Jai Shri Krishna

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🙏 बाल #कृष्ण लीला🙏

🐚अघासुर का उद्धार🐚

🔔एक दिन नन्दनंदन श्यामसुन्दर वन में कलेवा करने के विचार से, बड़े तडके उठ गये, और सिंगी की मधुर ध्वनि से अपने साथी ग्वालबालो को मन की बात जनाते हुए जगाया और बछडो को आगे करके, वे ब्रजमंडल से निकल पड़े. श्रीकृष्ण के साथ ही उनके प्रेमी सहस्त्रो ग्वालबाल छीके, बेत, सिंगी और बाँसुरी, लेकर, घरों से चल पड़े, फिर उन्होंने वृन्दावन के लाल-पीले-हरे फलो से, नयी-नयी कोपलों से गुच्छों से, रंग-बिरंगे फूलों से, मोरपंखो से, और गेरु आदि रंगीन धातुओ से अपने को सजा लिया. कोई किसी का बेत या बाँसुरी चुरा लेता, एक दूसरे की तरफ फेक देते, फिर वापस लौटा देते, कोई भौरों के साथ गुनगुना रहा है, कोई कोयलो के स्वर-में-स्वर मिलकर कुहू-कुहू कर रहे है, कोई मोरो को देखकर नाचता, कोई बंदरों की पूंछ पकड़कर खीच रहे है,

🔔भगवान श्रीकृष्ण ज्ञानी संतो के लिए स्वयं ब्रह्मानंद के मूर्तिमान अनुभव है दास्यभाव से युक्त भक्त के लिए वे आराध्येदेव देव परम ऐश्वर्येशाली परमेश्वर है.बहुत जन्मो का श्रम और कष्ट उठाकर जिन्होंने अपनी इन्द्रियों और अन्तःकरण को वश में कर लिया है उन योगियों के लिए भगवान के चरण कमलों की रज अप्राप्त है.वही भगवान स्वयं ब्रजवासी ग्वालबाल की आँखों के सामने रहकर सदा खेल खेलते है. कभी उनके कंधे पर चढ़ जाते है, कभी किसी के गले से लग जाते है, उनके सौभाग्य की महिमा इससे अधिक क्या कही जाये.

🔔इसी समय अघासुर नाम का महान दैत्य आ गया. उससे श्रीकृष्ण और ग्वालबालो की सुखमयी क्रीडा देखी ना गयी, वह इतना भयानक था, कि देवता भी उसकी मृत्यु की बाट देखते रहते थे, वह पूतना और बकासुर का छोटा भाई, कंस का भेजा हुआ था. श्रीकृष्ण को देखकर वह सोचने लगा कि यह ही मेरे भाई बहिन को मारने वाला है इसे मार दूँगा. यह सोचकर वह अजगर का रूप धारण करके मार्ग में लेट गया,उसका वह शरीर एक योजन लंबे बड़े पर्वत के समान विशाल एवं मोटा था,वह बहुत ही अदभुद था.उसकी नियत सब बालको की निगलने की थी इसलिए उसने गुफा के समान अपना बहुत बड़ा मुहँ फाड़ रखा था उसका नीचे का होठ पृथ्वी, और ऊपर का होठ बादलों से लग रहा था, उसके जबड़े कंदराओ के समान थे, और दाढे पर्वत के शिखर-सी जान पड़ती थी,जीभ एक चौड़ी लाल सड़क-सी दीखती थी,साँस आँधी के समान थी.अघासुर का रूप देखकर बालको ने समझा कि यह भी वृन्दावन की शोभा है .वे कौतुकवश खेल-खेल में उत्प्रेक्षा करने लगे –वे कहने लगे कि ये तो अजगर का खुला हुआ मुहँ है.इस प्रकार कहते हुए वे ग्वालबाल श्रीकृष्ण का सुन्दर मुख देखते और ताली पीट-पीटकर एक गुफा समझकर,अधासुर के मुहँ में चले गये.

🔔उन अनजान बच्चो की आपस में की हुई भ्रमपूर्ण बाते सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने सोच कि-‘अरे इन्हें तो सच्चा सर्प भी झूठा प्रतीत होता है ‘.भगवान जान गये कि यह राक्षस है भला उनसे क्या छिपा है ?सब ग्वालबाल अघासुर के पेट में चले गये.पर उसने उन्हें निगला नहीं क्योकि वह इस बात की बाट देख रहा था कि श्री कृष्ण मुहँ में आ जाये तब सबको एक साथ निगल जाऊँगा .भगवान भूत-भविष्य-वर्त्तमान,सबको प्रत्यक्ष देखते रहते है वे स्वयं उसके मुहँ में घुस गये .अघासुर बछडो और ग्वालो के सहित भगवान श्रीकृष्ण को अपनी दाढ़ो से चबाकर चूर-चूरकर डालना चाहता था.परन्तु उसी समय अविनाशी श्रीकृष्ण ने बड़ी फुर्ती से अपना शरीर बढ़ा लिया .इसके बाद भगवान ने अपने शरीर को इतना बड़ा कर लिया कि उसका गला ही रुँध गया .वह व्याकुल होकर बहुत ही छटपटाने लगा साँस रुककर सारे शरीर में भर गयी .और अंत में उसके प्राण ब्रहारंध्र फोडकर निकल गये.उसी समय भगवान ने बछडो और ग्वालबालो को जिला दिया और उन सबको साथ लेकर वे अघासुर के मुहँ से बाहर निकल गये उस अजगर के स्थूल शरीर से एक अत्यंत अद्भुत और महान ज्योति निकली, और भगवान में समां गयी.

🌿सार🌿

🔔यह लीला भगवान ने पाँच वर्ष में ही की थी अघासुर पाप का स्वरुप था भगवान के स्पर्श मात्र से सके सारे पाप धुल गये और उसे उस ‘सारूप्य मुक्ति’प्राप्त हुई“भगवान श्रीकृष्ण के किसी एक अंग की भावनिर्मित प्रतिमा यदि ध्यान के द्वारा एक बार भी हृदय में बैठा ली जाये तो वह सालोक्य, सामीप्य, आदि गति दान करती है.भगवान आतामानंद के नित्य साक्षत्कारस्वरुप है माया उनके पास फटक नहीं पाती.वे ही स्वयं अघासुर के शरीर में प्रवेश कर गये. क्या अब भी उसकी सदगति के विषय में कोई संदेह है ? .

🙌🏻🙌🏻“ जय जय श्री राधे"🙌🏻🙌🏻 Jai Shri Krishna

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कामेंट्स

Arun Jha Jan 27, 2020

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champalal m kadela Jan 26, 2020

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shellykhanna Jan 26, 2020

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PDJOSHI Jan 26, 2020

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Jaipanday Panday Jan 25, 2020

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Gopal Jalan Jan 25, 2020

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Sonu Tomar Jan 25, 2020

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