ஸசென் புத்த துறவி களுக்கு கண்ணுக்கு தெரியாது மறையும் மருந்து வொதெஅ. தீக்குட்சி மரம் என்ற கின்டெர்ஸ்லை மரம் கிளை மரம் தூள் தீ 35 கிராம் உடன் மலை மேல் 900 மீட்டர் உயரத்தில் சிவந்த மண் 36 கிராம் இல் 11 கிராம் எடுத்து வரும் தி சேர்த்து வரும் தேதே 29 கிராம் எடுத்து வரும் அல்அ 9 கிராம் எடுத்து வரும் ஸ்சி உடன் பம்ப்கின் காய் சதை டி 11 கிராம் சேர்த்து 20 கிராம் எடுத்து வரும் அல் உடன் டீ துாள் 40 கிராம் சேர்த்து வரும் த்அல்விஆ, ல்விஆ புத்த துறவி கள் உண்டால் வி ஸ்வரூபம் ஆக மாறி கண் தெரியும். இதனை திருடியது ஏ. ஆர் ரஹ்மான் என்ற சினிமா இசை கலைஞர்.

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விமல் விவேகானந்தம் Mar 26, 2020
சிவந்த மண் க்லோபிடோஜெல் கோட் 36 என்ற மாத்திரையாக மருந்து கடைகளில் கிடைக்கும். தீ குட்சி கிளை மரம் தூள் க்லோபிடோஜெல் கோட் 35 மாத்திரை கிடைக்கும். வொதெ மருந்து அனைத்து வைரஸ் களையும் எடுத்து விடும்.

விமல் விவேகானந்தம் Mar 26, 2020
மருந்து கடைகளில் க்லோபிடோஜெல் கோட் 48 ல்விஆ. புத்த துறவி கள் சாப்பிடலாம் திம்பம் வனப்பகுதியில்.

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vishal chawla Apr 3, 2020

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Suresh Pandey Apr 3, 2020

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Narayan Tiwari Apr 3, 2020

शक्तिशाली-शक्तिपीठ माँ कालिका धाम,पावागढ़ (गुजरात)🚩 """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""““"""""""“"""" पावागढ़ माता का मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि पावागढ़ में मां के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था, इस कारण इस जगह का नाम पावागढ़ हुआ। मां के इस धाम में माता की चुनरी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है जिसे भी यहां की चुनरी या मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह बहुत ही भाग्यशाली होता है! यह मंदिर बड़ोदरा से करीब 50 कि.मी.की दूरी पर स्थित है!यह गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है।शक्ति के उपासकों के लिए माता का यह मंदिर अत्यंत सिद्ध स्थान है। इस मंदिर में मां काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा विराजमान है जिनकी पूजा तंत्र-मंत्र से होती है। माता के इस मंदिर को शत्रुंजय मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि माता की इस भव्य मूर्ति की स्थापना स्वयं विश्वामित्र मुनि ने की थी। चूंकि काली माता की मूर्ति दक्षिणमुखी है, ऐसे में इसकी साधना-अराधना का विशेष महत्व है। यहां पर शत्रु, रोग आदि पर विजय पाने की कामना लिए हजारों-हजार भक्त पहुंचते हैं। देश के विभिन्न शक्तिपीठों की तरह यहां पर भी माता को अन्य प्रसाद सामग्री के साथ लाल रंग की चुनरी चढ़ाई जाती है। जिसे भक्तगण माता से मिले आशीर्वाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं..!! विश्वामित्र ने की थी काली की तपस्या:-🚩 पावागढ़ की पहाड़ी का संबंध गुरु विश्वामित्र से भी रहा है। मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां माता काली की तपस्या की थी और उन्होंने ही मूर्ति को स्थापित किया था। यहां बहने वाली नदी का नाम भी उन्हीं के नाम पर विश्वामित्री पड़ा। माता के दरबार में पैदल पहुंचने वाले भक्तों को तकरीबन 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि माता के दर्शन को पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा भी है। पावागढ़ धाम की कहानी:-🚩 पावागढ़ के नाम के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है। जिसके अनुसार कहा जाता है कि पावागढ़ पर्वत पर चढ़ाई करना किसी के लिए भी संभव नहीं था। मंदिर के चारों तरफ घने जंगल और खाइयां थी। इन गहरी खाइयों से मंदिर के घिरे होने के कारण हवा का वेग भी चारों ओर से था। यही कारण है की इस शक्तिपीठ का नाम पावागढ़ पड़ा। पावागढ़ का अर्थ- ऐसी जगह कहा गया जहां हमेशा पवन यानी हवा का वास हो,यहाँ हर मनोकामना पूरी होती है..!! 🙏 || ऊँ क्रीं कालिकायै नम: ||🙏 🚩|| जय मांई की ||🚩

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Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

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Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

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Amit sharma Apr 3, 2020

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