Ansouya M
Ansouya M Feb 26, 2021

🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश* मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी । 🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏 श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹 कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी । नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा । भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा । हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते । कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ ………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)

🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)
🌹🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 🙏🌹🙏🌹🌹जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏*शांति सन्देश*

मानवीय प्रेम , प्रेम है और हृदय का प्रेम भक्ति है । इस शरीर के खत्म हो जाने पर वह मानवीय प्रेम भी खत्म हो जाता है लेकिन जो हृदय का प्रेम है , जो भक्ति है वह शरीर खत्म भी हो जाए , फिर भी रहेगी ।

      🙏 ***प्रेम रावत***🌹🙏
श्री कृष्ण: शरणम् मम 🌹🙏🌹🌹
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। 
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

जिनके हृदय में निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्त:करण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते ॥ जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते ॥ भगवान्‌ तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं ॥ मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं ॥ 

येषां चित्ते वसेद्‌भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी ।
नते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः ॥ 
न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा ।
भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत् ॥ 
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा ।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः ॥ 
नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते ।
कलौ भक्तिः कलौ भक्तिः भक्त्या कृष्णः पुरः स्थितः ॥ 

………. (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य २|१६-१९)

+217 प्रतिक्रिया 43 कॉमेंट्स • 2 शेयर

कामेंट्स

Yashwant Kunwar { women} Feb 26, 2021
Jai mata di 🙏🌹🙏 Shubh mangalmay ho aapka aur aapke parivar ka din dear sister Ji 🙏 hare Krishna 🌹 Radhe Radhe 🙏🌹🌹🌹 god bless you 👍🍫🍫

🙋🅰NJALI 😊ⓂISHRA 🙏 Feb 26, 2021
🚩🌹शुभ शुक्रवार🌹🚩 जय माता दी प्यारी दीदी जी🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸 जिस प्रभात से,* परमात्मा का स्मरण हो जाये,* *वह प्रभात,* *सुप्रभात हो जाता है।* 🌴🌺🌸🌹🌸🌺🌴 आज आप का दिन शुभ एवं *मंगलमय हो*👌 मेरी प्यारी आदरणीय दीदी जी माता रानी आपको सुखी और स्वस्थ रखें आपके सभी मनोरथ पूर्ण करें आप हमेशा खुश रहें हंसते मुस्कुराते रहें😄🙏 जय माता दी🙏🚩

Harpal bhanot Feb 26, 2021
jai mata rani di Beautiful good morning ji my Sweet Sister

Ansouya M Feb 26, 2021
@1957nareshdodia जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 सादर शुभ दोपहर भाई जी 🙏 आप का दिन शुभ और मंगलमय हो शेरा वाली माता की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भाई जी 🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🌹🙏

Sanjay Rastogi Feb 26, 2021
jai mata di mata rani ki kripa ap aur ap ke pariwar par hamesa bani Rahe didi sader pranam

r h Bhatt Feb 26, 2021
Jai Shri Radhe Krishna Shubh dophar ji Vandana ji Jai matage

Yashwant Kunwar { women} Feb 26, 2021
जय माता दी 🌹🙏🌹 शुभ मंगलमय हो आप का हर पल प्यारी बहना जी 🙏 हरे कृष्णा 🌹 राधे राधे 🌹 शुभ दिन हो

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Feb 26, 2021
🌹जय माता दी🌹 माता रानी की कृपा दृष्टि आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहे आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहना जी 🙏 नमस्कार शुभ दोपहर जी 🌷🙏🌷

Shivsanker Shukla Feb 26, 2021
शुभ संध्या आदरणीय अनु जी जय श्री कृष्णा

🔥SOM DUTT SHARMA🔥 Feb 26, 2021
🍧🍧🍧🍧🍧🍧🍧🍧 very very sweet good evening g 🍧🍧🍧🍧🍧🍧🌹🌹🌹

Dhananjay Khanna Mar 5, 2021
Jai Mata Di 🙏🙏🙏🙏🙏 Radhey Radhey ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹 May Matarani bless you all with her choicest blessings 🚩🚩🚩🚩🚩

+17 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 8 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+114 प्रतिक्रिया 33 कॉमेंट्स • 27 शेयर
Gajendrasingh kaviya Apr 12, 2021

+18 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 19 शेयर
Gajendrasingh kaviya Apr 12, 2021

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

+11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 4 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
dhruv wadhwani Apr 12, 2021

+171 प्रतिक्रिया 36 कॉमेंट्स • 67 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB