shashank gupta
shashank gupta Apr 15, 2021

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Arnav Thakur May 9, 2021

+22 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 57 शेयर
SunitaSharma May 8, 2021

+47 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 38 शेयर
Aastha 🌹 May 7, 2021

+25 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 46 शेयर

💖💞💕💐*कर्म पीछा नहीं छोड़ते *💐💕💞💖 एक सेठ जी ने अपने मैनेजर को इतना डाटा--- की मैनेजर को बहुत गुस्सा आया पर सेठ जी को कुछ बोल ना सका-- - वह अपना गुस्सा किस पर निकाले-- हो गया सीधा अपने कंपनी स्टाफ के पास और सारा गुस्सा कर्मचारियों पर निकाल दिया। - अब कर्मचारी किस पर अपना गुस्सा निकाले--? तो जाते-जाते अपने गेट वॉचमैन पर उतारते गए- - अब वॉचमैन किस पर निकाला अपना गुस्सा-? - तो वह घर गया और अपनी बीवी को डांटने लगा बिना किसी बात पर। - अभी वो भी उठी और अपने बच्चे की पीठ पर 2 धमाक धमाक लगा दिया-- -- सारा दिन tv देखता रहता है काम कुछ करता नहीं है-- - अब बच्चा घर से गुस्से से निकला, और सड़क पर सो रहे कुत्ते को पत्थर दे मारा, -- कुत्ता हड़बड़ाकर भागा और सोचने लगा कि इसका मैंने क्या बिगाड़ा-? - और गुस्से में उस कुत्ते ने एक आदमी को काट खाया- -- और कुत्ते ने जिसे काटा वह आदमी कौन था-? -- वही सेठ जी थे, जिन्होंने अपने मैनेजर को डांटा था। - सेठ जी जब तक जिए तब तक यही सोचते रहे कि उस कुत्ते ने आखिर मुझे क्यों काटा-? - --*लेकिन बीज किसने बोया* ? -- आया कुछ समझ में-- *कर्म के फलपीछा नहीं छोड़ते बाबा*-- जाने अनजाने में कितने लोग हमारे व्यवहार से त्रस्त होते हैं, परेशान होते हैं और कितने का तो नुकसान भी होता है। -- पर हमें तो उसका अंदाजा भी नहीं होता, क्योंकि हम तो अपनी मस्ती में ही मस्त है। *पर प्रकृति सब देखती है और उसका फल फिर किसी और के निमित्त से हमें मिलता है, और हमें लगता है कि लोग हमें बेवजह ही परेशान कर रहे हैं* 💖´ *•.¸♥¸.•**जय जय श्री राधे**•.¸♥¸.•*´💖 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 6 शेयर

. तिरुपति बालाजी का रहस्य भारत के प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है तिरुपति बालाजी का मन्दिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। इस मन्दिर में विराजमान भगवान वेंकटेश्वर स्वामी जी की मूर्ति है जिसे भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। तिरुपति बालाजी के 7 रहस्यों के विषय में जानकर आप अभिभूत हो जाएंगे। यहां के सारे रहस्य का जवाब वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। 1:- मूर्ति पर लगे बाल असली है– भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के मूर्ति पर लगे बाल कभी नहीं उलझते वह हमेशा मुलायम रहते हैं ऐसा क्यों होता है इसका जवाब वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। 2:- हजारों साल से बिना तेल का जलता दिया– मन्दिर के गर्भगृह में एक दीपक जलता है आपको जानकर हैरानी होगी यह दीपक हजारों सालों से ऐसे ही जल रहा है वह भी बिना तेल के। यह बात काफी ज्यादा हैरान करने वाली है ऐसा क्यों है इसका जवाब आज तक किसी के पास नहीं है 3:- मन्दिर के मूर्ति को पसीना आता है– मन्दिर के गर्भगृह को ठंडा रखा जाता है पर फिर भी मूर्ति का तापमान 110 फॉरेनहाइट रहता है जो कि काफी रहस्यमई बात है और उससे भी बड़ी रहस्यमई की बात यह है कि भगवान मूर्ति को पसीना भी आता है जिसे समय-समय पर पुजारी पोंछते रहते हैं। 4:- भगवान की मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाज– भगवान वेंकटेश्वर के मूर्ति के कानों के पास अगर ध्यान से सुना जाए, तो समुद्र की लहरों की आवाज आती है। यह भी काफी विचित्र बात है। 5:- मूर्ति बीच में है या दाई ओर है?– जब आप मूर्ति को गर्भगृह के बाहर से देखेंगे तो आपको मूर्ति दाई ओर दिखाई देगी और जब आप मूर्ति को गर्भगृह के अंदर से देखेंगे तब आपको मूर्ति मध्य में दिखेगी। 6:- विशेष गांव से आता है फूल– तिरुपति बालाजी मन्दिर से करीब 23 किलोमीटर दूर एक गांव पड़ता है इसी गांव से मन्दिर के लिए फूल, फल, घी आदि जाता है इस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पर प्रतिबंध है और इस गांव के लोग काफी पुरानी जीवन शैली का उपयोग करते हैं। 7:- परचाई कपूर भी बेअसर है– परचई कपूर एक खास तरह का कपूर होता है जिसे पत्थर पर लगाने पर पत्थर कुछ टाइम बाद चटक जाता है मगर इस कपूर को भगवान की मूर्ति पर लगाया जाता है और इस मूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ******************************************

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 9 शेयर

💕💞💖❤💐*बांवरी के आंसू*💐❤💖💞💕 बरसाना में एक गुजरी रहती थी, जिसका नाम कमला था लेकिन कमला थोड़ी सी बांवरी थी। उसकी सभी सखी - सहेलियां हर रोज अपने मटकी में दूध, दही, शहद, मक्खन भरकर गली-गली बेचने जाती थी। बाँवरी भी अपनी सखियों की नकल करते हुए एक मटकी को जो कि खाली होती है उस पर ढक्कन लगाकर उनके पीछे पीछे चल पड़ती है और गांव की गली-गली जाकर बोलती - " शहद ले लो, शहद !!! गांव के सब लोगों को पता होता है कि इसकी मटकी में कुछ नहीं है। गांव के सब बच्चे उस बांवरी को बहुत चिढ़ाते हैं, कोई उसकी चुनरी खींचता है, कोई उसका घाघरा खींचता है। लेकिन वह समझती है कि यह सब लोग मुझसे कुछ खरीदना चाहते हैं तो वह अपने मुंह में चुनरी को रखकर गर्दन इधर-उधर घुमा कर हंसती हुई आगे निकल जाती है। जब सब सखियां गली-गली जाकर दही - मक्खन बेच लेती हैं तो बाकी बचा हुआ दही मक्खन और छाछ बरसाने की सीढ़ियों में जाकर बैठ जाती है और वहां जाकर आने - जाने वालों को सब बेचती है। बांवरी उनके पीछे - पीछे चल पड़ती है और वह भी वहां जाकर ऐसे बैठ जाती है कि वह शहद बेच रही हैं। जब कोई उससे शहद मांगता है तो जब वह देखते हैं तो इसके पास तो कुछ है नहीं, तो वह आगे हो लेते हैं। लेकिन वह तब भी बहुत खुश रहती है। जब सब सखियां सारा दही दूध बेच कर घर वापस चली जाती हैं तो यह भी उनके पीछे-पीछे चल पडती है ।लेकिन जाने से पहले वह किशोरी जी की चौखट पर माथा टेकना नहीं भूलती। उसका रोज का यही नियम होता। ऐसी भोली भाली और जिसके मन में कोई पाप नहीं है, ऐसी भक्त तो किशोरी जी को बहुत प्रिय हैं। किशोरी जी को बांवरी बहुत प्रिय है। एक दिन बावरी बरसाना की सबसे आखिरी सीढ़ी पर बैठकर सब लोगों को बोल रही होती है - शहद ले लो शहद ले लो। तभी, दो औरतें वहां आकर बैठती है और वह बावरी को बड़े ध्यान से देखती हैं कि इस की मटकी में तो कुछ है नहीं फिर भी यह सब को शहद बेच रही है '' तो वह पूछती है कि अरे लड़की ! क्या बेच रही है तो वह चुनरी मुंह में डालकर गर्दन घुमाकर हंसकर कहती है माताजी शहद बेच रही हूं । उसकी यह बातें सुनकर उसकी बाकी सखियां हंस पड़ती है लेकिन वह दोनों भली औरतें उसका मान रखने के लिए कहती हैं अच्छा अपना यह शहद हमें भी थोड़ा सा चखाओ तो बावरी बहुत खुश होकर उछल - उछल कर अपनी मटकी में से दोना भरती हुई उनको शहद दे देती है। तो वह औरतें सोचती है कि अगर हम कहेंगे कि इसमें शहद नहीं है तो बावरी को दुख होगा तो वह अपनी उंगली से जानबूझकर दोने में से खाली उंगली घुमा कर मुंह में डालती है तो एकदम से हैरान - परेशान हो जाती हैं कि उनकी मुंह में वास्तव में शहद का स्वाद आता है तो वह हक्की-बक्की होकर एक दूसरे की तरफ देखती हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसा शहद कभी जिंदगी में चखा ही नहीं होता। वह कहती हैं बांवरी तुम्हारा शहद तो बहुत ही अच्छा है ।और वह उसको थोड़े से पैसे देकर आगे हो जाती हैं। वह दोनों सब लोगों को बताती हैं कि बावरी के पास सचमुच का शहद है तो सब लोग जाकर उसकी खाली मटकी को देखते हैं लेकिन उन दो औरतों की बातों को मानते हुए जब वह शहद का दोना लेते हैं तो वास्तव में उसमें शहद होती है तो इसकी चर्चा अब दूर दूर तक फैल जाती है। सब लोग बावरी का शहद चखने के लिए दूर-दूर से आते हैं। तभी वहां पर एक लड़का जो कि दूर गांव से आया होता है, वह यह सब देखता है और वह सोचता है कि यह बावरी के पास ऐसी मटकी है जो खाली होने के बावजूद भी सब लोग इसका शहद खाते हैं अगर यह मटकी मेरे पास आ जाए तो मैं इस शहद बेंचकर रातोंरात अमीर बन जाऊंगा । अब वह इसी ताक में रहता है कि कब वह इस बावरी की चमत्कारी मटकी को छीन ले। एक दिन जब बावरी अपने घर को जा रही होती है तो रास्ते में सुनसान जगह पर उस लड़के को मौका मिल ही जाता है वह बावरी को धक्का देकर उसकी मटकी छीन कर भाग जाता है। जब तक बावरी संभलती है तब तक लड़का दूर भाग चुका होता है। बावरी को अपनी मटकी बहुत प्रिय होती है। अपनी मटकी को चोरी हुआ देखकर वह जोर-जोर से दहाडे मारकर रोना शुरू हो जाती है और पैर पटक - पटक कर अपने घर की तरफ दौड़ती भागती - जाती है। घर जाकर बहुत रोती है। उधर, वह लड़का जब घर जा कर देखता है कि देखूं तो सही इसमें कैसा शहद है। कैसी यह चमत्कारी मटकी है। जब वह मटकी के अंदर हाथ डाल कर देखता है तो हजारों की संख्या में मधुमक्खियां उसके ऊपर टूट पडती हैं। और उसे काट - काट कर उसका बुरा हाल कर देती हैं।वह भाग कर जोर - ज़ोर से चिल्लाने लगता है, काट लियो, हाय काट लियो, लेकिन वह मधुमक्खियां किसी को नजर नहीं आतीं। उस पतले से लड़के को मक्खियों ने काट - काट कर उसको राक्षस जैसा मोटा बना देती हैं। लड़का चिल्लाता हुआ अपने कमरे में चला जाता है और रोता रहता है । वह बावरी के बारे में सोचता है कि वह या तो जादूगरनी है या तो मुझे बावरी का श्राप लगा है । यह सोच कर वह सारा दिन रोता रहता है । उधर बावरी का अपने मटकी के बगैर रो - रो कर बुरा हाल हो जाता है। एक दिन उस लड़के को ढूंढते हुए उसके रिश्तेदार बरसाना धाम को आते हैं। तो उनको अपना लड़का उस कमरे में इस अवस्था में मिलता है। उसकी ऐसी दशा होने का कारण पूछते हैं तो वह उनको सब बात बता देता है तो वह कहते हैं सच में तुम्हें बावरी का श्राप लगा है। चलो तुम उसकी मटकी वापस कर आओ । तो वह बरसाना की इस सीढ़ियों में जाकर बावरी को ढूंढते हैं और वहां जाकर सखियों से पूछते हैं कि क्या आज बावरी नहीं आई तो वह सब सखियां कहती हैं कि नहीं बावरी की तो मटकी खो गई है वह तो काफी दिनों से नहीं आई । वह सखियों से उसके घर का रास्ता पूछते - पूछते उसके घर जाते हैं। वहां जाकर देखते हैं कि बाबरी औंधे मुंह अपनी चारपाई पर लेट कर रो रही है तो वह लड़का जाकर बावरी के पैर पकड़ लेता है और जाकर उसकी मटकी उसके पास रख देता है और कहता है कि देवी मुझे क्षमा कर दो जो मैंने तुम्हारे दिल को दुखाया। बावरी अपनी मटकी पाकर बहुत खुश होती है । लेकिन उसके आंसू लगातार बहते रहते हैं। वह लड़का जो कि उसके पांव में पड़ा होता है तो बावरी के आंसू उसके शरीर पर गिरते हैं। उसके आंसू गिरने से उस लड़के के सारे जख्म एकदम से ठीक हो जाते हैं। वह बावरी का धन्यवाद करते हुए अपने घर को चला जाता है। जो भक्त किशोरी जी को प्रिय होते हैं उन भक्तों का कोई भी कुछ नहीं बिगाड सकता । इसलिए हमें किशोरी जी और उनके भक्तों का हमेशा मान करना चाहिए। कभी भी उनका दिल नहीं दुखाना चाहिए, क्योंकि उनका अपमान मतलब हमने किशोरी जी का निरादर किया। 💖´ *•.¸♥¸.•**जय जय श्री राधे**•.¸♥¸.•*´💖 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

*. "अपने उद्धार के लिये खास बातें" हमारा शरीर निरन्तर जा रहा है, बचपन गया, जवानी चली गयी और हमें पता भी नहीं चला; ऐसे ही एक दिन बुढ़ापा भी चला जायगा। धीरे धीरे मौत हमारे करीब आ रही है। अत: हमें अपना समय उसी काम में लगाना चाहिये, जिसे हम ही कर सकते हैं, दूसरा कोई भी कर नहीं सकता, अपना कल्याण या अपना उद्धार केवल एकमात्र हम ही कर सकते हैं। संसार के काम तो दूसरे लोग भी कर सकते हैं। हम यहाँ निर्धारित समय से ज्यादा रहने वाले नहीं हैं। हम यहाँ आये हैं और हमें एक-न-एक दिन जाना ही पड़ेगा। हम यहाँ पशु-पक्षियों की तरह अपने कर्मों का फल भोगने के लिये ही नहीं हैं, हम यहाँ अपना उद्धार करने के लिये भी आये हैं। इसलिये सबसे पहले यह विश्वास होना चाहिये कि भगवान् मेरे हैं। जैसे माँ मेरी है, यह विश्वास होता है, वैसे ही भगवान् हमारी सबसे बड़ी माँ हैं। वे माँ भी हैं-पिता भी हैं-ऐसा मानना चाहिये। परमात्मा कैसे भी हों, आखिर हैं तो हमारे ही, संसार कैसा भी हो, उसको एक-न-एक दिन छोड़ना ही है। जब उसे छूट जाना है तो उस पर क्या विचार करें, जिसको पाना है उस पर विचार करें। परमपिता परमात्मा हैं और वे अपने ही हैं, उनको छोड़कर शरीर को मुख्य मानना महान् गलती होगी। श्रीभगवान् के अंश को श्रीभगवान् में ही स्थित होना चाहिये, पर हम भूलवश प्रकृति के अंश को पकड़े बैठे हैं-यही गलती है। श्रीभगवान् गीता में कहते हैं - ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः। मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥ (गीता १५ ।७) इस देह में यह सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है, परंतु वही जीवात्मा प्रकृति में स्थित मन और पाँचों इन्द्रियों को आकर्षित करता है अर्थात् वह उन्हें ही अपना मान लेता है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि श्रीभगवान् जी हमें निरन्तर अपने पास बुला रहे हैं, इसीलिये हम आप कहीं टिक नहीं पाते, जिसे पकड़ते हैं, वह हमारे हाथ से छूट जाता है। इसीलिये परमपिता परमात्मा भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं कि तुम सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू शोक मत कर- सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ (गीता १८।६६) शरण में जाने का काम जीव का है और सब पापों से मुक्त करने का काम श्रीभगवानजी का है। अपने उद्धार (कल्याण) के लिये खास बात यही है कि आपको मैं-पन बदलना ही होगा। यदि मैं साधक हूँ तो साधन से विरुद्ध काम कैसे कर सकता हूँ ? दूसरे का कर्तव्य देखना अनधिकार प्रयास है। साधन करने का निर्धारित समय नहीं होता, ऐसा नहीं है कि इतने घण्टे कर लिया, अब छुट्टी हो गयी। साधना करना तो जीवन है। इसीलिये श्रीगीताजी में श्रीभगवान् जी ने कहा है कि 'तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च' अर्थात् तू सब समय में निरन्तर अपने सभी कार्यों को करते हुए मेरा स्मरण कर। उपर्युक्त विवेचन के आधार पर उपसंहार रूप में हम कह सकते हैं कि हमें अपने उद्धार के लिये दो बातें खास करनी हैं-एक तो संसार को भगवान् का स्वरूप मानकर कर्तव्यबुद्धि से उसकी सेवा करनी है और दूसरी बात यह कि श्रीभगवान् जी से ही प्रेम करना है, उन्हें ही अपना मानना है। ये काम हमें किसी भी हालत में नहीं छोड़ने हैं। 💖´ *•.¸♥¸.•**जय जय श्री राधे**•.¸♥¸.•*´💖 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB