vikram
vikram Aug 7, 2017

खिचड़ी का भोग

#ज्ञानवर्षा #कृष्ण
🌸💦🌸💦🌸💦🌸💦

*⭕ खिचड़ी भोग ⭕*
~~~~~~~~~~~~~

♦ भगवान श्रीकृष्ण की परम उपासक कर्मा बाई जी भगवान को बचपन से ही पुत्र रुप में भजती थीं । ठाकुर जी के बाल रुप से वह रोज ऐसे बातें करतीं जैसे बिहारी जी उनके पुत्र हों और उनके घर में ही वास करते हों ।

♦ एक दिन कर्मा बाई की इच्छा हुई कि बिहारी जी को फल-मेवे की जगह अपने हाथ से कुछ बनाकर खिलाऊँ । उन्होंने प्रभु को अपनी इच्छा बतलायी । भगवान तो भक्तों के लिए सर्वथा प्रस्तुत हैं । गोपाल बोले - "माँ ! जो भी बनाया हो वही खिला दो, बहुत भूख लगी है ।"

♦ कर्मा बाई ने खिचड़ी बनाई थी । ठाकुर जी को खिचड़ी खाने को दे दी । प्रभु बड़े चाव से खिचड़ी खाने लगे और कर्मा बाई ये सोचकर भगवान को पंखा झलने लगीं कि कहीं गर्म खिचड़ी से मेरे ठाकुर जी का मुँह ना जल जाये । संसार को अपने मुख में समाने वाले भगवान को कर्मा बाई एक माता की तरह पंखा कर रही हैं और भगवान भक्त की भावना में भाव विभोर हो रहे हैं ।

♦ भक्त वत्सल भगवान ने कहा - "माँ ! मुझे तो खिचड़ी बहुत अच्छी लगी । मेरे लिए आप रोज खिचड़ी ही पकाया करें । मैं तो यही खाऊँगा ।"

♦ अब तो कर्मा बाई जी रोज सुबह उठतीं और सबसे पहले खिचड़ी बनातीं । बिहारी जी भी सुबह-सवेरे दौड़े आते । आते ही कहते - माँ ! जल्दी से मेरी प्रिय खिचड़ी लाओ ।" प्रतिदिन का यही क्रम बन गया । भगवान सुबह-सुबह आते, भोग लगाते और फिर चले जाते ।

♦ एक बार एक महात्मा कर्मा बाई के पास आया । महात्मा ने उन्हें सुबह-सुबह खिचड़ी बनाते देखा तो नाराज होकर कहा - "माता जी, आप यह क्या कर रही हो ? सबसे पहले नहा धोकर पूजा-पाठ करनी चाहिए । लेकिन आपको तो पेट की चिन्ता सताने लगती है ।"

♦ कर्मा बाई बोलीं - "क्या करुँ ? महाराज जी ! संसार जिस भगवान की पूजा-अर्चना कर रहा होता है, वही सुबह-सुबह भूखे आ जाते हैं । उनके लिए ही तो खिचड़ी बनाती हूँ ।"

♦ महात्मा ने सोचा कि शायद कर्मा बाई की बुद्धि फिर गई है । यह तो ऐसे बोल रही है जैसे भगवान इसकी बनाई खिचड़ी के ही भूखे बैठे हुए हों । महात्मा कर्मा बाई को समझाने लगे - "माता जी, तुम भगवान को अशुद्ध कर रही हो । सुबह स्नान के बाद पहले रसोई की सफाई करो । फिर भगवान के लिए भोग बनाओ ।"

♦ अगले दिन कर्मा बाई ने ऐसा ही किया । जैसे ही सुबह हुई भगवान आये और बोले - "माँ ! मैं आ गया हूँ, खिचड़ी लाओ ।"

♦ कर्मा बाई ने कहा - "प्रभु ! अभी में स्नान कर रही हूँ, थोड़ा रुको । थोड़ी देर बाद भगवान ने फिर आवाज लगाई । जल्दी करो, माँ ! मेरे मन्दिर के पट खुल जायेंगे, मुझे जाना है ।"

♦ वह फिर बोलीं - "अभी मैं सफाई कर रही हूँ, प्रभु !" भगवान सोचने लगे कि आज माँ को क्या हो गया है ? ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ । भगवान ने झटपट करके जल्दी-जल्दी खिचड़ी खायी । आज खिचड़ी में भी रोज वाले भाव का स्वाद नहीं था । जल्दी-जल्दी में भगवान बिना पानी पिये ही भागे । बाहर महात्मा को देखा तो समझ गये - "अच्छा, तो यह बात है । मेरी माँ को यह पट्टी इसी ने पढ़ायी है ।"

♦ ठाकुर जी के मन्दिर के पुजारी ने जैसे ही पट खोले तो देखा भगवान के मुख पर खिचड़ी लगी हुई है । पुजारी बोले - "प्रभु जी ! ये खिचड़ी आप के मुख पर कैसे लग गयी है ?"

♦ भगवान ने कहा - "पुजारी जी, आप माँ कर्मा बाई जी के घर जाओ और जो महात्मा उनके यहाँ ठहरे हुए हैं, उनको समझाओ । उसने देखो मेरी माँ को कैसी पट्टी पढाई है ?"

♦ पुजारी ने महात्मा जी से जाकर सारी बात कही । यह सुनकर महात्मा जी घबराए और तुरन्त कर्मा बाई के पास जाकर कहा - "माता जी ! माफ़ करो, ये नियम धर्म तो हम सन्तों के लिये हैं । आप तो जैसे पहले खिचड़ी बनाती हो, वैसे ही बनायें । ठाकुर जी खिचड़ी खाते रहेंगे ।"

♦ एक दिन आया जब कर्मा बाई के प्राण छूट गए । उस दिन पुजारी ने पट खोले तो देखा - भगवान की आँखों में आँसूं हैं । प्रभु रो रहे हैं । पुजारी ने रोने का कारण पूछा तो भगवान बोले - "पुजारी जी, आज मेरी माँ कर्मा बाई इस लोक को छोड़कर मेरे निज लोक को विदा हो गई है । अब मुझे कौन खिचड़ी बनाकर खिलाएगा ?"

♦ पुजारी ने कहा - "प्रभु जी ! आपको माँ की कमी महसूस नहीं होने देंगे । आज के बाद आपको सबसे पहले खिचड़ी का भोग ही लगेगा ।" इस तरह आज भी जगन्नाथ भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है ।

🔶 भगवान और उनके भक्तों की ये अमर कथायें अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक हैं । ये कथायें प्रभु प्रेम के स्नेह को दरसाने के लिए अस्तित्व में आयीं हैं । इन कथाओं के माध्यम से भक्ति के रस को चखते हुए आनन्द के सरोवर में डुबकी लगाएं । ईश्वर की शक्ति के आगे तर्कशीलता भी नतमस्तक हो जाती है । तभी तो चिकित्सा विज्ञान के लोग भी कहते हैं - *दवा से ज्यादा, दुआ* *काम आएगी ।*
*राधे राधे*

Like Flower Pranam +136 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 85 शेयर

कामेंट्स

Shripal mirdha Aug 7, 2017
कर्मा बाई जी काल्वा makrana निवासी थी

Shivkumar Upadhaya Aug 7, 2017
बड़ीआत्मिकप्रेरणादाईकथाहै

jayati cee Aug 20, 2018

सात्विक भोजन क्यों जरूरी है
〰️〰️🔸〰️🔸〰️🔸〰️〰️
कहते है कि जैसा अन्न वैसा मन। हम जो कुछ भी खाते है वैसा ही हमारा बन जाता है, जैसा हमारा मन होगा। अन्न चरित्र निर्माण करता है। इसलिए हम क्या खा रहे है। इस बात का सदा ध्यान रखना चाहिए।

प्रकृति से हम जो...

(पूरा पढ़ें)
Flower Pranam Like +23 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 73 शेयर
Prakash Preetam Aug 20, 2018

बचपन में
खाना मनपसन्द न हो
तो माँ कई और ऑप्‍शन देतीं...

अच्‍छा घी लगा के
गुड़ के साथ रोटी खा लो.

अच्‍छा आलू की
भुजिया बना देती हूँ चलो.

अच्छा चलो
दूध के साथ चावल खा लो...

माँ नखरे सहती थी,
इसलिए उनसे लड़ियाते भी थे.

लेकिन
बाद में किसी ने
इ...

(पूरा पढ़ें)
Like +6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 36 शेयर
Ashok Yadav Aug 19, 2018

चित्रकूट सब दिन बसत, प्रभु सिय लखन समेत
राम नाम जप जापकहि, तुलसी अभिमत देत


- श्रीसीता और लक्ष्मण सह प्रभु रामचंद्र का चित्रकूट में हर समय निवास रहता है. तुलसीदास कहते है की वह रामप्रभु रामनाम का जप करनेवाले को इच्छित फल देते है....

(पूरा पढ़ें)
Milk Pranam Like +71 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 77 शेयर
Rohan Bhardwaj Aug 20, 2018

एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर होगये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन मै किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तेयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा !!आज सुबह सुबह कहा जा...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Bell +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 11 शेयर
Sanjay Nagpal Aug 20, 2018

ज्योतिष में गर्भाधान काल
पुरुष के वीर्य और स्त्री के रज से मन सहित जीव (जीवात्मा) का संयोग जिस समय होता है उसे गर्भाधान काल कहते हैं। गर्भाधान का संयोग (काल) कब आता है ? इसे ज्योतिष शास्त्र बखूबी बता रहा है। चरक संहिता के अनुसार – आकाश, वायु, अग्न...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Like +6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 5 शेयर

ऊँ🙏 शुभ पंचांग🌹शुभ राशिफल 🙏ऊँ

मंगलवार 2⃣1⃣अगस्त 2⃣0⃣1⃣8⃣

तिथि: एकादशी - पूर्ण रात्रि तक

#Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)

#Whatsapp no :- 09911020152

सूर्योदय: ०५:५३
सूर्यास्त: १८:५४
हिन्दु सूर्योदय: ०५:५७
हिन्दु सूर्यास्त: १८:५०
चन्द्रोदय:...

(पूरा पढ़ें)
Belpatra Flower Water +103 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 1169 शेयर
Jagdish Prasad.Delhi Aug 19, 2018

अपने डॉक्टर खुद बने
〰️〰️🔸〰️🔸〰️〰️
1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें।थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर केवल तिल, सरसों, मूंगफली, नारिय...

(पूरा पढ़ें)
Dhoop Belpatra Flower +55 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 317 शेयर

. *किराये का घर*

*जब हम "किराए का मकान" लेते है तो "मकान मालिक" कुछ शर्तें रखता है !*
*1. मकान का किराया समय पर देना होगा।*
*2. मकान में गंदगी नही फैलाना।*
*3. मकान मालिक जब चाहे मकान को खाली करवा सकता है !!*

*उसी प्रक...

(पूरा पढ़ें)
Like Pranam Flower +41 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 146 शेयर

Chapter - 01,  Serial No 61 - 65

भक्ति हमारे चित्त की वृत्ति को अनायास और बिना परिश्रम के प्रभु की तरफ प्रवाहित कर देती है ।

प्रभु की कथा हमें प्रभु में मन लगाना सिखाती है ।

भक्ति का रस हमारे अन्त:करण को प्रभावित करता है ।

हमारे चित्त की वृत्त...

(पूरा पढ़ें)
Flower Like Dhoop +17 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Gopal Krishan Aug 20, 2018

(((( कन्हैया की शरण ))))
.
एक बार एक महात्मा जी बीच बाजार में से कहीँ जा रहे थे वहीं पास के एक कोठे की छत पर एक वैश्या पान खा रही थी
.
अचानक उसने बेख्याली से उसने पान की पीक नीचे थूकी और वो पीक नीचे जा रहे महात्मा जी के ऊपर गिरी
.
महात्मा जी ने ...

(पूरा पढ़ें)
Like Flower Pranam +8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 9 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB