Jayshree Shah
Jayshree Shah Jan 10, 2018

जैनम् जयति शासनम्

जैनम् जयति शासनम्

श्री अन्तरिक्ष जी तीर्थ का इतिहास!

क्या आप जानते है के वर्तमान काल में सबसे प्राचीन जैन प्रतिमाएं कौन सी है.. ??
१. श्री नेमिनाथ दादा, गिरनार तीर्थ!
२. श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ दादा, शंखेश्वर तीर्थ!
३. श्री अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ दादा, शिरपुर!

हम सब गिरनार तीर्थ और शंखेश्वर तीर्थ के बारे में तो बहुत कुछ जानते है, किन्तु अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ के बारे हमें अधिक जानकारी नहीं है!

श्री अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ की कुछ मुख्य बातें!
👉🏻 42 इंच की अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा 11,80,000 वर्ष प्राचीन है!
👉🏻 प्रतिमा जी मिटटी और गाय के गोबर से प्रभु मुनिसुव्रत स्वामी के काल में बनी थी!
👉🏻 प्रतिमा की स्थापना देवलोक से स्वयं देवों ने की है न की किसी मनुष्य ने!
👉🏻 प्रतिमा जी जमीन को नहीं छूती, यह बिना किसी सहारे के पूर्णतया हवा में है और इसके नीचे से कपडा भी निकाला जा सकता है!
👉🏻इस प्रतिमा जी का जिक्र सकल तीर्थ वंदना में भी आता है जो रोजाना प्रातः प्रतिक्रमण में बोली जाती है! इसी से इसकी महत्वता का पता चलता है!

👉🏻परम पावन, प्रगट प्रभावी, अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक श्री अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ प्रभु की महिमा का वर्णन करना लगभग असंभव ही है!

इस सब के बावजूद जैसे हर चीज़ के अच्छे और बुरे दिन आते है उसी प्रकार ये तीर्थ शायद अभी अपने बुरे समय से गुजर रहा है! इतना महत्त्व का होते हुए भी बहुत कम लोगो को इसकी जानकारी है!

श्वेताम्बर तथा anya समप्र्दाय के आपसी झगडे के कारण आज ये अति प्राचीन प्रतिमा जी जिसकी नित्य प्रक्षाल और नवांग पूजा होती थी आज एक कमरे में बंद है तथा केवल एक झरोखे से दर्शन ही किये जा सकते है!

शिरपुर नज़दीक अकोला, महाराष्ट्र में स्थित इस तीर्थ के दर्शन वंदन को अवश्य जायें तथा प्रभु के दर्शन वंदन कर अपना जीवन सफल बनाएं!

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ashok kumar sen May 18, 2019

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Ruby Jain May 17, 2019

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Sanjay Jain May 17, 2019

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Ruby Jain May 16, 2019

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Jay Lalwani May 16, 2019

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Vibhor Mittal May 18, 2019

जैन धर्म के जिनवर व्रत आज से ********************************* आज यानी 19 मई से जेठ का महीना शुरू हो रहा है। जैन समुदाय के ज्येष्ठ जिनवर व्रत आज से शुरू होंगे। ज्येष्ठ जिनवर व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होकर आषाढ़ कृष्णा प्रतिपदा को समाप्त होता है। इसमें प्रथम ज्येष्ठ वदी प्रतिपदा को प्रोषध किया जाता है। इसके बाद कृष्ण पक्ष के शेष 14 दिन एकासन करते हैं। पुन: ज्येष्ठ सुदी प्रतिपदा को उपवास और शेष 14 दिन एकासन या आषाढ़ वदी प्रतिपदा को उपवास कर व्रत की समाप्ति की जाती है। करें भगवान आदिनाथ का अभिषेक =========================== ज्येष्ठ जिनवर व्रत में मिट्टी के पाँच कलशों से प्रतिदिन भगवान आदिनाथ का अभिषेक करना चाहिए। 'ह्रीं श्रीज्येष्ठजिनाधिपतये नम: कलशस्थापनं करोमि इस मंत्र को पढ़कर कलशों की स्थापना की जाती है। पाँच कलशों में से चार कलशों द्वारा अभिषेक स्थापन के समय ही किया जाता है और एक कलश से जयमाल पढऩे के अनन्तर अभिषेक होता है। इस व्रत में ज्येष्ठ जिनवर की पूजा की जाती है। 'ह्रीं श्रीऋषभजिनेन्द्राय नम: इस मंत्र का जाप करना होता है। ज्येष्ठ मास भर तीनों समय सामायिक करना, ब्रह्मचर्य का पालन एवं शुद्ध और अल्प भोजन करना आवश्यक है।

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