Jitendra Chhedavi
Jitendra Chhedavi Jun 7, 2018

राधे राधे

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Radha Sharma May 29, 2020

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SK Gupta May 29, 2020

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Vandana Singh May 29, 2020

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किshan May 29, 2020

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Dinesh Pandey May 29, 2020

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subedar May 29, 2020

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Raj kumar May 29, 2020

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आज का श्लोक:      श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप             अध्याय 17 :             श्रद्धा के विभाग                   श्लोक----24 ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 17.24 *अध्याय 17 : श्रृद्धा के विभाग* तस्माद् ॐ इत्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः | प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम् || २४ || तस्मात् - अतएव; ॐ - ओम् से प्रारम्भ करके; इति - इस प्रकार; उदाहृत्य - संकेत करके; यज्ञ - यज्ञ; दान - दान; तपः - तथा तप की; क्रियाः - क्रियाएँ; प्रवर्तन्ते - प्रारम्भ होती है; विधान-उक्ताः - शास्त्रीय विधान के अनुसार; सततम् - सदैव; ब्रह्म-वादिनाम् - अध्यात्मवादियों या योगियों की । अतएव योगीजन ब्रह्म की प्राप्ति के लिए शास्त्रीय विधि के अनुसार यज्ञ, दान तथा तप की समस्त क्रियाओं का शुभारम्भ सदैव ओम् से करते हैं । तात्पर्य: ॐ तद् विष्णोः परमं पदम् (ऋग्वेद १.२२.२०) । विष्णु के चरण कमल परम भक्ति के आश्रय हैं । भगवान् के लिए सम्पन्न हर एक क्रिया सारे कार्य क्षेत्र की सिद्धि निश्चित कर देती है । ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । 🙏🏼 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

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DimpAl Dimpu Kumari May 29, 2020

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