vineeta tripathi
vineeta tripathi Jan 21, 2021

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कामेंट्स

संजीव मिश्रा - 8851075066 Jan 21, 2021
*लंबी छलांगों से कहीं बेहतर है निरंतर कदम,* *जो एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे......* 🚩🚩🚩 *जय श्री राम* 🚩🚩🚩 शुभ रात्रि जी

Brajesh Sharma Jan 21, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय... जय श्री राधे कृष्णा जी...

Bhagat ram Jan 21, 2021
🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन 🙏🙏💐🌿🌺🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे जी 🙏🙏💐🌿🌺🌹

B K PATEL Jan 21, 2021
जय श्री कृष्ण 🌹🙏🙏

Seema Sharma. Himachal (chd) Jan 21, 2021
दुआ है कि आप की रात की अच्छी शुरुआत हो; प्यार भरे मीठे सपनो की बरसात हो; जिनको ढूंढ़ती रहीं दिन-भर आपकी आँखें; रब्ब कर सपनों में उनसे मुलाक़ात हो।😊🌷 good night 😴 शुभ रात्रि!”😊🙏 बहुत बहुत धन्यवाद जी 😊🙏

Hemat Jan 21, 2021
Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhey Radhey Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanywad Vandaniy Bahena Ji Pranam, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Mangalmay Ho, Ishwar Aapko Sadaiv Prasanna Aur Swasath Rakhe, Shubh Ratri

अर्जुन वर्मा Jan 21, 2021
🙏!!ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः!!🙏 !! भगवान श्री हरि एवं माता लक्ष्मी जी की कृपा एवं आशीर्वाद आप और आपके पूरे परिवार जनों पर सदैव बनी रहे!!🙏 !! आप स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें!!🙏 !!इसी मंगल कामना के साथ!!शुभ रात्रि वंदन दीदी प्रणाम!!🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Jan 21, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा जी शुभ रात्रि वंदन जी आपका हर पल शुभ मंगल हो जी 🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼

laltesh kumar sharma Jan 21, 2021
🌹🌿🌹⭐🌹 jai shree radhe krishan ji 🌹🌿🌹🌿🌹 Subh ratri vandan ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏🙏

🌷JK🌷 Jan 21, 2021
🙏🏼🌹🙏🏼Radhe Radhe🙏🌹🙏 subh ratri vandan ji🙏

कविता Jan 21, 2021
श्री राधे राधे शुभ रात्रि विश्राम जी

🌷🌹SHIVAM🌹🌷 Jan 22, 2021
☁☁☁☁☁☁☁☁ 🌟☁😌😌😌☁☁✨ ☁😌😌☁☁😌☁☁ 😌😌☁✨☁☁☁☁ 😌😌☁☁☁☁☁☁ 😌😌☁Good Night✨ ☁😌😌☁☁😌☁☁ ☁☁😌😌😌☁☁☁ ☁☁☁☁☁☁☁☁

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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vineeta tripathi Feb 26, 2021

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Neeta Trivedi Feb 26, 2021

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SunitaSharma Feb 26, 2021

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐ध्यान के पंख💐💐* बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो, आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया, सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे, अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था, एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था, वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया, मालिक..! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा । *हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदि हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जन्म जन्म से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने जन्मों जन्मों में किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं,पदार्थ से परमात्मा तक की, व्यर्थ से सार्थक की...* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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. इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है..!! ✍️✍️ एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा। उसने कहा, "नस्ली नही हैं। राजा को हैरानी हुई। उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा। उसने बताया घोड़ा नस्ली तो है पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी। ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है. राजा ने पूछा तुम को कैसे पता चला कि घोड़ा नस्ली नहीं है? उसने कहा , जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके खाता है जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता है। राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ उसने उसके घर अनाज , घी और काफी सामान बतौर इनाम भिजवा दिए और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। चंद दिनो बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी। उसने कहा , तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं। राजा के पैरों तले जमीन निकल गई। उसने अपनी सास को बुलाया। मामला उसको बताया। सास ने कहा "हक़ीक़त ये है कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी , लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया। राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ? उसने कहा,"रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता है जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं। साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। कुछ वक्त गुज़रा , राजा ने फिर नौकर को बुलाया और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ। राजा ने वादा किया। उसने कहा , न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है। राजा को बहुत गुस्सा आया। मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था। राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा। मां ने कहा, "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो। हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हमने पाला है। राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता "तुझे कैसे पता चला? उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम" दिया करते हैं तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं लेकिन आप भेड़ , बकरियां,खाने पीने की चीजें दिया करते हैं। ये रवैया किसी राजाओं का नही किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है। दोस्तों यदि किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत , सुख समृद्धि , रुतबा , इल्म , बाहुबल है तो ये सब बाहरी दिखावा है।इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है।।

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