जय श्री राधे कृष्ण जी शुभ रात्री जी🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जय श्री राधे कृष्ण जी
शुभ रात्री जी🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जय श्री राधे कृष्णा जी
शुभ रात्री जी🙏🙏🌷🌷🙏🙏🌷🌷🙏🙏🌷🌷🙏🙏🌷🌷

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कामेंट्स

Malkhan Singh Dec 15, 2018
*🌹जय श्री राम🙏🏼जय हनुमान🌹* *हनुमानजी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🌹आप का रात्रि शुभ हो🌹

Manju Pathak Dec 15, 2018
आपका दिन सुखद एवं मंगलमय रहे, जीवन मे उन्नति करे यही शुभकामनाएं हैं, राधे राधे राधे कृष्णा 🎆🥀🥀🥀🥀🥀⭐⭐⭐⭐⭐⭐

Renu Singh Dec 15, 2018
Jai shree Radhe Krishna ji . Shubh ratri ji...god bless you . 🙏🙏🌸🌸

Anilkumar Marathe Dec 15, 2018
🌹Jai Shree Krishna 🌹 *ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो |* *हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो |* *वो पल भी आएगा जिस पल का इंतज़ार आपको |* *बस भगवान पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो |* 🙏🏻 *Shubh Ratri * 🙏🏻

Jugal Patidar Dec 15, 2018
जय श्री राधा कृष्ण जी शुभ रात्रि जी

Anjana Gupta Dec 15, 2018
radhe radhe bhai ji shhbh ratri god bless you ji

Vishnu mishra Dec 15, 2018
🌷🌷om namo Bhagbatia vasudevay namah 🌱🌱om namo narayan namah jai shree Radhe Radhe jai shree Krishna 🌹🌹shubh ratri 🌱🌱mangalmay avam Sadar parnam Bhai jee 🙏🙏👏👏🌺🌺🌲🌲🌴🌴🍁🍁

कैलाश रघुवंशी Dec 16, 2018
जय श्री राधे कृष्णा भाई जी गुड मॉर्निंग शुप्रभात राम राम जी

pinky sharma Dec 16, 2018
radhye 🌹 radhye 🌹 ji 🌹🌹 suprbhat ji 🌹🌹🌹

Malkhan Singh Dec 16, 2018
जय श्री राम जानकी जी राम राम जी

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Priti Agarwal May 23, 2019

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Sunil upadhyaya May 23, 2019

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Swami Lokeshanand May 23, 2019

पंचवटी में सूर्पनखा का बड़ा प्रकोप है। सूर्पनखा वासना है, वही इस जगत के दुखों का एकमात्र कारण है। जो भी दुखी है, समझ लो उससे सूर्पनखा चिपटी है। जो इस देह रूपी पंचवटी में आया, सूर्पनखा ने सब पर डोरे डाले। जो इसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आ गया, उसकी नाक कटी, वह मारा गया। वही बचा जिसने सत्संग किया और इसकी ओर झांका तक नहीं। उसने नाक कटवाई नहीं, बल्कि इसी की नाक काट दी। जैसे पढ़ाई पूरी होते ही परीक्षा आती है, रामजी का सत्संग पूरा होते ही सूर्पनखा आ गई। अब कच्चे और सच्चे का भेद मालूम पड़ेगा। सूर्पनखा भेष बदलकर आई है, बहुत बनावट के साथ आई है, क्योंकि भेष बदलना तो लंकावालों की परंपरा ही है, मारीच ने बदला, रावण ने बदला। इससे बचने का उपाय देखें, यह आँख से मन में घुसती है, इसीलिए सच्चे सत्संगी लक्षमणजी तुरंत भगवान की ओर देखने लगे। सीता जी ने भी उसे नहीं देखा, वे रामजी के चरणों की ओर देखने लगीं। रामजी सीताजी को ही देखते रहे, उन्होंने भी सूर्पनखा को दृष्टि नहीं दी। माने वासना आक्रमण करे तो भगवान के रूप का चिंतन करें, भगवान के चरणों का आश्रय लें, तब वासना भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगी। साधक कभी भी अपने आचरण के बल पर निश्चिंत न रहे, भगवान के चरण के बल पर निश्चिंत रहे। सूर्पनखा की बात नहीं बनी, बने भी कैसे? जहाँ ज्ञानदेव रामजी हों, भक्तिदेवी सीताजी विराजमान हों, वैराग्यदेव लक्षमणजी हों, माने ज्ञान भक्ति और वैराग्य तीनों हों, वहाँ वासना की दाल कैसे गले? अब विशेष ध्यान दें, वासना में बाधा पड़ी तो क्रोध उत्पन्न हुआ, क्रोध हुआ तो भक्ति पर प्रहार का प्रयास हुआ। भगवान कुछ भी सह लेते हैं, भक्ति पर चोट कैसे सहन हो? भगवान ने तुरंत संकेत किया, सावधान जीव ने वासना को नाक कान विहीन कर दिया, वासना का विरूपीकरण कर दिया, कि भविष्य में कभी छल न पाए। देखो, जहाँ वासना घुस जाए वहाँ न ज्ञान बचता, न मान। तो जहाँ ज्ञान नहीं, वहाँ कान किस काम के, और जहाँ मान नहीं, वहाँ नाक कैसी? यों परीक्षा उतीर्ण हुई। भक्ति की रक्षा हुई।

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Narendra Singh Rao May 22, 2019

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Purvin kumar May 22, 2019

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