कुछ खोकर लौटे न लौटे लेकिन कर्मफल अवश्य लौटता है वह चाहे अच्छा हो या बुरा। ✽ ✽ ✽ ✽◎o◎✽ ✽ ✽ ✽ ||ॐ जय श्री कृष्ण ||●🙏🚩

कुछ खोकर लौटे न लौटे लेकिन कर्मफल अवश्य लौटता है वह चाहे अच्छा हो या बुरा।
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        ||ॐ जय श्री कृष्ण ||●🙏🚩

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कामेंट्स

Arvid bhai Jan 22, 2021
jay shri krisna radhe radhe nmskar ji ram ram ji subh dhopar vanadn

आशुतोष Jan 22, 2021
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻

Sumitra Soni Jan 22, 2021
जय माता दी 🙏🏻🌹 बहना माता रानी आपकी सभी मनोकामना पूरी करें आप और आपके परिवार को सदा सुखी रखे स्वस्थ रखें🌹🙏🏻🌹

JAI MAA VAISHNO Jan 22, 2021
JAI MATA SANTOSHI KIRPA KARO MAA JAI MATA SANTOSHI KIRPA KARO MAA

Ramggupta Jan 22, 2021
Jay Sri Krishna RAM Jay siyaram Jay siyaram Jay siyaram Jay siyaram Jay siyaram

Manoj Gupta AGRA Jan 22, 2021
jai shree radhe krishna behan 🙏🙏🌷🌸💐🌀 shubh dophar vandan ji 🙏🙏🌷🌸💐🌀

कुसुम सेन Jan 22, 2021
⛳🙏🕉️🙏🥀🌹जय श्री राधे कृष्णा राधे राधे प्यारे बेटा जी शुभ संध्या वंदन जी ठाकुर जी श्री राधे रानी जी की कृपा दृष्टि सदैव आप एवं आपके परिवार पर बनी रहे आपका हर दिन हर पल शुभ मंगलमय हो पढ़✍️ लिखकर जिंदगी में खूब तरक्की करोआप अपनी 🙏यही मंगलकामनाएं शुभकामनाएं प्यारे बेटा जी सदा खुश रहो☺️🙏🌹🕉️🌹👉☕🍫☕💐💐⛳⛳⛳

astro puja Jan 22, 2021
जय श्री कृष्ण 🙏 🌻

r h Bhatt Jan 22, 2021
Jai Shri Radhe Krishna Shubh ratri ji Vandana ji Jai matage

Yashwant Kunwar { women} Jan 22, 2021
Jai shree Radhe Krishna 🌹🙏🌹 Shubh mangalmay ho aapka aur aapke parivar ka Shubh ratri vanden 👍👌💐

🙏ANJALI 😊MISHRA🙋 Jan 22, 2021
🙏या देवी सर्वभूतेषु🌸 लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🐚🌷🌺🌸🙏जय माता दी 🌹🙏शुभ रात्रि वंदन प्यारी बहना जी🙏माता रानी आपको सदा सुखी रखें🙌 आपके घर परिवार में खुशियां हमेशा बनी रहें...🌹🌸🌹माता श्री महालक्ष्मी🌺👣आपकी हर मनोकामना पूरी करें..आप का हर पल शुभ हो 👌मेरी प्यारी बहना जी🙏🌹🌷💐☕👈🙏🌺🌺🚩🌺🚩🌺🚩💐💐🚩💐🚩💐🚩🙏जय माता दी🙏🚩

Narayan Tiwari Jan 22, 2021
═════════════════ 🙏🚩•|| जय श्री कृष्णा ||•🚩🙏 कलिकाल में श्री कृष्णा जी की साधना से आशीष प्राप्त हो ऐसी मैं प्रार्थना करता हूँ..!!

रमेश भाई ठककर Jan 26, 2021
*🌹सुप्रभात🌹* *तिरंगे की शान, मेरा भारत महान* *गरज उठे गगन सारा, समुन्दर छोड़े अपना किनारा* *हिल जाए जहान सारा, जब लहराए तिरंगा प्यारा।।* *आपको और आपके परिवार को मेरी व मेरे परिवार की तरफ से 72वें "गणतंत्र दिवस" की हार्दिक शुभकामनाएं।* आदरणीय छोटी बहेन 🇮🇳 *जय हिन्द जय भारत* 🇮🇳 *🙏🌹राधे राधे जय श्री कृष्णा🌹🙏*

Babita Sharma Jan 27, 2021
सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामनाओं के साथ आपको शुभ दिवस की मंगलकामना बहना 🙏🙏जय श्री गणेशाय नम: 🌹गणेश जी महाराज सदैव आपका कल्याण करें 🌹

zala. Hanubha Jan 28, 2021
jay shree radhe krishna ji shubh dopahar vandan bahenaji🙏🇳🇵✈️🕉️🇮🇳🙏

💥RAJU RAI.💥 Mar 2, 2021

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Amar jeet mishra Mar 3, 2021

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JAGDISH BIJARNIA Mar 3, 2021

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*👉🏿सद्व्यवहार का जादू 🏵️ 🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅 किसी गाँव में एक चोर रहता था। एक बार उसे कई दिनों तक चोरी करने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे उसके घर में खाने के लाले पड़ गये। अब मरता क्या न करता, वह रात्रि के लगभग बारह बजे गाँव के बाहर बनी एक साधु की कुटिया में घुस गया। वह जानता था कि साधु बड़े त्यागी हैं, अपने पास कुछ नहीं रखते फिर भी सोचा, 'खाने पीने को ही कुछ मिल जायेगा। तो एक दो दिन का गुजारा चल जायेगा।' जब चोर कुटिया में प्रवेश कर रहे थे, संयोगवश उसी समय साधु बाबा ध्यान से उठकर लघुशंका के निमित्त बाहर निकले। चोर से उनका सामना हो गया। साधु उसे देखकर पहचान गये क्योंकि पहले कई बार देखा था, पर साधु यह नहीं जानते थे कि वह चोर है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह आधी रात को यहाँ क्यों आया ! साधु ने बड़े प्रेम से पूछाः "कहो बालक ! आधी रात को कैसे कष्ट किया ? कुछ काम है क्या ?" चोर बोलाः "महाराज ! मैं दिन भर का भूखा हूँ।" साधुः "ठीक है, आओ बैठो। मैंने शाम को धूनी में कुछ शकरकंद डाले थे, वे भुन गये होंगे, निकाल देता हूँ। तुम्हारा पेट भर जायेगा। शाम को आ गये होते तो जो था हम दोनों मिलकर खा लेते। पेट का क्या है बेटा ! अगर मन में संतोष हो तो जितना मिले उसमें ही मनुष्य खुश रह सकता है। 'यथा लाभ संतोष' यही तो है।" साधु ने दीपक जलाया। चोर को बैठने के लिए आसन दिया, पानी दिया और एक पत्ते पर भुने हुए शकरकंद रख दिये। फिर पास में बैठकर उसे इस तरह खिलाया, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को खिलाती है। साधु बाबा के सद्व्यवहार से चोर निहाल हो गया, सोचने लगा, 'एक मैं हूँ और एक ये बाबा हैं। मैं चोरी करने आया और ये इतने प्यार से खिला रहे हैं ! मनुष्य ये भी हैं और मैं भी हूँ। यह भी सच कहा हैः आदमी-आदमी में अंतर, कोई हीरा कोई कंकर। मैं तो इनके सामने कंकर से भी बदतर हूँ।' मनुष्य में बुरी के साथ भली वृत्तियाँ भी रहती हैं, जो समय पाकर जाग उठती हैं। जैसे उचित खाद-पानी पाकर बीज पनप जाता है, वैसे ही संत का संग पाकर मनुष्य की सदवृत्तियाँ लहलहा उठती हैं। चोर के मन के सारे कुसंस्कार हवा हो गये। उसे संत के दर्शन, सान्निध्य और अमृतवर्षा दृष्टि का लाभ मिला। एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध। तुलसी संगत साध की, हरे कोटि अपराध।। उन ब्रह्मनिष्ठ साधुपुरुष के आधे घंटे के समागम से चोर के कितने ही मलिन संस्कार नष्ट हो गये। साधु के सामने अपना अपराध कबूल करने को उसका मन उतावला हो उठा। फिर उसे लगा कि 'साधु बाबा को पता चलेगा कि मैं चोरी की नियत से आया था तो उनकी नजर में मेरी क्या इज्जत रह जायेगी ! क्या सोचेंगे बाबा कि कैसा पतित प्राणी है, जो मुझ संत के यहाँ चोरी करने आया !' लेकिन फिर सोचा, 'साधु मन में चाहे जो समझें, मैं तो इनके सामने अपना अपराध स्वीकार करके प्रायश्चित करूँगा। इतने दयालू महापुरुष हैं, ये मेरा अपराध अवश्य क्षमा कर देंगे।' संत के सामने प्रायश्चित करने से सारे पाप जलकर राख हो जाते हैं। उसका भोजन पूरा होने के बाद साधु ने कहाः "बेटा ! अब इतनी रात में तुम कहाँ जाओगे, मेरे पास एक चटाई है, इसे ले लो और आराम से यहाँ सो जाओ। सुबह चले जाना।" नेकी की मार से चोर दबा जा रहा था। वह साधु के पैरों पर गिर पड़ा और फूट-फूट कर रोने लगा। साधु समझ न सके कि यह क्या हुआ ! साधु ने उसे प्रेमपूर्वक उठाया, प्रेम से सिर पर हाथ फेरते हुए पूछाः "बेटा ! क्या हुआ ?" रोते-रोते चोर का गला रूँध गया। उसने बड़ी कठिनाई से अपने को सँभालकर कहाः "महाराज ! मैं बड़ा अपराधी हूँ।" साधु बोलेः "बेटा ! भगवान तो सबके अपराध क्षमा करने वाले हैं। उनकी शरण में जाने से वे बड़े-से-बड़े अपराध क्षमा कर देते हैं। तू उन्हीं की शरण में जा।" चोरः "महाराज ! मेरे जैसे पापी का उद्धार नहीं हो सकता।" साधुः "अरे पगले ! भगवान ने कहा हैः यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है।" "नहीं महाराज ! मैंने बड़ी चोरियाँ की हैं। आज भी मैं भूख से व्याकुल होकर आपके यहाँ चोरी करने आया था लेकिन आपके सदव्यवहार ने तो मेरा जीवन ही पलट दिया। आज मैं आपके सामने कसम खाता हूँ कि आगे कभी चोरी नहीं करूँगा, किसी जीव को नहीं सताऊँगा। आप मुझे अपनी शरण में लेकर अपना शिष्य बना लीजिये।" साधु के प्यार के जादू ने चोर को साधु बना दिया। उसने अपना पूरा जीवन उन साधु के चरणों में सदा के समर्पित करके अमूल्य मानव जीवन को अमूल्य-से-अमूल्य परमात्मा को पाने के रास्ते लगा दिया। महापुरुषों की सीख है कि "आप सबसे आत्मवत् व्यवहार करें क्योंकि सुखी जीवन के लिए विशुद्ध निःस्वार्थ प्रेम ही असली खुराक है। संसार इसी की भूख से मर रहा है, अतः प्रेम का वितरण करो। अपने हृदय के आत्मिक प्रेम को हृदय में ही मत छिपा रखो। *उदारता के साथ उसे बाँटो, जगत का बहुत-सा दुःख दूर हो जायेगा।"* *।। जय सियाराम जी।।* *।। ॐ नमह शिवाय।।*

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