🌹bk preeti 🌹
🌹bk preeti 🌹 Feb 28, 2021

आप "स्थिति- परिस्थिति" को नहीं बदल सकते हैं, लेकिन अपनी "प्रतिक्रिया" को जरूर बदल सकते हैं। आपकी प्रतिक्रिया "गीत" के रूप में भी हो सकती है और "गाली" के रूप में भी, यह तो आपके ऊपर ही निर्भर है। विचार करें, कहीं आप भी तो अज्ञानवश अकारण क्लेशों को तो जन्म नहीं दे रहे हैं..

आप "स्थिति- परिस्थिति" को नहीं बदल सकते हैं,
                    लेकिन 
अपनी "प्रतिक्रिया" को जरूर बदल सकते हैं।
            आपकी प्रतिक्रिया
 "गीत" के रूप में भी हो सकती है 
      और "गाली" के रूप में भी,
     यह तो आपके ऊपर ही निर्भर है।
              विचार करें, 
कहीं आप भी तो अज्ञानवश अकारण क्लेशों को 
      तो जन्म नहीं दे रहे हैं..

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कामेंट्स

Ranveer soni Feb 28, 2021
💐💐जय श्री राधे💐💐

💫Shuchi Singhal💫 Feb 28, 2021
Jai Shri Krishna Radhe Radhe Shub Ratri dear sister ji Thakur ji ki kirpa aap per our apki family pe bni rhe pyari Bhena ji Jai jineder🙏🍃🍂🍫🙋

Naresh Rawat Feb 28, 2021
शुभ रात्रि वंदन जी🙏🌙.*☆ जय श्रीकृष्ण सिस्टर जी🙏🌹 राधे राधे जी🙏🌷ठाकुर जी आप सपरिवार पर आपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाएँ रखे जी🙏 आप सपरिवार सदा स्वस्थ 💪और खुश🙂 रहो जी🙏 शुभ रात्रि सबा खैर 😴

R C GARG Feb 28, 2021
जय श्री कृष्णा !! शुभ रात्रि✨ 🌚⏰ वंदन जी !! जय जिनेन्द्र जी !! 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏

OMG Feb 28, 2021
शुभरात्री🌷🙏🏼

CG Sahu Feb 28, 2021
ati sunder thought radhe Krishnaj nice good nigh🙏🏻🙏🏻👌🏻🙋‍♀️

brijmohan kaseara Feb 28, 2021
शुभ रात्रि जी राम राम जी सादर नमस्कार

A mishra ji Mar 1, 2021
शुभ रात्री वंदन good night ji Jay shree krishna राधे 🏵️ 🌷 ji good morning ji Jay shree krishna ji Jay जितेन्द्र जी 🏵️ 🏵️ 🌷 🌷 🌷 🌷

A mishra ji Mar 1, 2021
Jay shri krishna very nice Beautiful post ji thank you so much ji how r u 🌹 🌹 good morning ji Jay jitendra ji 💞 💞 🌷

Ravi Kumar Taneja Mar 1, 2021
🌹ऊँ नम: शिवाय।।🌹 प्रभु भोलेनाथ की कृपा आप सब पर बनी रहे 🙏🌸🙏 हर हर महादेव 🙏🌺🙏 जय महाकाल 🙏🌲🙏 जय भोलेनाथ🙏🌿🙏 🙏🌻🙏शुभ प्रभात वंदन जी🙏🌻🙏 🕉🦚🦢🙏🌸🙏🌸🙏🦢🦚🕉

s.r.pareek rajasthan Mar 1, 2021
Good morning have a great day jay shri krishna ji pyari bahina preeti shree sada mast rahe ji 👍👌🙏🏻🙏🏻🍁🍁🥀🌺🌿🌠🍒🌷🌺☕☕👈👈👈

🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

🏵️ *ताँबा - कोरोना के लिए घातक* 🏵️ ताँबा धातु और कोरोना वायरस को लेकर एक हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है ताँबा धारण करने वाले पर कोरोना का असर नहीं हो रहा. अगर किसी ने शुद्ध ताँबे की अंगूठी, कड़ा या पैंडेंट पहना हुआ है तो कोरोना वायरस उस पर बेअसर है। ब्रिटेन के माइक्रोबायोलॉजी रिसर्चर कीविल का दावा है ताँबा वायरसों का काल है. कीविल काफी समय से ताँबे का विभिन्न वायरसों पर प्रयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कोविड 19 ही नहीं कोरोना परिवार के अन्य वायरस भी ताँबे के संपर्क में आते ही तुरंत नष्ट हो जाते हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना में माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर माइकल जी श्मिट कहते हैं कीविल का काम हमारे पूर्वजों द्वारा ताँबे के अधिक से अधिक प्रयोग के कारण को सत्यापित करता है। खासकर भारत में तो ताँबे का बहुत ही व्यापक प्रयोग मिलता है। नदियों को साफ़ रखने के लिए उनमें ताँबे के सिक्के डालने से लेकर रसोई में ताँबे के बर्तनों के इस्तेमाल तक ताँबे के चमत्कारिक गुणों का उपयोग हुआ है। कीविल का कहना है ताँबा मनुष्य को प्रकृति का वरदान है। प्राचीनकाल से ही मनुष्य ने इसकी जर्म्स और बैक्टीरिया नष्ट करने की प्रकृति को जान लिया था। उनका मानना है यदि अस्पतालों, सार्वजानिक स्थानों और घरों के हैंडल और रेलिंग्स ताँबे के बनाये जाएं तो संक्रमणजनित रोगों पर बड़ी आसानी से विजय पाई जा सकती है। सनातन में सूर्य को सबसे बड़ा इम्युनिटी बूस्टर माना गया है और ताँबा सूर्य की धातु है. ताँबे को सबसे पवित्र और शुद्ध धातु भी माना गया है। 1918 में भारत में फ्लू महामारी से लगभग दो करोड़ लोग मारे गए थे, कहते हैं तब भी जिन लोगों ने ताँबा पहना हुआ था उन पर इस महामारी का कोई असर नहीं हुआ...! 🌹 *ज्ञानस्य मूलम धर्मम्* 🌹

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🌹bk preeti 🌹 Apr 11, 2021

आप सभी उदास ना हों , बहुत ही जल्दी सब ठीक होगा.. और फिर से ज़िंदगी की उड़ान शुरू होगी , अभी के दौर के लिए कुछ पंक्तियाँ ... आज सलामत रहे , तो कल की सहर देखेंगे... आज पहरे मे रहे तो कल का पहर देखेंगें । सासों के चलने के लिए , कदमों का रुकना ज़रूरी है... घरों में बंद रहना दोस्तों हालात की मजबूरी है । अब भी न संभले तो बहुत पछताएँगे.. सूखे पत्तों की तरह हालात की आँधी में बिखर जाएँगे । यह जंग मेरी या तेरी नहीं , हम सब की है.. इस की जीत या हार भी हम सब की है । अपने लिए नहीं , अपनों के लिए जीना है... यह जुदाई का ज़हर दोस्तों , घूँट- घूँट पीना है । आज महफूज़ रहे , तो कल मिल के खिलखिलाएँगे.. गले भी मिलेंगे , और हाथ भी मिलाएँगे। शुभ रात्रि 💐💐🌹🌹🙏

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🌹bk preeti 🌹 Apr 10, 2021

अध्यात्म बड़ा सरल है। फिर भी लोग मन में कई भ्रांतियां पाल लेते हैं कि कहीं आध्यात्मिक होने पर घर छोड़कर संन्यास लेना पड़ जाए, कहीं बैरागी न हो जाऊं, कहीं गृहस्थ धर्म न छोड़ दूं। अध्यात्म तो हमें जीवन जीना सिखाता है। जैसे कोई भी मशीन खरीदने पर उसके साथ एक मैन्युअल बुक आती है, ऐसे ही तन-मन को चलाने के लिए मैन्युअल बुक गीता आदि आध्यात्मिक शास्त्र और गुरु होते हैं जो हमें शरीर, इंद्रियों, मन, बुद्धि अहंकार का प्रयोग करना सिखाते हैं। घर-गृहस्थी में तालमेल बिठाना सिखाते हैं, समाज में आदर्श के रूप में रहना सिखाते हैं, मन को सुलझाना सिखाते हैं। अत: धर्म कोई भी हो, लेकिन सभी को आध्यात्मिक अवश्य होना चाहिए। अब प्रश्र उठता है कि अध्यात्म का लक्ष्य क्या है? यह समझो जैसे आप कभी पहाडिय़ों पर घूमने जाते हैं। पहाडिय़ों पर मंजिल भी वैसी ही होती है, जैसा रास्ता। फिर आप रास्ते के साइड सीन का आनंद लेते हैं, हर सीन को देखकर प्रसन्न होते हैं, उसका मजा लेते हैं। फिर अंत में जहां पहुंचते हैं, वहां भी वही दृश्य पाते हैं। अत: रास्ते का ही मजा है। लॉन्ग ड्राइव में आप रास्ते का ही आनंद लेते हैं। अध्यात्म की यात्रा भी ऐसी ही होती है जिसमें रास्ते का ही मजा है। अध्यात्म कहता है कि बीतते हुए हर पल का आनंद लो, उस पल में रहो, हर पल को खुशी के साथ जियो। हर परिस्थिति, सुख-दुख, मान-सम्मान, लाभ-हानि से गुजरते हुए अपने में मस्त रहो। द्वंद्वों में सम्भाव में रहो क्योंकि मुक्ति मरने के बाद नहीं, जीते जी की अवस्था है। जब हम अपने स्वरूप के साथ जुड़कर हर पल को जीते हैं, तब वह जीते जी मुक्त भाव में ही बना रहता है। अध्यात्म कोई मंजिल नहीं, बल्कि यात्रा है। इसमें जीवन भर चलते रहना है। यह यात्रा हमें वर्तमान में रहना और अभी में आनंद लेना सिखाती है। यदि ‘अभी में’ रहकर उस आनंद भाव में नहीं आए तो कभी हम आनंद में नहीं आ पाएंगे और जब भी आएंगे, उस समय भी अभी ही होगा। वैसे हम पूरा जीवन अभी-अभी की शृंखला में जीते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक अभी-अभी-अभी में ही जीते हैं। फिर भी मन भूतकाल या भविष्य में ही बना रहता है और भूतकाल का दुख या भविष्य का डर या लालच में ही मन घूमता रहता है लेकिन जब हम अभी में आते हैं, उसी समय से हमारे जीवन में अध्यात्म का प्रारम्भ होता है और फिर हम इस अभी-अभी की कड़ी को पकड़ कर रखते हैं। इसलिए मुक्ति अभी में है, भविष्य में नहीं। अत: यदि हम जीवन भर अभी को पकड़ कर रखें फिर हम जहां हैं जैसे हैं, वहीं आध्यात्मिक हो सकते हैं।

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VIDIA TOMAR Apr 12, 2021

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Shanti Pathak Apr 12, 2021

*जय माता दी* *शुभरात्रि वंदन* *आप सभी को आज के लिए शुभरात्रि एवं कल के लिए चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाए* मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत भी किए जाते हैं। नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना से शुरू होता है। प्रथम नवरात्रि में मां शैलपुत्री, द्वितीय में मां ब्रहाचारिणी, तृतीया में मां चन्द्रघण्टा, चतुर्थ में कूष्माण्डा, पंचम में मां स्कन्दमाता, षष्ठ में मां कात्यायनी, सप्तम में मां कालरात्री, अष्टम में मां महागौरी, नवम् में मां सिद्विदात्री का पूजन किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस नवरात्रि मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है। जबकि प्रस्थान नर वाहन (मानव कंधे) पर होगा। चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त। चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल को प्रातः 8 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल को प्रातः 10: 16 पर समाप्त हो रही है। कलश स्थापना मुहूर्त । कलश स्थापना 13 अप्रैल को प्रातः 5:45 बजे से प्रातः 9:59 तक और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11: 41 से 12:32 तक है। 🚩जय माता दी 🚩 ॥ माँ शैलपुत्री ॥ मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। मां शैलपुत्री सती के नाम से भी जानी जाती हैं। इनकी कहानी इस प्रकार है - एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ करवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेज दिया, लेकिन भगवान शिव को नहीं। देवी सती भलीभांति जानती थी कि उनके पास निमंत्रण आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो उस यज्ञ में जाने के लिए बेचैन थीं, लेकिन भगवान शिव ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ में जाने के लिए उनके पास कोई भी निमंत्रण नहीं आया है और इसलिए वहां जाना उचित नहीं है। सती नहीं मानीं और बार बार यज्ञ में जाने का आग्रह करती रहीं। सती के ना मानने की वजह से शिव को उनकी बात माननी पड़ी और अनुमति दे दी। सती जब अपने पिता प्रजापित दक्ष के यहां पहुंची तो देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं और सिर्फ उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। उनकी बाकी बहनें उनका उपहास उड़ा रहीं थीं और सति के पति भगवान शिव को भी तिरस्कृत कर रहीं थीं। स्वयं दक्ष ने भी अपमान करने का मौका ना छोड़ा। ऐसा व्यवहार देख सती दुखी हो गईं। अपना और अपने पति का अपमान उनसे सहन न हुआऔर फिर अगले ही पल उन्होंने वो कदम उठाया जिसकी कल्पना स्वयं दक्ष ने भी नहीं की होगी। सती ने उसी यज्ञ की अग्नि में खुद को स्वाहा कर अपने प्राण त्याग दिए। भगवान शिव को जैसे ही इसके बारे में पता चला तो वो दुखी हो गए। दुख और गुस्से की ज्वाला में जलते हुए शिव ने उस यज्ञ को ध्वस्त कर दिया। इसी सती ने फिर हिमालय के यहां जन्म लिया और वहां जन्म लेने की वजह से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌

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