🌷उमा सकती पीठ मथुरा🌷

🌷उमा सकती पीठ मथुरा🌷

मथुरा. देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है वृन्दावन का माँ कत्यायिनी शक्ति पीठ । इसी स्थान पर गिरे थे माँ सती के केश । भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि मथुरा से 12 किलोमीटर दूर वृन्दावन में स्थित इसी स्थान पर की थी राधा जी ने गोपियो सहित कृष्ण को पति रूप मैं पाने के लिए पूजा । नवरात्रियों में यहाँ खास पूजा अर्चना होती है।            
    
भगवान कृष्ण की क्रीड़ा भूमि में है स्थित 
शास्त्रों में कहा गया है जब सती जी के पिता  ने एक यज्ञ का आयोजन किया था और उसमें समस्त देवताओं को आमंत्रित किया, मगर शिवजी को नही बुलाया। जब इसकी जानकारी सती को हुई कि मेरे पति भगवान शिव को आमत्रित नहीं किया ,तो वह बिना बुलाए अपने पिता के घर चली गयी । अपने पिता से अपने पति को न बुलाने का कारण पूछा तो सती के पिता ने भगवान शिव के लिए बहुत भला बुरा कहा । जिसे सुनकर सती सहन नहीं कर पाई और हवन कुण्ड मैं कूद गयी । जब इस घटना की जानकारी भगवान के गणों ने भगवान शिव को दी तो वह बहुत व्याकुल हो गए और उन्होने सती की जली हुई देह को कंधे पर ले कर यहाँ-वहा घुमने लगे और तांडव शुरू कर दिया ।

51 शरीर के हिस्सों से बने है शक्ति पीठ 

 शिव के तांडव से प्रलय मच गई तो सभी देवता घबरा कर भगवन विष्णु की शरण में गये ।  विष्णु भगवान ने माँ सती से माफी मांग कर सती के शरीर के 51 हिस्से कर दिए और जो-जो हिस्सा जहां गिरा, वह स्थान शक्ति पीठ बन गया । वृन्दावन में यमुना किनारे  इसी स्थान पर गिरे थे माँ सती के केश । बस तभी से इस शक्ति पीठ की बहुत मान्यता है।  श्री मद्भागवत ग्रन्थ के अनुसार कृष्ण को गोपियों ने पति रूप में पाने के लिए राधा सहित माँ कत्यायिनी देवी की पूजा की थी। बस तभी से लेकर आज  तक यहाँ आकार कुंवारी लड़कियां माँ से अपने इच्छित वर प्राप्ति के लिए मन्नते  मांगती  है । यहाँ  भक्त हजारों की संख्या  मैं आकार माँ  का आशीर्वाद  प्राप्त  करते  है 

+131 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 47 शेयर

कामेंट्स

Rajen Rabidas Sep 26, 2017
जय माता दी जय माता दी जय माता दी

+324 प्रतिक्रिया 101 कॉमेंट्स • 275 शेयर
Jai Mata Di May 14, 2021

+41 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 7 शेयर
Rajeev Thapar May 14, 2021

+11 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 4 शेयर

+189 प्रतिक्रिया 31 कॉमेंट्स • 75 शेयर
Anju Mishra May 14, 2021

🙏जय माता दी🙏 अक्षय तृतीया विशेष 🥀'न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।  न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।'🌷 🌞अर्थ--वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है। 🥀श्री परशुराम का एक प्रसंग 🥀 👉परशुराम दशावतारों में हैं। क्या उन्हें इतना भी आभास नहीं होगा कि यह धनुष किसने तोड़ा? क्या वह साधारण पुरुष हैं? श्री राम द्वारा धनुष तोड़ने के बाद समस्त राजाओं की दुरभिसंधि हुई कि श्री राम ने धनुष तो तोड़ लिया है, लेकिन इन्हें सीता स्वयंवर से रोकना होगा। वे अतः अपनी-अपनी सेनाओं की टुकड़ियों के साथ धनुष यज्ञ में आए समस्त राजा एकजुट होकर श्री राम से युद्ध के लिए कमर कस कर तैयार हो गए। धनुष यज्ञ गृह युद्ध में बदलने वाला था, ऐसी विकट स्थिति में वहां अपना फरसा लहराते हुए परशुराम जी प्रकट हो गए। वे राजा जनक से पूछते हैं कि तुरंत बताओ कि यह शिव धनुष किसने तोड़ा है, अन्यथा जितने राजा यहां बैठे हैं.... मैं क्रमशः उन्हें अपने परशु की भेंट चढ़ाता हूं। तब श्री राम विनम्र भाव से कहते हैं- हे नाथ शंकर के धनुष को तोड़ने वाला कोई आपका ही दास होगा। परशुराम-राम संवाद के बीच में ही लक्ष्मण उत्तेजित हो उठे, विकट लीला प्रारंभ हो गई। संवाद चलते रहे लीला आगे बढ़ती रही परशुराम जी ने श्री राम से कहा अच्छा मेरे विष्णु धनुष में तीर चढ़ाओ... तीर चढ़ गया, परशुराम जी ने प्रणाम किया और कहा मेरा कार्य अब पूरा हुआ, आगे का कार्य करने के लिए श्री राम आप आ गए हैं। गृह युद्ध टल गया। जय श्री राम

+79 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 16 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB