priti
priti May 10, 2020

मेरे काNहा....🙇‍♀️🌹🌹

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कामेंट्स

Bharat Rathore 9926060905 May 13, 2020
जय श्री गणेश देवाय नमः🙏शुभ दोपहर प्रणाम बहना जी🌹🙏सिद्धि विनायक भगवान आपको सुख शांति एवम समृद्धि से परिपूर्ण रखें बप्पा जी की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे आपका हर पल मङ्गलमय हो आप सदा सुखी रहे आदरणीय बहना जी👏👏

🕉sai shyam May 13, 2020
🌷radhey radhey ji good afternoon priti..GBU..om sai ram ji 🌷👏

Pawan Saini May 13, 2020
ऊं श्रीं गणेशाय नमः 🚩 ऊ वक्रतुंड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्न कुरू में देव सर्व कार्येषु सर्वदा 🚩 अष्ट विनायक सिद्धी विनायक गौरीशंकर पुत्र विघ्नहर्ता गणपति बप्पा जी की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे बहन गणपति बप्पा आप और आपके परिवार की सभी मनोकामनाएं पूरी करे आप सदैव खुश रहो स्वस्थ रहो मुसकुराते रहो आप का हर एक पल मंगलमय हो शुभ संध्या स्नेह वंदन बहन जी 🙏🌳🌸🌿☘️

🌹🌹pappu 🌹🌹jha🌹🌹 May 13, 2020
जय श्री राधे कृष्णा शुभ संध्या प्यारी बहना आपका हर पल मंगलमय हो श्री कृष्ण जी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे आंसू कभी आंखों में ये भरने नहीं देता, दर्द भी चेहरे पे उभरने नहीं देता, इस तरह रखता है मेरा सांवरा मुझको, की टूट भी जाऊं तो मुझे बिखरने नहीं देता। माय मंदिर बालो ने ठोकर जो लगाई हैं, उस दर्द की सांवरिया तेरे पास दवाई हैं, श्याम प्यार से आकर के दो घूंट पिला जाओ मुझे, तेरी जरूरत हैं फुर्सत हैं तो आ जाओ।। ।। जय श्री श्याम।

Balraj🌹🙏🙏 May 13, 2020
जय श्री राधे राधे जी 🌹🌹प्रभु आपको सदा खुश रखें जी🌷🌷🙏🙏

Renu Singh May 13, 2020
🙏🌹 Jai Shree Radhe Krishna 🙏 Good Night My Dear Sister ji 🙏 Thakur ji Aapki Har Manokamna Puri Karein Aapka Har pal Shubh V Mangalmay ho Sister Ji 🙏🌹🙏

Bharat Rathore 9926060905 May 14, 2020
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्णा राधे राधे जी आपका दिन मंगलमय हो श्री हरि विष्णु जी आपको सदा खुश रखे शुभ प्रभात वन्दननमन बहना जी💐💐💐

🕉sai shyam May 14, 2020
🙏radhey radhey ji good afternoon priti 🙏...👏sai baba ki kirpa sada aap or aapke parivar par sada bani rahe👏 🤚sai ji bless you.🤚..🌹🌹.om sai ram ji 🌹🌹🌹

Bharat Rathore 9926060905 May 15, 2020
सुबह का प्रणाम बहना जी🙏जय माता दी मातारानी जी की कृपा से आपका जीवन खुशियो से भरा रहे मैंय्या जी आपको सुख शांति, समृद्धि से परिपूर्ण रखें आपका हर पल मङ्गलमय हो🌹🌹🌹🌹

🕉sai shyam May 15, 2020
radhey radhey ji good evening Priti ⚘..🌷.GBU🌷..🌹om sai ram ji ..jai shree khatu shyam baba ji 🌹 🌹Happy world family day

🕉sai shyam May 16, 2020
🌹radhey radhey ji good evening priti..Baba ji bless you..om sai ram ji..jai shree khatu shyam baba ji 🌹

Renu Singh May 17, 2020
Good Morning My Dear Sweet Sister ji 🙏🌹 Surya Bhagwan Aapko aur Aàpki family ko Hamesha Khush aur Swasth rakhein 🙏 Aàpka Din Shubh V Mangalmay ho Sister Ji 🙏🌹

Dr.ratan Singh May 17, 2020
🚩🌞ॐ सूर्यदेवाय नमः 🌞🚩 🙏🪔शुभरात्रि वंदन जी🪔🙏 🎎आप सभी पर भगवान सुर्यदेव जी की कृपादृष्टि सदा बनी रहे जी🙏 🎭 आपका रविवार की रात्री शुभ शांतिमय सूर्यमय और मंगलमय व्यतीत हो जी🙏

🌹🌹pappu 🌹🌹jha🌹🌹 May 18, 2020
🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌺🕉️🌸🕉️🌸🕉️🌸🕉️जय श्री राधे कृष्णा शुभ संध्या प्यारी ब हना आपके हर पल मंगलमय हो श्री कृष्ण जी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे बैकुंठ में भी ना मिले जो वो सुख कान्हा तेरे वृंदावन धाम में हैं, कितनी भी बड़ी विपदा हो चाहे समाधान तो बस श्री राधे तेरे नाम में हैं। 👏🌺👏🌺👏🌺👏🌺👏🌺👏🌺👏🌺🌺👏🌺👏🌺👏🌺

Gour.... May 19, 2020
🔔🔔🔔राम राम जी 🕉🕉🕉, जय श्री राम जी 🙏🙏 🙏भगवान श्री राम व पवन पुत्र श्री हनुमान जी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहे🚩🔱🙏🙏 🙏 आपका हर पल खुशियों से भरा हो जी🙏🙏🙏🔔 हर हर महादेव जी ****

Bharat Rathore 9926060905 May 20, 2020
!!जय श्री गणेश देवाय नमः🙏सुबह की राम राम बहना🙏गौरीपुत्र गणेश जी का आशीर्वाद आपके परिवार पर बना रहे बप्पा जी आपकी मनोकामना पूरी करें आपको सुख, शांति समृद्धि प्रदान करें आपका हर पल मंगलमय हो आप सदा सुखी एवं ख़ुश रहे मेरी प्यारी बहना जी🌷🙏कहॉ बिजी हो बहना जी 9 दिन बचे हैं पोस्ट करो मेरी बहना आपकी बहुत याद आएगी बहना जी🌹🙏

🕉sai shyam May 20, 2020
🌷radhey radhey ji good afternoon priti i🌷.🔅.GBU🔅..🌹Baba ji ki kripa se aapka har pal mangalmay ho🌹....🌷om sai ram ji 🌷Waqt Nikalkar Muskurate Raho Zindagi Kab Deti Hai Bar Bar Mauka, Mauka Dundo Aur Khilkhilate Raho⚘⚘⚘🌷🌷🌷🌷🌷🌷⚘⚘

Bharat Rathore 9926060905 May 21, 2020
शुभ दोपहर वन्दन बहना जी🙏हरि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः🛕हरे कृष्णा राधे राधे बहना जी।श्री हरि विष्णु जी और माँ लक्ष्मी जी की कृपा आपके पूरे परिवार पर बनी रहे ठाकुर जी आपको सदैव सुख शांति समृद्धि यश मान सम्मान से परिपूर्ण रखें आप सदा स्वस्थ रहें मस्त रहे तंदुरुस्त रहे मेरी प्यारी बहना जी🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹

🕉sai shyam May 21, 2020
🌷radhey radhey ji good afternoon 🌷priti 🌷...👏sai baba ji bless you and your family 🌷..om sai ram ji..jai shree khatu shyam ji 🌷

☑️🐚☑️राधे राधे जी🐚🆘🐚जयश्रीकृष्णा☑️🐚☑️ 👩‍👧‍👦🙏👩‍👧‍👦::गुड ✍️ :नाईट :✍️शुभ ✍️ रात्रि:👩‍👧‍👦🙏👩‍👧‍👦 🙏कब क्यों और कैसे डूबी👩‍👧‍👦कृष्ण की नगरी द्वारिका🙏 👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦:::✍️👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦✍️👩‍👧‍👦 महाभारत युद्ध के 36 वर्ष पश्चात समुद्र में डूब जाती है। द्वारिका के समुद्र में डूबने से पूर्व श्री कृष्ण सहित सारे यदुवंशी भी मारे जाते है। समस्त यदुवंशियों के मारे जाने और द्वारिका के समुद्र में विलीन होने के पीछे मुख्य रूप से दो घटनाएं जिम्मेदार है। एक माता गांधारी द्वारा श्री कृष्ण को दिया गया श्राप और दूसरा ऋषियों द्वारा श्री कृष्ण पुत्र सांब को दिया गया श्राप। आइए इस घटना पर विस्तार से जानते है। गांधारी ने दिया था यदुवंश के नाश का श्राप – महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब युधिष्ठर का राजतिलक हो रहा था तब कौरवों की माता गांधारी ने महाभारत युद्ध के लिए श्रीकृष्ण को दोषी ठहराते हुए श्राप दिया की जिस प्रकार कौरवों के वंश का नाश हुआ है ठीक उसी प्रकार यदुवंश का भी नाश होगा। ऋषियों ने दिया था सांब को श्राप – महाभारत युद्ध के बाद जब छत्तीसवां वर्ष आरंभ हुआ तो तरह-तरह के अपशकुन होने लगे। एक दिन महर्षि विश्वामित्र, कण्व, देवर्षि नारद आदि द्वारका गए। वहां यादव कुल के कुछ नवयुवकों ने उनके साथ परिहास (मजाक) करने का सोचा। वे श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को स्त्री वेष में ऋषियों के पास ले गए और कहा कि ये स्त्री गर्भवती है। इसके गर्भ से क्या उत्पन्न होगा? ऋषियों ने जब देखा कि ये युवक हमारा अपमान कर रहे हैं तो क्रोधित होकर उन्होंने श्राप दिया कि- श्रीकृष्ण का यह पुत्र वृष्णि और अंधकवंशी पुरुषों का नाश करने के लिए एक लोहे का मूसल उत्पन्न करेगा, जिसके द्वारा तुम जैसे क्रूर और क्रोधी लोग अपने समस्त कुल का संहार करोगे। उस मूसल के प्रभाव से केवल श्रीकृष्ण व बलराम ही बच पाएंगे। श्रीकृष्ण को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कहा कि ये बात अवश्य सत्य होगी। नियों के श्राप के प्रभाव से दूसरे दिन ही सांब ने मूसल उत्पन्न किया। जब यह बात राजा उग्रसेन को पता चली तो उन्होंने उस मूसल को चुरा कर समुद्र में डलवा दिया। इसके बाद राजा उग्रसेन व श्रीकृष्ण ने नगर में घोषणा करवा दी कि आज से कोई भी वृष्णि व अंधकवंशी अपने घर में मदिरा तैयार नहीं करेगा। जो भी व्यक्ति छिपकर मदिरा तैयार करेगा, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा। घोषणा सुनकर द्वारकावासियों ने मदिरा नहीं बनाने का निश्चय किया।द्वारका में होने लगे थे भयंकर अपशकुन इसके बाद द्वारका में भयंकर अपशकुन होने लगे। प्रतिदिन आंधी चलने लगी। चूहे इतने बढ़ गए कि मार्गों पर मनुष्यों से ज्यादा दिखाई देने लगे। वे रात में सोए हुए मनुष्यों के बाल और नाखून कुतरकर खा जाया करते थे। सारस उल्लुओं की और बकरे गीदड़ों की आवाज निकालने लगे। गायों के पेट से गधे, कुत्तियों से बिलाव और नेवलियों के गर्भ से चूहे पैदा होने लगे। उस समय यदुवंशियों को पाप करते शर्म नहीं आती थी। अंधकवंशियों के हाथों मारे गए थे प्रद्युम्न – जब श्रीकृष्ण ने नगर में होते इन अपशकुनों को देखा तो उन्होंने सोचा कि कौरवों की माता गांधारी का श्राप सत्य होने का समय आ गया है। इन अपशकुनों को देखकर तथा पक्ष के तेरहवें दिन अमावस्या का संयोग जानकर श्रीकृष्ण काल की अवस्था पर विचार करने लगे। उन्होंने देखा कि इस समय वैसा ही योग बन रहा है जैसा महाभारत के युद्ध के समय बना था। गांधारी के श्राप को सत्य करने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण ने यदुवंशियों को तीर्थयात्रा करने की आज्ञा दी। श्रीकृष्ण की आज्ञा से सभी राजवंशी समुद्र के तट पर प्रभास तीर्थ आकर निवास करने लगे। प्रभास तीर्थ में रहते हुए एक दिन जब अंधक व वृष्णि वंशी आपस में बात कर रहे थे। तभी सात्यकि ने आवेश में आकर कृतवर्मा का उपहास और अनादर कर दिया। कृतवर्मा ने भी कुछ ऐसे शब्द कहे कि सात्यकि को क्रोध आ गया और उसने कृतवर्मा का वध कर दिया। यह देख अंधकवंशियों ने सात्यकि को घेर लिया और हमला कर दिया। सात्यकि को अकेला देख श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न उसे बचाने दौड़े। सात्यकि और प्रद्युम्न अकेले ही अंधकवंशियों से भिड़ गए। परंतु संख्या में अधिक होने के कारण वे अंधकवंशियों को पराजित नहीं कर पाए और अंत में उनके हाथों मारे गए। यदुवंशियों के नाश के बाद अर्जुन को बुलवाया था श्रीकृष्ण ने – अपने पुत्र और सात्यकि की मृत्यु से क्रोधित होकर श्रीकृष्ण ने एक मुट्ठी एरका घास उखाड़ ली। हाथ में आते ही वह घास वज्र के समान भयंकर लोहे का मूसल बन गई। उस मूसल से श्रीकृष्ण सभी का वध करने लगे। जो कोई भी वह घास उखाड़ता वह भयंकर मूसल में बदल जाती (ऐसा ऋषियों के श्राप के कारण हुआ था)। उन मूसलों के एक ही प्रहार से प्राण निकल जाते थे। उस समय काल के प्रभाव से अंधक, भोज, शिनि और वृष्णि वंश के वीर मूसलों से एक-दूसरे का वध करने लगे। यदुवंशी भी आपस में लड़ते हुए मरने लगे। श्रीकृष्ण के देखते ही देखते सांब, चारुदेष्ण, अनिरुद्ध और गद की मृत्यु हो गई। फिर तो श्रीकृष्ण और भी क्रोधित हो गए और उन्होंने शेष बचे सभी वीरों का संहार कर डाला। अंत में केवल दारुक (श्रीकृष्ण के सारथी) ही शेष बचे थे। श्रीकृष्ण ने दारुक से कहा कि तुम तुरंत हस्तिनापुर जाओ और अर्जुन को पूरी घटना बता कर द्वारका ले आओ। दारुक ने ऐसा ही किया। इसके बाद श्रीकृष्ण बलराम को उसी स्थान पर रहने का कहकर द्वारका लौट आए। बलरामजी के स्वधाम गमन के बाद ये किया श्रीकृष्ण ने – द्वारका आकर श्रीकृष्ण ने पूरी घटना अपने पिता वसुदेवजी को बता दी। यदुवंशियों के संहार की बात जान कर उन्हें भी बहुत दुख हुआ। श्रीकृष्ण ने वसुदेवजी से कहा कि आप अर्जुन के आने तक स्त्रियों की रक्षा करें। इस समय बलरामजी वन में मेरी प्रतीक्षा कर रहे हैं, मैं उनसे मिलने जा रहा हूं। जब श्रीकृष्ण ने नगर में स्त्रियों का विलाप सुना तो उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि शीघ्र ही अर्जुन द्वारका आने वाले हैं। वे ही तुम्हारी रक्षा करेंगे। ये कहकर श्रीकृष्ण बलराम से मिलने चल पड़े। वन में जाकर श्रीकृष्ण ने देखा कि बलरामजी समाधि में लीन हैं। देखते ही देखते उनके मुख से सफेद रंग का बहुत बड़ा सांप निकला और समुद्र की ओर चला गया। उस सांप के हजारों मस्तक थे। समुद्र ने स्वयं प्रकट होकर भगवान शेषनाग का स्वागत किया। बलरामजी द्वारा देह त्यागने के बाद श्रीकृष्ण उस सूने वन में विचार करते हुए घूमने लगे। घूमते-घूमते वे एक स्थान पर बैठ गए और गांधारी द्वारा दिए गए श्राप के बारे में विचार करने लगे। देह त्यागने की इच्छा से श्रीकृष्ण ने अपनी इंद्रियों का संयमित किया और महायोग (समाधि) की अवस्था में पृथ्वी पर लेट गए। श्री कृष्ण की नगरी द्वारिका महाभारत युद्ध के 36 वर्ष पश्चात समुद्र में डूब जाती है। द्वारिका के समुद्र में डूबने से पूर्व श्री कृष्ण सहित सारे यदुवंशी भी मारे जाते है। समस्त यदुवंशियों के मारे जाने और द्वारिका के समुद्र में विलीन होने के पीछे मुख्य रूप से दो घटनाएं जिम्मेदार है। एक माता गांधारी द्वारा श्री कृष्ण को दिया गया श्राप और दूसरा ऋषियों द्वारा श्री कृष्ण पुत्र सांब को दिया गया श्राप। आइए इस घटना पर विस्तार से जानते है। गांधारी ने दिया था यदुवंश के नाश का श्राप – महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब युधिष्ठर का राजतिलक हो रहा था तब कौरवों की माता गांधारी ने महाभारत युद्ध के लिए श्रीकृष्ण को दोषी ठहराते हुए श्राप दिया की जिस प्रकार कौरवों के वंश का नाश हुआ है ठीक उसी प्रकार यदुवंश का भी नाश होगा। ऋषियों ने दिया था सांब को श्राप – महाभारत युद्ध के बाद जब छत्तीसवां वर्ष आरंभ हुआ तो तरह-तरह के अपशकुन होने लगे। एक दिन महर्षि विश्वामित्र, कण्व, देवर्षि नारद आदि द्वारका गए। वहां यादव कुल के कुछ नवयुवकों ने उनके साथ परिहास (मजाक) करने का सोचा। वे श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को स्त्री वेष में ऋषियों के पास ले गए और कहा कि ये स्त्री गर्भवती है। इसके गर्भ से क्या उत्पन्न होगा? ऋषियों ने जब देखा कि ये युवक हमारा अपमान कर रहे हैं तो क्रोधित होकर उन्होंने श्राप दिया कि- श्रीकृष्ण का यह पुत्र वृष्णि और अंधकवंशी पुरुषों का नाश करने के लिए एक लोहे का मूसल उत्पन्न करेगा, जिसके द्वारा तुम जैसे क्रूर और क्रोधी लोग अपने समस्त कुल का संहार करोगे। उस मूसल के प्रभाव से केवल श्रीकृष्ण व बलराम ही बच पाएंगे। श्रीकृष्ण को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कहा कि ये बात अवश्य सत्य होगी। समुद्र में डूबे हुए द्वारका नगरी के अवशेष मुनियों के श्राप के प्रभाव से दूसरे दिन ही सांब ने मूसल उत्पन्न किया। जब यह बात राजा उग्रसेन को पता चली तो उन्होंने उस मूसल को चुरा कर समुद्र में डलवा दिया। इसके बाद राजा उग्रसेन व श्रीकृष्ण ने नगर में घोषणा करवा दी कि आज से कोई भी वृष्णि व अंधकवंशी अपने घर में मदिरा तैयार नहीं करेगा। जो भी व्यक्ति छिपकर मदिरा तैयार करेगा, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा। घोषणा सुनकर द्वारकावासियों ने मदिरा नहीं बनाने का निश्चय किया।द्वारका में होने लगे थे भयंकर अपशकुन इसके बाद द्वारका में भयंकर अपशकुन होने लगे। प्रतिदिन आंधी चलने लगी। चूहे इतने बढ़ गए कि मार्गों पर मनुष्यों से ज्यादा दिखाई देने लगे। वे रात में सोए हुए मनुष्यों के बाल और नाखून कुतरकर खा जाया करते थे। सारस उल्लुओं की और बकरे गीदड़ों की आवाज निकालने लगे। गायों के पेट से गधे, कुत्तियों से बिलाव और नेवलियों के गर्भ से चूहे पैदा होने लगे। उस समय यदुवंशियों को पाप करते शर्म नहीं आती थी। अंधकवंशियों के हाथों मारे गए थे प्रद्युम्न – जब श्रीकृष्ण ने नगर में होते इन अपशकुनों को देखा तो उन्होंने सोचा कि कौरवों की माता गांधारी का श्राप सत्य होने का समय आ गया है। इन अपशकुनों को देखकर तथा पक्ष के तेरहवें दिन अमावस्या का संयोग जानकर श्रीकृष्ण काल की अवस्था पर विचार करने लगे। उन्होंने देखा कि इस समय वैसा ही योग बन रहा है जैसा महाभारत के युद्ध के समय बना था। गांधारी के श्राप को सत्य करने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण ने यदुवंशियों को तीर्थयात्रा करने की आज्ञा दी। श्रीकृष्ण की आज्ञा से सभी राजवंशी समुद्र के तट पर प्रभास तीर्थ आकर निवास करने लगे। प्रभास तीर्थ में रहते हुए एक दिन जब अंधक व वृष्णि वंशी आपस में बात कर रहे थे। तभी सात्यकि ने आवेश में आकर कृतवर्मा का उपहास और अनादर कर दिया। कृतवर्मा ने भी कुछ ऐसे शब्द कहे कि सात्यकि को क्रोध आ गया और उसने कृतवर्मा का वध कर दिया। यह देख अंधकवंशियों ने सात्यकि को घेर लिया और हमला कर दिया। सात्य -- Get Good Morning, Good Night, Shayari etc. messages on IndiaChat App https://wn78r.app.goo.gl/HgRKh

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rekha sunny May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Rakhi singh Rana May 10, 2020

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