MANOJKUMAR SRIVASTAVA
MANOJKUMAR SRIVASTAVA Sep 23, 2020

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ढाई अक्षर प्रेम के पढ़ें सो पंडित होय,, ढाई अक्षर ढाई अक्षर का वक्र, और ढाई अक्षर का तुण्ड, ढाई अक्षर की रिद्धि, और ढाई अक्षर की सिद्धि, ढाई अक्षर का शम्भु, और ढाई अक्षर की सत्ती, ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि, ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी, ढाई अक्षर के कृष्ण और ढाई अक्षर की कान्ता (राधा रानी का दूसरा नाम) ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति, ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति, ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान, ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा, ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म, ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा, ढाई अक्षर का ग्रन्थ, और ढाई अक्षर का सन्त, ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ, ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या, ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि, ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड, ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र, ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण, ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु, ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी, ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध, ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु, ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा, जन्म से लेकर मृत्यु तक हम बंधे हैं ढाई अक्षर में, हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में, और ढाई अक्षर ही अन्त में, समझ न पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में, ( अज्ञात ) हर हर महादेव जय शिव शंकर

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Neha Sharma, Haryana Oct 24, 2020

.*राम से रामचन्द्र ( श्री कदम्ब रामायण ) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ *जब भगवान का प्राकट्य अयोध्या जी में हुआ तो सूर्य नारायण भगवान बड़े प्रसन्न हुए, कि मेरे वंश में भगवान का प्राकट्य हो गया, और आनंद में भर कर एक क्षण के लिए रुक गए। *सूर्य कि गति कभी नहीं रुकती परन्तु एक क्षण को रुकी गई, जब देखा राजभवन में अति कोमल वाणी से वेद ध्वनि हो रही है, अबीर गुलाल उड़ रहा है, अयोध्या में उत्सव को देखकर सूर्य भगवान अपना रथ हाँकना ही भूल गए। *मास दिवस कर दिवस भा मरम ना जनाइ कोइ *रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन विधि होइ *अर्थात् – महीने भर का दिन हो गया, इस रहस्य को कोई नहीं जानता, सूर्य अपने रथ सहित वही रुक गए फिर रात किस तरह होती। *सब जगह आनंद ही आनंद छाया था परन्तु चंद्रमा रो रहे थे। *भगवान ने पूछा – चन्द्रमा ! सब ओर आनंद छाया है, क्या मेरे प्राकट्य पर तुम्हे प्रसन्नता नहीं हुई..? *चन्द्रमा बोला – प्रभु ! सब तो आपके दर्शन कर रहे है इसलिए प्रसन्न है परन्तु मै कैसे दर्शन करूँ ? *प्रभु बोले- क्यों, क्या बात है ? *चंद्रमा बोले – आज तो सूर्य नारायण हटने का नाम ही नहीं ले रहे और जब तक वे हटेगे नहीं मै कैसे आ सकता हूँ, *प्रभु बोले थोडा इंतजार कर ! अभी सूर्य की बारी है उनके ही वंश में जनम लिया है न इसलिए आनंद समाता नहीं है उनका, अगली बार चन्द्र वंश में आऊंगा, अभी दिन के बारह बजे आया फिर रात के बारह बजे आऊंगा तब जी भर के दर्शन करना, तब तक आप इंतजार करो ? *चंद्र बोले – प्रभु ! द्वापर के लिए बहुत समय है, तब तक मेरा क्या होगा, में तो इंतजार करते-करते मर ही जाऊँगा ? *भगवान बोले – कोई बात नहीं में अपने नाम के साथ तुम्हारा नाम जोड़ लेता हूँ, रामचंद्र, सभी मुझे रामचंद्र कहेगे, *सूर्य वंश में जन्म लिया है, फिर भी कोई मुझे रामसिह तो नहीं कहेगा, और जिसके नाम के आगे मै हूँ, वह कैसे मर सकता है, *वह तो अमर हो जाता है, इसलिए तुम भी अब कैसे मरोगे, इतना सुनते ही चंद्रमा बड़ा प्रसन्न हुआ। ।। जय जय सियाराम ।। ~~~~~~~~~~~~ "रावण"...... ०१. रावण के दादाजी का नाम प्रजापति पुलत्स्य था जो ब्रह्मा जी के दस पुत्रों में से एक थे। इस तरह देखा जाए तो रावण ब्रह्मा जी का पडपौत्र हुआ जबकि उसने अपने पिताजी और दादाजी से हटकर धर्म का साथ न देकर अधर्म का साथ दिया था। ०२. हिन्दू ज्योतिषशास्त्र में रावण संहिता को एक बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रावण संहिता की रचना खुद रावण ने की थी। ०३. रामायण में एक जगह यह भी बताया गया है कि रावण में भगवान राम के लिए यज्ञ किया था। वो यज्ञ करना रावण के लिए बहुत जरुरी था, क्योंकि लंका तक पहुँचने के लिए जब राम जी की सेना ने पुल बनाना शुरू किया था, तब शिवजी का आशीर्वाद पाने से पहले उसको राम जी का आराधना करनी पड़ी थी। ०४. रावण तीनो लोको का स्वामी था और उसने न केवल इंद्र लोक पर नही बल्कि भूलोक के भी एक बड़े हिस्से को अपने असुरो की ताकत बढाने के लिए कब्जा किया था। ०५. रावण अपने समय का सबसे बड़ा विद्वान माना जाता है और रामायण में बताया गया है कि जब रावण मृत्यु शय्या पर लेटा हुआ था तब राम जी ने लक्ष्मण को उसके पास बैठने को कहा था ताकि वो मरने से पहले उनको राजपाट चलाने और नियन्त्रण करने के गुर सीखा सके। ०६. रावण के कुछ चित्रों में आपने उनको वीणा बजाते हुए देखा होगा। एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण को संगीत का बहुत शौक था। उअर और वीणा बजाने में बहुत माहिर था। ऐसा कहा जाता है कि रावण वीणा इतनी मधुर बजाता था कि देवता भी उसका संगीत सुनने के लिए धरती पर आ जाते थे। ०७. ऐसा माना जाता है कि रावण इतना शक्तिशाली था कि उसने नवग्रहों को अपने अधिकार में ले लिया था। कथाओं में बताया जाता है कि जब मेघनाथ का जन्म हुआ था तब रावण ने ग्रहों को 11वें स्थान पर रहने को कहा था, ताकि उसे अमरता मिल सके। लेकिन शनिदेव ने ऐसा करने से मना कर दिया और 12वें स्थान पर विराजमान हो गये। रावण इससे इतना नाराज हुआ कि उसें शनिदेव पर आक्रमण कर दिया था और यहाँ तक कि कुछ समय के लिए बंदी भी बना लिया था। ०८. रावण ये जनता था कि उसकी मौत विष्णु के अवतार के हाथों लिखी हुयी है, और ये भी जानता था कि विष्णु के हाथों मरने से उसको मोक्ष की प्राप्ति होगी, और उसका असुर रूप का विनाश होगा। ०९. हमने रावण के 10 सिरों से जुड़ी कहानी कि जब रावण शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तप कर रहा था तब रावण ने खुद अपने सिर को धड से अलग कर दिया था। जब शिवजी ने उसकी भक्ति देखी तो उससे प्रसन्न होकर हर टुकड़े से एक सिर बना दिया था जो उसके दस सर थे। १०. शिवजी ने ही रावण को रावण नाम दिया था। ऐसा कथाओं में बताया जाता है कि रावण शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था। लेकिन शिवजी राजी नही थे तो उसने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया। इसलिए शिवजी ने अपना एक पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया। जिससे रावण की हाथ दब गया था। दर्द के मारे रावण जोर से चिल्लाया, लेकिन शिवजी की ताकत को देखते हुए उसने शिव तांडव किया था। शिवजी को ये बहुत अजीब लगा कि दर्द में होते हुए भी उसने शिव तांडव किया तो उसका नाम रावण रख दिया जिसका अर्थ था जो तेज आवाज में दहाड़ता हो। ११. जब रावण युद्ध में हार रहा था और अपनी से तरफ से अंतिम शेष प्राणी जब वही बचा था। तब रावण ने यज्ञ करने का निश्चय किया जिससे तूफ़ान आ सकता था। लेकिन यज्ञ के लिए उसको पूरे यज्ञ के दौरान एक जगह बैठना जरुरी था। जब राम जी को इस बारे में पता चल तो राम जी ने बाली पुत्र अंगद को रावण का यज्ञ में बाधा डालने के लिए भेजा। कई प्रयासों के बाद भी अंगद यज्ञ में बाधा डालने में सफल नही हुआ। तब अंगद इस विश्वास से रावण की पत्नी मन्दोदरी को घसीटने लगा कि रावण ये देखकर अपना स्थान छोड़ देगा लेकिन वो नही हिला। तब मन्दोदरी रावण के सामने चिल्लायी और उसका तिरस्कार किया, और राम जी का उदाहरण देते हुए कहा कि “एक राम है जिसने अपनी पत्नी के युद्ध किया और दुसरी तरह आप है जो अपनी पत्नी को बचाने के लिए अपनी जगह से नही हिल सकते।" यह सुनकर अंत में रावण उस यज्ञ को पूरा किये बिना वहाँ से उठ गया था। १२. रावण और कुंभकर्ण वास्तव में विष्णु भगवान के द्वारपाल जय और विजय थे। जिनको एक ऋषि से मिले श्राप के कारण राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था, और अपने ही आराध्य से उनको लड़ना पड़ा था। १३. राम-रावण के बातचीत में एक बार राम जी ने रावण को महा-ब्राह्मण कहकर पुकारा था। क्योंकि रावण 64 कलाओं में निपुण था जिसके कारण उसे असुरो में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बनाया था। १४. ऐसा कहा जाता है कि एक बार रावण महिलाओं के प्रति बहुत जल्द आसक्त होता था। अपनी इसी कमजोरी के कारण जब वो नालाकुरा की पत्नी को अपने वश में करने की कोशिश करता है वो स्त्री उनको श्राप देती है कि रावण अपने जीवन किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के बिना स्पर्श नही कर सकता वरना उसका विनाश हो जाएगा। यही कारण था कि रावण ने सीता को नही छुआ था। १५. रावण को अपने दस सिरों की वजह से दशग्रीव कहा जाता है जो उसकी अद्भुत बुद्धिमता को दर्शाता है। १६. रावण अपने समय का विज्ञान का बहुत बड़ा विद्वान भी था जिसका उदाहरण पुष्पक विमान था जिससे पता चलता है कि उसे विज्ञान की काफी परख थी। १७. भारत का क्लासिकल वाद्य यंत्र रूद्र वीणा की खोज रावण ने ही की थी। रावण शिवजी का बहुत बड़ा भक्त था और दिन रात उनकी आराधना करता रहता था। रावण के बहुत से नाम थे जिसमे दशानन सबसे लोकप्रिय नाम था। भारत और श्रीलंका में ऐसी कई जगह है जहाँ पर रावण की पूजा होती है। १८. कुछ लोग ऐसा मानते है कि लाल किताब का असली लेखक रावण ही था। ऐसा कहा जाता है कि रावण अपने अहंकार की वजह से अपनी शक्तियों को खो बैठा था। और उसने लाल किताब का प्रभाव खो दिया था, जो बाद में अरब में पायी गये थी जिसे बाद में उर्दू और पारसी में अनुवाद किया गया था। १९. रावण बाली से एक बार पराजित हो चुका था। कहानी इस प्रकार है कि बाली को सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त था, और रावण शिवजी से मिले वरदान के अहंकार से बाली को चुनौती दे बैठा। बाली ने शुरुआत ने ध्यान नही दिया, लेकिन रावण ने जब उसको ज्यादा परेशान किया तो बाली ने रावण के सिर को अपनी भुजाओं में दबा लिया और उड़ने लगा। उसने रावण को 6 महीने बाद ही छोड़ा ताकि वो सबक सीख सके। २०. लंका का निर्माण विश्वकर्मा जी ने किया था और जब उस पर रावण के सौतेले भाई कुबेर का कब्जा था। जब रावण तपस्या से लौटा था तब उसने कुबेर से पूरी लंका छीन ली थी। ऐसा कहा जाता है उसके राज में गरीब से गरीब का घर भी उसने सोने का कर दिया था। जिसके कारण उसकी लंका नगरी में खूब ख्याति थी। २१. दक्षिणी भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में रावण की पूजा की जाती है। और अनेको संख्या में उसके भक्त है। कानपुर में कैलाश मन्दिर में साल में एक बार दशहरे के दिन खुलता है। जहाँ पर रावण की पूजा होती है। इसके अलावा रावण को आंध्रप्रदेश और राजस्थान के भी कुछ हिस्सों में पूजा जाता था। ----------:::×:::---------- "जय श्री राम" *******************************************

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Gopal Jalan Oct 24, 2020

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sanjay Awasthi Oct 24, 2020

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jyotipandey94 Oct 24, 2020

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आशुतोष Oct 24, 2020

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आशुतोष Oct 24, 2020

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