Karuna Sharma
Karuna Sharma Jan 27, 2017

Ujjain omkareshwar shiv ling

Ujjain omkareshwar shiv ling
Ujjain omkareshwar shiv ling
Ujjain omkareshwar shiv ling

Ujjain omkareshwar shiv ling

+216 प्रतिक्रिया 17 कॉमेंट्स • 19 शेयर

कामेंट्स

+29 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 4 शेयर

+53 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 36 शेयर
vipul goel Nov 24, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
SATISH Nov 24, 2020

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

अदभुद: एक ऐसा मंदिर जहां शिव के कहने पर इंद्र गिराते हैं हर 12 साल में बिजली यह घाटी एक विशालकाय सांप का रूप है। भारत में भगवन शिव के प्रसिद्ध 12 ज्‍योतिलिंग के अलावा ऐसे कई अद्भुत मंदिर है जो शिव के चमत्‍कारों के लिए जाने जाते हैं, उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित बिजली महादेव। कुल्लू का पूरा इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार पूरी कुल्लू घाटी में ऐसी मान्यता है कि यह घाटी एक विशालकाय सांप का रूप है। इस सांप का वध भगवान शिव ने किया था। जिस स्थान पर मंदिर है वहां शिवलिंग पर हर बारह साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। मान्यता है बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। यहां के पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं। कुछ ही माह बाद शिवलिंग एक ठोस रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। इस शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली क्यों गिरती है इसके पीछे भी एक इतिहास है। मान्यता के अनुसार, बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीवजंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलान्त के इस विचार से परेशान हो गए। बड़े जतन के बाद भगवान शिव ने उस राक्षस रूपी अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में कहा कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। इतना सुनते ही जैसे ही कुलान्त पीछे मुड़ा तभी शिव ने कुलान्त के सिर पर त्रिशूल वार कर दिया। त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त मारा गया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया। उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है। कुलान्त से ही कुलूत और इसके बाद कुल्लू नाम के पीछे यही किवदंती कही जाती है। यह जगह समुद्र स्तर 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आकाशीय बिजली बिजली शिवलिंग पर गिरने के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव नहीं चाहते चाहते थे कि जब बिजली गिरे तो जन धन को इससे नुकसान पहुंचे। भोलेनाथ लोगों को बचाने के लिए इस बिजली को अपने ऊपर गिरवाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां बिजली महादेव कहा जाता है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।

+70 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 15 शेयर
sandeep sharma Nov 24, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB