Preeti jain
Preeti jain Dec 18, 2019

Jai Shri Krishna,🍁🍁🙏🌷🌷🌿🌹💐💐🌱🌱🌱🙏🌷🌷🌴🌴🍂🌳🌳🌴🥀🌺🌺🌺🌺🥀🌴🌴🍂💐💐🌱🌷🌿🌹🌿🌷🙏🍁

Jai Shri Krishna,🍁🍁🙏🌷🌷🌿🌹💐💐🌱🌱🌱🙏🌷🌷🌴🌴🍂🌳🌳🌴🥀🌺🌺🌺🌺🥀🌴🌴🍂💐💐🌱🌷🌿🌹🌿🌷🙏🍁

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कामेंट्स

Rajesh Lakhani Dec 19, 2019
JAI SHREE KRISHNA RADHE RADHE SHUBH PRABHAT BEHENA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER THAKOR JI KI KRUPA HAMESA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGALMAYE HO BEHENA PRANAM

Dr.ratan Singh Dec 19, 2019
🌹🌿हरि ॐ वन्दन दीदी🌿🌹 🎎आप और आपके पूरे परिवार पर श्री हरि विष्णु जी और साईं बाबा की कृपादृष्टि सदा बनी रहे जी🙏 🎭आपका गुरुवार का प्रातः काल शुभ अतिसुन्दर शांतिमय और मंगलमय व्यतीत हो जी 🙏 🍑🌲🌺ॐ साईं राम🌺🌲🍑

((OP JAIN)) (Raj)🌱🌱🌹🌱🌱 Dec 19, 2019
जय जिनेन्द्र सा जय श्री राधे राधे जी आपका हर एक पल शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात दीदी जय श्री कृष्णा

yogendra sharma🌷Bhardwaj Dec 19, 2019
ऊँ नमो नारायणाय ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ऊँ लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः राधे-राधे-राधे-राधे राधे-राधे-राधे-राधे जय श्री कृष्णा जी आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री कृष्णा बहन

Manoj manu Dec 19, 2019
🚩🙏हरि ऊँ ,शुभअष्टमी 🌺प्रभु श्री हरि जी की अनंत मधुर मनोहर मंगलमयी कृपा के साथ आप सभी का हर पल सुख, शाँति,समृद्धि एवं आरोग्यता से परिपूर्ण हो जी, शुभ दिन विनम्र वंदन जी दीदी 🌿🙏

Manoj manu Dec 19, 2019
दी पोस्ट देखो जरा अपने भाई की कैसी है, बताना दी आप 🙏

Đ Jãÿ Břããõõ Dec 19, 2019
🔱jai bhole nath ki🙏 good morning ji☕☕ aap ka din subh maglem Ho ji👍so nice post Ji 👌👌👌🌷🌹

Rajesh kumar Dec 19, 2019
Jai Sherry Krishna Preeti ji GBU and your family always be happy🌹🌹🙏

seema soni Dec 19, 2019
very sweet good morning butiful sister ji Jai Shree Krishna Laxmi Narayan aapkai hr mnokamna puri kre with family hmesha muskurate rho God bless you Radhe Radhe ji 🙏🙏🌹🌹🍮🍮🤗🤗💞💞💞😊

रमेश भाई ठक्कर Dec 19, 2019
* जय श्री कृष्ण राधे-राधे ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः भ्रम हमेशा*..... *रिश्तों को बिखेरता है*..... *और प्रेम से.*..... *अजनबी भी बंध जाते है*... *"किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है* *मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के "समर्पण" की कद्र करे !"* *🙏🌹सुप्रभात स्नेह वंदन बहना 🌹🙏* 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

राजेश अग्रवाल Dec 19, 2019
छू ले आसमान ज़मीन की तलाश ना कर,जी ले ज़िंदगी खुशी की तलाश ना कर,तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त,मुस्कुराना सीख ले वजह की तलाश ना कर,प्रभु आपको सदैव खुश और सुखी रखें,राजेश भाई का आपको सादर नमन वंदन🙏 🌹

sumitra Dec 19, 2019
ओम नमो भगवते🙏 वासुदेवाय नमः बहना जी श्री हरि और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे आपका दिन शुभ और मंगलमय हो बहना जी🙏🌹🚩

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Dec 19, 2019
Good Morning My Sweet Sister ji 🙏🙏 Om Namo Bhagwat Vasudeva Namah ji Aapka Har Din Shubh Mangalmay Ho ji Aap Hamesha Khush Rahe ji 🙏🙏🌺🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Mamta Chauhan Jan 26, 2020

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*👣।।संत महिमा।।👣* एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे। एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को प्रणाम ज़रूर करता था। एक दिन किरात संत से बोला की बाबा मैं तो मृग का शिकार करता हूँ, आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे हैं.? संत बोले - श्री कृष्ण का, और फूट फूट कर रोने लगे। किरात बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ? मुझे बताओ वो दिखता कैसा है ? मैं पकड़ के लाऊंगा उसको। संत ने भगवान का वह मनोहारी स्वरुप वर्णन कर दिया.... कि वो सांवला सलोना है, मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है। किरात बोला: बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी भी नही पियूँगा। फिर वो एक जगह जाल बिछा कर बैठ गया... 3 दिन बीत गए प्रतीक्षा करते करते, दयालू ठाकुर को दया आ गयी, वो भला दूर कहाँ है, बांसुरी बजाते आ गए और खुद ही जाल में फंस गए। किरात तो उनकी भुवन मोहिनी छवि के जाल में खुद फंस गया और एक टक शयाम सुंदर को निहारते हुए अश्रु बहाने लगा, जब कुछ चेतना हुयी तो बाबा का स्मरण आया और जोर जोर से चिल्लाने लगा शिकार मिल गया, शिकार मिल गया, शिकार मिल गया, और ठाकुरजी की ओर देख कर बोला, अच्छा बच्चू .. 3 दिन भूखा प्यासा रखा, अब मिले हो, और मुझ पर जादू कर रहे हो। शयाम सुंदर उसके भोले पन पर रीझे जा रहे थे एवं मंद मंद मुस्कान लिए उसे देखे जा रहे थे। किरात, कृष्ण को शिकार की भांति अपने कंधे पे डाल कर और संत के पास ले आया। बाबा, आपका शिकार लाया हूँ.... बाबा ने जब ये दृश्य देखा तो क्या देखते हैं किरात के कंधे पे श्री कृष्ण हैं और जाल में से मुस्कुरा रहे हैं। संत के तो होश उड़ गए, किरात के चरणों में गिर पड़े, फिर ठाकुर जी से कातर वाणी में बोले - हे नाथ मैंने बचपन से अब तक इतने प्रयत्न किये, आप को अपना बनाने के लिए घर बार छोडा, इतना भजन किया आप नही मिले और इसे 3 दिन में ही मिल गए...!! भगवान बोले - इसका तुम्हारे प्रति निश्छल प्रेम व कहे हुए वचनों पर दृढ़ विश्वास से मैं रीझ गया और मुझ से इसके समीप आये बिना रहा नहीं गया। भगवान तो भक्तों के संतों के आधीन ही होतें हैं। जिस पर संतों की कृपा दृष्टि हो जाय उसे तत्काल अपनी सुखद शरण प्रदान करतें हैं। किरात तो जानता भी नहीं था की भगवान कौन हैं। पर संत को रोज़ प्रणाम करता था। संत प्रणाम और दर्शन का फल ये है कि 3 दिन में ही ठाकुर मिल गए । यह होता है संत की संगति का परिणाम!! *"संत मिलन को जाईये तजि ममता अभिमान, ज्यो ज्यो पग आगे बढे कोटिन्ह यज्ञ समान"*

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Mahesh Bhargava Jan 26, 2020

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SHANTI PATHAK Jan 26, 2020

शुभरात्रि जी 🙏🏻जय श्री कृष्ण ईश्वर पर विश्वास एक ब्राह्मण को विवाह के बहुत सालों बाद पुत्र हुआ लेकिन कुछ वर्षों बाद बालक की असमय मृत्यु हो गई। ब्राह्मण शव लेकर श्मशान पहुँचा। वह मोहवश उसे दफना नहीं पा रहा था। उसे पुत्र प्राप्ति के लिए किए जप-तप और पुत्र का जन्मोत्सव याद आ रहा था। श्मशान में एक गिद्ध और एक सियार रहते थे। दोनों शव देखकर बड़े खुश हुए। दोनों ने प्रचलित व्यवस्था बना रखी थी - दिन में सियार माँस नहीं खाएगा और रात में गिद्ध। सियार ने सोचा - यदि ब्राह्मण दिन में ही शव रखकर चला गया तो उस पर गिद्ध का अधिकार होगा। इसलिए क्यों न अंधेरा होने तक ब्राह्मण को बातों में फँसाकर रखा जाए।वहीं गिद्ध ताक में था कि शव के साथ आए कुटुंब के लोग जल्द से जल्द जाएँ और वह उसे खा सके। गिद्ध ब्राह्मण के पास गया और उससे वैराग्य की बातें शुरू की। गिद्ध ने कहा - मनुष्यों, आपके दुख का कारण यही मोहमाया ही है। संसार में आने से पहले हर प्राणी का आयु तय हो जाती है। संयोग और वियोग प्रकृति के नियम हैं। आप अपने पुत्र को वापस नहीं ला सकते। इसलिए शोक त्यागकर प्रस्थान करें। संध्या होने वाली है। संध्याकाल में श्मशान प्राणियों के लिए भयदायक होता है इसलिए शीघ्र प्रस्थान करना उचित है। गिद्ध की बातें ब्राह्मण के साथ आए रिश्तेदारों को बहुत प्रिय लगीं। वे ब्राह्मण से बोले - बालक के जीवित होने की आशा नहीं है। इसलिए यहाँ रुकने का क्या लाभ? सियार सब सुन रहा था। उसे गिद्ध की चाल सफल होती दिखी तो भागकर ब्राह्मण के पास आया। सियार कहने लगा - बड़े निर्दयी हो। जिससे प्रेम करते थे, उसके मृत-देह के साथ थोड़ा वक्त नहीं बिता सकते!! फिर कभी इसका मुख नहीं देख पाओगे। कम से कम संध्या तक रुककर जी भर के देख लो! उन्हें रोके रखने के लिए सियार ने नीति की बातें छेड़ दीं - जो रोगी हो, जिस पर अभियोग लगा हो और जो श्मशान की ओर जा रहा हो उसे बंधु-बांधवों के सहारे की ज़रूरत होती है।सियार की बातों से परिजनों को कुछ तसल्ली हुई और उन्होंने तुरंत वापस लौटने का विचार छोड़ा। अब गिद्ध को परेशानी होने लगी। उसने कहना शुरू किया - तुम ज्ञानी होने के बावजूद एक कपटी सियार की बातों में आ गए। एक दिन हर प्राणी की यही दशा होनी है। शोक त्यागकर अपने-अपने घर को जाओ। जो बना है वह नष्ट होकर रहता है। तुम्हारा शोक मृतक को दूसरे लोक में कष्ट देगा। जो मृत्यु के अधीन हो चुका क्यों रोकर उसे व्यर्थ कष्ट देते हो ? लोग चलने को हुए तो सियार फिर शुरू हो गया - यह बालक जीवित होता तो क्या तुम्हारा वंश न बढ़ाता? कुल का सूर्य अस्त हुआ है कम से कम सूर्यास्त तक तो रुको! अब गिद्ध को चिंता हुई। गिद्ध ने कहा - मेरी आयु सौ वर्ष की है। मैंने आज तक किसी को जीवित होते नहीं देखा। तुम्हें शीघ्र जाकर इसके मोक्ष का कार्य आरंभ करना चाहिए। सियार ने कहना शुरू किया - जब तक सूर्य आकाश में विराजमान हैं, दैवीय चमत्कार हो सकते हैं। रात्रि में आसुरी शक्तियाँ प्रबल होती हैं। मेरा सुझाव है थोड़ी प्रतीक्षा कर लेनी चाहिए। सियार और गिद्ध की चालाकी में फँसा ब्राह्मण परिवार तय नहीं कर पा रहा था कि क्या करना चाहिए। अंततः पिता ने बेटे का सिर में गोद में रखा और ज़ोर-ज़ोर से विलाप करने लगा। उसके विलाप से श्मशान काँपने लगा। तभी संध्या-भ्रमण पर निकले महादेव-पार्वती वहाँ पहुँचे। पार्वती जी ने बिलखते परिजनों को देखा तो दुखी हो गईं। उन्होंने महादेव से बालक को जीवित करने का अनुरोध किया। महादेव प्रकट हुए और उन्होंने बालक को सौ वर्ष की आयु दे दी। गिद्ध और सियार दोनों ठगे रह गए। गिद्ध और सियार के लिए आकाशवाणी हुई - तुमने प्राणियों को उपदेश तो दिया उसमें सांत्वना की बजाय तुम्हारा स्वार्थ निहीत था। इसलिए तुम्हें इस निकृष्ट योनि से शीघ्र मुक्ति नहीं मिलेगी। दूसरों के कष्ट पर सच्चे मन से शोक करना चाहिए। शोक का आडंबर करके प्रकट की गई संवेदना से गिद्ध और सियार की गति प्राप्त होती। एक महात्मा एक जगह बैठा था। पास से एक गाड़ी गुजरी जिससे एक गेहूं की बोरी नीचे गिर गई और फट गई और बाहर गेहूं के दाने गिर गये। महात्मा बैठकर देख ही रहा, एक कौआ आया अपने पेट के अनुसार कुछ दाने खाये और उड़ गया। कुछ समय बाद एक गाय आई उसने भी भर पेट खाया और चली गई। बाद में एक आदमी आया उसने वो बोरी ही पीठ पर उठा ली और अपने घर लेकर चला गया। सोचने वाली बात है उन पशु पक्षी को ये समझ में आ गया कि जिस मालिक ने उन्हें यहां भेजा है वो हर रोज उन्हें भर पेट देता है पर मनुष्य को यह छोटी सी बात क्यों नहीं समझ में आ रही।हम दिन रात सिर्फ माया ही कमाने के पीछे लगे पडे़ हैं पर हमारी भूख है की कभी खत्म ही नहीं होती। हमें क्यों उस मालिक पर विश्वास नहीं है. "

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Raj Jan 26, 2020

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