🌹।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।।🌹 ============================= 👉पूजा -पाठ फलित नहीं होगा यदि यह बाधाएं हैं तो -.> ------------------------------------------------------------ 👉जब भी किसी समस्या की बात आती है तो अंत में यही पूछा जाता है की इसका क्या उपाय है ,क्या निवारण है और निवारण ,उपाय लिखा भी जाता है 👉|सभी लोग जो भी किसी समस्या से परेशान होते हैं वह कोई न कोई उपाय करते हैं ,कुछ लोग बहुत से उपाय करते हैं किन्तु अधिकतर लोग अंत में यही कहते हैं की उपाय काम नहीं किये या उपाय काम नहीं करते | 👉बहुत कम प्रतिशत लोगों के उपाय सफल होते हैं जबकि अधिकतर की समस्या या तो जस की तस रहती है या बढ़ ही जाती है | 👉कुछ लोग उपाय करते -करते इतने थक जाते हैं की अंत में यही कहते हैं और मान लेते हैं की भाग्य ही अंतिम है, उसे कोई नहीं बदल सकता ,जो भाग्य में लिखा है वही होगा |यहाँ तक की उनका विश्वास ईश्वर और पूजा -पाठ पर से भी उठने लगता है | 👉कुछ लोग समस्या को भी भाग्य ही मान लेते हैं भले वह ठीक हो सकता हो अथवा भाग्य में न हो या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुआ हो |कारण की उनके उपाय काम नहीं करते | 👉आखिर करें तो क्या इसलिए कष्ट को ही भाग्य मान संतोष कर लिया | टोने -टोटको के उपाय कुछ हद तक काम करते हैं किन्तु बड़े उपाय अधिकतर के लिए अक्सर काम नहीं करते |टोने -टोटकों में किसी उच्च शक्ति या देवी -देवता का उपयोग न होकर वस्तुगत उरा और मानसिक ऊर्जा का प्रक्षेपण होता है इसलिए यह कुछ काम कर जाते हैं यदि कोई छोटी -मोटी समस्या हुई तो ,किन्तु बड़ी समस्या के उपाय काम नहीं कर पाते क्योंकि बड़ी शक्तियों का प्रयोग असफल हो जाता है 👉|कालसर्प ,पित्र दोष ,अकाल मृत्यु भय ,गंभीर रोग ,मारक -कष्टकारक ग्रह के प्रभाव ,ब्रह्म -जिन्न -प्रेत बाधा के प्रभाव ,ईष्ट रुष्टता ,गंभीर आभिचारिक प्रयोग जैसे समस्या के उपाय अधिकतर के लिए असफल होते हैं क्योंकि यहाँ उच्च शक्तियों की आवश्यकता होती है | 👉ज्योतिष हो या तंत्र सबमे उपाय की अवधारणा है और यह किसी न किसी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं ,किसी न किसी देवता का प्रतिनिधित्व करते हैं |उस देवता को प्रसन्न कर अथवा शन्ति कर ही समस्या निवारण होता है | 👉जब उपाय किया ज्जाता है तो आशा की जाती है की वह देवता या शक्ति प्रसन्न होगा या शांत होगा और व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति मिलेगी |इसके लिए उपाय की ऊर्जा उस देवता तक पहुंचनी चाहिए अर्थात उपाय की पूजा देवता को मिलनी चाहिए ज्जिससे वह प्रसन्न हो या शांत हो 👉|अधिकतर मामलों में उपाय की उरा देवता तक नहीं पहुँचती या पूजा उसे नहीं मिलती |व्यक्ति अथवा पंडित पूरी तन्मयता से उपाय करता है किन्तु फिर भी लाभ नहीं होता क्योंकि जहाँ पूजा की ऊर्जा जानी चाहिए वहां नहीं जाती ,वह बीच में या तो किसी और द्वारा ले ली जाती है या बिखर जाती है |व्यक्ति सोच लेता है उपाय कर दिए समस्या हल होनी चाहिए ,किन्तु समस्या हल नहीं होती |कभी -कभी तो बढ़ भी जाती है |पंडित ने अपना कर्म कर दिया की अमुक पूजा करा दिया ,अपना दक्षिणा लिया और काम समाप्त मान लिया |उन्हें भी नहीं पता की पूजा जा कहाँ रही या काम करेगी या नहीं | 👉शास्त्र में लिखा है यह करने से यह समस्या हल होगी ,उसने बताई और पूजा कर दी | 👉ज्योतिषी ने किसी को अकाल मृत्यु भय से बचने को महामृत्युंजय जप बताया ,व्यक्ति ने ज्योतिषी के माध्यम से ही अथवा पंडित से जप करवा भी दिया किन्तु फिर भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हुई और उसकी मृत्यु हो गयी |अब वह महामृत्युंजय का जप गया कहाँ |उसका लाभ क्यों नहीं मिला |न पंडित जानता है न ज्योतिषी |व्यक्ति से सम्बन्धित लोग खुद मान लेते हैं की इतना बड़ा संकट था की महामृत्युंजय भी नहीं बचा सका या उन्हें कहा जाता है की समस्या बहुत गंभीर थी इसलिए जप बचा नहीं सका |यहाँ समस्या यह थी की महामृत्युंजय जप महादेव तक पहुंचा ही नहीं तो जान बचेगी कहाँ से | 👉आश्चर्यचकित मत होइए और यह मत सोचिये की अब महादेव से भी बड़ा कोई हो गया क्या जो उन तक जप नहीं पहुंचा और कहीं और चला गया या महामृत्युंजय का जप भी कोई रोक सकता है क्या |ऐसा होता है और जप वातावरण में बिखर जाता है ,महादेव तक नहीं पहुँचता 👉|कारण की महादेव ने ही वह तंत्र बनाया है जिससे उन तक जप पहुंचे |वह तंत्र बीच से टूटा हुआ है तो जप महादेव तक नहीं पहुंचेगा |महादेव भी अपने ही बनाए तंत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकते |जो नियम और तंत्र महादेव और शक्ति ने मिलकर बनाया है उससे वह खुद बंधे हुए हैं |यदि वह किसी व्यक्ति के लिए तोड़ते हैं तो विक्षोभ हो जाएगा ,इसलिए वे उस तंत्र के अनुसार ही फल देते हैं |उन्होंने सभी के लिए एक विशिष्ट नियम और ऊर्जा संरचना बनाई है जिसके अनुसार ही ऊर्जा स्थानान्तरण होता है |उन तक पहुंचता है और उनसे व्यक्ति तक पहुंचता है |बीच में कुछ विशिष्ट कड़ियाँ हैं जो ऊर्जा रूपांतरण करती हैं |यह कड़ियाँ यदि टूट जाएँ या न हो तो महादेव तक ऊर्जा नहीं पहुंचेगी और उनकी ऊर्जा व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी |यह नियम सभी प्रकार के पूजा पाठ में ,उपाय में लागू होता है |व्यक्ति यदि सीधे उनतक पहुँच सकता तो फिर व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |यह बीच की कड़ियाँ ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल और मुख्य रूप से कुलदेवता /देवी होते हैं जो पृथ्वी के व्यक्ति और महादेव या देवताओं के बीच की कड़ी होते हैं |यह महादेव और शक्ति के ही अंश हैं किन्तु यह उनकी पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील ऊर्जा रूप हैं और बीच की कड़ी हैं |जितने भी भूत -प्रेत -ब्रह्म आदि हैं वह भी महादेव के ही अंतर्गत आते हैं अतः इनके द्वारा उत्पन्न व्यवधान में भी महादेव सीधे हस्तक्षेप नहीं करते |अब हम बताते हैं की क्यों पूजा महादेव या किसी देवता तक नहीं पहुंचती या उपाय असफल क्यों हो जाते हैं | 👉उपाय तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक वह कहीं स्वीकार न हों |उपाय एक ऊर्जा प्रक्षेपण है |उपाय से ऊर्जा उत्पन्न कर एक निश्चित दिशा में भेजी जाती है |यह ऊर्जा जब तक कहीं स्वीकार न की जाए अंतरिक्ष में निरुद्देश्य विलीन हो जाती है और कोई लाभ नहीं मिलता अथवा यह ऊर्जा अपने गंतव्य तक न पहुंचे ,किसी और द्वारा ले ली जाए तो भी असफल हो जाती है ,अथवा उत्पन्न ऊर्जा का परिवर्तन प्राप्तकर्ता के योग्य ऊर्जा में न हो पाए तो भी अपने उद्देश्य में ऊर्जा सफल नहीं होती | लोगों के कष्टों के हजारों उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं ,इनमे ज्योतिषीय ,कर्मकांडीय अर्थात वैदिक पूजन प्रधान और तांत्रिक उपाय होते हैं | 👉इन उपायों में छोटे टोटकों से लेकर बड़े -बड़े अनुष्ठान तक होते हैं |इन शास्त्रों में यह कहीं नहीं लिखा की कैसे यह उपाय काम करते हैं |किस सूत्र पर कार्य करते हैं ,कैसे पितरों-देवताओं तक ऊर्जा पहुँचती है ,कैसे यहाँ के पदार्थों का पित्र लोक -देवलोक के पदार्थों में परिवर्तन होता है ,कौन यह ऊर्जा स्थानान्तरण करता है ,कब यह क्रिया अवरुद्ध हो जाती है ,कौन इस कड़ी को प्रभावित कर सकता है ,कैसे उपायों से कितनी ऊर्जा किस प्रकार उत्पन्न होती है |कहीं कोई सूत्र नहीं दिए गए ,क्योंकि जब यह उपाय बनाए गए तब के लोग इन सूत्रों को समझते थे |उन्हें इसकी क्रियाप्रणाली पता थी | 👉उस समय के ऋषियों को यह अनुमान ही नहीं था की आधुनिक युग जैसी समस्या आज के मानव उत्पन्न कर सकते हैं ,अतः उन्होंने इन्हें नहीं लिखा |उन्होंने जो संस्कार बनाए उसे यह मानकर बनाए की यह लगातार माने जायेंगे |इन्ही संस्कारों में उपायों की क्रिया के सूत्र थे अतः लिखने की जरूरत नहीं समझी |जब संकार छूटे तो सूत्र टूट गए |लोगों की समझ में अब नहीं आता की हो क्या गया |लोग अपनी इच्छाओं से चलने लगे तथा व्यतिक्रम उत्पन्न हो गया ऊर्जा संचरण में और सबकुछ बिगड़ गया | 👉कुछ सूत्रों को पितरों के सम्बन्ध में गरुण पुराण में दिया गया है किन्तु पूरी तकनिकी वहां नहीं है क्योंकि बीच की कड़ी सामान्य जीवन से सम्बन्धित है |गरुण पुराण बताता है की विश्वेदेवा पदार्थ को बदलकर पित्र की योनी अनुसार उन्हें पदार्थ उपलब्ध कराते हैं ,किन्तु विश्वदेव तक ही कुछ न पहुंचे तो क्या करें 👉|विश्वदेव ही नाराज हो जाएँ तो क्या करें |आचार्य करपात्री जी ने विश्वेदेवा की कार्यप्रणाली को बहुत अच्छे उदाहरण से बताया है किन्तु समस्या उत्पन्न उर्जा के वहां तक ही पहुँचने में होती है |उनके द्वारा स्वीकार करने और परिवर्तित कर पितरों को प्रदान करने में ही होती है |यही हाल सभी पूजा पाठ का होता है | 👉लोग कहते हैं की यहाँ कुछ भी चढ़ाया भगवान् नहीं खाता या नहीं लेता ,किन्तु ऐसा नहीं है भगवान् को यहाँ का भोग उसके स्वीकार करने योग्य ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है और वह वहां पहुंचता है किसी अन्य रूप में |तभी तो प्रसाद आदि को परम पवित्र माना जाता है और चढ़ाए पुष्प आदि को जलाया नहीं जा सकता |उसे स्वयं विघटित होने दिया जाता है |भगवान् को प्रदान की आ रही पूया की ऊर्जा का रूपांतरण उनके स्तर तथा लोक के अनुसार कुलदेवता और विश्वदेव करते हैं | उपाय ,पूजा -पाठ ,ऊर्जा रूपांतरण के सूत्र हमारे पूर्वज ऋषियों को ज्ञात थे और तदनुसार सभी प्रक्रिया ब्रह्माण्ड की ऊर्जा संरचना की क्रियाप्रणाली के आधार पर हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा बनाई गयी थी जो की आधुनिक वैज्ञानिकों से लाखों गुना श्रेष्ठ वैज्ञानिक थे |इस प्रणाली में एक त्रुटी पूरे तंत्र को बिगाड़ देती है |चूंकि यह प्रणाली प्रकृति की ऊर्जा संरचना पर आधारित है अतः यहाँ देवी -देवता भी हस्तक्षेप नहीं करते ,क्योंकि वह भी उन्ही सूत्रों पर चलते हैं |उनकी उत्पत्ति भी उन्ही सूत्रों पर आधारित है ,उन्हें भी उन्ही सूत्रों पर ऊर्जा दी जाती है ,उन्ही सूत्रों पर उन तक भी पूजा पहुँचती है |इस प्रकार ईष्ट चाहे कितना भी बड़ा हो ,देवी -देवता चाहे कितना ही शक्तिशाली हो कड़ियाँ टूटने पर कड़ियाँ नहीं बना सकता |सीधे कहीं हस्तक्षेप नहीं कर सकता |विरल स्थितियों में व्यक्ति विशेष के लिए इनके हस्तक्षेप होते हैं किन्तु यह हस्तक्षेप पित्र संतुष्टि अथवा देवताओं को पूजा मिलने को लेकर नहीं रहे हैं |पूजाओं की सबसे मूल कड़ी व्यक्ति के खानदान के मूल पूर्वज ऋषि के देवता या देवी होते हैं जिन्हें बाद में कुलदेवता /देवी कहा जाने लगा |इनका सीधा सम्बन्ध विश्वदेवा स्वरुप से होता है ,जो की पूजन स्थानान्तरण के लिए उत्तरदाई होते हैं |कुल देवता /देवी ब्रह्माण्ड की उच्च शक्तियों जिन्हें देवी /देवता कहा जाता है और मनुष्य के बीच की कड़ी हैं और यह पृथ्वी की ऊर्जा तथा ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच सामंजस्य बनाते हैं |यह कड़ी जहाँ टूटी सबकुछ टूट जाता है और फिर चाहे कितनी भी पूजा - शान्ति कराई जाए देवताओं तक दी जा रही पूजा नहीं पहुँचती और वह असंतुष्ट ही रह जाते हैं या प्रसन्न नहीं होते | 👉कुलदेवता प्रत्येक वंश के उत्पत्ति कर्ता ऋषि के वह आराध्य हैं जिनकी आराधना उन्होंने अपने वंश की वृद्धि और रक्षा के लिए अपने वंश के लिए उपलब्ध सामग्रियों के साथ अपने लिए उपयुक्त समय में की थी |जिस ऋषि और वंश की जैसी प्रकृति ,कर्म और गुण थे वैसे उन्होंने अपने कुलदेवता और देवी चुने किन्तु यह ध्यान रखा की सभी शिव परिवार से ही हों |कारण की शिव परिवार ही उत्पत्ति और संहार दोनों करता है |इनके बीच के कर्म ही अन्य देवताओं के अंतर्गत आते हैं |दूसरा कि शिव परिवार ही ऊर्जा का वह माध्यम है जो ब्रह्माण्ड से लेकर पृथ्वी तक समान रूप से व्याप्त है 👉|तीसरा कि शिव परिवार की ऊर्जा ही पृथ्वी की सतह पर सर्वत्र व्याप्त है जो सतह पर पृथ्वी की ऊर्जा से मिलकर अलग स्वरुप ग्रहण करता है |चौथा पृथ्वी की समस्त सतही शक्तियाँ जैसे भूत ,प्रेत ,पिशाच ,ब्रह्म ,जिन्न ,डाकिनी ,शाकिनी ,श्मशानिक भैरव -भैरवी ,क्षेत्रपाल आदि सभी शिव के अधीन होते हैं | 👉इन कारणों से सभी कुलदेवता शिव परिवार से माने गए |कुलदेवता /देवी वह सेतु हैं जो व्यक्ति /वंश और ब्रह्माण्ड की ऊर्जा में समन्वय का काम करते हैं साथ ही यहाँ की स्थानिक शक्तियों से सुरक्षा भी करते हैं 👉|यह वह बैंक हैं जो मुद्रा विनिमय जैसी क्रिया कर आपके द्वारा प्रदत्त मुद्रा अर्थात पूजन -भोज्य -अर्पित पदार्थ को बदलकर आपके पितरों तक ,आपके ईष्ट तक पहुंचाते हैं |यह वह चौकीदार हैं जो आपके वंश की ,परिवार की ,व्यक्ति की सुरक्षा २४ घंटे और १२ महीने करते हैं ताकि आपको किसी नकारात्मक ऊर्जा से कष्ट न हो | 👉इनकी ठीक से पूजा न होने पर ,इन्हें भूल जाने पर यह असंतुष्ट या रुष्ट हो जाते हैं और पूजा ईष्ट तक नहीं जाने देते या नहीं भेजते |इसलिए उपाय काम नहीं करते |महामृत्युंजय कराइए किन्तु कुलदेवता यदि रुष्ट हैं तो महादेव तक जप नहीं जाएगा |महादेव का ही नियम है तो वह सीधे पूजा नहीं ले सकते |लाभ नहीं होगा | 👉आपके घर में किसी बड़ी नकारात्मक या आसुरी शक्ति का वास हो या कोई ब्रह्म -प्रेत -जिन्न -वीर -सहीद -सती -साईं आप द्वारा पूजा जाता हो तो यह धीरे -धीरे आपकी पूजा खुद लेने लगता है और अपनी शक्ति बढाता है जिससे कुलदेवता की पूजा बाधित होती है |कुछ समय बाद यह कुलदेवता का स्थान ले लेता है और कुलदेवता रुष्ट हो जाते हैं |अब सभी पूजा यह ले लेगा और आपके ईष्ट तक कोई पूजा नहीं पहुंचेगी |आप कोई उपाय करें ,कोई अनुष्ठान कराएं सफल नहीं होगा ,कोई पूजा करें देवता को नहीं मिलेगा |आप मात्र खुद को संतुष्टि देंगे यह मानकर की आप पूजा कर रहे या करा रहे पर परिणाम नहीं मिलेगा |अब यह भी शिव के ही गण हैं |इन्हें भी शिव ने ही बनाया है |कुलदेवता भी शिव के ही अंश हैं तो शिव सीधे कैसे हस्तक्षेप करें |कुलदेवता की ठीक से पूजा न हो रही हो और कोई आसुरी शक्ति का प्रवेश हो जाय तो कुछ समय बाद वह सभी पूजा लेने लगता है कुलदेवता स्थान छोड़ देते हैं |फिर वह शक्ति उनका स्थान ले लेता है ,जब उसकी पूजा बंद ,खानदान की समाप्ति शुरू | 👉कुलदेवता की अनुपस्थिति में पूजा ईष्ट तक नहीं जा रही और सभी उपाय असफल |एक तो कष्ट की समस्या दुसरे उपाय भी काम नहीं कर रहे | पितरों की असंतुष्टि भी कुलदेवता /देवी को रुष्ट कर देती है क्योंकि इन पितरों द्वारा वह पूजित हुए होते हैं |पितरों का सीधा सम्बन्ध कुलदेवता से होता है |कुलदेवता /देवी रुष्ट तो वह सहायक नहीं होते और तब कोई पूजा -पाठ फलित नहीं होता |उपायों की असफलता का एक कारण किसी देवी -देवता का क्रोध भी हो सकता है |यदि कभी किसी संकल्पित अनुष्ठान या पूजा में कोई गलती हो गयी हो अथवा आपने या आपके पूर्वजों ने किसी देवी -देवता की मनौती आदि मानी हो और पूर्ण न की हो तो कोई देवी -देवता रुष्ट और क्रोधित हो सकता है |आज्ज आपको पता नहीं ,याद नहीं किन्तु इसका परिणाम आप भुगतते हैं |उपाय या पूया -पाठ किये जाने पर यह उसमे व्यवधान उत्पन्न करते हैं साथ ही उत्पन्न उर्जा का कुछ अंश भी खींच लेते हैं जिससे उपाय की शक्ति कम हो जाती है और लक्ष्य की दिशा में पर्याप्त शक्ति न लग पाने से उपाय असफल हो जाता है |यह स्थिति होने पर कुछ संकेत भी मिलते हैं और बार -बार एक ही प्रकार के स्वप्न अथवा घटनाएं आती हैं | आप ध्यान दीजिये ,जब आप किसी पूजा -पाठ -अनुष्ठान का संकल्प लेते हैं तो उसमे शब्द आते हैं ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता तब ईष्ट देवता |अब आप सोचिये स्थान देवता की जगह कोई स्थानीय नकारात्मक शक्ति प्रभावी है ,ग्राम देवता को आप नहीं जानते या ठीक से पूज नहीं रहे |क्षेत्रपाल को आप नहीं जानते |आपके कुलदेवता /देवी रुष्ट हैं या कोई अन्य शक्ति आपके घर में प्रभावी है जो पूज्जा ले रही या आप अपनी गलतियों से किसी ऐसी शक्ति को पूज रहे अपने स्वार्थ में जो नैसर्गिक देवता की श्रेणी में नहीं आता ,तो आपके कुलदेवता आपका साथ छोड़ चुके हैं |ऐसे में अब कड़ी तो टूट गयी |आपकी पूजा वातावरण में बिखर जायेगी |अब आपके पूर्वज ऋषि मूर्ख तो थे नहीं जो उन्होंने पूजा -अनुष्ठान के संकल्प में इन लोगों का आह्वान किया था हमेशा |वह जानते थे की यह एक श्रृंखला है जो पूजा की ऊर्जा को ईष्ट तक पहुंचाती है ,तभी उन्होंने इसे सभी पूजा से जोड़ा था |आधुनिक लोग मन से भगवान् को मानने को ही मुख्य मान लिए और नियमों की अनदेखी की जिससे निष्काम पूजन तो ठीक ,किन्तु सकाम पूजन असफल होने लगे |सकाम पूजन के अपने नियम होते हैं और उन्हें उसी रूप में करना होता है यदि कोई विशिष्ट उद्देश्य है तो |उपाय इसी श्रेणी में आते हैं अतः यह असफल हो जाते हैं कड़ी टूटने पर ,फिर चाहे कितनी भी अधिक पूजा -जप किया जाए या किसी भी शक्ति को पूजा जाए | 👉उपायों की असफलता का एक कारण यह भी होता है की जितनी ऊर्जा की आवश्यकता किसी कार्य की सफलता के लिए चाहिए होती है यदि उतनी ऊर्जा उपाय से न उत्पन्न हो तो वह कार्य सफल नहीं होता और उपाय की ऊर्जा व्यर्थ चली जाती है |किसी ग्रह की शान्ति के लिए शास्त्र में ६००० जप लिखा है तो कलयुग में इसका फल पाने के लिए आपको २४ हजार जप करना होगा |खुद जप करना होगा तभी ६००० का फल मिलेगा |आप किसी और से जप कराते है तो आपको उसका छठा हिस्सा ही मिलता है जबकि छठा हिस्सा जप करने वाले के हिस्से चला जाता है भले वह सम्पूर्ण जप का फल संकल्प से आपको दे दे |चार हिस्से विभिन्न शक्तियों के लिए चले जाते हैं |इस प्रकार २४ हजार जप कराने पर आपको मात्र ४००० जप का परिणाम मिला |पूरे २४ हजार जप का फल पाने के लिए आपको १४४००० जप कराने होंगे |तब जाकर आपका उद्देश्य पूरा होगा नियमतः |अब यहाँ एक समस्या और है की यदि किन्ही कारणों से यह जप से उत्पन्न ऊर्जा किसी शक्ति द्वारा कुछ हद तक भी रोक दी जाए या ले ली जाए या इसमें कमी कर दी जाए तो आपको लाभ नहीं होगा क्योंकि आपकी जरूरत १४४००० की है |१४३००० पर आपका कार्य असफल हो आएगा और पूजा आपके लिए व्यर्थ हो जायेगी उद्देश्य विशेष के लिए |इसे रोकने या बीच में लेने का कार्य घर या स्थान पर सक्रीय नकारात्मक शक्तियाँ करती हैं जो नहीं चाहती की व्यक्ति उनके प्रभाव से मुक्त हो सुखी हो | 👉उपाय आदि एक तकनिकी कार्य है |यहाँ मात्र भावनाओं का कोई महत्त्व नहीं होता ,क्योंकि आप एक ऊर्जा को पूजा या क्रिया से उत्पन्न कर अपने उद्देश्य के लिए किसी अन्य जगह भेज रहे |साथ में आप कह रहे की आपका अमुक कार्य हो अर्थात आप एक लक्ष्य को इंगित कर रहे |ऐसे में मात्र एक शब्द की त्रुटी आपका काम भी बिगाड़ सकती है और आपका अहित भी कर सकती है |एक गलत आचरण आपकी हानि कर सकती है ,क्योंकि उतन्न ऊर्जा कहीं तो लगनी है या बिखरनी है |उर्जा या शक्ति अनियंत्रित हुई तो हानि करेगी |शब्द ,क्रिया ,पदार्थ ,आचरण ,कर्म सबकुछ इस अवधि में सही होने चाहिए |उपायों में विशिष्ट प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है जो आपके लक्ष्य के अनुसार ही विशिष्ट कार्य करती है ,इसलिए यह पूरी दक्षता से होनी चाहिए |इसमें त्रुटी का कोई स्थान नहीं होता |अक्सर उग्र शक्ति की पूजा करते हुए लोग एक उद्देश्य भी रखते हैं और साथ ही यह भी मानकर चलते हैं की यह माँ है या पिता है जो गलती को क्षमा करेगा |उद्देश्य विशेष की पूजा में क्षमा नहीं होता क्योंकि आप निःस्वार्थ प्रेम या स्मरण नहीं कर रहे |आप तो स्वार्थ में पूज रहे और उसकी शक्ति को किसी उद्देश्य में लगाना चाह रहे |ऐसे में कोई गलती वह क्षमा नहीं करता और आपको गलती के अनुसार सजा भी मिलती है | 👉कभी -कभी उपाय करने पर समस्या और बढ़ जाती है |कारण यह होता है की उपाय करते समय गलती हो जाती है और ऊर्जा अनियंत्रित हो खुद का ही अहित कर जाती है |कभी -कभी ऐसा भी होता है की घर में उपस्थित किसी शक्ति को आपके उपाय और पूजा पाठ से कष्ट होता है और वह उपद्रव शुरू कर देता है ,ताकि आप उपाय या पूजा पाठ बंद कर दें |उपाय से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जबकि यह शक्तियाँ नकारात्मक गुण की होती है ,इसलिए इन्हें कष्ट होता है और यह उपद्रव करती हैं |आप सोचते हैं की उपायों से हानि हो रही और आप उपाय बंद कर देते हैं |स्थिति यथावत बनी रहती है और समस्या जस की तस |जब -जब पूजा -पाठ होता है घर में समस्याएं और बढ़ जाती हैं |कभी -कभी ढेर सारे उपाय करने पर ,बड़े -बड़े अनुष्ठान करने पर भी परिणाम नहीं मिलता |समझ नहीं आता की आखिर यह हो क्या रहा और पूजा जा कहाँ रही |यह भी इन नकारात्मक शक्तियों के कारण होता है जो पूजा खुद लेते हुए अपनी शक्ति बढाते हैं और खुद को देवता की तरह व्यक्त करते हैं | 👉अंत में समाधान की बात |कोई पंडित ,कोई ज्योतिषी ,कोई तांत्रिक आपके कुलदेवता /देवी को संतुष्ट नहीं कर सकता ,उन्हें वापस नहीं ला सकता |वह मात्र उपाय कर सकता है ,उपाय बता सकता है किन्तु वह तभी सफल होगा जब उपरोक्त स्थितियां न हों |कुलदेवता /देवी की संतुष्टि आपको करनी होगी ,उनकी रुष्टता आप ही दूर कर सकते हैं ,अगर वह खानदान छोड़ चुके हैं तो उन्हें आप ही ला सकते हैं या उनकी अन्य रूप में स्थापना आप ही कर सकते हैं |आपको ही यह करना होगा ,दूसरा इनमे कुछ नहीं कर सकता |अगर आपके घर में किसी अन्य शक्ति का वास है अथवा आपके घर में किसी अन्य शक्ति को जैसा उपर लिखा गया है ,को पूजा जा रहा है तो आपको ही उसका समाधान निकालना होगा कुछ इस तरह की सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे |आप स्वयं कभी किसी प्रेतिक ,पैशाचिक ,श्मशानिक शक्ति को घर में स्थान न दें न तो तात्कालिक लाभ के लिए कोई वचनबद्ध पूजा करें |यदि आप उपरोक्त परिस्थिति में हैं तो अपने घर में ऐसी शक्ति की स्थापना करें जो कुलदेवता /देवी और पितरों को प्रसन्न /संतुष्ट करे ,उन तक तालमेल उत्पन्न करे ,प्रेतिक या श्मशानिक या पैशाचिक या अन्य शक्ति के प्रभाव को कम करते हुए समाप्त करे |यह शक्ति पितरों को भी संतुष्ट करे और उनकी मुक्ति में भी सहायक हो यह देखना भी अति आवश्यक है | यहाँ मूल चरण यह होगा की ऐसी शक्ति की स्थापना हो जो कुलदेवता /देवी की भी कमी पूरी करते हुए उनका रिक्त स्थान पूर्ण करें |यह शक्ति ऐसी हो की घर में या व्यक्ति पर प्रभावी किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति के प्रभाव को रोकने की क्षमता रखे और उन्हें हटा सके ,साथ ही उस नकारात्मक शक्ति को भी घर में इनकी स्थापना स्वीकार्य हो |उन्हें यह न लगे की किसी प्रकार का व्यवधान उनके लिए उत्पन्न किया जा रहा ,हालांकि व्यवधान होगा ही उनके लिए किन्तु धीरे -धीरे |यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की घर में या व्यक्ति द्वारा भूल वश या स्वार्थ वश या पूर्वज्जों की गलती वश किसी भी कारण पूजी जा रही किसी शक्ति को भी हटाने की क्षमता रखे |इसके बाद अपने कुलदेवता /देवी को स्थान दे ,नियमानुसार उनकी पूजा करें |यदि उनका पता आपको नहीं चलता कि कौन आपके कुलदेवता /देवी हैं या थे तो उपर कही गयी शक्ति की स्थापना करें जो इनकी कमी पूरी कर दे और वही रूप ले ले जो कल के कुलदेवता /देवी की थी |तब जाकर आपके उपाय भी सफल होंगे और आपकी पूजा भी आपके ईष्ट तक पहुंचेगी | 👉यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की यह स्वयं में पूर्ण हो और मोक्ष भी दे सके इतने उच्च स्तर की हो |यह बीच की टूटी सभी कड़ियों को खुद में समाहित रखते हुए मात्र नाम से दी जा रही पूजा को भी पूर्ण कर सके अर्थात इसी शक्ति में अन्य देवताओं जैसे स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता /देवी सबका आह्वान हो सके |इसका एक आधार हो और नियमित पूजा हो तो उपाय भी काम करेंगे ,नकारात्मक शक्तियाँ भी हटेंगी ,पित्र भी संतुष्ट होंगे और ईष्ट प्रसन्नता भी हो जायेगी

🌹।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।।🌹
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 👉पूजा -पाठ फलित नहीं होगा यदि यह बाधाएं हैं तो -.>
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  👉जब भी किसी समस्या की बात आती है तो अंत में यही पूछा जाता है की इसका क्या उपाय है ,क्या निवारण है और निवारण ,उपाय लिखा भी जाता है 

 👉|सभी लोग जो भी किसी समस्या से परेशान होते हैं वह कोई न कोई उपाय करते हैं ,कुछ लोग बहुत से उपाय करते हैं किन्तु अधिकतर लोग अंत में यही कहते हैं की उपाय काम नहीं किये या उपाय काम नहीं करते |

 👉बहुत कम प्रतिशत लोगों के उपाय सफल होते हैं जबकि अधिकतर की समस्या या तो जस की तस रहती है या बढ़ ही जाती है |

 👉कुछ लोग उपाय करते -करते इतने थक जाते हैं की अंत में यही कहते हैं और मान लेते हैं की भाग्य ही अंतिम है, उसे कोई नहीं बदल सकता ,जो भाग्य में लिखा है वही होगा |यहाँ तक की उनका विश्वास ईश्वर और पूजा -पाठ पर से भी उठने लगता है |

 👉कुछ लोग समस्या को भी भाग्य ही मान लेते हैं भले वह ठीक हो सकता हो अथवा भाग्य में न हो या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुआ हो |कारण की उनके उपाय काम नहीं करते |

 👉आखिर करें तो क्या इसलिए कष्ट को ही भाग्य मान संतोष कर लिया | टोने -टोटको के उपाय कुछ हद तक काम करते हैं किन्तु बड़े उपाय अधिकतर के लिए अक्सर काम नहीं करते |टोने -टोटकों में किसी उच्च शक्ति या देवी -देवता का उपयोग न होकर वस्तुगत उरा और मानसिक ऊर्जा का प्रक्षेपण होता है इसलिए यह कुछ काम कर जाते हैं यदि कोई छोटी -मोटी समस्या हुई तो ,किन्तु बड़ी समस्या के उपाय काम नहीं कर पाते क्योंकि बड़ी शक्तियों का प्रयोग असफल हो जाता है 

 👉|कालसर्प ,पित्र दोष ,अकाल मृत्यु भय ,गंभीर रोग ,मारक -कष्टकारक ग्रह के प्रभाव ,ब्रह्म -जिन्न -प्रेत बाधा के प्रभाव ,ईष्ट रुष्टता ,गंभीर आभिचारिक प्रयोग जैसे समस्या के उपाय अधिकतर के लिए असफल होते हैं क्योंकि यहाँ उच्च शक्तियों की आवश्यकता होती है |

  👉ज्योतिष हो या तंत्र सबमे उपाय की अवधारणा है और यह किसी न किसी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं ,किसी न किसी देवता का प्रतिनिधित्व करते हैं |उस देवता को प्रसन्न कर अथवा शन्ति कर ही समस्या निवारण होता है |

 👉जब उपाय किया ज्जाता है तो आशा की जाती है की वह देवता या शक्ति प्रसन्न होगा या शांत होगा और व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति मिलेगी |इसके लिए उपाय की ऊर्जा उस देवता तक पहुंचनी चाहिए अर्थात उपाय की पूजा देवता को मिलनी चाहिए ज्जिससे वह प्रसन्न हो या शांत हो 

 👉|अधिकतर मामलों में उपाय की उरा देवता तक नहीं पहुँचती या पूजा उसे नहीं मिलती |व्यक्ति अथवा पंडित पूरी तन्मयता से उपाय करता है किन्तु फिर भी लाभ नहीं होता क्योंकि जहाँ पूजा की ऊर्जा जानी चाहिए वहां नहीं जाती ,वह बीच में या तो किसी और द्वारा ले ली जाती है या बिखर जाती है |व्यक्ति सोच लेता है उपाय कर दिए समस्या हल होनी चाहिए ,किन्तु समस्या हल नहीं होती |कभी -कभी तो बढ़ भी जाती है |पंडित ने अपना कर्म कर दिया की अमुक पूजा करा दिया ,अपना दक्षिणा लिया और काम समाप्त मान लिया |उन्हें भी नहीं पता की पूजा जा कहाँ रही या काम करेगी या नहीं |

 👉शास्त्र में लिखा है यह करने से यह समस्या हल होगी ,उसने बताई और पूजा कर दी |

 👉ज्योतिषी ने किसी को अकाल मृत्यु भय से बचने को महामृत्युंजय जप बताया ,व्यक्ति ने ज्योतिषी के माध्यम से ही अथवा पंडित से जप करवा भी दिया किन्तु फिर भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हुई और उसकी मृत्यु हो गयी |अब वह महामृत्युंजय का जप गया कहाँ |उसका लाभ क्यों नहीं मिला |न पंडित जानता है न ज्योतिषी |व्यक्ति से सम्बन्धित लोग खुद मान लेते हैं की इतना बड़ा संकट था की महामृत्युंजय भी नहीं बचा सका या उन्हें कहा जाता है की समस्या बहुत गंभीर थी इसलिए जप बचा नहीं सका |यहाँ समस्या यह थी की महामृत्युंजय जप महादेव तक पहुंचा ही नहीं तो जान बचेगी कहाँ से |

  👉आश्चर्यचकित मत होइए और यह मत सोचिये की अब महादेव से भी बड़ा कोई हो गया क्या जो उन तक जप नहीं पहुंचा और कहीं और चला गया या महामृत्युंजय का जप भी कोई रोक सकता है क्या |ऐसा होता है और जप वातावरण में बिखर जाता है ,महादेव तक नहीं पहुँचता 

 👉|कारण की महादेव ने ही वह तंत्र बनाया है जिससे उन तक जप पहुंचे |वह तंत्र बीच से टूटा हुआ है तो जप महादेव तक नहीं पहुंचेगा |महादेव भी अपने ही बनाए तंत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकते |जो नियम और तंत्र महादेव और शक्ति ने मिलकर बनाया है उससे वह खुद बंधे हुए हैं |यदि वह किसी व्यक्ति के लिए तोड़ते हैं तो विक्षोभ हो जाएगा ,इसलिए वे उस तंत्र के अनुसार ही फल देते हैं |उन्होंने सभी के लिए एक विशिष्ट नियम और ऊर्जा संरचना बनाई है जिसके अनुसार ही ऊर्जा स्थानान्तरण होता है |उन तक पहुंचता है और उनसे व्यक्ति तक पहुंचता है |बीच में कुछ विशिष्ट कड़ियाँ हैं जो ऊर्जा रूपांतरण करती हैं |यह कड़ियाँ यदि टूट जाएँ या न हो तो महादेव तक ऊर्जा नहीं पहुंचेगी और उनकी ऊर्जा व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी |यह नियम सभी प्रकार के पूजा पाठ में ,उपाय में लागू होता है |व्यक्ति यदि सीधे उनतक पहुँच सकता तो फिर व्यक्ति को कोई समस्या ही नहीं होती |यह बीच की कड़ियाँ ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल और मुख्य रूप से कुलदेवता /देवी होते हैं जो पृथ्वी के व्यक्ति और महादेव या देवताओं के बीच की कड़ी होते हैं |यह महादेव और शक्ति के ही अंश हैं किन्तु यह उनकी पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील ऊर्जा रूप हैं और बीच की कड़ी हैं |जितने भी भूत -प्रेत -ब्रह्म आदि हैं वह भी महादेव के ही अंतर्गत आते हैं अतः इनके द्वारा उत्पन्न व्यवधान में भी महादेव सीधे हस्तक्षेप नहीं करते |अब हम बताते हैं की क्यों पूजा महादेव या किसी देवता तक नहीं पहुंचती या उपाय असफल क्यों हो जाते हैं |
  👉उपाय तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक वह कहीं स्वीकार न हों |उपाय एक ऊर्जा प्रक्षेपण है |उपाय से ऊर्जा उत्पन्न कर एक निश्चित दिशा में भेजी जाती है |यह ऊर्जा जब तक कहीं स्वीकार न की जाए अंतरिक्ष में निरुद्देश्य विलीन हो जाती है और कोई लाभ नहीं मिलता अथवा यह ऊर्जा अपने गंतव्य तक न पहुंचे ,किसी और द्वारा ले ली जाए तो भी असफल हो जाती है ,अथवा उत्पन्न ऊर्जा का परिवर्तन प्राप्तकर्ता के योग्य ऊर्जा में न हो पाए तो भी अपने उद्देश्य में ऊर्जा सफल नहीं होती | लोगों के कष्टों के हजारों उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं ,इनमे ज्योतिषीय ,कर्मकांडीय अर्थात वैदिक पूजन प्रधान और तांत्रिक उपाय होते हैं |

 👉इन उपायों में छोटे टोटकों से लेकर बड़े -बड़े अनुष्ठान तक होते हैं |इन शास्त्रों में यह कहीं नहीं लिखा की कैसे यह उपाय काम करते हैं |किस सूत्र पर कार्य करते हैं ,कैसे पितरों-देवताओं तक ऊर्जा पहुँचती है ,कैसे यहाँ के पदार्थों का पित्र लोक -देवलोक के पदार्थों में परिवर्तन होता है ,कौन यह ऊर्जा स्थानान्तरण करता है ,कब यह क्रिया अवरुद्ध हो जाती है ,कौन इस कड़ी को प्रभावित कर सकता है ,कैसे उपायों से कितनी ऊर्जा किस प्रकार उत्पन्न होती है |कहीं कोई सूत्र नहीं दिए गए ,क्योंकि जब यह उपाय बनाए गए तब के लोग इन सूत्रों को समझते थे |उन्हें इसकी क्रियाप्रणाली पता थी |

 👉उस समय के ऋषियों को यह अनुमान ही नहीं था की आधुनिक युग जैसी समस्या आज के मानव उत्पन्न कर सकते हैं ,अतः उन्होंने इन्हें नहीं लिखा |उन्होंने जो संस्कार बनाए उसे यह मानकर बनाए की यह लगातार माने जायेंगे |इन्ही संस्कारों में उपायों की क्रिया के सूत्र थे अतः लिखने की जरूरत नहीं समझी |जब संकार छूटे तो सूत्र टूट गए |लोगों की समझ में अब नहीं आता की हो क्या गया |लोग अपनी इच्छाओं से चलने लगे तथा व्यतिक्रम उत्पन्न हो गया ऊर्जा संचरण में और सबकुछ बिगड़ गया |
 👉कुछ सूत्रों को पितरों के सम्बन्ध में गरुण पुराण में दिया गया है किन्तु पूरी तकनिकी वहां नहीं है क्योंकि बीच की कड़ी सामान्य जीवन से सम्बन्धित है |गरुण पुराण बताता है की विश्वेदेवा पदार्थ को बदलकर पित्र की योनी अनुसार उन्हें पदार्थ उपलब्ध कराते हैं ,किन्तु विश्वदेव तक ही कुछ न पहुंचे तो क्या करें 

 👉|विश्वदेव ही नाराज हो जाएँ तो क्या करें |आचार्य करपात्री जी ने विश्वेदेवा की कार्यप्रणाली को बहुत अच्छे उदाहरण से बताया है किन्तु समस्या उत्पन्न उर्जा के वहां तक ही पहुँचने में होती है |उनके द्वारा स्वीकार करने और परिवर्तित कर पितरों को प्रदान करने में ही होती है |यही हाल सभी पूजा पाठ का होता है |

 👉लोग कहते हैं की यहाँ कुछ भी चढ़ाया भगवान् नहीं खाता या नहीं लेता ,किन्तु ऐसा नहीं है भगवान् को यहाँ का भोग उसके स्वीकार करने योग्य ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है और वह वहां पहुंचता है किसी अन्य रूप में |तभी तो प्रसाद आदि को परम पवित्र माना जाता है और चढ़ाए पुष्प आदि को जलाया नहीं जा सकता |उसे स्वयं विघटित होने दिया जाता है |भगवान् को प्रदान की आ रही पूया की ऊर्जा का रूपांतरण उनके स्तर तथा लोक के अनुसार कुलदेवता और विश्वदेव करते हैं |
उपाय ,पूजा -पाठ ,ऊर्जा रूपांतरण के सूत्र हमारे पूर्वज ऋषियों को ज्ञात थे और तदनुसार सभी प्रक्रिया ब्रह्माण्ड की ऊर्जा संरचना की क्रियाप्रणाली के आधार पर हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा बनाई गयी थी जो की आधुनिक वैज्ञानिकों से लाखों गुना श्रेष्ठ वैज्ञानिक थे |इस प्रणाली में एक त्रुटी पूरे तंत्र को बिगाड़ देती है |चूंकि यह प्रणाली प्रकृति की ऊर्जा संरचना पर आधारित है अतः यहाँ देवी -देवता भी हस्तक्षेप नहीं करते ,क्योंकि वह भी उन्ही सूत्रों पर चलते हैं |उनकी उत्पत्ति भी उन्ही सूत्रों पर आधारित है ,उन्हें भी उन्ही सूत्रों पर ऊर्जा दी जाती है ,उन्ही सूत्रों पर उन तक भी पूजा पहुँचती है |इस प्रकार ईष्ट चाहे कितना भी बड़ा हो ,देवी -देवता चाहे कितना ही शक्तिशाली हो कड़ियाँ टूटने पर कड़ियाँ नहीं बना सकता |सीधे कहीं हस्तक्षेप नहीं कर सकता |विरल स्थितियों में व्यक्ति विशेष के लिए इनके हस्तक्षेप होते हैं किन्तु यह हस्तक्षेप पित्र संतुष्टि अथवा देवताओं को पूजा मिलने को लेकर नहीं रहे हैं |पूजाओं की सबसे मूल कड़ी व्यक्ति के खानदान के मूल पूर्वज ऋषि के देवता या देवी होते हैं जिन्हें बाद में कुलदेवता /देवी कहा जाने लगा |इनका सीधा सम्बन्ध विश्वदेवा स्वरुप से होता है ,जो की पूजन स्थानान्तरण के लिए उत्तरदाई होते हैं |कुल देवता /देवी ब्रह्माण्ड की उच्च शक्तियों जिन्हें देवी /देवता कहा जाता है और मनुष्य के बीच की कड़ी हैं और यह पृथ्वी की ऊर्जा तथा ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच सामंजस्य बनाते हैं |यह कड़ी जहाँ टूटी सबकुछ टूट जाता है और फिर चाहे कितनी भी पूजा - शान्ति कराई जाए देवताओं तक दी जा रही पूजा नहीं पहुँचती और वह असंतुष्ट ही रह जाते हैं या प्रसन्न नहीं होते |
  👉कुलदेवता प्रत्येक वंश के उत्पत्ति कर्ता ऋषि के वह आराध्य हैं जिनकी आराधना उन्होंने अपने वंश की वृद्धि और रक्षा के लिए अपने वंश के लिए उपलब्ध सामग्रियों के साथ अपने लिए उपयुक्त समय में की थी |जिस ऋषि और वंश की जैसी प्रकृति ,कर्म और गुण थे वैसे उन्होंने अपने कुलदेवता और देवी चुने किन्तु यह ध्यान रखा की सभी शिव परिवार से ही हों |कारण की शिव परिवार ही उत्पत्ति और संहार दोनों करता है |इनके बीच के कर्म ही अन्य देवताओं के अंतर्गत आते हैं |दूसरा कि शिव परिवार ही ऊर्जा का वह माध्यम है जो ब्रह्माण्ड से लेकर पृथ्वी तक समान रूप से व्याप्त है 

 👉|तीसरा कि शिव परिवार की ऊर्जा ही पृथ्वी की सतह पर सर्वत्र व्याप्त है जो सतह पर पृथ्वी की ऊर्जा से मिलकर अलग स्वरुप ग्रहण करता है |चौथा पृथ्वी की समस्त सतही शक्तियाँ जैसे भूत ,प्रेत ,पिशाच ,ब्रह्म ,जिन्न ,डाकिनी ,शाकिनी ,श्मशानिक भैरव -भैरवी ,क्षेत्रपाल आदि सभी शिव के अधीन होते हैं |

 👉इन कारणों से सभी कुलदेवता शिव परिवार से माने गए |कुलदेवता /देवी वह सेतु हैं जो व्यक्ति /वंश और ब्रह्माण्ड की ऊर्जा में समन्वय का काम करते हैं साथ ही यहाँ की स्थानिक शक्तियों से सुरक्षा भी करते हैं 

 👉|यह वह बैंक हैं जो मुद्रा विनिमय जैसी क्रिया कर आपके द्वारा प्रदत्त मुद्रा अर्थात पूजन -भोज्य -अर्पित पदार्थ को बदलकर आपके पितरों तक ,आपके ईष्ट तक पहुंचाते हैं |यह वह चौकीदार हैं जो आपके वंश की ,परिवार की ,व्यक्ति की सुरक्षा २४ घंटे और १२ महीने करते हैं ताकि आपको किसी नकारात्मक ऊर्जा से कष्ट न हो |
 👉इनकी ठीक से पूजा न होने पर ,इन्हें भूल जाने पर यह असंतुष्ट या रुष्ट हो जाते हैं और पूजा ईष्ट तक नहीं जाने देते या नहीं भेजते |इसलिए उपाय काम नहीं करते |महामृत्युंजय कराइए किन्तु कुलदेवता यदि रुष्ट हैं तो महादेव तक जप नहीं जाएगा |महादेव का ही नियम है तो वह सीधे पूजा नहीं ले सकते |लाभ नहीं होगा |

 👉आपके घर में किसी बड़ी नकारात्मक या आसुरी शक्ति का वास हो या कोई ब्रह्म -प्रेत -जिन्न -वीर -सहीद -सती -साईं आप द्वारा पूजा जाता हो तो यह धीरे -धीरे आपकी पूजा खुद लेने लगता है और अपनी शक्ति बढाता है जिससे कुलदेवता की पूजा बाधित होती है |कुछ समय बाद यह कुलदेवता का स्थान ले लेता है और कुलदेवता रुष्ट हो जाते हैं |अब सभी पूजा यह ले लेगा और आपके ईष्ट तक कोई पूजा नहीं पहुंचेगी |आप कोई उपाय करें ,कोई अनुष्ठान कराएं सफल नहीं होगा ,कोई पूजा करें देवता को नहीं मिलेगा |आप मात्र खुद को संतुष्टि देंगे यह मानकर की आप पूजा कर रहे या करा रहे पर परिणाम नहीं मिलेगा |अब यह भी शिव के ही गण हैं |इन्हें भी शिव ने ही बनाया है |कुलदेवता भी शिव के ही अंश हैं तो शिव सीधे कैसे हस्तक्षेप करें |कुलदेवता की ठीक से पूजा न हो रही हो और कोई आसुरी शक्ति का प्रवेश हो जाय तो कुछ समय बाद वह सभी पूजा लेने लगता है कुलदेवता स्थान छोड़ देते हैं |फिर वह शक्ति उनका स्थान ले लेता है ,जब उसकी पूजा बंद ,खानदान की समाप्ति शुरू |

 👉कुलदेवता की अनुपस्थिति में पूजा ईष्ट तक नहीं जा रही और सभी उपाय असफल |एक तो कष्ट की समस्या दुसरे उपाय भी काम नहीं कर रहे |
पितरों की असंतुष्टि भी कुलदेवता /देवी को रुष्ट कर देती है क्योंकि इन पितरों द्वारा वह पूजित हुए होते हैं |पितरों का सीधा सम्बन्ध कुलदेवता से होता है |कुलदेवता /देवी रुष्ट तो वह सहायक नहीं होते और तब कोई पूजा -पाठ फलित नहीं होता |उपायों की असफलता का एक कारण किसी देवी -देवता का क्रोध भी हो सकता है |यदि कभी किसी संकल्पित अनुष्ठान या पूजा में कोई गलती हो गयी हो अथवा आपने या आपके पूर्वजों ने किसी देवी -देवता की मनौती आदि मानी हो और पूर्ण न की हो तो कोई देवी -देवता रुष्ट और क्रोधित हो सकता है |आज्ज आपको पता नहीं ,याद नहीं किन्तु इसका परिणाम आप भुगतते हैं |उपाय या पूया -पाठ किये जाने पर यह उसमे व्यवधान उत्पन्न करते हैं साथ ही उत्पन्न उर्जा का कुछ अंश भी खींच लेते हैं जिससे उपाय की शक्ति कम हो जाती है और लक्ष्य की दिशा में पर्याप्त शक्ति न लग पाने से उपाय असफल हो जाता है |यह स्थिति होने पर कुछ संकेत भी मिलते हैं और बार -बार एक ही प्रकार के स्वप्न अथवा घटनाएं आती हैं |
आप ध्यान दीजिये ,जब आप किसी पूजा -पाठ -अनुष्ठान का संकल्प लेते हैं तो उसमे शब्द आते हैं ,स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता तब ईष्ट देवता |अब आप सोचिये स्थान देवता की जगह कोई स्थानीय नकारात्मक शक्ति प्रभावी है ,ग्राम देवता को आप नहीं जानते या ठीक से पूज नहीं रहे |क्षेत्रपाल को आप नहीं जानते |आपके कुलदेवता /देवी रुष्ट हैं या कोई अन्य शक्ति आपके घर में प्रभावी है जो पूज्जा ले रही या आप अपनी गलतियों से किसी ऐसी शक्ति को पूज रहे अपने स्वार्थ में जो नैसर्गिक देवता की श्रेणी में नहीं आता ,तो आपके कुलदेवता आपका साथ छोड़ चुके हैं |ऐसे में अब कड़ी तो टूट गयी |आपकी पूजा वातावरण में बिखर जायेगी |अब आपके पूर्वज ऋषि मूर्ख तो थे नहीं जो उन्होंने पूजा -अनुष्ठान के संकल्प में इन लोगों का आह्वान किया था हमेशा |वह जानते थे की यह एक श्रृंखला है जो पूजा की ऊर्जा को ईष्ट तक पहुंचाती है ,तभी उन्होंने इसे सभी पूजा से जोड़ा था |आधुनिक लोग मन से भगवान् को मानने को ही मुख्य मान लिए और नियमों की अनदेखी की जिससे निष्काम पूजन तो ठीक ,किन्तु सकाम पूजन असफल होने लगे |सकाम पूजन के अपने नियम होते हैं और उन्हें उसी रूप में करना होता है यदि कोई विशिष्ट उद्देश्य है तो |उपाय इसी श्रेणी में आते हैं अतः यह असफल हो जाते हैं कड़ी टूटने पर ,फिर चाहे कितनी भी अधिक पूजा -जप किया जाए या किसी भी शक्ति को पूजा जाए |

 👉उपायों की असफलता का एक कारण यह भी होता है की जितनी ऊर्जा की आवश्यकता किसी कार्य की सफलता के लिए चाहिए होती है यदि उतनी ऊर्जा उपाय से न उत्पन्न हो तो वह कार्य सफल नहीं होता और उपाय की ऊर्जा व्यर्थ चली जाती है |किसी ग्रह की शान्ति के लिए शास्त्र में ६००० जप लिखा है तो कलयुग में इसका फल पाने के लिए आपको २४ हजार जप करना होगा |खुद जप करना होगा तभी ६००० का फल मिलेगा |आप किसी और से जप कराते है तो आपको उसका छठा हिस्सा ही मिलता है जबकि छठा हिस्सा जप करने वाले के हिस्से चला जाता है भले वह सम्पूर्ण जप का फल संकल्प से आपको दे दे |चार हिस्से विभिन्न शक्तियों के लिए चले जाते हैं |इस प्रकार २४ हजार जप कराने पर आपको मात्र ४००० जप का परिणाम मिला |पूरे २४ हजार जप का फल पाने के लिए आपको १४४००० जप कराने होंगे |तब जाकर आपका उद्देश्य पूरा होगा नियमतः |अब यहाँ एक समस्या और है की यदि किन्ही कारणों से यह जप से उत्पन्न ऊर्जा किसी शक्ति द्वारा कुछ हद तक भी रोक दी जाए या ले ली जाए या इसमें कमी कर दी जाए तो आपको लाभ नहीं होगा क्योंकि आपकी जरूरत १४४००० की है |१४३००० पर आपका कार्य असफल हो आएगा और पूजा आपके लिए व्यर्थ हो जायेगी उद्देश्य विशेष के लिए |इसे रोकने या बीच में लेने का कार्य घर या स्थान पर सक्रीय नकारात्मक शक्तियाँ करती हैं जो नहीं चाहती की व्यक्ति उनके प्रभाव से मुक्त हो सुखी हो |

 👉उपाय आदि एक तकनिकी कार्य है |यहाँ मात्र भावनाओं का कोई महत्त्व नहीं होता ,क्योंकि आप एक ऊर्जा को पूजा या क्रिया से उत्पन्न कर अपने उद्देश्य के लिए किसी अन्य जगह भेज रहे |साथ में आप कह रहे की आपका अमुक कार्य हो अर्थात आप एक लक्ष्य को इंगित कर रहे |ऐसे में मात्र एक शब्द की त्रुटी आपका काम भी बिगाड़ सकती है और आपका अहित भी कर सकती है |एक गलत आचरण आपकी हानि कर सकती है ,क्योंकि उतन्न ऊर्जा कहीं तो लगनी है या बिखरनी है |उर्जा या शक्ति अनियंत्रित हुई तो हानि करेगी |शब्द ,क्रिया ,पदार्थ ,आचरण ,कर्म सबकुछ इस अवधि में सही होने चाहिए |उपायों में विशिष्ट प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है जो आपके लक्ष्य के अनुसार ही विशिष्ट कार्य करती है ,इसलिए यह पूरी दक्षता से होनी चाहिए |इसमें त्रुटी का कोई स्थान नहीं होता |अक्सर उग्र शक्ति की पूजा करते हुए लोग एक उद्देश्य भी रखते हैं और साथ ही यह भी मानकर चलते हैं की यह माँ है या पिता है जो गलती को क्षमा करेगा |उद्देश्य विशेष की पूजा में क्षमा नहीं होता क्योंकि आप निःस्वार्थ प्रेम या स्मरण नहीं कर रहे |आप तो स्वार्थ में पूज रहे और उसकी शक्ति को किसी उद्देश्य में लगाना चाह रहे |ऐसे में कोई गलती वह क्षमा नहीं करता और आपको गलती के अनुसार सजा भी मिलती है |

 👉कभी -कभी उपाय करने पर समस्या और बढ़ जाती है |कारण यह होता है की उपाय करते समय गलती हो जाती है और ऊर्जा अनियंत्रित हो खुद का ही अहित कर जाती है |कभी -कभी ऐसा भी होता है की घर में उपस्थित किसी शक्ति को आपके उपाय और पूजा पाठ से कष्ट होता है और वह उपद्रव शुरू कर देता है ,ताकि आप उपाय या पूजा पाठ बंद कर दें |उपाय से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जबकि यह शक्तियाँ नकारात्मक गुण की होती है ,इसलिए इन्हें कष्ट होता है और यह उपद्रव करती हैं |आप सोचते हैं की उपायों से हानि हो रही और आप उपाय बंद कर देते हैं |स्थिति यथावत बनी रहती है और समस्या जस की तस |जब -जब पूजा -पाठ होता है घर में समस्याएं और बढ़ जाती हैं |कभी -कभी ढेर सारे उपाय करने पर ,बड़े -बड़े अनुष्ठान करने पर भी परिणाम नहीं मिलता |समझ नहीं आता की आखिर यह हो क्या रहा और पूजा जा कहाँ रही |यह भी इन नकारात्मक शक्तियों के कारण होता है जो पूजा खुद लेते हुए अपनी शक्ति बढाते हैं और खुद को देवता की तरह व्यक्त करते हैं |
 👉अंत में समाधान की बात |कोई पंडित ,कोई ज्योतिषी ,कोई तांत्रिक आपके कुलदेवता /देवी को संतुष्ट नहीं कर सकता ,उन्हें वापस नहीं ला सकता |वह मात्र उपाय कर सकता है ,उपाय बता सकता है किन्तु वह तभी सफल होगा जब उपरोक्त स्थितियां न हों |कुलदेवता /देवी की संतुष्टि आपको करनी होगी ,उनकी रुष्टता आप ही दूर कर सकते हैं ,अगर वह खानदान छोड़ चुके हैं तो उन्हें आप ही ला सकते हैं या उनकी अन्य रूप में स्थापना आप ही कर सकते हैं |आपको ही यह करना होगा ,दूसरा इनमे कुछ नहीं कर सकता |अगर आपके घर में किसी अन्य शक्ति का वास है अथवा आपके घर में किसी अन्य शक्ति को जैसा उपर लिखा गया है ,को पूजा जा रहा है तो आपको ही उसका समाधान निकालना होगा कुछ इस तरह की सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे |आप स्वयं कभी किसी प्रेतिक ,पैशाचिक ,श्मशानिक शक्ति को घर में स्थान न दें न तो तात्कालिक लाभ के लिए कोई वचनबद्ध पूजा करें |यदि आप उपरोक्त परिस्थिति में हैं तो अपने घर में ऐसी शक्ति की स्थापना करें जो कुलदेवता /देवी और पितरों को प्रसन्न /संतुष्ट करे ,उन तक तालमेल उत्पन्न करे ,प्रेतिक या श्मशानिक या पैशाचिक या अन्य शक्ति के प्रभाव को कम करते हुए समाप्त करे |यह शक्ति पितरों को भी संतुष्ट करे और उनकी मुक्ति में भी सहायक हो यह देखना भी अति आवश्यक है |
यहाँ मूल चरण यह होगा की ऐसी शक्ति की स्थापना हो जो कुलदेवता /देवी की भी कमी पूरी करते हुए उनका रिक्त स्थान पूर्ण करें |यह शक्ति ऐसी हो की घर में या व्यक्ति पर प्रभावी किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति के प्रभाव को रोकने की क्षमता रखे और उन्हें हटा सके ,साथ ही उस नकारात्मक शक्ति को भी घर में इनकी स्थापना स्वीकार्य हो |उन्हें यह न लगे की किसी प्रकार का व्यवधान उनके लिए उत्पन्न किया जा रहा ,हालांकि व्यवधान होगा ही उनके लिए किन्तु धीरे -धीरे |यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की घर में या व्यक्ति द्वारा भूल वश या स्वार्थ वश या पूर्वज्जों की गलती वश किसी भी कारण पूजी जा रही किसी शक्ति को भी हटाने की क्षमता रखे |इसके बाद अपने कुलदेवता /देवी को स्थान दे ,नियमानुसार उनकी पूजा करें |यदि उनका पता आपको नहीं चलता कि कौन आपके कुलदेवता /देवी हैं या थे तो उपर कही गयी शक्ति की स्थापना करें जो इनकी कमी पूरी कर दे और वही रूप ले ले जो कल के कुलदेवता /देवी की थी |तब जाकर आपके उपाय भी सफल होंगे और आपकी पूजा भी आपके ईष्ट तक पहुंचेगी | 

 👉यह शक्ति ऐसी भी होनी चाहिए की यह स्वयं में पूर्ण हो और मोक्ष भी दे सके इतने उच्च स्तर की हो |यह बीच की टूटी सभी कड़ियों को खुद में समाहित रखते हुए मात्र नाम से दी जा रही पूजा को भी पूर्ण कर सके अर्थात इसी शक्ति में अन्य देवताओं जैसे स्थान देवता ,ग्राम देवता ,क्षेत्रपाल ,कुलदेवता /देवी सबका आह्वान हो सके |इसका एक आधार हो और नियमित पूजा हो तो उपाय भी काम करेंगे ,नकारात्मक शक्तियाँ भी हटेंगी ,पित्र भी संतुष्ट होंगे और ईष्ट प्रसन्नता भी हो जायेगी

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🏵️🕉️शुभ गुरुवार 🏵️शुभ प्रभात् 🕉️🏵️ 2078-विजय श्री हिंदू पंचांग-राशिफल-1943 🏵️-आज दिनांक--15.04.2021-🏵️ श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 74.30 - रेखांतर मध्यमान - 75.30 जन्मकुंडली हस्तरेखा राशिरत्न और वास्तुदोष (प्रामाणिक जानकारी--प्रभावी समाधान) --------------------------------------------------------- -विभिन्न शहरों के लिये रेखांतर(समय) संस्कार- (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट---------जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट------अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट-------------मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट------बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54 मिनट-जैसलमेर -15 मिनट ____________________________________ _____________आज विशेष______________ नवग्रह रत्न रोग निवारण में भी परम उपयोगी हैं ____________________________________ आज दिनांक.......................15.04.2021 कलियुग संवत्.............................. 5122 विक्रम संवत................................ 2078 शक संवत....................................1943 संवत्सर...................................श्री राक्षस अयन..................................... उत्तरायण गोल.............................................उत्तर ऋतु.............................................वसंत मास..............................................चैत्र पक्ष.............................................शुक्ल तिथि........तृतीया. अपरा. 3.27 तक / चतुर्थी वार.......................................... गुरुवार नक्षत्र.......कृतिका. रात्रि. 8.31 तक / रोहिणी चंद्र राशि.................वृषभ. संपूर्ण (अहोरात्र) योग...आयुष्मान. अपरा. 5.18 तक /सौभाग्य करण......................गर. अपरा. 3.27 तक करण....... .वणिज. रात्रि. 4.47* तक / विष्टि ___________________________________ सूर्योदय..............................6.10.12 पर सूर्यास्त..............................6.53.02 पर दिनमान............................... 12.42.49 रात्रिमान...............................11.16.14 चंद्रोदय..............प्रातः 08.05.14 AM पर चंद्रास्त...............रात्रि. 09.47.50 PM पर राहुकाल.......अपरा. 2.07 से 3.42 (अशुभ) यमघंट...........प्रातः 6.10 से 7.46 (अशुभ) अभिजित...... (मध्या)12.06 से 12.57 तक पंचक.......................... ...... आज नहीं है शुभ हवन मुहूर्त(अग्निवास)....... आज नहीं है दिशाशूल.............................दक्षिण दिशा दोष निवारण..... दही का सेवन कर यात्रा करें ___________________________________ ____आज की सूर्योदय कालीन ग्रह स्थिति__ सूर्य----------मेष 1°8' अश्विनी, 1 चु चन्द्र ------वृषभ 2°57' कृत्तिका, 2 ई बुध-------मीन 26°41' रेवती, 4 ची शुक्र ---------मेष 6°12' अश्विनी, 2 चे मंगल--मिथुन 0°45' मृगशिरा, 3 का गुरु--------कुम्भ 1°40' धनिष्ठा, 3 गु शनि -----_मकर 18°16' श्रवण, 3 खे राहू-----वृषभ 19°17' रोहिणी, 3 वी केतु----वृश्चिक 19°17' ज्येष्ठा, 1 नो ___________________________________ चौघड़िया (दिन-रात)........केवल शुभ कारक * चौघड़िया दिन * शुभ..................प्रातः 6.10 से 7.46 तक चंचल..........पूर्वाह्न. 10.56 से 12.32 तक लाभ.............अपरा. 12.32 से 2.07 तक अमृत............. अपरा. 2.07 से 3.42 तक शुभ.................सायं. 5.18 से 6.53 तक * चौघड़िया रात्रि * अमृत.........सायं-रात्रि. 6.53 से 8.18 तक चंचल...............रात्रि. 8.18 से 9.42 तक लाभ..रात्रि. 12.31 AM से 1.56 AM तक शुभ.....रात्रि. 3.20 AM से 4.45 AM तक अमृत...रात्रि. 4.45 AM से 6.09 AM तक ___________________________________ *शुभ शिववास की तिथियां* शुक्ल पक्ष-2-----5-----6---- 9-------12----13. कृष्ण पक्ष-1---4----5----8---11----12----30. ____________________________________ जानकारी विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड मूल(रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) नक्षत्रों में होता है तो नक्षत्र शांति को आवश्यक माना गया है.. आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार नामाक्षर.. 06.56 AM तक--कृतिका ---2-------(इ) 01.44 PM तक--कृतिका---3-------(उ) 08.31 PM तक--कृतिका---4-------(ए) 03.19 AM तक---रोहिणी---1------(ओ) उपरांत रात्रि तक---रोहिणी ---2------(वा) (पाया-स्वर्ण) _______सभी की राशि वृषभ रहेगी________ ___________________________________ ____________आज का दिन_____________ व्रत विशेष............नवरात्रि अनुष्ठान व्रत जारी व्रत विशेष...........................गणगौरी पूजा ____________________________________ ___________गणगौर पूजा मुहूर्त __________ प्रातः......................... 6.10 से 7.46 तक प्रातः.............. 10.56 से अपरा. 2.07 तक अपरा.................5.18 से सायं. 6.53 तक ____________________________________ दिन विशेष.......................... मत्स्य जयंती दिन विशेष....... नवरात्रि तृतीय- चंद्रघंटा पूजा सर्वा.सि.योग...................................नहीं सिद्ध रवियोग........ रात्रि. 8.31 से रात्रि पर्यंत ___________________________________ _____________कल का दिन_____________ दिनांक..............................16.04.2021 तिथि................. चैत्र शुक्ला चतुर्थी शुक्रवार व्रत विशेष............नवरात्रि अनुष्ठान व्रत जारी दिन विशेष......नवरात्रि चतुर्थ - कुष्मांडा पूजा दिन विशेष........मेषे बुध. रात्रि. 8.55 उपरांत व्रत विशेष............. श्री गणेश दमनक चतुर्थी विष्टि(भद्रा).... प्रातः 6.09 से सायं 6.05 तक सर्वा.सि.योग...................................नहीं सिद्ध रवियोग.प्रातः6.09 से रात्रि 11.39 तक ____________________________________ _____________आज विशेष _____________ यह बात हम सभी जानते है कि हमारे धर्म ग्रंथों में अलग-अलग तरह के रत्न एवं मणियों का विशेष उल्लेख मिलता है। रामायण, महाभारत, गरुण पुराण, नारद पुराण, देवी भागवत, चरक सहिंता आदि ग्रंथों में मोती, माणिक्य, हीरा, स्फटिक, पन्ना, मूंगा जैसे रत्नों को धारण करने के साथ-साथ इनके चिकित्सकीय उपचार का भी वर्णन किया गया है। माणिक्य ह्रदय रोग, नेत्र रोग, चर्म रोग, अस्थि विकार, मिर्गी, चक्कर आना, ज्वर प्रकोप, सर दर्द आदि रोगों के निदान के लिए सूर्य से सम्बंधित रत्न "माणिक्य" धारण करना चाहिए। यदि किसी वजह से माणिक्य धारण करना संभव न हो तो इसका उपरत्न लाल हकीक, सूर्यकांत मणि या लालड़ी तामडा धारण करना चाहिए। मोती खांसी, जुकाम, मानसिक रोग, नींद न आना, तपेदिक, रक्त विकार, मुख रोग, घबराहट, बेचैनी, श्वसन संबंधी रोग, बच्चों के रोग आदि के निदान हेतु चन्द्र ग्रह से सम्बंधित रत्न "मोती" अथवा उपरत्न सफ़ेद पुखराज या चंद्रकांत मणि को धारण करना चाहिए। मूंगा ब्लड प्रेशर, त्वचा रोग, कमजोरी, कोढ़, पित्त विकार, शरीर में जलन, रक्तार्श, दुर्घटना आदि से बचाव के लिए मंगल ग्रह से सम्बंधित रत्न "मूंगा" अथवा उपरत्न तामडा धारण करना शुभ रहता है। पन्ना मानसिक विकार, त्वचा रोग, नेत्र रोग, किसी तरह की सनक, तुतलाहट,सांस नली के रोग, मिर्गी, नाक और गले के रोग आदि से बचाव के लिए बुध ग्रह से सम्बंधित रत्न "पन्ना" अथवा उपरत्न हरा जिरकॉन, हरा हकीक या फिरोजा धारण करना शुभ रहता है। पुखराज गुल्म रोग, याददाश्त कमजोर होना,मोटापा, कर्ण रोग, पेट के रोग, आंत्र रोग, कफ जनित रोग, शरीर में सूजन, बेहोशी आना आदि के निदान हेतु गुरु अर्थात बृहस्पति ग्रह से सम्बंधित रत्न "पुखराज" अथवा उपरत्न सफ़ेद जिरकोन, सुनेला या पीला मोती धारण करना चाहिए। हीरा पीलिया, अतिसार, मधुमेह, एड्स, महिलाओं के रोग, नेत्र रोग, पुरुषों के गुप्त रोग, मूत्र विकार, नपुंसकता, शारीरिक कमजोरी आदि के निदान हेतु शुक्र ग्रह से सम्बंधित रत्न "हीरा" अथवा उपरत्न श्वेत जिरकोन धारण करना चाहिए। नीलम अस्थि एवं जोड़ों के विकार, वात जनित रोग, पथरी, गठिया, कैंसर, पोलियो, बवासीर, स्नायु जनित रोग, शारीरिक और मानसिक थकान, पेरालायसिस आदि के निदान के लिए शनि ग्रह से सम्बंधित रत्न "नीलम" अथवा उपरत्न नीला जिरकॉन या नीला कटेला धारण करना शुभ होता है। गौमेद कोढ़, कृमि रोग, कैंसर, वात जनित रोग, वाइरस से होने वाले रोग, सर्प दंश, अपस्मार आदि रोगों के निदान हेतु राहु ग्रह से सम्बंधित रत्न "गौमेद" अथवा उपरत्न काला हकीक धारण करना चाहिए। लहसुनिया एलर्जी, वाइरल ज्वर, दुर्घटना, त्वचा रोग, भूत-प्रेत कष्ट, अर्धान्गवात रोगों के निदान हेतु केतु ग्रह से सम्बंधित रत्न "लहसुनिया" अथवा उपरत्न गौदंती धारण करना शुभ होता है। *संकलनकर्त्ता* श्री ज्योतिष सेवाश्रम सेवाश्रम संस्थान (राज) ___________________________________ ___________आज का राशिफल__________ मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ) आज आप स्वयं को शांत बनाए रखें क्योंकि आज आपको ऐसी कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जिनके चलते आप काफ़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। ख़ास तौर पर अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखें, क्योंकि यह और कुछ नहीं बल्कि थोड़ी देर पागलपन है। धन की आवाजाही आज दिन भर होती रहेगी और दिन ढलने के बाद आप बचत करने में भी सक्षम हो पाएंगे। परिवार के सदस्यों का आपके जीवन में विशेष महत्व होगा। आज आपको अपने प्रिय की याद सताएगी। यह दूसरे देशों में व्यावसायिक सम्पर्क बनाने का बेहतरीन समय है। आज रात को जीवनसाथी के साथ खाली वक्त बिताते समय आपको लगेगा कि आपको उन्हें और भी वक्त देना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी दिक़्क़त का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन दिन के आख़िर में आपका जीवनसाथी आपकी परेशानियों को समझेगा और सहयोग करेगा । वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो) आज आपकी सेहत अच्छी रहेगी। आज यार दोस्तों के साथ पार्टी में आप खूब पैसे लुटा सकते हैं लेकिन इसके बावजूद भी आपका आर्थिक पक्ष आज मजबूत रहेगा। आपका कोई क़रीबी आज काफ़ी अजीब मूड में होगा और उसे समझना लगभग असंभव साबित होगा। अटके कामों के बावजूद रोमांस और बाहर घूमना-फिरना आपके दिलो-दिमाग़ पर छाया रहेगा। आज आप अतिरिक्त ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले सकते हैं, जो आपके लिए ज़्यादा आय और प्रतिष्ठा का सबब साबित होगी। जो लोग अब तक किसी काम में व्यस्त थे आज उन्हें अपने लिए समय मिल सकता है लेकिन घर में किसी काम के आ जाने से आप फिर से व्यस्त हो सकते हैं। आज से पहले शादीशुदा ज़िन्दगी इतनी अच्छी कभी नहीं रही। मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह) आज आप अपने दिन की शुरुआत कसरत से करें- यही वक़्त है जब आप अपने बारें में अच्छा महसूस करने की शुरुआत कर सकते हैं- इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें और नियमित रखने की कोशिश करें। जो उधारी के लिए आपके पास आएँ, उन्हें नज़रअन्दाज़ करना ही बेहतर रहेगा। कोई पुराना परिचित आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। अपने प्रिय की ग़ैर-ज़रूरी भावनात्मक मांगों के सामने घुटने न टेकें। अहम लोगों से बातचीत करते वक़्त अपने आँख-कान खुले रखिए, हो सकता है आपके हाथ कोई क़ीमती बात या विचार लग जाए। आज खाली वक्त का सही उपयोग करने के लिए आप अपने पुराने मित्रों से मिलने का प्लान बना सकते हैं। अगर आपके जीवनसाथी का मन खिन्न है और चाहते हैं की दिन अच्छा गुज़रे, तो चुप्पी साधे रहें। कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो) आज के दिन गर्भवती महिलाओं को चलते-फिरते समय ख़ास ख़याल रखने की ज़रूरत है। अगर संभव हो तो ऐसे लोगों से दूर रहें जो धूम्रपान करते हैं, क्योंकि इससे पैदा होने वाले शिशु को नुक़सान हो सकता है। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। आपकी निजी ज़िंदगी के बारे में दोस्तों से आपको अच्छी सलाह मिलेगी। नये रोमांस की संभावना प्रबल है। आज के दिन कार्यक्षेत्र में चीज़ें वाक़ई बेहतरी की ओर बढ़ सकेंगी, अगर आप आगे बढ़कर उन लोगों से भी दुआ-सलाम करें जो आपको ज़्यादा पसंद नहीं करते। अपने घर में बिखरी चीजों को संभालने का आज आप प्लान करेंगे लेकिन आपको इसके लिए आज खाली समय नहीं मिल पाएगा। ऐसा लगता है कि आपके जीवनसाथी आज आपके ऊपर ख़ास ध्यान देंगे। सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे) आज प्यार, उम्मीद, सहानुभूति, आशावादिता और निष्ठा जैसी सकारात्मक भावनाओं को अपनाने के लिए ख़ुद को प्रोत्साहित करें। एक बार ये गुण आपके अंदर रच-बस जाएँ, तो हर हालात में वे ख़ुद ही सकारात्मक तरीक़े से उभर आएंगे। आज आपके ऑफिस का कोई सहकर्मी आपकी कीमती वस्तु चुरा सकता है इसलिए आज आपको अपना सामान ध्यान से रखने की जरुरत है। बच्चे आपके दिन को बहुत मुश्किल बना सकते हैं। प्यार-दुलार के हथियार का इस्तेमाल कर उन्हें समझाएँ और अनचाहे तनाव से बचें। याद रखें कि प्यार ही प्यार को पैदा करता है। प्यार-मोहब्बत के लिहाज़ से दिन थोड़ा मुश्किल रहेगा। करिअर के नज़रिए से शुरू किया सफ़र कारगर रहेगा। लेकिन ऐसा करने से पहले अपने माता-पिता से इजाज़ता ज़रूर ले लें, नहीं तो बाद में वे आपत्ति कर सकते हैं। दिन की शुरुआत भले ही थोड़ी थकाऊ रहे लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा आपको अच्छे फल मिलने लगेंगे। दिन के अंत में आपको अपने लिए समय मिल पाएगा और आप किसी करीबी से मुलाकात करके इस समय का सदुपयोग कर सकते हैं। अपने जीवनसाथी की वजह से आपको मानसिक अशान्ति का सामना करना पड़ सकता है। कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो) आज आपके दोस्तों का रुख़ सहयोगी रहेगा और वे आपको ख़ुश रखेंगे। आज घर से बाहर बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकलें इससे आपको धन लाभ हो सकता है। अपने परिवार की भलाई के लिए मेहनत करें। आपके कामों के पीछे प्यार और दूरदृष्टि की भावना होनी चाहिए, न कि लालच का ज़हर। आज प्यार की कमी महसूस हो सकती है। संतोषजनक परिणाम पाने के लिए काम को योजनाबद्ध तरीक़े से करें, दफ़्तर की परेशानियों को हल करने में आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। आज आपको अचानक किसी अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है जिसकी वजह से घरवालों के साथ समय बिताने का आपका प्लान खराब हो सकता है। हँसी-मजा़क के बीच आपके और आपके जीवनसाथी के बीच कोई पुराना मुद्दा उभर सकता है, जो फिर वाद-विवाद का रूप भी ले सकता है। तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते) र आज आप ख़ुश रहें क्योंकि अच्छा समय आने वाला है और आप स्वयं में अतिरिक्त ऊर्जा का अनुभव करेंगे। रियल एस्टेट और वित्तीय लेन-देन के लिए अच्छा दिन है। घरेलू ज़िंदगी सुकूनभरी और ख़ुशनुमा रहेगी। प्यार-मोहब्बत की नज़रिए से बेहतरीन दिन है। व्यवसायियों के लिए अच्छा दिन है, क्योंकि उन्हें अचानक बड़ा फ़ायदा हो सकता है। आज घर के लोगों के साथ बातचीत करते दौरान आपके मुंह से कोई ऐसी बात निकल सकती है जिससे घर के लोग नाराज हो सकते हैं। इसके बाद घर के लोगों को मनाने में आपका काफी समय जा सकता है। सुबह जीवनसाथी से आपको कुछ ऐसा मिल सकता है, जिससे आपका सारा दिन ख़ुशगवार गुज़रेगा। वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू) आज आपकी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आप दूसरों पर कुछ ज़्यादा ख़र्चा कर सकते हैं। घर में तालमेल बनाए रखने के लिए साथ में मिलकर काम करें। आज आपकी मुस्कान बेमानी है, हँसी में वो खनक नहीं है, दिल धड़कने में आनाकानी कर रहा है; क्योंकि आप किसी ख़ास के साथ की कमी महसूस कर रहे हैं। रचनात्मक काम में लगे लोगों के लिए सफलता से भरा दिन है, उन्हें वह शौहरत और पहचान मिलेगी जिसकी उन्हें एक अरसे से तलाश थी। दूसरों की राय को ग़ौर से सुनें- अगर आप आज वाक़ई फ़ायदा चाहते हैं तो। किसी ख़बसूरत याद के कारण आपके और आपके जीवनसाथी के बीच की अनबन रुक सकती है। इसलिए वाद-विवाद की हालत में पुराने दिनों की यादों को ताज़ा करना न भूलें। धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे) आज आपकी सकारात्मक सोच पुरस्कृत होगी, क्योंकि आप अपनी कोशिशों में क़ामयाबी पा सकते हैं। आपने बीते समय में बहुत पैसा खर्च किया है जिसका खामियाजा आज आपको भुगतना पड़ सकता है। आज आपको पैसों की जरुरत होगी लेकिन वो आपको मिल नहीं पाएगा। लोगों और उनके इरादों के बारे में जल्दबाज़ी में फ़ैसला न लें। हो सकता है कि वे दबाव में हों और उन्हें आपकी सहानुभूति व विश्वास की ज़रूरत हो। अपनी बातों को सही साबित करने के लिए आज के दिन आप अपने संगी से झगड़ सकते हैं। हालांकि आपका साथी समझदारी दिखाते हुए आपको शांत कर देगा। नयी परियोजनाओं और ख़र्चों को टाल दें। जीवन का आनंद लेने के लिए आपको अपने दोस्तों को भी समय देना चाहिए। अगर आप समाज से कटकर रहेंगे तो आवश्यकता पड़ने पर आपके साथ भी कोई नहीं होगा। शादीशुदा ज़िन्दगी के नज़रिए से चीज़ें काफ़ी अच्छी रहेंगी। मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी) आज आप शराब से दूर रहें, क्योंकि इससे आपकी नींद में खलल पड़ेगा और आप गहरे आराम से महरूम रह सकते हैं। जिन लोगों को आप जानते हैं, उनके ज़रिए आपको आमदनी के नए स्रोत मिलेंगे। परिवार के सदस्य आपके नज़रिए का समर्थन करेंगे। सावधान रहें, क्योंकि कोई आपकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर सकता है। नौकरों और सहकर्मियों से परेशानी होने की संभावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है। घर के कामों को पूरा करने के बाद इस राशि की गृहणियां आज के दिन फुर्सत में टीवी या मोबाइल पर कोई मूवी देख सकती हैं। आस-पड़ोस की किसी सुनी-सुनाई बात को लेकर आपका जीवनसाथी तिल-का-ताड़ बना सकता है। कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द) आज आप चोट से बचने के लिए सावधानी से बरतें । साथ ही सही तरीक़े से कमर सीधी करके बैठना न केवल व्यक्तित्वमें सुधार लाता है, बल्कि सेहत और आत्म-विश्वास के स्तर को भी ऊपर ले जाता है। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। पारिवारिक तनावों को अपनी एकाग्रता भंग न करने दें। बुरा दौर ज़्यादा सिखाता है। उदासी के भंवर में ख़ुद को खोकर वक़्त बर्बाद करने से बेहतर है कि ज़िंदगी के सबक़ को जानने और सीखने की कोशिश की जाए। प्रेम-संबंध में ग़ुलाम की तरह व्यवहार न करें। आपके पास आज अपनी क्षमताओं को दिखाने के मौक़े होंगे। कुछ लोगों के लिए आकस्मिक यात्रा दौड़-भाग भरी और तनावपूर्ण रहेगी। चीज़ें आपकी इच्छा के मुताबिक़ नहीं चलेंगी, लेकिन अपने जीवनसाथी के साथ आप अच्छा समय गुज़ारेंगे। मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची) आज के दिन रक्तचाप के मरीज़ों को ख़ास ख़याल रखने और दवा-दारू करने की ज़रूरत है। साथ ही उन्हें कॉलेस्ट्रोल को क़ाबू में रखने की कोशिश भी करनी चाहिए। ऐसा करना आगे काफ़ी लाभदायक सिद्ध होगा। सिर्फ़ अक़्लमंदी से किया गया निवेश ही फलदायी होगा- इसलिए अपनी मेहनत की कमाई सोच-समझ कर लगाएँ। अगर आप अपने साथी के नज़रिए को नज़रअंदाज़ करेंगे, तो वह अपना आपा खो सकता/सकती है। आज अपने प्रिय को माफ़ करना न भूलें। किसी के साथ नयी परियोजना या भागीदारी वाले व्यवसाय को शुरू करने से बचें। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है - जो काफ़ी दौड़-भाग भरा होगा - लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। आपका जीवनसाथी आपसे नाराज़ हो सकता है, क्योंकि आप उनसे कोई बात साझा करना भूल गए थे। __________________________________ 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ - संकलनकर्त्ता- ज्योतिर्विद् पं. रामपाल भट्ट श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ __________________________________

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नवरात्र में नवग्रह शांति की विधि 〰️〰️🌼〰️🌼🌼〰️🌼〰️〰️ प्रतिपदा के दिन मंगल ग्रह की शांति करानी चाहिए। द्वितीय के दिन राहु ग्रह की शान्ति करने संबन्धी कार्य करने चाहिए। तृतीया के दिन बृहस्पति ग्रह की शान्ति कार्य करना चाहिए। चतुर्थी के दिन व्यक्ति शनि शान्ति के उपाय कर स्वयं को शनि के अशुभ प्रभाव से बचा सकता है। पंचमी के दिन बुध ग्रह। षष्ठी के दिन केतु। सप्तमी के दिन शुक्र। अष्टमी के दिन सूर्य। नवमी के दिन चन्द्रमा की शांति कार्य किए जाते है। किसी भी ग्रह शांति की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कलश स्थापना और दुर्गा मां की पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद लाल वस्त्र पर नव ग्रह यंत्र बनावाया जाता है। इसके बाद नवग्रह बीज मंत्र से इसकी पूजा करें फिर नवग्रह शांति का संकल्प करें। प्रतिपदा के दिन मंगल ग्रह की शांति होती है इसलिए मंगल ग्रह की फिर से पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद पंचमुखी रूद्राक्ष, मूंगा अथवा लाल अकीक की माला से 108 मंगल बीज मंत्र का जप करना चाहिए. जप के बाद मंगल कवच एवं अष्टोत्तरशतनाम का पाठ करना चाहिए. राहू की शांति के लिए द्वितीया को राहु की पूजा के बाद राहू के बीज मंत्र का 108 बार जप करना, राहू के शुभ फलों में वृ्द्धि करता है। नवरात्रों में सुख शांति के लिये किस देव की पूजा करें 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ नवरात्र में मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान श्रीराम व हनुमान की अराधना भी फलदायी बताई गई है. सुंदरकाण्ड, रामचरित मानस और अखण्ड रामायण से साधक को लाभ होता है. शत्रु बाधा दूर होती है. मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. नवरात्र में विघि विधान से मां का पूजन करने से कार्य सिद्ध होते हैं और चित्त को शांति मिलती है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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🏵️🕉️शुभ बुधवार 🏵️शुभ प्रभात् 🕉️🏵️ 2078-विजय श्री हिंदू पंचांग-राशिफल-1943 🏵️-आज दिनांक--14.04.2021-🏵️ श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 74.30 - रेखांतर मध्यमान - 75.30 शिक्षा नौकरी आजीविका विवाह भाग्योन्नति (प्रामाणिक जानकारी--प्रभावी समाधान) --------------------------------------------------------- -विभिन्न शहरों के लिये रेखांतर(समय) संस्कार- (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट---------जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट------अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट-------------मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट------बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54 मिनट-जैसलमेर -15 मिनट ___________________________________ _____________आज विशेष_____________ सास बहु में अनबन रहती तो इन उपायों को करने से हो सकती है घर में शांति ____________________________________ आज दिनांक.......................14.04.2021 कलियुग संवत्.............................. 5122 विक्रम संवत................................ 2078 शक संवत....................................1943 संवत्सर...................................श्री राक्षस अयन..................................... उत्तरायण गोल.............................................उत्तर ऋतु............................................वसंत मास..............................................चैत्र पक्ष............................................शुक्ल तिथि....द्वितीया. अपरा. 12.47 तक / तृतीया वार...........................................बुधवार नक्षत्र......भरणी. अपरा. 5.21 तक / कृतिका चंद्र राशि......मेष. रात्रि. 12.09* तक / वृषभ योग......प्रीति. अपरा. 4.13 तक / आयुष्मान करण.............. कौलव. अपरा. 12.47 तक करण...........तैत्तिल. रात्रि. 2.06* तक / गर ___________________________________ सूर्योदय..............................6.11.09 पर सूर्यास्त..............................6.52.34 पर दिनमान............................... 12.41.24 रात्रिमान...............................11.17.38 चंद्रोदय..............प्रातः 07.30.06 AM पर चंद्रास्त...............रात्रि. 08.54.39 PM पर राहुकाल.... अपरा. 12.32 से 2.07 (अशुभ) यमघंट...........प्रातः 7.46 से 9.22 (अशुभ) अभिजित..(मध्या)12.06 से 12.57(अशुभ) पंचक.................................आज नहीं है शुभ हवन मुहूर्त(अग्निवास)............. आज है दिशाशूल.............................. उत्तर दिशा दोष निवारण.... तिल का सेवन कर यात्रा करें ___________________________________ ____आज की सूर्योदय कालीन ग्रह स्थिति___ सूर्य----------मेष 0°9' अश्विनी, 1 चु चन्द्र --------मेष 21°10' भरणी, 3 ले बुध--------मीन 24°40' रेवती, 3 च शुक्र------- मेष 4°57' अश्विनी, 2 चे मंगल----मिथुन 0°9' मृगशीर्षा, 3 का गुरु--------कुम्भ 1°29' धनिष्ठा,3 गु शनि ------मकर 18°12' श्रवण, 3 खे राहू-----वृषभ 19°20' रोहिणी, 3 वी केतु----वृश्चिक 19°20' ज्येष्ठा, 1 नो ___________________________________ चौघड़िया (दिन-रात)........केवल शुभ कारक * चौघड़िया दिन * लाभ..................प्रातः 6.11 से 7.46 तक अमृत.................प्रातः 7.46 से 9.22 तक शुभ.............पूर्वाह्न. 10.57 से 12.32 तक चंचल.............. अपरा. 3.42 से 5.17 तक लाभ................ सायं. 5.17 से 6.53 तक * चौघड़िया रात्रि * शुभ...................रात्रि. 8.17 से 9.42 तक अमृत..............रात्रि. 9.42 से 11.07 तक चंचल......रात्रि. 11.07 से 12.31 AM तक लाभ.....रात्रि. 3.21 AM से 4.46 AM तक ___________________________________ *शुभ शिववास की तिथियां* शुक्ल पक्ष-2-----5-----6---- 9-------12----13. कृष्ण पक्ष-1---4----5----8---11----12----30. ____________________________________ जानकारी विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड मूल(रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) नक्षत्रों में होता है तो नक्षत्र शांति को आवश्यक माना गया है.. आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार नामाक्षर.. 10.35 AM तक-----भरणी ---3----(चो) 05.21 PM तक-----भरणी---4----(ला) 12.09 AM तक---कृतिका---1-----(ली) उपरांत रात्रि तक---कृतिका---2-----(ले) (पाया-स्वर्ण) ________सभी की राशि मेष रहेगी_________ ___________________________________ ____________आज का दिन_____________ व्रत विशेष............नवरात्रि अनुष्ठान व्रत जारी दिन विशेष..नवरात्रि द्वितीय- ब्रह्मचारिणी पूजा दिन विशेष......................अंबेडकर जयंती दिन विशेष............... सिंजारा (गणगौर पूर्व) सर्वा.सि.योग........ सायं. 5.21 से रात्रि पर्यंत सिद्ध रवियोग..................................नहीं ____________________________________ _____________कल का दिन_____________ दिनांक..............................15.04.2021 तिथि...................चैत्र शुक्ला तृतीया गुरुवार व्रत विशेष............नवरात्रि अनुष्ठान व्रत जारी व्रत विशेष...........................गणगौरी पूजा दिन विशेष.......................... मत्स्य जयंती दिन विशेष....... नवरात्रि तृतीय- चंद्रघंटा पूजा सर्वा.सि.योग...................................नहीं सिद्ध रवियोग.........रात्रि. 8.31 से रात्रि पर्यंत ____________________________________ _____________आज विशेष _____________ यह कहानी किसी के भी घर की हो सकती है। उनके परिवार में सास-बहू में हमेशा तकरार रहती हो, कभी भी आपस में नहीं बनती हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसका कोई उपाचार नहीं है या लाइलाज बीमारी है। अगर हम कुछ ज्योतिषिय उपायों को अपनाएं तो न केवल सास-बहू में कभी कोई विवाद या कहासुनी नहीं होगी बल्कि उनके प्रेम में भी उत्तरोत्तचर वृद्धि होगी। दोनों में आपस में नहीं बनने पर हर शनिवार पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने और घी का दीपक प्रज्वलित करने से भी घर में शांति आती है। अगर हो सके तो डाइनिंग रूम और घर के अन्य स्थान पर भोजन करने की बजाय यदि रसोईघर में किया जाए तो पारिवारिक सदस्यों पर राहू का असर कम होता है। इससे घर में शांति और सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। यदि दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख भी नहीं सुहाती हैं तो एक प्रयोग और भी किया जा सकता है। ऐसे में घर में कदम्ब के पेड़ की डाली रखने से लाभ होता है। यदि सास-बहू में किसी बात पर एकराय नहीं हो रही हो तो दोनों को खाने से पहले पहली रोटी निकालकर कुत्तों को खिलानी चाहिए। ऐसा करने से ग्रह अनुकूल होने लगेंगे और प्रेम भी बढ़ेगा। दोनों में अक्सर तकरार होती हो तो दोनों के कमरे पर उनका साथ खिंचवाया गया चित्र फ्रेम करवाकर लगाएं। इससे दोनों के मध्य मधुर संबंध बनेंगे। यह प्रयोग में लिया हुआ नुस्खा है। सास और बहू दोनों को प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए इससे न केवल घर का माहौल शांत रहेगा बल्कि संबंधों में भी मधुरता आएगी। ऐसे में गायत्री मंत्र की रिकार्डिंग भी चलाई जा सकती है। ---------------------------------------------------------- *संकलनकर्त्ता* श्री ज्योतिष सेवाश्रम सेवाश्रम संस्थान (राज) ___________________________________ ___________आज का राशिफल__________ मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ) आज शारीरिक और मानसिक लाभ के लिए ध्यान व योग करना उपयोगी रहेगा। जीवन की गाड़ी को अच्छे से चलाना चाहते हैं तो आज आपको पैसे की आवाजाही पर विशेष ध्यान देना होगा। दोस्त और रिश्तेदार आपकी मदद करेंगे और आप उनके साथ काफ़ी ख़ुशी महसूस करेंगे। आपके जीवन में प्रेम की बहार आ सकती है; आपको ज़रूरत है तो बस अपने आँख-कान खुले रखने की। आप लम्बे समय से दफ़्तर में किसी से बात करना चाह रहे थे। आज ऐसा होना मुमकिन है। इस राशि के लोगों को आज अपने आप को समझने की जरुरत है। यदि आपको लगता है कि आप दुनिया की भीड़ में कहीं खो गये हैं तो अपने लिए वक्त निकालें और अपने व्यक्तित्व का आकलन करें। रिश्ते ऊपर स्वर्ग में बनते हैं और आपका जीवनसाथी आज यह साबित कर सकता है। वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो) आज आपके लिए बेकार का तनाव और चिंताएँ ज़िंदगी का रस निचोड़कर आपको पूरी तरह चूस सकती हैं। भलाई इसी में है कि इन आदतों को छोड़ दें, नहीं तो इनसे केवल आपकी परेशानियों में बढ़ोतरी ही होगी। आज के दिन आप धन से जुड़ी समस्या के कारण परेशान रह सकते हैं। इसके लिए आपको अपने किसी विश्वास पात्र से सलाह लेनी चाहिए। दोस्त और रिश्तेदार आपकी मदद करेंगे और आप उनके साथ काफ़ी ख़ुशी महसूस करेंगे। मुहब्बत का सफ़र प्यारा, मगर छोटा होगा। दफ़्तर में आप तारीफ़ पाएंगे। आज आप अपने जीवनसाथी को सरप्राइज दे सकते हैं, अपने सारे कामों को छोड़कर आज आप उनके साथ वक्त बिता सकते हैं। अपने जीवनसाथी की नुक़्ताचीनी से आप आज परेशान हो सकते हैं, लेकिन वह आपके लिए कुछ बढ़िया भी करने वाला है। मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह) आज गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत अच्छा दिन नहीं है। चलते-फिरते समय ख़ासा ख़याल रखने की ज़रूरत है। आपके पास आज पैसा भी पर्याप्त मात्रा में होगा और इसके साथ ही मन में शांति भी होगी। आपको अपने रोज़मर्रा के कामों से छुट्टी लेकर आज दोस्तों के साथ घूमने का कार्यक्रम बनाना चाहिए। सेमिनार और गोष्ठियों में हिस्सा लेकर आज आप कई नए विचार पा सकते हैं। आज रात को जीवनसाथी के साथ खाली वक्त बिताते समय आपको लगेगा कि आपको उन्हें और भी वक्त देना चाहिए। यह दिन शादीशुदा ज़िन्दगी के सबसे ख़ास दिनों में से एक रहेगा। कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो) आज आप खूब मुस्कुरा कर समय बितायें, क्योंकि यह सभी समस्याओं का सबसे अच्छा इलाज है। अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर आज आप भविष्य के लिए कोई आर्थिक योजना बना सकते हैं और उम्मीद है कि यह योजना सफल भी होगी। आपकी दिलचस्प रचनात्मकता आज घर के वातावरण को सुखद बनाएगी। अपने प्रिय के लिए बदले की भावना से कुछ हासिल नहीं होगा- बजाय इसके आपको दिमाग़ शांत रखना चाहिए और अपने प्रिय को अपनी सच्चे जज़्बात से परिचित कराना चाहिए। आज आपका मन ऑफिस के काम में नहीं लगेगा। आज आपके मन में कोई दुविधा होगी जो आपको एकाग्र नहीं होने देगी। इस राशि वाले जातकों को आज खाली वक्त में आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए। ऐसा करके आपकी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। आपके और आपके जीवनसाथी के दरमियान कोई अजनबी नोंकझोंक की वजह बन सकता है। सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे) आज आप मानसिक शान्ति के लिए किसी दान-पुण्य के काम में सहभागिता करें। आज किया गया निवेश आपकी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा में इज़ाफ़ा करेगा। आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा। आपको अपनी ओर से सबसे अच्छा बर्ताव करने की ज़रूरत है, क्योंकि आपके प्रिय का मूड बहुत अनिश्चित होगा। काम की अधिकता के बावजूद भी आज कार्यक्षेत्र में आपमें ऊर्जा देखी जा सकती है। आज आप दिये गये काम को तय वक्त से पहले ही पूरा कर सकते हैं। दिन की शुरुआत भले ही थोड़ी थकाऊ रहे लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा आपको अच्छे फल मिलने लगेंगे। दिन के अंत में आपको अपने लिए समय मिल पाएगा और आप किसी करीबी से मुलाकात करके इस समय का सदुपयोग कर सकते हैं। अपने जीवनसाथी के किसी छोटी बात को लेकर बोेले गए झूठ से आप आहत महसूस कर सकते हैं। कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो) आज आप मानसिक शान्ति के लिए तनाव के कारणों का समाधान करें। अपनेे लिए पैसा बचाने का आपका ख्याल आज पूरा हो सकता है। आज आप उचित बचत कर पाने में सक्षम होंगे। मुश्किल दौर में आपकी जिन रिश्तेदारों ने मदद की है, उनके लिए अपनी कृतज्ञता को व्यक्त करें। आपका यह छोटा-सा काम उनके उत्साह को बढ़ाएगा। कृतज्ञता जीवन की सुगंध को फैलाती है और अहसान-फ़रामोशी इसे तार-तार कर देती है। जिसे आप चाहते हैं, उसके साथ आपका तल्ख़ रवैया आपके रिश्ते में दूरी बढ़ा सकता है। आज कार्यक्षेत्र में आपके किसी पुराने काम की तारीफ हो सकती है। आपके काम को देखते हुए आज आपकी तरक्की भी संभव है। कारोबारी आज अनुभवी लोगों से करोबार को आगे बढ़ाने की सलाह ले सकते हैं। आपका व्यक्तित्व ऐसा है कि ज्यादा लोगों से मिलकर आप परेशान हो जाते हैं और फिर अपने लिए वक्त निकालने की कोशिश करने लग जाते हैं। इस लिहाज से आज का दिन आपके लिए बहुत उम्दा रहने वाला है। आज आपको अपने लिए पर्याप्त समय मिलेगा। मुश्किल हालात से उबरने में आपके जीवनसाथी की तरफ़ से ज़्यादा सहयोग हासिल नहीं होगा। तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते) आज ख़ुद को ज़्यादा आशावादी बनने के लिए प्रेरित करें। इससे न सिर्फ़ आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और व्यवहार लचीला होगा, बल्कि डर, ईर्ष्या और नफ़रत जैसे नकारात्मक मनोभावों में भी कमी आएगी। अगर आप आय में वृद्धि के स्रोत खोज रहे हैं, तो सुरक्षित आर्थिक परियोजनाओं में निवेश करें। बढ़िया दिन है जब आप सबके ध्यान को अपनी तरफ़ खींचेंगे- आपके सामने चुनने के लिए कई चीज़ें होंगी और आपके सामने समस्या यह होगी कि किसे पहले चुना जाए। आपके जीवन-साथी के पारिवारिक सदस्यों की वजह से आपका दिन थोड़ा परेशानीभरा हो सकता है। नयी साझीदारी आज के दिन फलदायी रहेगी। यात्रा करना फ़ायदेमंद लेकिन महंगा साबित होगा। ख़राब मिज़ाज के चलते आप महसूस कर सकते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको बेवजह तंग कर रहा है। वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू) . आज बेकार का तनाव आपके जीवन को नीरस कर सकता है। भलाई इसी में है कि इन आदतों को छोड़ दें, नहीं तो इनसे केवल आपकी परेशानियों में बढ़ोतरी ही होगी। ऐसा लगता है आप जानते हैं कि लोग आपसे क्या चाहते हैं- लेकिन आज अपने ख़र्चों को बहुत ज़्यादा बढ़ाने से बचें। परिवार और बच्चों के साथ बिताया समय आपको फिर ऊर्जा से भरपूर कर देगा। आपको अपनी तरफ़ से सबसे बेहतर तरीक़े से बर्ताव करने की ज़रूरत है - क्योंकि आज आपका प्रिय जल्दी ही नाराज़ हो सकता है। आपकी सबको साथ लेकर चलने की क्षमता और भली-भांति विश्लेषण करने की ख़ासियत को लोग सराहेंगे। बातों को सही तरीके से समझने का आज आपको प्रयास करना चाहिए नहीं तो इसकी वजह से आप खाली समय में इन्हीं बातों के बारे में सोचते रहेंगे और अपना समय बर्बाद करेंगे। ख़ुद तनावग्रस्त होने की झल्लाहट आप बेवजह अपने जीवनसाथी पर निकाल सकते हैं। धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे) आज शारीरिक और मानसिक लाभ के लिए ध्यान व योग करना उपयोगी रहेगा। जीवनसाथी की खराब तबीयत के कारण आज आपका धन खर्च हो सकता है लेकिन आपको इसको लेकर चिंता करने की जरुरत नहीं है क्योंकि धन इसीलिये बचाया जाता है कि बुरे समय में वो आपके काम आ सके। आज आपको अपने होशियारी और प्रभाव का उपयोग संवेदनशील घरेलू मुद्दों को हल करने के लिए करना चाहिए। जो भी बोलें, सोच-समझकर बोलें। क्योंकि कड़वे शब्द शांति को नष्ट करके आपके और आपके प्रिय के बीच दरार पैदा कर सकते हैं। कामकाज के सिलसिले में आपके ऊपर ज़िम्मेदारियों का बोझ बढ़ सकता है। वह काम जो आज आप दूसरों के लिए स्वेच्छा से करेंगे, न सिर्फ़ औरों के लिए मददगार साबित होगा बल्कि आपके दिल में ख़ुद की छवि भी सकारात्मक होगी। रिश्तेदारों को लेकर जीवनसाथी के साथ नोंकझोंक हो सकती है। मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी) आज हृदय-रोगियों के लिए कॉफ़ी छोड़ने का सही समय है। अब इसका ज़रा भी इस्तेमाल दिल पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। हालाँकि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, लेकिन पैसे का लगातार पानी की तरह बहते जाना आपकी योजनाओं में रुकावट पैदा कर सकता है। जिन लोगों के साथ आप रहते हैं वे आपसे बहुत ख़ुश नहीं होंगे, चाहे आपने इसके लिए कुछ भी क्यों न किया हो। अचानक मिला कोई सुखद संदेश नींद में आपको मीठे सपने देगा। आपको महसूस होगा कि आपके परिवार का सहयोग ही कार्यक्षेत्र में आपके अच्छे प्रदर्शन के लिए ज़िम्मेदार है। जीवन की पेचीदिगियों को समझने के लिए आज घर के किसी वरिष्ठ शख्स के साथ आप वक्त गुजार सकते हैं। अगर आप वैवाहिक तौर पर लंबे समय से कुछ नाख़ुश हैं, तो आज के दिन आप हालात बेहतर होते हुए महसूस कर सकते हैं। कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द) आज कुछ रचनात्मक करने के लिए अपने दफ़्तर से जल्दी निकलने की कोशिश करें। अटके हुए मामले और घने होंगे व ख़र्चे आपके दिमाग़ पर छा जाएंगे। दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन ख़ुशनुमा कर देंगे। आपके ज़हन में काम का दबाव होने के बावजूद आपका प्रिय आपके लिए ख़ुशी के पलों को लाएगा। निर्णय लेते समय अपने अहम को बीच में न आने दें, अपने कनिष्ठ सहकर्मियों की बात पर ग़ौर फ़रमाएँ। अपने समय की कीमत समझें, उन लोगों के बीच रहना जिनकी बातें आपके समझ में नहीं आती हैं गलत है। ऐसा करना भविष्य में आपको परेशानियों के अलावा कुछ नहीं देगा। लंबे अरसे के बाद जीवनसाथी के साथ काफ़ी वक़्त गुज़ारने का मौक़ा मिल सकता है। मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची) आज के दिन खेलों और आउटडोर गतिविधियों में भागीदारी आपकी खोयी ऊर्जा को फिर से इकट्ठा करने में आपकी मदद करेगी। धन की आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है इसलिए आज जितना हो अपने पैसे की बचत करने का विचार बनाएं। जितना आपने सोचा था, आपका भाई उससे ज़्यादा मददगार साबित होगा। संभव है कि कोई आपसे अपने प्यार का इज़हार करे। कार्यक्षेत्र में लोगों का नेतृत्व करें, क्योंकि आपकी निष्ठा आगे बढ़ने में मददगार सिद्ध होगी। देर शाम तक आपको कहीं दूर से कोई अच्छी ख़बर सुनने को मिल सकती है। आपको महसूस होगा कि आपका वैवाहिक जीवन बहुत ख़ूबसूरत है। __________________________________ 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ - संकलनकर्त्ता- ज्योतिर्विद् पं. रामपाल भट्ट श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ __________________________________

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Madan Kaushik Apr 14, 2021

***अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! सबसे पहले तो नित्यप्रति आपकी प्रिय पोस्ट "नक्षत्रवाणी" की पोस्टिंग में होने वाले विलंब के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित...🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी सनातनी, धर्म-उत्सवप्रेमी, राम-कृष्ण-हरि-शिवभक्त, शक्ति उपासक व राष्ट्रप्रेमियों को आज **चैत्र शुक्ल/चानन पक्ष/सुदी द्वितीया/दूज की, वासंतिक/चैत्र नवरात्रि महापर्व के द्वितीय दिवस की (मां ब्रहमचारिणी पूजन दिवस) की, विश्व एयरोनॉटिक्स एवं ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस** की भी बहुत-2 हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं...!!! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र' की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸!! ॐ श्री गणेशाय नमः!! 🌸☘️ ****************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक *१४ अप्रैल सन २०२१ ईस्वी* बुधवासर/बुधवार/Wednesday* *🇮🇳 राष्ट्रीय सौर दि. २४* *चैत्र (मधुमास)* प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग:««« 👉 ध्यान दें **यहाँ दिये गए तिथि, नक्षत्र, योग व करण आदि के समय इनके समाप्ति काल हैं और सूर्योदयास्त व चंद्रोदय का गणना स्थल मुंबई हैं।** कलियुगाब्द......5122 (५१२२) विक्रम संवत्.....२०७७/2077 (आंनद नाम) शक संवत्......१९४३/1943 मास....चैत्र (सं./हिंदी)/चैत (मारवाड़ी/पंजाबी) पक्ष........शुक्ल/चानन पक्ष/सुदी/उतरतो चैत **तिथी...(०२/02) द्वितीया/दूज** *रात्रि 12.47 पर्यंत पश्चात तृतीया* **वार/दिन...बुधवासर/बुधवार** **नक्षत्र........भरणी🌠** *संध्या 05.23 पर्यंत पश्चात कृत्तिका* योग............प्रीति दोप. 04.16 पर्यंत पश्चात आयुष्मान करण..........कौलव दोप 12.47 पर्यंत पश्चात तैतिल सूर्योदय.......प्रातः 06.22.00 पर सूर्यास्त........सांय 06.56.00 पर चंद्रोदय.........प्रातः 07.45.00 पर। रवि(अयन-दृक)......उत्तरायण रवि(अयन-वैदिक)...उत्तरायण **ऋतु (दृक).....वसंत** **ऋतु वैदिक)...वसंत** **सूर्य राशि.......मीन** **चन्द्र राशि......मेष (रात्रि 12.10 पश्चात वृषभ)** **गुरु राशी.......कुंभ (पूर्व में उदय, मार्गी)** 🚦*दिशाशूल :-* उत्तर दिशा - यदि बहुत ही आवश्यक हो तो पान/पिस्ता या धनिया का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें। ☸ शुभ अंक.....५/5 🔯 शुभ रंग........हरित/हरा ⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-* आज मान्य नहीं होगा। 👁‍🗨*👁‍🗨 *राहुकाल* :- मध्याह्न 12.39 से 14.13 तक । 👁‍🗨 *गुलिक काल :-* पूर्वाह्न/दिन 11.05 से 12.39 तक। ********************* 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मीन* 04:38:32 06:09:19 *मेष* 06:09:19 07:50:24 *वृषभ* 07:50:24 09:49:01 *मिथुन* 09:49:01 12:02:42 *कर्क* 12:02:42 14:18:53 *सिंह* 14:18:53 16:30:42 *कन्या* 16:30:42 18:41:21 *तुला* 18:41:21 20:55:59 *वृश्चिक* 20:55:59 23:12:09 *धनु* 23:12:09 25:17:47 *मकर* 25:17:47 27:04:55 *कुम्भ* 27:04:55 28:38:32 ⚜️ *चौघडिया :-* प्रात: 07.494 से 09.18 तक अमृत प्रात: 10.52 से 12.26 तक शुभ दोप 03.34 से 05.08 तक चंचल सायं 05.08 से 06.42 तक लाभ रात्रि 08.08 से 09.34 तक शुभ । *****""""""******"""*******"""******** आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉 **आज चैत्र शुक्ल/चानन पक्ष/सूदी बुध वासर/बुधवार को वर्ष का 386 वाँ दिन/तीन सौ छियासीवां दिन, द्वितीया/दूज 12:47 तक पश्चात् तृतीया शुरु, नवरात्रि का दूसरा दिन - माँ ब्रह्मचारिणी व्रत/पूजा, श्रृंगार (सिंधारा, देशाचार स्थान भेद से), सिन्धी सम्प्रदाय का श्री झूलेलाल जयन्ती महोत्सव (चैत्र शुक्ल द्वितीया), हिजरी रमजान 9 माह शुरू (मुस्लिम, चन्द्र दर्शन पर निर्भर), संक्रान्ति का विशेष पुण्यकाल 08:57 तक (सतुआ जल कुम्भादि दान, हरिद्वार या काशी के असी संगम पर स्नान) मीन (खर) मास समाप्त, सर्वार्थसिद्धियोग/कार्यसिद्धियोग 17:23 से सूर्योदय तक, राजयोग, कुम्भ महापर्व तृतीय शाही स्नान (हरिद्वार), ब्लैक डे (साउथ कोरिया), डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती (130वीं ), महर्षि वेंकटरमण अय्यर स्मृति दिवस, डाल्फिन दिवस, विश्व एयरोनॉटिक्स व ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस, अग्निशमन सेवा दिवस एवं अग्निशमन सेवा सप्ताह (20 अप्रैल तक)।** ************************* **🕉 ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः !! **🕉 ॐ गं गणपतये नमः ॥ 📿 *आज का उपासना मंत्र :- || ॐ जगन्मात्रे नम: || *********************** ⚜ 👉🙏☸*महत्वूर्ण तिथि विशेष :*🚩 **चैत्र कृष्णपक्ष/बदी द्वितीया/दूज, चैत्र नवरात्रि महापर्व, नवरात्रि का दूसरा दिन - माँ ब्रह्मचारिणी व्रत/पूजा, श्रृंगार महोत्सव (सिंधारा, देशाचार स्थान भेद से), सिन्धी सम्प्रदाय का श्री झूलेलाल जयन्ती महोत्सव/पर्व (चैत्र शुक्ल द्वितीया अनुसार)।** 🙏 💥 **विशेष ध्यातव्य👉 द्वितीय/दूज को बृहति यानि छोटे बैंगन का किसी भी रुप में सेवन करना आरोग्य व धननाशक होने से पूर्णतः वर्जित है।** साभार: 🌞 *~हिन्दू पंचांग ~* 🌞।** 👉 **🏡वास्तु टिप्स🏢🏡 1) वास्तु विज्ञान के अनुसार घर या ऑफिस के तहखाने का उपयोग कोचिंग, दफ्तर व गोदाम के रूप में ही ठीक रहता है। इसे कभी भी शयनकक्ष नहीं बनाना चाहिए। 2) गृहवास्तु के अनुसार यथासंभव शयनकक्ष में दर्पण न लगाएँ। इससे घर के सदस्यों के विचारों में मतभेद और कलह की स्थिति उत्पन्न होती रहती है।** 3) यदि आपके घर से अगर अकारण ही बरकत जा रही है या आपको नेगेटिव एनर्जी दिख रही है या परिवार में निरंतर कलह रहता है, तो कपूर और फिटकरी को पीस के गौझारण (गौमूत्र) जो बहुत ही आसानी से मिल जाता है (अन्यथा पतंजलि आदि का ले लें), इससे घर मे पोछा लगाने वाले क्लीनर या पानी मे मिला लें और रोज़ सुबह-शाम घर मे पोछा लगाये और गंगाजल का पूजा-आरती के बाद छिड़काव भी करें फिर चमत्कारिक परिवर्तन देखें। 4) **घर की मुख्य सीढ़ियाँ सदैव दक्षिण या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। ईशान में कभी भी होनी चाहिए। विशेष परस्थिति में वायव्य तथा आग्नेय कोण में बना सकते हैं। *****""""""******"""*******"""******** 📯 *संस्कृत सुभाषितानि :-* खलः सर्षपमात्राणि परछिद्राणि पश्यति । आत्मनो बिल्वमात्राणि पश्यन् अपि न पश्यति ॥ अर्थात :- दुष्ट मानव दूसरे का राई जितना दोष भी देखते हैं, लेकिन खुद के बिल्वफ़ल जितने दोष दिखनेके बावजूद उसे ध्यान पर नहीं लेते । *💊💉आज का आरोग्य मंत्र 🌱🌿* *बालों का झड़ना रोकने वाले टिप्स -* *1. नेचुरल जूस है फायदेमंद -* नेचुरल जूस पोषण और ताजगी से भरपूर है जो आपको एक सुखद एहसास देता है। अपने सिर में लहसून का रस, प्याज का रस या अदरक के रस में से एक रस को मल लें। रात भर इसे छोड़ दें और सुबह में अच्छी तरह धो लें। यह बालों को गिरने से रोकने में सहायता करता है। ⚜*🐑🐂🦔 आज का संभावित चन्द्र राशिफल🦂🐊🐟:- 👉 किंतु पहले सबसे एक करबद्ध निवेदन🙏 मित्रों सर्वप्रथम तो कुछ तकनीकी कारणों से आपको आपकी प्रिय पोस्ट नक्षत्रवानी विलंब से मिल पाती है इसके लिए मैं आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ। तत्पश्चात मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि आपकी इस परमप्रिय ज्ञानवर्धक 'अपना पोस्ट' *नक्षत्रवाणी* को आप जितना हो सकता हो उतना लाइक-शेयर तथा फॉरवर्ड तो करें ही, आलस्य त्याग कर कृपया इसपर अपनी बुद्धि व विवेक के अनुसार अपने सही-सही कमैंट्स भी अवश्य करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे और अपने फीडबैक से व लाइक/सराहना करके भी अवश्य ही मेरा उत्साहवर्धन करेंगे। नक्षत्रवाणी के संदर्भ में आप सभी के बहुमूल्य सुझाव भी सदैव सादर आमंत्रित हैं।धन्यवाद...!!! **ख़ुशख़बर।। सबसे बड़ी ख़ुशख़बर।।**👇 🙏👉 किसी भी जन्मलग्न या जन्मराशि या अपनी प्रसिद्ध राशि के लिए भाग्यशाली रत्न-रुद्राक्ष हमसे जानें फ्री ऑफ Charge यानि पूर्णतः निःशुल्क व निःसंकोच। इसके अलावा लैब टेस्टेड उच्चतम क्वालिटी के रत्न-रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए भी हमसे संपर्क करें :👇 9987815015 या 9991610514 पर। 🙏👉 प्रियवरों शिवकृपा प्राप्ति के सबसे बड़े शुभावसर 'महाशिरात्रि' के पावन पर्व पर (यानि कि 11 मार्च को) भगवान महाकालेश्वर शिव जो कि एकादश रुद्र रूपों में भी तीनों लोकों में प्रस्फुटित होते हैं, उनके साक्षात स्वरूप व कृपाप्रसाद *पंचमुखी 'रुद्राक्ष रत्न*" जिसे रुद्र के अक्ष या भगवान शिव के अक्ष के रूप में भी जाना जाता है, को इसबार फिर से इस परम शुभ अवसर पर विधिवत् *अभिमंत्रित* करके आपको आपके सभी दैहिक-दैविक-भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाने हेतु, विशेषतः इस **कोरोना काल** में बहुत अधिक बढ़ चुके मानसिक संताप (Mental stress/depression) तथा आर्थिक संताप को पूर्ण रूप से दूर करने के लिए, इस समय आपकी आर्थिक तँगीं की स्थिति को समझते हुए **केवल मात्र 111₹** में आप शिवभक्त सुधि पाठकों के लिए उपलब्ध करवाना प्रारंभ किया हैं। जिसे भी यह दिव्य सर्वसिद्ध **रुद्राक्ष रत्न** चाहिए, वे कृपया हमें इसी नम्बर पर व्हाट्सएप्प करें। ध्यान रखें यह योजना सीमित समय के लिए ही है, इसलिए इस सुनहरे अवसर को आप चूकें नहीं। 🙏 👉 **एक विशेष व अति शुभ सूचना:** **मित्रों हमारे 'ऐस्ट्रो वर्ल्ड' के दिव्य कोष में शुद्ध केसर (काश्मीरी व ईरानी A तथा B दोनों ग्रेड की), पारिजात, चम्पा, अनन्त, पुन्नाग, श्वेत/सफ़ेद ऊद, केसर, खस, भीना गुलाब व असली चंदन जैसे दिव्य इत्रों की पूरी रेंज, भीमसेनी कर्पूर, उत्तम क्वालिटी की शुद्ध गुग्गल व शुद्ध लोबान, शुद्ध राशि रत्न-उपरत्न, असली नेपाली रुद्राक्ष रत्न व गण्डकी नदी से प्राप्त असली शालग्राम जी भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा हमारे इस संग्रहालय में और भी कई दिव्य व चमत्कारिक वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये सभी दिव्य वस्तुएं हम अपने ज्योतिष-वास्तु एवं वैदिक पूजा-अनुष्ठानों के नियमित यजमानों के लिए बहुत ही सही रेट पर और कम मार्जिन पर देते हैं तथा इनके असली होने की मनी बैक गारंटी के साथ भी। तो आप 'नक्षत्रवाणी' के सभी पाठक भी हमारे परम प्रिय होने से इसका लाभ निःसन्देह ले सकते हैं। इसके लिए आप हमें इसी नम्बर पर व्हाट्सएप्प करें। जल्दी रिप्लाई ना मिलने पर आप कॉल भी कर सकते हैं। धन्यवाद...!!!** 🙏ध्यान दें मित्रों 👉 **जिनका भी 'FB यानि फ़ेसबुक' अकाउंट नहीं है और जो पाठकगण हमारे द्वारा भेजे जा रहे 'FB लिंक' के माध्यम से 'नक्षत्रवाणी पोस्ट' नहीं देख या पढ़ पा रहे हों वे इसके बारे में हमें अविलंब बताएं ताकि उन्हें बिना FB लिंक वाली 'पूरी पोस्ट' भेजी जा सके। इसके अलावा जिन पाठक गणों को नक्षत्रवाणी पोस्ट एक से अधिक बार प्राप्त हो रही हो, वे भी हमें तुरंत सूचित करने की कृपा करें ताकि उन्हें हमारी एक से अधिक ब्रॉडकास्ट लिस्ट्स/BCLs से उन्हें रिमूव किया जा सके। आप हमें प्रतिक्रिया नहीं देते हैं तो हमें तो यही लगेगा कि आप को नक्षत्रवाणी केवल एक ही बार प्राप्त हो रही है। इसलिए हमें सूचित अवश्य करें। धन्यवाद...!!! *****""""""******"""*******"""******** देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐐 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। लाभ के मौके बार-बार प्राप्त होंगे। विवेक का प्रयोग करें। बेकार बातों में समय नष्ट न करें। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में तरक्की के योग हैं। व्यापार की गति बढ़ेगी। लाभ में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* कोई पुरानी व्याधि परेशानी का कारण बनेगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे। कोई बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। किसी विशेष क्षेत्र में सामाजिक कार्य करने की इच्छा रहेगी। प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि होगी। निवेश शुभ रहेगा। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। कोर्ट व कचहरी के अटके कामों में अनुकूलता आएगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। चोट व रोग से बचें। सेहत का ध्यान रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। लाभ में वृद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* बोलचाल में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। प्रतिद्वंद्विता कम होगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। ऐसा कोई कार्य न करें जिससे बाद में पछताना पड़े। जोखिम न लें। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* कोर्ट व कचहरी में लंबित कार्य पूरे होंगे। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। शेयर मार्केट से लाभ होगा। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। भाग्य का साथ रहेगा। सभी काम पूर्ण होंगे। जल्दबाजी न करें। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* रोजगार में वृद्धि तथा बेरोजगारी दूर होगी। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। संचित कोष में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। शेयर मार्केट में सोच-समझ्कर निवेश करें। संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। झंझटों से दूर रहें। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। व्यापार मनोनुकूल रहेगा। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य खराब हो सकता है। प्रमाद न करें। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में कमी रह सकती है। दु:खद समाचार की प्राप्ति संभव है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। बेवजह विवाद की स्थिति बन सकती है। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। दूसरों के उकसाने में न आकर महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लें, लाभ होगा। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* जल्दबाजी में कोई काम न करें। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। कोई आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। कुंआरों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में उन्नति होगी। व्यापार लाभदायक रहेगा। प्रमाद न करें। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* किसी भी निर्णय को लेने में जल्दबाजी न करें। भ्रम की स्थिति बन सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। थकान व कमजोरी महसूस होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। कारोबार में मनोनुकूल लाभ होगा। प्रमाद न करें। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। घर-बाहर सहयोग प्राप्त होगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। बेरोजगारी दूर होगी। अचानक कहीं से लाभ के आसार नजर आ सकते हैं। किसी बड़ी समस्या से निजात मिलेगी। निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* आंखों को चोट व रोग से बचाएं। कीमती वस्तु गुम हो सकती है। पुराना रोग उभर सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। हल्की हंसी-मजाक किसी से भी न करें। नकारात्मकता रहेगी। अकारण क्रोध होगा। फालतू खर्च होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। बेवजह कहासुनी हो सकती है। जोखिम न लें। *****""""""******"""*******"""******** ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बीमारी आपको छोड़ ही नहीं रही है...? घर का हर एक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, दक्षिणावर्ती शँख (जो कि घर में विधिवत रखने मात्र से ही बदल दे आपका भाग्य हमेशां-2 के लिए...!), सियारसिंगी, भुजयुग्म (हत्थाजोड़ी, जो तिज़ोरी आपकी कभी ख़ाली ना होने दे), नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका दिन आदि वैद्य (भगवान धन्वंतरि जी) की कृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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🔱 *हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे* 🔱 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🔱🌷🌷🌷🌷🌷🌷 #भूत_प्रेत_पिशाच_आत्माएं ------------------------------------- जरा सोचिए एक ऐसी ताकत जो आपको ना तो नुकसान पहुंचा रही है न ही आपके लिए कोई परेशानी खड़ी कर रही है लेकिन फिर भी उसका दिखाई ना देना आपके लिए कितना भयावह है…! भूत-प्रेत, पिशाच, आत्माएं इन सब से जुड़ी बातें जितनी ज्यादा रोमांचित करती हैं उतनी ही सिहरन और भय का माहौल भी बनाती हैं. रात के समय इन आत्माओं का अगर जिक्र भी छिड़ जाए तो भी चारों तरफ डर और भय का माहौल बन जाता है. बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो इस अंधेरी दुनिया और काले साये जैसी बातों पर भरोसा नहीं करते लेकिन एक सच यह भी है कि अच्छे के साथ-साथ बुरा भी होता है. अगर हम ईश्वर पर विश्वास करते हैं तो हमें पिशाचों पर भी विश्वास करना होगा, नहीं तो सत्य से मुंह फेरने वाली बात ही होगी. आपने ऐसे बहुत से लोगों को देखा या उनके बारे में सुना होगा जो इन्हीं काले सायों के जाल में फंस जाते हैं. 1. पारलौकिक शक्तियों को समझने वाले लोगों का कहना है कि अपनी इच्छाओं और अधूरी आंकाक्षाओं को पूरा करने के लिए कुछ लोग मरने के बाद भी वापिस आते हैं. इसके अलावा अगर अपने संबंधियों या परिचितों के साथ उनका कोई सौदा बकाया रह जाता है तो भी उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती और वह उस लेन-देन को पूरा करने के लिए जीवित लोगों की दुनिया में कदम रखते हैं. 2. बिना शरीर के मृत आत्माएं अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर सकतीं इसीलिए उन्हें एक शरीर की आवश्यकता पड़ती है. वह किसी व्यक्ति के शरीर में वास कर अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करती हैं. यह उनकी इच्छा की गहराई और उसके पूरे होने की समय सीमा पर निर्भर करता है कि वह किसी व्यक्ति के शरीर में कितनी देर तक ठहरते हैं. यह अवधि कुछ घंटों या सालों की भी हो सकती है. कई बार तो जन्मों-जन्मों तक वह आत्मा उस शरीर का पीछा नहीं छोड़ती. 3. ऐसा माना जाता है कि जानवर किसी आत्मा या पिशाच की उपस्थिति को सबसे पहले भांप सकता है. अगर रात के समय कोई कुत्ता बिना किसी कारण के भौंकने लगे या अचानक शांत होकर बैठ जाए तो इसका मतलब है उसने किसी पारलौकिक शक्ति का अहसास किया है. 4. झगड़े या विवाद के पश्चात किसी भूमि या इमारत का अधिग्रहण किया जाता है और इस झगड़े के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो वह जगह हॉंटेड बन जाती है. निश्चित तौर पर वहां बुरी आत्माएं अपना डेरा जमा लेती हैं. 5. जीवित लोगों को बहुत चीजें प्यारी होती हैं. किसी को अपना मोबाइल प्यारा होता है तो कोई अपने कैमरे के बिना नहीं रह सकता. लेकिन अगर आप यह सोचते हैं कि मरने के बाद यह प्यार समाप्त हो जाता है तो आप गलत हैं. क्योंकि मरने के बाद भी चीजों के साथ यह लगाव बरकरार रहता है और जिन चीजों को मृत व्यक्ति अपने जीवन में बहुत प्यार करता था मरने के बाद भी उसे अपना ही समझता है. इसीलिए अगर कोई दूसरा व्यक्ति उस वस्तु को हाथ लगाए तो यह उन्हें बर्दाश्त नहीं होता.. भूत-प्रेत के बारे में 10 बातें भूत-प्रेत का नाम सुनते ही अचानक ही एक भयानक आकृति हमारे दिमाग में उभरने लगती है और मन में डर समाने लगता है। हमारे दैनिक जीवन में कहीं न कहीं हम भूत-प्रेत का नाम अवश्य सुनते हैं। कुछ लोग भूतों को देखने का दावा भी करते हैं जबकि कुछ इसे कोरी अफवाह मानते हैं। भूत-प्रेत से जुड़ी कई मान्यताएं व अफवाएं भी हमारे समाज में प्रचलित हैं। दुनिया के लगभग हर धर्म में भूत-प्रेतों के बारे में कुछ न कुछ बताया गया है। विभिन्न धर्म ग्रंथों में भी भूत-प्रेतों के बारे में बताया गया है। सवाल यह उठता है कि अगर वाकई में भूत-प्रेत होते हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते या फिर कुछ ही लोगों को क्यों दिखाई देते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवित मनुष्य का शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना होता है-पृथ्वी, जल, वायु, आकाश व अग्नि। मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा पृथ्वी तत्व की होती है और यह तत्व ठोस होता है इसलिए मानव शरीर आसानी से दिखाई देता है। जबकि भूत-प्रेतों का शरीर में वायु तत्व की अधिकता होती है। वायु तत्व को देखना मनुष्य के लिए संभव नहीं है क्योंकि वह गैस रूप में होता है इसलिए इसे केवल आभास किया जा सकता है देखा नहीं जा सकता। यह तभी संभव है जब किसी व्यक्ति के राक्षण गण हो या फिर उसकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष हो। मानसिक रूप से कमजोर लोगों को भी भूत-प्रेत दिखाई देते हैं जबकि अन्य लोग इन्हें नहीं देख पाते। धर्म शास्त्रों के अनुसार भूत का अर्थ है बीता हुआ समय। दूसरे अर्थों में मृत्यु के बाद और नए जन्म होने के पहले के बीच में अमिट वासनाओं के कारण मन के स्तर पर फंसे हुए जीवात्मा को ही भूत कहते हैं। जीवात्मा अपने पंच तत्वों से बने हुए शरीर को छोडऩे के बाद अंतिम संस्कार से लेकर पिंड दान आदि क्रियाएं पूर्ण होने तक जिस अवस्था में रहती है, वह प्रेत योनी कहलाती है। गरूण पुराण के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु के बाद पुत्र आदि जो पिंड और अंत समय में दान देते हैं, इससे भी पापी प्राणी की तृप्ति नहीं होती क्योंकि पापी पुरुषों को दान, श्रद्धांजलि द्वारा तृप्ति नहीं मिलती। इस कारण भूख-प्यास से युक्त होकर प्राणी यमलोक को जाते हैं इसके बाद जो पुत्र आदि पिंडदान नहीं देते हैं तो वे मर के प्रेत रूप होते हैं और निर्जन वन में दु:खी होकर भटकते रहते हैं। प्रत्येक नकारात्मक व्यक्ति की तरह भी भूत भी अंधेरे और सुनसान स्थानों पर निवास करते हैं। खाली पड़े मकान, खंडहर, वृक्ष व कुए, बावड़ी आदि में भी भूत निवास कर सकते हैं। हमें कई बार ऐसा सुनने में आता है कि किसी व्यक्ति के ऊपर भूत-प्रेत का असर है। ऐसा सभी लोगों के साथ नहीं होता क्योंकि जिन लोगों पर भूत-प्रेत का प्रभाव होता है उनकी कुंडली में कुछ विशेष योग बनते हैं जिनके कारण उनके साथ यह समस्या होती है। साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा नीच का हो या दोषपूर्ण स्थिति में हो तो ऐसे व्यक्ति पर भी भूत-प्रेत का असर सबसे ज्यादा होता है। प्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति की आंखें स्थिर, अधमुंदी और लाल रहती है। शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है। हाथ-पैर के नाखून काले पडऩे के साथ ही ऐसे व्यक्ति की भूख, नींद या तो बहुत कम हो जाती है या बहुत अधिक। स्वभाव में क्रोध, जिद और उग्रता आ जाती है। शरीर से बदबूदार पसीना आता है। हमारे आस-पास कई ऐसी अदृश्य शक्तियां उपस्थित रहती है जिन्हें हम देख नहीं पाते। यह शक्तियां नकारात्मक भी होती है और सकारात्मक भी। सिर्फ कुछ लोग ही इन्हें देख या महसूस कर पाते हैं। राक्षस गण वाले लोगों को भी इन शक्तियों का अहसास तुरंत हो जाता है। ऐसे लोग भूत-प्रेत व आत्मा आदि शक्तियों को तुरंत ही भांप जाते हैं। राक्षस गण, यह शब्द जीवन में कई बार सुनने में आता है लेकिन कुछ ही लोग इसका मतलब जानते हैं। यह शब्द सुनते ही मन और मस्तिष्क में एक अजीब सा भय भी उत्पन्न होने लगता है और हमारा मन राक्षस गण वाले लोगों के बारे में कई कल्पनाएं भी करने लगता है। जबकि सच्चाई काफी अलग है। ज्योतिष शास्त्र के आधार पर प्रत्येक मनुष्य को तीन गणों में बांटा गया है। मनुष्य गण, देव गण व राक्षस गण। कौन सा व्यक्ति किस गण का है यह कुंडली के माध्यम से जाना जा सकता है। मनुष्य गण तथा देव गण वाले लोग सामान्य होते हैं। जबकि राक्षस गण वाले जो लोग होते हैं उनमें एक नैसर्गिक गुण होता है कि यदि उनके आस-पास कोई नकरात्मक शक्ति है तो उन्हें तुरंत इसका अहसास हो जाता है। कई बार इन लोगों को यह शक्तियां दिखाई भी देती हैं लेकिन इसी गण के प्रभाव से इनमें इतनी क्षमता भी आ जाती है कि वे इनसे जल्दी ही भयभीत नहीं होते। राक्षस गण वाले लोग साहसी भी होते हैं तथा विपरीत परिस्थिति में भी घबराते नहीं हैं। भारत की 5 भूतिया जगह …. 1.) भानगड़ किला, राजस्थान यहां सूरज ढलते ही इस किले में अगर कोई रुक पाता है, तो वो हैं वहां वास कर रहीं आत्माएं। यकीन मानिए, भानगड़ किला बाहर से दिखने में जितना सुंदर है, उसके अंदर काले जादू का आगोश है। इस किले की भूतिया कहानी के पीछे है वो शाप, जो तांत्रिक सिंघीया ने भानगड़ की राजकुमारी रत्नावती को दिया था। रत्नावती की वजह से ही इस तांत्रिक की मृत्यु हुई थी। दरअसल, राजकुमारी रत्नावती से सिंघीया नाम का व्यक्ति बहुत प्यार करता था। एक दिन राजकुमारी रत्नाीवती एक इत्र की दुकान पर पहुंची और वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी।सिंघीया उसी राज्य में रहता था और वो काले जादू का महारथी था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर एक इत्र के बोतल जिसे रानी पसंद कर रही थी उसने उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए किया था। लेकिन राजकुमारी रत्नाावती ने उस इत्र के बोतल को उठाया, लेकिन उसे वही पास के एक पत्थ र पर पटक दिया। पत्थलर पर पटकते ही वो बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्थयर पर बिखर गया। इसके बाद से ही वो पत्थपर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंघीया के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक की मौके पर ही मौत हो गई। मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्दत ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्मप नहीं ले सकेंगे और ताउम्र उनकी आत्माकएं इस किले में भटकती रहेंगी। आज उस किले में मौत की चींखें गूंजती हैं। भारत की सरकार ने भी इस किले में शाम के बाद एंट्री बद की हुई है। 2.) दुमास बीच, गुजरात इस बीच पर हिंदुओं के शवों का दाह-संस्कार किया जाता है। लेकिन शाम के बाद यहां कोई नहीं रुक पाता। क्योंकि लोगों को अकसर यहां अजीब-गरीब आवाज़ें सुनाई देती हैं। यहां कई बार गतिविधियां भी महसूस होती हैं, मानो जैसे वहां कोई हो। जबकि आस-पास कोई नहीं होता। ऐसा माना जाता है कि यहां हर ओर मरे हुए लोगों की रूहें हर पल मौजूद रहती हैं। 3.) कुर्सियांग, पश्चिम बंगाल कुर्सियांग पश्चिम बंगाल में एक हिल स्टेशन है, जहां पर्यटकों का आना-जाना लगा ही रहता है। लेकिन कहते हैं कि यह हिल स्टेशन जितना ख़ूबसूरत है, उससे कई ज़्यादा यहां डरावनी हरकते होती हैं। यहां के लोगों को भयानक आवाज़े सुनाई देती हैं, उनके कमरों में हलचल होती रहती है और ख़ौफ के चलते, कईओं ने आत्महत्या भी कर ली। लोगों को लगता है कि कोई उनके पीछे चल रहा है। किसी ने तो एक कटे हुए सिर वाले लड़को को भी देखा, जो बाद में पेड़ों के पीछे कहीं छिप गया। 4.) राजकिरन होटल, लोनावाला, महाराष्ट्र पता : बी वार्ड, सी.एस. नंबर- 162, लोनावाला, मुंबई। मुंबई के इस गेस्ट हाउस में जो भी आता है, वो कोई न कोई किस्सा लेकर इस गेस्ट हाउस से बाहर ज़रूर निकलता है। किसी को लगता है कि रात को सोते समय कोई उसके कानों में कुछ-कुछ बोल रहा है, किसी की बेडशीट खुद ही सरकने लगती है, तो किसी को अजीब-गरीब आहट सुनाई देती है। ग्राउंड फ्लोर पर बने इस कमरे को अब वहां का मालिक भी रेंट पर नहीं देता। 5.) दिल्ली कैंट, दिल्ली, दिल्ली के सेक्टर- 9, द्वारका कहते हैं कि सेक्टर- 9 के मेट्रो स्टेशन के पास पीपल का एक पेड़ है जहां रूहों का वास है। और इसलिए लोगों ने वहां भगवान की मूर्तियां भी लगाई हुई हैं। इसके अलावा यह भी सुनने को मिला है कि इस जगह पर उन्होंसने एक सफेद रंग के लिबास में औरत देखी है जो लोगों से लिफ्ट मांगती रहती है और जब वे उसे लिफ्ट देते हैं तो वह अपने आप ही गायब हो जाती है। लेकिन जो लिफ्ट देने से मना करता है, उसका क्या हाल होता है ?, यह किसी को नहीं पता। भूत प्रेत के बारे में सुनकर तो विश्वास नहीं होता है लेकिन जब सामना होता है तब लगते है की हाँ ये भी बिचारे इस दुनिया के ही बशिंदे है .. आपलोग भी इनसे मिलेगे तो इनका भी मन लगा रहेगा .. आखिर है तो ये भी उसी इश्वर के बनाये हुए .. दोस्ते के दोस्त और दुस्मनो के दुश्मन …वैसे भूत शब्द स्वयं में अत्यंत रहस्यमय है और उसी प्रकार उनकी दुनिया भी उतनीही रहस्यमयी है। आइये, इस लेख से जानें कि भूत-प्रेत कौन होते हैं और कैसे बनते हैं और उनके दुष्प्रभाव से बचने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए और भूतग्रस्त व्यक्ति की पहचान और उपचार कैसे करें। भूत प्रेत कैसे बनते हैं: इस सृष्टि में जो उत्पन्न हुआ है उसका नाश भी होना है व दोबारा उत्पन्न होकर फिर से नाश होना है यह क्रम नियमित रूप से चलता रहता है। सृष्टि के इस चक्र से मनुष्य भी बंधा है। इस चक्र की प्रक्रिया से अलग कुछ भी होने से भूत-प्रेत की योनी उत्पन्न होती है। जैसे अकाल मृत्यु का होना एक ऐसा कारण है जिसे तर्क के दृष्टिकोण पर परखा जा सकता है। सृष्टि के चक्र से हटकर आत्मा भटकाव की स्थिति में आ जाती हैं। इसी प्रकार की आत्माओं की उपस्थिति का अहसास हम भूत के रूप में या फिर प्रेत के रूप में करते हैं। यही आत्मा जब सृष्टि के चक्र में फिर से प्रवेश करती है तो उसके भूत होने का अस्तित्व भी समाप्त हो जाता है। अधिकांशतः आत्माएं अपने जीवन काल में संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इसलिए उन्हें इसका बोध होता है। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे जल में डूबकर, बिजली द्वारा, अग्नि में जलकर, लड़ाई-झगड़े में, प्राकृतिक आपदा से मृत्यु तथा अकस्मात होने वाली अकाल मृत्यु व दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं और भूत-प्रेतों की संख्या भी उसी रफ्तार से बढ़ रही है। भूत-प्रेत कौन है: अस्वाभाविक व अकस्मात होने वाली मृत्यु से मरने वाले प्राणियों की आत्मा भटकती रहती हैं, जब तक कि वह सृष्टि के चक्र में प्रवेश न कर जाए, तब तक ये भटकती आत्माएं ही भूत व प्रेत होते हैं। इनका सृष्टि चक्र में प्रवेश तभी संभव होता है जब वे मनुष्य रूप में अपनी स्वाभाविक आयु को प्राप्त करती है। क्या करें, क्या न करें यू किसी निर्जन, एकांत या जंगल आदि में मलमूत्र त्याग करने से पूर्व उस स्थान को भलीभांति देख लेना चाहिए कि वहां कोई ऐसा वृक्ष तो नहीं है जिसपर प्रेत आदि निवास करते हैं अथवा उस स्थान पर कोई मजार या कब्रिस्तान तो नहीं है। किसी नदी, तालाब, कुआं या जलीय स्थान में थूकना या मलमूत्र का त्याग करना किसी अपराध से कम नहीं है क्योंकि जल ही जीवन है। जल को दूषित करने से जल के देवता वरुण रुष्ट हो सकते हैं। घर के आस-पास पीपल का वृक्ष नहीं होना चाहिए क्योंकि पीपल पर प्रेतों का वास होता है। सूर्य की ओर मुख करके मलमूत्र का त्याग नहीं करना चाहिए। गूलर, मोलसरी, शीशम, मेंहदी आदि के वृक्षों पर भी प्रेतों का वास होता है। इन वृक्षों के नीचे नहीं जाना चाहिए और न ही खुशबूदार पोधों के पास जाना चाहिए। सेव एकमात्र ऐसा फल है जिस पर क्रिया आसानी से की जा सकती है। इसलिए किसी का दिया सेव नहीं खाना चाहिए। पूर्णतया निर्वस्त्र होकर नहीं नहाना चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल घर में गंगाजल का छिड़काव करें। प्रत्येक पूर्णमासी को घर में सत्यनारायण की कथा करवाएं। सूर्यदेव को प्रतिदिन जल का अघ्र्य दें। घर में गुग्गल की धूनी दें। क्या करें कि आप पर अथवा आपके स्थान पर भूत-प्रेतों का असर न हो पाए: .. अपनी, आत्मशुद्धि व घर की शुद्धि हेतु प्रतिदिन घर में गायत्री मंत्र से हवन करें। अपने इष्ट देवी-देवता के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का प्रतिदिन पाठ करें। जिस घर में प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ होता है वहां ऊपरी हवाओं का असर नहीं होता। घर में पूजा करते समय कुशा का आसन प्रयोग में लाएं। मां महाकाली की उपासना करें। सूर्य को तांबे के लोटे से जल का अघ्र्य दें। संध्या के समय घर में धूनी अवश्य दें। रात्रिकालीन पूजा से पूर्व गुरु से अनुमति अवश्य लें। रात्रिकाल में 12 से 4 बजे के मध्य ठहरे पानी को न छूएं। यथासंभव अनजान व्यक्ति के द्वारा दी गई चीज ग्रहण न करें। प्रातःकाल स्नान व पूजा के पश्चात् ही कुछ ग्रहण करें। ऐसी कोई भी साधना न करें जिसकी पूर्ण जानकारी न हो या गुरु की अनुमति न हो। कभी किसी प्रकार के अंधविश्वास अथवा वहम में नहीं पड़ना चाहिए। इससे बचने का एक ही तरीका है कि आप बुद्धि से तार्किक बनें व किसी चमत्कार अथवा घटना आदि या क्रिया आदि को विज्ञान की कसौटी पर कसें, उसके पश्चात् ही किसी निर्णय पर पहुंचे। किसी आध्यात्मिक गुरु, साधु-संत, फकीर, पंडित आदि का अपमान न करें। अग्नि व जल का अपमान न करें। अग्नि को लांघें नहीं व जल को दूषित न करें। हाथ से छूटा हुआ या जमीन पर गिरा हुआ भोजन या खाने की कोई भी वस्तु स्वयं ग्रहण न करें। भूत-प्रेत आदि से ग्रसित व्यक्ति की पहचान कैसे करें… ऐसे व्यक्ति के शरीर से या कपड़ों से गंध आती है। ऐसा व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है।ऐसे व्यक्ति की आंखें लाल रहती हैं व चेहरा भी लाल दिखाई देता है। ऐसे व्यक्ति को अनायास ही पसीना बार-बार आता है। ऐसा व्यक्ति सिरदर्द व पेट दर्द की शिकायत अक्सर करता ही रहता है। ऐसा व्यक्ति झुककर या पैर घसीट कर चलता है। कंधों में भारीपन महसूस करता है। कभी-कभी पैरों में दर्द की शिकायत भी करता है। बुरे स्वप्न उसका पीछा नहीं छोड़ते। जिस घर या परिवार में भूत-प्रेतों का साया होता है वहां शांति का वातावरण नहीं होता। घर में कोई न कोई सदस्य सदैव किसी न किसी रोग से ग्रस्त रहता है। अकेले रहने पर घर में डर लगता है बार-बार ऐसा लगता है कि घर के ही किसी सदस्य ने आवाज देकर पुकारा है जबकि वह सदस्य घर पर होता ही नहीं? इसे छलावा कहते हैं। भूत-प्रेत से ग्रसित व्यक्ति का उपचार कैसे करें: भूत-प्रेतों की अनेकानेक योनियां हैं। इतना ही नहीं इनकी अपनी-अपनी शक्तियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। इसलिए सभी ग्रसित व्यक्तियों का उपचार एक ही क्रिया द्वारा संभव नहीं है। योग्य व विद्वान व्यक्ति ही इनकी योनी व शक्ति की पहचान कर इनका उपचार बतलाते हैं। अनेक बार ऐसा भी होता है कि ये उतारा या उपचार करने वाले पर ही हावी हो जाते हैं इसलिए इस कार्य के लिए अनुभव व गुरु का मार्ग दर्शन अत्यंत अनिवार्य होता है। आइये जानते है कुछ सामान्य उपचार सामान्य उपचार भी ग्रसित व्यक्ति को ठीक कर देते हैं या भूत-प्रेतों को उनके शरीर से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर देते हें। ये उपचार उतारा या उसारा के रूप में किया जाता है। इन्हें आजमाएं। 👉ग्रसित व्यक्ति के गले में लहसुन की कलियों की माला डाल दें। (लहसुन की गंध अधिकांशतः भूत-प्रेत सहन नहीं कर पाते इसलिए ग्रसित व्यक्ति को छोड़कर भाग जाते हैं।) रात्रिकाल में ग्रसित व्यक्ति के सिरहाने लहसुन और हींग को पीसकर गोली बनाकर रखें। 👉ग्रसित व्यक्ति की शारीरिक स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास करें। ग्रसित व्यक्ति के वस्त्र अलग से धोएं व सुखाएं। 👉 ग्रसित व्यक्ति के ऊपर से बूंदी का लड्डू उतारकर चैराहे या पीपल के नीचे रखें (रविवार छोड़कर)। तीन दिन लगातार करें। किसी योग्य व्यक्ति से अथवा गुरु से रक्षा कवच या यंत्र आदि बनवाकर ग्रसित व्यक्ति को धारण कराना चाहिए। ग्रसित व्यक्ति को अधिक से अधिक गंगाजल पिलाना चाहिए व उस स्थान विशेष पर भी प्रतिदिन गंगाजल छिड़कना चाहिए। नवार्ण मंत्र (ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) की एक माला जप करके जल को अभिमंत्रित कर लें व पीड़ित व्यक्ति को पिलाएं। 👉हर मंगल और शनि के दिन श्री हनुमान जी के मंदिर में जाये और उनके चरणों में से सिन्दूर लेकर माथे पर लगाये .. बेकार के जादू-टोने -टोटको से दूर रहे अन्यथा ये लाभ की बजाय भयंकर नुकसान भी कर सकते है .. अतः किसी योग्य जानकर से परामर्श लेकर और समाज कल्याण के लिए ही इन सबका प्रयोग करे .. किसी को अनायास परेशान न करे । भूत-प्रेतों की गति एवं शक्ति अपार होती है। इनकी विभिन्न जातियां होती हैं और उन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। ज्योतिष के अनुसार राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा हो और चंद्र दशापति राहु से भाव ६, ८ या १२ में बलहीन हो, तो व्यक्ति पिशाच दोष से ग्रस्त होता है। वास्तुशास्त्र में भी उल्लेख है कि पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, ज्येष्ठा, अनुराधा, स्वाति या भरणी नक्षत्र में शनि के स्थित होने पर शनिवार को गृह-निर्माण आरंभ नहीं करना चाहिए, अन्यथा वह घर राक्षसों, भूतों और पिशाचों से ग्रस्त हो जाएगा। इस संदर्भ में संस्कृत का यह श्लोक द्रष्टव्य है : ”अजैकपादहिर्बुध्न- ्यषक्रमित्रानिला्तकैः। समन्दैर्मन्दवारे स्याद् रक्षोभूतयुंतगद्यम॥ भूतादि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान उसके स्वभाव एवं क्रिया में आए बदलाव से की जा सकती है। इन विभिन्न आसुरी शक्तियों से पीड़ित होने पर लोगों के स्वभाव एवं कार्यकलापों में आए बदलावों का संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत है। भूत पीड़ा : भूत से पीड़ित व्यक्ति किसी विक्षिप्त की तरह बात करता है। मूर्ख होने पर भी उसकी बातों से लगता है कि वह कोई ज्ञानी पुरुष हो। उसमें गजब की शक्ति आ जाती है। क्रुद्ध होने पर वह कई व्यक्तियों को एक साथ पछाड़ सकता है। उसकी आंखें लाल हो जाती हैं और देह में कंपन होता है। यक्ष पीड़ा : यक्ष प्रभावित व्यक्ति लाल वस्त्र में रुचि लेने लगता है। उसकी आवाज धीमी और चाल तेज हो जाती है। इसकी आंखें तांबे जैसी दिखने लगती हैं। वह ज्यादातर आंखों से इशारा करता है। पिशाच पीड़ा : पिशाच प्रभावित व्यक्ति नग्न होने से भी हिचकता नहीं है। वह कमजोर हो जाता है और कटु शब्दों का प्रयोग करता है। वह गंदा रहता है और उसकी देह से दुर्गंध आती है। उसे भूख बहुत लगती है। वह एकांत चाहता है और कभी-कभी रोने भी लगता है। शाकिनी पीड़ा : शाकिनी से सामान्यतः महिलाएं पीड़ित होती हैं। शाकिनी से प्रभावित स्त्री को सारी देह में दर्द रहता है। उसकी आंखों में भी पीड़ा होती है। वह अक्सर बेहोश भी हो जाया करती है। वह रोती और चिल्लाती रहती है। वह कांपती रहती है। प्रेत पीड़ा : प्रेत से पीड़ित व्यक्ति चीखता-चिल्लाता है, रोता है और इधर-उधर भागता रहता है। वह किसी का कहा नहीं सुनता। उसकी वाणी कटु हो जाती है। वह खाता-पीता नही हैं और तीव्र स्वर के साथ सांसें लेता है। चुडैल पीड़ा : चुडैल प्रभावित व्यक्ति की देह पुष्ट हो जाती है। वह हमेशा मुस्कराता रहता है और मांस खाना चाहता है। भूत प्रेत कैसे बनते हैं:- इस सृष्टि में जो उत्पन्न हुआ है उसका नाश भी होना है व दोबारा उत्पन्न होकर फिर से नाश होना है यह क्रम नियमित रूप से चलता रहता है। सृष्टि के इस चक्र से मनुष्य भी बंधा है। इस चक्र की प्रक्रिया से अलग कुछ भी होने से भूत-प्रेत की योनी उत्पन्न होती है। जैसे अकाल मृत्यु का होना एक ऐसा कारण है जिसे तर्क के दृष्टिकोण पर परखा जा सकता है। सृष्टि के चक्र से हटकर आत्मा भटकाव की स्थिति में आ जाती है। इसी प्रकार की आत्माओं की उपस्थिति का अहसास हम भूत के रूप में या फिर प्रेत के रूप में करते हैं। यही आत्मा जब सृष्टि के चक्र में फिर से प्रवेश करती है तो उसके भूत होने का अस्तित्व भी समाप्त हो जाता है। अधिकांशतः आत्माएं अपने जीवन काल में संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को ही अपनी ओर आकर्षित करती है, इसलिए उन्हें इसका बोध होता है। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है वे सैवे जल में डूबकर बिजली द्वारा अग्नि में जलकर लड़ाई झगड़े में प्राकृतिक आपदा से मृत्यु व दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं और भूत प्रेतों की संख्या भी उसी रफ्तार से बढ़ रही है। इस तरह भूत-प्रेतादि प्रभावित व्यक्तियों की पहचान भिन्न-भिन्न होती है। इन आसुरी शक्तियों को वश में कर चुके लोगों की नजर अन्य लोगों को भी लग सकती है। इन शक्तियों की पीड़ा से मुक्ति हेतु निम्नलिखित उपाय करने चाहिए। जिस प्रकार चोट लगने पर डाक्टर के आने से पहले प्राथमिक उपचार की तरह ही प्रेत बाधा ग्रस्त व्यक्ति का मनोबल बढ़ाने का उपाय किया जाता है। विशेष जानकारी हेतु हमारे प्रोफाइल नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं। आचार्य सत्यानन्द पाण्डेय (ज्योतिष एवं तंत्राचार्य) वाट्सअप👉9450786998, 9454733160 〰️〰️〰️🌷〰️〰️〰️🌹〰️〰️〰️🌷〰️〰️〰️

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🏵️🕉️शुभ मंगलवार - शुभ प्रभात् 🕉️🏵️ 2078-विजय श्री हिंदू पंचांग-राशिफल-1943 🏵️-आज दिनांक--13.04.2021-🏵️ श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 74.30 - रेखांतर मध्यमान - 75.30 जन्मकुंडली-हस्तरेखा-राशि रत्न-वास्तुदोष (प्रामाणिक जानकारी--प्रभावी समाधान) --------------------------------------------------------- -विभिन्न शहरों के लिये रेखांतर(समय) संस्कार- (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट---------जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट------अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट-------------मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट------बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54 मिनट-जैसलमेर -15 मिनट ___________________________________ _____________आज विशेष_____________ चैत्र नवरात्रि 2021 आज से आरंभ संक्षिप्त दुर्गा पूजा और सप्तशती पाठ विधि ____________________________________ आज दिनांक.......................13.04.2021 कलियुग संवत्.............................. 5122 विक्रम संवत................................ 2078 शक संवत....................................1943 संवत्सर...................................श्री राक्षस अयन..................................... उत्तरायण गोल.............................................उत्तर ऋतु.............................................वसंत मास..............................................चैत्र पक्ष............................................शुक्ल तिथि..,.प्रतिपदा. प्रातः 10.16 तक / द्वितीया वार........................................मंगलवार नक्षत्र......अश्विनी. अपरा. 2.18 तक / भरणी चंद्र राशि................. मेष. संपूर्ण (अहोरात्र) योग........विष्कुंभ. अपरा. 3.14 तक / प्रीति करण.....................बव. प्रातः 10.16 तक करण..... बालव. रात्रि. 11.30 तक / कौलव ___________________________________ सूर्योदय..............................6.12.07 पर सूर्यास्त..............................6.52.06 पर दिनमान............................... 12.39.59 रात्रिमान................................11.19.02 चंद्रोदय...............प्रातः 06.57.29 AM पर चंद्रास्त................रात्रि. 08.02.22 PM पर राहुकाल........अपरा. 3.42 से 5.17 (अशुभ) यमघंट..........प्रातः 9.22 से 10.57 (अशुभ) अभिजित.......(मध्या)12.07 से 12.58 तक पंचक.................................आज नहीं है शुभ हवन मुहूर्त(अग्निवास)...... .आज नहीं है दिशाशूल.............................. उत्तर दिशा दोष निवारण.......गुड़ का सेवन कर यात्रा करें ___________________________________ ____आज की सूर्योदय कालीन ग्रह स्थिति___ सूर्य-------मीन 29°10' रेवती, 4 ची चन्द्र ------_मेष 9°19' अश्विनी, 3 चो बुध-------मीन 22°39' रेवती, 2 दो शुक्र ---------मेष 3°43' अश्विनी, 2 चे मंगल- वृषभ 29°32' मृगशीर्षा,2 वो गुरु--------कुम्भ 1°19' धनिष्ठा, 3 गु शनि --------मकर 18°9' श्रवण, 3 खे राहू-----वृषभ 19°23' रोहिणी, 3 वी केतु----वृश्चिक 19°23' ज्येष्ठा, 1 नो ___________________________________ चौघड़िया (दिन-रात)........केवल शुभ कारक * चौघड़िया दिन * चंचल...............प्रातः 9.22 से 10.57 तक लाभ............पूर्वाह्न. 10.57 से 12.32 तक अमृत.............अपरा. 12.32 से 2.07 तक शुभ.................अपरा. 3.42 से 5.17 तक * चौघड़िया रात्रि * लाभ..................रात्रि. 8.17 से 9.42 तक शुभ.......रात्रि. 11.07 से 12.32 AM तक अमृत..रात्रि. 12.32 AM से 1.57 AM तक चंचल....रात्रि. 1.57 AM से 3.21 AM तक ___________________________________ *शुभ शिववास की तिथियां* शुक्ल पक्ष-2-----5-----6---- 9-------12----13. कृष्ण पक्ष-1---4----5----8---11----12----30. ____________________________________ जानकारी विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड मूल(रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) नक्षत्रों में होता है तो नक्षत्र शांति को आवश्यक माना गया है.. आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार नामाक्षर.. 07.34 AM तक----अश्विनी ---3----(चो) 02.18 PM तक----अश्विनी---4----(ला) 09.03 PM तक-----भरणी---1---- (ली) 03.48 AM तक-----भरणी---2-----(लू) उपरांत रात्रि तक-----भरणी---3-----(ले) (पाया-स्वर्ण) ________सभी की राशि मेष रहेगी________ ___________________________________ ____________आज का दिन____________ व्रत विशेष...........नवरात्रि अनुष्ठान व्रत आरंभ दिन विशेष..नवरात्रि प्रथम्-माता शैलपुत्री पूजा चंद्र दर्शन..................................सायंकाल दिन विशेष........ .विक्रमी संवत् 2078 आरंभ दिन विशेष..... .मेषे रवि. रात्रि. 2.31* उपरात पर्व विशेष...... गुडी पड़वा हिन्दू नव वर्ष प्रारंभ पर्व विशेष........चेती चंद(श्री झूलेलाल जयंती) पर्व विशेष........................वैशाखी (पंजाब) दिन विशेष................... महर्षि गौतम जयंती दिन विशेष......................... ज्योतिष दिवस सर्वा.सि.योग.....प्रातः6.12 से 2.18 PM तक सिद्ध रवियोग...................................नहीं ____________________________________ _____________कल का दिन_____________ दिनांक..............................14.04.2021 तिथि..................चैत्र शुक्ला द्वितीया बुधवार व्रत विशेष............नवरात्रि अनुष्ठान व्रत जारी दिन विशेष..नवरात्रि द्वितीय- ब्रह्मचारिणी पूजा दिन विशेष......................अंबेडकर जयंती दिन विशेष................ सिंजारा (गणगौर पूर्व) सर्वा.सि.योग.........सायं. 5.21 से रात्रि पर्यंत सिद्ध रवियोग..................................नहीं ____________________________________ _____________आज विशेष _____________ चैत्री नवरात्रि 13.04.2021 से आरंभ.. प्रस्तुत है दुर्गा पूजा एवं दुर्गा सप्तशती पाठ विधि.. नवरात्रि में दुर्गा पूजा-पाठ की यह विधि यहां संक्षिप्त रूप से दी जा रही है। नवरात्रि आदि विशेष अवसरों पर तथा शतचंडी आदि वृहद् अनुष्ठानों में विस्तृत विधि का उपयोग किया जाता है। उसमें यन्त्रस्थ कलश, गणेश, नवग्रह, मातृका, वास्तु, सप्तर्षि, सप्तचिरंजीव, 64 योगिनी, 49 क्षेत्रपाल तथा अन्यान्य देवताओं की वैदिक विधि से पूजा होती है। अखंड दीप की व्यवस्था की जाती है। देवी प्रतिमा की अंग-न्यास और अग्न्युत्तारण आदि विधि के साथ विधिवत्‌ पूजा की जाती है। नवदुर्गा पूजा, ज्योतिःपूजा, बटुक-गणेशादिसहित कुमारी पूजा, अभिषेक, नान्दीश्राद्ध, रक्षाबंधन, पुण्याहवाचन, मंगलपाठ, गुरुपूजा, तीर्थावाहन, मंत्र-खान आदि, आसनशुद्धि, प्राणायाम, भूतशुद्धि, प्राण-प्रतिष्ठा, अन्तर्मातृकान्यास, बहिर्मातृकान्यास, सृष्टिन्यास, स्थितिन्यास, शक्तिकलान्यास, शिवकलान्यास, हृदयादिन्यास, षोडशान्यास, विलोम-न्यास, तत्त्वन्यास, अक्षरन्यास, व्यापकन्यास, ध्यान, पीठपूजा, विशेषार्घ्य, क्षेत्रकीलन, मन्त्र पूजा, विविध मुद्रा विधि, आवरण पूजा एवं प्रधान पूजा आदि का शास्त्रीय पद्धति के अनुसार अनुष्ठान होता है। इस प्रकार विस्तृत विधि से पूजा करने की इच्छा वाले भक्तों को अन्यान्य पूजा-पद्धतियों की सहायता से भगवती की आराधना करके पाठ आरंभ करना चाहिए। साधक स्नान करके पवित्र हो, आसन-शुद्धि की क्रिया सम्पन्न करके शुद्ध आसन पर बैठे, साथ में शुद्ध जल, पूजन-सामग्री और श्री दुर्गा सप्तशती की पुस्तक रखें। पुस्तक को अपने सामने काष्ठ आदि के शुद्ध आसन पर विराजमान कर दें। ललाट में अपनी रुचि के अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें, शिखा बांध लें, फिर पूर्वाभिमुख होकर तत्त्व-शुद्धि के लिए चार बार आचमन करें। उस समय निम्नांकित चार मंत्रों को क्रमशः पढ़ें - ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा। ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा। ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा । तत्पश्चात्‌ प्राणायाम करके गणेश आदि देवताओं एवं गुरुजनों को प्रणाम करे, फिर 'पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ' इत्यादि मंत्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर संकल्प करें। संकल्प करके देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार की विधि से पुस्तक की पूजा करें, योनि-मुद्रा का प्रदर्शन करके भगवती को प्रणाम करे, फिर मूल नवार्ण मंत्र से पीठ आदि में आधारशक्ति की स्थापना करके उसके ऊपर पुस्तक को विराजमान करें। इसके बाद शापोद्वार करना चाहिए। इसके अनेक प्रकार हैं। 'ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा' - इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करे। यह शापोद्वारमन्त्र कहलाता है। इसके अनन्तर उत्कीलन-मंत्र का जप किया जाता है। इसका जप आदि और अन्त में इक्कीस-इक्कीस बार होता है। यह मन्त्र इस प्रकार है - 'ॐ ह्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा।' इसके जप के पश्चात्‌ आदि और अन्त में सात-सात बार मृत-संजीवनी विद्या का जप करना चाहिए। इस प्रकार शापोद्धार करने के अनंतर अन्तर्मातृकाबहिर्मातृका आदि न्यास करें, फिर भगवती का ध्यान करके रहस्य में बताये अनुसार नौ कोष्ठों वाले यन्त्र में महालक्ष्मी आदि का पूजन करें, इसके बाद छः अंगो सहित दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया जाता है। कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य - ये ही सप्तशती के छः अंग माने गए हैं। उनके क्रम में भी मतभेद है। चिदम्बर संहिता में पहले अर्गला, फिर कीलक तथा अन्त में कवच पढ़ने का विधान है। किंतु योगरत्नावली में पाठ का क्रम इससे भिन्न है। उसमें कवच को बीज, अर्गला को शक्ति तथा कीलक को कीलक-संज्ञा दी गई है। जिस प्रकार सब मन्त्रों में पहले बीज का, फिर शक्ति तथा अंत में कीलक का उच्चारण होता है। उसी प्रकार यहां भी पहले कवच रूप बीज का, फिर अर्गलारूपा शक्ति का तथा अंत में की‍लक रूप कीलक का क्रमश: पाठ होना चाहिए। *संकलनकर्त्ता* श्री ज्योतिष सेवाश्रम सेवाश्रम संस्थान (राज) ___________________________________ ___________आज का राशिफल__________ मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ) आज आपकी ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा। आपको अपने अटके कामों को पूरा करने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए। रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा। अपने परिवार के सदस्यों की भावनाओं को आहत करने से बचने के लिए अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखिए। आज आपकी कलात्मक और रचनात्मक क्षमता को काफ़ी सराहना मिलेगी और इसके चलते अचानक लाभ मिलने की संभावना भी है। परिवार की जरुरतों को पूरा करते-करते आप कई बार खुद को वक्त देना भूल जाते हैं। लेकिन आज आप सबसे दूर होकर अपने आप के लिए वक्त निकाल पाएंगे। जब आप अपने जीवनसाथी से भावनात्मक तौर पर जुड़ते हैं, तो नज़दीकी अपने आप महसूस की जा सकती है। वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो) आज आपको काफ़ी समय से चल रही बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। आपको कमीशन, लाभांश या रोयल्टी के ज़रिए फ़ायदा होगा। बच्चे आपको घरेलू काम-काज निबटाने में मदद करेंगे। अपने प्रिय की ग़ैर-ज़रूरी भावनात्मक मांगों के सामने घुटने न टेकें। पेशेवर तौर पर आज का दिन सकारात्मक रहेगा। इसका भरपूर उपयोग करें। आज कुछ नया और सृजनात्मक करने के लिए अच्छा दिन है। जीवनसाथी का आत्मकेन्द्रित व्यवहार आपको नागवार गुज़रेगा। मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह) आज किसी संत पुरुष का आशीर्वाद मानसिक शान्ति प्रदान करेगा। आपके पिता की कोई सलाह आज कार्यक्षेत्र में आपको धन लाभ करा सकती है. बच्चे आपको घरेलू काम-काज निबटाने में मदद करेंगे। कामकाज में आ रहे बदलावों के कारण आपको लाभ मिलेगा। इस राशि वाले जातकों को आज खाली वक्त में आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए। ऐसा करके आपकी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आपके आस-पास के लोग आप दोनों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास करेंगे। अत: बाहरी लोंगों के कहने पर अमल करना ठीक नहीं होगा। कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो) आप आज ख़ुद को रोज़ाना की अपेक्षा कम ऊर्जावान महसूस करेंगे। स्वयं को ज़रूरत से ज़्यादा काम के नीचे न दबाएँ, थोड़ा आराम करें और आज के कामों को कल तक के लिए टाल दें। आज के दिन आपको शराब जैसे मादक तरल का सेवन नहीं करना चाहिए, नशे की हालत में आप कोई कीमती सामान खो सकते हैं। बच्चे आपको घरेलू काम-काज निबटाने में मदद करेंगे। विवादित मुद्दों को उठाने से बचें, अगर आप आज ‘डेट’ पर जा रहे हैं तो। पैसे बनाने के उन नए विचारों का उपयोग करें, जो आज आपके ज़ेहन में आएँ। आज आप ऑफिस से घर वापस आकर अपना पसंदीदा काम कर सकते हैं। इससे आपके मन को शांति मिलेगी। आपको या आपके जीवनसाथी को चोट लग सकती है। इसलिए एक-दूसरे का ख़याल रखें। सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे) आज आपको कई दिक़्क़तों और मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है, जिस वजह से आप झुंझलाहट और बेचैनी महसूस करेंगे। आज धन लाभ होने की संभावना तो बन रही है लेकिन ऐसा हो सकता है कि अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप पैसा कमाने में सक्षम न हो पाएं। घरेलू मामलों और काफ़ी समय से लंबित घर के काम-काज के हिसाब से अच्छा दिन है। आपके महंगे तोहफ़े भी आपके प्रिय के चेहरे पर मुस्कान लाने में नाकाम साबित होंगे, क्योंकि वह उनसे क़तई प्रभावित नहीं होगा/ होगी। ख़ुद को अभिव्यक्त करने के लिए अच्छा समय है- और ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कीजिए, जो रचनात्मक हों। यात्रा के मौक़ों को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। जीवनसाथी के साथ वाद-विवाद होने की काफ़ी संभावना है। कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो) आज किसी सज्जन पुरुष की दैवीय बातें आपको संतोष और ढांढस बंधाएंगी। जिन लोगों ने लोन लिया था आज उन्हें उस लोन की राशि को चुकाने में दिक्कतें आ सकती हैं। नए पारिवारिक व्यवसाय को शुरू करने के लिए शुभ दिन है। इसे सफल बनाने के लिए दूसरे सदस्यों की भी मदद लें। दूसरों की दख़लअन्दाज़ी गतिरोध पैदा कर सकती है। यात्राओं से व्यवसाय के नए मौक़े मिलेंगे। दिन अच्छा है दूसरों के साथ-साथ आप अपने लिए भी वक्त निकाल पाएंगे। जीवनसाथी के ख़राब स्वास्थ्य की वजह से आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है। तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते) आज अपने व्यक्तित्व को विकसित करने के लिए गम्भीर तौर पर प्रयास करें। अगर आप लोन लेने वाले थे और काफी दिनों से इस काम में लगे थे तो आज के दिन आपको लोन मिल सकता है। आपको अपना बाक़ी वक़्त बच्चों के संग गुज़ारना चाहिए, चाहे इसके लिए आपको कुछ ख़ास ही क्यों न करना पड़े। दफ़्तर में आपका सहयोगी रवैया इच्छित परिणाम लाएगा। आपको कई और ज़िम्मेदारियाँ मिलेंगी और कम्पनी में ऊँचा ओहदा हासिल होगा। आज आप बिना किसी वजह के कुछ लोगों के साथ उलझ सकते हैं। ऐसा करना आपके मूड को तो खराब करेगा ही साथ ही इससे आपका कीमती समय भी बर्बाद होगा। आज आप महसूस करेंगे कि शादी का बंधन वाक़ई स्वर्ग में बनाया जाता है। वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू) अपनी सेहत का ख़याल रखें। माली सुधार की वजह से ज़रूरी ख़रीदारी करना आसान रहेगा। अगर आप अपने साथी के नज़रिए को नज़रअंदाज़ करेंगे, तो वह अपना आपा खो सकता/सकती है। प्यार का भरपूर लुत्फ़ मिल सकता है। इससे पहले कि वरिष्ठ को पता लगे, लंबित काम जल्दी ही निबटा लें। आप चाहें तो परेशानियों को मुस्कुराकर दरकिनार कर सकते हैं या उनमें फँसकर परेशान हो सकते हैं। चुनाव आपको करना है। आपका जीवनसाथी आपको ख़ुश करने के लिए आज काफ़ी कोशिशें करता नज़र आएगा। धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे) आज आपको कामकाम के मोर्चे पर धक्का लग सकता है, क्योंकि आपकी सेहत आपके साथ नहीं है और इसके चलते आपको कोई ज़रूरी काम अधर में ही छोड़ना पड़ सकता है। ऐसे हालात में धैर्य और होशियारी से काम लें। वे निवेश-योजनाएँ जो आपको आकर्षित कर रहीं हैं, उनके बारे में गहराई से जानने की कोशिश करें- कोई भी क़दम उठाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर ले लें। दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन ख़ुशनुमा कर देंगे। सावधान रहें, क्योंकि प्यार में पड़ना आज के दिन आपके लिए दूसरी कठिनाइयाँ खड़ी कर सकता है। पेशेवर तौर पर आज का दिन सकारात्मक रहेगा। इसका भरपूर उपयोग करें। जो चीजें आपके लिए आवश्यक नहीं हैं उनपर आज अपना अधिकतर समय आप जाया कर सकते हैं। दिन में जीवनसाथी के साथ बहस के बाद एक बेहतरीन शाम गुज़रेगी। मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी) आज के दिन आप ज़िंदगी की ओर उदास नज़रिया रखने से बचें। जिन व्यापारियों के संबंध विदेशों से हैं उन्हें आज धन हानि होने की संभावना है इसलिए आज के दिन सोच समझकर चलें। कुछ लोगों के लिए- परिवार में किसी नए का आना जश्न और उल्लास के पल लेकर आएगा। आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। आज आपका दुःख बर्फ़ की तरह पिघल जाएगा। आप जीतोड़ मेहनत और धीरज के बल पर अपने उद्देश्य हासिल कर सकते हैं। आपका आकर्षक और चुम्बकीय व्यक्तित्व सभी के दिलों को अपनी तरफ़ खींचेगा। आपका जीवनसाथी आपको पाकर ख़ुद को ख़ुशनसीब समझता है; इन पलों का भरपूर उपयोग करें। कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द) आज आप मानसिक शान्ति के लिए तनाव के कारणों का समाधान करें। आपकी लगन और मेहनत पर लोग ग़ौर करेंगे और आज इसके चलते आपको कुछ वित्तीय लाभ मिल सकता है। किसी बुज़ुर्ग रिश्तेदार की निजी समस्याओं में मदद करके आप उनका आशीर्वाद पा सकते हैं। प्रेम हमेशा आत्मीय होता है और यही बात आप आज अनुभव करेंगे। नई चीज़ों को सीखने की आपकी ललक क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आज आप अपने लिए समय निकालपाने में सक्षम होंगे। खाली वक्त में आज कुछ रचनात्मक कर सकते हैं। शादी के बाद वैवाहिक जीवन में प्यार सुनने में मुश्किल ज़रूर लगता है, लेकिन आप आज महसूस करेंगे कि यह मुमकिन है। मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची) आज के दिन आपके लिए आराम करना ज़रूरी साबित होगा, क्योंकि आप हाल के दिनों में भारी मानसिक दबाव से गुज़रे हैं। नयी गतिविधियाँ और मनोरंजन आपके लिए विश्राम करने में सहायक सिद्ध होंगे। पुराने निवेशों के चलते आय में बढ़ोत्तरी नज़र आ रही है। कोई ऐसा रिश्तेदार जो बहुत दूर रहता है, आज आपसे संपर्क कर सकता है। एकतरफ़ा लगाव आपके लिए सिर्फ दिल तोड़ने का काम करेगा। आपमें बहुत-कुछ हासिल करने की क्षमता है- इसलिए अपने रास्ते में आने वाले सभी मौक़ों को झट-से दबोच लें। इस राशि के जातक आज लोगों से मिलने से ज्यादा अकेले में वक्त बिताना पसंद करेंगे। आज आपका खाली समय घर की सफाई में बीत सकता है। वैवाहिक जीवन में आप कुछ निजता की ज़रूरत महसूस करेंगे। __________________________________ 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ - संकलनकर्त्ता- ज्योतिर्विद् पं. रामपाल भट्ट श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ __________________________________

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🙏🏼🙏🏼जय सियाराम🙏🏼🙏🏼 सम्वत :- 2077 मास :- चैत्र तिथि :- द्वितीया पक्ष :- शुक्ल पक्ष नक्षत्र :- भरनी वार :- बुधवार पंचक :- नही चन्द्र :- मेष अभिजीत मुहर्त :- कोई नही राहुकाल :- 12:35 पी एम से 02:11 पी एम दिशाशूल :- उत्तर आज का विशेष :- दूसरा नवरात्रा माँ ब्रह्मचारणी को चीनी या मिश्री का भोग लगाएं। मेष राशि :- आप के कार्यो से समाज में आपकी प्रशंसा होगी।जीवनसाथी के साथ यात्रा होगी।यश,उत्साह बढ़ेगा। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। वृषभ राशि :- रोजगार में बदलाव आने की उम्मीद है।आय के नए स्रोत प्राप्त होने के योग हैं।रुका पैसा मिलेगा। सुख-समृद्धि बढ़ेगी।बुद्धिमानी से समस्या का समाधान संभव है।मेहमानों का आगमन होगा। मिथुन राशि :- अनजाने में हुई गलती से नुकसान होगा।व्यापार में आ रही परेशानी से तनाव बड़ सकता है।नई योजनाएं क्रियान्वित होंगी।श्रेष्ठजनों से मेल होगा।परिवार की उलझन खत्म होगी। कर्क राशि :- अपने धन का कुछ अंश परोपकार में लगाएं।नौकरी में कार्य का विस्तार होगा।शुभ एवं अनुकूल समाचार प्राप्त हो सकते हैं।रिश्तेदारों से संबंध प्रगाढ़ होंगे। सिंह राशि :- परिजनों पर व्यर्थ में संदेह न करें।अपने के महत्व को भूलें नहीं किस व्यक्ति से क्या बात करनी है। इसका विशेष ध्यान रखें।आर्थिक लाभ होगा।व्यापारिक निर्णय समय पर लेने से लाभ होगा। कन्या राशि :- समय पर काम करना सीखे।अपने विचारों पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी।खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है।व्यापार-व्यवसाय सामान्य रहेगा।धर्म में रुचि बढ़ेगी। तुला राशि :- आज का दिन परिवार के लिए महत्वपूर्ण है।कारोबार में भागदौड़ अधिक होने से थकान हो सकती है।कामकाज में इच्छानुरूप परिणाम मिलेंगे।वाहन क्रय करने का मन होगा।नए सम्बन्ध बनेगे। वृश्चिक राशि :- विपरीत परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखें।दूसरों पर जल्द विश्वास करने से बचें।लंबे समय से अधूरे पड़े कार्य पूर्ण होने की संभावना है।नए वस्त्रो की प्राप्ति होगी। धनु राशि :- आज दिन की शुरुआत से ही व्यस्तता रहेगी।दिनचर्या प्रभावित होगी।स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा।कार्य की सफलता के लिए प्रयत्नशील रहेंगे। मकर राशि :- दिन अनुकूल है।समाज में आपका प्रभाव बढ़ने से शत्रु परास्त होंगे।नए सम्बन्ध लाभप्रद रहेंगे। परिवार और आवास की समस्या हल हो सकती है।यात्रा में अपनी वस्तुएं संभालकर रखें। कुंभ राशि :- प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संबंधों का लाभ मिलेगा।आपकी कीर्ति में वृद्धि होगी।संतों के दर्शन होंगे। आर्थिक मामलो में लापरवाही न करें। मीन राशि :- समय रहते जरूरी कागजातों को टटोल लें।संतान के कार्यों से चिंतित रहेंगे।व्यापार में नए प्रस्ताव मिलेंगे।कार्यस्थल में उन्नति की संभावना है।आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। 🙏🏼🙏🏼जय सियाराम🙏🏼🙏🏼 जय श्री गुरुदेव

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👉नववर्ष क्यों मनाए ? वर्षारंभ का दिन अर्थात नववर्ष दिन । इसे कुछ अन्य नामोंसे भी जाना जाता है । जैसे कि, संवत्सरारंभ, विक्रम संवत् वर्षारंभ, वर्षप्रतिपदा, युगादि, गुडीपडवा इत्यादि । इसे मनाने के अनेक कारण हैं । अ. वर्षारंभ मनाने का नैसर्गिक कारण भगवान श्रीकृष्णजी अपनी विभूतियोंके संदर्भ में बताते हुए श्रीमद्भगवद्गीता में कहते हैं, बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् । मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ।। (श्रीमद्भगवद्गीता – १०.३५)   इसका अर्थ है, ‘सामोंमें बृहत्साम मैं हूं । छंदोंमें गायत्रीछंद मैं हूं । मासोंमें अर्थात्‌ महीनोंमें मार्गशीर्ष मास मैं हूं; तथा ऋतुओंमें वसंतऋतु मैं हूं ।’ सर्व ऋतुओंमें बहार लानेवाली ऋतु है, वसंत ऋतु । इस काल में उत्साहवर्धक, आह्लाददायक एवं समशीतोष्ण वायु होती है । शिशिर ऋतु में पेडोंके पत्ते झड चुके होते हैं, जबकि वसंत ऋतु के आगमन से पेडोंमें कोंपलें अर्थात नए कोमल पत्ते उग आते हैं, पेड-पौधे हरे-भरे दिखाई देते हैं । कोयल की कूक सुनाई देती है । इस प्रकार भगवान श्रीकृष्णजी की विभूतिस्वरूप वसंत ऋतु के आरंभ का यह दिन है । आ. वर्षारंभ मनाने के ऐतिहासिक कारण शकोंने हूणोंको पराजित कर विजय प्राप्त की एवं भारतभूमि पर हुए आक्रमण को मिटा दिया । शालिवाहन राजा ने शत्रु पर विजय प्राप्त की और इस दिन से शालिवाहन पंचांग प्रारंभ किया । इ. वर्षारंभ मनाने का पौराणिक कारण इस दिन भगवान श्रीराम ने वाली का वध किया ।   २. चैत्र प्रतिपदा को नववर्षारंभ दिन मनाने का अाध्यात्मिक कारण भिन्न-भिन्न संस्कृति अथवा उद्देश्य के अनुसार नववर्ष का आरंभ भी विभिन्न तिथियोंपर मनाया जाता हैं । उदाहरणार्थ, ईसाई संस्कृति के अनुसार इसवी सन् १ जनवरी से आरंभ होता है, जबकि हिंदु नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है । आर्थिक वर्ष १ अप्रैल से आरंभ होता है, शैक्षिक वर्ष जून से आरंभ होता है, जबकि व्यापारी वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है । इन सभी वर्षारंभोंमें से अधिक उचित नववर्ष का आरंभ दिन है, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा । अ. ब्रह्मांड की निर्मिति का दिन ब्रह्मदेव ने इसी दिन ब्रह्मांड की निर्मिति की । उनके नाम से ही ‘ब्रह्मांड’ नाम प्रचलित हुआ । सत्ययुग में इसी दिन ब्रह्मांड में विद्यमान ब्रह्मतत्त्व पहली बार निर्गुण से निर्गुण-सगुण स्तर पर आकर कार्यरत हुआ तथा पृथ्वी पर आया । आ. सृष्टि के निर्माण का दिन ब्रह्मदेव ने सृष्टि की रचना की, तदूपरांत उसमें कुछ उत्पत्ति एवं परिवर्तन कर उसे अधिक सुंदर अर्थात परिपूर्ण बनाया । इसलिए ब्रह्मदेवद्वारा निर्माण की गई सृष्टि परिपूर्ण हुई, उस दिन गुडी अर्थात धर्मध्वजा खडी कर यह दिन मनाया जाने लगा । चैत्रे मासि जगद् ब्रम्हाशसर्ज प्रथमेऽहनि । – ब्रम्हपुराण   अर्थात, ब्रम्हाजी ने सृष्टि का निर्माण चैत्र मास के प्रथम दिन किया । इसी दिन से सत्ययुग का आरंभ हुआ । यहीं से हिंदु संस्कृति के अनुसार कालगणना भी आरंभ हुई । इसी कारण इस दिन वर्षारंभ मनाया जाता है । यह दिन महाराष्ट्र में ‘गुडीपडवा’ के नाम से भी मनाया जाता है । गुडी अर्थात् ध्वजा । पाडवा शब्द में ‘पाड’ का अर्थ होता है पूर्ण; एवं ‘वा’ का अर्थ है वृद्धिंगत करना, परिपूर्ण करना । इस प्रकार पाडवा शब्द का अर्थ है, परिपूर्णता ।   ३. सप्तलोकोंकी सात्त्विकता में वृद्धि होना एवं पाताल से अनिष्ट शक्तियोंद्वारा होनेवाले आक्रमणोंकी मात्रा भी कम रहना वर्षारंभ के दिन प्रक्षेपित तरंगोंका सप्तलोकोंपर परिणाम होता है । इससे उन लोकोंकी सात्त्विकता में वृद्धि होती है । रज-तम की मात्रा कम होने के कारण पाताल से अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण की मात्रा भी कम रहती है । वर्षारंभ के दिन सगुण ब्रह्मलोक से प्रजापति, ब्रह्मा एवं सरस्वतीदेवी की सूक्ष्मतम तरंगें प्रक्षेपित होती हैं । उनमें से ९० प्रतिशत तरंगें इस ब्रह्मलोक की अधोदिशा में विद्यमान लोकोंकी ओर तथा १० प्रतिशत तरंगें ऊर्ध्व दिशा में जाती हैं । अधोदिशा में स्वर्गलोक, शिवलोक, नागलोक, भुवलोक, भूलोक एवं सप्त पाताल, इन लोकोंसे प्रवाहित होते समय इन तरंगोंका इन लोकोंपर परिणाम होता है । इन सभी लोकोंकी शुद्धता ३ प्रतिशत होती है । उनकी सात्त्विकता में भी ३ प्रतिशत वृद्धि होती है । इस कारण सप्तपातालोंमें रज-तम की मात्रा इस दिन ३ प्रतिशत से कम होती है, जिससे पाताल से होनेवाले अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमणोंकी मात्रा भी कम होती है ।   ४. ब्रह्मतत्त्व सर्वाधिक प्रक्षेपित होना अन्य दिनोंकी तुलना में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मदेव की ओर से सगुण-निर्गुण ब्रह्मतत्त्व, ज्ञानतरंगें, चैतन्य एवं सत्त्वगुण ५० प्रतिशत से भी अधिक मात्रा में प्रक्षेपित होता है ।   ५. प्रजापति तरंगें सर्वाधिक मात्रा में पृथ्वी पर आना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रजापति तरंगें सबसे अधिक मात्रा में पृथ्वीपर आती हैं । इस दिन सत्त्व गुण अत्यधिक मात्रा में पृथ्वी पर आता है । अतः यह दिन वर्ष के अन्य दिनोंकी तुलना में सर्वाधिक सात्त्विक होता है । अ. प्रजापति तरंगे पृथ्वी पर आने से होनेवाले लाभ वनस्पति अंकुरने की भूमि की क्षमता में वृद्धि होती है । तो बुद्धि प्रगल्भ बनती है । कुओं-तालाबोंमें नए झरने निकलते हैं ।   ६. धर्मलोक से धर्मशक्ति की तरंगें पृथ्वी पर अधिक मात्रा में आना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन धर्मलोक से धर्मशक्ति की तरंगें पृथ्वी पर अधिक मात्रा में आती हैं । पृथ्वी के पृष्ठभाग पर स्थित धर्मबिंदु के माध्यम से यह ग्रहण की जाती हैं, तत्पश्चात् आवश्यकता के अनुसार भूलोक के जीवोंकी दिशा में वह प्रक्षेपित की जाती हैं ।   ७. वातावरण अधिक चैतन्यदायी रहना इस दिन भूलोक के वातावरण में रजकणोंका प्रभाव अधिक मात्रा में होता है, इस कारण पृथ्वी के जीवोंका क्षात्रभाव भी जागृत रहता है । इस दिन वातावरण में विद्यमान अनिष्ट शक्तियोंका प्रभाव भी कम रहता है । इस कारण वातावरण अधिक चैतन्यदायी रहता है ।   ८. साढेतीन मुहूर्तोंमें से एक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया एवं दशहरा, प्रत्येक का एक एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा, ऐसे साढेतीन मुहूर्त होते हैं । इन साढेतीन मुहूर्तोंकी विशेषता यह है, कि अन्य दिन शुभकार्य करने के लिए मुहूर्त देखना पडता है; परंतु इन चार दिनोंका प्रत्येक क्षण शुभ मुहूर्त ही होता है ।

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