मकर संक्रांति विशेष 〰️〰️🌼🌼〰️〰️ मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है अतः इस समय किये गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी। मकर संक्रांं‍ति पूजा व‍िध‍ि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए। पानी में तिल मिलाकार स्नान करना चाहिए। अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए। इस द‍िन तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है।इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पंचोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए इसके बाद यथा सामर्थ्य गंगा घाट अथवा घर मे ही पूर्वाभिमुख होकर यथा सामर्थ्य गायत्री मन्त्र अथवा सूर्य के इन मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करना चाहिये। मन्त्र 👉 १- ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम: २- ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , ऊं विष्णवे नम: पूजा-अर्चना में भगवान को भी तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं। तदोपरान्त ज्यादा से ज्यादा भोग प्रसाद बांटे। इसके घर में बनाए या बाजार में उपलब्ध तिल के बनाए सामग्रियों का सेवन करें। इस पुण्य कार्य के दौरान किसी से भी कड़वे बोलना अच्छा नहीं माना गया है। मकर संक्रांति पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण जरूर देना चाहिए। राशि के अनुसार दान योग्य वस्तु 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 गुड़, मूंगफली दाने एवं तिल का दान करें। वृषभ🐂 सफेद कपड़ा, दही एवं तिल का दान करें। मिथुन👫 मूंग दाल, चावल एवं कंबल का दान करें। कर्क🦀 चावल, चांदी एवं सफेद तिल का दान करें। सिंह🦁 तांबा, गेहूं एवं सोने के मोती का दान करें। कन्या👩 खिचड़ी, कंबल एवं हरे कपड़े का दान करें। तुला⚖️ सफेद डायमंड, शकर एवं कंबल का दान करें। वृश्चिक🦂 मूंगा, लाल कपड़ा एवं तिल का दान करें। धनु🏹 पीला कपड़ा, खड़ी हल्दी एवं सोने का मोती दान करें। मकर🐊 काला कंबल, तेल एवं काली तिल दान करें। कुंभ🍯 काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी एवं तिल दान करें। मीन🐳 रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल एवं तिल दान करें। कुछ अन्य उपाय 〰️〰️〰️〰️〰️ सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण है 👉 कहते हैं इसी त्यौहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं 👉 आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहाँ से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है 👉 अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसको ठीक कर सकते हैं 👉 जहाँ पर परिवार में रोग कलह तथा अशांति हो वहां पर रसोई घर में ग्रहों के विशेष नवान्न से पूजा करके लाभ लिया जा सकता है 👉 पहली होरा में स्नान करें,सूर्य को अर्घ्य दें 👉 श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ करें,या गीता का पाठ करें 👉 मनोकामना संकल्प कर नए अन्न,कम्बल और घी का दान करें 👉 लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें 👉 सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें मंत्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" 👉 संध्या काल में अन्न का सेवन न करें 👉 तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें 👉 शनि देव के मंत्र का जाप करें 👉 मंत्र "ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः" 👉 घी,काला कम्बल और लोहे का दान करें। मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी को, शंका समाधान 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मकर संक्रांति का त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। बीते कुछ वर्षों से मकर संक्रांति की तिथि और पुण्यकाल को लेकर उलझन की स्थिति बनने लगी है। आइए देखें कि यह उलझन की स्थिति क्यों बनी हैं और मकर संक्रांति का पुण्यकाल और तिथि मुहूर्त क्या है। दरअसल इस उलझन के पीछे खगोलीय गणना है। गणना के अनुसार हर साल सूर्य के धनु से मकर राशि में आने का समय करीब 20 मिनट बढ़ जाता है। इसलिए करीब 72 साल के बाद एक दिन के अंतर पर सूर्य मकर राशि में आता है। ऐसा उल्लेख मिलता है कि मुगल काल में अकबर के शासन काल के दौरान मकर संक्रांति 10 जनवरी को मनाई जाती थी। अब सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय 14 और 15 के बीच में होने लगा क्योंकि यह संक्रमण काल है। साल 2012 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को हुआ था इसलिए मकर संक्रांति इस दिन मनाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई गयी ऐसी गणना कहती है। इतना ही नहीं करीब पांच हजार साल बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनाई जाने लगेगी ज्योतिषीय गणना एवं मुहुर्त चिंतामणी के अनुसार सूर्य सक्रान्ति समय से 16 घटी पहले एवं 16 घटी बाद तक का पुण्य काल होता है निर्णय सिन्धु के अनुसार मकर सक्रान्ति का पुण्यकाल सक्रान्ति से 20 घटी बाद तक होता है किन्तु सूर्यास्त के बाद मकर सक्रान्ति प्रदोष काल रात्रि काल में हो तो पुण्यकाल दूसरे दिन माना जाता है। इस वर्ष भगवान सूर्य देव 14 जनवरी गुरुवार को प्रातः 08:13 बजे उतराषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण मकर राशि में प्रवेश करेगें। उस समय चन्द्र देव भी मकर राशि के श्रवण नक्षत्र वज्र योग एवं बव करण में विचरण कर रहे होंगे। इस वर्ष संक्रांति 14 तारीख प्रातः 08:13 से आरंभ होकर पूरे दिन रहेगी इसलिये मकर संक्रांति का त्योहर 14 जनवरी गुरुवार को ही मनाया जाएगा। मकर संक्रांति फल 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ वेदों में सूर्य उपासना को सर्वोपरि माना गया है। जो आत्मा, जीव, सृष्टि का कारक एक मात्र देवता है जिनके हम साक्षात रूप से दर्शन करते है। सूर्य देव कर्क से धनु राशि में 6 माह भ्रमण कर दक्षिणयान होते है जो देवताओं की एक रात्रि होती है। सूर्य देव मकर से मिथुन राशि में 6 माह भ्रमण कर उत्तरायण होते है जो एक दिन होता है। जिसमें सिद्धि साधना पुण्यकाल के साथ-साथ मांगलिक कार्य विवाह, ग्रह प्रवेश, जनेउ, संस्कार, देव प्राण, प्रतिष्ठा, मुंडन कार्य आदि सम्पन्न होते है। सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते है इस सक्रमण को मकर सक्रान्ति कहा जाता है जिसमें स्वर्ग के द्वार खुलते है। संक्रांति शुभ होगी या अशुभ इसका विचार उसके वाहन एवं उपवाहन से किया जाता है। फिर उसका नाम भी रखा जाता है और फिर देखा जाता है कि वह देश-दुनिया के लिए कैसी रहेगी। माना जाता है कि संक्रांति जो कुछ ग्रहण करती है, उसके मूल्य बढ़ जाते हैं या वह नष्ट हो जाता है। वह जिसे देखती है, वह नष्ट हो जाता है, जिस दिशा से वह जाती है, वहां के लोग सुखी होते हैं, जिस दिशा को वह चली जाती है, वहां के लोग दुखी हो जाते हैं। इस वर्ष संक्रांति के प्रवेश समय मकर लग्न में पाँच ग्रहों की युति संसारभर में कही शुभ और कही अशुभ फल प्रदान करेगी। वाहन, दृष्टि सहित मकर संक्रांति के स्वरूप के अनुसार जमाखोर, चोर, लोभी, धूर्त और ठग के कार्यों से जनता त्रस्त रहेगी। अजा, अजजा, अल्पसंख्यक, निर्धन, असहाय, वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनेंगी। संगीतकार, अभिनेता और निर्माताओं के लिए कष्टप्रद रहेगी, वहीं भवन निर्माण, फर्नीचर, लकड़ी, खनिज संपदा, धातु के दामों में बेतहाशा वृद्धि होगी। नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप रहेगा और कई उग्र आंदोलन भी होंगे। उद्योगपतियों, व्यापारियों, आयात निर्यात करने वालो, शेयर कारोबारियों के लिये सुख फलदायक है। सक्रान्ति का पश्चिम दिशा की और गमन होगा। जिसके प्रभाव से देश के पश्चिमी प्रांतों के लिए कष्टकारक योग बनेगें। संक्रान्ति रात्रि अर्धभाग व्यापिनी होने से आतंकवादियों, हिसंक प्रवृत्ति वालों, देश द्रोहियों के लिये कष्ट कारक रहेगी। मकर संक्रांति के वाहनादि परिचय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ नाम👉 मन्द वार मुख👉 उत्तर दृष्टि👉 ईशान गमन👉 दक्षिण वाहन👉 सिंह उपवाहन👉 गज वस्त्र👉 श्वेत आयुध👉 भुशुण्डी भक्ष्य पदार्थ👉 अन्न गन्ध द्रव्य👉 कस्तूरी वर्ण👉 देवता पुष्प👉 नाग्केश्वर वय👉 शिशु अवस्था👉 पन्थ् करण👉 मुख पूर्व स्थिति👉 बैठी भोजन पात्र👉 सुवर्ण आभूषण👉 नुपुर कन्चुकी👉 विचित्र मकर संक्रान्ति का पुण्यकाल 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सूर्य 14 जनवरी को सुबह 8.13 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन पुण्य काल सवा चार घंटे तक यानी सुबह 8.13 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। इसी बीच 14 मिनट तक अर्थात 8.13 बजे से 8.27 बजे तक महापुण्य काल रहेगा। इस काल में तिल, गुड़, वस्त्र का दान करना और तर्पण करना पुण्य फलदायी होगा। मकर-संक्रांति का राशि अनुसार फल 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष-ईष्ट सिद्धि वृषभ- धर्म लाभ मिथुन- शारीरिक कष्ट कर्क- सम्मान में वृद्धि सिंह- भय व चिन्ता कन्या- धन वृद्धि तुला- कलह व मानसिक चिंता वृश्चिक- धनागम व सुख-शांति धनु- धन लाभ मकर- स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति कुंभ- लाभ मीन- प्रतिष्ठा में वृद्धि

मकर संक्रांति विशेष
〰️〰️🌼🌼〰️〰️
मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।

मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व  की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है अतः इस समय किये गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी।
          
मकर संक्रांं‍ति पूजा व‍िध‍ि
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए। पानी में तिल मिलाकार स्नान करना चाहिए। अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए। इस द‍िन तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है।इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पंचोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए इसके बाद यथा सामर्थ्य गंगा घाट अथवा घर मे ही पूर्वाभिमुख होकर यथा सामर्थ्य गायत्री मन्त्र अथवा सूर्य के इन मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करना चाहिये।

मन्त्र 👉  १- ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम:

२-  ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , 
ऊं विष्णवे नम: 

पूजा-अर्चना में भगवान को भी तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं। तदोपरान्त ज्यादा से ज्यादा भोग प्रसाद बांटे।

इसके घर में बनाए या बाजार में उपलब्ध तिल के बनाए सामग्रियों का सेवन करें। इस पुण्य कार्य के दौरान किसी से भी कड़वे बोलना अच्छा नहीं माना गया है। 

मकर संक्रांति पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण जरूर देना चाहिए।

राशि के अनुसार दान योग्य वस्तु
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
मेष🐐 गुड़, मूंगफली दाने एवं तिल का दान करें। 
वृषभ🐂 सफेद कपड़ा, दही एवं तिल का दान करें। 
मिथुन👫 मूंग दाल, चावल एवं कंबल का दान करें। 
कर्क🦀 चावल, चांदी एवं सफेद तिल का दान करें। 
सिंह🦁 तांबा, गेहूं एवं सोने के मोती का दान करें। 
कन्या👩 खिचड़ी, कंबल एवं हरे कपड़े का दान करें। 
तुला⚖️ सफेद डायमंड, शकर एवं कंबल का दान करें। 
वृश्चिक🦂 मूंगा, लाल कपड़ा एवं तिल का दान करें। 
धनु🏹 पीला कपड़ा, खड़ी हल्दी एवं सोने का मोती दान करें। 
मकर🐊 काला कंबल, तेल एवं काली तिल दान करें। 
कुंभ🍯 काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी एवं तिल दान करें। 
मीन🐳 रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल एवं तिल दान करें।
    
कुछ अन्य उपाय
〰️〰️〰️〰️〰️
सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण है
👉  कहते हैं इसी त्यौहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं
👉 आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहाँ से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है
👉 अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसको ठीक कर सकते हैं
👉 जहाँ पर परिवार में रोग कलह तथा अशांति हो वहां पर रसोई घर में ग्रहों के विशेष नवान्न से पूजा करके लाभ लिया जा सकता है
👉 पहली होरा में स्नान करें,सूर्य को अर्घ्य दें
👉 श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ करें,या गीता का पाठ करें
👉 मनोकामना संकल्प कर नए अन्न,कम्बल और घी का दान करें
👉 लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें
👉 सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें
मंत्र  "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"
👉 संध्या काल में अन्न का सेवन न करें
👉 तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें
👉 शनि देव के मंत्र का जाप करें
👉 मंत्र  "ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
👉 घी,काला कम्बल और लोहे का दान करें।

मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी को, शंका समाधान
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
मकर संक्रांति का त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। 
बीते कुछ वर्षों से मकर संक्रांति की तिथि और पुण्यकाल को लेकर उलझन की स्थिति बनने लगी है। 
आइए देखें कि यह उलझन की स्थिति क्यों बनी हैं और मकर संक्रांति का पुण्यकाल और तिथि मुहूर्त क्या है। 
दरअसल इस उलझन के पीछे खगोलीय गणना है। गणना के अनुसार हर साल सूर्य के धनु से मकर राशि में आने का समय करीब 20 मिनट बढ़ जाता है। इसलिए करीब 72 साल के बाद एक दिन के अंतर पर सूर्य मकर राशि में आता है। 
ऐसा उल्लेख मिलता है कि मुगल काल में अकबर के शासन काल के दौरान मकर संक्रांति 10 जनवरी को मनाई जाती थी। 
अब सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय 14 और 15 के बीच में होने लगा क्योंकि यह संक्रमण काल है।
साल 2012 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को हुआ था इसलिए मकर संक्रांति इस दिन मनाई गई थी। 
पिछले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई गयी ऐसी गणना कहती है। 
इतना ही नहीं करीब पांच हजार साल बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनाई जाने लगेगी
ज्योतिषीय गणना एवं मुहुर्त चिंतामणी के अनुसार सूर्य सक्रान्ति समय से 16 घटी पहले एवं 16 घटी बाद तक का पुण्य काल होता है निर्णय सिन्धु के अनुसार मकर सक्रान्ति का पुण्यकाल सक्रान्ति से 20 घटी बाद तक होता है किन्तु सूर्यास्त के बाद मकर सक्रान्ति प्रदोष काल रात्रि काल में हो तो पुण्यकाल दूसरे दिन माना जाता है। 
इस वर्ष भगवान सूर्य देव 14 जनवरी गुरुवार को प्रातः 08:13 बजे उतराषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण मकर राशि में प्रवेश करेगें। 
उस समय चन्द्र देव भी मकर राशि के श्रवण नक्षत्र वज्र योग एवं बव करण में विचरण कर रहे होंगे। 
इस वर्ष संक्रांति 14 तारीख प्रातः 08:13 से आरंभ होकर पूरे दिन रहेगी इसलिये मकर संक्रांति का त्योहर 14 जनवरी गुरुवार को ही मनाया जाएगा।

मकर संक्रांति फल
〰️〰️〰️〰️〰️〰️
वेदों में सूर्य उपासना को सर्वोपरि माना गया है। जो आत्मा, जीव, सृष्टि का कारक एक मात्र देवता है जिनके हम साक्षात रूप से दर्शन करते है। 
सूर्य देव कर्क से धनु राशि में 6 माह भ्रमण कर दक्षिणयान होते है जो देवताओं की एक रात्रि होती है। 
सूर्य देव मकर से मिथुन राशि में 6 माह भ्रमण कर उत्तरायण होते है जो एक दिन होता है। 
जिसमें सिद्धि साधना पुण्यकाल के साथ-साथ मांगलिक कार्य विवाह, ग्रह प्रवेश, जनेउ, संस्कार,
देव प्राण, प्रतिष्ठा, मुंडन कार्य आदि सम्पन्न होते है। सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते है इस सक्रमण को मकर सक्रान्ति कहा जाता है जिसमें स्वर्ग के द्वार खुलते है।
संक्रांति शुभ होगी या अशुभ इसका विचार उसके वाहन एवं उपवाहन से किया जाता है। 
फिर उसका नाम भी रखा जाता है और फिर देखा जाता है कि वह देश-दुनिया के लिए कैसी रहेगी। माना जाता है कि संक्रांति जो कुछ ग्रहण करती है, उसके मूल्य बढ़ जाते हैं या वह नष्ट हो जाता है। 
वह जिसे देखती है, वह नष्ट हो जाता है, जिस दिशा से वह जाती है, वहां के लोग सुखी होते हैं, जिस दिशा को वह चली जाती है, वहां के लोग दुखी हो जाते हैं।
इस वर्ष संक्रांति के प्रवेश समय मकर लग्न में पाँच ग्रहों की युति संसारभर में कही शुभ और कही अशुभ फल प्रदान करेगी। 
वाहन, दृष्टि सहित मकर संक्रांति के स्वरूप के अनुसार जमाखोर, चोर, लोभी, धूर्त और ठग के कार्यों से जनता त्रस्त रहेगी। 
अजा, अजजा, अल्पसंख्यक, निर्धन, असहाय, वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनेंगी। 
संगीतकार, अभिनेता और निर्माताओं के लिए कष्टप्रद रहेगी, वहीं भवन निर्माण, फर्नीचर, लकड़ी, खनिज संपदा, धातु के दामों में बेतहाशा वृद्धि होगी। नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप रहेगा और कई उग्र आंदोलन भी होंगे। 
उद्योगपतियों, व्यापारियों, आयात निर्यात करने वालो, शेयर कारोबारियों के लिये सुख फलदायक है। सक्रान्ति का पश्चिम दिशा की और गमन होगा। जिसके प्रभाव से देश के पश्चिमी प्रांतों के लिए कष्टकारक योग बनेगें। 
संक्रान्ति रात्रि अर्धभाग व्यापिनी होने से आतंकवादियों, हिसंक प्रवृत्ति वालों, देश द्रोहियों के लिये कष्ट कारक रहेगी।

मकर संक्रांति के वाहनादि परिचय
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
नाम👉 मन्द
वार मुख👉 उत्तर
दृष्टि👉 ईशान
गमन👉 दक्षिण
वाहन👉 सिंह
उपवाहन👉 गज
वस्त्र👉 श्वेत
आयुध👉 भुशुण्डी
भक्ष्य पदार्थ👉 अन्न
गन्ध द्रव्य👉 कस्तूरी
वर्ण👉 देवता
पुष्प👉 नाग्केश्वर
वय👉 शिशु
अवस्था👉 पन्थ्
करण👉 मुख पूर्व
स्थिति👉 बैठी
भोजन पात्र👉 सुवर्ण
आभूषण👉 नुपुर
कन्चुकी👉 विचित्र

मकर संक्रान्ति का पुण्यकाल
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
सूर्य 14 जनवरी को सुबह 8.13 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेगा। 
इस दिन पुण्य काल सवा चार घंटे तक यानी सुबह 8.13 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। 
इसी बीच 14 मिनट तक अर्थात 8.13 बजे से 8.27 बजे तक महापुण्य काल रहेगा। 
इस काल में तिल, गुड़, वस्त्र का दान करना और तर्पण करना पुण्य फलदायी होगा।

मकर-संक्रांति का राशि अनुसार फल 
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
मेष-ईष्ट सिद्धि
वृषभ- धर्म लाभ
मिथुन- शारीरिक कष्ट
कर्क- सम्मान में वृद्धि
सिंह- भय व चिन्ता
कन्या- धन वृद्धि
तुला- कलह व मानसिक चिंता
वृश्चिक- धनागम व सुख-शांति
धनु- धन लाभ
मकर- स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति
कुंभ- लाभ
मीन- प्रतिष्ठा में वृद्धि

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+25 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर
anju Jan 22, 2021

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Surinder Jan 22, 2021

+11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 7 शेयर
Jaikumar Jan 22, 2021

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 7 शेयर

+19 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 32 शेयर
balram choudhary Jan 22, 2021

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

+34 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 11 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB