Pandit jee
Pandit jee Nov 25, 2017

Maa Bhadrakali Mandir kuruchetra Haryana

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Sanjeev sharma Apr 22, 2021

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔻👁️🌹 जय माता कुलजा देवी श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से🙏👣🎉🕉️🌷🎊🌺⛳️🌻👁️❗️👁️🌹👣2⃣2⃣🌷🌹 *अप्रैल* ❤️ *वीरवार* 🔱 🎈2⃣0⃣2⃣1️⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 💐🍓 🔔🎉🙏🌹👁️🔻👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2078 शक संवत-1943 *अयन* - उत्तरायण *ऋतु* - ग्रीष्म *मास* -चैत्र *पक्ष* - शुक्ल *तिथि* - दशमी रात्रि 11:35 तक तत्पश्चात एकादशी *नक्षत्र* - अश्लेशा सुबह तक 08:15 तत्पश्चात मघा *योग* - गण्ड शाम 05:02 तक तत्पश्चात वृद्धि *दिशाशूल*- दक्षिण दिशा में *व्रत पर्व* *विवरण* - धर्मराज दशमी 🏵️ *विशेष*- दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता के भक्तों को जय माता श्री नैना देवी जी।🎉🌹🎈⛳️👣🔱🐚🔔🙏

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pramod singh Apr 21, 2021

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. "कन्या पूजन" नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन किए जाने वाले कन्या पूजन को कंजक भी कहा जाता है। इस पावन दिन छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानते हुए पूजा की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि एवं निरोगी होने का आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि देवी स्वरूप इन नौ कन्याओं के आशीर्वाद मां दुर्गा की कृपा लेकर आता है। ऐसे में नवरात्रि का व्रत रखने वाला हर साधक अष्टमी या नवमी के दिन कन्या का पूजन अवश्य करता है। कन्या पूजन यदि पूरे विधि-विधान से किया जाए तो माता का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है, लेकिन कई बार जाने-अनजाने लोग इसमें कुछ गलतियां भी कर देते हैं। ऐसे में माता की कृपा साधक पर नहीं होती है। चूंकि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्ति नहीं होती है, इसलिए आइए जानते हैं कन्या पूजन की सही विधि:- 01. अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए प्रात:काल स्नान-ध्यान कर भगवान गणेश और मां महागौरी की पूजा करें। 02. देवी स्वरुपा नौ कन्याओं को घर में सादर आमंत्रित करें और उन्हें ससम्मान आसन पर बिठाएं। 03. सर्व प्रथम शुद्ध जल से कन्या के पैर धोएं। ऐसा करने से व्यक्ति के पापों का शमन होता है। 04. पैर धोने के पश्चात् कन्याओं को तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। 05. कन्याओं के हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प चढ़ाए। 06. इसके बाद नई थाली में कन्याओं को पूड़ी, हलवा, चना आदि श्रद्धा पूर्वक परोसें। 07. भोजन में कन्याओं को मिष्ठान और प्रसाद देकर अपनी क्षमता के अनुसार द्रव्य, वस्त्र आदि का दान करें। 08. कन्याओं के भोजन के उपरांत उन्हें देवी का स्वरूप मानते हुए उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। 09. अंत में इन सभी कन्याओं को सादर दरवाजे तक और संभव हो तो उनके घर तक जाकर विदा करना न भूलें। ----------:::×:::---------- "जय माता दी" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

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Satish Khare Apr 21, 2021

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