!! भगवान विष्णू जी की आरती !!

!! भगवान विष्णू जी की आरती !!

#विष्णु जी की #आरती
त्रिदेवों में भगवान विष्णु का स्थान पालनकर्ता का है। भगवान विष्णु की आराधना कर भक्त अपने स्वस्थ जीवन और खुशहाल परिवार की कामना करते हैं।

 आरती

जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ जय जगदीश हरे

जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका।
सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ जय जगदीश हरे

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ जय जगदीश हरे

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ जय जगदीश हरे

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ जय जगदीश हरे

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमती॥ जय जगदीश हरे

दीनबन्धु, दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पडा तेरे॥ जय जगदीश हरे

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढाओ, संतन की सेवा॥ जय जगदीश हरे

जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥ जय जगदीश हरे

आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशि॥ जय जगदीश हरे

अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी।
सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥ जय जगदीश हरे

विधि-हरि-शंकर-गणपति-सूर्य-शक्तिरूपा।
विश्व चराचर तुम ही, तुम ही विश्वभूपा॥ जय जगदीश हरे

माता-पिता-पितामह-स्वामि-सुहृद्-भर्ता।
विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥ जय जगदीश हरे

साक्षी, शरण, सखा, प्रिय प्रियतम, पूर्ण प्रभो।
केवल-काल कलानिधि, कालातीत, विभो॥ जय जगदीश हरे

राम-कृष्ण करुणामय, प्रेमामृत-सागर।
मन-मोहन मुरलीधर नित-नव नटनागर॥ जय जगदीश हरे

सब विधि-हीन, मलिन-मति, हम अति पातकि-जन।
प्रभुपद-विमुख अभागी, कलि-कलुषित तन मन॥ जय जगदीश हरे

आश्रय-दान दयार्णव! हम सबको दीजै।
पाप-ताप हर हरि! सब, निज-जन कर लीजै॥ जय जगदीश हरे

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Raj Rani Bansal Nov 25, 2020

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Adhikari Molay Nov 25, 2020

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(((( किसका भरोसा करोगे.! )))) 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एक युवक ने आकर अपने गुरु को कहा, अब बहुत हो गया, मैं जीवन छोड़ देना चाहता हूं। . लेकिन पत्नी है, बच्चा है, घर-द्वार है। गुरु ने कहा, तेरे बिना वे न हो सकेंगे? . उसने कहा कि ऐसा तो कुछ नहीं है, सब सुविधा है, मेरे बिना हो सकेंगे। . लेकिन मुझे लगता है ऐसा कि मैं मर जाऊंगा तो मेरी पत्नी जी न सकेगी, मेरे बच्चे मर जाएंगे। इतना उनका प्रेम है मेरे प्रति। . उस फकीर ने कहा, फिर ऐसा कर, कुछ दिन यह श्वास की विधि है, इसका अभ्यास कर, फिर आगे देखेंगे। . श्वास की विधि उसने अभ्यास की। विधि ऐसी थी कि अगर तुम थोड़ी देर के लिए श्वास साधकर पड़ जाओ, तो मरे हुए मालूम पड़ो। . फिर उस फकीर ने उसे भेजा घर कि आज सुबह तू जाकर लेट जा और मर जा; फिर आगे सोचेंगे। मैं आता हूं पीछे। . वह आदमी गया। लेट गया सांस साधकर, मर गया। मर गया मालूम हुआ। . छाती पिटाई मच गयी, रोना— धोना हुआ, बच्चे चिल्लाने लगे, पत्नी चिल्लाने लगी कि मैं मर जाऊंगी। . तभी वह फकीर आया। द्वार पर आकर उसने अपनी घंटी बजायी। . भीतर आया, उसने कहा, अरे! यह युवक मर गया? . यह बच सकता है अभी, लेकिन कोई इसके बदले में मरने को राजी हो तो। . सन्नाटा हो गया। न बेटा मरने को राजी, न बेटी मरने को राजी, न मां मरने को राजी, न बाप मरने को राजी। . फकीर ने पूछा, कोई भी तुममें से राजी हो इसकी जगह मरने को तो यह बच सकता है। . अभी यह गया नहीं है, लौटाया जा सकता है। अभी बहुत दूर नहीं निकला है, बुलाया जा सकता है। मगर किसी को तो जाना ही पड़ेगा। . पत्नी ने कहा, ‛अब यह तो मर ही गया, अब हमको और क्यों मारते हो! अब जो हो गया सो हो गया।’ . गुरु ने उस युवक से कहा, ‛अब तू अपना सास-साधना छोड़ और उठ।’ . उसने सांस-साधना छोड़ी, उठा। अब तेरा क्या खयाल है? . उसने कहा, ‛जब ये लोग कहते हैं कि मर ही गए और इनमें से कोई मेरे बदले मरने को राजी नहीं, तो मैं मर ही गया। मैं आपके पीछे आता हूं।’ . स्वभावत: उसे रोकना भी मुश्किल हुआ। पत्नी के पास कहने को कोई कारण भी न बचा। . बुद्ध ने लोगों को समझाया कि तुम जिसे जीवन कह रहे हो, तुम जिसे जीवन का लगाव कहते हो, तुमने जीवन में जो आसक्ति के बहुत से घर बनाए हैं... . मोह के बहुत ताने बाने बुने हैं, तंबू लगाए हैं, उनको जरा गौर से तो देखो, पानी के बबूले हैं। क्षणभंगुर हैं। . कोई यहां किसी का साथी नहीं, कोई यहां किसी का संगी नहीं। तुम ही अपनी देह का भरोसा नहीं कर सकते और किसका भरोसा करोगे! 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

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Sunil Sharma Nov 25, 2020

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Rohet Rohetkashyp Nov 25, 2020

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Adhikari Molay Nov 25, 2020

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Ramesh Agrawal Nov 25, 2020

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