गुरु श्री गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर

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Rahul Gupta Dec 22, 2016
gorakhnath mandir ka myMandir code 109791 hai. iske sadasya banein.

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Radhe Krishna Apr 12, 2021

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ramkumarverma Apr 12, 2021

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हीरा Apr 12, 2021

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Acharya Rajesh Apr 12, 2021

☀️ *धारावाहिक लेख:- नवदुर्गा, भाग-1* चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से माॅ दुर्गा भवानी के परम पावन वासंतीय नवरात्रो का आंरभ होता है, इसका आंरभ नौ नवरात्रो से होता है । इन नौ नवरात्रो की क्रमशः नौ देवियाॅ होती है । जो कि क्रम से इस प्रकार है  । पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघण्टा, चौथी कूष्माडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवी कालरात्रि, आठवी महागौरी तथा नवी माता का नाम सिद्धिदात्री है । नवरात्रो के प्रथम दिन "माता शैलपुत्री देवी" का दिन है । *प्रथम माता:- शैलपुत्री* माॅं दुर्गा के नौ स्वरुपो मे प्रथम स्वरुप भगवती शैलपुत्री का है, नवरात्र के पहले दिन माॅं के इस रुप की अराधना की जाती है, मां पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण शैलपुत्री के नाम से विख्यात हुई, यह प्रकृृति की देवी है । मां कहती है संसार मे जो कुछ है वह मुझसे ही है, जगत मे ऐसा कौन सा पदार्थ या जीव है, जो मुझसे अलग है, जगत की सभी शक्तियो का समावेश मुझमे ही है । भगवान शिव कल्याण के देव है और देवी कल्याण को प्रसारित करने वाली है । देवी शब्द का अर्थ होता है, प्रकाशित करने वाला, अर्थात जो कल्याण ( शिव का भाव ) सृृष्टि मे प्रसारित करे , वह देवी है । अतः शैलपुत्री की अराधना अकेले नही अपितु शंकर जी के साथ करनी चाहिए । मां, शक्ति है तथा शिव शक्तिमान है, शक्तिमान यानि शक्ति को धारण करने वाले । शक्ति और शक्तिमान अलग-२ नही एक ही है, शंकरजी ने भी शक्ति की ही अराधना की थी,और शक्ति ने भी शिव को ही पूजा । जगत की तीन अवस्थिति  है, सृृष्टि, पालन और संहार । इसी को सत्व, रज और तम क्हा गया है। संसार की समस्त गतिविधियां शिव और पार्वती ही संचालित करते है, सृृष्टि का पालन और संहार भी इन्ही से होता है । *मां शैलपुत्री का स्वरूप तथा संक्षिप्त कथा:-* मां शैलपुत्री वृृषभ पर आरुढ दाहिने हाथ मे त्रिशुल तथा बांये हाथ में सुंदर कमल पुष्प धारण किए हुए है, इनके सिर पर अर्धचंद्र तथा स्वर्णमुकुट सुशोभित है । पूर्वजन्म मे इन्होने दक्षकन्या के रुप मे अवतार लिया था, तथा इनका नाम सती था । इन्होने कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न कर उन्हे पति के रुप मे प्राप्त किया था, पिता के यज्ञ मे पति की उपेक्षा देखकर इन्होने स्वयं को होमाग्नि मे भस्म कर दिया था, और अगले जन्म मे हिमालय की पुत्री के रुप मे उत्पन्न हो पुनः भगवान शिव की अर्धागिनी बनी । मनोवांछित सिद्वि के लिए इनकी उपासना नवरात्र पूजन के पहले दिन की जाती है । *मां शैलपुत्री को भोग:-* मां शैलपुत्री के पूजन के बाद उन्हें सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है और अगर यह मिष्ठान्न गाय के घी में बना हों तो व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और हर तरह की बीमारी दूर होती है. *इनके मंत्र इस प्रकार से है:-* 1.*या देवी सर्वभूतेषू प्रकृृति रुपेण संस्थिता।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*                                             2.*वन्दे वांछितलाभाय,चन्द्रार्ध कृृत शेखराम ।* *वृृषरुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।* माता शैलपुत्री देवी स्तोत्र के लाभ:- माता शैलपुत्री के पूजन से मूलाधार चक्र जितित होता है, जिससे कई प्रकार की उपलब्धियां अर्थात सिद्धियों की प्राप्ति होती हैं । *माता शैलपुत्री देवी स्तोत्र* !! ध्यान !! *वंदे स्तच्छित लभाया चंद्रार्धकृत शेखराम्।* *वृषारूढां शूलधरांशैलपुत्री यशस्विनीम्।* *पूनेंदुनिभां गौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्र।* *पटांबर परिधानांरत्नकिरीटां नानालंकार भूषिता।* *प्रफुल्ल वदना पल्लव धरांकांतकपोला बटंग कुचम* *कमनीयां लावण्यांस्मेरमुखी क्षीणमध्यांनितंबनीम्।* *।।स्तोत्र ।।* *प्रथम दुर्गा त्वंहिभवसागर तारणीम्।* *धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम् दाय* *त्रिलोकजनिनाथ विश्वनाथ प्रद्यानम्।* *सौभाग्यारोग्यदायनी शैलपुत्री प्रणमाम्हम्।* *चराचरेश्वरी त्वंहिमहामोह विनाशिन।* *भुक्ति, मुक्ति वर्णी, शैलपुत्रीप्रणमभ्यम्म्नी* *चराचरेश्वरीत्वमिमहामोह विनाशिनी।* *भुक्ति, मुक्ति दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्हम*  *(क्रमशः)* *लेख के दूसरे भाग में कल द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी देवी के विषय मे लेख ।* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 23 अप्रैल को "कामदा" एकादशी पर लेख ।* *2. 24 अप्रैल को "वैशाख मास" विषय पर लेख ।* *3. शीघ्र ही हनुमान जयंती पर लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *मंगलवार,13.4.2021* *श्री संवत 2078* *शक संवत् 1943* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-उत्तर गोल* *ऋतुः- वसन्त-ग्रीष्म ऋतुः ।* *मास- चैत्र मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- प्रतिपदा तिथि 10:18 am तक* *चंद्रराशि- चंद्र मेष राशि मे 11:29 am तक तदोपरान्त मेष राशि ।* *नक्षत्र- अश्विनी 2:19 pm तक* *योग- विष्कुंभ योग 3:14 pm तक (अशुभ है)* *करण- बव करण 10:18 am तक* *सूर्योदय 5:58 am, सूर्यास्त 6:45 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 11:56 am से 12:47 pm* *राहुकाल - 3:33 pm से 5:09 pm* (अशुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- उत्तर दिशा ।* *अप्रैल माह -शुभ दिन:-* शुभ दिन :  13, 14 (5 pm तक), 16 (6 pm उपरांत), 17, 18, 19, 20 (12 pm उपरांत), 21, 22, 23 (11 am तक), 24, 25, 26 (1 pm तक), 28 (सायंकाल 5 उपरांत), 29 (12 pm तक), 30 (12 pm उपरांत) *अप्रैल माह-अशुभ दिन:-* 15, 27. *गंडमूल:- 11 अप्रैल 8:58 am से "रेवती" नामक गंडमूल नक्षत्र शुरू होकर 13 अप्रैल 2:19 pm तक "अश्विनी" नामक गंडमूल नक्षत्र रहेगें ।* गंडमूल नक्षत्रों मे जन्म लेने वाले बच्चो का मूलशांति पूजन आवश्यक है । *सर्वार्थ सिद्ध योग :- 13 अप्रैल 5:58 am to 12 अप्रैल 2:19 pm तक* ( यह एक शुभयोग है, इसमे कोई व्यापारिक या कि राजकीय अनुबन्ध (कान्ट्रेक्ट) करना, परीक्षा, नौकरी अथवा चुनाव आदि के लिए आवेदन करना, क्रय-विक्रय करना, यात्रा या मुकद्दमा करना, भूमि , सवारी, वस्त्र आभूषणादि का क्रय करने के लिए शीघ्रतावश गुरु-शुक्रास्त, अधिमास एवं वेधादि का विचार सम्भव न हो, तो ये सर्वार्थसिद्धि योग ग्रहण किए जा सकते हैं। *अमृत सिद्धि योग:- 13 अप्रैल 5:58 am से लेकर 13 अप्रैल 2:19 pm तक* इस योग मे  सर्वाथ सिद्ध योगवाले कामो के अलावा प्रेमविवाह, विदेश यात्रा तथा सकाम अनुष्ठान करना शुभ होता है । ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* ________________________ *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 13 अप्रैल:- घटस्थापना, चैत्र नवरात्रि प्रारंभ। 14 अप्रैल:- वैसाखी। 16 अप्रैल:- विनायक चतुर्थी। 21 अप्रैल:- राम नवमी। 22 अप्रैल:- चैत्र नवरात्रि पारण। 23 अप्रैल:- कामदा एकादशी। 24 अप्रैल:- शनि प्रदोष। 26 अप्रैल:- चैत्र पूर्णिमा। 30 अप्रैल:- संकष्टी चतुर्थी आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

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