जय माता राजराजेश्वरी ।।

जय माता राजराजेश्वरी ।।

जय माता दी  
जय माँ राजराजेश्वरी त्रिपुरा सुंदरी

माँ त्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ बांसवाड़ा राजस्थान ।

देवी त्रिपुरसुंदरी ब्रह्मस्वरूपा हैं, भुवनेश्वरी विश्वमोहिनी हैं। ये श्रीविद्या, षोडशी, ललिता, राज-राजेश्वरी, बाला पंचदशी अनेक नामों से जानी जाती हैं। त्रिपुरसुंदरी का शक्ति-संप्रदाय में असाधारण महत्त्व है। महात्रिपुर सुन्दरी देवी माहेश्वरी शाक्ति की सबसे मनोहर श्री विग्रह वाली सिद्घ देवी हैं।

इनकी महिमा अवर्णनीय है। संसार के समस्त तंत्र-मंत्र इनकी आराधना करते हैं। प्रसन्न होने पर ये भक्तों को अमूल्य निधियां प्रदान कर देती हैं। चार दिशाओं में चार और एक ऊपर की ओर मुख होने से इन्हें तंत्र शास्त्रों में ‘पंचवक्त्र’ अर्थात् पांच मुखों वाली कहा गया है। आप सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं, इसलिए इनका नाम ‘षोडशी’ भी है।

ये चार पायों से युक्त हैं जिनके नीचे ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर पाया बन जिस सिंहासन को अपने मस्तक पर विराजमान किए हैं उसके ऊपर सदा शिव लेटे हुए हैं और उनकी नाभी से एक कमल जो खिलता है, उस पर ये त्रिपुरा विराजमान हैं। सैकड़ों पूर्वजन्म के पुण्य प्रभाव और गुरु कृपा से इनका मंत्र मिल पाता है। किसी भी ग्रह, दोष, या कोई भी अशुभ प्रभाव इनके भक्त पर नहीं हो पाता। श्रीयंत्र का पूजन सभी के वश की बात नहीं है।

कलिका पुराण के अनुसार एक बार पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा, ‘भगवन! आपके द्वारा वर्णित तंत्र शास्त्र की साधना से जीव के आधि-व्याधि, शोक संताप, दीनता-हीनता तो दूर हो जाएगी, किन्तु गर्भवास और मरण के असह्य दुख की निवृत्ति और मोक्ष पद की प्राप्ति का कोई सरल उपाय बताइए।’

तब पार्वती जी के अनुरोध पर भगवान शंकर ने त्रिपुर सुन्दरी श्रीविद्या साधना-प्रणाली को प्रकट किया। "भैरवयामल और शक्तिलहरी" में त्रिपुर सुन्दरी उपासना का विस्तृत वर्णन मिलता है। ऋषि दुर्वासा आपके परम आराधक थे। इनकी उपासना "श्री चक्र" में होती है। आदिगुरू शंकरचार्य ने भी अपने ग्रन्थ सौन्दर्यलहरी में त्रिपुर सुन्दरी श्रीविद्या की बड़ी सरस स्तुति की है। कहा जाता है भगवती त्रिपुर सुन्दरी के आशीर्वाद से साधक को भोग और मोक्ष दोनों सहज उपलब्ध हो जाते हैं।

महात्रिपुर सुन्दरी का चित्र और श्री यंत्र को विराजमान करें  हाथ जोड़कर महात्रिपुर सुन्दरी का ध्यान करें।

ध्यान: सा काली द्विविद्या प्रोक्ता श्यामा रक्ता प्रभेदत:। श्यामा तु दक्षिणा प्रोक्ता रक्ता श्री सुन्दरी मता।।

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कामेंट्स

Nayana Patel Oct 20, 2018

⚘Radhe radhe Krishna ji ⚘subh sandya vandn. 🙇‍♀️

Flower Pranam Dhoop +15 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 8 शेयर
H.A. Patel Oct 18, 2018

Jay mata di

Pranam Bell Tulsi +39 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 2 शेयर
naval Sharma Oct 18, 2018

श्री कामाख्या माँ के श्रीमुख के दर्शन 15 वर्षों में एक बार ही होता है।
माँ का चेहरा सदा फूलों से ढका हुआ रहता है।
Zoom करके देखिए, माँ के नयन कितने जीवंत हैं, आम इंसान जैसे ही है।
सम्भव हो तो ओरो को भी माँ के दर्शन कराए ।...

(पूरा पढ़ें)
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Jagdish bijarnia Oct 18, 2018

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aman Oct 20, 2018

आज शाम के आरती दर्शन
कालका जी मंदिर दिल्ली

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Manju Patel Oct 19, 2018

Yh mandir raipur ka hai

Bell Pranam Jyot +5 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 16 शेयर

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