान करने पर भी परिणाम नहीं मिलता |समझ नहीं आता की आखिर यह हो क्या रहा और पूजा जा कहाँ रही |यह भी इन नकारात्मक शक्तियों के कारण होता है जो पूजा खुद लेते हुए अपनी शक्ति बढाते हैं और खुद को देवता की तरह व्यक्त करते हैं |
 👉अंत में समाधान की बात |कोई पंडित ,कोई ज्योतिषी ,कोई तांत्रिक आपके कुलदेवता /देवी को संतुष्ट नहीं कर सकता ,उन्हें वापस नहीं ला सकता |वह मात्र उपाय कर सकता है ,उपाय बता सकता है किन्तु वह तभी सफल होगा जब उपरोक्त स्थितियां न हों |कुलदेवता /देवी की संतुष्टि आपको करनी होगी ,उनकी रुष्टता आप ही दूर कर सकते हैं ,अगर वह खानदान छोड़ चुके हैं तो उन्हें आप ही ला सकते हैं या उनकी अन्य रूप में स्थापना आप ही कर सकते हैं |आपको ही यह करना होगा ,दूसरा इनमे कुछ नहीं कर सकता |अगर आपके घर में किसी अन्य शक्ति का वास है अथवा आपके घर में किसी अन्य शक्ति को जैसा उपर लिखा गया है ,को पूजा जा रहा है तो आपको ही उसका समाधान निकालना होगा कुछ इस तरह की सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे |आप स्वयं कभी किसी प्रेतिक ,पैशाचिक ,श्मशानिक शक्ति को घर में स्थान न दें न तो तात्कालिक लाभ के लिए कोई वचनबद्ध पूजा करें |यदि आप उपरोक्त परिस्थिति में हैं तो अपने घर में ऐसी शक्ति की स्थापना करें जो कुलदेवता /देवी और पितरों को प्रसन्न /संतुष्ट करे ,उन तक तालमेल उत्पन्न करे ,प्रेतिक या श्मशानिक या पैशाचिक या अन्य शक्ति के प्रभाव को कम करते हुए समाप्त करे |यह शक्ति पितरों को भी संतुष्ट करे और उनकी मुक्ति में भी सहायक हो यह देखना भी अति आवश्यक है |
यहाँ मूल चरण यह होगा की ऐसी शक्ति की स्थापना हो जो कुलदेवता /देवी की भी कमी पूरी करते हुए उनका रिक्त स्थान पूर्ण करें |यह शक्ति ऐसी हो की घर में या व्यक्ति पर प्रभावी किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति के प्रभाव को रोकने की क्षमता रखे और उन्हें हटा सके ,साथ ही उस नकारात्मक शक्ति को भी घर में इनकी स्थापना स्वीकार्य हो |उन्हें यह न लगे की किसी प्रकार का व्यवधान उनके लिए उत्पन्न किया जा रहा ,हालांकि व्यवधान होगा ही उनके लिए किन्तु धीरे -धीरे |यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की घर में या व्यक्ति द्वारा भूल वश या स्वार्थ वश या पूर्वज्जों की गलती वश किसी भी कारण पूजी जा रही किसी शक्ति को भी हटाने की क्षमता रखे |इसके बाद अपने कुलदेवता /देवी को स्थान दे ,नियमानुसार उनकी पूजा करें |यदि उनका पता आपको नहीं चलता कि कौन आपके कुलदेवता /देवी हैं या थे तो उपर कही गयी शक्ति की स्थापना करें जो इनकी कमी पूरी कर दे और वही रूप ले ले जो कल के कुलदेवता /देवी की थी |तब जाकर आपके उपाय भी सफल होंगे और आपकी पूजा भी आपके ईष्ट तक पहुंचेगी | 

 👉यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की यह स्वयं में पूर्ण हो और मोक्ष भी दे सके इतने उच्च स्तर की हो |यह बीच की टूटी सभी कड़ियों को खुद में समाहित रखते हुए मात्र नाम से दी जा रही पूजा को भी पूर्ण कर सके अर्थात इसी शक्ति में अन्य देवताओं जैसे स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता /देवी सबका आह्वान हो सके |इसका एक आधार हो और नियमित पूजा हो तो उपाय भी काम करेंगे ,नकारात्मक शक्तियाँ भी हटेंगी ,पित्र भी संतुष्ट होंगे और ईष्ट प्रसन्नता भी हो जायेगी

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🌺🕉️ शुभ सोमवार🌺शुभ प्रभात् 🕉️🌺 2077-विजय श्री हिंदू पंचांग-राशिफल-1942 🌺-आज दिनांक--01.03.2021-🌺 श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 74.30 - रेखांतर मध्य मान - 75.30 शिक्षा नौकरी आजीविका विवाह भाग्योन्नति (प्रामाणिक जानकारी--प्रभावी समाधान) --------------------------------------------------------- -विभिन्न शहरों के लिये रेखांतर(समय) संस्कार- (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट---------जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट------अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट-------------मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट------बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54 मिनट-जैसलमेर -15 मिनट ___________________________________ _____________आज विशेष_____________ कार्यसिद्धि के संकेतक हैं सपनों के कुछ दृश्य ____________________________________ आज दिनांक...................... 01.03.2021 कलियुग संवत्.............................. 5122 विक्रम संवत.................................2077 शक संवत....................................1942 संवत्सर.................................. श्री प्रमादी अयन..................................... उत्तरायण गोल......................................... .दक्षिण ऋतु.............................................वसंत मास...................................... फाल्गुन पक्ष.............................................कृष्ण तिथि...द्वितीया. प्रातः 8.35 तक/तृतीया(क्षय) वार..........................................सोमवार नक्षत्र........ उ.फाल्गु. प्रातः 7.36 तक / हस्त चंद्र राशि................कन्या. संपूर्ण (अहोरात्र) योग............ शूल. अपरा. 12.54 तक / गंड करण........................गर. प्रातः 8.35 तक करण......... वणिज. रात्रि. 7.11 तक / विष्टि ___________________________________ सूर्योदय.............................6.55.40 पर सूर्यास्त..............................6.32.09 पर दिनमान............................... 11.36.28 रात्रिमान...............................12.22.35 चंद्रास्त................ प्रातः 8.24.12 AM पर चंद्रोदय................ रात्रि. 8.45.51 PM पर सूर्य...................... .(कुंभ) 10.16.32.17 चंद्रमा.................. (कन्या) 05.09.35.44 राहुकाल........प्रातः 8.23 से. 9.50 (अशुभ) यमघंट.... पूर्वाह्न. 11.17 से 12.44 (अशुभ) अभिजित..... (मध्या)12.21 से 01.07 तक पंचक.................................आज नहीं है शुभ हवन मुहूर्त(अग्निवास)............. आज है दिशाशूल................................पूर्व दिशा दोष निवारण......दूध का सेवन कर यात्रा करें ___________________________________ चौघड़िया (दिन-रात)........केवल शुभ कारक * चौघड़िया दिन * अमृत.................प्रातः 6.56 से 8.23 तक शुभ................प्रातः. 9.50 से 11.17 तक चंचल...............अपरा. 2.11 से 3.38 तक लाभ................अपरा. 3.38 से 5.05 तक अमृत................ सायं. 5.05 से 6.32 तक * चौघड़िया रात्रि * चंचल..........सायं-रात्रि. 6.32 से 8.05 तक लाभ.....रात्रि. 11.11 से. 12.43 AM तक शुभ.....रात्रि. 2.16 AM से 3.49 AM तक अमृत....रात्रि. 3.49 AM से 5.22 AM तक चंचल....रात्रि. 5.22 AM से 6.55 AM तक ___________________________________ *शुभ शिववास की तिथियां* शुक्ल पक्ष-2-----5-----6---- 9-------12----13. कृष्ण पक्ष-1---4----5----8---11----12----30. ___________________________________ जानकारी विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड मूल(रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) नक्षत्रों में होता है तो नक्षत्र शांति को आवश्यक माना गया है.. आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार नामाक्षर.. 07.36 AM तक--उ.फाल्गुनी---4-----(पी) 01.05 PM तक---------हस्त---1-----(पू) 06.34 PM तक---------हस्त---2-----(ष) 12.02 AM तक---------हस्त---3-----(ण) 05.31 AM तक---------हस्त---4-----(ठ) उपरांत रात्रि तक----------चित्रा--1-----(पे) (पाया-रजत्) _______सभी की राशि कन्या रहेगी________ ___________________________________ ____________आज का दिन_____________ व्रत विशेष......................................नहीं दिन विशेष.................. मार्च 2021 आरंभ दिन विशेष...भद्रा. रात्रि. 7.11 से 5.46 AM सर्वा.सि.योग..................................नहीं सिद्ध रवियोग................................. नहीं __________________________________ _____________कल का दिन____________ दिनांक.............................02.03.2021 तिथि...............माघ कृष्णा चतुर्थी मंगलवार व्रत विशेष........................फाल्गुनी चतुर्थी दिन विशेष.....................................नहीं सर्वा.सि.योग................................. .नहीं सिद्ध रवियोग................................. नहीं ___________________________________ _____________आज विशेष ____________ सपने में दिखें ये चीजें तो... सपने में दिखें ये चीजें तो समझ लें कि आपका हर काम होने वाला है सिद्ध अक्सर लोग आपस में एक-दूसरे से बात करते हैं कि कल मैंने सपने में वो चीज़ देखी थी या मैं किसी बड़ी जगह पर गया था या मैं आकाश में उड रहा था, इस तरह की बहुत-सी चीज़ें होती हैं, जो हमें अक्सर सपने में दिखायी देती हैं। सपने में दिखें ये चीजें तो समझ लें कि आपका हर काम होने वाला है सिद्ध। अक्सर लोग आपस में एक-दूसरे से बात करते हैं कि कल मैंने सपने में वो चीज़ देखी थी या मैं किसी बड़ी जगह पर गया था या मैं आकाश में उड रहा था, इस तरह की बहुत-सी चीज़ें होती हैं, जो हमें अक्सर सपने में दिखायी देती हैं। लेकिन ये सपने केवल एक सवाल बनकर दिमाग में रह जाते हैं, क्योंकि हमें इनका जवाब नहीं पता होता। आपके उन्हीं सवालों का जवाब देने के लिये आचार्य इंदु प्रकाश बताएंगे सपनों के अर्थ के बारे में। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार सपने में दिखायी देनी वाली चीज़ों से व्यक्ति के जीवन या उसके भविष्य के बारे में बहुत कुछ पता लगाया जा सकता है। कहते हैं अगर रात के प्रथम प्रहर में सपने देखे जाये, तो उसका एक वर्ष में शुभाशुभ फल प्राप्त होता है। अगर दूसरे प्रहर में देखा जाये, तो नौ महीनों के अंदर उसका फल मिलता है। इसी तरह से रात्रि के तीसरे प्रहर में सपने देखने पर तीन महीनों में, चौथे प्रहर में देखने पर एक महीने में और रात्रि खत्म होने में जब कुछ ही समय रह जाये, तो उस समय सपने देखने पर दस दिन के अंदर और भोर, यानी सुबह के समय सपने देखने पर तुरंत फल मिलते हैं। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार सभी सपनों का अपना एक अलग और विशेष महत्व है। सपने मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। एक इष्ट फल को बताने वाले, यानी पॉजिटिव चीज़ों को बताने वाले और दूसरे निगेटिव चीज़ों को बताने वाले। अगर सपने में आप खुद को किसी नदी या तालाब आदि में तैरते हुए देखें या आकाश में उड़ते हुए देखें। साथ ही सूर्य को उगते हुए देखें, लौ देखें या फिर किसी बड़े महल, मन्दिर या शिवालय पर खुद को चढ़ते हुए देखें, तो इसका मतलब है कि आपको अपने हर कार्य में सिद्धि मिलेगी। साथ ही आपको बता दें कि सपने में दही भात खाना भी शुभ और लाभदायक होता है। *संकलनकर्त्ता* श्री ज्योतिष सेवाश्रम सेवाश्रम संस्थान (राज) ___________________________________ ___________आज का राशिफल__________ मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ) आज का दिन मौज-मस्ती और आनन्द से भरा रहेगा- क्योंकि आप ज़िन्दगी को पूरी तरह जिएंगे। आपका बचाया धन आज आपके काम आ सकता लेकिन इसके साथ ही इसके जाने का आपको दुख भी होगा। जब आप अकेलापन महसूस करें तो अपने परिवार की मदद लीजिए। यह आपको अवसाद से बचाएगा। साथ ही यह समझदारी भरा फ़ैसला लेने में आपकी मदद करेगा। अपने प्रिय को आज निराश न करें- क्योंकि ऐसा करने की वजह से बाद में आपको पछताना पड़ सकता है। आप किसी बड़े व्यावसायिक लेन-देन को अंजाम दे सकते हैं और मनोरंजन से जुड़ी किसी परियोजना में कई लोगों का संयोजन कर सकते हैं। आज जीवनसाथी के साथ समय बिताने के लिए आपके पास पर्याप्त समय होगा। आपके प्रेम को देखकर आज आपका प्रेमी गदगद हो जाएगा। जीवनसाथी की ख़राब सेहत का असर आपके काम-काज पर भी पड़ सकता है, लेकिन आप किसी तरह चीज़ें संभालने में क़ामयाब रहेंगे। वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो) आज आपका आत्मविश्वास और ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा। विवाहित दंपत्तियों को आज अपनी संतान की शिक्षा पर अच्छा खासा धन खर्च करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्य कई चीज़ों की मांग कर सकते हैं। हर रोज़ प्रेम में पड़ने की अपनी आदत को बदलिए। आपके पास आज अपनी क्षमताओं को दिखाने के मौक़े होंगे। जरुरी कामों को समय न देना और फिजूल के कामों पर वक्त जाया करना आज आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। मुमकिन है कि आपका जीवनसाथी आज आपके लिए पर्याप्त समय न निकाल पाए। मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह) आज आप अपने दफ़्तर से जल्दी निकलने की कोशिश करें और वे काम करें जिन्हें आप वाक़ई पसंद करते हैं। रात के समय आप आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है क्योंकि आपके द्वारा दिया गया धन आज आपको वापस मिल सकता है। आपका गर्मजोशी भरा बर्ताव घर का माहौल ख़ुशनुमा कर देगा। कुछ ही लोग ऐसे इंसान के आकर्षण से बच सकते हैं, जिसके पास इतनी प्यारी मुस्कान हो। जब आप लोगों के साथ होंगे, तो आपकी महक फूलों की तरह चारों ओर फैलेगी। फूल देकर अपने प्यार का इज़हार करें। आपका प्रतिस्पर्धी स्वभाव आपको दूसरों से आगे रखने में मदद करेगा। वक्त की नाजाकत को समझते हुए आज आप सब लोगों से दूरी बनाकर एकांत में वक्त बिताना पसंद करेंगे। ऐसा करना आपके लिए हितकर भी होगा। अगर आप अपने जीवनसाथी से स्नेह की आशा रखते हैं, तो यह दिन आपकी आशाओं को पूरा कर सकता है। कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो) आज के दिन शारीरिक बीमारी के सही होने की काफ़ी संभावनाएँ हैं और इसके चलते आप शीघ्र ही खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं। जो लोग अब तक पैसेे को बेवजह खर्च कर रहे थे आज उन्हें समझ आ सकता है कि पैसे की जीवन में क्या अहमियत है क्योंकि आज अचानक आपको पैसे की जरुरत पड़ेगी और आपके पास पर्याप्त धन नहीं होगा। अपनी उपयोगिता की ताक़त को सकारात्मक सोच और बातचीत के ज़रिए विकसित करें, ताकि आपके परिवार के लोगों को लाभ हो। आपकी आँखें इतनी चमकीली हैं कि वे आपके प्रिय की अंधेरी रात को भी रोशन कर सकती हैं। आज कार्यालय में आपको कुछ अच्छा समाचार सुनने को मिल सकता है। रात के समय आज आप घर के लोगों से दूर होकर अपने घर की छत या किसी पार्क में टहलना पसंद करेंगे। आज से पहले शादीशुदा ज़िन्दगी इतनी अच्छी कभी नहीं रही। सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे) आपकी शाम आज कई जज़्बातों से घिरी रहेगी और इसलिए तनाव भी दे सकती है। लेकिन ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आपकी ख़ुशी आपकी निराशाओं के मुक़ाबले आपको ज़्यादा आनंद देगी। समय और धन की कद्र आपको करनी चाहिए नहीं तो आने वाला वक्त परेशानियों भरा रह सकता है। दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन ख़ुशनुमा कर देंगे। अपने प्रिय की पुरानी बातों को माफ़ करके आप अपनी ज़िंदगी में सुधार ला सकते हैं। काम को मनोरंजन के साथ न मिलाएँ। आज आप नए विचारों से परिपूर्ण रहेंगे और आप जिन कामों को करने के लिए चुनेंगे, वे आपको उम्मीद से ज़्यादा फ़ायदा देंगे। अपने जीवनसाथी के चलते आप महसूस करेंगे कि स्वर्ग धरती पर ही है। कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो) आज आपके पति/पत्नि की सेहत तनाव और फ़िक्र की वजह बन सकती है। रात के समय आप आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है क्योंकि आपके द्वारा दिया गया धन आज आपको वापस मिल सकता है। लोगों और उनके इरादों के बारे में जल्दबाज़ी में फ़ैसला न लें। हो सकता है कि वे दबाव में हों और उन्हें आपकी सहानुभूति व विश्वास की ज़रूरत हो। अपने प्रिय को नज़रअंदाज़ करना घर पर तनाव का कारण बन सकता है। अपनी बौद्धिक क्षमताओं का इस्तेमाल अपने हित में करें। इसकी मदद से आप पेशेवर योजनाओं और नए विचारों को पूरा कर सकते हैं। काम को समय पर निपटाकर जल्दी घर जाना आज आपके लिए अच्छा रहेगा इससे आपके परिवार वालों को भी खुशी मिलेगी और आप भी तरोताजा महसूस करेेंगे। लोगों की दख़लअन्दाज़ी वैवाहिक जीवन में परेशानी खड़ी कर सकती है। तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते) आज के दिन मौज-मस्ती की यात्राएं और सामाजिक मेलजोल आपको ख़ुश रखेंगे और सुकून देंगे। जो लोग अब तक पैसे को बिना वजह ही उड़ा रहे थे आज उन्हें अपने आप पर काबू रखना चाहिए और धन की बचत करनी चाहिए। उस रिश्तेदार को देखने जाएँ, जिसकी तबियत काफ़ी समय से ख़राब है। ख़ुशी के लिए नए संबंध की प्रतीक्षा करें। आपमें बहुत-कुछ हासिल करने की क्षमता है- इसलिए अपने रास्ते में आने वाले सभी मौक़ों को झट-से दबोच लें। कार्यक्षेत्र के किसी काम में खराबी की वजह से आज आप परेशान रह सकते हैं और इस बारे में सोचकर अपना कीमती वक्त बर्बाद कर सकते हैं। आपका जीवनसाथी किसी फ़रिश्ते की तरह आपका बहुत ध्यान रखेगा। वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू) आज आपका बच्चों जैसा भोला स्वभाव फिर सतह पर आ जाएगा और आप शरारती मनोदशा में होंगे। जो व्यापारी अपने कारोबार के सिलसिले में घर से बाहर जा रहे हैं वो अपने धन को आज बहुत संभालकर रखें। धन चोरी होने की संभावना है। कुछ समय आप अपने शौक़ और अपने परिवार वालों की मदद में भी ख़र्च कर सकते हैं। आपके ईमानदार और ज़िंदादिल प्यार में जादू करने की ताक़त है। अपना क़ीमती समय सिर्फ़ योजना बनाने में बर्बाद न करें, बल्कि उसकी ओर क़दम बढ़ाएँ और उसपर अमल करना शुरू करें। कई कामों को छोड़कर आप आज अपने पसंदीदा कामों को करने का मन बनाएंगे लेकिन काम की अधिकता के कारण आप ऐसा नहीं कर पाएँगे। आपका जीवनसाथी आपको ख़ुश करने के लिए आज काफ़ी कोशिशें करता नज़र आएगा। धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे) आज आपकी सेहत को देखभाल की ख़ास ज़रूरत है। ग्रह नक्षत्रों की चाल आपके लिए आज अच्छी नहीं है, आज के दिन आपको अपने धन को बहुत सुरक्षित रखना चाहिए। पिता का तल्ख़ बर्ताव आपको नाराज़ कर सकता है। लेकिन हालात को नियंत्रण में रखने के लिए शांत रहें। इससे आपको फ़ायदा होगा। प्रेम के दृष्टिकोण से उत्तम दिन है। आज आपका कोई छुपा विरोधी आपको ग़लत साबित करने की पुरज़ोर कोशिश करेगा। जरुरी कामों को समय न देना और फिजूल के कामों पर वक्त जाया करना आज आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। पारिवारिक विवादों के कारण आज आपका वैवाहिक जीवन प्रभावित रह सकता है। मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी) अगर आज आपकी योजना बाहर घूमने-फिरने की है तो आपका वक़्त हँसी-ख़ुशी और सुकून भरा रहेगा। दीर्घावधि मुनाफ़े के नज़रिए से स्टॉक और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना फ़ायदेमंद रहेगा। घर के किसी सदस्य के व्यवहार की वजह से आप परेशान रह सकते हैं। आपको उनसे बात करने की जरुरत है। संभव है कि कोई आपसे अपने प्यार का इज़हार करे। व्यावसायिक साझीदार सहयोग करेंगे और आप साथ मिलकर टलते आ रहे कामों को पूरा कर सकते हैं। आज अपनेे विवेक का इस्तेमाल करते हुए ही घर के लोगों से बातें करें अगर आप ऐसा नहीं करते तो बेवजह के झगड़ों की वजह से आपका समय खराब हो सकता है। वैवाहिक जीवन के लिए विशेष दिन है। अपने जीवनसाथी को बताएँ कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द) आज के दिन दूसरों के साथ ख़ुशी बांटने से सेहत और खिलेगी। बैंक से जुड़े लेन-देन में काफ़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है। जो लोग आपके क़रीब हैं, वे आपका ग़लत फ़ायदा उठा सकते हैं। प्यार-मोहब्बत की नज़रिए से बेहतरीन दिन है। प्यार का मज़ा चखते रहें। सहकर्मियों और वरिष्ठों से मिला सहयोग आपके उत्साह में इज़ाफ़ा करेगा। इस राशि के उम्रदराज जातक आज के दिन अपने पुराने मित्रों से खाली समय में मिलने जा सकते हैं। जीवनसाथी से निकटता आज आपको ख़ुशी देगी। मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची) आज आप धार्मिक और आध्यात्मिक रुचि के काम करने के लिए अच्छा दिन है। कार्यक्षेत्र में या करोबार में आपकी कोई लापरवाही आज आपको आर्थिक नुक्सान करा सकती है। परिवार वालों का हँसी-मज़ाक भरा बर्ताव घर के वातावरण को हल्का-फुल्का और ख़ुशनुमा बना देगा। दफ़्तर में आपके दुश्मन भी आज आपके दोस्त बन जाएंगे - आपके सिर्फ़ एक छोटे-से अच्छे काम की बदौलत। इस राशि के लोगों को आज अपने आप को समझने की जरुरत है। यदि आपको लगता है कि आप दुनिया की भीड़ में कहीं खो गये हैं तो अपने लिए वक्त निकालें और अपने व्यक्तित्व का आकलन करें। कोई रिश्तेदार अचानक आपके घर आ सकता है, जिसके चलते आपकी योजनाएँ गड़बड़ा सकती हैं। __________________________________ 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ - संकलनकर्त्ता- ज्योतिर्विद् पं. रामपाल भट्ट श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ __________________________________

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Anita Sharma Feb 28, 2021

ज्ञान वाणी। राजस्थान के हाड़ोती क्षेत्र के बूंदी नगर में रामदासजी नाम के एक बनिया थे । वे व्यापार करने के साथ-साथ भगवान की भक्ति-साधना भी करते थे और नित्य संतों की सेवा भी किया करते थे । भगवान ने अपने भक्तों (संतों) की पूजा को अपनी पूजा से श्रेष्ठ माना है क्योंकि संत लोग अपने पवित्र संग से असंतों को भी अपने जैसा संत बना लेते हैं ।भगवान की इसी बात को मानकर भक्तों ने संतों की सेवा को भगवान की सेवा से बढ़कर माना है-‘प्रथम भक्ति संतन कर संगा ।’ रामदासजी सारा दिन नमक-मिर्च, गुड़ आदि की गठरी अपनी पीठ पर बांध कर गांव में फेरी लगाकर सामान बेचते थे जिससे उन्हें कुछ पैसे और अनाज मिल जाता था । एक दिन फेरी में कुछ सामान बेचने के बाद गठरी सिर पर रखकर घर की ओर चले । गठरी का वजन अधिक था पर वह उसे जैसे-तैसे ढो रहे थे । भगवान श्रीराम एक किसान का रूप धारण कर आये और बोले—‘भगतजी ! आपका दु:ख मुझसे देखा नहीं जा रहा है । मुझे भार वहन करने का अभ्यास है, मुझे भी बूंदी जाना है, मैं आपकी गठरी घर पहुंचा दूंगा ।’ गीता (९।१४) में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है—‘संत लोग धैर्य धारण करके प्रयत्न से नित्य कीर्तन और नमन करते हैं, भक्तिभाव से नित्य उपासना करते हैं । ऐसे प्रेमी संत मेरे और मैं उनका हूँ; इस लोक में मैं उनके कार्यों में सदा सहयोग करता हूँ ।’ ऐसा कह कर भगवान ने अपने भक्त के सिर का भार अपने ऊपर ले लिया और तेजी से आगे बढ़कर आंखों से ओझल हो गये । रामदासजी सोचने लगे—‘मैं इसे पहचानता नहीं हूँ और यह भी शायद मेरा घर न जानता होगा । पर जाने दो, राम करे सो होय ।’ यह कहकर वह रामधुन गाते हुए घर की चल दिए । रास्ते में वे मन-ही-मन सोचने लगे—आज थका हुआ हूँ, यदि घर पहुंचने पर गर्म जल मिल जाए तो झट से स्नान कर सेवा-पूजा कर लूं और आज कढ़ी-चपाती का भोग लगे तो अच्छा है । उधर किसान बने भगवान श्रीराम ने रामदासजी के घर जाकर गठरी एक कोने में रख दी और जोर से पुकार कर कहा—‘भगतजी आ रहे हैं, उन्होंने कहा है कि नहाने के लिए पानी गर्म कर देना और भोग के लिए कढ़ी-चपाती बना देना ।’ कुछ देर बाद रामदासजी घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सामान की गठरी कोने में रखी है । उनकी पत्नी ने कहा—‘पानी गर्म कर दिया है, झट से स्नान कर लो । भोग के लिए गर्म-गर्म कढ़ी और फुलके भी तैयार हैं ।’ रामदासजी ने आश्चर्यचकित होकर पूछा—‘तुमने मेरे मन की बात कैसे जान ली ।’ पत्नी बोली—‘मुझे क्या पता तुम्हारे मन की बात ? उस गठरी लाने वाले ने कहा था ।’ रामदासजी समझ गए कि आज रामजी ने भक्त-वत्सलतावश बड़ा कष्ट सहा । उनकी आंखों से प्रेमाश्रु झरने लगे और वे अपने इष्ट के ध्यान में बैठ गये । ध्यान में प्रभु श्रीराम ने प्रकट होकर प्रसन्न होते हुए कहा—‘तुम नित्य सन्त-सेवा के लिए इतना परिश्रम करते हो, मैंने तुम्हारी थोड़ी-सी सहायता कर दी तो क्या हुआ ?’ रामदासजी ने अपनी पत्नी से पूछा—‘क्या तूने उस गठरी लाने वाले को देखा था?’ पत्नी बोली—‘मैं तो अंदर थी, पर उस व्यक्ति के शब्द बहुत ही मधुर थे।’ रामदासजी ने पत्नी को बताया कि वे साक्षात् श्रीराम ही थे । तभी उन्होंने मेरे मन की बात जान ली। दोनों पति-पत्नी भगवान की भक्तवत्सलता से भाव-विह्वल होकर रामधुन गाने में लीन हो गये। संदेश -गीता (८।१४) में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है— अनन्यचेता: सततं यो मां स्मरति नित्यश: । तस्याहं सुलभ: पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिन: ।। अर्थात्—‘मेरा ही ध्यान मन में रखकर प्रतिदिन जो मुझे भजता है, उस योगी संत को सहज में मेरा दर्शन हो जाता है ।’

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🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠 प्राचीन समय से ही भारत में एक से बढ़कर एक धनुर्धर हुए हैं. लेकिन हमारे देश में धनुष-बाण की शुरुआत कब और कैसे हुई? यह एक रहस्य ही है. विश्व के प्राचीनतम साहित्य संहिता और अरण्य ग्रंथों में इंद्र के वज्र और धनुष-बाण का वर्णन मिलता है. वहीँ हिन्दू धर्म के 4 उपवेदों में से चौथा उपवेद धनुर्वेद का ही है. एक अन्य साहित्य में भी कुल 12 तरह के शस्त्रों का वर्णन किया गया है जिसमें धनुष-बाण का स्थान सबसे ऊपर माना गया है. आइए जानते हैं कुछ दिव्य धनुष और बाणों के बारे में. पिनाक धनुष: भगवान शंकर ने इसी धनुष के द्वारा ब्रह्मा से अमरत्व का वरदान पाने वाले त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था. भगवान शंकर ने इसी धनुष के एक ही तीर से त्रिपुरासुर के तीनों नगरों को ध्वस्त कर दिया था. बाद में भगवान शंकर ने इस धनुष को देवराज इंद्र को सौंप दिया था. पिनाक नामक यह वही शिव धनुष था जिसे देवताओं ने राजा जनक के पूर्वजों को दिया था जो अंत में धरोहर के रूप में राजा जनक को प्राप्त हुआ था. इसी पिनाक नामक धनुष को भगवान राम ने प्रत्यंचा चढ़ाकर तोड़ दिया था. कोदंड धनुष: कोदंड अर्थात ‘बांस’ का बना हुआ यह धनुष भगवान राम के पास था. ऐसी मान्यता है कि इस धनुष से छोड़ा गया बाण अपना लक्ष्य भेदकर ही वापस आता था. शारंग धनुष: सींग का बना हुआ यह धनुष भगवान श्रीकृष्ण के पास था. ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण इसी धनुष के द्वारा लक्ष्मणा स्वयंवर की प्रतियोगिता जीतकर लक्ष्मणा से विवाह किया था. गाण्डीव धनुष: यह धनुष अर्जुन के पास था. मान्यता है कि अर्जुन के गाण्डीव धनुष की टंकार से सारा युद्ध क्षेत्र गूंज जाता था. अर्जुन को यह धनुष अग्नि देवता से प्राप्त हुआ था और अग्नि देवता को यह धनुष वरुण देव से प्राप्त हुआ था. विजय धनुष: यह धनुष कर्ण के पास था. ऐसा माना जाता है कि कर्ण को यह धनुष उनके गुरु परशुराम ने प्रदान किया था. इस धनुष की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह किसी भी तरह के अस्त्र-शस्त्र से खंडित नहीं हो सकता था. जय श्री भोलेनाथ जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 ॐ नमोऽस्तुते 👏 नमस्कार शुभ रात्री वंदन 👣 💐 👏 🚩 🐚 🌹 नमस्कार 🙏 🚩 🌙✨💫💥🎪🌷🎉🕯🌹🙏🚩 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷

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आपकी दरिद्रता को दूर कर सकतें है राई के ये अचूक टोटके राई एक बहुत ही आम चीज हैं लेकिन तंत्र में इसे विशेष स्थान दिया गया है। प्राचीन तंत्र शास्त्रों में राई के कुछ ऐसे प्रयोग बताए गए हैं जो अचूक होते हैं और करते ही तुरंत असर दिखाते हैं। हालांकि इन उपायों को कभी भी किसी का बुरा करने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अर्थ बिना सब व्यर्थ है। जीवन के 90 प्रतिशत समस्याओं का समाधान अर्थ में छुपा है। इसीलिए नित्य एक नेक काम करना चाहिए जिससे की धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का जीवन चलता रहे। राई के टोटके आपको जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा दिलाते हैं। यदि कहीं से भी रुपयों का कोई आमद नजर नहीं आ रही हो और घर में निर्धनता का दौर चल रहा हो तो दरिद्रता दूर करने के लिए या अचूक उपाय करें और निश्चिंत हो जाएं। आपको धन के सारे रुके हुए मार्ग खुलने लगेंगे। कुछ टोटकों का प्रभाव अति -शीघ्र होता है। जानिए राई के टोटके और उनसे होने वाले फायदों के बारे में। दुर्भाग्य दूर करने हेतु : एक पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता रोग नष्ट हो जाते हैं। नजर उतारना : बुरी नजर उतारने के लिए राई के सात दाने, नमक की सात छोटी-छोटी डली, सात साबुत लाल मिर्च को लेकर नजर से पीड़ित बच्चे के सिर के उपर से सात बार उतारकर जलती आग में दाल दें। ध्यान रहे ये क्रिया करते समय किसी की भी टोक नहीं होनी चाहिए। समस्त कार्य बाएं हाथ से करना चाहिए। आग के लिए लकड़ी देसी आम की होनी चाहिए। भुत-प्रेत से दूरी : अगर किसी व्यक्ति पर भूत, प्रेत आदि हैं तो सरसों के कुछ दाने उसके ऊपर से उसार (वार) कर जला दें, सभी नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म हो जाएगा। व्यापर में वृद्धि : तीन अलग-अलग छोटे बर्तनों में तिल, साबुत धनिया तथा साबुत नमक मिलाकर अपने व्यापार स्थल पर रख दें। इससे व्यापार में वृद्धि होने लगेगी और ग्राहकी में साफ असर दिखने लगेगा। चिड़चिढ़ापन दूर करें : यदि व्यक्ति चिड़चिढ़ा हो रहा है तथा बात बात पर गुस्सा हो रहा है तो उसके ऊपर से राई मिर्ची उसार कर जला दें। तथा पीड़ित व्यक्ति को उसे देखते रहने के लिए कहें। काम बनने के लिए ये करें : यदि आप गुरुवार को घर से किसी काम के लिए जा रहे हैं तो गुरुवार के दिन राई का दान करें। ऐसा करने से आपका पूरा दिन शुभ रहता है। आप घर से जिस भी काम के लिए जाएंगे आपका वह काम अवश्य बनेगा। 🔥🚩🏵️🥀🌷💫🌻🌼🕉️🍁🌺🌴🌿✍️🙏❤️🌹🌱

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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गोत्र क्या है? सनातन धर्म के अंतर्गत वर्ण के साथ-साथ गोत्र को भी बेहद महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है। जहां एक ओर समान वर्ण में विवाह करने को मान्यता प्रदान की गई है वहीं इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी बताया है कि वर-वधु का गोत्र समान ना हो.... ऐसी मानयता है कि अगर समान गोत्र वाले स्त्री-पुरुष विवाह बंधन में बंध जाते हैं तो उनकी होने वाली संतान को रक्त संबंधित समस्याएं आ सकती हैं। कई बार गोत्र के विषय में पढ़ा और सुना है..... लेकिन गोत्र क्या है ?इसके विषय में हम जानते हैं? शायद नहीं.... बहुत ही कमलोग इस बात से अवगत होंगे कि आखिर गोत्र है और इसका निर्धारण कैसे होता है। आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गोत्र का शाब्दिक अर्थ बेहद व्यापक है... जिसकी समय-समय पर व्याखाया भी की जाती रही है। गोत्र शब्द की संधि विच्छेद पर ध्यान दें तो यह ‘गो’ यानि इन्द्रियां और ‘त्र’ यानि रक्षा करना से मिलकर बना है... अर्थात इन्द्रियों पर आघात से रक्षा करने वाला....जिसे “ऋषि” कहा जाता है। सनातन धर्म से संबंधित दस्तावेजों पर नजर डालें तो प्राचीनकाल में चार ऋषियों के नाम से गोत्र परंपरा की शुरुआत हुई, जिनके नाम ऋषि अंगिरा, ऋषि कश्यप, ऋषि वशिष्ठ और ऋषि भृगु हैं... कुछ समय पश्चात इनमें ऋषि जमदग्नि, ऋषि अत्रि, ऋषि विश्वामित्र और ऋषि अगस्त्य भी इसमें जुड़ गए। प्रैक्टिकल तौर पर देखा जाए तो गोत्र का आशय पहचान से है... यानि कौनसा व्यक्ति किस ऋषि का वंशज है। सामाजिक तौर पर देखा जाए तो 'गोत्र' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ‘एकत्रीकरण’ से संबंध रखता है। ॐ गं गणपतये नमः 👏 ॐ नम :शिवाय ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री भोलेनाथ ॐ सूर्याय नमः 🌅 👏 🌹 🚩 फेब्रुवारी महिने का आखरी दिवस 28 शुभ 🌅 रविवार जय श्री सुर्य नारायण 🌅 👣 💐 👏 ॐ नमो नारायणाय नमस्कार 🙏 🚩

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