Davender Singh Chauhan
Davender Singh Chauhan Oct 10, 2017

ahoi ashtami vrat katha

ahoi ashtami vrat katha

यह व्रत बड़े व्रतों में से एक हैं इसमें परिवार कल्याण की भावना छिपी होती हैं. इस व्रत को करने से पारिवारिक सुख प्राप्ति होती हैं.इसे संतान वाली स्त्री ही करती हैं.
कब मनाया जाता हैं अहोई अष्टमी व्रत (Ahoi Ashtami Vrat 2017 Date):
यह कार्तिक माह का अति प्रिय एवम उत्तम उपवास हैं. यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी दिवाली से लगभग सात दिन पूर्व मनाया जाता हैं. इसे करवा चौथ के समान ही महान व्रत कहते हैं, यह करवा चौथ के चार दिवस बाद आता हैं. अहोई अष्टमी व्रत वर्ष 2017 में 12 अक्टूबर, दिन गुरुवार को मनाया जायेगा.
अहोई अष्टमी पूजा मुह्रूत (Ahoi Ashtami Vrat Muhurat)–
पूजा का समय
17:50 से 19:06
अष्टमी तिथि शुरू होगी
12 अक्टूबर दोपहर 6:55
अष्टमी तिथि ख़त्म होगी
13 अक्टूबर 4:59
अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय
23:53 बजे
अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha):
बहुत समय पहले साहूकार था. उसके सात पुत्र एवं एक पुत्री थी. दिवाली महोत्सव समीप था. घर की साफ़ सफाई पूरी करना था, जिसके लिए रंग रोंगन करना था, जिसके लिए साहूकार की पुत्री जंगल गई मिट्टी लाने उसने कुदाली से खोद कर मिट्टी ली. खोदते समय उसकी कुदाली स्याह के बच्चे को लग गई और वो मर गया. तब ही स्याह ने साहूकार के पुरे परिवार को संतान शोक का श्राप दे दिया, जिसके बाद साहूकार के सभी पोत्रो की मृत्यु हो गई, इससे सभी मातायें विचलित थी. साहू कार की सातों बहुयें एवम पुत्री समस्या के निवारण के लिए मंदिर गई और वहाँ अपना दुःख देवी के सामने विलाप करते हुए कहने लगी. तब ही वहाँ एक महात्मा आये जिन्होंने उन सभी को अहोई अष्टमी का व्रत करने को कहा. इन सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ अहोई अष्टमी का व्रत किया, जिससे स्याही का क्रोध शांत हुआ और उसके खुश होते ही उसने अपना श्राप निष्फल कर दिया, इस प्रकार आठों स्त्रियों की संतान जीवित हो गई.
इस प्रकार इस व्रत का महत्व में संतान की सुरक्षा का भाव निहित होता हैं :
अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि (Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi):
प्रातः जल्दी स्नान किया जाता हैं.
इसमें दिन भर का निर्जला व्रत किया जाता हैं.
शाम में सूरज ढलने के बाद अहोई अष्टमी की पूजा की जाती हैं.
इसमें अहोई अष्टमी माता का चित्र बनाया जाता हैं और विधि विधान से उनका पूजन किया जाता हैं.
चौक बनाया जाता हैं. इस पर चौकी को रख उस पर अहोई माता एवम सईं का चित्र रखा जाता हैं.
सर्वप्रथम कलश तैयार किया जाता हैं. गणेश जी की स्थापना की जाती हैं इनके साथ ही अहोई अष्टमी माता का चित्र रखा जाता हैं.
आजकल बाजारों में यह चित्र मिल जाता हैं.
पूजा के बाद कुछ मातायें जल एवम फलाहार ग्रहण करती हैं.
इस दिन कई स्त्रियाँ चांदी की माता बनाती हैं पूजा के बाद इन्हें माला में पिरो कर धारण करती हैं.
इस माला को दिवाली के बाद उतारा जाता हैं और बड़ो का आशीष लिया जाता हैं.
अहोई अष्टमी माता बच्चो की सुरक्षा करती हैं सदैव उनके साथ होती हैं इसलिए मातायें इनकी पूजा करती हैं. यह व्रत कार्तिक माह में आता हैं इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं.

Like Agarbatti Water +139 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 176 शेयर

कामेंट्स

Pranam Jyot Like +5 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

Like Pranam Bell +6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 13 शेयर
Ragni Dhiwar Dec 15, 2018

Pranam Jyot Lotus +22 प्रतिक्रिया 25 कॉमेंट्स • 5 शेयर

Pranam Like Flower +3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Smt Neelam Sharma Dec 15, 2018

*💐दिल में हजारों दर्द है...💐*
*☘फिर भी होठों पे आपका नाम रहता है,☘*
*👣क्योंकि 🍂मेरे राधारमण🍂 हालात कैसी भी हो...👣*
*🌺आपके भरोसे ही मेरा परिवार रहता है...🌺*

*🙏🏻🍁जय श्री राधे कृष्णा जी ....🍁🙏🏻*

Like Flower Jyot +15 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Shweta Dec 15, 2018

Pranam Tulsi Lotus +9 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

Pranam Like Bell +106 प्रतिक्रिया 36 कॉमेंट्स • 119 शेयर
sushma Dec 15, 2018

Water Milk +2 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB