karam
karam May 9, 2020

🌹❤ प्रभु की प्राप्ति प्रेम करने वालों को ही होती है 🌹❤ 🙏 राधे ही राधे ❤ 🌹 ❤ 🌹 ❤ 🌹 ❤ 🌹 ❤ 🌹

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कामेंट्स

Babita Sharma May 9, 2020
सुप्रभात नमन भाई 🙏 ॐ रां रामाय नमः ॐ हं हनुमंते नमः श्री बालाजी महाराज की कृपादृष्टि आपके समस्त परिवार पर बनी रहे।श्री शनिदेव सदा आपका मंगल करें।

karam May 9, 2020
@babitasharma2 ji 🌷 🌷 🌷 ❤ 🙏 शुभ प्रभात वंदन बहन ❤ 🌹 ❤ ऊँ रां रामाय नमः ❤ 🌹 ऊँ हं हनुमते नमः ❤ 🌹 श्री बालाजी महाराज की कृपा और आप का अनुराग अविस्मरणीय है बहन 🌷 🌷 in this sphere you're my inspiration which will be guided in my life ❤ ढेर सारी मंगल कामनाओ सहित शुभ दिन

Meena Sharma May 10, 2020

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ǟռʝʊ ʝօֆɦɨ May 10, 2020

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Raysang May 10, 2020

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R.G.P.Bhardwaj May 10, 2020

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[#चनों_का_रहस्य 👇 . एक ब्राह्मणी थी जो बहुत निर्धन थी। भिक्षा माँग कर जीवन-यापन करती थी। . एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिच्छा नहीं मिली। वह प्रति दिन पानी पीकर भगवान का नाम लेकर सो जाती थी। . छठवें दिन उसे भिक्षा में दो मुट्ठी चना मिले। कुटिया पे पहुँचते-पहुँचते रात हो गयी। . ब्राह्मणी ने सोंचा अब ये चने रात मे नही खाऊँगी प्रात:काल वासुदेव को भोग लगाकर तब खाऊँगी । . यह सोंचकर ब्राह्मणी ने चनों को कपडे़ में बाँधकर रख दिया और वासुदेव का नाम जपते-जपते सो गयी . देखिये समय का खेल... कहते हैं... . पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान । . ब्राह्मणी के सोने के बाद कुछ चोर चोरी करने के लिए उसकी कुटिया मे आ गये। . इधर उधर बहुत ढूँढा, चोरों को वह चनों की बँधी पुटकी मिल गयी। चोरों ने समझा इसमें सोने के सिक्के हैं । . इतने मे ब्राह्मणी जाग गयी और शोर मचाने लगी । . गाँव के सारे लोग चोरों को पकडने के लिए दौडे़। चोर वह पुटकी लेकर भागे। . पकडे़ जाने के डर से सारे चोर संदीपन मुनि के आश्रम में छिप गये। . संदीपन मुनि का आश्रम गाँव के निकट था जहाँ भगवान श्री कृष्ण और सुदामा शिक्षा ग्रहण कर रहे थे. . गुरुमाता को लगा कि कोई आश्रम के अन्दर आया है। गुरुमाता देखने के लिए आगे बढीं तो चोर समझ गये कोई आ रहा है, . चोर डर गये और आश्रम से भागे ! भागते समय चोरों से वह पुटकी वहीं छूट गयी। और सारे चोर भाग गये। . इधर भूख से व्याकुल ब्राह्मणी ने जब जाना ! कि उसकी चने की पुटकी चोर उठा ले गये । . तो ब्राह्मणी ने श्राप दे दिया कि... मुझ दीनहीन असहाय के जो भी चने खायेगा वह दरिद्र हो जायेगा। . उधर प्रात:काल गुरु माता आश्रम मे झाडू़ लगाने लगीं तो झाडू लगाते समय गुरु माता को वही चने की पुटकी मिली । . गुरु माता ने पुटकी खोल के देखी तो उसमे चने थे। . सुदामा जी और कृष्ण भगवान जंगल से लकडी़ लाने जा रहे थे। ( रोज की तरह ) गुरु माता ने वह चने की पुटकी सुदामा जी को दे दी। . और कहा बेटा ! जब वन मे भूख लगे तो दोनो लोग यह चने खा लेना । . सुदामा जी जन्मजात ब्रह्मज्ञानी थे। ज्यों ही चने की पुटकी सुदामा जी ने हाथ में लिया त्यों ही उन्हे सारा रहस्य मालुम हो गया । . सुदामा जी ने सोचा ! गुरु माता ने कहा है यह चने दोनों लोग बराबर बाँट के खाना। . लेकिन ये चने अगर मैंने त्रिभुवनपति श्री कृष्ण को खिला दिये तो सारी शृष्टी दरिद्र हो जायेगी। . नहीं-नहीं मैं ऐसा नही करुँगा। मेरे जीवित रहते मेरे प्रभु दरिद्र हो जायें मै ऐसा कदापि नही करुँगा । . मैं ये चने स्वयं खा जाऊँगा लेकिन कृष्ण को नहीं खाने दूँगा। . और सुदामा जी ने सारे चने खुद खा लिए। . दरिद्रता का श्राप सुदामा जी ने स्वयं ले लिया। चने खाकर। लेकिन अपने मित्र श्री कृष्ण को एक भी दाना चना नही दिया। ऐसे होते हैं मित्र.. . मित्रों ! आपसे निवेदन है कि अगर मित्रता करें तो सुदामा जी जैसी करें और कभी भी अपने मित्रों को धोखा ना दें.. #राधा_रमण ❣️❣️ #तुम्हारा_याद_आना_भी_बड़ा #कमाल_होता_है,,,💓 #कभी_देखना_आकर, #के,😭 #हमारा_क्या_हाल_होता_है!!😭 💞जय जय श्री राधे 💞 💞💗जय श्री कृष्णा💗💞

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🌹🌹🌹🙏हैप्पी मदर्स डे 🙏🌹🌹🌹 जैसा कि हम जानते हैं कि मां हमारे लिए देवताओं से सबसे मधुर उपहार हैं और ऐसा कोई तरीका नहीं है कि हम कभी भी हमारी मां के लिए हमारी मां का धन्यवाद कर सकें। यह परिवार और समाज में उनके योगदान के लिए माताओं, दादी और दादी को सम्मानित करने का समय है। मातृ दिवस हम में से कई लोगों के लिए सबसे अधिक प्रतीक्षित दिन है क्योंकि यह हमारी प्यारी मां की ओर प्यार और देखभाल दिखाने का सबसे दिल-वार्मिंग अवसर है। आज के इस पोस्ट में हम आपको आँख खोलू तो चेहरा मेरी माँ का हो आँख बंद हो तो सपना मेरी माँ का हो मैं मर भी जाऊं तो भी कोई गम नहीं लेकिन कफ़न मिले तो दुपट्टा मेरी माँ का हो!! ऐ मेरे मालिक तूने गुल को गुलशन में जगह दी, पानी को दरिया में जगह दी, पंछियो को आसमान मे जगह दी, तू उस शख्स को जन्नत में जगह देना, जिसने मुझे “..नौ..” महीने पेट में जगह दी….!! ये कहकर मंदिर से फल की पोटली चुरा ली माँ ने…. तुम्हे खिलाने वाले तो और बहुत आ जायगे गोपाल… मगर मैने ये चोरी का पाप ना किया तो भूख से मर जायेगा मेरा लाल…!

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