Rakesh Kumar Gupta
Rakesh Kumar Gupta Jun 10, 2018

Satya bachan

Satya bachan

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Aryan Phulwani Aug 5, 2020

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🪔🪔🪔🪔🪔 *दीप प्रज्वलन मंत्र...* दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। *मंत्र का अर्थ :* दीपक की ज्योति ही ब्रह्मा व परमेश्वर है। पाप का नाश करने वाली दीपक की ज्योति को मेरा नमस्कार। कल्याण करने वाले शत्रु के भय को खत्म करने और घर में सुख समृद्धि का वास करने वाली ज्योति को मेरा प्रणाम। 🔥🔥🔥🔥🔥 *मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के लाभ :* मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के कई लाभ है जिसमें से कुछ हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं जो इस प्रकार हैं - 👉दीपक से अंधकार का नाश होता ही है, साथ ही घर में उपस्थित नकारात्मक शक्ति का भी अंत होता है 👉घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार 👉घर में रहने वाले लोगों की बुद्धि में अच्छे विचार जन्म लेते हैं 👉घर में सुख समृद्धि का वास होता है *देश के प्रधानमंत्री ने जनता से की अपील...* *आओ मिल के दीप जलाएँ...* 👉 बुधवार 👉 5 अगस्त 2020 👉 संध्याकालीन 7बजे 👉 आओ मिल के दीप जलाएँ... 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम🌹🌷🚩🌹 मैं दीप अवश्य जलाऊँगा एक दीप आशा का एक विश्वास का एक ज्ञान का एक प्रकाश का एक तम में उजाले का एक भूखे के निवाले का , एक बेसहारे के सहारे का एक डूबते के किनारे का | एक जन-जन की वाणी का , एक मानव की नादानी का | स्नेह मानवता का लाऊँगा, हाँ ! मैं दीया अवश्य जलाऊँगा| 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम्🌹🌷🚩🌹 दीप जलाकर दें सखे,राष्ट्र भक्ति संदेश। जीवन का उजियार ये,जीवन का उपदेश।। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 👉सामान्य दूरी बनाए रखें.... ************************************************* *जानिए क्‍यों खास है पांच अगस्‍त को अयोध्‍या में शिलान्‍यास* 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 *अयोध्‍या में भगवान श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की तिथि निश्चित हो चुकी है। यह स्वर्णिम दिवस है भाद्रपद कृष्ण द्वितीया संवत 2077, तदनुसार पांच अगस्त सन 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा यह ऐतिहासिक शिलान्यास मध्यान्ह 12:15 बजे अभिजित मुहूर्त में होगा। *लेकिन पूरे देश के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि पांच अगस्‍त को ही मुहूर्त क्‍यों हो रहा है। इसके पीछे क्‍या कारण है और यदि इस दिन मुहूर्त होता है तो देश को इसका क्‍या लाभ मिलने वाला है ? *इसका विश्‍लेषण किया है। जानिए पांच अगस्‍त को शिलान्‍यास क्‍यों खास है और इसका क्‍या लाभ मिलने जा रहा है। ज्‍योतिषीय दृष्‍टिकोण से यह मुहूर्त बहुत ही शुभ है। -चर संज्ञक लग्न तुला है जो पर्यटन की दृष्‍टि से अति उत्‍तम है। -दशम भाव में बुधादित्य योग बन रहा है जो प्रशासनिक एवं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। -इस दिन चतुर्थ भाव में स्वराशि के शनि हैं जो पंचमहापुरुष योग बना रहे हैं। यह पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्धता प्रदान करने वाला है। -इस दिन तृतीय भाव में धनु राशि में स्वराशि के गुरु एवं केतु हैं जो विश्व में आध्यात्मिक क्षेत्र में परम प्रसिद्धि योग बना रहे हैं। -बुधवार को शतभिषा नक्षत्र रहेगा जो मित्र एवं मानस योग निर्मित कर रहा है। -इस दिन अभिजित मुहुर्त है जिसे ज्‍योतिष में मौजूद समस्‍त मुहूर्तों में सर्वश्रेष्‍ठ मुहूर्त माना जाता है। -इस दिन मुहूर्त के समय सभी ग्रह स्वराशि या मित्र राशि में दृश्यमान रहेंगे। *ऐसे शुभ एवं उत्तम योगों में रखी गई नींव (शिलान्यास) हजारों वर्षों तक भारतीय संस्कृति एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को विश्व में जीवित रखेंगी। *ऐसा शुभ मुहूर्त केवल श्रीराम मंदिर के लिए ही शुभ नहीं है बल्कि जन सामान्य लोगों के लिए भी गृह निर्माण, गृह प्रवेश एवं अन्य शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम मुहुर्त है। 'राम राज्य बैठे त्रिलोका। हर्षित भयऊ गयऊ सब सोका।' *रामचरितमानस की इस चौपाई की प्रामाणिकता के आधार पर जब भी भगवान राम से संबंधित जो भी अनुष्ठान एवं निर्माण आरंभ होता है तो राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं विकास को गति मिलती है। वैसे भी ऐसे शुभ योग में मन्दिर निर्माण होने से देश की प्रगति से विश्व में यशोगान के योग बन रहे हैं। भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ *जय श्री सियाराम*🙏🚩🚩 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 *अयोध्या मे किसका मंदिर बन रहा है ?* क्या भगवान राम का ? नही, क्यूँकि वे अजन्मा हैं, शाश्वत हैं, परमात्म स्वरूप हैं, ब्रह्म हैं, सारा जगत ही उनका मंदिर है, वे सब जगह विराजमान हैं, चन्द्र तारों में सूर्य में पृथ्वी जल आकाश अंतरिक्ष मनुष्य पशु प्राणियों फूल पत्तियों और जगत के कण कण में हैं, सम्पूर्ण अयोध्या और वहाँ के अन्य मंदिरों में तो वे हैं हीं, इसलिए उन्हें मंदिर की जरूरत नही है। क्या राजा रामचन्द्र जी का ? नही राजा राम चन्द्र जी का नहीं क्यूँकि पृथ्वी पर कई राजा आये और गए, बड़े बड़े सम्राट आये और गए, सब अपने आलीशान आलीशान महलों किलों इमारतों को यहीं छोड़के चले गए जिनके कुछ अवशेष अभी भी खंडहरों के रूप में मौजूद हैं या फिर जमीनों के अंदर दफन हैं। अब उन पर सरकारों का कब्जा है और वे पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं हैं। क्या भाजपा के जय श्री राम का ? नही क्यूँकि इस मंदिर के लिए पिछले 500 सालों से अब तक लाखों लोगों ने लड़ाइयां लड़ी हैं और अपनी जानें गंवाई है, आज भी विश्वभर में करोड़ों करोड़ों गैर राजनीतिक हिंदू भी इस मंदिर को बनाने के लिए अपना अपना योगदान दे रहे हैं। और इसका बन जाने का पूर्ण हृदय से इंतजार कर रहे हैं जिसका सपना वो कई वर्षों से देखते आ रहे हैं। तो फिर ये मंदिर बन किसका रहा है ? यह मंदिर बन रहा है हिंदू अस्मिता का जिसे सैकड़ो वर्षों से रौंदा जा रहा था, हिंदू आत्म सम्मान का जिसे लगातार ठेस पहुंचाई जा रही थी, उदार हिंदुओं की गरिमा और गौरव का जिसे आतताइयों ने बेरहमी से कुचला था कभी। *यह मंदिर हिंदू पुनर्जागरण का प्रतीक है, हिंदू पुनरुत्थान की उद्घोषणा है।* हिंदू आत्म विश्वास के पुनः उठ खड़े होने का सूचक है । प्राचीन अस्त हिंदू सभ्यता के उदय होने का शंखनाद है । लाखों हिंदू -सिक्ख -जैन - बौद्ध बलिदानियों के लिए श्रद्धांजलि है ये मंदिर। ये मंदिर उन परमपिता परमेश्वर श्री राम का मंदिर है जो प्रत्येक हिंदू के हृदय में इस श्रद्धा विश्वास के रूप में विधमान थे कि एक दिन उनका भी दिन आएगा और वे पुनः अपनी खोई हुई शक्ति दर्प और स्वाभिमान को वापस प्राप्त कर लेंगे। सभी श्री राम भक्त हिंदुओं से अपील है कि वे भूमि पूजन के दिन अपने अपने घरों में रामायण का पाठ करें, धूप अगरबत्ती व दिए जलाएं, शंखनाद करें, घंटियाँ बजाएं, कीर्तन भजन करें ढोलक मृदंग चिमटा खड़ताल डमरू इत्यादि जो कुछ भी जिसके पास हो वह बजाएं। पूरी दुनियां को संदेश जाना चाहिए कि हिंदू जाग गए हैं, हिंदुओं के एक नए युग का श्री गणेश हुआ है भारत में। *राम राज बैठे त्रैलोका,* *हर्षित भये गए सब शोका* *बयरु न कर काहू सम कोई,* *राम प्रताप विषमता खोई।* *जय जय श्री सीताराम* 🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩 "!!अत्यंत ज्ञानवर्धक!!" 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की,तब उनसे किसी ने पूंछा कि बाबा! आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? क्योकि इसका नाम रामायण ही है.बस आगे पीछे नाम लगा देते है, वाल्मीकि रामायण,आध्यात्मिक रामायण.आपने राम चरित मानस ही क्यों नाम रखा? बाबा ने कहा - क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है.रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर,जब हम मंदिर जाते है तो एक समय पर जाना होता है, मंदिर जाने के लिए नहाना पडता है,जब मंदिर जाते है तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल,फल साथ लेकर जाना होता है.मंदिर जाने कि शर्त होती है,मंदिर साफ सुथरा होकर जाया जाता है. और मानस अर्थात सरोवर, सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती,समय की पाबंधी नहीं होती,जाती का भेद नहीं होता कि केवल हिंदू ही सरोवर में स्नान कर सकता है,कोई भी हो ,कैसा भी हो? और व्यक्ति जब मैला होता है, गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है.माँ की गोद में कभी भी कैसे भी बैठा जा सकता है. रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे। 1. *रक्षा के लिए* मामभिरक्षक रघुकुल नायक | घृत वर चाप रुचिर कर सायक || 2. *विपत्ति दूर करने के लिए* राजिव नयन धरे धनु सायक | भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक || 3. *सहायता के लिए* मोरे हित हरि सम नहि कोऊ | एहि अवसर सहाय सोई होऊ || 4. *सब काम बनाने के लिए* वंदौ बाल रुप सोई रामू | सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू || 5. *वश मे करने के लिए* सुमिर पवन सुत पावन नामू | अपने वश कर राखे राम || 6. *संकट से बचने के लिए* दीन दयालु विरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी || 7. *विघ्न विनाश के लिए* सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही | राम सुकृपा बिलोकहि जेहि || 8. *रोग विनाश के लिए* राम कृपा नाशहि सव रोगा | जो यहि भाँति बनहि संयोगा || 9. *ज्वार ताप दूर करने के लिए* दैहिक दैविक भोतिक तापा | राम राज्य नहि काहुहि व्यापा || 10. *दुःख नाश के लिए* राम भक्ति मणि उस बस जाके | दुःख लवलेस न सपनेहु ताके || 11. *खोई चीज पाने के लिए* गई बहोरि गरीब नेवाजू | सरल सबल साहिब रघुराजू || 12. *अनुराग बढाने के लिए* सीता राम चरण रत मोरे | अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे || 13. *घर मे सुख लाने के लिए* जै सकाम नर सुनहि जे गावहि | सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं || 14. *सुधार करने के लिए* मोहि सुधारहि सोई सब भाँती | जासु कृपा नहि कृपा अघाती || 15. *विद्या पाने के लिए* गुरू गृह पढन गए रघुराई | अल्प काल विधा सब आई || 16. *सरस्वती निवास के लिए* जेहि पर कृपा करहि जन जानी | कवि उर अजिर नचावहि बानी || 17. *निर्मल बुद्धि के लिए* ताके युग पदं कमल मनाऊँ | जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ || 18. *मोह नाश के लिए* होय विवेक मोह भ्रम भागा | तब रघुनाथ चरण अनुरागा || 19. *प्रेम बढाने के लिए* सब नर करहिं परस्पर प्रीती | चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती || 20. *प्रीति बढाने के लिए* बैर न कर काह सन कोई | जासन बैर प्रीति कर सोई || 21. *सुख प्रप्ति के लिए* अनुजन संयुत भोजन करही | देखि सकल जननी सुख भरहीं || 22. *भाई का प्रेम पाने के लिए* सेवाहि सानुकूल सब भाई | राम चरण रति अति अधिकाई || 23. *बैर दूर करने के लिए* बैर न कर काहू सन कोई | राम प्रताप विषमता खोई || 24. *मेल कराने के लिए* गरल सुधा रिपु करही मिलाई | गोपद सिंधु अनल सितलाई || 25. *शत्रु नाश के लिए* जाके सुमिरन ते रिपु नासा | नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा || 26. *रोजगार पाने के लिए* विश्व भरण पोषण करि जोई | ताकर नाम भरत अस होई || 27. *इच्छा पूरी करने के लिए* राम सदा सेवक रूचि राखी | वेद पुराण साधु सुर साखी || 28. *पाप विनाश के लिए* पापी जाकर नाम सुमिरहीं | अति अपार भव भवसागर तरहीं || 29. *अल्प मृत्यु न होने के लिए* अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा | सब सुन्दर सब निरूज शरीरा || 30. *दरिद्रता दूर के लिए* नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना | नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना || 31. *प्रभु दर्शन पाने के लिए* अतिशय प्रीति देख रघुवीरा | प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा || 32. *शोक दूर करने के लिए* नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी | आए जन्म फल होहिं विशोकी || 33. *क्षमा माँगने के लिए* अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता | क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता || इसलिए जो शुद्ध हो चुके है वे रामायण में चले जाए और जो शुद्ध होना चाहते है वे राम चरित मानस में आ जाए.राम कथा जीवन के दोष मिटाती है *"रामचरित मानस एहिनामा, सुनत श्रवन पाइअ विश्रामा"* राम चरित मानस तुलसीदास जी ने जब किताब पर ये शब्द लिखे तो आड़े (horizontal) में रामचरितमानस ऐसा नहीं लिखा, खड़े में लिखा (vertical) रामचरित मानस। किसी ने गोस्वामी जी से पूंछा आपने खड़े में क्यों लिखा तो गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस राम दर्शन की ,राम मिलन की सीढी है ,जिस प्रकार हम घर में कलर कराते है तो एक लकड़ी की सीढी लगाते है, जिसे हमारे यहाँ नसेनी कहते है,जिसमे डंडे लगे होते है,गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस भी राम मिलन की सीढी है जिसके प्रथम डंडे पर पैर रखते ही श्रीराम चन्द्र जी के दर्शन होने लगते है,अर्थात यदि कोई बाल काण्ड ही पढ़ ले, तो उसे राम जी का दर्शन हो जायेगा। *सत्य है शिव है सुन्दर है* 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

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Swami Lokeshanand Aug 4, 2020

भक्ति देवी सीताजी को, संसार के सुखों के लिए, गिरवी रख छोड़ने की बात से, यदि किन्हीं को दुख हुआ हो, कि सीताजी के लिए "गिरवी रखने" जैसा शब्द प्रयोग किया गया है, तो यह बड़ी क्रांतिकारी बात है, इसमें मुझे हैरानी नहीं है। हैरानी तो उन पर है, जिन्हें दुख नहीं हुआ। दुख होना ही चाहिए, क्योंकि सत्य यही है। रामलीला में मंचस्थ सीताजी को, अशोक वाटिका में दुखी बैठी देख कर, मुट्ठियाँ भींच कर, आँसू बहाने वाले दर्शकों को, अपने जीवन की सीताजी का, अपने प्रेम का, अपने जीवन के रावण से, मोह से, मैं और मेरे से, त्रस्त होना नहीं दिखता, यह बड़ी ही हैरानी की बात है। एक बड़ा सरल तरीका है यह जानने का कि आपका प्रेम जगत में लगा है या जगदीश में? जिसके जीवन में आनन्द है, शांति है, संतुष्टि है, अहोभाव है, उसका प्रेम जगदीश से जुड़ा है। और जिसके जीवन में दुख है, तनाव है, चिंता है, उद्वेग है, अशांति है, उहापोह है, उधेड़बुन है, भविष्य के प्रति आशंका है, काम क्रोध है, उसका प्रेम जगत से जुड़ा है। यह निर्विवाद सत्य है कि "भक्ति" और "सीताजी" पर्यायवाची शब्द हैं, इस कथन में रत्ती भर भी अतिशयोक्ति नहीं है। वास्तव में ही इस बात को समझने वाले का, कि हमने अपने जीवन में अपने प्रेम को नहीं, सीताजी को ही दाँव पर लगा रखा है, कलेजा कट जाना चाहिए, नींद उड़ जानी चाहिए, उसे तो ग्लानि से भरकर, तत्पर होकर, तुरंत प्रयास करना चाहिए। कि- "सबकी ममता ताग बटोरी। मम पद मनहिं बांधि बर डोरी॥" तत्क्षण सीताजी को संसार से मुक्त कर भगवान के चरणों में समर्पित करना चाहिए। क्योंकि यही सत्य है, यही सत्य है। मेरे कईं मित्रों की टिप्पणियों ने मुझे बहुत प्रेरणा दी है। इस प्रेरणा को "विभीषण को शरणागति" प्रसंग में उपयोग में लाने का प्रयास करूंगा। पुन: उनके लिए मेरा मन प्रफुल्लता पूर्वक अहोभाव से भर गया है, जिनको भी कल की पोस्ट से दुख हुआ। लोकेशानन्द समझता है कि उन पर भगवान की विशेष कृपा हुई है।

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Swami Lokeshanand Aug 3, 2020

हनुमानजी कंचन, कीर्ति और कामिनी रूपी बाधाओं से बचकर, सागर पार कर गए। लोग कहने लगे कि हनुमानजी ने गजब कर दिया, तो तुलसीदासजी कहते हैं कि यदि हनुमानजी ने एक ही छलांग में सागर पार कर लिया, तो इसमें क्या हैरानी है? "प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहिं। जलधि लांघि गए अचरज नाहिं॥" यह तो विचार करें कि हनुमानजी के मुख में क्या है? वह मुद्रिका आप अपने मुख में रख लें, आप भी सागर पार कर जाएँगे। हनुमानजी की विशेषता यही है कि उन्होंने अनेक बाधाएँ आने पर भी, मुख से मुद्रिका गिराई नहीं। लोग पूछते हैं- बाबा! वह मुद्रिका कौन से सुनार की दुकान से मिलेगी? हम भी ले लें। तुलसीदासजी कहते हैं- वह मुद्रिका किसी दुकान से नहीं मिलती। वह तो किसी संत से मिलती है। राम नाम ही मुद्रिका है। संकोच और कपट त्यागकर, विनय भाव से, किसी संत के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदन कर के, उन्हें अपनी सेवा से संतुष्ट कर के, यह नाम का दान पाया जाता है। लंका आई तो हनुमानजी को लंका की चमक दमक दिखाई दी। पर वह चमक हनुमानजी को बांध नहीं सकती। क्योंकि जगत के विषय नहीं बाँधते, उन विषयों के प्रति आपकी आसक्ति आपको बाँध देती है। जो जरा सा वैराग्य चढ़ते ही घर छोड़ भागते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि घर तो जड़ है, वह चेतन को कैसे बाँध सकता है? गृहासक्ति बंधनकारी है। ध्यान दें, सबके अंत:करण में भक्ति है, भक्ति विहीन कोई है ही नहीं। प्रेमस्वरूप परमात्मा का अंश, जीव, प्रेम विहीन होगा भी कैसे? अंतर केवल इतना है कि आपने वह प्रेम लगाया कहाँ है? जो प्रेम परमात्मा में लगाना था, उसे आपने स्त्री पुत्रादि में, धन सम्पत्ति में, पद प्रतिष्ठा की दौड़ में लगा रखा है। भक्तिदेवी को, श्रीसीताजी को, आपने कुछ कागज के कतरों, सोने चाँदी के ठीकरों, माँस के लोथड़ों के लिए दूसरों के पास गिरवी रख छोड़ा है। आपने उन्हें चौक चौराहों पर, बाजारों में, दो दो कौड़ियों के लिए, नुमाइश पर लगा रखा है। यही प्रेम यदि परमात्मा में लगा दिया जाता तो भक्ति बन जाता, संसार में लगकर आसक्ति बन गया है। यही प्रेम आसक्ति बनकर आपको दुख, चिंता, उद्वेग, जन्म मरण के बंधन में डाल रहा है। यही प्रेम यदि पुन: भगवान से लगा दें, तो यह आपकी मुक्ति का हेतु बन सकता है। यह नियम है कि जिससे प्रेम होता है, उसे याद करना नहीं पड़ता, उसकी याद अपने आप आती है। यदि आपका प्रेम का पात्र बदल जाए, तो लक्ष्य विस्मृति कैसे हो? मुद्रिका कैसे गिरे? नाम कैसे छूटे? जगत की चमक दमक लक्ष्य से कैसे भटका दे? विडियो-प्रभु मुद्रिका- https://youtu.be/70mHorKLWgs

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RANJAN ADHIKARI Aug 4, 2020

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Shanti Pathak Aug 5, 2020

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Gopal Jalan Aug 5, 2020

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