Amit Kumar
Amit Kumar Jan 18, 2021

🙏🔔🎆🔆🚩🙏Har Har Mahadev Jai Bhole Bhandari 🙏🔔🎆🔆🚩🙏

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Neeta Trivedi Feb 22, 2021

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Renu Singh Feb 22, 2021

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🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 *(आईये जानते हैं बृज और वृंदावन)* 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *बृज चौरासी कोस में चार गाम निज धाम* *वृंदावन और मधुपुरी बरसानो नंदगांव* 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *एक दिन श्रीराधा जी और श्रीकृष्ण जी अपने धामश्रीगौलोक में विहार कर रहे थे, दोनों विहार में इतने मद मस्त थे कि, तभी उसी समय श्रीराधा रानी जी के भाई वहाँ से गुजरे। श्रीराधा जी और श्रीकृष्ण जी दोनों ही उनको नहीं देखे और ना ही उनके और ध्यान दिये जिस पर श्रीराधा रानी जी के भाई को क्रोध आ गया कि, हम यहाँ से गुजर रहे हैं और ये लोग विहार में इतने मद मस्त हैं कि इनको हमारी ओर जरा भी ध्यान नहीं है। जिस पर श्रीराधा रानी जी के भाई ने श्रीराधा रानी जी को और श्रीकृष्ण जी को श्राप दे दिया ""कि आप लोग में जितना अधिक प्रेम है आप दोनों उतने ही दूर चले जाओगे।""* *श्राप देकर भाई तो चले गये।तब श्रीकृष्ण जी श्रीराधा रानी जी से बोले कि आपके भाई द्वारा दिए गये श्राप के फल को भोगने के लिए तो मृत्युलोक में जाना पड़ेगा।* 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 *यहाँ तो इस श्राप को भोगने का कोई साधन नहीं है। ये सुन कर श्रीराधा रानी जी रोने लगीं,और भगवान श्रीकृष्ण जी से बोलीं कि हम तो मृत्युलोक नहीं जायेंगे क्यों कि वहाँ का लोक हमारे अनकूल नहीं है.!* 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 *वहाँ पाप अधिक है पुन्य कम है। तब भगवान श्रीकृष्ण जी बोले कि चाहे वहाँ जो भी हो, श्राप भोगने तो वहीँ जाना होगा। श्रीराधा रानी जी मृत्युलोक में आने के लिए किसी भी प्रकार से तैयार नहीं हो रहीं थीं, तब अन्त में श्रीकृष्ण जी बोले कि* *एक उपाय है,""क्यों ना हम इस गौलोक धाम को ही वहाँ ले चलें। इस पर श्रीराधा रानी जीमृत्युलोक आने के लिए तैयार हो गयीं।* *तब भगवान श्रीकृष्ण जी सर्व प्रथम श्रीयमुना जी को पृथ्वी पर आने को कहा, फिर श्रीविरजा नदी का जल ( पानी ) श्रीयमुना जी में छोड़ा गया।* 🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜 *इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण जी गौलोक धाम से ( 84 ) चौरासी अँगुल गौलोक धाम कि मिटटी पृथ्वी पर एक सीमित क्षेत्र चौरासी कोस में बर्षा की,* 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 *84 कोस बराबर 252 कि. मी.। श्रीविरजा नदी का जल और श्रीगौलोक धाम की मिटटी चौरासी कोस के क्षेत्र मेंएक साथ आने के कारण इस क्षेत्र का नाम ब्रज क्षेत्र पड़ा।* 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *इस ब्रज क्षेत्र में 12 वन, 24 उपवन, 20 कुण्ड और नन्द गाँव,बरसाना, गोकुल, गोवर्धन,* *वृन्दावन,मथुरा, कोसी, राधाकुण्डआदि क्षेत्र इसके अंतर्गत आते हैं।* *(चौरासी अँगुल इस लिए कि धर्म शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर हर मनुष्यका शरीर अपने हाथ कि अँगुली से चौरासी अँगुल का ही होता है )* 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण जी गौलोक धाम के सभी पशु-पक्षी इत्यादि को बोले कि आप श्रीराधा रानी जी कि सेवा में ब्रज में जाइये। तब जा कर श्रीराधा रानी जी सर्व प्रथम ब्रज क्षेत्र के बरसाने में श्रीबृसभान जी के यहाँ प्रगट हुयीं।* *श्रीराधा रानी जी के ब्रज में आने के बाद श्रीकृष्ण भगवान मथुरा में अपने मामा कंस के कारागृह में बन्द श्रीवासुदेव जी के यहाँ पधारेऔर बाल्यकाल कि सभी लीला श्रीराधा रानी जी के साथ ब्रज में ही किया।* 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 *इसके बाद श्रीकृष्ण जी तो ब्रज छोड़ कर चले गये,* *पर श्रीराधा रानी जी अपने भाई द्वारा दिए श्राप को ब्रज में ही बितायीं और बाद में अपने धाम गौलोक को चली गयी।* 🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜 *! बोलो जय श्री राधे !!* *श्री मद भागवत पुराण आदि में ऋषि - सन्तों का बर्णन है कि कलयुग में ब्रज चौरासी कोस कि परिक्रमा लगाने या यहां श्रीकृष्ण की प्रिय श्रीमद्भागवत कथा कराने से चौरासी जन्म के पापों से सहज ही मुक्ति मिल जाती है।* 🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 *मुक्ति कहे गोपाल से, मेरी मुक्ति बताओ । ब्रज रज जब माथे चड़े, मुक्ति मुक्त हो जाय ।। ब्रज चौरासी कोस कि परिकम्मा जो देत । तो लख चौरासी कोस के पाप हरि हर लेत* 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔

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Archana Singh Feb 22, 2021

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🌷JK🌷 Feb 22, 2021

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✨Shuchi Singhal✨ Feb 22, 2021

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