Anita Sharma
Anita Sharma Mar 27, 2020

+24 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 4 शेयर

कामेंट्स

Ranveer Soni Mar 27, 2020
🌹🌹🌹🌹🌹Jai Shree Radhe Krishna🌹🌹🌹🌹🌹

savi chaudhary May 11, 2020

+36 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 50 शेयर
Sarla rana May 10, 2020

🌼🌼🥀एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले,🥀🌼🌼 “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते हैं !” .. तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!, मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” .. तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जाप थोड़े ही ना करते हैं !” .. तो माता लक्ष्मी बोली कि , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!” ..भगवान नारायण एक गाँव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के है ?” तो …भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा-कीर्तन करना चाहते है…” .. यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहना…” … गाँव के कुछ लोग इकट्ठा हो गये और सब तैयारी कर दी….पहले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी ! दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..की कितनी भक्ति है लोगो में….! लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाये कि क्या चल रहा है। .. लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी कि माता उसके द्वार पर पहुंची ! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!” तो वो महिला बोली,”माताजी , साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!” .. लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहुत प्यास लगी है..” तो वो महिला लौटा भर के पानी लायी….माता ने पानी पिया और लौटा वापिस लौटाया तो सोने का हो गया था!! .. यह देख कर महिला अचंभित हो गयी कि लौटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का ! कैसी चमत्कारिक माता जी हैं !..अब तो वो महिला हाथ-जोड़ कर कहने लगी कि, “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना खा लीजिये..!” ये सोचा कि खाना खाएगी तो थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास आदि भी सोने के हो जायेंगे। माता लक्ष्मी बोली, “तुम जाओ बेटी, तुम्हारा प्रवचन का टाइम हो गया!” .. वह महिला प्रवचन में आई तो सही … लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी…. .. अब महिलायें यह बात सुनकर चालू सत्संग में से उठ कर चली गयी !! अगले दिन से कथा में लोगों की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा कि, “लोगो की संख्या कैसे कम हो गयी ?” …. किसी ने कहा, ‘एक चमत्कारिक माताजी आई हैं नगर में… जिस के घर दूध पीती हैं तो गिलास सोने का हो जाता है,…. थाली में रोटी सब्जी खाती हैं तो थाली सोने की हो जाती है !… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..” .. भगवान नारायण समझ गए कि लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है! इतनी बात सुनते ही देखा कि जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए! .. पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास ! बोले, “ माता, मैं तो भगवान की कथा का आयोजन कर रहा था और आप ने मेरे घर को ही छोड़ दिया !” माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहले आनेवाली थी ! लेकिन तुमने अपने घर में जिस कथा कार को ठहराया है ना , वो चला जाए तभी तो मैं आऊं !” सेठ जी बोले, “बस इतनी सी बात !… अभी उनको धर्मशाला में कमरा दिलवा देता हूँ !” .. जैसे ही महाराज (भगवान्) कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोले, “ " महाराज आप अपना बिस्तर बांधो ! आपकी व्यवस्था अबसे धर्मशाला में कर दी है !!” महाराज बोले, “ अभी तो 2/3 दिन बचे है कथा के…..यहीं रहने दो” सेठ बोले, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ ! मैं कुछ नहीं सुनने वाला ! किसी और मेहमान को ठहराना है। ” .. इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा कि, “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!” माता लक्ष्मी जी भगवान् से बोली, “ " प्रभु , अब तो मान गए?” भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी कि तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!” यह कह कर नारायण भगवान् ने वहां से बैकुंठ के लिए विदाई ली। अब प्रभु के जाने के बाद अगले दिन सेठ के घर सभी गाँव वालों की भीड़ हो गयी। सभी चाहते थे कि यह माता सभी के घरों में बारी 2 आये। पर यह क्या ? लक्ष्मी माता ने सेठ और बाकी सभी गाँव वालों को कहा कि, अब मैं भी जा रही हूँ। सभी कहने लगे कि, माता, ऐसा क्यों, क्या हमसे कोई भूल हुई है ? माता ने कहा, मैं वही रहती हूँ जहाँ नारायण का वास होता है। आपने नारायण को तो निकाल दिया, फिर मैं कैसे रह सकती हूँ ?’ और वे चली गयी। शिक्षा : जो लोग केवल माता लक्ष्मी को पूजते हैं, वे भगवान् नारायण से दूर हो जाते हैं। अगर हम नारायण की पूजा करें तो लक्ष्मी तो वैसे ही पीछे 2 आ जाएँगी, क्योंकि वो उनके बिना रह ही नही सकती । ✅ 🅾जहाँ परमात्मा की याद है। वहाँ लक्ष्मी का वास होता है। केवल लक्ष्मी के पीछे भागने वालों को न माया मिलती ना ही राम।🅾 सम्पूर्ण पढ़ने के लिए धन्यबाद . इसे सबके साथ बाँटकर आत्मसात् करें। ज्ञान बांटने से बढ़ता है और केवल अपने पास रखने से खत्म हो जाता है। 🌹🌹मेरे कान्हा 🌹🌹 🌹🌹जय श्री लष्मी नारायण🌹🌹

+89 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 63 शेयर
Paparao Rao May 10, 2020

+10 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 22 शेयर
sukhadev awari May 10, 2020

+120 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Deepak Chaudhari May 10, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 20 शेयर

श्रीकृष्ण लीला 🔸🔸🔹🔸🔸 भगवान दूर खड़े मुस्कुरा रहे है।तभी भगवान के परम मित्र मनसुखा आ गए तो मैया मनसुखा से कहती है-"मनसुखा तू आज लल्ला को पकडवाने मे मदद करेगा तो तुझको खाने को मक्खन दूंगी" मनसुखा बातों मे आ जाते हैं। अब मनसुखा भी कन्हैया को पकड़ने भागे।कन्हैया बोले-"क्यों रे सखा तू आज माखन के लोभ मे मैया से मार लगवायगो। सोच ले में तो तुझ को रोज चोरी करके माखन खाने की लिए देता हूँ। मैया तो तुझे सिर्फ आज माखन खाने को देगी।अगर तूने मुझे पकड़ा और मैया से मार लगवाई तो अपनी सखा मंडली से तोय बाहर कर दूंगो" मनसुखा बोले-"देख कान्हा मैया का क्या है एक तो वो तुझ से प्यार इतना करती है जो तुझको जोर से मार तो लगाएगी नहीं और 2 चपत तेरे गाल पे लग जायेगी तो क्या इस ब्राहमण सखा का भला हो जायेगा और माखन खाने को मिल जायेगा चोरी भी नहीं करनी पड़ेगी। कान्हा बोले-"अच्छा मेरी होए पिटाई और तेरी होय चराई।वाह मनसुखा वाह" और यह सब कहते हुएउनके छोटे छोटे पैरों में घुंघरू छन-छन करके बज रहे हैं।यशोदा सब कुछ सुन रही हैं।अपने लाल की लीला देख के गुस्सा भी और प्रसन्न भी हो रही हैं। गुस्सा इसलिए हो रही है की इतना छोटा और इतना खोटा, पकड़ मैं ही नहीं आ रहा।अपने लाल की लीला जिसपे सारा बृज वारी-वारी जाता है। भगवान् सुंदर लीला कर रहे हैं। तभी मनसुखा ने माखन के लोभ में कृष्ण को पकड़ लिया है व जोर से आवाज लगायी काकी जल्दी आओ मैंने कान्हा को पकड़ लिया है। आवाज सुनकर मैया दौड़ी-दौड़ी आई।जैसे ही मैया पास पहुंची मनसुखा ने कान्हा को छोड दिया। मनसुखा बोले मैया मैंने इतनी देर से पकड़ के रखो पर तू नाए आई। कान्हा तो हाथ छुडवा के भाग गयो। जब मैया थककर बैठ गयी तो मनसुखा मैया से बोलो-"मैया तू कहे तो कान्हा को पकड़ने को तरीका बताऊँ तू इसे अपने भक्तन (सखा और सखी गोपियों ) की सौगंध खवा" मैया बोली-"या चोर को कौन भक्त बनेगो" फिर भी मैया कन्हैया को सौगंध खवाती है कि कन्हैया तुझे तेरे भक्तो की सौगंध जो मेरी गोदी मे न आयो। भगवान् मन मे सोचते है “अहम् भक्ता पराधीन “ मैं तो भक्त के आधीन हूँ और वो भागकर मैया के पास चले आते हैं। मैया से बोलते हैं -"अरी मैया अब तू मोये मार या छोड दे ले अब मे तेरे हाथ मे हूँ" मैया बोली-"लल्ला आज मारूंगी तो नहीं पर छोडूंगी भी नहीं पर तेरी सब नटखटी तो बंद करनी ही पड़ेगी" मैया रेशम की डोरी से उखल से कृष्ण के पेट को बांध रही हैं। भगवान सोच रहे हैं मैया मेरे हाथ को बांधे तो बंध जाऊं पैर बांधे तो भी बंध जाऊं पर मैया तो पेट से बांध रही और मेरे पेट मैं तो पूरा ब्रहम्मांड समाया है। मैया बार बार बंध रही है पर हर बार डोरी 2 उंगल छोटी पड़ जाती है और डोरी जोडके बंधती है तो भी 2 उंगल छोटी पड़ जाती है एक उंगल प्रेम है और दूसरा है कृपा भगवान सोच रहे है की अगर प्रेम है तो कृपा तो मैं अपने आप ही कर देता हूँ। आज जब मैया थक गयी और प्रेम मैं आ गयी तो प्रभु ने कृपा कर दी और अब मैया ने कान्हा को बाँध दिया है। संस्कृत मे डोरी को दाम कहते है और पेट को उदर कहते है जब भगवान् को रस्सी से पेट से बांधा तो कान्हा का येे नया नाम उत्पन्न हुआ दामोदर। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

+38 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 13 शेयर
Gulshan Kumar May 10, 2020

+14 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB