श्री सिद्धिविनायक देवस्थान, महेमदाबाद

श्री सिद्धिविनायक देवस्थान, महेमदाबाद
श्री सिद्धिविनायक देवस्थान, महेमदाबाद
श्री सिद्धिविनायक देवस्थान, महेमदाबाद

गुजरात में अहमदाबाद से मात्र 25 किमी दूर महेमदाबाद शहर में वात्रक नदी के तट पर श्री सिद्धिविनायक देवस्थान अवस्थित है। इसे सिद्धिविनायक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। गुजरात के प्रमुख मंदिरों में से एक, यह मंदिर अपने प्रकार का एकमात्र मंदिर है और यहाँ का सबसे विशाल मंदिर भी माना जाता है।

श्री सिद्धिविनायक का यह विशाल मंदिर अपने अद्भुत स्थापत्य के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर 600,000 वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में भगवान् गणेश की प्रतिमा की विशाल प्रतिकृति के रूप में बनाया गया है। यह मंदिर 120 फुट लंबा, 71 फुट ऊँचा, और 80 फुट चौड़ा है। इस मंदिर का निर्माण पुरोहित परिवार द्वारा कराया गया। पुरोहित कंस्ट्रक्शन के सीईओ और प्रबंध-निदेशक श्री नरेंद्र भाई पुरोहित ने अपनी माता स्व. देबाजी की भगवान् गणेश के प्रति निष्ठा और अटूट विश्वास से प्रेरित हो अहमदाबाद शहर के समीप भगवान् गणेश को समर्पित एक भव्य देवस्थान का निर्माण करने का निर्णय लिया।

संत-महात्माओं के परामर्श पर यह निश्चित हुआ कि यह मंदिर नदी के किनारे ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ आसानी से पहुँचा जा सके। काफी ख़ोज करने के बाद अंत में अहमदाबाद-महेमदाबाद राज्य राजमार्ग पर वात्रक नदी के किनारे इस मंदिर के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त स्थान चुना गया। और उसके बाद 9 मार्च, 2011 को पुरोहित परिवार की उपस्थिति में इस विशाल मंदिर का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ और लगभग एक साल में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ।

इस मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए लिफ्ट और रैंप की व्यवस्था है। मंदिर के प्रांगण में ख़ूबसूरत उद्यान बने हुए हैं, यहाँ भोजनालय के साथ ही मंदिर के परिसर में बच्चों के लिए एक एम्यूज़मेंट पार्क भी बना हुआ है। कुछ ही साल पहले बना यह मंदिर आज गुजरात के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और दूर-दूर से भक्त यहाँ भगवान् सिद्धिविनायक के दर्शन करने आते हैं।

Address: Shree Siddhi Vinayak Devasthan, GJ SH 3, Nr Vatrak River, Mahemdabad-387130(Gujarat-india)
Phone Number: +91 9726967677
Email: [email protected]
Official Website: http://srisiddhivinayak.com/
Aarti and Darshan Timing for Siddhivinayak Temple in Mahemdavad

Open Days: Open all days
Visit Duration: 2 hours
Photography: Not allowed inside temple
Best time to visit: All time of year mostly Sankasthi Chaturthi of every month
Darshan Timing: 5:30 AM to 8:30 PM
Dhoop Aarti Timing: 6:30 AM
Darshan Aarti Timing: 7:15 AM
Rajbhog Aarti Timing: 12:30 PM
Shringhar Aarti Timing: 4:45 PM
Dhoop Aarti Timing: 6:30 PM
Darshan Aarti Timing: 7:15 PM

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white beauty Sep 20, 2020

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*!! सबसे बड़ा दानी !!* 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ एक बार की बात है कि श्री कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा कि प्रभु– एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ ? श्री कृष्ण ने कहा– अर्जुन, तुम मुझसे बिना किसी हिचक, कुछ भी पूछ सकते हो। तब अर्जुन ने कहा कि मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई है कि दान तो मैं भी बहुत करता हूँ परंतु सभी लोग कर्ण को ही सबसे बड़ा दानी क्यों कहते हैं ? यह प्रश्न सुन श्री कृष्ण मुस्कुराये और बोले कि आज मैं तुम्हारी यह जिज्ञासा अवश्य शांत करूंगा। श्री कृष्ण ने पास में ही स्थित दो पहाड़ियों को सोने का बना दिया। इसके बाद वह अर्जुन से बोले कि हे अर्जुन इन दोनों सोने की पहाड़ियों को तुम आस पास के गाँव वालों में बांट दो। अर्जुन प्रभु से आज्ञा ले कर तुरंत ही यह काम करने के लिए चल दिया। उसने सभी गाँव वालों को बुलाया। उनसे कहा कि वह लोग पंक्ति बना लें अब मैं आपको सोना बाटूंगा और सोना बांटना शुरू कर दिया। गाँव वालों ने अर्जुन की खूब जय जयकार करनी शुरू कर दी। अर्जुन सोना पहाड़ी में से तोड़ते गए और गाँव वालों को देते गए। लगातार दो दिन और दो रातों तक अर्जुन सोना बांटते रहे। उनमें अब तक अहंकार आ चुका था। गाँव के लोग वापस आ कर दोबारा से लाईन में लगने लगे थे। इतने समय पश्चात अर्जुन काफी थक चुके थे। जिन सोने की पहाड़ियों से अर्जुन सोना तोड़ रहे थे, उन दोनों पहाड़ियों के आकार में जरा भी कमी नहीं आई थी। उन्होंने श्री कृष्ण जी से कहा कि अब मुझसे यह काम और न हो सकेगा। मुझे थोड़ा विश्राम चाहिए। प्रभु ने कहा कि ठीक है तुम अब विश्राम करो और उन्होंने कर्ण को बुला लिया। उन्होंने कर्ण से कहा कि इन दोनों पहाड़ियों का सोना इन गांव वालों में बांट दो। कर्ण तुरंत सोना बांटने चल दिये। उन्होंने गाँव वालों को बुलाया और उनसे कहा– यह सोना आप लोगों का है, जिसको जितना सोना चाहिए वह यहां से ले जायें। ऐसा कह कर कर्ण वहां से चले गए। यह देख कर अर्जुन ने कहा कि ऐसा करने का विचार मेरे मन में क्यों नहीं आया? श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को शिक्षा— इस पर श्री कृष्ण ने जवाब दिया कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था। तुम खुद यह निर्णय कर रहे थे कि किस गाँव वाले की कितनी जरूरत है। उतना ही सोना तुम पहाड़ी में से खोद कर उन्हें दे रहे थे। तुम में दाता होने का भाव आ गया था। दूसरी तरफ कर्ण ने ऐसा नहीं किया। वह सारा सोना गाँव वालों को देकर वहां से चले गए। वह नहीं चाहते थे कि उनके सामने कोई उनकी जय जयकार करे या प्रशंसा करे। उनके पीठ पीछे भी लोग क्या कहते हैं उससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। यह उस आदमी की निशानी है जिसे आत्मज्ञान हासिल हो चुका है। इस तरह श्री कृष्ण ने खूबसूरत तरीके से अर्जुन के प्रश्न का उत्तर दिया, अर्जुन को भी अब अपने प्रश्न का उत्तर मिल चुका था। *निष्कर्ष:-* *दान देने के बदले में धन्यवाद या बधाई की उम्मीद करना भी उपहार नहीं सौदा कहलाता है।* *यदि हम किसी को कुछ दान या सहयोग करना चाहते हैं तो हमें यह बिना किसी उम्मीद या आशा के करना चाहिए, ताकि यह हमारा सत्कर्म हो, न कि हमारा अहंकार ।* 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

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Amarnath Sep 20, 2020

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Garima Gahlot Rajput Sep 20, 2020

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rohit patel Sep 20, 2020

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