💙शुभ शुक्रवार💙 💛शुभ प्रभात💛 💚जय माता दी💚 💜जय बजरंग💜 🌹शुभ हनुमान जयंती 🌹 🌹शुभ चैत्र पूर्णिमा 🌹 🌹आपका हर पल🌹 🌹शुभ एवं मंगलमय रहे🌹

💙शुभ शुक्रवार💙
      💛शुभ प्रभात💛
          💚जय माता दी💚
               💜जय बजरंग💜
    🌹शुभ हनुमान जयंती 🌹
             🌹शुभ चैत्र पूर्णिमा 🌹
                    🌹आपका हर पल🌹 
                        🌹शुभ एवं मंगलमय रहे🌹

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कामेंट्स

Durga Pawan Sharma Apr 19, 2019
Jai shree Radhe Krishna ji Good evening ji God bless you and your family ji Ram ram ji

Pawan Saini Apr 19, 2019
jai Shri Radha Radha Bhai ji 🙏🌹💐 God bless you and your family Bhai ji 🙏🌹💐 always be very happy sweet good evening Bhai ji 🙏🌹💐

Shivsanker Shukala Apr 19, 2019
जय श्री राम जय हनुमान शुभ संध्या की मंगलमय शुभकामनाएं

Mamta Chauhan Apr 19, 2019
Jai shri ram jai hnuman ji Subh Sandhya vandan bhai ji 🙏🙏

K N Padshala Apr 19, 2019
जय माता दी सेरावाली माँ 🌹🙏 जय श्री हनुमते नमः जय शियाराम शुभ संध्या स्नेह वंदन भाई जी प्रणाम 🌹🙏🙏👌👌👌

Ritu Sen Apr 19, 2019
Jai Shri Radhe Krishna ji very sweet good evening ji aapka Har Pal mangalmay Ho God bless you and your family ji always be very happy ji

Anita Choudhary Apr 19, 2019
राम राम जी 🌷जय माता दी 🙌

Babita Sharma Apr 19, 2019
*श्री बजरंग बली वीर हनुमान जी के जन्मोत्सव की आप को ढेरों बधाई भाई'* *पवनपुत्र आप का जीवन ख़ुशियों से भर दें।* 🙏🌸🌺जय श्री राम🌺🌸🙏

रमेश भाई ठक्कर Apr 19, 2019
जय बजरंगबली जय बजरंगबली बजरंगबली की कृपा आप पर आपके परिवार पर सदा ही बनी रहे हनुमान जन्मोत्सव की आपको हार्दिक शुभकामनाएं शुभ संध्या वंदन

Sangeeta Lal Apr 19, 2019
Jay shree Ram ji shubh Shandhy ji aap aur aapke parivar hamesha khush rahe ji 🙏🙏

|| औरत ही मकान को घर बनाती है ; चाहे तो नाश कर दे या सर्वनाश ||📚🕉️ एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर नौकरी में लगते गये। सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे। बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने। सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले। पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा –अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।वापस आ कर बहू ने एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा। फिर उसने सभी पोटलियों के चने एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी। जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे। बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये। सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या ? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है। बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी। एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था। आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया। बहू ने पैर छू प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा। इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें - बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला –ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही। यह हार तो तुम्हारा हुआ। –औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क! हमे लगता है कि देश, समाज, और घर को औरत ही गढ़ती है।📚🕉️

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Ritu Sen May 16, 2019

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Ashish shukla May 17, 2019

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Vikash Srivastava May 17, 2019

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Ritu Sen May 16, 2019

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Ritu Sen May 16, 2019

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Ritu Sen May 16, 2019

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Anoop singh May 16, 2019

😭😭😭😭----- पिता -----😭😭😭😭 पांच साल ससुराल रहने के बाद बेटी पीहर लौट आई थी ससुराल कभी वापस ना जाने के लिए। पिता की आँखों में सवाल थे। माँ के पास तमाम सवालों के जवाब।पर पिता बेटी से ही सुनना चाहते थे। बेटी ने पिता का पर्दा किया और तमाम सवालों के जवाब दिये। "किस तरह ससुराल में दूधमुहि बेटी को छोड़ खेतों में काम करने के बाद भी बेटी को गले नहीं लगा सकती।काम का बोझ, उस पर भी ढोर डंगर की जिम्मेदारी भी उसी की। उस पर भी सासू जी के ताने छलनी करते हैं। उपेक्षा का दंश झेलने के बावजूद प्यार के दो बोल के लिए तरस जाती है वो।" "इसमें नया क्या है बेटा, हमने भी यही सब किया है, हर औरत यही करती है। तुम कोई नवेली तो हो नही जो तुम्हारे साथ कुछ अलग होगा?" माँ ने घूँघट की ओट से कहा। पिता कुछ पल सोचते रहे। फिर बेटी के ससुराल फ़ोन लगाया। " आपसे बात करनी है, जितनी जल्दी आ सकें जवाई जी के साथ पधारिये।" बेटी का पति, सास और ससुर हाजिर थे। "बहू अगर घर का काम न करे, खेत पर न जाए, ढोर डंगर की देखभाल, दूध निकलना ना करे तो क्या उसे आलिये में बैठा के पूजा करें उसकी।" सास का सवाल था। "ऐसा तो नहीं कहा उसने कि पूजा कीजिये उसकी। मगर कम से कम उसे इंसान तो समझिए। उसकी बच्ची से पूरा दिन उसे दूर रहना पड़ता है, आखिर दूध पीती बच्ची है अभी उसकी। पर आप लोग उसे बहू कम नौकरानी ज्यादा समझ रहे हैं।" कमरे में क्षण भर चुप्पी छा गई। "अब मेरी बेटी आपके साथ नहीं जाएगी। उसके नाम से जमीन का चौथा हिस्सा और मकान कीजिये। और आप चाहें तो दूसरी शादी करने को स्वतंत्र हैं।" पिता ने फैसला सुनाया। "खाना खाकर पधारें आप..." पिता ने हाथ जोड़े और दरवाजे से निकल गए। बेटी दरवाजे की ओट से सब सुन रही थी। पिता ने बेटी के सर पर हाथ रखा। "शादी ही की है, इसका ये मतलब नहीं कि तुझे अकेला छोड़ दिया है। अब भी मेरा गुरुर है तू।" पिता ने बेटी के सर पर हाथ फेरा। आँखे दोनों की छलछला रहीं थी 😢😢😢 ----

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