Dinesh  sahu
Dinesh sahu Mar 5, 2019

https://youtu.be/tmfJ-7DxefE

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कामेंट्स

Dinesh sahu Mar 12, 2019
जय श्री राधे कृष्णा जी

Dinesh sahu Mar 12, 2019
जय श्री कृष्णा राधे राधे जी बंसी वाले की जय हो

pappu. jha Mar 17, 2019
जय श्री राधे कृष्णा शुभ रात्रि जी आपका हर पल शुभ मंगलमय हो कृष्ण जी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे तमन्नाओं से भरी हो जिंदगी, ख्वाहिशो से भरा हो हर पल, दामन भी छोटा लगने लगे, इतनी खुशिया दे आपको आनेवाला कल…

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🌹हरे कृष्ण👏 "बन्धन की जंजीर" एक सन्त कुएँ पर स्वयं को जंजीर से लटका कर ध्यान करता था और कहता था जिस दिन यह जंजीर टूटेगी मुझे ईश्वर मिल जायेंगे। उनसे पूरा गांव प्रभावित था सभी उनकी भक्ति, उनके तप की तारीफें करते थे। एक व्यक्ति के मन में इच्छा हुई कि मैं भी ईश्वर दर्शन करूँ। वह भी कुएँ पर रस्सी से पैर को बाँधकर कुएँ में लटक गया और कृष्ण जी का ध्यान करने लगा। थोडे समय बाद जब रस्सी टूटी उसे कृष्ण अपनी गोद मे उठा लिए और दर्शन भी दिए। तब व्यक्ति ने पूछा आप इतनी जल्दी मुझे दर्शन देने क्यों चले आये जबकि वे सन्त महात्मा तो वर्षों से आपको बुला रहे हैं। कृष्ण बोले, "वो कुएँ पर लटकते जरूर हैं किन्तु पैर को लोहे की जंजीर से बाँधकर। उन्हें मुझसे ज्यादा जंजीर पर विश्वास है। तुमने खुद से ज्यादा मुझ पर विश्वास किया इसलिए मैं आ गया।" आवश्यक नहीं कि दर्शन में वर्षों लगें आपकी शरणागति आपको ईश्वर के दर्शन अवश्य कराएगी और शीघ्र ही कराएगी। प्रश्न केवल इतना है आप उन पर कितना विश्वास करते हैं। जय जय श्री राधे🙏🙏 ********************************************

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Shakuntla Apr 15, 2019

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Mohit Gupta Apr 15, 2019

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Rajeev Pal Apr 15, 2019

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श्री विष्णु की आरती आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है।  आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्रीविष्णु की आरती ऊँ जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे।।  ऊँ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मनका। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तनका।।  ऊँ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी।। ऊँ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी।। ऊँ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता।। ऊँ जय जगदीश हरे। तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलू दयामय, तुमको मैं कुमति ।। ऊँ जय जगदीश हरे। दीनबन्धु, दुखहर्ता ठाकुर तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे।। ऊँ जय जगदीश हरे। विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा।।  ऊँ जय जगदीश हरे। ऊँ जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे।।  ऊँ जय जगदीश हरे।

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Sukhadev Awari Apr 17, 2019

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