ஆன்மீக புத்தகங்கள் தரவிறக்கிக் கொள்ளுங்கள் ! ஈகரை தமிழ் களஞ்சியம்தகவல் தொடர்பு தொழில் நுட்பம்மின்நூல் புத்தகங்கள். by Balamurugan Jayakumar https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQlZjV0tjeWNZc0k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gRkZOV1BkbUV2OE0/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gM0VwVmpFMEUtS1k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gUVFPUkdnZ3lLTzQ/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQWVwd1MxeElDYUk/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gNHBzNFNoY3Faams/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gdkljbG1rU1F2TXc/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/open?id=0B20KmkM-I85gemlGV0Q3eWN0UHM ஆன்மீகம் ஆன்மீக புத்தகங்கள் தரவிறக்கு கொள்ளுங்கள் ! ஈகரை தமிழ் களஞ்சியம்தகவல் தொடர்பு தொழில் நுட்பம்மின்நூல் புத்தகங்கள் by Balamurugan Jayakumar First topic message reminder : https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQlZjV0tjeWNZc0k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gRkZOV1BkbUV2OE0/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gM0VwVmpFMEUtS1k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gUVFPUkdnZ3lLTzQ/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQWVwd1MxeElDYUk/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gNHBzNFNoY3Faams/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gdkljbG1rU1F2TXc/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/open?id=0B20KmkM-I85gemlGV0Q3eWN0UHM on Wed 13 Jul 2016 - 14:10 by விமந்தனி நல்ல பகிர்வு... person by Sponsored content by TaboolaSponsored Links. Getting a Job in the USA Might be Easier Than You Think Jobs USA | Search Ads Online Jobs Might Pay More Than You Think Online Jobs | Search Ads on Wed 13 Jul 2016 - 19:57 by muthukumar1990 Media fire link podavum on Thu 14 Jul 2016 - 18:51 by GunasekarenS pathinen sithargal varalaru Sri Aravindha Annayin Manthira Malargal ஓலைச்சுவடி.pdf xxxx பெண்கள் ருது ஜாதக கணிதம்.pdf மரணத்தின் பின்.pdf சிவ பூசா விதி.pdf அனுபவ வைத்தியங்களும் ஆரோக்கிய உணவுகளும்.pdf on Sun 17 Jul 2016 - 12:42 by ManiThani Jayakumar thangalidam ulla matra puthagangal ketka vendi ulladhu. ungal email id irunthaal kodukkavum. நன்றி. on Mon 18 Jul 2016 - 1:43 by krishnaamma @GunasekarenS wrote: pathinen sithargal varalaru Sri Aravindha Annayin Manthira Malargal ஓலைச்சுவடி.pdf xxxx பெண்கள் ருது ஜாதக கணிதம்.pdf மரணத்தின் பின்.pdf சிவ பூசா விதி.pdf அனுபவ வைத்தியங்களும் ஆரோக்கிய உணவுகளும்.pdfமேற்கோள் செய்த பதிவு: 1215843 இதில் லிங்க் எதுவும் காணப்படவில்லையே குணசேகரன்?................கொஞ்சம் பாருங்கள் ! on Wed 20 Jul 2016 - 16:57 by ponsubha74 ஜெயக்குமார் உங்கள் email id இருந்தால் கொடுக்கவும் on Thu 15 Dec 2016 - 21:33 by tamiliyappan @Balamurugan Jayakumar wrote: https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQlZjV0tjeWNZc0k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gRkZOV1BkbUV2OE0/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gM0VwVmpFMEUtS1k/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gUVFPUkdnZ3lLTzQ/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gQWVwd1MxeElDYUk/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gNHBzNFNoY3Faams/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/file/d/0B20KmkM-I85gdkljbG1rU1F2TXc/view?usp=ஷரிங் https://drive.google.com/open?id=0B20KmkM-I85gemlGV0Q3eWN0UHMமேற்கோள் செய்த பதிவு: 1214783 on Fri 24 Feb 2017 - 22:19 by Balamurugan Jayakumar

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Dayashankar Shukla Apr 3, 2020

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Pushap Lata Apr 3, 2020

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*🍃🌹🙏*जय माता की*🙏🌹🍃* *🌸💖🌸*शुभ शुक्रवार*🌸💖🌸* *मेरे माँ की नगरी में* *दुखडों की विदाई होती है* *भक्तों की ये एक ऐसी अदालत है* *जहां सबकी सुनवाई होती है* *🙏आप सभी भाई-बहनों का हर पल मंगलमय हो🙏* *🔷🌺।।*जय माता की*।।🌺🔷* ‼️👣‼️👣‼️👣‼️👣‼️👣‼️ 🌺🌺🌞🌺🌙🌺🌺 🙏*सर्व मंगल *माँगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 🌺🌺🌞🌺🌙🌺🌺 *शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥🙏 🙏🌹🚩*जय माता की*🚩🌹🙏 *धैर्य साधना की शक्ति* 〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️ *वर्षों पुरानी बात है। एक राज्य में महान योद्धा रहता था। कभी किसी से नहीं हारा था। बूढ़ा हो चला था, लेकिन तब भी किसी को भी हराने का माद्दा रखता था। चारों दिशाओं में उसकी ख्याति थी। उससे देश-विदेश के कई युवा युद्ध कौशल का प्रशिक्षण लेने आते थे। *एक दिन एक कुख्यात युवा लड़ाका उसके गांव आया। वह उस महान योद्धा को हराने का संकल्प लेकर आया था, ताकि ऐसा करने वाला पहला व्यक्ति बन सके। बेमिसाल ताकतवर होने के साथ ही उसकी खूबी दुश्मन की कमजोरी पहचानने और उसका फायदा उठाने में महारत थी। वह दुश्मन के पहले वार का इंतजार करता। इससे वह उसकी कमजोरी का पता लगाता। फिर पूरी निर्ममता, शेर की ताकत और बिजली की गति से उस पर पलटवार करता। यानी, पहला वार तो उसका दुश्मन करता लेकिन आखिरी वार इस युवा लड़ाके का ही होता था। *अपने शुभचिंतकों और शिष्यों की चिंता और सलाह को नजरअंदाज करते हुए बूढ़े योद्धा ने युवा लड़ाके की चुनौती कबूल की। जब दोनों आमने-सामने आए तो युवा लड़ाके ने महान योद्धा को अपमानित करना शुरू किया। उसने बूढ़े योद्धा के ऊपर रेत-मिट्टी फेंकी। चेहरे पर थूका भी। बूढ़े योद्धा को गालियां देता रहा। जितने तरीके से संभव था, उतने तरीके से उसे अपमानित किया। लेकिन बूढ़ा योद्धा शांतचित्त, एकाग्र और अडिग रहा और उसके प्रत्येक क्रियाकलाप को पैनी नज़रों से देखता रहा । *युवा लड़ाका थकने लगा। अंतत: अपनी हार सामने देखकर वह शर्मिंदगी के मारे भाग खड़ा हुआ। *बूढ़े योद्धा के कुछ शिष्य इस बात से नाराज और निराश हुए कि उनके गुरु ने गुस्ताख युवा लड़ाके से युद्ध नहीं किया। उसे सबक नहीं सिखाया। इन शिष्यों ने गुरु को घेर लिया और सवाल किया, 'आप इतना अपमान कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? आपने उसे भाग जाने का मौका कैसे दे दिया?’ *महान योद्धा ने जवाब दिया, ‘यदि कोई व्यक्ति आपके लिए कुछ उपहार लाए, लेकिन आप लेने से इनकार कर दें। तब यह उपहार किसके पास रह गया?’देने वाले के पास ही न । *इसी प्रकार साधना में भी कई प्रकार की बाधाएं आएँगी उनसे लड़ने में अपनी शक्ति न गवाएं बल्कि कुछ समय मौन रहें साधना में निरन्तरता रखें सहज होने की कोशिश रखें । थोड़े ही समय बाद आप उन परिस्तिथियों से आगे निकल जायेंगे। और हमेशा विजयी ही रहेंगे। साधना से जो बड़ी बात अंदर पैदा होती है वो है असीम शांति जिसके सम्पर्क में आते ही बड़ी से बड़ी आसुरी शक्ति भी अपनी कोशिशें कर के थक जाती हैं और भाग जाती हैं या साधक के शरणागत हो जाती है बस जरूरत है धैर्य की और असीम शांति की। *अगर परिस्तिथिवश कभी लड़ना भी पड़े तो अंदर शांत रहते हुए पूरी परिस्तिथियों को देखते हुए लड़ो बिना क्रोध किये कोई भी शक्ति होगी आपके ऊपर प्रभाव न डाल सकेगी। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *इक्यावन शक्तिपीठों में प्रमुख विन्ध्यवासिनी जी की कथा*..... 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *'भगवती विंध्यवासिनी आद्या महाशक्ति हैं। विन्ध्याचल सदा से उनका निवास-स्थान रहा है। जगदम्बा की नित्य उपस्थिति ने विंध्यगिरिको जाग्रत शक्तिपीठ बना दिया है। *महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति करते हुए कहते हैं- विन्ध्येचैवनग-श्रेष्ठे तवस्थानंहि शाश्वतम्। *हे माता! पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचलपर आप सदैव विराजमान रहती हैं। पद्मपुराण में विंध्याचल-निवासिनी इन महाशक्ति को विंध्यवासिनी के नाम से संबंधित किया गया है- विन्ध्येविन्ध्याधिवासिनी। *श्रीमद्देवीभागवत के दशम स्कन्ध में कथा आती है, सृष्टिकर्ता ब्रह्माजीने जब सबसे पहले अपने मन से स्वायम्भुवमनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। तब विवाह करने के उपरान्त स्वायम्भुव मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर सौ वर्षो तक कठोर तप किया। "उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवती ने उन्हें निष्कण्टक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया। वर देने के बाद महादेवी विंध्याचलपर्वत पर चली गई। *इससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही विंध्यवासिनी की पूजा होती रही है। सृष्टि का विस्तार उनके ही शुभाशीषसे हुआ। *त्रेता युग में भगवान श्रीरामचन्द्र सीताजीके साथ विंध्याचल आए थे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वर महादेव से इस शक्तिपीठ की माहात्म्य और बढ गया है। *द्वापरयुग में मथुरा के राजा कंस ने जब अपने बहन-बहनोई देवकी-वसुदेव को कारागार में डाल दिया और वह उनकी सन्तानों का वध करने लगा। *तब वसुदेवजीके कुल-पुरोहित गर्ग ऋषि ने कंस के वध एवं श्रीकृष्णावतार हेतु विंध्याचल में लक्षचण्डी का अनुष्ठान करके देवी को प्रसन्न किया। जिसके फलस्वरूप वे नन्दरायजीके यहाँ अवतरित हुई। *मार्कण्डेयपुराण के अन्तर्गत वर्णित दुर्गासप्तशती (देवी-माहात्म्य) के ग्यारहवें अध्याय में देवताओं के अनुरोध पर भगवती उन्हें आश्वस्त करते हुए कहती हैं, देवताओं वैवस्वतमन्वन्तर के अट्ठाइसवें युग में शुम्भऔर निशुम्भनाम के दो महादैत्य उत्पन्न होंगे। तब मैं नन्दगोप के घर में उनकी पत्नी यशोदा के गर्भ से अवतीर्ण हो विन्ध्याचल में जाकर रहूँगी और उक्त दोनों असुरों का नाश करूँगी। *लक्ष्मीतन्त्र नामक ग्रन्थ में भी देवी का यह उपर्युक्त वचन शब्दश: मिलता है। ब्रज में नन्द गोप के यहाँ उत्पन्न महालक्ष्मीकी अंश-भूता कन्या को नन्दा नाम दिया गया। मूर्तिरहस्य में ऋषि कहते हैं- नन्दा नाम की नन्द के यहाँ उत्पन्न होने वाली देवी की यदि भक्तिपूर्वक स्तुति और पूजा की जाए तो वे तीनों लोकों को उपासक के आधीन कर देती हैं। *श्रीमद्भागवत महापुराण के श्रीकृष्ण-जन्माख्यान में यह वर्णित है कि देवकी के आठवें गर्भ से आविर्भूत श्रीकृष्ण को वसुदेवजीने कंस के भय से रातोंरात यमुनाजीके पार गोकुल में नन्दजीके घर पहुँचा दिया तथा वहाँ यशोदा के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्मीं भगवान की शक्ति योगमाया को चुपचाप वे मथुरा ले आए। *आठवीं संतान के जन्म का समाचार सुन कर कंस कारागार में पहुँचा। उसने उस नवजात कन्या को पत्थर पर जैसे ही पटक कर मारना चाहा, वैसे ही वह कन्या कंस के हाथों से छूटकर आकाश में पहुँच गई और उसने अपना दिव्य स्वरूप प्रदर्शित किया। कंस के वध की भविष्यवाणी करके भगवती विन्ध्याचल वापस लौट गई। *मन्त्रशास्त्र के सुप्रसिद्ध ग्रंथ शारदातिलक में विंध्यवासिनी का वनदुर्गा के नाम से यह ध्यान बताया गया है- *सौवर्णाम्बुजमध्यगांत्रिनयनांसौदामिनीसन्निभां *चक्रंशंखवराभयानिदधतीमिन्दो:कलां बिभ्रतीम्। *ग्रैवेयाङ्गदहार-कुण्डल-धरामारवण्ड-लाद्यै:स्तुतां *ध्यायेद्विन्ध्यनिवासिनींशशिमुखीं पा‌र्श्वस्थपञ्चाननाम्॥ *अर्थ-जो देवी स्वर्ण-कमल के आसन पर विराजमान हैं, तीन नेत्रों वाली हैं, विद्युत के सदृश कान्ति वाली हैं, चार भुजाओं में शंख, चक्र, वर और अभय मुद्रा धारण किए हुए हैं, मस्तक पर सोलह कलाओं से परिपूर्ण चन्द्र सुशोभित है, गले में सुन्दर हार, बांहों में बाजूबन्द, कानों में कुण्डल धारण किए इन देवी की इन्द्रादि सभी देवता स्तुति करते हैं। *विंध्याचलपर निवास करने वाली, चंद्रमा के समान सुन्दर मुखवाली इन विंध्यवासिनी के समीप सदा शिव विराजित हैं। "सम्भवत:पूर्वकाल में विंध्य-क्षेत्रमें घना जंगल होने के कारण ही भगवती विन्ध्यवासिनीका वनदुर्गा नाम पडा। वन को संस्कृत में अरण्य कहा जाता है। इसी कारण ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी विंध्यवासिनी-महापूजा की पावन तिथि होने से अरण्यषष्ठी के नाम से विख्यात हो गई है। *जय माता की 🥀🥀🙏 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ ☘ यह भी नहीं रहने वाला ☘ *एक साधु देश में यात्रा के लिए पैदल निकला हुआ था। एक बार रात हो जाने पर वह एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका। आनंद ने साधू की खूब सेवा की। दूसरे दिन आनंद ने बहुत सारे उपहार देकर साधू को विदा किया।* *साधू ने आनंद के लिए प्रार्थना की - *"भगवान करे तू दिनों दिन बढ़ता ही रहे।" साधू की बात सुनकर आनंद हँस पड़ा और बोला - "अरे, महात्मा जी! जो है यह भी नहीं रहने वाला।"* साधू आनंद की ओर देखता रह गया और वहाँ से चला गया। *दो वर्ष बाद साधू फिर आनंद के घर गया और देखा कि सारा वैभव समाप्त हो गया है।* पता चला कि आनंद अब बगल के गाँव में एक जमींदार के यहाँ नौकरी करता है। साधू आनंद से मिलने गया। *आनंद ने अभाव में भी साधू का स्वागत किया। *झोंपड़ी में फटी चटाई पर बिठाया। खाने के लिए सूखी रोटी दी। दूसरे दिन जाते समय साधू की आँखों में आँसू थे।* साधू कहने लगा - "हे भगवान् ! ये तूने क्या किया?" *आनंद पुन: हँस पड़ा और बोला - *"महाराज आप क्यों दु:खी हो रहे है? महापुरुषों ने कहा है कि भगवान् इन्सान को जिस हाल में रखे, इन्सान को उसका धन्यवाद करके खुश रहना चाहिए।* समय सदा बदलता रहता है और सुनो! यह भी नहीं रहने वाला।" *साधू मन ही मन सोचने लगा - "मैं तो केवल भेष से साधू हूँ। सच्चा साधू तो तू ही है, आनंद।" *कुछ वर्ष बाद साधू फिर यात्रा पर निकला और आनंद से मिला तो देखकर हैरान रह गया कि आनंद तो अब जमींदारों का जमींदार बन गया है।* मालूम हुआ कि जिस जमींदार के यहाँ आनंद नौकरी करता था वह सन्तान विहीन था, मरते समय अपनी सारी जायदाद आनंद को दे गया। *साधू ने आनंद से कहा - *"अच्छा हुआ, वो जमाना गुजर गया। भगवान् करे अब तू ऐसा ही बना रहे।"* यह सुनकर आनंद फिर हँस पड़ा और कहने लगा - "महाराज! अभी भी आपकी नादानी बनी हुई है।" *साधू ने पूछा - "क्या यह भी नहीं रहने वाला?" *आनंद उत्तर दिया - "हाँ! या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा। कुछ भी रहने वाला नहीं है और अगर शाश्वत कुछ है तो वह है परमात्मा और उस परमात्मा की अंश आत्मा।"* *आनंद की बात को साधू ने गौर से सुना और चला गया। *साधू कई साल बाद फिर लौटता है तो देखता है कि आनंद का महल तो है किन्तू कबूतर उसमें गुटरगूं कर रहे हैं, और आनंद का देहांत हो गया है। बेटियाँ अपने-अपने घर चली गयीं, बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है।* *साधू कहता है - *"अरे इन्सान! तू किस बात का अभिमान करता है? क्यों इतराता है? यहाँ कुछ भी टिकने वाला नहीं है, दु:ख या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता।* तू सोचता है पड़ोसी मुसीबत में है और मैं मौज में हूँ। लेकिन सुन, न मौज रहेगी और न ही मुसीबत। सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा। सच्चे इन्सान वे हैं, जो हर हाल में खुश रहते हैं। *मिल गया माल तो उस माल में खुश रहते हैं, और हो गये बेहाल तो उस हाल में खुश रहते हैं।"* *साधू कहने लगा - *"धन्य है आनंद! तेरा सत्संग, और धन्य हैं तुम्हारे सतगुरु! मैं तो झूठा साधू हूँ, असली फकीरी तो तेरी जिन्दगी है।* अब मैं तेरी तस्वीर देखना चाहता हूँ, कुछ फूल चढ़ाकर दुआ तो मांग लूं।" *साधू दूसरे कमरे में जाता है तो देखता है कि आनंद ने अपनी तस्वीर पर लिखवा रखा है - "आखिर में यह भी नहीं रहेगा।"* 💖💗💖🙏 Jai Shri Radhe Krishna 🙏💖💗💖

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Giridhar Lal Apr 3, 2020

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Babita Sharma Apr 3, 2020

जब भाग्य और कर्म से बात नहीं बनती है, तो इन्सान को सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड़ देना चाहिये ईश्वर अपने बन्दों के बारे में बेहतर सोचता है… 🙏🙏 खूबसूरत दिन आप सभी के लिए खुशियां लाए ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है🙏🙏हंसते रहिए मुस्कुराते रहिए 🌷🌹🌷Have A cheerful Day जय माता दी 🚩 शुभ शुक्रवार आत्मा का संकेत – ईश्वर की प्रेरणा एक बार एक बुढ़िया माथे पर कपड़े व गहनों की गठरी और साथ में छोटी सी बेटी को लेकर एक गाँव से दुसरे गाँव जा रही थी । चलते चलते वह कुछ ही दूर पहुँची होगी कि पीछे से एक घुड़सवार आया । घुड़सवार को अकेला देख बुढ़िया ख़ुशी से बोली – “ बेटा ! आज बहुत धुप है और गर्मी भी बहुत है, यदि तुझे कोई आपत्ति ना हो तो इस गठरी और मेरी बेटी को अपने घोड़े पर बिठाकर अगले गाँव छोड़ देगा ?” घुड़सवार बोला – “ ना माई ! इतना वजन मेरा घोड़ा नहीं संभाल पायेगा ।” इतना कहकर घुड़सवार आगे बढ़ गया । कुछ दूर जाने के बाद घुड़सवार के मन में कपट आया । उसने सोचा – “ बुढ़िया की बेटी बड़ी ही सुन्दर है और हो ना हो उस गठरी में कुछ कीमती सामान होगा । अगर मैं उसे लेकर कहीं बेच भी दूँ तो बुढ़िया मेरा क्या बिगाड़ लेगी ।” ऐसा सोचकर वह वही पर ठहर गया । इधर बुढ़िया के मन में भी प्रेरणा हुई कि “ रे मूरख ! वो घुड़सवार क्या तेरा रिश्तेदार लगता है जो उसके साथ अपनी फूल सी बेटी और गहनों की गठरी देने लगी थी । वो तो भगवान का शुक्र है जो उसने मना कर दिया । वरना वो कहीं लेकर चला जाता तो ।।।।।।।राम राम ।” यह सोचकर बुढ़िया की रूह कांप गई । तभी बुढ़िया और उसकी बेटी वहाँ पहुँच गई जहाँ घुड़सवार उनका इंतजार कर रहा था । घुड़सवार बोला – “ माई ! धुप बहुत है, ला दे अपनी गठरी और बिठा दे अपनी बेटी को ।” बुढ़िया बोली – “ नहीं ! तू जा हम चले आएंगे ।” घुड़सवार बोला – “ क्या हुआ माई, अब मन कैसे बदल गया ?” बुढ़िया बोली – “ वैसे ही जैसे तेरा मन बदल गया ।” यह सुनकर घुड़सवार शर्मिंदा होकर वहाँ से चल दिया । शिक्षा – ईश्वर अपने विश्वास करने वालों को हमेशा अच्छी प्रेरणा देता है । हमेशा उन्हें सजग करता है और ईश्वर केवल प्रेरणा ही नही देता, आवश्यकता पड़ने पर सहायता भी करता है । जय माता दी 🚩

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RAMDEV RARHORIA Apr 3, 2020

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